चीन और रूस के सहारे उत्तर कोरिया को बाजार सुधारों के बिना उबरने की गुंजाइश

पढ़ने में 13 मिनट
China and Russia Give North Korea Room to Recover Without Market Reform

विकास लौटा, लेकिन सुधारों का दबाव कमजोर

उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था 2025 में अनुमानित 3.5% बढ़ी, जबकि मई 2026 तक चावल की कीमतें मई 2024 के स्तर से 5.2 गुना हो गईं। ये दोनों आंकड़े देश के सामने मौजूद केंद्रीय समस्या को दर्शाते हैं: चीन और रूस के साथ करीबी संबंधों से उत्पादन को उबरने में मदद मिल रही है, लेकिन आम परिवारों का खर्च तेजी से बढ़ रहा है।

विषय-सूची
  1. विकास लौटा, लेकिन सुधारों का दबाव कमजोर
  2. चीन रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था का मुख्य सहारा
  3. रूस सामान्य व्यापार से परे संसाधन देता है
  4. अधिक संसाधनों से सुधार की गुंजाइश क्यों घट सकती है
  5. पार्टी की योजना में रक्षा सर्वोपरि
  6. परिवारों के लिए सुधार की तस्वीर अलग
  7. ऊर्जा और प्रतिबंध आगे की राह में बाधा
  8. सियोल को दिखता है सुधार और सौदेबाजी की बढ़ती गुंजाइश
  9. मुख्य बिंदु

स्टिमसन सेंटर की वरिष्ठ फेलो राचेल मिनयॉन्ग ली ने 22 अक्टूबर 2026 को उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था पर आयोजित एक मंच में कहा कि यही बाहरी समर्थन नेतृत्व के लिए कारोबारों और व्यक्तियों को अधिक आर्थिक स्वतंत्रता देने की प्रेरणा घटा सकता है। जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर कोरियन स्टडीज ने इस कार्यक्रम की मेजबानी की।

ली की दलील प्योंगयांग के सामने मौजूद विकल्पों से जुड़ी है। यदि चीन और रूस पर्याप्त संसाधन, राजस्व और उपकरण मुहैया कराते हैं, तो उत्तर कोरिया उत्पादन और व्यापार पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखते हुए कुछ आर्थिक विकास कर सकता है। ऐसे में नेतृत्व के पास उन राजनीतिक रूप से संवेदनशील बदलावों को स्वीकार करने की वजह कम रह जाती है, जिनसे लोगों को अपनी आजीविका पर अधिक अधिकार मिलेगा।

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने भी आकलन किया है कि मंदी के बाद उत्तर कोरिया अब आर्थिक सुधार के दौर में दाखिल हो गया है। 2026 से 2030 तक अंतर-कोरियाई संबंधों के लिए उसकी योजना इस सुधार को मॉस्को के साथ करीबी सहयोग और बीजिंग के साथ व्यावहारिक संबंध बहाल करने के प्रयासों से जोड़ती है।

आर्थिक लाभ और उनकी सीमाओं की पड़ताल अमेरिका के कोरिया इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट के आर्थिक सुधार संबंधी विश्लेषण में की गई है। इसे संस्थान के गैर-निवासी विशिष्ट फेलो रान्डल एस. जोन्स ने लिखा है। बैंक ऑफ कोरिया के अनुमानों का हवाला देते हुए जोन्स हथियारों के रूसी उत्पादन और चीन के साथ व्यापार को विकास के मुख्य स्रोत बताते हैं। उनका आकलन महंगाई, ऊर्जा की कमी और रक्षा प्राथमिकताओं को टिकाऊ सुधार की राह में बाधा भी मानता है।

विज्ञापन

चीन रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था का मुख्य सहारा

उत्तर कोरिया के व्यापार के स्वरूप में चीन का महत्व साफ दिखता है। जोन्स के विश्लेषण के अनुसार, 2024 में उत्तर कोरिया के आधिकारिक व्यापार में चीन की हिस्सेदारी 98% थी। इस संकेंद्रण से कारखानों, दुकानों और परिवारों को आपूर्ति देने में बीजिंग की भूमिका असाधारण रूप से बड़ी हो जाती है।

ली ने कहा कि चीन के साथ व्यापार बहाल होने से उत्तर कोरिया को औद्योगिक कच्चे माल, उपभोक्ता वस्तुओं और उपकरणों तक बेहतर पहुंच मिलती है। कच्चा माल उत्पादन में काम आता है, मशीनरी कारखानों को चलाने में मदद करती है और आयातित उपभोक्ता वस्तुएं सीधे लोगों तक पहुंचती हैं। चीन तेल और ईंधन उत्पादों की आपूर्ति भी जारी रखे हुए है।

दोनों पड़ोसियों के बीच व्यापार 2019 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, हालांकि जोन्स के मुताबिक यह 2014 के शिखर का करीब आधा ही है। यह तुलना महामारी के दौर से उबरने के पैमाने और पिछले व्यापार स्तरों तक पहुंचने की दूरी, दोनों को दिखाती है।

योजना के तहत बनाया गया नया परिवहन मार्ग इस रिश्ते को ठोस रूप देता है। चीन और उत्तर कोरिया ने एक दशक से अधिक की देरी के बाद दानदोंग और सिनुइजू को जोड़ने वाले नए यालू नदी पुल के उद्घाटन की तारीख 15 अक्टूबर तय की। यह पुल 3,026 मीटर लंबा है और इसमें चार लेन हैं। शुरुआत में इस मार्ग से माल ढुलाई पर जोर रहने की उम्मीद थी।

उत्तर कोरिया के उत्पादकों के लिए आपूर्ति तक पहुंच से उत्पादन की तात्कालिक समस्या दूर हो सकती है, लेकिन इससे यह नहीं बदलता कि कारखाने पर नियंत्रण किसका है। ली की दलील का यही केंद्रीय बिंदु है: किसी कारोबार को ज्यादा सामग्री मिल सकती है और वह अधिक माल बना सकता है, फिर भी वह राज्य के फैसलों के अधीन रह सकता है।

रूस सामान्य व्यापार से परे संसाधन देता है

रूस और उत्तर कोरिया के आर्थिक संबंध छोटे आधार से तेजी से बढ़े हैं। 2022 में दोनों देशों के बीच आधिकारिक व्यापार महज 3.8 मिलियन डॉलर था, जो उस साल उत्तर कोरिया के कुल व्यापार का करीब 0.2% था। 2023 में यह नौ गुना बढ़ा और 2024 में इसमें 54% की और वृद्धि हुई।

सैन्य सहयोग से संसाधनों का एक और, कम पारदर्शी स्रोत मिलता है। उत्तर कोरिया ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध में मदद के लिए गोला-बारूद की आपूर्ति की है और 10,000 से काफी अधिक सैनिक भेजे हैं। खबरों के मुताबिक, बदले में मॉस्को ने सैन्य तकनीक, ईंधन और खाद्य सामग्री भेजी है। इस लेन-देन का बड़ा हिस्सा नकदी के बजाय वस्तुओं और सहायता के जरिए हुआ है।

विज्ञापन

ली ने कहा कि रूस के साथ सहयोग से परिवहन और लॉजिस्टिक्स यानी माल की ढुलाई और भंडारण के क्षेत्र में भी अवसर पैदा होते हैं। इन माध्यमों से प्योंगयांग को चीन के साथ अपने पारंपरिक व्यापार संबंधों से इतर संसाधन मिलते हैं।

उत्तर कोरिया के तकनीशियनों को औद्योगिक अनुभव भी हासिल हो सकता है। 14 अक्टूबर के एक अध्ययन में देखा गया कि रूसी ड्रोन निर्माण परिसर अलाबुगा में काम से उत्तर कोरियाई कर्मियों को असेंबली लाइन और युद्धकालीन उत्पादन में किए गए बदलावों की जानकारी कैसे मिल सकती है। ऐसा अनुभव हथियार निर्माताओं को उत्पादन व्यवस्थित करने और नए डिजाइन अपनाने में मदद कर सकता है।

सैन्य आदान-प्रदान का मूल्य और उससे मिलने वाले लाभ का कितना हिस्सा नागरिक उद्योगों तक पहुंचता है, यह स्पष्ट नहीं है। ली ने आगाह किया कि रूस के जरिए हासिल राजस्व, तकनीक और उत्पादन अनुभव सैन्य गतिविधियों तक ही सीमित रह सकते हैं, न कि व्यापक नागरिक अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में काम आएं।

अधिक संसाधनों से सुधार की गुंजाइश क्यों घट सकती है

उत्तर कोरिया के नेतृत्व के सामने राज्य के निर्देशन में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने और उद्यमों को फैसले लेने की अधिक स्वतंत्रता देने के बीच विकल्प है। ली ने दलील दी कि चीन और रूस का समर्थन पहले विकल्प को अधिक व्यावहारिक बनाता है।

इस संदर्भ में बाजार सुधारों का अर्थ है कारोबारों और व्यक्तियों को यह तय करने की अधिक गुंजाइश देना कि क्या उत्पादन करना है, आपूर्ति कहां से लेनी है और कमाई का इस्तेमाल कैसे करना है। ऐसी स्वतंत्रता उत्पादकों को मांग के अनुसार काम करने में मदद कर सकती है, लेकिन इससे फैसले लेने का कुछ अधिकार राज्य से हट जाता है।

ली ने कहा कि नेतृत्व पहले से ही राज्य के उद्देश्यों के अनुरूप चुनिंदा बाजार तंत्र और कारोबारों को फैसले लेने की कुछ स्वतंत्रता देता है। शासन का मूल सिद्धांत केंद्रीय नियंत्रण ही है: काम करने की गुंजाइश अधिकारियों की तय प्राथमिकताओं के भीतर दी जाती है।

राज्य संस्थानों के जरिए काम करने वाले निजी उद्यमियों पर नीतिगत बदलावों का खास असर पड़ सकता है। खबरों के मुताबिक, नवंबर 2025 में अधिकारियों ने राज्य की इमारतों का इस्तेमाल कर रहे निजी कारोबारों को आधिकारिक राज्य अर्थव्यवस्था में शामिल करने का आदेश दिया। इससे सार्वजनिक कारखानों या खुदरा दुकानों में चल रही गतिविधियां सीधे सरकारी प्रशासन के अधीन आ जाएंगी।

नियंत्रण कड़ा होने के साथ-साथ छोटे पैमाने पर बाजार गतिविधियां जारी रही हैं। शोधकर्ता पीटर वार्ड के अनुसार, 2022 और 2023 में कृषि कानूनों में हुए बदलावों से संकेत मिलता है कि किसानों से अनाज उत्पादन का एक हिस्सा राज्य को बेचने की अपेक्षा है, जबकि उत्पादन और निवेश के कुछ फैसले वे खुद कर सकते हैं। इस तरह उत्तर कोरिया का तरीका चुनिंदा लचीलेपन को बड़े आर्थिक कामकाज पर ज्यादा नियंत्रण के साथ जोड़ता है।

विज्ञापन

पार्टी की योजना में रक्षा सर्वोपरि

फरवरी 2026 में उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी की नौवीं कांग्रेस ने सक्रिय विकास कार्यक्रम पेश किया, लेकिन केंद्रीय प्रबंधन और रक्षा को प्राथमिकता बरकरार रखी। ली ने इस मेल को इस बात का संकेत बताया कि आर्थिक महत्वाकांक्षा के साथ बाजार की स्वायत्तता पर पाबंदियां जारी रह सकती हैं।

कांग्रेस ने 2021 से 2025 की आर्थिक योजना को पूरा घोषित किया। पांच साल पहले, पार्टी की आठवीं कांग्रेस ने माना था कि 2016 से 2020 की योजना नाकाम रही। मार्च 2026 में किम जोंग उन ने 2030 तक चलने वाली नई योजना के दौरान औद्योगिक उत्पादन को शुरुआती स्तर से करीब 1.5 गुना, यानी लगभग 50%, बढ़ाने का लक्ष्य रखा।

यह घटनाक्रम हालिया सुधार को उत्पादन दोबारा खड़ा करने की लंबी कोशिश के संदर्भ में रखता है:

  • 2024: उत्तर कोरिया ने अपना 20×10 क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत 10 साल तक हर साल 20 शहरों और काउंटियों में आधुनिक कारखाने बनाने का लक्ष्य है।
  • 2025: जोन्स के हवाले से बैंक ऑफ कोरिया के आंकड़ों के मुताबिक, अर्थव्यवस्था अनुमानित 3.5% बढ़ी।
  • फरवरी 2026: पार्टी की नौवीं कांग्रेस ने नए विकास लक्ष्य तय करते हुए केंद्रीय नियंत्रण बरकरार रखा।
  • मार्च 2026: किम ने 2030 में समाप्त होने वाली योजना के लिए औद्योगिक उत्पादन का लक्ष्य घोषित किया।
  • 22 अक्टूबर 2026: ली ने दलील दी कि मजबूत बाहरी समर्थन से बाजार सुधारों के प्रोत्साहन कमजोर हो सकते हैं।

उत्तर कोरिया के नेता किम ने मार्च में सुप्रीम पीपुल्स असेंबली को संबोधित करते हुए अपनी प्राथमिकताएं बताईं। जोन्स के विश्लेषण में उनके इस बयान का हवाला दिया गया है:

हमारी विकास रणनीति की शैली बिल्कुल सही थी, क्योंकि हमने अपनी सुरक्षा की गारंटी हासिल करने को प्राथमिकता देते हुए और अपने परमाणु बलों को मजबूत करने की नीति पर लगातार चलते हुए राज्य और अर्थव्यवस्था के विकास के लिए बड़े प्रयास किए।

कारखाने, आवास, स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण जीवन-स्थितियां विकास एजेंडे में शामिल हैं। बिजली, उपकरण और कुशल श्रमिकों समेत संसाधनों के लिए रक्षा खर्च को इन लक्ष्यों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।

परिवारों के लिए सुधार की तस्वीर अलग

जोन्स लिखते हैं कि मई 2024 से मई 2026 के बीच उत्तर कोरिया की वॉन मुद्रा का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मूल्य करीब तीन-चौथाई गिर गया। कमजोर मुद्रा में एक डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा वॉन की जरूरत होती है, जिससे आयातित सामान स्थानीय मुद्रा में महंगा हो जाता है।

विज्ञापन

इसी अवधि में चावल की कीमतें 5.2 गुना बढ़ीं। सीधे शब्दों में कहें तो शुरुआत में 100 वॉन का चावल अंत तक 520 वॉन का हो गया। यह 420% की वृद्धि है, जो उन परिवारों पर भारी दबाव डालती है जिनकी आमदनी इसके अनुरूप नहीं बढ़ी।

जोन्स मुद्रा पर दबाव की एक वजह 2023 के अंत से शुरू हुई आधिकारिक सरकारी वेतन में बड़ी, लेकिन असमान वृद्धि को मानते हैं। विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ी, वहीं विदेशी मुद्रा लेन-देन और बाजार गतिविधियों पर कड़े नियंत्रणों ने इसकी उपलब्धता सीमित कर दी। खाद्य और आयात की बढ़ती कीमतों ने लोगों की खरीदने की क्षमता में गिरावट को और गंभीर बनाया।

बैंक ऑफ कोरिया के अनुमान लगातार तीन साल 3% से अधिक वृद्धि दिखाते हैं और उत्पादन 2017 के स्तर से ऊपर निकल गया है। लेकिन रोजमर्रा के जीवन के लिए उत्पादन का स्वरूप मायने रखता है। हथियार निर्माण बढ़ने से आर्थिक उत्पादन बढ़ता है, जबकि परिवारों को किफायती भोजन, भरोसेमंद ऊर्जा और आसानी से उपलब्ध उपभोक्ता वस्तुओं की जरूरत है।

उत्तर कोरिया के आर्थिक आंकड़ों को लेकर काफी अनिश्चितता भी है। बैंक ऑफ कोरिया उत्पादन का अनुमान दक्षिण कोरियाई कीमतों और उत्पादन के दौरान जोड़े गए मूल्य के अनुपातों के आधार पर लगाता है। उत्तर कोरिया ने 1960 के दशक के बाद से नियमित राष्ट्रीय लेखा आंकड़े प्रकाशित नहीं किए हैं और विभिन्न क्षेत्रों में कीमतें तथा आपूर्ति बहुत अलग-अलग हैं। विकास के आंकड़े राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधि का अनुमान देते हैं; परिवारों की स्थिति समझने के लिए वेतन, कीमतों और वस्तुओं तक पहुंच पर भी ध्यान देना जरूरी है।

ऊर्जा और प्रतिबंध आगे की राह में बाधा

किम ने मार्च 2026 के अपने संबोधन में बिजली, कोयले और भ्रष्टाचार को विकास की बाधाएं बताया। ये चुनौतियां तब भी अहम रहती हैं जब विदेशी साझेदार ज्यादा सामग्री दें: कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदलने के लिए कारखानों को भरोसेमंद बिजली चाहिए।

जोन्स का विश्लेषण बताता है कि कोयला उत्पादन घटने से खनन क्षेत्र की वृद्धि धीमी हुई है। ताप विद्युत उत्पादन घटने के साथ बिजली, गैस और पानी का उत्पादन भी गिरा है। उत्तर कोरिया में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत दक्षिण कोरिया के स्तर के 7% से भी कम है। इससे घरों और उद्योगों के लिए उपलब्ध सीमित ऊर्जा का अंदाजा मिलता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध वित्त, निवेश और औपचारिक व्यापार पर रोक जारी रखते हैं। 12 अक्टूबर को लगाए गए हालिया सहयोग पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के निशाने पर उत्तर कोरिया का एक मिसाइल तकनीशियन, उत्तर कोरियाई कामगारों को रोजगार देने वाले रूसी कारोबार और उत्तर कोरिया तक रूसी ईंधन पहुंचाने के आरोपी एक शिपिंग कंपनी थे।

उत्तर कोरिया की आम व्यापार से इतर आय के स्रोत भी हैं। साइबर अपराध और क्रिप्टोकरेंसी की चोरी से 2025 में 2 अरब डॉलर से अधिक कमाई का अनुमान है। रूस और चीन से सहायता तथा आदान-प्रदान के साथ-साथ यह राजस्व भी राज्य को अपनी प्राथमिकताओं के लिए अतिरिक्त साधन देता है।

विज्ञापन

सियोल को दिखता है सुधार और सौदेबाजी की बढ़ती गुंजाइश

दक्षिण कोरिया का एकीकरण मंत्रालय उत्तर कोरिया के सुधार को व्यापक कूटनीतिक रणनीति से जोड़ता है। 2026 से 2030 की उसकी योजना, जिसे नेशनल असेंबली की विदेश मामलों और एकीकरण समिति को सौंपा गया, रूस के साथ सहयोग को गठबंधन जैसा बताती है, जिसमें उन्नत हथियार और तकनीक का हस्तांतरण शामिल है।

मंत्रालय का कहना है कि प्योंगयांग चीन के साथ व्यावहारिक संबंध बहाल करने की भी कोशिश कर रहा है। उसका आकलन है कि उत्तर कोरिया चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ पारंपरिक साझेदारों के साथ कूटनीति का इस्तेमाल अपनी कार्रवाई की स्वतंत्रता और सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने के लिए कर रहा है।

सियोल की योजना शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, आपसी विकास की नींव और युद्ध तथा परमाणु हथियारों से मुक्त कोरियाई प्रायद्वीप का लक्ष्य रखती है। ली के आकलन से संकेत मिलता है कि उबरते उत्तर कोरिया के पास घरेलू नियंत्रण ढीले करने या किसी अलग नीतिगत राह से संसाधन जुटाने की आर्थिक वजह कम हो सकती है।

हालांकि, ली ने चुनिंदा उद्योगों में गतिविधियां बहाल करने और पूरी अर्थव्यवस्था में टिकाऊ सुधार के बीच फर्क किया। चीन और रूस के संसाधनों तक बेहतर पहुंच से उत्पादन को उबरने में मदद मिल सकती है। लेकिन मौजूदा संस्थागत ढांचे में उत्पादकता यानी उपलब्ध श्रम और उपकरणों से होने वाले उत्पादन को लगातार बढ़ाना और जीवन स्तर सुधारना अधिक कठिन होगा।

मुख्य बिंदु

  • अमेरिका के कोरिया इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट के हवाले से बैंक ऑफ कोरिया के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था अनुमानित 3.5% बढ़ी।
  • राचेल मिनयॉन्ग ली का कहना है कि चीन और रूस के साथ मजबूत संबंध कारोबारों और व्यक्तियों को अधिक स्वायत्तता देने की प्रेरणा घटा सकते हैं।
  • 2024 में उत्तर कोरिया के आधिकारिक व्यापार में चीन की हिस्सेदारी 98% थी, जबकि रूस के साथ सैन्य सहयोग से अतिरिक्त संसाधन और तकनीक मिलती है।
  • 2026 से 2030 की योजना में केंद्रीय नियंत्रण और रक्षा प्राथमिकताओं को बरकरार रखते हुए औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य है।
  • मई 2024 से मई 2026 के बीच वॉन का डॉलर के मुकाबले मूल्य करीब तीन-चौथाई गिरा और चावल की कीमतें 5.2 गुना बढ़ीं।
  • ऊर्जा की कमी, प्रतिबंध और बाजार गतिविधियों पर पाबंदियां सुधार का लाभ परिवारों तक पहुंचाने की कोशिशों में बाधा हैं।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है