शोध को औद्योगिक विकास में बदलने की योजना में चीन ने कंपनियों को केंद्र में रखा

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China Puts Companies at Centre of Plan to Turn Research Into Industrial Growth

प्रयोगशाला से बाजार तक का सफर कंपनियां तय करेंगी

चीन ने वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक उत्पादन के करीब लाने के लिए 17 उपाय जारी किए हैं। इनके तहत शोध की प्राथमिकताएं चुनने, परियोजनाओं का नेतृत्व करने और खोजों को उत्पादों में बदलने में कंपनियों की भूमिका बढ़ाई जाएगी। 21 अक्टूबर, 2026 को जारी नीति में विश्वविद्यालयों से यह भी कहा गया है कि वे छोटी कंपनियों को लाइसेंस शुल्क का भुगतान करने से पहले शोध के नतीजों का इस्तेमाल करने दें।

विषय-सूची
  1. प्रयोगशाला से बाजार तक का सफर कंपनियां तय करेंगी
  2. शोध परियोजनाओं की बाजार में उपयोगिता की कड़ी कसौटी होगी
  3. छोटी कंपनियां भुगतान से पहले तकनीक का इस्तेमाल कर सकेंगी
  4. चिप, मशीनरी और भविष्य के उद्योग साझा एजेंडे में
  5. मौजूदा कारखाने और खेत भी योजना का हिस्सा
  6. निजी और सरकारी कंपनियों को अलग-अलग सहायता
  7. तकनीक के जीवनचक्र के साथ चलेगा वित्तपोषण
  8. शोधकर्ता और विद्यार्थी उद्योग के करीब आएंगे
  9. बाजार तक पहुंच, पेटेंट और मूल्यांकन नियमों में एक साथ बदलाव
  10. छिंगदाओ ने स्थानीय सहायता के आंकड़े दिए
  11. यहां तक कैसे पहुंची नीति
  12. मुख्य बातें

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस और राज्य परिषद के जनरल ऑफिस ने वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार तथा औद्योगिक नवाचार के गहरे एकीकरण को बढ़ावा देने संबंधी राय जारी की। इसकी प्राथमिकताओं में एकीकृत सर्किट और औद्योगिक मशीनरी से लेकर क्वांटम तकनीक, परमाणु संलयन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक शामिल हैं।

व्यवसायों के लिए सबसे ठोस प्रस्तावों में धन, उपकरण और ग्राहकों तक पहुंच शामिल है: छोटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए शोध पर अधिक कर कटौती, प्रमुख वैज्ञानिक सुविधाओं तक पहुंच और बड़ी कंपनियों तथा स्थानीय सरकारी परियोजनाओं के जरिए उत्पादों के परीक्षण के अवसर।

वित्तीय सहायता की व्यवस्था कैसे की जा सकती है, इसका स्थानीय उदाहरण छिंगदाओ है। वहां के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ब्यूरो ने 2027 की परियोजनाओं के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। प्रत्येक प्रमुख प्रौद्योगिकी परियोजना को 50 लाख युआन तक की सहायता मिल सकती है। नगर निकाय से मिलने वाली राशि परियोजना के कुल निवेश के 50% तक सीमित है।

राष्ट्रीय दस्तावेज में आठ खंड हैं और उसकी क्रमांकित पहलें छह ठोस नीतिगत क्षेत्रों में बांटी गई हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को जोड़ना है: किसी औद्योगिक समस्या की पहचान करना, शोध के लिए धन देना, नतीजे का परीक्षण करना और उपयोगी उत्पाद को उत्पादन तक पहुंचाना। चीन इस लक्ष्य को नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियों के विकास के रूप में बताता है। इसका अर्थ है तकनीकी प्रगति, बेहतर उत्पादन विधियों और संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग से संचालित विकास।

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शोध परियोजनाओं की बाजार में उपयोगिता की कड़ी कसौटी होगी

राष्ट्रीय विज्ञान कार्यक्रमों के कई चरणों में कंपनियों का प्रभाव बढ़ेगा। नीति में कारोबारी जरूरतों को नियमित रूप से जुटाने और शोध दिशा-निर्देश तैयार करने, परियोजनाएं चुनने तथा नतीजों का मूल्यांकन करने में कंपनियों और उद्यम पूंजी संस्थानों के विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया गया है।

जिन राष्ट्रीय विज्ञान परियोजनाओं का औद्योगिक उपयोग स्पष्ट हो, उनका नेतृत्व सिद्धांत रूप में कंपनियों को करना चाहिए। वे अपने नतीजों के व्यावसायिक उपयोग की दिशा भी तय करेंगी। विश्वविद्यालय, शोध संस्थान और उपयोगकर्ता इसमें भाग लेते रहेंगे, जबकि शोध लक्ष्यों को उत्पादन की जरूरतों से जोड़ने की अधिक जिम्मेदारी व्यवसायों की होगी।

परियोजनाओं के वित्तपोषण में तय पड़ावों और चरणबद्ध भुगतान का अधिक इस्तेमाल होगा। व्यावहारिक रूप से, पूरी परियोजना के अंत में ही उसका मूल्यांकन करने के बजाय सहमत चरण पूरे करने पर टीम को धन मिल सकता है। मूल्यांकन में शोध उपलब्धियों के साथ औद्योगिक उपयोग की दिशा में हुई प्रगति भी देखी जाएगी।

प्रमुख राष्ट्रीय इंजीनियरिंग परियोजनाओं और औद्योगिक विकास कार्यक्रमों के साथ शोध कार्य भी नियोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य किसी परियोजना की व्यापक विकास योजनाएं तैयार करते समय उसमें जरूरी तकनीक की पहचान करना है।

छोटी कंपनियां भुगतान से पहले तकनीक का इस्तेमाल कर सकेंगी

विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे छोटी और सूक्ष्म कंपनियों को ऐसी व्यवस्था के तहत शोध के नतीजों का लाइसेंस दें, जिसमें भुगतान से पहले उनका इस्तेमाल किया जा सके। इससे सीमित नकदी वाली कंपनी के लिए किसी तकनीक को आजमाने की शुरुआती लागत घट सकती है।

शोध संस्थानों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यालय या विशेषज्ञ पद स्थापित करने में सहायता दी जाएगी। इनके काम में बौद्धिक संपदा सेवाएं, व्यवसायों को शुरुआती मदद और वित्तपोषण में सहायता शामिल होगी। शोध के नतीजे बिक्री, लाइसेंस या किसी कंपनी में हिस्सेदारी के रूप में मूल्यांकित योगदान के जरिए व्यवसायों तक पहुंच सकते हैं।

शोधकर्ताओं को इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय बने रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। दस्तावेज में नौकरी के दौरान हुई खोजों पर उनके अधिकारों और उन शोध परिसंपत्तियों के प्रबंधन के तरीके से जुड़े सुधारों का भी आह्वान किया गया है।

साझा परीक्षण सुविधाएं खोज और उत्पादन के बीच की एक और दूरी पाटेंगी। प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट केंद्र जांचेंगे कि कोई विचार काम कर सकता है या नहीं, जबकि पायलट प्लेटफॉर्म यह परखेंगे कि कोई प्रक्रिया बड़े पैमाने पर चल सकती है या नहीं। ये अलग-अलग काम हैं: प्रयोगशाला में सफल प्रयोग के बाद भी भरोसेमंद उत्पाद बनाने के लिए उत्पादन की कारगर विधि जरूरी होती है।

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चिप, मशीनरी और भविष्य के उद्योग साझा एजेंडे में

एकीकृत सर्किट, औद्योगिक मशीन टूल, उन्नत उपकरण, उन्नत सामग्री और जैव-विनिर्माण को प्रमुख तकनीकों में सफलता हासिल करने की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। मशीन टूल वे उपकरण हैं जिनसे दूसरी मशीनें और सटीक पुर्जे बनाए जाते हैं। जैव-विनिर्माण में सामग्री या अन्य वस्तुओं के उत्पादन के लिए जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग होता है।

नीति उत्पादन शृंखला के अगले चरणों की कमजोरियों पर भी ध्यान देती है। इनमें बुनियादी पुर्जे, जरूरी सॉफ्टवेयर, आधारभूत सामग्री और विनिर्माण प्रक्रियाएं शामिल हैं। लक्ष्य उन तकनीकों और सामग्रियों पर घरेलू नियंत्रण बढ़ाना है जिन पर औद्योगिक उत्पादन निर्भर करता है।

नई ऊर्जा, नई सामग्री और एयरोस्पेस को विस्तार के लिए रणनीतिक उभरते उद्योगों के रूप में चिन्हित किया गया है। स्थानीय सरकारों से अपनी क्षमताओं के अनुरूप औद्योगिक समूह विकसित करने को कहा गया है, ताकि अलग-अलग क्षेत्र एक-दूसरे की पूरक क्षमता से योगदान दे सकें।

लंबी अवधि की प्राथमिकताओं में क्वांटम तकनीक, हाइड्रोजन और परमाणु संलयन ऊर्जा, मस्तिष्क को कंप्यूटर से जोड़ने वाले इंटरफेस, भौतिक रूप में काम करने वाली बुद्धिमत्ता और छठी पीढ़ी का मोबाइल संचार शामिल हैं। भौतिक रूप में काम करने वाली बुद्धिमत्ता से आशय ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से है जो किसी भौतिक प्रणाली के जरिए काम करे, जैसे आसपास की चीजों को महसूस कर उन पर प्रतिक्रिया देने वाला रोबोट।

इन अग्रणी क्षेत्रों में दस्तावेज अलग-अलग तकनीकी तरीकों, व्यावहारिक उपयोगों और कारगर कारोबारी मॉडल तलाशने का आह्वान करता है। कम ऊंचाई वाली अर्थव्यवस्था के सुव्यवस्थित विकास की भी बात कही गई है, जिसमें ड्रोन जैसे विमानों से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं।

मौजूदा कारखाने और खेत भी योजना का हिस्सा

पारंपरिक उद्योगों के लिए तकनीकी उन्नयन और बड़े पैमाने पर उपकरण बदलने पर केंद्रित अलग उपाय तय किए गए हैं। नीति में औद्योगिक इंटरनेट के व्यापक इस्तेमाल की बात है। यह उपकरणों और उत्पादन प्रणालियों को जोड़ता है, ताकि कारखाने जानकारी जुटा सकें और कामकाज में तालमेल बिठा सकें।

विनिर्माण क्षेत्र के उन्नयन का उद्देश्य उत्पादन को अधिक स्मार्ट और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। देशव्यापी एआई प्लस पहल कृत्रिम बुद्धिमत्ता को विभिन्न उद्योगों तक पहुंचाएगी। इसका जोर केवल नई प्रौद्योगिकी कंपनियों पर रहने के बजाय डिजिटल साधनों को स्थापित आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर है।

इसमें बीजों और कृषि मशीनरी पर शोध तथा कृषि शोध के नतीजों को तेजी से अपनाना भी शामिल है। दस्तावेज पूरी औद्योगिक शृंखला को कवर करने वाली तकनीकी सेवाओं को भी बढ़ावा देता है, ताकि शोध, परीक्षण और उत्पादन में सहायता आपस में जुड़ सकें।

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निजी और सरकारी कंपनियों को अलग-अलग सहायता

प्रस्तावित पायलट कार्यक्रम के तहत निजी कंपनियों को चीन के राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान फाउंडेशन में भाग लेने का अवसर मिलेगा। नीति में उद्यम नवाचार को सहायता देने वाले संयुक्त कोषों का दायरा और आकार बढ़ाने तथा कंपनियों की राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी और औद्योगिक रणनीतियां तय करने में अधिक नियमित भागीदारी का भी आह्वान किया गया है।

छोटी प्रौद्योगिकी कंपनियों को शोध पर खर्च बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए पात्र शोध एवं विकास खर्च पर अतिरिक्त कर कटौती बढ़ाई जाएगी। ऐसी कटौती के तहत कर योग्य आय की गणना करते समय कंपनी पात्र वास्तविक खर्च से अधिक राशि घटा सकती है।

सरकारी कंपनियों को अलग लेखा-जोखा रखने वाले शोध आरक्षित कोष बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ये कोष उन आकलनों से छूट पाएंगे जिनमें सरकारी परिसंपत्तियों का मूल्य बनाए रखना या बढ़ाना जरूरी होता है। प्रस्तावित व्यवस्था गलतियों को स्वीकार करने और उनमें सुधार करने की गुंजाइश देगी, जिससे अनिश्चितता वाले शोध खर्च को जगह मिलेगी।

बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को शोध साझेदारियों का नेतृत्व करने और अपने शोध मंच, आपूर्ति शृंखलाएं तथा उत्पाद परीक्षण के अवसर छोटी कंपनियों के लिए खोलने को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्हें छोटी कंपनियों के नवोन्मेषी उत्पादों को शुरुआती दौर में आजमाने के लिए भी कहा जाएगा। इससे नई कंपनी को परीक्षण के लिए साझेदार और शुरुआती ग्राहक पाने का रास्ता, दोनों मिल सकते हैं।

तकनीक के जीवनचक्र के साथ चलेगा वित्तपोषण

सरकार से वित्तपोषित उद्यम कोषों और सरकारी पूंजी से समर्थित उद्यम कोषों को नई कंपनियों, छोटी कंपनियों, लंबी निवेश अवधि और बड़े वैज्ञानिक या इंजीनियरिंग विकास की जरूरत वाली तकनीकों की ओर लगाने का निर्देश दिया गया है। राष्ट्रीय उद्यम पूंजी मार्गदर्शन कोष सहायक भूमिका निभाएगा।

लंबी मूल्यांकन अवधि और निगरानी की अलग व्यवस्थाएं उन निवेशों के अनुकूल होंगी जिनके नतीजे आने में समय लगता है। नीति निवेशकों के लिए बाहर निकलने की बेहतर व्यवस्थाओं का भी आह्वान करती है, यानी निवेश बेचने या किसी अन्य तरीके से उसकी रकम वसूलने का रास्ता।

अन्य प्रस्तावों में छोटी प्रौद्योगिकी कंपनियों की नवाचार क्षमता मापने वाली नवाचार अंक प्रणाली का विस्तार, बॉन्ड बाजार के प्रौद्योगिकी खंड का विकास और प्रौद्योगिकी बीमा नीति ढांचा बनाना शामिल है। इन उपायों का साझा उद्देश्य कंपनी के विकास के अलग-अलग चरणों में वित्तपोषण के विकल्प उपलब्ध कराना है।

राष्ट्रीय दस्तावेज में कुल वित्तपोषण, शोध पर संशोधित कर कटौती की दर, देशव्यापी समय-सीमा या इन बदलावों की विस्तृत समय-सारणी नहीं दी गई है। वित्तीय प्रावधान आगे के क्रियान्वयन की दिशा तय करते हैं।

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शोधकर्ता और विद्यार्थी उद्योग के करीब आएंगे

विश्वविद्यालयों और कंपनियों को संयुक्त प्रशिक्षण देने, पढ़ाई के साथ कार्यस्थल का अनुभव जोड़ने और दो मार्गदर्शकों की व्यवस्था करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। किसी विद्यार्थी को शैक्षणिक शोधकर्ता और उद्योग में काम करने वाले व्यक्ति, दोनों से मार्गदर्शन मिल सकता है।

राष्ट्रीय रणनीतिक जरूरतों और औद्योगिक मांग के अनुरूप शैक्षणिक विषयों में बदलाव करने में प्रौद्योगिकी और औद्योगिक विभागों की भूमिका होगी। कंपनियों को संयुक्त शोध संस्थान और परियोजनाओं समेत विश्वविद्यालयी शोध और प्रतिभा विकास में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

अस्थायी प्रतिनियुक्ति, शैक्षणिक पद के साथ किए जाने वाले काम और व्यवसाय शुरू करने के लिए अवकाश संबंधी बेहतर नीतियों के जरिए शोधकर्ताओं को सहायता दी जाएगी। विश्वविद्यालय और संस्थान उद्योग विशेषज्ञों को मार्गदर्शक या प्रोफेसर नियुक्त कर सकेंगे। नीति व्यवसाय शुरू करने वाले युवा शोधकर्ताओं को सहायता और कंपनियों में बेहतर पोस्टडॉक्टोरल शोध व्यवस्था का भी समर्थन करती है।

बाजार तक पहुंच, पेटेंट और मूल्यांकन नियमों में एक साथ बदलाव

नियामकों से नवोन्मेषी उत्पादों को बाजार में आने से रोकने वाली अनुचित बाधाएं हटाने को कहा गया है। प्रस्तावित परीक्षणों में यह अनुमति देना शामिल है कि कोई कंपनी संबंधित शर्तें पूरी करने की प्रतिबद्धता जताने के बाद बाजार में प्रवेश कर सके। नियामकीय सैंडबॉक्स की संभावनाएं तलाशने की बात भी कही गई है।

नियामकीय सैंडबॉक्स में किसी नए उत्पाद या सेवा का तय शर्तों के भीतर और निगरानी में परीक्षण किया जाता है। दस्तावेज इन प्रयोगों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव प्रौद्योगिकी के कानूनों तथा शोध नैतिकता के नियमों में सुधार का भी आह्वान करता है।

बौद्धिक संपदा से जुड़े उपायों में व्यापार रहस्यों की बेहतर सुरक्षा, खुले पेटेंट लाइसेंस का व्यापक इस्तेमाल और शोध साझेदारियों में लाभ तथा जोखिम बांटने की स्पष्ट व्यवस्था शामिल है। खुले लाइसेंस में पेटेंट धारक प्रकाशित शर्तों के तहत अपनी तकनीक उपलब्ध कराते हैं, जिससे संभावित उपयोगकर्ताओं को उसके इस्तेमाल की अनुमति मिल सकती है।

प्रमुख राष्ट्रीय शोध परियोजनाओं में पेटेंट और तकनीकी मानकों की योजना भी बनाई जाएगी। मानक साझा आवश्यकताएं तय करते हैं, जिनसे तकनीकें एक-दूसरे के साथ काम कर पाती हैं या सहमत प्रदर्शन स्तर पूरा करती हैं। विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और शोधकर्ताओं का मूल्यांकन आंशिक रूप से उद्योग के साथ सहयोग और शोध के नतीजों के व्यावहारिक उपयोग के आधार पर होगा।

सरकारी कंपनियों के लिए नीति में विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ संयुक्त शोध खर्च का वह हिस्सा बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिसे प्रदर्शन मूल्यांकन में अनुमानित लाभ के रूप में वापस जोड़ा जा सकता है। इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण या उद्यम निवेश का काम करने वालों को उनके कर्तव्यों का पालन करने पर कानूनी दायित्व से अधिक सुरक्षा देने की भी बात है।

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छिंगदाओ ने स्थानीय सहायता के आंकड़े दिए

छिंगदाओ की 2027 के लिए आवेदन सूचना में जनकल्याण बेहतर करने वाली प्रमुख प्रौद्योगिकी शोध और प्रदर्शन परियोजनाएं शामिल हैं। विश्वविद्यालयों, संस्थानों और कंपनियों समेत कई संगठनों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।

प्रमुख प्रौद्योगिकी परियोजनाओं को सरकारी वित्तपोषण के जरिए सहायता मिल सकती है। इसमें पात्र काम पूरा होने के बाद भुगतान, ऋण पर ब्याज सब्सिडी या इक्विटी निवेश शामिल हैं। हर परियोजना को 50 लाख युआन तक मिल सकते हैं, जबकि नगर निकाय की वित्तीय सहायता कुल निवेश के आधे तक सीमित है।

50% की इस सीमा के अनुसार, नगर निकाय से पूरी 50 लाख युआन सहायता पाने वाली परियोजना में कम से कम एक करोड़ युआन का कुल निवेश होना जरूरी होगा। यह गणना दिखाती है कि सार्वजनिक धन का मकसद पूरा खर्च उठाना नहीं, बल्कि अन्य निवेश आकर्षित करना है।

जनकल्याण प्रदर्शन परियोजनाओं की अवधि दो से तीन साल होगी। आम तौर पर ऐसी सहायता, जिसे लौटाना नहीं होता, 20 लाख युआन तक सीमित होगी। खास तौर पर बड़ी परियोजनाओं पर अलग से विचार किया जा सकता है। इन परियोजनाओं में कंपनियां, विश्वविद्यालय और शोध संस्थान स्थानीय प्रदर्शन संगठनों के साथ मिलकर रोजमर्रा की सेवाओं में उपयोगी तकनीकें लागू करेंगे।

राष्ट्रीय स्तर पर नीति नवाचार केंद्रों, उच्च प्रौद्योगिकी विकास क्षेत्रों और अन्य पात्र इलाकों में स्थानीय प्रयोगों को बढ़ावा देती है। इसमें केंद्र और स्थानीय सरकारों के निवेश के बीच तालमेल, क्षेत्रों के बीच सहयोग और स्थानीय खूबियों के आधार पर औद्योगिक विशेषज्ञता विकसित करने का आह्वान है।

यहां तक कैसे पहुंची नीति

चीन के नए उपाय उस एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं जो पहले के नेतृत्व वक्तव्यों, आर्थिक योजनाओं और औद्योगिक बैठकों में भी सामने आया था। जून 2024 में राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तीन केंद्रीय तत्व बताए थे: शोध से मिलने वाली आपूर्ति को मजबूत करना, कंपनियों को अग्रणी भूमिका देना और शोध के नतीजों का व्यावहारिक उपयोग।

  • जून 2024: शी ने वैज्ञानिक और औद्योगिक नवाचार के बीच करीबी संबंधों पर चर्चा करते हुए ये तीन तत्व रखे।
  • दिसंबर 2024: केंद्रीय आर्थिक कार्य सम्मेलन ने प्रौद्योगिकी और उद्योग के गहरे एकीकरण को प्राथमिकता बनाया।
  • अप्रैल 2026: राष्ट्रीय उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी बैठक में कंपनियों के नेतृत्व वाली अधिक परियोजनाओं, आपूर्ति शृंखलाओं में समन्वित शोध और शोध तथा उत्पादन के बीच मजबूत संबंधों का आह्वान किया गया।
  • अक्टूबर 2026: नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियों के विकास से जुड़ी एक अलग केंद्रीय नीति में पांच क्षेत्रों के लिए 19 प्राथमिकता उपाय तय किए गए।
  • 21 अक्टूबर, 2026: दोनों केंद्रीय जनरल ऑफिस ने एकीकरण नीति जारी की, जिसमें 17 क्रमांकित उपाय हैं।
  • 2027: छिंगदाओ की घोषित आवेदन योजना में प्रमुख प्रौद्योगिकी और जनकल्याण प्रदर्शन परियोजनाएं शामिल हैं।

2026 के सरकारी कार्य कार्यक्रम में बीजिंग और आसपास के क्षेत्र, शंघाई और यांग्त्ज़ी नदी डेल्टा तथा ग्वांगडोंग-हांगकांग-मकाओ ग्रेटर बे एरिया में अंतरराष्ट्रीय नवाचार केंद्र बनाने का भी आह्वान किया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री यिन हेजुन ने 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के लिए चार प्राथमिकताएं बताई हैं: शोध से मिलने वाली आपूर्ति मजबूत करना, आधुनिक उद्योगों को सहायता देना, शोध प्रणाली में सुधार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकास।

21 अक्टूबर की नीति इन प्राथमिकताओं को वित्तपोषण, लाइसेंस, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच के साझा ढांचे में लाती है। इसका व्यावहारिक जोर संस्थानों के बीच संबंधों पर है: शोध समस्या कौन चुनेगा, उसे हल करने के लिए धन कौन देगा, नतीजे का परीक्षण कौन करेगा और उसे उपयोगी चीज में कौन बदलेगा।

मुख्य बातें

  • चीन ने 21 अक्टूबर, 2026 को वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक विकास के करीब लाने के लिए 17 उपाय जारी किए।
  • स्पष्ट औद्योगिक उपयोग वाली राष्ट्रीय शोध परियोजनाओं का नेतृत्व आम तौर पर कंपनियों को करना चाहिए।
  • विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे छोटी कंपनियों को लाइसेंस शुल्क देने से पहले शोध के नतीजों का इस्तेमाल करने दें।
  • प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में चिप, औद्योगिक मशीनरी, उन्नत सामग्री, जैव-विनिर्माण और अग्रणी प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
  • वित्तपोषण सुधारों का उद्देश्य निवेश की अवधि बढ़ाना, प्रौद्योगिकी वित्तपोषण मजबूत करना और शोध सुविधाओं तक पहुंच बेहतर करना है।
  • छिंगदाओ 2027 की परियोजनाओं के लिए आवेदन ले रहा है। प्रत्येक प्रमुख प्रौद्योगिकी परियोजना को 50 लाख युआन तक सहायता मिल सकती है।
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