दानंतारा के कारोबारी जोखिमों के चलते कानून में बदलाव का प्रस्ताव
राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के अध्यक्ष लुहुत बिनसर पंडजैतान ने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भ्रष्टाचार को लेकर इंडोनेशिया के दृष्टिकोण में बदलाव का प्रस्ताव देने वाले परिषद के अध्ययन का समर्थन किया है। उन्होंने 20 अक्टूबर, 2026 को जकार्ता स्थित मर्देका पैलेस में हुई बैठक के बाद यह जानकारी दी। प्रस्ताव में ध्यान राज्य के वित्त को हुए नुकसान से हटाकर रिश्वतखोरी पर केंद्रित करने की बात है। लुहुत ने निवेश प्रबंधन संस्था दानंतारा के कारोबारी फैसलों को एक प्रमुख चिंता बताया।
विषय-सूची
- दानंतारा के कारोबारी जोखिमों के चलते कानून में बदलाव का प्रस्ताव
- राष्ट्रपति किस बात पर सहमत हुए हैं?
- इस तर्क में दानंतारा की अहम भूमिका क्यों है
- इंडोनेशिया में पहले से ही भ्रष्टाचार के कई अपराध हैं
- UNCAC में रिश्वतखोरी से कहीं अधिक शामिल है
- दो दशक से अधिक पहले अपनाया गया अभिसमय
- नीतिगत फैसले में आचरण और जवाबदेही दोनों अहम
- सामाजिक सहायता और मौसम के जोखिमों पर भी चर्चा
- मुख्य बिंदु
लुहुत ने तर्क दिया कि राज्य को हुए नुकसान से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले का जोखिम सरकारी कंपनियों पर बोझ डाल सकता है और निवेश संबंधी फैसले लेना कठिन बना सकता है। उन्होंने कहा कि परिषद, जिसे इंडोनेशियाई संक्षिप्त नाम DEN से जाना जाता है, ने अपना अध्ययन संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार-विरोधी अभिसमय (UNCAC) के आधार पर तैयार किया। इंडोनेशिया ने 18 अप्रैल, 2006 को कानून संख्या 7, 2006 के जरिए इस अभिसमय की पुष्टि की थी।
इस बहस में दो व्यावहारिक चिंताएं जुड़ी हैं: प्रबंधकों को सामान्य कारोबारी जोखिम लेने की गुंजाइश देना और सार्वजनिक धन को दुरुपयोग से बचाना। कानून में बदलाव का दायरा दानंतारा से आगे भी जा सकता है, क्योंकि इंडोनेशिया का भ्रष्टाचार कानून कई तरह के आचरण को कवर करता है, जबकि राज्य को वित्तीय नुकसान से जुड़े प्रावधान खास तौर पर अनुच्छेद 2 और 3 में हैं।
UNCAC में रिश्वतखोरी के अलावा कदाचार के कई अन्य रूप भी शामिल हैं, जिनमें गबन, आधिकारिक पद का दुरुपयोग और अपराध से हासिल धन को वैध बनाना शामिल है। इसलिए इंडोनेशिया के कानून को अभिसमय के अनुरूप बनाने के किसी भी प्रयास में कई अपराधों पर फैसले करने होंगे, न कि केवल एक परिभाषा को दूसरी से बदलना होगा।
प्रबोवो की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद DEN प्रमुख के रूप में बोलते हुए लुहुत ने अध्ययन को राष्ट्रपति का समर्थन मिलने की बात कही:
"राष्ट्रपति राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की टीम द्वारा भ्रष्टाचार की परिभाषा पर किए गए अध्ययन से भी सहमत हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार से निपटने के इंडोनेशिया के प्रयासों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरना महत्वपूर्ण है," लुहुत ने कहा।
राष्ट्रपति किस बात पर सहमत हुए हैं?
लुहुत ने परिषद के अध्ययन और उसकी प्रस्तावित दिशा को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने की बात कही। उनकी सार्वजनिक व्याख्या का मुख्य जोर इंडोनेशिया के भ्रष्टाचार कानून में राज्य को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के मामलों के प्रावधानों में संशोधन और कानून लागू करने की प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने पर था।
कानून की सटीक भाषा, संशोधित किए जाने वाले प्रावधानों और कानून बदलने की समय-सीमा की घोषणा नहीं की गई। ये विवरण कारोबारों, जांचकर्ताओं और आम जनता के लिए अहम हैं, क्योंकि इन्हीं से तय होगा कि प्रस्तावित दृष्टिकोण वास्तविक मामलों में कैसे लागू होगा।
एक अध्ययन नीतिगत तर्क प्रस्तुत करता है। संशोधन उन नियमों को तय करता है जिन्हें अभियोजकों और अदालतों को लागू करना होता है। अगला अहम सवाल यह है कि परिषद के तर्क को कानूनी भाषा में कैसे बदला जाएगा, जिसमें सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े फैसलों का निपटारा भी शामिल है।
लुहुत की व्याख्या व्यापक थी: भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य को हुए नुकसान पर जोर खत्म होना चाहिए और रिश्वतखोरी को केंद्रीय महत्व दिया जाना चाहिए। अंतिम कानूनी भाषा में यह स्पष्ट करना होगा कि कौन-सा आचरण दंडनीय बना रहेगा और उसे किस तरह साबित किया जाएगा।
इस तर्क में दानंतारा की अहम भूमिका क्यों है
दानंतारा निवेश का प्रबंधन करती है और इंडोनेशियाई राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों की निगरानी करती है। इन कंपनियों से जुड़े फैसलों में सार्वजनिक संपत्तियां जोखिम में पड़ सकती हैं, वहीं प्रबंधकों को अनिश्चित कारोबारी नतीजों के बारे में निर्णय भी लेने पड़ते हैं।
लुहुत ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य को हुए वित्तीय नुकसान का इस्तेमाल ऐसे फैसलों पर बोझ डालता है। उनका तर्क था कि किसी कारोबारी जोखिम के कारण कंपनी को नुकसान हो सकता है, इसलिए निवेश के नतीजे को आपराधिक जवाबदेही का आधार बनाना कठिन है।
DEN प्रमुख ने संक्षिप्त बयान में यह चिंता जाहिर की:
"हर कारोबार में जोखिम होता है," उन्होंने कहा।
व्यावसायिक नुकसान बताता है कि धन का क्या हुआ। रिश्वतखोरी आचरण को दर्शाती है: किसी फैसले को प्रभावित करने के लिए अनुचित लाभ देना या लेना। रिश्वतखोरी पर जोर बढ़ने से किसी लेन-देन के पीछे के व्यवहार पर अधिक ध्यान जाएगा। दानंतारा और उसके अधीन कंपनियों के लिए व्यावहारिक सवाल यह है कि कानून सामान्य कारोबारी फैसले और अधिकार या संपत्तियों के दंडनीय दुरुपयोग के बीच अंतर कैसे करेगा।
इंडोनेशिया में पहले से ही भ्रष्टाचार के कई अपराध हैं
इंडोनेशिया का कानूनी ढांचा भ्रष्टाचार के आपराधिक कृत्यों के उन्मूलन पर कानून संख्या 31, 1999 पर आधारित है, जिसमें कानून संख्या 20, 2001 के जरिए संशोधन किया गया था। इसमें भ्रष्टाचार के रूप में वर्गीकृत कम-से-कम 30 कृत्यों की पहचान की गई है। राज्य को वित्तीय नुकसान पहुंचाने से जुड़े प्रावधान अनुच्छेद 2 और 3 में हैं।
इस ढांचे के कारण प्रस्ताव को उस कानूनी संदर्भ में समझना चाहिए जो "भ्रष्टाचार की परिभाषा बदलने" जैसे वाक्यांश से अधिक विशिष्ट है। चर्चा ऐसे ढांचे की है जिसमें कई अपराध शामिल हैं, न कि हर भ्रष्टाचार मामले पर लागू होने वाले किसी एक नियम की।
लुहुत के तर्क में अनुच्छेद 2 और 3 अहम हैं, क्योंकि इनमें राज्य को वित्तीय नुकसान का वह तत्व शामिल है जिस पर वह फिर से विचार चाहते हैं। व्यापक ढांचे का मतलब है कि विधायकों को यह भी देखना होगा कि कोई भी बदलाव भ्रष्टाचार के अन्य अपराधों के साथ कैसे मेल खाता है।
इस बहस पर नजर रखने वाले पाठकों के लिए मुख्य शब्द अलग-अलग चीजें बताते हैं। राज्य को वित्तीय नुकसान का संबंध सार्वजनिक वित्त को हुए नुकसान से है। किसी अपराध में निषिद्ध व्यवहार और आपराधिक सजा की शर्तें तय होती हैं। प्रस्तावित सुधार से संबंधित मामलों में इन अवधारणाओं के बीच का संबंध बदलेगा।
UNCAC में रिश्वतखोरी से कहीं अधिक शामिल है
संयुक्त राष्ट्र के इस अभिसमय में घरेलू सरकारी अधिकारियों, विदेशी सरकारी अधिकारियों और सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों को रिश्वत देना शामिल है। इसमें निजी क्षेत्र के भीतर रिश्वतखोरी भी शामिल है।
इसके अन्य प्रावधानों में गबन या संपत्ति का दुरुपयोग, प्रभाव का अनुचित इस्तेमाल, आधिकारिक कार्यों का दुरुपयोग, अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करना, अपराध से हासिल धन को वैध बनाना, उसे छिपाना और न्याय में बाधा डालना शामिल है। कुछ प्रावधान देशों से ऐसे आचरण को अपराध घोषित करने की मांग करते हैं, जबकि अन्य उनसे अपनी कानूनी प्रणालियों में ऐसा करने पर विचार करने को कहते हैं।
ये शब्द भ्रष्टाचार के अलग-अलग तरीकों को दर्शाते हैं। गबन में किसी को सौंपी गई संपत्ति को लेना या उसका दुरुपयोग करना शामिल है। प्रभाव के अनुचित इस्तेमाल में किसी फैसले पर किसी व्यक्ति के प्रभाव से जुड़ा अनुचित लाभ शामिल होता है। न्याय में बाधा डालने का संबंध गलत कामों की जांच या अभियोजन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप से है।
UNCAC के तहत हर भ्रष्टाचार अपराध में राज्य के वित्त को हुए नुकसान को साबित करना जरूरी नहीं है। इसका दायरा ऐसे निषिद्ध आचरण पर ध्यान देने की गुंजाइश देता है, भले ही संबंधित अपराध के लिए सार्वजनिक वित्तीय नुकसान की गणना जरूरी न हो।
लुहुत ने रिश्वतखोरी को अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण का मूल बताते हुए कहा कि इंडोनेशिया ही एकमात्र देश है जो राज्य को हुए नुकसान की अवधारणा को इस तरह लागू करता है। यह उनकी तुलना थी। इंडोनेशिया के सामने ठोस मुद्दा यह है कि उनके द्वारा उठाई गई कारोबारी चिंताओं पर विचार करते हुए अभिसमय में शामिल कदाचार के व्यापक रूपों को कानून के दायरे में कैसे रखा जाए।
दो दशक से अधिक पहले अपनाया गया अभिसमय
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 31 अक्टूबर, 2003 को UNCAC अपनाया था। इंडोनेशिया समेत 140 देशों ने इस अभिसमय पर हस्ताक्षर किए। आवश्यक 30 देशों की पुष्टि मिलने के बाद यह 14 दिसंबर, 2005 को लागू हुआ।
इंडोनेशिया ने अप्रैल 2006 में इसकी पुष्टि की थी, यानी उस बैठक से करीब 20 साल पहले जिसमें लुहुत ने DEN का अध्ययन पेश किया। प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
- 31 अक्टूबर, 2003: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने UNCAC अपनाया।
- 14 दिसंबर, 2005: 30 देशों की पुष्टि के बाद अभिसमय लागू हुआ।
- 18 अप्रैल, 2006: इंडोनेशिया ने कानून संख्या 7, 2006 के जरिए UNCAC की पुष्टि की।
- 20 अक्टूबर, 2026: मर्देका पैलेस की बैठक के बाद लुहुत ने DEN के अध्ययन को प्रबोवो का समर्थन मिलने की घोषणा की।
इंडोनेशिया ने अभिसमय की पुष्टि करते समय अनुच्छेद 66(2) को लेकर एक आरक्षण दर्ज किया था। आरक्षण वह औपचारिक शर्त है जिसे कोई देश संधि स्वीकार करते समय जोड़ता है। इस मामले में यह अभिसमय से जुड़े विवादों के निपटारे की प्रक्रिया से संबंधित है।
अध्ययन की व्याख्या करते हुए लुहुत ने "संयुक्त राष्ट्र चार्टर" शब्द का भी इस्तेमाल किया। इंडोनेशिया ने कानून संख्या 7, 2006 के जरिए जिस दस्तावेज की पुष्टि की थी, वह संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार-विरोधी अभिसमय है। उस दस्तावेज का सही नाम लेना महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रस्तावित बदलावों के लिए उसके प्रावधानों को ही संदर्भ बिंदु बताया गया है।
नीतिगत फैसले में आचरण और जवाबदेही दोनों अहम
DEN का कारोबारी तर्क और UNCAC में शामिल अपराधों की व्यापकता दो परस्पर जुड़ी जिम्मेदारियों की ओर इशारा करती हैं। सरकार सार्वजनिक उद्यमों में व्यावसायिक नुकसान को लेकर चिंता दूर करना चाहती है। अभिसमय रिश्वतखोरी से इतर आचरण समेत भ्रष्ट व्यवहार के कई रूपों को दंडित करने का ढांचा देता है।
कारोबारी फैसलों पर केंद्रित सुधार में ऐसी भाषा होनी चाहिए जो सामान्य निवेश जोखिम के निपटारे को स्पष्ट करे। UNCAC के अनुरूप सुधार में गबन, आधिकारिक कार्यों के दुरुपयोग और अभिसमय में शामिल अन्य आचरणों का भी ध्यान रखना होगा।
प्रबंधकों के लिए यह भाषा उन कानूनी शर्तों को तय करेगी जिनके तहत वे निवेश या कॉरपोरेट लेन-देन को मंजूरी देते हैं। जनता के लिए इससे दानंतारा और सरकारी उद्यमों के पास मौजूद संपत्तियों की सुरक्षा के उपाय तय होंगे। जांचकर्ताओं के लिए यह निर्धारित होगा कि उन्हें किसी अपराध के कौन-से तत्व साबित करने होंगे।
इसलिए उपयोगी तुलना मौजूदा प्रावधानों और प्रस्तावित नए प्रावधानों के बीच, हर अपराध के लिए अलग-अलग होनी चाहिए। लुहुत ने नीतिगत प्राथमिकता बता दी है। उसके दायरे का निर्धारण विस्तृत विधायी फैसलों से होगा।
सामाजिक सहायता और मौसम के जोखिमों पर भी चर्चा
20 अक्टूबर की बैठक में सामाजिक सुरक्षा के लिए डिजिटल डेटा पर भी चर्चा हुई। लुहुत ने कहा कि प्रबोवो 10 नवंबर, 2026 को एक कार्यक्रम शुरू करने वाले हैं। नकद हस्तांतरण के जरिए पात्र लाभार्थियों तक सहायता अधिक सटीक ढंग से पहुंचाने का लक्ष्य है।
लुहुत ने बताया कि उत्पादों से जुड़ी सब्सिडी से हटकर नकद हस्तांतरण के जरिए सहायता देने की योजना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और आर्थिक मंत्रियों के साथ चर्चा में सरकारी आंकड़ों की पूर्णता का मुद्दा भी शामिल था।
खाद्य आपूर्ति और बाढ़ भी बैठक के एजेंडे में थे। लुहुत ने कहा कि अधिकारियों ने अल नीनो और ला नीना के संभावित प्रभावों तथा मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) की निगरानी के आधार पर आपातकालीन उपायों पर चर्चा की, जिसमें बुवाई के कार्यक्रम तैयार करना भी शामिल था।
इन घोषणाओं से पता चलता है कि भ्रष्टाचार का अध्ययन एक व्यापक आर्थिक बैठक का हिस्सा था, जिसमें निवेश संबंधी फैसलों, परिवारों को सहायता और मौसम के जोखिमों पर चर्चा हुई। 10 नवंबर की तारीख सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम से जुड़ी है, जबकि भ्रष्टाचार संबंधी प्रस्ताव के लिए ऊपर बताए गए विस्तृत कानूनी कदम अभी उठाए जाने बाकी हैं।
मुख्य बिंदु
- लुहुत ने कहा कि 20 अक्टूबर, 2026 को मर्देका पैलेस में हुई बैठक के बाद प्रबोवो ने DEN के भ्रष्टाचार संबंधी अध्ययन का समर्थन किया।
- प्रस्ताव में राज्य को हुए वित्तीय नुकसान से ध्यान हटाकर रिश्वतखोरी पर जोर देने की बात है। इसमें दानंतारा और सरकारी उद्यमों के कारोबारी जोखिमों का हवाला दिया गया है।
- इंडोनेशिया के भ्रष्टाचार ढांचे में कम-से-कम 30 तरह के कृत्य शामिल हैं। राज्य को वित्तीय नुकसान से जुड़े प्रावधान अनुच्छेद 2 और 3 में हैं।
- UNCAC में रिश्वतखोरी और कदाचार के कई अन्य रूप शामिल हैं, जिनमें गबन और आधिकारिक कार्यों का दुरुपयोग शामिल है।
- इंडोनेशिया ने 18 अप्रैल, 2006 को कानून संख्या 7, 2006 के जरिए UNCAC की पुष्टि की थी।
- प्रस्तावित संशोधनों और उनकी विधायी समय-सीमा की घोषणा अभी नहीं हुई है।






