भारत के विरोध के बाद जेडी वेंस ने H-1B टिप्पणी पर दी सफाई, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर रोक से कामगारों की चिंता बढ़ी

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JD Vance Clarifies H-1B Remark After India Protests, as Green Card Freeze Raises Worker Concerns

आठ कंपनियों पर रेजिडेंसी प्रक्रिया रोक के बीच वेंस ने बदला अपना स्पष्टीकरण

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी पेशेवरों को "बंधुआ मजदूर" बताने के बाद अपनी टिप्पणी को अपूर्ण बताते हुए इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना नियोक्ताओं और वीजा प्रणाली पर थी, H-1B कामगारों पर नहीं। उनका यह स्पष्टीकरण भारत के राजनयिक विरोध और 8 अक्टूबर को आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों से जुड़ी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर रोक के बाद आया है।

विषय-सूची
  1. आठ कंपनियों पर रेजिडेंसी प्रक्रिया रोक के बीच वेंस ने बदला अपना स्पष्टीकरण
  2. वेंस का कहना है कि उनका आशय क्या था
  3. भारत ने इस भाषा पर आपत्ति क्यों जताई
  4. परिवार का जिक्र और अप्रवासन पर व्यापक दलील
  5. 8 अक्टूबर की रोक में क्या शामिल है
  6. रोक का कामगारों और परिवारों पर असर
  7. सख्ती के पीछे वेतन से जुड़े दावे
  8. कंपनियों को नुकसान कम, कर्मचारियों को ज्यादा चिंता क्यों
  9. दबाव में आया उद्योग लागत का आकलन कर रहा है
  10. प्रभावित कामगार किन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं?
  11. मुख्य बातें

इन कंपनियों में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचसीएलटेक और कैपजेमिनी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग ने संदिग्ध भर्ती धोखाधड़ी या जानबूझकर गलत जानकारी देने की आशंका जताते हुए इन कंपनियों से जुड़ी नई अर्जियां स्वीकार करना और लंबित अर्जियों पर कार्रवाई रोक दी। यह रोक परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम पर लागू है, जिसे आम तौर पर PERM कहा जाता है।

वेंस ने शनिवार को मिशिगन के फ्लैट रॉक में टेलीविजन पर प्रसारित टाउन हॉल कार्यक्रम के दौरान इस विवाद पर बात की। भारत से आए एक अप्रवासी ने प्रशासन के अप्रवासियों के प्रति रवैये को चुनौती दी। वह 20 साल पहले अमेरिका आए थे, पांच साल पहले नागरिक बने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वोट दिया था।

अपनी पहले की शब्दावली के बारे में बताते हुए वेंस ने निजी जिम्मेदारी स्वीकार की:

मैं कहूंगा कि यहां मेरी भाषा अगर अपूर्ण रही है, तो इसकी जिम्मेदारी मेरी है।

उनके स्पष्टीकरण से उनकी मूल नीतिगत दलील नहीं बदली: कंपनियों को अधिक अमेरिकी कामगारों को नियुक्त करना चाहिए और अप्रवासन नीति में घरेलू कामगारों के हितों तथा कुशल लोगों को देश में लाने के लाभों के बीच संतुलन होना चाहिए।

यह विवाद केवल भाषा तक सीमित नहीं है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में सफल H-1B आवेदकों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी 71% थी। प्रभावित कर्मचारियों की तत्काल चिंता यह है कि स्थायी निवास की दिशा में एक प्रक्रिया रुकने से उनके करियर और परिवार की योजनाएं बाधित होंगी या नहीं, जबकि कई नियोक्ताओं को कारोबार पर सीमित असर की उम्मीद है।

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वेंस का कहना है कि उनका आशय क्या था

वेंस ने दलील दी कि जिस कामगार का अमेरिका में रहने का अधिकार नौकरी पर निर्भर हो, वह कंपनी के दबाव के प्रति असुरक्षित हो सकता है। उन्होंने कहा कि नौकरी जाने से उस व्यक्ति के अमेरिका में रहने पर भी खतरा हो सकता है, जिससे नियोक्ता को जरूरत से ज्यादा ताकत मिल जाती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि बंधुआ मजदूरी का उनका जिक्र कंपनियों और कामगारों के बीच इसी रिश्ते के संदर्भ में था:

इसलिए जब मैं बंधुआ मजदूर कहता हूं, तो यह H-1B वीजा धारक की आलोचना नहीं है। यह उस कंपनी की आलोचना है जो किसी व्यक्ति को यहां लाती है,

वेंस ने इस दलील को अपने उस आरोप से जोड़ा कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालते हुए विदेशी कामगारों की भर्ती करती हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि कोई कंपनी योग्य कामगार न मिलने का दावा करके विदेश से एक अकाउंटेंट को नियुक्त करती है, जबकि पहले से वेतन सूची में शामिल अमेरिकी अकाउंटेंट को निकाल देती है।

उनकी दलील में दो चिंताएं शामिल हैं: नियोक्ताओं पर निर्भर अप्रवासियों के साथ व्यवहार और उन अमेरिकियों के साथ व्यवहार जो अपनी नौकरी गंवा सकते हैं। हालांकि, इससे पहले की घोषणा के वक्त उनकी भाषा में विदेशी कामगारों की भर्ती पर भी सीधा हमला था। उन्होंने कंपनियों से ऐसे कामों के लिए विदेशी कामगार लाना बंद करने को कहा था, जिन्हें अमेरिकी कर सकते हैं, और इस कार्यक्रम का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को "वीजा मिल" बताया था।

भारत ने इस भाषा पर आपत्ति क्यों जताई

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेंस की टिप्पणी में भारतीय पेशेवरों की शिक्षा, कौशल और आर्थिक योगदान की अनदेखी की गई। मंत्रालय ने यह भी कहा कि अप्रवासियों की पीढ़ियों ने अमेरिका के विकास, कारोबार और नवाचार में भूमिका निभाई है।

मंत्रालय ने एक बयान में अपनी आपत्ति जताई:

ऐसे शब्दों का इस्तेमाल, जिनसे दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की याद आती है, बेहद अपमानजनक है,

बंधुआ मजदूरी में कामगारों को अनुबंधों से बांधा जाता था और अक्सर उनकी स्वतंत्रता सीमित होती थी तथा उनका शोषण किया जाता था। 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में सैकड़ों हजार भारतीयों को मॉरीशस, फिजी, कैरेबियाई क्षेत्र और दक्षिण अफ्रीका समेत ब्रिटिश उपनिवेशों के बागानों में भेजा गया था।

यह इतिहास बताता है कि इस शब्दावली पर राजनयिक प्रतिक्रिया क्यों हुई। नई दिल्ली की आपत्ति कुशल पेशेवरों के वर्णन और इस शब्द से जुड़े दर्दनाक औपनिवेशिक अनुभव, दोनों को लेकर थी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारतीय कंपनियों की ग्रीन कार्ड अर्जियों पर लगी पाबंदियां भारत और अमेरिका की साझा महत्वाकांक्षाओं के विपरीत हैं।

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परिवार का जिक्र और अप्रवासन पर व्यापक दलील

वेंस ने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि अमेरिका देश के लिए योगदान देने वाले लोगों का स्वागत करता रहे। उनकी पत्नी, सेकंड लेडी उषा वेंस, अमेरिका में उन माता-पिता के घर पैदा हुई थीं जो दक्षिण भारत से आए थे।

उपराष्ट्रपति ने अपने ससुराल और पत्नी के बारे में कहा:

आप जानते हैं कि मेरा परिवार कहां से आया है। मैं अपनी सास और ससुर से प्यार करता हूं, जो दक्षिण भारत से आए थे। उनकी बेटी, जो अमेरिका में पैदा हुईं, अब सेकंड लेडी हैं। मुझे उन पर बहुत गर्व है और मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं।

वेंस ने कहा कि उनका मकसद अप्रवासियों को अमानवीय दिखाना नहीं था। फिर भी उन्होंने अप्रवासन की गति सीमित करने का बचाव किया। उनका तर्क था कि जनसांख्यिकी और संस्कृति में तेज बदलाव किसी समुदाय के साझा जुड़ाव को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने "सामाजिक एकजुटता और सामुदायिक भावना" का एक न्यूनतम स्तर बनाए रखने को अपने दृष्टिकोण का हिस्सा बताया।

इस तरह उनके स्पष्टीकरण ने विदेशी पेशेवरों के वर्णन को नरम किया, लेकिन अप्रवासन पर पाबंदियों की व्यापक दलील कायम रखी। उनकी टिप्पणियों में वेतन, भर्ती के तौर-तरीके और अप्रवासन तेजी से होने पर समुदायों में आने वाले सांस्कृतिक बदलाव शामिल थे।

8 अक्टूबर की रोक में क्या शामिल है

श्रम विभाग ने 20 CFR की धारा 656.31(b) लागू की। यह नियम धोखाधड़ी या जानबूझकर गलत जानकारी देने का संदेह होने पर प्रक्रिया रोकने की अनुमति देता है। इस कार्रवाई से आठ नामित नियोक्ताओं से जुड़ी अर्जियां प्रभावित हैं।

EB-2 और EB-3 रोजगार श्रेणियों में ग्रीन कार्ड पाने की दिशा में PERM आम तौर पर शुरुआती कदम होता है। इन श्रेणियों में कई पेशेवर और कुशल कामगार आते हैं। नियोक्ताओं को आम तौर पर किसी पद के लिए भर्ती करनी होती है और यह दिखाना होता है कि योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कामगार नहीं मिल सकते, तथा विदेशी कामगार को नियुक्त करने से वेतन या कामकाजी स्थितियों को नुकसान नहीं होगा।

घोषणाओं और प्रतिक्रियाओं का क्रम इस प्रकार रहा:

  • 8 अक्टूबर: श्रम विभाग ने आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों से जुड़ी नई और लंबित PERM अर्जियों की प्रक्रिया रोक दी।
  • 9 अक्टूबर, 2026: भारत ने पाबंदियों और वेंस की भाषा की आलोचना की, जबकि उद्योग के आकलनों में कारोबार पर तत्काल असर सीमित बताया गया।
  • 12 अक्टूबर: एचसीएलटेक के मानव संसाधन प्रमुख राम सुंदरराजन ने कहा कि कंपनी निर्देश का पालन करेगी और उसने स्थानीय भर्ती बढ़ाई है।
  • शनिवार के टाउन हॉल में: वेंस ने अपनी अपूर्ण भाषा की जिम्मेदारी स्वीकार की, लेकिन नियोक्ताओं और वीजा प्रणाली की आलोचना का बचाव किया।

प्रशासन ने लक्षित कंपनियों में से प्रत्येक पर लगे कथित उल्लंघनों का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है और न ही प्रक्रिया फिर शुरू होने की तारीख बताई है। न्याय विभाग के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी की जांच उनकी अर्जियों पर रोक लगने से पहले शुरू हो गई थी।

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रोक का कामगारों और परिवारों पर असर

भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि PERM पर रोक से मौजूदा H-1B वीजा और उसके धारकों तथा उनके आश्रितों की स्थिति अपने आप नहीं बदलती। कर्मचारी तब तक काम जारी रख सकते हैं, जब तक उनके पास वैध अनुमति हो और वे अपनी स्थिति की शर्तें पूरी करते हों।

H-1B स्थिति आव्रजन नियमों के तहत अस्थायी रोजगार की अनुमति देती है। ग्रीन कार्ड स्थायी निवास देता है। जिन कर्मचारियों को कंपनियां स्थायी रूप से अमेरिका में रहने के लिए प्रायोजित करती हैं, उनमें से कई के लिए PERM इन दोनों चरणों को जोड़ता है।

इसलिए कामगार अपनी मौजूदा नौकरी जारी रख सकते हैं, लेकिन उनके स्थायी निवास की योजनाओं में नई देरी हो सकती है। लंबी अवधि की चिंता यह है कि छह साल की सामान्य सीमा से आगे कुछ H-1B विस्तार रोजगार-आधारित आव्रजन प्रक्रिया में योग्य प्रगति पर निर्भर करते हैं। PERM आवेदन रुकना खास तौर पर उस व्यक्ति के लिए अहम हो सकता है जो इस सीमा के करीब हो।

आव्रजन वकील एलेक्सिस एक्सेलरैड, बार्स्ट एंड मुकामल की पार्टनर और अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन की निर्वाचित अध्यक्ष, ने निजी जीवन पर पड़ने वाले असर का वर्णन किया:

इससे किसी की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो रही है, विदेशी नागरिक की भी और उन लोगों की भी जिनके साथ और जिनके लिए वह काम करता है।

भारतीय आवेदक पहले से ही लंबी कतार का सामना कर रहे हैं। काटो इंस्टीट्यूट के अनुमान के मुताबिक, 2023 में रोजगार-आधारित आव्रजन की लंबित कतार में करीब 18 लाख लोग थे, जिनमें लगभग 11 लाख भारतीय थे। संस्थान के आकलन में, जिन नियमों और कतार की स्थितियों का उसने अध्ययन किया, उनके तहत कुछ भारतीय आवेदकों का संभावित इंतजार 134 साल तक हो सकता है। प्रक्रिया में और देरी से इस अनिश्चितता में इजाफा होगा कि परिवार कहां बसकर अपना जीवन बना सकते हैं।

सख्ती के पीछे वेतन से जुड़े दावे

वेंस ने विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों पर अमेरिकी वेतन घटाने का आरोप लगाया है। वीजा धोखाधड़ी पर पहले हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया था कि समान पद पर H-1B कामगारों को अमेरिकी नागरिकों से 20,000 डॉलर कम वेतन मिलता है। विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए लाए गए कामगारों के मामले में यह अंतर बढ़कर 48,000 डॉलर हो जाता है।

ये आंकड़े वेंस के दावों के रूप में पेश किए गए थे। तुलना के लिए किसी आंकड़ा स्रोत या गणना का उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट का भी खास तौर पर जिक्र किया और कहा कि कंपनी ने 2025 में 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि उसे 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड मिले।

माइक्रोसॉफ्ट ने जवाब दिया कि अमेरिका में उसके कर्मचारियों का भारी बहुमत अमेरिकी नागरिक है। कंपनी ने कहा कि पिछले एक साल में नए H-1B कामगारों के लिए दाखिल अर्जियां, विस्तार को छोड़कर, उसके अमेरिकी कर्मचारियों की संख्या का 1% थीं।

नियमों के पालन को लेकर बहस इस बात पर भी है कि विदेशी कर्मचारियों को प्रायोजित करने से पहले कंपनियां नौकरियों का विज्ञापन कैसे देती हैं और अमेरिकी आवेदकों पर कैसे विचार करती हैं। मेटा और एप्पल समेत कंपनियों के खिलाफ न्याय विभाग की जांच और समझौतों में भर्ती के ऐसे तौर-तरीकों पर ध्यान दिया गया है, जिनसे अमेरिकी आवेदकों को नुकसान हुआ। PERM भर्ती मानकों में प्रस्तावित बदलाव व्हाइट हाउस की समीक्षा के अधीन है। इन नियमों में 2004 के बाद से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।

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कंपनियों को नुकसान कम, कर्मचारियों को ज्यादा चिंता क्यों

भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों का कहना है कि वे कर्मचारियों को अमेरिका भेजने पर कम और वहीं भर्ती करने पर अधिक निर्भर हो गई हैं। भारत के प्रौद्योगिकी उद्योग संगठन नैसकॉम ने कहा कि H-1B स्थिति से PERM के जरिए स्थायी निवास पाने वाले कामगारों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।

ICICI सिक्योरिटीज के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच दाखिल PERM अर्जियों में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी 2% से कम थी। TCS ने कहा कि पिछले दो साल में उसकी अर्जियों की संख्या दस से कम रही और उसे अपनी कर्मचारी रणनीति या ग्राहकों के कामकाज पर कोई असर होने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने पांच साल में अमेरिका में 15,000 लोगों को नियुक्त करने की अपनी योजना भी दोहराई।

विप्रो ने कहा कि उसके अमेरिकी कर्मचारियों में 80% स्थानीय स्तर पर नियुक्त किए गए हैं। शेयर बाजार में दाखिल एक सूचना में कंपनी ने अपने कारोबारी आकलन का ब्योरा दिया:

हमें इस घोषणा से कारोबार पर किसी बड़े असर की आशंका नहीं है।

कंपनियां अमेरिका के बाहर स्थित टीमों के जरिए भी अमेरिकी ग्राहकों को कई सेवाएं दे सकती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के एक सर्वेक्षण में विदेशों में ग्राहकों के स्थलों पर किए गए काम से मिलने वाला राजस्व 19 अरब डॉलर से घटकर 18.4 अरब डॉलर रह गया, यानी करीब 3.2% की गिरावट।

इसलिए कंपनी का राजस्व और किसी कर्मचारी के स्थायी निवास की संभावना अलग-अलग दिशा में जा सकती है। कोई कंपनी स्थानीय कर्मचारियों या विदेश स्थित टीमों के जरिए ग्राहकों को सेवाएं देती रह सकती है, जबकि किसी कर्मचारी की स्थायी निवास की अर्जी अटकी रह सकती है। ICICI सिक्योरिटीज ने कहा कि अनिश्चितता बनी रहने पर तत्काल राजस्व से अधिक चिंता प्रतिभाओं को कंपनी में बनाए रखने की होगी।

दबाव में आया उद्योग लागत का आकलन कर रहा है

नैसकॉम के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय प्रौद्योगिकी उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 में 315 अरब डॉलर का राजस्व अर्जित किया, जिसमें 246 अरब डॉलर का निर्यात शामिल था। इस क्षेत्र में करीब 59.5 लाख लोग काम करते थे और साल के दौरान लगभग 1.35 लाख शुद्ध नई नौकरियां जुड़ीं।

यह क्षेत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता से आए बदलावों के साथ तालमेल भी बिठा रहा है। 9 अक्टूबर तक भारतीय आईटी शेयरों में साल के दौरान 25% गिरावट आई थी, जबकि प्रमुख सूचकांक 14% गिरा था। दोनों के बीच 11 प्रतिशत अंक का अंतर था।

इसके बावजूद TCS के नतीजों से मदद मिलने पर 9 अक्टूबर को शेयर कीमतों में करीब 3% की बढ़ोतरी हुई। इससे आईटी सूचकांक की 10 कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य 701.336 अरब रुपये, यानी करीब 7.25 अरब डॉलर, बढ़ गया। निवेशक आव्रजन पाबंदियों के साथ-साथ आय और कर्मचारियों की संख्या में बदलाव का भी आकलन कर रहे थे।

बजाज ब्रोकिंग में शोध प्रमुख सुमित सिंघानिया ने कहा कि अमेरिकी भर्ती और उपठेकेदारों पर ज्यादा निर्भरता से भर्ती तथा अनुपालन लागत बढ़ सकती है और लाभ मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। भारत में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक अलग दृष्टिकोण रखा और कहा कि H-1B तक सीमित पहुंच से कुशल लोगों को देश में बनाए रखने में मदद मिल सकती है। नई दिल्ली लगातार यह भी कहती रही है कि पेशेवरों की आवाजाही से दोनों देशों को लाभ होता है।

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प्रभावित कामगार किन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं?

कुछ पेशेवर नियोक्ता के प्रायोजन के बिना आवेदन करने के योग्य हो सकते हैं। इनके लिए असाधारण क्षमता वाले लोगों की EB-1A श्रेणी या EB-2 नेशनल इंटरेस्ट वेवर एक विकल्प है। दोनों रास्तों में आवेदक की उपलब्धियों और प्रस्तावित काम के आधार पर कड़ी शर्तें पूरी करनी होती हैं।

EB-1A आवेदकों को आम तौर पर राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मिली पहचान का प्रमाण देना होता है। इसमें किसी क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान, मान्यता प्राप्त पुरस्कार, प्रकाशित शोध, दूसरों के काम का मूल्यांकन या किसी प्रतिष्ठित संगठन में नेतृत्वकारी भूमिका जैसे प्रमाण शामिल हो सकते हैं। आव्रजन विशेषज्ञ साई श्रीनिवास रेड्डी भूमिरेड्डी ने कहा कि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा सभी प्रमाणों का समग्र रूप से आकलन करती है।

नेशनल इंटरेस्ट वेवर के आवेदक को पहले EB-2 के लिए योग्य होना पड़ता है, आम तौर पर उन्नत डिग्री या असाधारण क्षमता के आधार पर। मैटर ऑफ धनासर फैसले के तहत व्यक्ति को दिखाना होता है कि प्रस्तावित काम का पर्याप्त महत्व और राष्ट्रीय अहमियत है, वह उसे आगे बढ़ाने की अच्छी स्थिति में है, और सामान्य नौकरी प्रस्ताव तथा श्रम प्रमाणन की शर्तों में छूट देना अमेरिका के हित में होगा।

आव्रजन विशेषज्ञ मिथि जायसवाल ने बताया कि आवेदकों को अपनी नौकरी के पदनाम से आगे के प्रमाण क्यों देने पड़ते हैं:

सॉफ्टवेयर विकास की सामान्य भूमिका या ऊंचे वेतन वाली नौकरी अपने आप राष्ट्रीय महत्व साबित नहीं करती,

इनमें से किसी भी रास्ते पर जाने वाले कामगारों को अपनी वैध आव्रजन स्थिति और काम की अनुमति अलग से बनाए रखनी होगी। अप्रवासी याचिका दाखिल करने से H-1B स्थिति अपने आप नहीं बढ़ती, और याचिका मंजूर होने के बाद भी वीजा संख्या उपलब्ध होने तक इंतजार करना पड़ सकता है। व्यावहारिक विकल्प हर व्यक्ति की योग्यता, आवेदन के इतिहास और मौजूदा स्थिति में बचे समय पर निर्भर करते हैं।

मुख्य बातें

  • वेंस ने अपनी अपूर्ण भाषा की जिम्मेदारी स्वीकार की और कहा कि उनकी आलोचना नियोक्ताओं तथा वीजा प्रणाली पर थी।
  • भारत ने शब्दावली की निंदा की और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय पेशेवरों के योगदान का बचाव किया।
  • 8 अक्टूबर की PERM रोक आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों पर लागू है और नई तथा लंबित अर्जियों को प्रभावित करती है।
  • मौजूदा H-1B स्थिति अपनी शर्तों के तहत वैध रहती है, लेकिन देरी से स्थायी निवास की योजनाएं और भविष्य में कुछ विस्तार जटिल हो सकते हैं।
  • TCS और विप्रो को PERM के सीमित इस्तेमाल और स्थानीय भर्ती बढ़ने के आधार पर कारोबार पर तत्काल असर कम रहने की उम्मीद है।
  • स्वतंत्र ग्रीन कार्ड रास्तों में मजबूत प्रमाण देना, वैध स्थिति बनाए रखना और कई आवेदकों के लिए आगे भी इंतजार करना जरूरी है।
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