ढाका के 257 पूजा स्थलों को पुलिस सुरक्षा
दुर्गा पूजा के दौरान अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर नजर रखने के लिए ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने सोशल मीडिया की निगरानी बढ़ा दी है। इसके साथ ही राजधानी के 257 पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की आधिकारिक योजना के तहत 2,072 अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, पूजा स्थलों पर पुलिसकर्मी लगातार मौजूद रहेंगे और आपात स्थितियों के लिए विशेष टीमें तैयार रहेंगी।
विषय-सूची
- ढाका के 257 पूजा स्थलों को पुलिस सुरक्षा
- सोशल मीडिया पर पुलिस की नजर क्यों
- कैमरों से मंदिरों की निगरानी केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से
- आपात स्थितियों के लिए विशेष टीमें तैयार
- देशभर में 212,000 से अधिक अंसार सदस्य
- दूरदराज के पूजा स्थलों तक सीमा बल की तैनाती
- 615 स्थलों की सुरक्षा करेगा तटरक्षक बल
- विसर्जन के दौरान सड़कों और नदियों पर सुरक्षा
- महत्वपूर्ण तारीखें और जनता की भूमिका
- मुख्य बिंदु
डीएमपी आयुक्त मोसलेह उद्दीन अहमद ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:45 बजे ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में इन व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उनकी ब्रीफिंग में अभियान के तीन पहलुओं पर जोर दिया गया: मंदिरों और अस्थायी पूजा स्थलों की सुरक्षा, ऑनलाइन भ्रामक सूचनाओं पर कार्रवाई और प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए वाइजघाट ले जाने वाले जुलूस की सुरक्षा।
डीएमपी के सुरक्षा बयान के अनुसार, पूजा स्थलों को उनके महत्व, संभावित भीड़ और आसपास की सुरक्षा स्थिति के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है। पुलिस पूजा स्थलों की सुरक्षा के साथ-साथ आसपास की सड़कों पर भी गश्त करेगी।
देशभर में राजधानी के इस अभियान के साथ 212,818 अंसार और ग्राम रक्षा दल के सदस्यों, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवानों और करीब 3,500 तटरक्षक बल के सदस्यों की तैनाती की जा रही है। उनकी जिम्मेदारियां भीड़भाड़ वाले शहरी मंदिरों से लेकर दूरदराज की बस्तियों, सीमावर्ती जिलों और नदी किनारों तक फैली हैं।
श्रद्धालुओं, आयोजकों और आसपास के निवासियों के लिए इन व्यवस्थाओं का मतलब है कि प्रमुख प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा जांच होगी, भीड़ जुटने वाले स्थानों पर कैमरे नजर रखेंगे और विसर्जन मार्ग पर अतिरिक्त कर्मी तैनात रहेंगे। पुलिस ने लोगों से यह भी कहा है कि किसी सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करें और संदिग्ध घटनाओं की जानकारी नजदीकी थाने या राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर 999 पर दें।
सोशल मीडिया पर पुलिस की नजर क्यों
अहमद ने कहा कि त्योहार के बारे में अफवाहें, गलत सूचनाएं और जानबूझकर किए जाने वाले भ्रामक प्रचार रोकने के लिए डीएमपी ने साइबर निगरानी बढ़ाई है। यहां साइबर निगरानी का मतलब ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना है, ताकि ऐसी सूचनाओं की पहचान हो सके जो पूजा स्थलों पर चल रहे भौतिक सुरक्षा इंतजामों के साथ-साथ जनसुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
आयुक्त ने निवासियों से सोशल मीडिया पर किए गए दावों की सत्यता जांचे बिना उन्हें प्रसारित न करने की अपील की। उन्होंने लोगों से सुरक्षा से जुड़ी कोई संदिग्ध घटना या सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस को बताने का भी आग्रह किया, ताकि अधिकारी जांच कर जरूरी कार्रवाई कर सकें।
अहमद ने कहा कि ब्रीफिंग के समय तक पुलिस को त्योहार से जुड़ी किसी खास तोड़फोड़ की साजिश की सूचना नहीं मिली थी। फिर भी उन्होंने कहा कि समारोहों को बाधित करने या लोगों में डर पैदा करने की कोशिशों से निपटने के लिए पुलिस तैयार है।
ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बाद डीएमपी आयुक्त ने कहा:
उन्होंने कहा, "त्योहार के दौरान किसी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए हम हर संभावित खतरे को गंभीरता से ले रहे हैं।"
बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने भी अफवाहों, गलत सूचनाओं और सांप्रदायिक उकसावे पर विशेष निगरानी की घोषणा की है। इसके संचालन निदेशक, लेफ्टिनेंट कर्नल एमडी महबूब मुर्शेद रहमान ने लोगों से संवेदनशील सूचनाएं आगे भेजने से पहले उनकी पुष्टि करने को कहा। दोनों बलों ने जनता से इस अपील के साथ-साथ मैदान में तैनात कर्मियों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था भी की है।
कैमरों से मंदिरों की निगरानी केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से
डीएमपी की निगरानी व्यवस्था में स्थिर सीसीटीवी कैमरे और पुलिसकर्मियों के शरीर पर लगाए गए कैमरे शामिल हैं। अहमद ने कहा कि सभी 257 पूजा स्थलों के सीसीटीवी सिस्टम को डीएमपी के नियंत्रण कक्ष से जोड़ दिया गया है, ताकि वहां के अधिकारी दिन-रात पूरे शहर की स्थिति देख सकें।
पूजा स्थलों पर तैनात पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरे भी दिए गए हैं, जिनका लाइव वीडियो नियंत्रण कक्ष में देखा जा सकता है। स्थिर कैमरे अपने सामने के क्षेत्र की तस्वीर दिखाते हैं, जबकि पुलिसकर्मियों के कैमरों से उनकी तैनाती की जगह का दृश्य मिलता है।
प्रमुख पूजा स्थलों के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा जांच के लिए मेटल डिटेक्टर फ्रेम लगाए गए हैं। पुलिस पूजा स्थलों के आसपास गश्त करेगी और संदिग्ध लोगों तथा वस्तुओं पर नजर रखेगी। मंडप वह स्थान है जिसे त्योहार के दौरान पूजा के लिए सजाया जाता है; वहां अक्सर प्रतिमाओं को रखने के लिए अस्थायी ढांचा बनाया जाता है।
आयुक्त के अनुसार, नौ प्रमुख मंडपों में से प्रत्येक पर पुलिस और अंसार के 50-50 कर्मी तैनात होंगे। इन स्थलों पर कुल 450 कर्मी तैनात किए जाएंगे। बाकी पूजा स्थलों पर तैनाती डीएमपी की तय चार श्रेणियों के अनुसार होगी, हर स्थान पर समान संख्या में कर्मी नहीं होंगे।
आपात स्थितियों के लिए विशेष टीमें तैयार
डीएमपी की आधिकारिक योजना में नियमित ड्यूटी करने वाले कर्मियों के अलावा 2,072 पुलिसकर्मियों की तैनाती शामिल है। पुलिस के अलग-अलग विभाग अपने काम में समन्वय करेंगे और पूजा स्थल के सुरक्षा कर्मियों, गश्ती दलों तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को जोड़ेंगे।
स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिक्स टीम, जिसे स्वाट के नाम से जाना जाता है, विस्फोटक बरामदगी और बम निरोधक दल, डॉग स्क्वॉड और अपराध स्थल इकाई के साथ तैयार रहेगी। किसी घटना से निपटने के लिए पूजा स्थल पर तैनात कर्मियों से अधिक सहायता की जरूरत होने पर ये इकाइयां विशेष सहयोग देंगी।
बम निरोधक कर्मी संदिग्ध विस्फोटक उपकरणों से निपटते हैं, जबकि अपराध स्थल इकाई घटनास्थल की जांच में मदद करती है। उनकी तैयारी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत नियमित पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पूजा स्थलों के आसपास गतिविधियों का प्रबंधन करते हुए किसी घटना पर तेजी से कार्रवाई कर सकेंगे।
ब्रीफिंग में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त एमडी अबुल बशर तालुकदार, एमडी शफीकुल इस्लाम, मोहम्मद शम्सुल हक और मोहम्मद उस्मान गनी शामिल थे। उनके कार्यक्षेत्रों में सुरक्षा, जासूसी, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, प्रौद्योगिकी और परिचालन संबंधी जिम्मेदारियां आती हैं। इस तरह त्योहार की तैयारियों में डीएमपी के कई विभाग शामिल हैं।
देशभर में 212,000 से अधिक अंसार सदस्य
अंसार और ग्राम रक्षा दल के महानिदेशक मेजर जनरल अब्दुल मोतालेब सज्जाद महमूद ने 15 से 22 अक्टूबर तक देशभर में 212,818 सदस्यों की तैनाती की घोषणा की। इस बल में 146,488 पुरुष और 66,330 महिलाएं शामिल हैं। घोषित तैनाती में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 31 प्रतिशत है।
ढाका में डीएमपी की चार श्रेणियों के मुकाबले अंसार की पूजा स्थलों के लिए तीन श्रेणियां हैं। अत्यंत महत्वपूर्ण 6,914 मंडपों में से प्रत्येक पर आठ सदस्य तैनात होंगे। महत्वपूर्ण श्रेणी के 11,781 और सामान्य श्रेणी के 14,470 मंडपों में से प्रत्येक पर छह सदस्य तैनात किए जाएंगे।
इन श्रेणियों में कुल 33,165 मंडप शामिल हैं। हर मंडप में तैनात होने वाले कर्मियों की संख्या को मंडपों की संख्या से गुणा करने पर घोषित 212,818 सदस्यों की कुल तैनाती बनती है। इससे पता चलता है कि देशव्यापी तैनाती पूजा स्थलों में किस तरह बांटी गई है।
इसके अलावा, 104 स्ट्राइक फोर्स टीमों में संगठित 624 कर्मी आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहेंगे। अंसार बटालियन इन टीमों का समन्वय करेंगी। इससे स्थायी तैनाती वाले कर्मियों के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर तेजी से पहुंचने वाले दल भी उपलब्ध होंगे।
अंसार और ग्राम रक्षा दल जानकारी जुटाने, हालात पर नजर रखने और त्वरित कार्रवाई में मदद के लिए अपने शारदीय सुरक्षा ऐप का इस्तेमाल करेंगे। मंडपों पर तैनात ग्राम रक्षा दल के सदस्य मौके से जानकारी देंगे, जिससे बल उभरते जोखिमों की पहचान कर घटनाओं और अफवाहों पर कार्रवाई कर सकेगा।
दूरदराज के पूजा स्थलों तक सीमा बल की तैनाती
लेफ्टिनेंट कर्नल एमडी महबूब मुर्शेद रहमान की ओर से घोषित तैनाती के ब्योरे के अनुसार, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश 22 अक्टूबर तक 2,727 मंडपों की सुरक्षा करेगा। उनकी ब्रीफिंग के एक अन्य विवरण में यह संख्या करीब 2,787 बताई गई है। प्रकाशित तीन भौगोलिक श्रेणियों का कुल जोड़ 2,727 है।
इन श्रेणियों में सीमा से आठ किलोमीटर के दायरे में 1,425 मंडप, बटालियन मुख्यालय से तीन किलोमीटर के दायरे में 1,119 मंडप और दुर्गम या दूरदराज के इलाकों में 183 मंडप शामिल हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए बीजीबी ने 21 बेस कैंप बनाए हैं।
रहमान ने कहा कि कर्मियों ने पूजा स्थलों का दौरा कर पहुंच मार्गों, स्थानीय हालात और संचार व्यवस्था का आकलन किया है। इन जांचों से यह तय करने में मदद मिलती है कि कर्मी किसी स्थान तक कैसे पहुंच सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सहायता कैसे दे सकते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां पहुंचना मुश्किल है।
सीमावर्ती जिलों में तैनाती के अलावा बीजीबी के जवान 16 से 22 अक्टूबर तक गोपालगंज, मदारीपुर और फरीदपुर में भी सेवाएं देंगे। अभियान का समन्वय स्थानीय प्रशासन, पुलिस और पूजा समारोह समितियों के साथ किया जाएगा।
सूचना साझा करने और फैसले लेने में मुख्यालय तथा मैदान में सक्रिय निगरानी इकाइयां मदद करेंगी। त्योहार के दौरान कर्मियों का समन्वय करने और स्थिति का आकलन करने के लिए बीजीबी शारदीय सुरक्षा नाम के एक ऐप का भी इस्तेमाल करेगा।
615 स्थलों की सुरक्षा करेगा तटरक्षक बल
बांग्लादेश तटरक्षक बल के महानिदेशक रियर एडमिरल एमडी मोइनुल हसन ने कहा कि तटीय और नदी क्षेत्रों में 615 मंदिरों और मंडपों की सुरक्षा के लिए करीब 3,500 कर्मी काम कर रहे हैं। उन्होंने 16 अक्टूबर को मीरपुर केंद्रीय मंदिर का दौरा करने के बाद तैनाती की जानकारी दी।
बल की जिम्मेदारियों में पूर्वी क्षेत्र के 63, पश्चिमी क्षेत्र के 144, दक्षिणी क्षेत्र के 371 और ढाका क्षेत्र के 37 स्थल शामिल हैं। इस तरह तटरक्षक बल के 615 स्थलों में से करीब 60 प्रतिशत दक्षिणी क्षेत्र में हैं, जो अभियान का सबसे बड़ा हिस्सा है।
कर्मी चटगांव और खुलना के आसपास के तटीय इलाकों, बरिशाल डिवीजन के बड़े हिस्सों और ढाका की नदियों के आसपास के क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। उनकी जिम्मेदारियों में गश्त, खुफिया निगरानी और अन्य सुरक्षा बलों तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय शामिल है।
तटरक्षक बल की तैनाती 16 अक्टूबर को शुरू हुई और प्रतिमा विसर्जन पूरा होने तक जारी रहने वाली है। हसन ने कहा कि हिंदू श्रद्धालु सुरक्षित रूप से त्योहार में हिस्सा ले सकें, इसके लिए बल ने खुफिया निगरानी और अन्य एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाया है।
तटरक्षक बल का आपात सहायता नंबर 16111 है। बल ने लोगों से अपने अधिकार क्षेत्र में मदद की जरूरत पड़ने पर इस नंबर पर संपर्क करने को कहा है।
विसर्जन के दौरान सड़कों और नदियों पर सुरक्षा
डीएमपी ने विजयादशमी के लिए अलग योजना बनाई है। इस दिन त्योहार के समापन के धार्मिक कार्यक्रमों के तहत प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है। ढाका का जुलूस ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर से शुरू होकर वाइजघाट पर समाप्त होगा।
मार्ग, भीड़ के आकार और आसपास के हालात के अनुसार अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। डीएमपी का कहना है कि वह संबंधित आयोजकों और अधिकारियों के साथ समन्वय करेगा, ताकि सार्वजनिक आवाजाही बनाए रखते हुए जुलूस आगे बढ़ सके। ब्रीफिंग में जुलूस के रवाना होने का समय नहीं बताया गया।
पानी में नौका दुर्घटनाओं और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए तटरक्षक बल विसर्जन स्थलों पर विशेष गोताखोर दल तैयार रखेगा। नदियों और जलमार्गों के पास भीड़ जुटने के दौरान उसकी गश्त और जन-जागरूकता गतिविधियां जारी रहेंगी।
जल सुरक्षा अभियान में नावों पर जरूरत से ज्यादा लोगों को न बैठाने, यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनने और तैरना न जानने वालों को नावों में न चढ़ने की सलाह दी गई है। ये उपाय मंदिरों की पुलिस सुरक्षा से अलग, त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पानी में और उसके आसपास आने-जाने से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देते हैं।
महत्वपूर्ण तारीखें और जनता की भूमिका
घोषित तैनाती के कार्यक्रम एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं। अंसार के कर्मियों की तैनाती 16 अक्टूबर की ब्रीफिंग से पहले शुरू हो रही है, जबकि बीजीबी की तैनाती 22 अक्टूबर तक जारी रहेगी। तटरक्षक बल की तैनाती प्रतिमा विसर्जन पूरा होने तक चलेगी।
- 15 अक्टूबर 2026: अंसार और ग्राम रक्षा दल की देशव्यापी तैनाती शुरू होगी। 22 अक्टूबर तक 212,818 सदस्य तैनात रहेंगे।
- 16 अक्टूबर: डीएमपी सुबह 10:45 बजे ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में ढाका की सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी देगा। तटरक्षक बल की तैनाती शुरू होगी और गोपालगंज, मदारीपुर तथा फरीदपुर में बीजीबी की तैनाती भी शुरू होगी।
- विजयादशमी: ढाका का विसर्जन जुलूस ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर से वाइजघाट तक प्रस्तावित है। अपने-अपने काम के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मी और तटरक्षक बल के गोताखोर दल तैयार रहेंगे।
- 22 अक्टूबर: अंसार और बीजीबी की घोषित तैनाती अवधि समाप्त होगी।
अहमद ने पूजा समारोह समितियों, मंदिर प्रबंधन समितियों, स्वयंसेवकों और निवासियों से कानून-व्यवस्था बलों के साथ मिलकर काम करने को कहा। उन्होंने श्रद्धालुओं और आगंतुकों से पूजा स्थलों के सुरक्षा नियमों का पालन करने और ड्यूटी कर रहे अधिकारियों का सहयोग करने का भी आग्रह किया।
जनता से की गई मुख्य अपीलें स्पष्ट हैं: प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच में सहयोग करें, संवेदनशील ऑनलाइन दावों को साझा करने से पहले उनकी पुष्टि करें और संदिग्ध घटनाओं की जानकारी तुरंत दें। डीएमपी ने नजदीकी थाने और 999 को संपर्क के लिए बताया है, जबकि 16111 पर तटरक्षक बल से संपर्क किया जा सकता है।
बांग्लादेश में त्योहार के लिए चलाए जा रहे इस अभियान में पूजा स्थलों पर सुरक्षा कर्मी, केंद्रीय कैमरा निगरानी, मोबाइल आपातकालीन टीमें और नदी में बचाव की तैयारियां शामिल हैं। इसका व्यावहारिक उद्देश्य पूजा मंडप पहुंचने से लेकर विसर्जन के अंतिम जुलूस में शामिल होने तक लोगों की सुरक्षा करना है।
मुख्य बिंदु
- डीएमपी की आधिकारिक योजना में 257 पूजा स्थलों पर 2,072 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती शामिल है।
- साइबर निगरानी, सीसीटीवी और पुलिस बॉडी कैमरे ढाका की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।
- ढाका के नौ प्रमुख मंडपों में से प्रत्येक पर पुलिस और अंसार के 50-50 कर्मी तैनात होंगे।
- अंसार और ग्राम रक्षा दल ने 15 से 22 अक्टूबर तक देशभर में 212,818 कर्मियों की तैनाती की घोषणा की है।
- बीजीबी की विस्तृत श्रेणियों में 2,727 मंडप शामिल हैं और दूरदराज के इलाकों में सहायता के लिए 21 बेस कैंप बनाए गए हैं।
- तटरक्षक बल 615 स्थलों की सुरक्षा कर रहा है और विसर्जन के दौरान आपात स्थितियों से निपटने के लिए गोताखोर दल तैयार रखेगा।
- ढाका का विसर्जन जुलूस ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर से वाइजघाट तक जाएगा।
- पुलिस की आपात सहायता 999 पर उपलब्ध है; तटरक्षक बल की हेल्पलाइन 16111 है।






