पांच राज्यों में चुनाव से पहले मतदाता सूचियों का होगा संशोधन
भारत निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराने का आदेश दिया है। मसौदा सूचियां 12 नवंबर, 2026 को जारी होंगी और अंतिम सूचियां 4 जनवरी, 2027 को प्रकाशित की जाएंगी। इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा शामिल हैं, जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
विषय-सूची
- पांच राज्यों में चुनाव से पहले मतदाता सूचियों का होगा संशोधन
- किन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा पुनरीक्षण?
- इस पुनरीक्षण की अहम तारीखें
- पंजीकरण गहन पुनरीक्षण से कैसे अलग है?
- युवा मतदाता बाद में आने वाले जन्मदिनों से पहले आवेदन कर सकते हैं
- नाम हटाने के अनुरोधों की होगी अतिरिक्त जांच
- पार्टियों को पढ़ने योग्य सूचियां और बदलावों का रिकॉर्ड मिलेगा
- मतदान केंद्रों तक पहुंच आसान और दूरी कम होनी चाहिए
- कर्मियों और सार्वजनिक निगरानी से तय होगा अमल
- मुख्य बातें
15 अक्टूबर को घोषित इस पुनरीक्षण में 1 जनवरी, 2027 की अर्हता तिथि के आधार पर पंजीकरण के दावे स्वीकार किए जाएंगे। इसमें राजनीतिक दलों को पढ़ने योग्य PDF मतदाता सूचियां देने, नाम हटाने के अनुरोधों की कड़ी जांच करने और पंजीकरण में सहायता चाहने वालों के लिए सहायता केंद्र खोलने की व्यवस्था भी की गई है।
यह फैसला अलग से चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच आया है। विवाद में कथित तौर पर 13 करोड़ नाम हटाए जाने, यानी 130 मिलियन प्रविष्टियों, और इस प्रक्रिया के दौरान मांगी गई अतिरिक्त घोषणाओं पर आपत्तियां शामिल हैं।
संक्षिप्त पुनरीक्षण, जिसे SSR कहा जाता है, गहन प्रक्रिया के जरिए सूचियों को नए सिरे से बनाने के बजाय मौजूदा मतदाता सूचियों को अद्यतन करता है। यह वार्षिक प्रक्रिया फिर शुरू हो रही है, जो देशभर में चरणबद्ध तरीके से SIR किए जाने या उसकी तैयारी के दौरान बाधित हो गई थी।
मतदाताओं के लिए तुरंत उठाया जा सकने वाला कदम स्पष्ट है: मसौदा सूची जांचें, नाम न होने पर आवेदन करें और घोषित समयसीमा के भीतर आपत्ति या संशोधन का अनुरोध दर्ज कराएं। इस SSR के तहत बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर नहीं जाएंगे। इसके बजाय मसौदा और अंतिम सूचियां मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित की जाएंगी।
किन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा पुनरीक्षण?
15 अक्टूबर का आदेश अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल पर लागू होगा।
इनमें से पांच राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च या मई 2027 में समाप्त हो रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 सीटें हैं और उसका कार्यकाल 22 मई को समाप्त होगा। 60 सीटों वाली मणिपुर, 40 सीटों वाली गोवा, 117 सीटों वाले पंजाब और 70 सीटों वाले उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा।
इन पांचों विधानसभाओं में कुल 690 सीटें हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश की 403 सीटें यानी करीब 58% शामिल हैं। चुनाव नजदीक होने से यह पुनरीक्षण उन मतदाताओं के लिए खास तौर पर अहम है, जो मतदान से पहले सूची में अपना नाम शामिल कराना चाहते हैं।
आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना के लिए आयोग बाद में समय-सारिणी घोषित करेगा। इन जगहों पर SIR जारी है या हाल ही में पूरा हुआ है।
हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए भी अलग समय-सारिणी जारी की जाएगी। आयोग ने कहा कि इन तीनों जगहों पर मौसम की स्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा, जहां SIR शुरू नहीं हुआ है।
इस पुनरीक्षण की अहम तारीखें
आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत पुनरीक्षण का निर्देश दिया है। यह धारा मतदाता सूचियों की तैयारी और पुनरीक्षण से जुड़ी है। समय-सारिणी में मतदान केंद्रों की तैयारी, मसौदा सूची के प्रकाशन और आवेदनों पर फैसलों के लिए अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं।
- 29 सितंबर, 2026: आयोग ने अधिकारियों को छूट गए लोगों, युवाओं और पहली बार पात्र बने मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाने का निर्देश दिया।
- 7 अक्टूबर: स्पष्टीकरण में कहा गया कि SIR अवधि के बाहर सामान्य पंजीकरण फॉर्म लागू होंगे।
- 9 अक्टूबर: आदेश में व्यक्तिगत आवेदकों के फॉर्म 7 जमा करने की सीमा तय की गई, ताकि बड़ी संख्या में नाम हटाने के अनुरोधों को हतोत्साहित किया जा सके।
- 15 अक्टूबर: आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SSR की घोषणा की।
- 2 नवंबर: मतदान केंद्रों का पुनर्गठन पूरा करना होगा।
- 12 नवंबर: मसौदा मतदाता सूचियां प्रकाशित होंगी और दावे तथा आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि शुरू होगी।
- 11 दिसंबर: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि समाप्त होगी।
- 28 दिसंबर: अधिकारियों को दावों और आपत्तियों पर फैसले पूरे करने होंगे।
- 4 जनवरी, 2027: अंतिम मतदाता सूचियां प्रकाशित करने का कार्यक्रम है।
इससे पहले SSR की समय-सारिणी 7 अगस्त, 2024 को जारी हुई थी और अंतिम सूचियां जनवरी 2025 में प्रकाशित की गई थीं। नई समय-सारिणी SIR से जुड़ी बाधा के बाद सूचियों को अद्यतन करने का नियमित अवसर फिर उपलब्ध कराती है।
पंजीकरण गहन पुनरीक्षण से कैसे अलग है?
SSR के दौरान नाम शामिल कराने के इच्छुक आवेदक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म 6 का इस्तेमाल करेंगे। उन्हें अपने या अपने माता-पिता का संबंध पहले के किसी गहन पुनरीक्षण से जोड़ने वाली अतिरिक्त SIR घोषणा जमा नहीं करनी होगी।
यह अतिरिक्त घोषणा विवाद का प्रमुख मुद्दा रही है, क्योंकि इसके तहत आवेदकों को परिवार के विवरण करीब दो दशक पुरानी मतदाता सूचियों से जोड़ने पड़ते थे। घोषणा से जुड़ा मुद्दा उन मामलों में शामिल है जिन पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।
आयोग के 7 अक्टूबर के स्पष्टीकरण के मुताबिक, यह अतिरिक्त दस्तावेज केवल वहां लागू होता है जहां SIR किया जा रहा हो। SIR से बाहर की अवधि में आवेदनों के लिए सामान्य फॉर्म लागू होते हैं। आवेदकों को पंजीकरण की सामान्य शर्तें पूरी करनी होंगी, लेकिन नागरिकता और पुरानी मतदाता सूचियों से संबंध स्थापित करने वाली अतिरिक्त SIR प्रक्रिया लागू नहीं होगी।
29 सितंबर का नामांकन अभियान भी अतिरिक्त SIR घोषणा के बिना मूल फॉर्म 6 का इस्तेमाल करता है। इस अभियान में विशेष शिविर और बूथ स्तर के अधिकारियों के घरों पर जाने की व्यवस्था शामिल है। SSR में यह व्यवस्था अलग है और इसके तहत घर-घर दौरे नहीं होंगे।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने या मौजूदा प्रविष्टि बदलने के आवेदन में आधार देना स्वैच्छिक है। आयोग के पत्र में स्पष्ट रूप से उन आवेदकों को संरक्षण दिया गया है जो आधार नहीं दे सकते।
"हालांकि, मतदाता सूची में नाम शामिल करने का कोई भी आवेदन खारिज नहीं किया जाएगा और आधार संख्या देने या बताने में किसी व्यक्ति की असमर्थता के कारण मतदाता सूची की कोई भी प्रविष्टि हटाई नहीं जाएगी," पत्र में कहा गया है।
युवा मतदाता बाद में आने वाले जन्मदिनों से पहले आवेदन कर सकते हैं
इस पुनरीक्षण के लिए मुख्य अर्हता तिथि 1 जनवरी, 2027 है। अर्हता तिथि वह तारीख है जिसके आधार पर अधिकारी यह तय करते हैं कि कोई व्यक्ति पंजीकरण की शर्तें पूरी करता है या नहीं, जिनमें 18 वर्ष का होना भी शामिल है।
आयोग 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर, 2027 को पात्र होने वाले लोगों से अग्रिम आवेदन भी स्वीकार करेगा। 1 जनवरी से जुड़े दावों पर मौजूदा चरण में फैसला होगा; बाद की तारीखों के आवेदनों पर संबंधित तिमाही में कार्रवाई की जाएगी।
इसलिए 1 जनवरी के बाद 18 साल के होने वाले युवाओं के पास साल के दौरान पात्रता हासिल करने की एक और तारीख होगी। अग्रिम आवेदन की व्यवस्था के तहत अधिकारी उस बाद की तारीख से पहले आवेदन प्राप्त कर सकेंगे और सभी को अगले वार्षिक पुनरीक्षण तक इंतजार नहीं करना होगा।
जिला सहायता केंद्रों पर प्रवासियों और कमजोर तथा वंचित समूहों के लोगों को पंजीकरण में मदद दी जाएगी। आयोग ने अधिकारियों को महिलाओं, ट्रांसजेंडर लोगों, अनुसूचित जनजातियों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग लोगों के प्रति संवेदनशील रहने का निर्देश भी दिया है।
निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) अपने निर्वाचन क्षेत्रों के आवेदनों पर फैसला करने के जिम्मेदार हैं। उनका घोषित दायित्व हर पात्र नागरिक को सूची में शामिल करना और अपात्र लोगों को सूची से बाहर रखना है। कमियों की पहचान के लिए अधिकारियों को पहले के आंकड़ों में पंजीकृत निवासियों का अनुपात, पुरुष और महिला मतदाताओं का संतुलन और 18 तथा 19 वर्ष की आयु के लोगों का पंजीकरण जांचना होगा।
नाम हटाने के अनुरोधों की होगी अतिरिक्त जांच
फॉर्म 7 का इस्तेमाल किसी प्रविष्टि पर आपत्ति करने या उसे हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है। बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल किए जाने की चिंताओं के बाद आयोग के 9 अक्टूबर के आदेश में व्यक्तिगत मतदाताओं द्वारा जमा किए जा सकने वाले आवेदनों की संख्या सीमित की गई है। यहां बताए गए ऐलान में किसी आम व्यक्ति के आवेदनों की संख्यात्मक सीमा नहीं बताई गई थी।
अगर किसी मतदान केंद्र पर प्रस्तावित नाम कटौती मतदाताओं के 2% से अधिक हो, तो ERO को उन मामलों का व्यक्तिगत रूप से सत्यापन करना होगा। उन्हें उन मामलों की भी जांच करनी होगी जिनमें एक ही व्यक्ति ने पांच से अधिक प्रविष्टियों पर आपत्ति की हो।
1,200 मतदाताओं वाले मतदान केंद्र पर 2% की सीमा 24 नाम होगी। इससे अधिक नाम हटाने पर अतिरिक्त व्यक्तिगत जांच शुरू होगी। इस तरह जांच की सीमा हर जगह एक ही निश्चित संख्या लागू करने के बजाय स्थानीय मतदाता सूची के आकार से जुड़ी है।
हर नाम कटौती के लिए कारणों वाला फैसला देना होगा, जिसे स्पीकिंग ऑर्डर कहा जाता है। इससे पहले प्रभावित व्यक्ति को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। स्पीकिंग ऑर्डर में बताया जाता है कि अधिकारी ने फैसला क्यों लिया। इसे आयोग के ECINET प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना होगा।
दावों या आपत्तियों पर कोई फैसला संबंधित सूचियां प्रकाशित होने के कम से कम सात पूरे दिन बाद ही लिया जा सकता है। फैसले के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील की जा सकती है।
आयोग के निर्देशों में समान व्यक्तिगत विवरण या तस्वीरों, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके मतदाताओं और मृत मतदाताओं से जुड़े पुष्ट मामलों का भी उल्लेख है। नाम हटाने के लिए मतदाता से फॉर्म 7 जरूरी है। मृत मतदाता के मामले में यह फॉर्म कोई करीबी रिश्तेदार या परिवार का सदस्य दे सकता है।
आयोग ऐसे सॉफ्टवेयर का फिर इस्तेमाल कर सकता है जो जनसांख्यिकीय रूप से समान प्रविष्टियों और तस्वीरों में समानता वाली प्रविष्टियों को चिह्नित करता है। इन्हें DSE और PSE कहा जाता है। इन जांचों में व्यक्तिगत जानकारी या तस्वीरों की तुलना कर उन प्रविष्टियों की पहचान की जाती है जिनकी पड़ताल जरूरी है। SIR के दौरान इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं हुआ था।
पार्टियों को पढ़ने योग्य सूचियां और बदलावों का रिकॉर्ड मिलेगा
राजनीतिक दलों को मसौदा और अंतिम मतदाता सूचियां बिना तस्वीरों के पढ़ने योग्य PDF प्रारूप में दी जाएंगी। इससे पहले तस्वीरों के रूप में PDF उपलब्ध कराई जाती थीं। आयोग ने चुनावों के दौरान चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और मान्यता प्राप्त दलों के लिए वर्णमाला क्रम में व्यवस्थित पढ़ने योग्य सूचियां देने की घोषणा भी की।
विपक्षी दल ऐसी मशीन-पठनीय सूचियों की मांग करते रहे हैं जिन्हें डिजिटल रूप से खोजा, क्रमबद्ध और जांचा जा सके। तस्वीर वाली PDF में पन्ना लगभग तस्वीर की तरह होता है; टेक्स्ट-आधारित दस्तावेज में सॉफ्टवेयर से नाम ढूंढ़ना और प्रविष्टियां जांचना आसान होता है। आयोग ने नए प्रारूप को पढ़ने योग्य PDF बताया है।
मान्यता प्राप्त दलों को मसौदा चरण में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन दिखाने वाले परिशिष्ट भी मिलेंगे। ये रिकॉर्ड पहले अभिलेख और भविष्य में इस्तेमाल के लिए रखे जाते थे। इन्हें साझा करने से दलों को सूची के साथ-साथ उसमें हुए बदलावों का रिकॉर्ड भी मिलेगा।
दावों और आपत्तियों की सूचियां मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर प्रकाशित करनी होंगी और हर सप्ताह दलों को देनी होंगी। इससे आवेदन अवधि के दौरान लगातार रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और दलों को केवल शुरुआती मसौदा तथा अंतिम सूची देखने तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा।
मान्यता प्राप्त दलों के बूथ स्तर के एजेंट एक दिन में बूथ स्तर के अधिकारी को अधिकतम 10 फॉर्म दे सकते हैं। अगर कोई एजेंट दावे की अवधि में 30 से अधिक फॉर्म दाखिल करता है, तो ERO या सहायक ERO को उनका व्यक्तिगत रूप से सत्यापन करना होगा। ये नियम उस जांच से अलग हैं जो किसी व्यक्ति द्वारा पांच से अधिक प्रविष्टियों पर आपत्ति करने पर शुरू होती है।
मतदान केंद्रों तक पहुंच आसान और दूरी कम होनी चाहिए
2 नवंबर की समयसीमा में मतदान केंद्रों का पुनर्गठन और मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारी, दोनों शामिल हैं। आयोग की पूर्व मंजूरी न होने पर मतदान केंद्र में आम तौर पर 1,200 से अधिक मतदाता नहीं होने चाहिए।
मतदाताओं को मतदान केंद्र पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से अधिक यात्रा नहीं करनी चाहिए और न ही उन्हें प्राकृतिक बाधाएं पार करनी पड़नी चाहिए। मतदान केंद्र भूतल पर होने चाहिए। आयोग ने तय मानदंड पूरे करने वाले अपार्टमेंट परिसरों, समूह आवास परिसरों और शहरी झुग्गी बस्तियों में नए बूथों के लिए सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया है।
आवासीय परिसरों के मामले में अधिकारियों को भूतल पर साझा सुविधाओं या सामुदायिक हॉल वाले परिसरों की जांच करनी है। निवासियों के लिए अपने इलाके के भीतर या पास मतदान केंद्र होने से दूरी और मतदान की शारीरिक कठिनाई कम हो सकती है।
एक ही दरवाजा या फ्लैट नंबर साझा करने वाले परिवारों को मतदाता सूची के अलग-अलग हिस्सों या अलग-अलग मतदान केंद्रों में नहीं बांटना चाहिए। अधिकारियों को पतों का मानकीकरण करना होगा और ऐसे काल्पनिक मकान नंबरों की पहचान करनी होगी, जो वास्तविक सड़क पते नहीं बल्कि सूची को व्यवस्थित करने के लिए दिए गए नंबर होते हैं।
ये निर्देश पंजीकरण की कागजी प्रक्रिया को मतदान केंद्र तक पहुंचने के व्यावहारिक काम से जोड़ते हैं। सूची में सही नाम और पता होने से यह तय करने में मदद मिलती है कि किसी व्यक्ति को किस मतदान केंद्र पर भेजा जाएगा, जबकि केंद्रों की सीमाएं तय करती हैं कि एक ही घर के सदस्य एक ही जगह मतदान करेंगे या नहीं।
कर्मियों और सार्वजनिक निगरानी से तय होगा अमल
मुख्य सचिवों को चुनाव अधिकारियों के लिए पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए आयोग ने निर्देश दिया है कि जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी या सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के रूप में नामित पद इस प्रक्रिया के दौरान खाली न रहें।
आयोग ने मसौदा सूची और अंतिम सूची के प्रकाशन के बीच SSR से जुड़े अधिकारियों के तबादलों पर भी रोक लगाई है, जब तक कि उसकी पहले से मंजूरी न हो। यह अवधि 12 नवंबर से 4 जनवरी तक होगी और इसमें दावों तथा आपत्तियों को प्राप्त करना, उनकी जांच करना और उन पर फैसला करना शामिल है।
यह पुनरीक्षण मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे विपक्षी दलों और युवा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शनों के बीच हो रहा है। समझा जाता है कि निर्वाचन आयुक्त एस. एस. संधू और विवेक जोशी ने अन्य मुद्दों के साथ वार्षिक SSR में रुकावट को असामान्य बताया है।
आवेदक के लिए व्यावहारिक प्रक्रिया है: 12 नवंबर को मसौदा सूची जांचें, दावे की अवधि में जरूरी फॉर्म जमा करें और फैसले पर नजर रखें। अधिकारियों के लिए मुख्य कसौटी यह होगी कि समयसीमाओं, सुनवाई, सत्यापन जांच और सार्वजनिक रिकॉर्ड के जरिए 4 जनवरी को सटीक अंतिम सूची तैयार हो।
मुख्य बातें
- SSR में 17 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं, जिनमें पांच ऐसे राज्य हैं जहां 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
- मसौदा सूचियां 12 नवंबर, 2026 को आएंगी। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 11 दिसंबर को समाप्त होगी और अंतिम सूचियां 4 जनवरी, 2027 को जारी होंगी।
- अतिरिक्त SIR घोषणा के बिना सामान्य फॉर्म 6 लागू होगा। आधार देना स्वैच्छिक है।
- 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर, 2027 को पात्र होने वाले लोगों से अग्रिम आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
- नाम हटाने के अनुरोधों पर तय सीमाओं के आधार पर सत्यापन, सुनवाई, कारणयुक्त आदेश और अपील की व्यवस्था लागू होगी।
- राजनीतिक दलों को पढ़ने योग्य PDF मतदाता सूचियां और नाम जोड़ने, हटाने तथा बदलाव दर्ज करने वाले परिशिष्ट मिलेंगे।
- SSR के तहत बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर नहीं जाएंगे; जिला सहायता केंद्र पंजीकरण में मदद करेंगे।






