15 अक्टूबर के फैसले से 2018 में पहली बार मंजूर उपचार को मिली आगे बढ़ने की राह
जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के सलाहकार पैनल ने 15 अक्टूबर को निप्रो के रीढ़ की हड्डी की चोट के उपचार स्टेमिरैक को पूर्ण विपणन मंजूरी देने की सिफारिश की। यह उत्पाद सात साल की सशर्त मंजूरी के तहत नैदानिक उपयोग में आया था। पैनल ने उपचार की प्रभावकारिता और अन्य पहलुओं से जुड़े नए साक्ष्य स्वीकार किए, जिससे स्वास्थ्य मंत्री के औपचारिक फैसले का रास्ता खुला।
विषय-सूची
- 15 अक्टूबर के फैसले से 2018 में पहली बार मंजूर उपचार को मिली आगे बढ़ने की राह
- शुरुआती पहुंच की अनुमति से पहले जापान ने क्या शर्तें रखीं
- मरीज के अस्थि मज्जा की कोशिकाओं का उपयोग कैसे होता है
- शुरुआती 13 मरीजों के नतीजे क्या रहे
- चोट के ग्रेड में सुधार के मायने अलग-अलग क्यों हो सकते हैं
- बाद के तुलनात्मक मूल्यांकन की रूपरेखा
- मंजूरी की आलोचना क्यों हुई
- यह उपचार किन मरीजों के लिए तैयार किया गया था
- सुरक्षा की निगरानी में क्या शामिल है
- मुख्य बातें
स्टेमिरैक में मरीज के अपने अस्थि मज्जा से ली गई कोशिकाओं का इस्तेमाल होता है। इन्हें शरीर के बाहर विकसित किया जाता है और फिर नस के जरिए ड्रिप से शरीर में पहुंचाया जाता है। निप्रो ने इसे साप्पोरो मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ विकसित किया, जिनमें प्रोफेसर ओसामु होनमू भी शामिल हैं। इस उपचार का उद्देश्य दुर्घटना के कारण रीढ़ की हड्डी में चोट के बाद तंत्रिका संबंधी लक्षणों और शारीरिक कार्यक्षमता में सुधार करना है।
पैनल ने स्टेमिरैक को जापान का पहला पुनर्योजी चिकित्सा उत्पाद बताया, जो समय-सीमा वाली सशर्त मंजूरी से पूर्ण मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ा है। मरीजों के लिए इसका तात्कालिक महत्व यह है कि उपचार अस्थायी नियामक व्यवस्था से आगे बढ़ सकता है। स्टेमिरैक उस व्यवस्था के तहत पहले से उपलब्ध था और जापान की स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल था।
15 अक्टूबर की सिफारिश सलाहकार कदम है; इसके बाद मंत्री की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। घोषणा के विवरण में बैठक का वर्ष, मंत्री के अंतिम फैसले की तारीख और नए मूल्यांकन के संख्यात्मक नतीजे नहीं बताए गए। फिर भी, नियामक इतिहास और प्रकाशित अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि यह फैसला क्यों अहम है: जापान ने शुरुआत में उपचार की अनुमति दी थी, साथ ही निप्रो से कहा था कि वह नैदानिक उपयोग के दौरान अधिक मजबूत साक्ष्य जुटाए।
शुरुआती पहुंच की अनुमति से पहले जापान ने क्या शर्तें रखीं
स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय की 2018 की विचार-विमर्श रिपोर्ट में 21 नवंबर 2018 को समिति के उस फैसले का उल्लेख है, जिसमें सात साल के लिए सशर्त मंजूरी की सिफारिश की गई थी। फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज एजेंसी (पीएमडीए) ने निष्कर्ष निकाला कि स्टेमिरैक से कुछ लाभ मिलने की उम्मीद थी और संभावित लाभ की तुलना में इसकी सुरक्षा स्वीकार्य थी।
पीएमडीए ने यह भी कहा कि नैदानिक साक्ष्य सीमित होने के कारण आगे मूल्यांकन जरूरी है। जापान के फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज को नियंत्रित करने वाले कानून के अनुच्छेद 23-26 के तहत लागू मंजूरी व्यवस्था में उपचार शुरू करने की अनुमति थी, जबकि निर्माता बाद में मंजूरी के आवेदन के लिए साक्ष्य जुटाता।
शुरुआती पहुंच के साथ दो मुख्य शर्तें जुड़ी थीं। उपचार रीढ़ की हड्डी की चोट के विशेषज्ञ की देखरेख में ऐसे केंद्र पर होना था, जहां आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता हो। साथ ही, उपचार पाने वाले हर मरीज को दोबारा आवेदन से पहले जरूरी मूल्यांकन में शामिल करना था।
मुख्य पड़ाव बताते हैं कि शुरुआती आवेदन से लेकर पैनल की हालिया सिफारिश तक उपचार कैसे आगे बढ़ा:
- 29 जून 2018: निप्रो ने विपणन मंजूरी के लिए शुरुआती आवेदन जमा किया।
- 21 नवंबर 2018: मंत्रालय की समिति ने सात साल की समय-सीमा के साथ सशर्त मंजूरी की सिफारिश की।
- 28 दिसंबर 2018: सशर्त विपणन मंजूरी दी गई।
- 20 फरवरी 2019: मंत्रालय के मसौदा दिशानिर्देश में मरीजों के चयन, उपचार और केंद्रों की आवश्यकताएं तय की गईं।
- 20 जनवरी 2020: स्वास्थ्य मंत्री से मंजूरी वापस लेने और नैदानिक परीक्षणों में लौटने की मांग करते हुए याचिका दी गई।
- 15 अक्टूबर: मंत्रालय के पैनल ने पूर्ण मंजूरी का समर्थन किया; इसके बाद मंत्री की अनुमति मिलने की उम्मीद है।
मरीज के अस्थि मज्जा की कोशिकाओं का उपयोग कैसे होता है
स्टेमिरैक में मेसेंकाइमल स्टेम सेल होते हैं, जिन्हें अक्सर एमएससी कहा जाता है। ये कोशिकाएं ऐसे पदार्थ छोड़ सकती हैं जो सूजन को प्रभावित करते हैं और दूसरी कोशिकाओं को सहारा देते हैं। उत्पाद के विवरण में इस्तेमाल शब्द ऑटोलॉगस का अर्थ है कि कोशिकाएं उसी व्यक्ति से ली जाती हैं जिसे उपचार दिया जाता है।
निप्रो की निर्माण प्रक्रिया अस्थि मज्जा के तरल और परिधीय रक्त को इकट्ठा करने से शुरू होती है। इसके बाद कोशिकाओं को शरीर के बाहर विकसित करके उनकी संख्या बढ़ाई जाती है। शुरुआती मंजूर विधि में नस के जरिए 5 करोड़ से 20 करोड़ कोशिकाओं की खुराक तय थी, हालांकि अधिकतम खुराक मरीज के शरीर के वजन पर निर्भर थी।
प्रस्तावित उपचार में कई प्रक्रियाएं शामिल हैं। कोशिकाएं रीढ़ की क्षतिग्रस्त ऊतक के पास पहुंच सकती हैं, नसों की रक्षा में मदद करने वाले पदार्थ छोड़ सकती हैं और सूजन को नियंत्रित कर सकती हैं। मंत्रालय के दिशानिर्देश में यह संभावना भी बताई गई है कि कोशिकाएं तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं में विकसित हो सकती हैं। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य आगे होने वाली क्षति को सीमित करना और सुधार में मदद देना है।
पीएमडीए द्वारा समीक्षा किए गए पशु प्रयोगों से यह समझने में मदद मिली कि नस में दी गई कोशिकाएं रीढ़ की हड्डी तक कैसे पहुंच सकती हैं। चूहों पर किए गए एक प्रयोग में, कोशिकाओं को नस में देने के एक सप्ताह बाद चोट वाली जगह और उसके आसपास चिह्नित कोशिकाएं दिखाई दीं। एक अन्य प्रयोग में चोट वाली जगह पर दी गई चूहे की एमएससी का लगभग 5.5% हिस्सा मिला। पीएमडीए ने शरीर में कोशिकाओं के पहुंचने के बारे में निर्माता की व्याख्या स्वीकार की, लेकिन यह भी कहा कि चोट की ओर उन्हें खींचने वाली सटीक प्रक्रिया अब भी स्पष्ट नहीं है।
शुरुआती 13 मरीजों के नतीजे क्या रहे
मंत्रालय के उपयुक्त उपयोग के मसौदा दिशानिर्देश में 20 फरवरी 2019 को प्रस्तुत उस दूसरे चरण के अध्ययन का विवरण है, जिसने शुरुआती मंजूरी का आधार दिया। इसमें एक चिकित्सा केंद्र के 13 वयस्क शामिल थे। उनकी औसत आयु 54 वर्ष थी और आयु-सीमा 21 से 66 वर्ष थी। सभी को गर्दन के हिस्से की रीढ़ की हड्डी में चोट लगी थी।
शुरुआत में 17 लोगों का पंजीकरण हुआ, जिनमें से 13 बाद की शर्तों पर खरे उतरे और उन्हें उपचार दिया गया। यह ओपन-लेबल अध्ययन था, यानी मरीजों और डॉक्टरों को पता था कि किसे उपचार दिया गया है। इसमें ऐसा कोई नियंत्रण समूह भी नहीं था जिसे केवल मानक उपचार मिला हो।
मुख्य माप यह था कि चोट के लगभग 220 दिन बाद, उपचार से ठीक पहले के आकलन की तुलना में, अमेरिकन स्पाइनल इंजरी एसोसिएशन इम्पेयरमेंट स्केल (एआईएस) में कम से कम एक ग्रेड का सुधार हुआ या नहीं। 13 में से 12 मरीजों में कम से कम एक ग्रेड का सुधार हुआ, यानी 92.3%।
शुरुआती समूह छोटे थे: छह मरीज एआईएस ग्रेड ए में, दो ग्रेड बी में और पांच ग्रेड सी में थे। ग्रेड ए से शुरुआत करने वाले छह में से पांच मरीजों में कम से कम एक ग्रेड का सुधार हुआ। ग्रेड बी से शुरुआत करने वाले दोनों और ग्रेड सी से शुरुआत करने वाले सभी पांच मरीजों में भी सुधार हुआ। 13 में से तीन मरीजों, यानी 23.1%, में कम से कम दो ग्रेड का सुधार हुआ।
पीएमडीए ने इन नतीजों को सशर्त उपचार की अनुमति देने के लिए पर्याप्त रूप से आशाजनक माना। इसकी समीक्षा में यह भी कहा गया कि प्राकृतिक सुधार और पुनर्वास से नतीजों में योगदान हो सकता है। एजेंसी ने मानक उपचार पाने वाले मरीजों के साथ तुलना की मांग की।
चोट के ग्रेड में सुधार के मायने अलग-अलग क्यों हो सकते हैं
एआईएस ग्रेड बताते हैं कि रीढ़ की हड्डी की चोट के बाद कितना हिलना-डुलना और संवेदना बची है। ग्रेड ए सबसे गंभीर श्रेणी है, जिसमें त्रिकास्थि के सबसे निचले हिस्सों में कोई मोटर या संवेदी कार्य बचा नहीं रहता। ग्रेड बी में संवेदना बची रहती है, लेकिन मोटर-अपूर्ण श्रेणी में आने के लिए जरूरी मोटर कार्य नहीं होता। ग्रेड सी और डी में मोटर कार्य के बढ़ते स्तर सुरक्षित रहते हैं, जबकि ग्रेड ई का अर्थ है कि इस पैमाने पर जांच के नतीजे सामान्य हैं।
इसलिए ए से बी में बदलाव का अर्थ संवेदना लौटना हो सकता है, जबकि ए से सी में बदलाव में मोटर कार्य की वापसी भी शामिल है। बाद के मूल्यांकन की रूपरेखा बनाते समय पीएमडीए ने इस अंतर को ध्यान में रखा: ग्रेड ए से शुरुआत करने वाले मरीजों में मुख्य नतीजे के तौर पर कम से कम दो ग्रेड का सुधार मांगा गया।
रोजमर्रा के कामों में स्वतंत्रता का आकलन स्पाइनल कॉर्ड इंडिपेंडेंस मेजर (एससीआईएम-III) से अलग से किया गया। इस पैमाने पर स्वयं की देखभाल, सांस लेने और मूत्राशय व आंतों के प्रबंधन तथा चलने-फिरने के लिए कुल 100 अंक तक दिए जाते हैं। इन गतिविधियों से सीधे पता चलता है कि व्यक्ति को कितनी सहायता की जरूरत है।
मूल परीक्षण में सभी 13 मरीजों के एससीआईएम-III स्कोर में औसतन 27.2 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। शुरुआती चोट की गंभीरता के अनुसार नतीजों में काफी अंतर था: ग्रेड ए के मरीजों में औसत वृद्धि 3.3 अंक, ग्रेड बी में 9.5 और ग्रेड सी में 62.8 अंक थी। पीएमडीए के मुताबिक 12 मरीजों में इस माप पर सुधार हुआ, जबकि ग्रेड ए से शुरुआत करने वाले एक मरीज में एआईएस या एससीआईएम-III, किसी में भी सुधार नहीं हुआ।
इन दोनों मापों के अंतर ने नियामक फॉलो-अप की रूपरेखा तय की। पीएमडीए ने तंत्रिका संबंधी जांचों के साथ दैनिक कार्यक्षमता के माप भी मांगे, ताकि चोट के पैमाने पर सुधार को व्यावहारिक स्वतंत्रता में बदलाव के साथ देखा जा सके।
बाद के तुलनात्मक मूल्यांकन की रूपरेखा
निप्रो की सशर्त मंजूरी की जानकारी में स्टेमिरैक पाने वाले लोगों और पात्र होने के बावजूद उपचार न पाने वाले लोगों का तुलनात्मक सर्वेक्षण बताया गया है। निर्माता के अनुसार, पूर्ण मंजूरी मांगने से पहले प्रभावकारिता और सुरक्षा की जांच के लिए यह सर्वेक्षण किया गया। यह पृष्ठ सशर्त मंजूरी के चरण का विवरण देता है, 15 अक्टूबर के फैसले की घोषणा नहीं।
मुख्य नतीजों का आकलन गर्दन की रीढ़ की हड्डी में दुर्घटना से चोट के शिकार 20 से 70 वर्ष की उम्र के मरीजों पर केंद्रित है। एआईएस ग्रेड ए से शुरुआत करने वाले मरीजों में सर्वेक्षण यह मापता है कि कितने लोगों में कम से कम दो ग्रेड का सुधार हुआ। ग्रेड बी या सी से शुरुआत करने वाले मरीजों में कम से कम एक ग्रेड का सुधार मापा जाता है।
तुलना चोट लगने के छह से आठ सप्ताह बाद के आकलन से लेकर लगभग 180वें दिन के आकलन तक की गई, जिसमें दोनों ओर 30 दिन तक की गुंजाइश थी। यह मूल परीक्षण में लगभग 220वें दिन हुए मुख्य आकलन से अलग है। इसलिए बाद की रूपरेखा में शुरुआती बिंदु, फॉलो-अप अवधि और चोट की गंभीरता के समूह अलग हैं।
पीएमडीए ने शुरुआत में कहा था कि यादृच्छिक तुलना बेहतर होगी, जिसमें मरीजों को संयोग से अलग-अलग उपचार समूहों में रखा जाता है। यादृच्छिक आवंटन से शुरुआत में समान विशेषताओं वाले समूह बनाना आसान होता है। स्टेमिरैक उपलब्ध होने के बाद एजेंसी ने पात्र लेकिन उपचार न पाने वाले मरीजों के साथ संभावित तुलनात्मक अध्ययन को व्यावहारिक विकल्प के तौर पर स्वीकार किया। साथ ही, उसने समूहों को तुलनीय बनाने के प्रयास और निष्पक्ष आकलन जरूरी रखे।
मंजूरी की आलोचना क्यों हुई
जनवरी 2020 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री कात्सुनोबू कातो को संबोधित एक याचिका में स्टेमिरैक की सशर्त मंजूरी रद्द करने और उत्पाद को नैदानिक परीक्षणों में वापस भेजने की मांग की गई। याचिका में कहा गया कि 13 मरीजों और नियंत्रण समूह की गैरमौजूदगी के कारण यह तय करने में बहुत अनिश्चितता थी कि सुधार में उपचार, प्राकृतिक रिकवरी और पुनर्वास का कितना योगदान रहा।
याचिका में इस दावे पर भी सवाल उठाया गया कि एआईएस ए श्रेणी के मरीजों में उल्लेखनीय सुधार की संभावना कम होती है। इसमें मानक उपचार के दौरान सुधार दर्ज करने वाले शोधों का हवाला दिया गया और सशर्त मंजूरी व्यवस्था के लिए अधिक पारदर्शिता तथा समय-सीमा बढ़ाने पर पाबंदियों सहित कड़े नियमों की मांग की गई।
हड्डी रोग विशेषज्ञ हिरोशी कावागुची ने 7 जनवरी को ऑनलाइन प्रकाशित अपने जनवरी 2026 के लेख में इस मुद्दे पर फिर चर्चा की। उन्होंने परीक्षण की रूपरेखा, नतीजों के आकलन और पर्याप्त मजबूत साक्ष्य जुटने से पहले सार्वजनिक बीमा के तहत व्यावसायिक उपचार देने के जोखिमों पर विचार किया।
कावागुची का लेख इस बहस को दर्शाता है कि मरीजों को उपचार तक पहुंच कितनी जल्दी मिलनी चाहिए और लाभों को कितने पुख्ता तरीके से मापा जाना चाहिए। पीएमडीए के शुरुआती फैसले में अनिवार्य फॉलो-अप के साथ जल्द पहुंच की अनुमति दी गई थी; आलोचकों ने व्यावसायिक उपयोग से पहले मजबूत तुलनात्मक साक्ष्य की मांग की। 15 अक्टूबर की सिफारिश के बाद फॉलो-अप के नतीजे उपचार की नियामक प्रगति समझने के लिए अहम हो गए हैं।
यह उपचार किन मरीजों के लिए तैयार किया गया था
शुरुआती मंजूर संकेत में एआईएस ए, बी या सी श्रेणी के मरीजों की दुर्घटना से हुई रीढ़ की हड्डी की चोट शामिल थी। पीएमडीए ने इसे दुर्घटना से हुई चोट तक सीमित रखा, क्योंकि परीक्षण में इसी तरह के मरीज शामिल थे। मूल अध्ययन में एआईएस डी श्रेणी से शुरुआत करने वाले मरीजों के उपचार का अनुभव भी नहीं था।
2019 के मसौदा दिशानिर्देश में शुरुआत में एआईएस ए के मरीजों पर उपयोग केंद्रित करने की सिफारिश की गई थी। इसकी वजह सीमित निर्माण क्षमता और उस समूह में लाभ का आकलन था। दिशानिर्देश के अनुसार, मरीज की हालत को ध्यान में रखते हुए चोट के 31 दिनों के भीतर अस्थि मज्जा निकालने का लक्ष्य था। निर्माण पूरा होते ही कोशिकाएं दी जानी थीं।
परिवारों के लिए इन शर्तों का अर्थ है कि चोट के तुरंत बाद आकलन, कोशिकाएं इकट्ठा करने, निर्माण और अस्पतालों के बीच स्थानांतरण का समन्वय करना जरूरी है। मूल परीक्षण में चोट के 43 से 54 दिनों के बीच कोशिकाओं का वास्तविक इन्फ्यूजन हुआ। उपचार प्रक्रिया में पुनर्वास और स्थानांतरण के बाद निरंतर देखभाल की व्यवस्था भी शामिल थी।
जापान में इस उपचार की जरूरत बड़े पैमाने पर है। पीएमडीए की 2018 की समीक्षा में रीढ़ की हड्डी की चोट के साथ जी रहे कम से कम एक लाख लोगों और हर साल लगभग 5,000 नए मरीजों का उल्लेख था। मंजूरी की खबर के साथ दिए गए बाद के अनुमानों में सालाना चोटों की संख्या लगभग 6,000 और स्थायी असर के साथ जी रहे लोगों की संख्या दो लाख से अधिक बताई गई। पात्रता के नियम और चोट के बाद कोशिकाएं जल्दी इकट्ठा करने का कार्यक्रम तय करते हैं कि कौन उपचार प्रक्रिया में शामिल हो सकता है।
सुरक्षा की निगरानी में क्या शामिल है
मूल अध्ययन में किसी की मौत या कोई अन्य गंभीर प्रतिकूल घटना दर्ज नहीं हुई। दो मरीजों को रक्त निकालने के कारण एनीमिया हुआ और एक मरीज को अस्थि मज्जा निकालने की जगह पर दर्द हुआ। पीएमडीए ने इन घटनाओं को गैर-गंभीर बताया और सुरक्षा संबंधी जानकारी जुटाना जारी रखने की मांग की।
मंत्रालय के मसौदा दिशानिर्देश में निर्माण की तैयारी के दौरान लगभग 50 मिलीलीटर अस्थि मज्जा द्रव और कुल 960 मिलीलीटर परिधीय रक्त इकट्ठा करने का विवरण था। इसमें चेतावनी दी गई कि बच्चों, कम वजन वाले लोगों और पहले से एनीमिया से जूझ रहे मरीजों के लिए यह प्रक्रिया खास तौर पर कठिन हो सकती है। मूल परीक्षण में केवल वयस्क शामिल थे।
अस्पतालों के लिए स्वच्छ संग्रह केंद्र, गहन देखभाल की क्षमता, पुनर्वास की व्यवस्था और जटिलताओं से तुरंत निपटने की सुविधा जरूरी थी। दिशानिर्देश में इन्फ्यूजन के दौरान और बाद में सांस तथा महत्वपूर्ण शारीरिक संकेतों की निगरानी की बात कही गई, क्योंकि नस के जरिए दिए जाने वाले कोशिका उत्पादों से खून के थक्के बनने और फेफड़ों की रक्त वाहिकाएं अवरुद्ध होने जैसे जोखिम हो सकते हैं। इसमें एलर्जी प्रतिक्रियाओं और संक्रमण के जोखिमों का भी उल्लेख था।
स्टेमिरैक का पूर्ण मंजूरी की दिशा में बढ़ना 2018 में स्थापित नियामक प्रक्रिया में प्रगति का संकेत है। मरीजों और डॉक्टरों के लिए व्यावहारिक प्राथमिकताएं अब भी विशेषज्ञ से आकलन, संभावित लाभ और जोखिमों की स्पष्ट जानकारी, समन्वित पुनर्वास और कार्यक्षमता के नतीजों पर लगातार ध्यान देना हैं।
मुख्य बातें
- जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के पैनल ने 15 अक्टूबर को स्टेमिरैक को पूर्ण मंजूरी देने का समर्थन किया; इसके बाद मंत्री की अनुमति मिलने की उम्मीद है।
- निप्रो और साप्पोरो मेडिकल यूनिवर्सिटी ने मरीज के अपने अस्थि मज्जा की कोशिकाओं का इस्तेमाल करके यह उपचार विकसित किया।
- जापान ने दिसंबर 2018 में सात साल की समय-सीमा और अनिवार्य फॉलो-अप के साथ सशर्त मंजूरी दी थी।
- मूल अध्ययन में 13 वयस्कों में से 12 के एआईएस ग्रेड में कम से कम एक स्तर का सुधार हुआ और तीन में कम से कम दो स्तर का सुधार हुआ।
- बाद के मूल्यांकन में उपचार पाने वाले मरीजों की तुलना पात्र लेकिन उपचार न पाने वाले मरीजों से की गई और चोट की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग नतीजे मापे गए।
- मूल संकेत में एआईएस ए, बी या सी श्रेणी में आंकी गई दुर्घटना से हुई रीढ़ की हड्डी की चोट शामिल थी; उपचार के लिए उचित सुविधाओं वाले विशेषज्ञ केंद्र जरूरी थे।






