चरागाह बहाली की योजना में जल निवेश के साथ भूमि तक व्यापक पहुंच शामिल
उज्बेकिस्तान ने 2026 के अंत तक 6.2 लाख हेक्टेयर और 2027 में 37 लाख हेक्टेयर चरागाह बहाल करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, 470 समुदायों को 49 साल के लिए चरागाह भूमि तक मुफ्त पहुंच दी जाएगी। इन उपायों का ब्योरा 13 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के समक्ष प्रस्तुत योजना में दिया गया। इसमें चरागाहों की बहाली, जल ढांचे और भूमि उपयोग अधिकारों में बदलाव को एक साथ जोड़ा गया है।
विषय-सूची
- चरागाह बहाली की योजना में जल निवेश के साथ भूमि तक व्यापक पहुंच शामिल
- बहाली कार्यक्रमों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों को एक महीने का समय
- पट्टों से मिलने वाली आय से अतिरिक्त कुओं को धन मिलेगा
- तीन साल के सिंचाई कार्यक्रम में वित्तपोषण को लेकर अस्पष्टता
- केंगसोय में पंपिंग स्टेशन को चारा उत्पादन के लक्ष्य से जोड़ा गया
- निशोन की सिंचाई व्यवस्था दो और जिलों तक बढ़ाई जाएगी
- सामुदायिक पट्टे और मौजूदा चराई अधिकार अलग-अलग उपाय हैं
- चरागाह का वर्गीकरण बदले बिना पशुपालन परिसर बनाए जा सकेंगे
- बहाली की शर्तों के साथ अन्य गतिविधियों की अनुमति
- मुख्य बिंदु
राष्ट्रपति कार्यालय के चरागाह बहाली संबंधी बयान के अनुसार, देश में 2.1255 करोड़ हेक्टेयर चरागाह है, लेकिन इसका केवल 40 प्रतिशत प्रभावी रूप से इस्तेमाल होता है। यह करीब 85.02 लाख हेक्टेयर है, जबकि 1.2753 करोड़ हेक्टेयर उस क्षेत्र से बाहर है जिसे प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जा रहा बताया गया है। बयान यह नहीं कहता कि बाकी सारी भूमि बंजर या क्षतिग्रस्त है।
दोनों वर्षों के बहाली लक्ष्य कुल 43.2 लाख हेक्टेयर हैं, जो देश के कुल चरागाह क्षेत्र का लगभग 20.3 प्रतिशत है। 2027 का लक्ष्य 2026 के लिए तय 6.2 लाख हेक्टेयर से लगभग छह गुना है। ये आंकड़े नियोजित बहाली और उत्पादकता सुधार के हैं, पूरा हो चुका काम नहीं।
मिर्जियोयेव ने चरागाह संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को खाद्य सुरक्षा से जोड़ा। इस लक्ष्य के लिए कार्यक्रम में कई अलग-अलग उपाय हैं: कुओं की मरम्मत और नए कुएं खोदना, सिंचाई और चारा उत्पादन बढ़ाना, मौजूदा चराई अधिकारों को सुरक्षित करना और भूमि संरक्षण व बहाली की शर्तों के साथ चरागाह पट्टों पर अन्य गतिविधियों की अनुमति देना।
बहाली कार्यक्रमों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों को एक महीने का समय
प्रस्तुति हाल ही में हस्ताक्षरित चरागाहों के प्रभावी इस्तेमाल संबंधी राष्ट्रपति प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर थी। क्षेत्रीय राज्यपालों को पशुपालन एवं चरागाह विकास एजेंसी के साथ मिलकर एक महीने के भीतर व्यापक कार्यक्रम मंजूर करने हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य 2026 में क्षतिग्रस्त चरागाह भूमि को 10 प्रतिशत और 2027 में 20 प्रतिशत तक कम करना है।
ये प्रतिशत लक्ष्य हेक्टेयर में दिए गए बहाली लक्ष्यों से अलग हैं। राष्ट्रपति कार्यालय ने क्षतिग्रस्त चरागाह भूमि का शुरुआती आंकड़ा नहीं दिया है और न ही यह बताया है कि दोनों वार्षिक कटौतियों की गणना एक ही आधार पर होगी या नहीं। इसलिए इन्हें भरोसेमंद तरीके से हेक्टेयर में बदलना या जोड़कर 30 प्रतिशत कटौती का वादा मानना संभव नहीं है।
यह अंतर अहम है, क्योंकि उत्पादकता बढ़ाना और भूमि क्षरण को उलटना आपस में जुड़े, लेकिन अलग काम हैं। पानी की बेहतर उपलब्धता से चरागाह अधिक पशुओं या चारा उत्पादन का आधार बन सकता है, जबकि बहाली के लिए भूमि की वनस्पति को टिकाए रखने की क्षमता लौटाना भी जरूरी है। घोषणा में दोनों के लक्ष्य तय किए गए हैं, लेकिन यह नहीं बताया गया कि काम पूरा होने का आकलन किन मानकों से होगा।
क्षेत्रीय कार्यक्रमों के साथ कई समय-सीमाएं भी तय की गई हैं:
- 13 अक्टूबर 2026 की प्रस्तुति के एक महीने के भीतर: राज्यपालों और एजेंसी को व्यापक बहाली कार्यक्रम मंजूर करने हैं।
- 2026 के अंत तक: 6.2 लाख हेक्टेयर बहाल करना, 1,600 कुओं की मरम्मत करना और सिंचाई की 161 सुविधाएं बनाना।
- 2026 के अंत तक: 6.27 लाख हेक्टेयर के सामुदायिक पट्टों की व्यवस्था करना और मौजूदा चरागाह उपयोग अधिकारों से संबंधित आयोग का कार्यकाल बढ़ाना।
- 2027 में: 37 लाख हेक्टेयर बहाल करना, 15 लाख हेक्टेयर में जल आपूर्ति बेहतर बनाना और सिंचाई की 81 और सुविधाएं बनाना।
- 2028 में: सिंचाई की 81 और सुविधाएं बनाना।
पट्टों से मिलने वाली आय से अतिरिक्त कुओं को धन मिलेगा
चरागाह पट्टों से होने वाली आय क्षेत्रीय चरागाह प्रबंधन संगठनों के पास रहेगी। इस धन से 448 अतिरिक्त कुएं बनाए जाएंगे। 2027 में 15 लाख हेक्टेयर में जल आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है। इससे अलग, 2026 के अंत तक मौजूदा 1,600 कुओं की मरम्मत तय की गई है।
इस व्यवस्था में चरागाह के इस्तेमाल से होने वाली आय को उसी क्षेत्र में निवेश से जोड़ा गया है। इसमें मौजूदा ढांचे की बहाली पर भी खास जोर है: जिन कुओं की मरम्मत होनी है उनकी संख्या, बनाए जाने वाले अतिरिक्त कुओं की संख्या से तीन गुना से अधिक है।
15 लाख हेक्टेयर में जल आपूर्ति का लक्ष्य उज्बेकिस्तान के कुल चरागाह क्षेत्र का लगभग 7.1 प्रतिशत है। यह जल उपलब्धता का लक्ष्य है, यह दावा नहीं कि हर हेक्टेयर में फसलों की सिंचाई होगी। बयान में अलग-अलग कुओं की क्षमता, उनके जल स्रोत या बेहतर आपूर्ति के वितरण का ब्योरा नहीं है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि ये 15 लाख हेक्टेयर अन्य सिंचाई परियोजनाओं के क्षेत्रों से मेल खाते हैं या नहीं। जल आपूर्ति के इस आंकड़े को बहाली लक्ष्यों में जोड़ने से एक ही भूमि की गिनती एक से ज्यादा बार हो सकती है।
तीन साल के सिंचाई कार्यक्रम में वित्तपोषण को लेकर अस्पष्टता
निर्माण योजना में सिंचाई की 323 सुविधाएं शामिल हैं: 2026 में 161 और फिर 2027 तथा 2028 में 81-81। इनसे कुल 9.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बहाली संभव होने की उम्मीद है, जो देश के चरागाह क्षेत्र का करीब 4.6 प्रतिशत है।
राष्ट्रपति कार्यालय के अंग्रेजी बयान में सभी 323 सुविधाओं के कार्यक्रम के लिए राज्य बजट से 100 अरब सोम आवंटित किए जाने की बात है। इस आवंटन के दायरे को लेकर खबरों में अंतर है। कुछ रिपोर्टें 100 अरब सोम को खास तौर पर 2026 में प्रस्तावित 161 सुविधाओं से जोड़ती हैं और बाद के निर्माण का अलग से उल्लेख करती हैं।
इन विवरणों में निर्माण की कुल संख्या और वार्षिक कार्यक्रम एक जैसे हैं, लेकिन वित्तपोषण का ब्योरा अलग है। प्रकाशित बयान में साल या सुविधा के हिसाब से बंटवारा नहीं दिया गया है। इसलिए इससे यह तय नहीं किया जा सकता कि आवंटन तीनों वर्षों के लिए है या केवल पहले चरण के लिए।
9.69 लाख हेक्टेयर का आंकड़ा परियोजना के कवरेज का है, इसे 43.2 लाख हेक्टेयर के बहाली लक्ष्य में अतिरिक्त लक्ष्य के रूप में सीधे नहीं जोड़ा जा सकता। घोषणा में सिंचाई कार्यक्रम, नए कुओं और क्षेत्रीय वार्षिक बहाली योजनाओं के बीच संबंध का नक्शा नहीं दिया गया है।
केंगसोय में पंपिंग स्टेशन को चारा उत्पादन के लक्ष्य से जोड़ा गया
नवोई क्षेत्र में केंगसोय पंपिंग स्टेशन के पुनर्निर्माण के लिए स्थानीय बजट से 30 अरब सोम आवंटित किए गए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य 20,000 हेक्टेयर चरागाह का विकास संभव बनाना है। 11 उद्यमियों ने जलाशय बनाने और स्प्रिंकलर सिंचाई शुरू करने का काम शुरू कर दिया है।
सालाना 2.5 लाख टन चारा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे 60,000 मवेशियों को चारा मिल सकेगा। पूरे 20,000 हेक्टेयर में यह औसतन हर साल 12.5 टन प्रति हेक्टेयर होगा। यह गणना उत्पादन लक्ष्य का पैमाना बताती है, हासिल हो चुकी पैदावार नहीं।
पंपिंग स्टेशन के काम की स्थिति को लेकर रिपोर्टें अलग-अलग हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के अंग्रेजी बयान में कहा गया है कि इसका पुनर्निर्माण चल रहा है, जबकि कुछ अन्य खबरों में काम पूरा हो जाने की बात है। दोनों विवरण चरागाह विकास और उद्यमियों द्वारा जलाशय व सिंचाई संबंधी काम का उल्लेख करते हैं, लेकिन स्टेशन की मौजूदा स्थिति इनसे तय नहीं होती।
चारे के लक्ष्य में फसलों के प्रकार या टन भार ताजा चारे का है अथवा सूखे पदार्थ का, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। इससे उसके पोषण मूल्य का आकलन सीमित होता है। स्पष्ट यह है कि पंपिंग ढांचे में सरकारी निवेश को जलाशयों और सिंचित चारा उत्पादन के निजी काम से जोड़ने की योजना है।
निशोन की सिंचाई व्यवस्था दो और जिलों तक बढ़ाई जाएगी
कशकदरिया क्षेत्र के निशोन जिले में 1,332 हेक्टेयर पर पिवट सिंचाई प्रणालियां लगाई जा रही हैं। इसके साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल चारे की नई फसलें भी उगाई जाएंगी। पिवट प्रणाली में स्प्रिंकलर ऐसे उपकरण पर लगे होते हैं जो केंद्रीय बिंदु के चारों ओर घूमकर खेत में पानी पहुंचाता है।
अधिकारियों को यह अनुभव मुबारक और देहकानाबाद जिलों तक बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। उन्हें एक साल के भीतर बीज उत्पादन के लिए 9,400 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित करने को भी कहा गया है। इन क्षेत्रों में बीज उगाए जाएंगे; यह सीधे पशु चारे के लिए इस्तेमाल होने वाली भूमि से अलग काम है।
राष्ट्रपति कार्यालय ने चारे की नई फसलों के नाम नहीं बताए, जिलों के हिसाब से क्षेत्र का बंटवारा नहीं किया और विस्तार से मिलने वाली संभावित पैदावार का अनुमान भी नहीं दिया। इसलिए निर्देश विस्तृत उत्पादन योजना के बजाय दिशा और क्षेत्र का लक्ष्य तय करते हैं। बीज कार्यक्रम से बड़े पैमाने पर बुवाई को मदद मिल सकती है, लेकिन इससे होने वाले उत्पादन का अनुमान नहीं दिया गया है।
सामुदायिक पट्टे और मौजूदा चराई अधिकार अलग-अलग उपाय हैं
दूरदराज के इलाकों में घरों में पशु पालने वाले लोगों के लिए 2026 के अंत तक 470 महल्लों को 6.27 लाख हेक्टेयर सामुदायिक चरागाह मुफ्त पट्टे पर दिए जाएंगे। महल्ले स्थानीय सामुदायिक निकाय हैं। पट्टे 49 साल के होंगे और इस भूमि को कर से छूट मिलेगी।
कुल क्षेत्र को समुदायों की संख्या से बांटने पर प्रति महल्ला औसतन करीब 1,334 हेक्टेयर आता है। यह केवल गणितीय औसत है: घोषणा में यह नहीं कहा गया कि सभी को बराबर भूमि मिलेगी या हर समुदाय को कितना क्षेत्र दिया जाएगा।
एक अलग उपाय उन किसानों से जुड़ा है जो कई वर्षों से चरागाह का इस्तेमाल करते आए हैं। उनके अधिकारों से संबंधित आयोग का कार्यकाल 2026 के अंत तक बढ़ाया जाएगा, ताकि फिलहाल 2.6 लाख पशुओं के लिए इस्तेमाल हो रही 6.23 लाख हेक्टेयर भूमि के मौजूदा उपयोग को औपचारिक रूप दिया जा सके।
इन दोनों उपायों को एक नहीं समझना चाहिए। एक के तहत घरेलू पशुओं की चराई के लिए सामुदायिक पट्टे मुफ्त दिए जाएंगे; दूसरे के तहत मौजूदा उपयोगकर्ताओं के अधिकार औपचारिक होंगे। राष्ट्रपति कार्यालय ने दूसरे उपाय को भूमि उपयोग अधिकार बताया है, इसका अर्थ यह नहीं कि किसानों को भूमि का पूर्ण स्वामित्व मिलेगा। यह भी नहीं बताया गया कि दोनों क्षेत्रों में कोई भूमि समान है या नहीं, इसलिए इन्हें जोड़कर नए आवंटित चरागाह का एक कुल आंकड़ा भरोसे से नहीं दिया जा सकता।
चरागाह का वर्गीकरण बदले बिना पशुपालन परिसर बनाए जा सकेंगे
नए ढांचे के तहत भूमि का चरागाह वर्गीकरण बदले बिना पशुपालन परिसर बनाने की अनुमति होगी। भूखंडों की शुरुआती कीमत और भूमि कर की गणना कृषि भूमि के समान आधार पर होगी। यह सामुदायिक चरागाह पट्टों को दी गई कर छूट से अलग व्यवस्था है।
नवोई, समरकंद और सुरखोंदरिया क्षेत्रों में 15 परिसरों की योजनाओं को मंजूरी दी गई है। वे कुल 130 हेक्टेयर में होंगे और उनमें 55,000 से अधिक पशुओं की क्षमता होगी। इस हिसाब से प्रति परिसर औसतन 3,666 से अधिक पशु होंगे, हालांकि अलग-अलग परिसरों का आकार अलग हो सकता है।
130 हेक्टेयर का आंकड़ा परिसरों के कुल क्षेत्र का है, उनके पशुओं के लिए जरूरी कुल चराई क्षेत्र का नहीं। घोषणा में पशुओं के प्रकार, निर्माण की तारीखें, संचालन लागत या हर परियोजना के लिए आसपास उपलब्ध चरागाह का ब्योरा नहीं है।
बहाली की शर्तों के साथ अन्य गतिविधियों की अनुमति
चरागाहों के पट्टे इकोटूरिज्म, मधुमक्खी पालन, औषधीय पौधों की खेती, पौध तैयार करने, शिकार और रेशम उत्पादन के लिए भी उपलब्ध होंगे। रेशम उत्पादन का मतलब रेशम के लिए रेशमकीट पालना है। इन गतिविधियों से चरागाह पर पारंपरिक पशुपालन से आगे के इस्तेमाल की गुंजाइश बढ़ेगी।
इस अनुमति के साथ एक शर्त भी है: परियोजनाओं को चरागाहों की प्राकृतिक स्थिति बनाए रखनी होगी और उनकी बहाली सुनिश्चित करनी होगी। राष्ट्रपति कार्यालय ने निगरानी व्यवस्था, पर्यावरणीय मानक या इन शर्तों का पालन न करने पर दंड का ब्योरा नहीं दिया है।
इस तरह कार्यक्रम आर्थिक इस्तेमाल के दायरे को बढ़ाने के साथ बहाली की जिम्मेदारी भी तय करता है। इसकी अगली ठोस कसौटियां एक महीने के भीतर तैयार होने वाले क्षेत्रीय कार्यक्रम और 2026 के अंत से पहले तय किया गया व्यापक काम हैं। घोषणा में लक्ष्य और निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इस बात का प्रमाण नहीं कि राष्ट्रीय बहाली लक्ष्य, सामुदायिक आवंटन या ढांचे से जुड़ा कार्यक्रम पहले ही पूरा हो चुका है।
मुख्य बिंदु
- उज्बेकिस्तान की 2026 में 6.2 लाख और 2027 में 37 लाख हेक्टेयर चरागाह बहाल करने की योजना है।
- देश के 2.1255 करोड़ हेक्टेयर चरागाह में से केवल 40 प्रतिशत का प्रभावी इस्तेमाल बताया गया है।
- 13 अक्टूबर की प्रस्तुति के एक महीने के भीतर क्षेत्रीय बहाली कार्यक्रमों को मंजूरी देनी है।
- योजना में 448 अतिरिक्त कुएं, 1,600 कुओं की मरम्मत और 2028 तक सिंचाई की 323 सुविधाएं शामिल हैं।
- करीब 470 महल्लों को 49 साल के लिए 6.27 लाख हेक्टेयर भूमि मुफ्त और कर-मुक्त पट्टे पर दी जानी है।
- एक अलग आयोग 6.23 लाख हेक्टेयर पर मौजूदा चरागाह उपयोग अधिकारों को औपचारिक रूप देगा।
- पशुपालन के 15 परिसर प्रस्तावित हैं, जबकि चरागाहों पर अन्य अनुमत गतिविधियों में भूमि का संरक्षण और बहाली जरूरी होगी।






