ताइवान के रक्षा विवाद के बीच चेंग ली-वुन ने शी से मुलाकात की, शांति मिशन की परीक्षा

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ताइवान के रक्षा विवाद के बीच चेंग ली-वुन ने शी से मुलाकात की, शांति मिशन की परीक्षा

बीजिंग में बैठक, दांव पर ताइवान की सुरक्षा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में ताइवान की विपक्षी कुओमिन्तांग (केएमटी) की अध्यक्ष चेंग ली-वुन से मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मुलाकात के केंद्र में ताइवान के 40 अरब डॉलर के विशेष रक्षा बजट का विवाद आ गया। करीब एक दशक में चेंग मुख्यभूमि चीन का दौरा करने वाली केएमटी की पहली मौजूदा अध्यक्ष बनीं। यह यात्रा शी की मई में बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रस्तावित बैठक से कुछ ही सप्ताह पहले हुई।

विषय-सूची
  1. बीजिंग में बैठक, दांव पर ताइवान की सुरक्षा
  2. ग्रेट हॉल तक चेंग का सफर
  3. शांति पर शी और चेंग ने क्या कहा
  4. 1992 की सहमति का अर्थ
  5. वॉशिंगटन की नजर में 40 अरब डॉलर का विवाद
  6. यात्रा के बाद बीजिंग ने क्या पेशकश की
  7. संपर्क की पहल के साथ सैन्य दबाव भी जारी
  8. ताइवान सरकार ने पार्टी के माध्यम से संपर्क पर उठाए सवाल
  9. पहचान और चुनाव चेंग के संदेश को जटिल बनाते हैं
  10. ताइवान के सामने चेंग का रखा विकल्प
  11. मुख्य बिंदु

पिछले साल रूढ़िवादी रुझान वाली केएमटी की कमान संभालने वाली चेंग ने शंघाई, नानजिंग और बीजिंग में बिताए अपने छह दिनों को “शांति यात्रा” बताया। उनका मुख्य तर्क है कि बीजिंग के साथ संपर्क युद्ध रोकने में मदद कर सकता है। उनके विरोधियों का कहना है कि ऐसे संपर्क की शर्तें ताइवान की रक्षा कमजोर कर सकती हैं और चीन को उसके राजनीतिक विकल्पों पर अधिक प्रभाव दे सकती हैं।

शी ने इस मुलाकात को साझा विरासत वाले लोगों के पुनर्मिलन के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि “ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर के लोग चीनी हैं” और शांति तथा विकास की आकांक्षा साझा करते हैं। चेंग ने इस पहचान को अपनाया, साथ ही ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध किया और अमेरिका से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदने की आलोचना की।

चीन ने इस दौरे के बाद उड़ानों, खाद्य आयात, टेलीविजन कार्यक्रमों और कम्युनिस्ट पार्टी तथा केएमटी के बीच नियमित संपर्क की संभावित व्यवस्था से जुड़े दस उपायों की घोषणा की। चीन ने ताइवान के पास सैन्य दबाव भी जारी रखा। इन दोनों पहलुओं से संघर्ष रोकने के दो तरीके आमने-सामने आ गए हैं: चेंग का राजनीतिक समझौते पर जोर और यह तर्क कि ताइवान को संवाद के साथ-साथ अपनी रक्षा भी मजबूत करनी चाहिए।

इस बैठक से केएमटी और कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच संपर्क फिर शुरू हुआ, लेकिन ताइवान की निर्वाचित सरकार इस मुलाकात से बाहर रही। 2016 में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन के चुनाव के बाद बीजिंग ने ताइपे के साथ उच्चस्तरीय संपर्क तोड़ दिया था। यह टूट इस मतभेद के केंद्र में है कि बीजिंग किसके साथ संवाद करना चुनता है।

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ग्रेट हॉल तक चेंग का सफर

शी के साथ चेंग की मौजूदगी उनके उल्लेखनीय राजनीतिक बदलाव का चरम बिंदु थी। 1969 में जन्मीं चेंग ने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत वामपंथी कार्यकर्ता के रूप में की थी। वह “वाइल्ड लिली” पीढ़ी से जुड़ी थीं, जो छात्र आंदोलन ताइवान को पूर्ण लोकतंत्र की दिशा में ले जाने में सहायक बना।

चेंग कभी ताइवान की स्वतंत्रता की पक्षधर थीं और उन्होंने केएमटी को “सबसे घृणित सत्तारूढ़ ताकत” कहा था। 2005 में डीपीपी से विवादास्पद रूप से अलग होने के बाद वह उसी पार्टी में शामिल हो गईं जिसका पहले विरोध करती थीं। तब से वह इसके “डीप ब्लू” धड़े की ओर बढ़ी हैं, जो चीन के साथ नजदीकी एकीकरण का समर्थन करता है।

अब चेंग खुद को “फाइटिंग-ब्लू” नेता कहती हैं। उनकी राजनीति में सत्तारूढ़ डीपीपी के प्रति टकराव का रुख और मुख्यभूमि चीन के साथ उनके शब्दों में “सभ्यतागत” संबंध बढ़ाने की कोशिश, दोनों शामिल हैं। वह अपने पाला बदलने को “डीपीपी के छल को समझ लेने” का नतीजा बताती हैं, जबकि आलोचक उन पर अवसरवाद का आरोप लगाते हैं।

सर्वेक्षणों से पता चलता है कि उनके नेतृत्व पर जनता का भरोसा सीमित है। फिर भी बीजिंग से मिलने की उनकी तत्परता उन्हें राष्ट्रपति लाई चिंग-ते से अलग पहचान देती है, जिनकी डीपीपी सरकार चीनी नेताओं के साथ संवाद बहाल नहीं कर पाई है। चीन के सरकारी मीडिया ने लाई को उपहासपूर्वक “युद्धोन्मादी” और “अलगाववादी” कहा है।

इसलिए चेंग की यात्रा का बाहरी और घरेलू, दोनों मकसद था। उन्होंने खुद को जलडमरूमध्य के पार संवाद फिर शुरू कर सकने वाली नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की और सुरक्षा तथा चीन के साथ संबंधों पर सत्तारूढ़ दल के रुख को चुनौती दी।

शांति पर शी और चेंग ने क्या कहा

शी और चेंग ने सार्वजनिक रूप से ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध किया और साझा चीनी पहचान की भाषा में शांति की बात की। शी ने कहा कि “चीन की दोनों ओर के सभी बेटे-बेटियों की जड़ें और चीनी भावना एक हैं।” उन्होंने इस रिश्ते को रक्त-संबंधों और इतिहास से जुड़ा बताया।

शी ने “पूरा भरोसा” जताया कि दोनों ओर के लोग “और करीब आएंगे और एक साथ होंगे।” उन्होंने इसे इतिहास की अपरिहार्य धारा बताया। उनकी टिप्पणी ने मौजूदा संवाद को इस रिश्ते के लिए बीजिंग की पसंदीदा राजनीतिक दिशा से जोड़ा।

मेहमान के रूप में आईं केएमटी अध्यक्ष चेंग ने जलडमरूमध्य के लिए अपनी आकांक्षा को पारिवारिक संबंधों और दोनों दलों के बीच सहयोग के रूप में बताया:

हमारी दोनों पार्टियों के निरंतर प्रयासों से हमें उम्मीद है कि ताइवान जलडमरूमध्य अब संघर्ष का संभावित केंद्र या बाहरी शक्तियों का शतरंज का मैदान नहीं बनेगा। इसके बजाय, यह पारिवारिक रिश्तों, सभ्यता और आशा को जोड़ने वाला जलडमरूमध्य बने।

चेंग ने गरीबी उन्मूलन में चीन की सफलता की भी प्रशंसा की और “चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान” को साझा आकांक्षा बताया। उनकी भाषा साझा पहचान पर शी की बातों के करीब थी, जबकि जलडमरूमध्य को टकराव का स्थल बनने की चेतावनी में उन्होंने बाहरी शक्तियों को भी शामिल किया।

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1992 की सहमति का अर्थ

चेंग ने स्पष्ट रूप से “1992 की सहमति” का समर्थन किया। यह केएमटी और बीजिंग के बीच एक मौन समझ है, जिसमें “एक चीन” को स्वीकार किया गया, लेकिन दोनों पक्षों को इसका अर्थ अलग-अलग बताने की गुंजाइश रहती है। सरल शब्दों में, इस सूत्र के तहत एक वाक्यांश पर सहमति बनती है, जबकि उसके अर्थ पर असहमति की गुंजाइश रहती है।

केएमटी ने परंपरागत रूप से इस समझ का वर्णन करते समय “अलग-अलग व्याख्याओं” का उल्लेख किया है। इसके बजाय चेंग ने इस शर्त पर जोर दिए बिना “एक चीन” का पालन करने की बात कही। उनकी शब्दावली पर गौर किया गया, क्योंकि इसी शर्त से केएमटी को अपनी व्याख्या बनाए रखने की गुंजाइश मिली है।

चेंग ने “युद्ध रोकने” के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं का प्रस्ताव भी रखा। उन्हें संघर्ष का जोखिम घटाने की उनकी कोशिश के हिस्से के रूप में पेश किया गया, लेकिन उनकी टिप्पणियों से ताइवान की सशस्त्र सेनाओं और अमेरिकी हथियारों को लेकर उनकी कल्पना पर चिंता उठी।

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के ताइवान सेंटर के राजनीतिक वैज्ञानिक वेन-ती सुंग ने उनकी टिप्पणियों को सैन्य तैयारी से दूर जाने का संकेत माना। उन्होंने कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि “उनके नेतृत्व में केएमटी युद्ध रोकने के लिए रक्षा और प्रतिरोध पर आधारित रुख नहीं अपनाएगी।”

सुंग के आकलन में चेंग धीमी सैन्य बढ़ोतरी और अमेरिकी हथियारों की कम खरीद का संकेत दे रही थीं। प्रतिरोध का अर्थ है किसी हमले की कीमत इतनी बढ़ा देना कि विरोधी उससे पीछे हट जाए। इसलिए असहमति इस बात पर है कि शांति की रक्षा कैसे हो: मजबूत सैन्य प्रतिरोध से, बीजिंग के साथ राजनीतिक समझौतों से या दोनों के बीच संतुलन से।

वॉशिंगटन की नजर में 40 अरब डॉलर का विवाद

केएमटी ने ताइवान की संसद में लाई के प्रस्तावित 40 अरब डॉलर के विशेष रक्षा बजट को रोक दिया है और चुनिंदा मदों पर केंद्रित 12 अरब डॉलर का विकल्प पेश किया है। दोनों प्रस्ताव ताइवान के सैन्य आधुनिकीकरण के लिए बिल्कुल अलग-अलग रकम रखते हैं।

केएमटी का विकल्प लाई के पैकेज से 28 अरब डॉलर छोटा है और प्रस्तावित 40 अरब डॉलर की कुल रकम का 30 प्रतिशत है। ये आंकड़े खर्च के विवाद का पैमाना दिखाते हैं, हालांकि बहस इस बात पर भी है कि किन खरीदों को मंजूरी मिलनी चाहिए।

चेंग ने बड़े पैकेज को ताइवान को “बारूद का ढेर” बनाने वाला बताया है। उन्होंने यह भी कहा है कि “ताइवान अमेरिकी हथियार खरीदने के लिए एटीएम नहीं है।” उनकी भाषा में हथियार खरीदने की लागत और जोखिम, केएमटी के विरोध के केंद्र में हैं।

अमेरिकी सीनेटर जिम बैंक्स ने हाल ही में ताइपे के दौरे के दौरान सांसदों से पूरे पैकेज को मंजूरी देने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि देरी से ताइवान को हथियार बेचने की वॉशिंगटन की इच्छा प्रभावित हो सकती है। इस तरह संसद का गतिरोध ताइवान के घरेलू बजट विवाद से आगे बढ़कर उसके प्रमुख सुरक्षा साझेदार के साथ संबंधों तक पहुंच गया है।

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ट्रंप की मई में शी के साथ प्रस्तावित शिखर बैठक से चिंता और बढ़ गई है। विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग चेंग की यात्रा के जरिए दिखाना चाहता है कि ताइवान में उसके पसंदीदा साझेदार प्रमुख नीतियों पर उसके साथ “कदम से कदम मिलाकर” चल रहे हैं। यह प्रदर्शन शी से मुलाकात के दौरान हथियार बिक्री और सुरक्षा प्रतिबद्धताओं पर ट्रंप के रुख को प्रभावित कर सकता है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के उत्तर-पूर्व एशिया विश्लेषक विलियम यांग ने कहा कि चेंग को यह मौका दिख रहा है कि वह खुद को जलडमरूमध्य के पार संवाद बनाए रख सकने वाली नेता के रूप में पेश करें और साथ ही लाई की संपर्क बहाल करने में नाकामी को उजागर करें। यांग ने इस अवसर को वॉशिंगटन से जुड़ी अनिश्चितता से जोड़ा:

ताइवान में अमेरिका के प्रति बढ़ता संदेह, जो मुख्य रूप से ताइवान नीति पर ट्रंप के मिले-जुले संकेतों से पैदा हुआ है, उनके तर्क के लिए जगह बनाता है।

वॉशिंगटन की चिंता और चेंग का राजनीतिक अवसर, दोनों इसी अनिश्चितता से पैदा होते हैं। अमेरिकी समर्थन पर सवाल चेंग को बीजिंग के साथ करीबी संपर्क की दलील देने का मौका देते हैं, जबकि रक्षा विवाद यह चिंता पैदा करता है कि क्या ताइवान वे संसाधन देगा, जिन्हें उपलब्ध कराने का आग्रह वॉशिंगटन कर रहा है।

यात्रा के बाद बीजिंग ने क्या पेशकश की

चेंग के जाने के बाद बीजिंग ने दस उपायों की घोषणा की और आर्थिक तथा सांस्कृतिक पहुंच को सद्भावना के संकेत के रूप में पेश किया। इनमें ताइवान और मुख्यभूमि के और शहरों, जैसे उरुमची, शिआन और हार्बिन, के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू करना शामिल था।

चीनी अधिकारियों ने पहले प्रतिबंधित ताइवानी उत्पादों, जिनमें ग्रूपर मछली, स्क्विड और टूना शामिल हैं, के आयात की अनुमति देने का वादा भी किया। सामग्री संबंधी दिशानिर्देशों पर खरे उतरने वाले ताइवानी टीवी धारावाहिकों और वृत्तचित्रों को मुख्यभूमि के प्रसारण मंचों पर जगह दी जाएगी।

चीन ने कम्युनिस्ट पार्टी और केएमटी के बीच नियमित संवाद व्यवस्था की संभावनाएं तलाशने का वादा किया। उसने मुख्यभूमि चीन को ताइवान के किनमेन और मात्सु द्वीपों से जोड़ने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रस्तावों को भी फिर उठाया।

इन उपायों से चेंग अपनी यात्रा से कुछ ठोस घोषणाएं लेकर लौट सकती हैं। उड़ानों से संपर्क बढ़ेगा, आयात फिर शुरू होने से प्रभावित उत्पादों के लिए बाजार खुलेगा और प्रसारण की अनुमति से ताइवानी कार्यक्रमों को अवसर मिलेंगे। प्रस्तावित पार्टी व्यवस्था राजनीतिक संपर्क को नियमित बनाएगी।

घोषित उपायों को लागू करने की कोई तारीख नहीं दी गई। अगला निर्धारित कूटनीतिक कार्यक्रम ट्रंप की मई में शी के साथ बैठक है। ताइवान में इस साल के आखिर में स्थानीय चुनाव और 2028 में राष्ट्रपति चुनाव भी होने हैं, जिससे चेंग के रुख पर बहस लगातार चुनावी माहौल में बनी रहेगी।

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संपर्क की पहल के साथ सैन्य दबाव भी जारी

आर्थिक पहुंच के चीन के वादों के साथ ताइवान के पास लड़ाकू विमानों और नौसैनिक जहाजों की तैनाती भी जारी रही। बीजिंग जलडमरूमध्य में जीवित गोला-बारूद के साथ अभ्यास भी करता है, जो संभावित नाकेबंदी की तैयारी जैसे लगते हैं। नाकेबंदी का मकसद द्वीप तक आने-जाने की आवाजाही सीमित करना होता है।

विश्लेषक इस मेल को “दोहरी रणनीति” बताते हैं: बीजिंग विपक्ष के साथ जुड़ता है, जबकि सत्तारूढ़ डीपीपी पर सैन्य दबाव बनाए रखता है। ये दोनों गतिविधियां ताइवान को लेकर चीन की नीति के अलग-अलग हिस्सों में काम करती हैं।

ताइवान की तमकांग यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर जेम्स चेन ने कहा कि बीजिंग की सैन्य उड़ानें “चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को साधती हैं और अमेरिका के बढ़ते दखल को रोकती हैं।” उनका आकलन ताइवान के पास दबाव को वॉशिंगटन की भागीदारी सीमित करने की चीन की कोशिश से जोड़ता है।

चेंग की यात्रा संपर्क और दबाव के इसी मेल का हिस्सा है। बीजिंग ने चीनी पहचान पर अपनी पसंदीदा भाषा का समर्थन करने वाली पार्टी के सामने सहयोग की पेशकश की, जबकि जिस दल की वह निंदा करता है, उसके शासन वाले द्वीप के आसपास सैन्य गतिविधियां जारी रखीं।

ताइवान सरकार ने पार्टी के माध्यम से संपर्क पर उठाए सवाल

डीपीपी ने चेंग पर बीजिंग के “अधीन” होने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि उनकी यात्रा पर “कम्युनिस्ट पार्टी का पूरा नियंत्रण” रहेगा। उसकी आलोचना इस बात पर केंद्रित थी कि क्या इस यात्रा में बीजिंग को बातचीत की शर्तें और राजनीतिक संदेश, दोनों तय करने का मौका मिला।

ताइवान के राष्ट्रपति लाई ने फेसबुक पर तर्क दिया कि सत्तावादी सरकारों के आगे रियायतें देना उन स्वतंत्रताओं को खतरे में डालता है, जिनकी रक्षा की बात चेंग करती हैं:

सत्तावादी शासन से समझौता करने से केवल संप्रभुता और लोकतंत्र का बलिदान होता है; इससे न स्वतंत्रता मिलेगी, न शांति।

ताइवान मामलों का परिषद, जो चीन संबंधी नीति तय करता है, ने बीजिंग के घोषित उपायों को “राजनीतिक लेनदेन” बताया, जो ताइवान की निर्वाचित सरकार को दरकिनार करते हैं। परिषद ने जोर दिया कि सरकारी अधिकार से जुड़े मामलों पर सरकारों के बीच बातचीत होनी चाहिए:

सरकारी अधिकार से जुड़े जलडमरूमध्य के सभी मामलों पर दोनों सरकारों को समान और सम्मानजनक आधार पर बातचीत करनी चाहिए।

परिषद की आपत्ति इस बात को लेकर है कि ताइवान के लिए फैसले कौन कर सकता है। पार्टी नेताओं की बैठक से संपर्क स्थापित हो सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि सरकारी अधिकार से जुड़े मामलों में ऐसी बातचीत आधिकारिक माध्यमों की जगह नहीं ले सकती। चेंग की बैठक और बीजिंग के वादों पर प्रतिक्रिया के केंद्र में यही विवाद है।

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पहचान और चुनाव चेंग के संदेश को जटिल बनाते हैं

ताइवान के अधिकतर लोग “यथास्थिति” बनाए रखने के पक्ष में हैं, यानी न औपचारिक स्वतंत्रता और न एकीकरण। सर्वेक्षण यह भी दिखाते हैं कि खुद को ताइवानी बताने वालों की संख्या बढ़ी है, जबकि खुद को चीनी बताने वालों की संख्या घटी है। इस स्थिति में चेंग का स्पष्ट रूप से खुद को चीनी बताना उनके लिए राजनीतिक चुनौती खड़ी करता है।

नेशनल चेंगची यूनिवर्सिटी के 2025 के एक अध्ययन में 62 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने केवल ताइवानी के रूप में अपनी पहचान बताई, जबकि 1992 में यह आंकड़ा 17.6 प्रतिशत था। यह 44.4 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी है। खुद को चीनी बताने वालों का हिस्सा घटकर 2.5 प्रतिशत रह गया।

चीनी पहचान और सभ्यतागत संबंधों पर चेंग का जोर मुख्यधारा की जनभावना से लगातार दूर होता दिखता है, खासकर युवा मतदाताओं के बीच। इसलिए शांति के उनके तर्क को पहचान और ताइवान के लोकतांत्रिक राजनीतिक विकल्पों से जुड़ी चिंताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी।

केएमटी के भीतर भी मतभेद उभर रहे हैं। ताइचुंग की मेयर लू शिउ-येन, जिनका नाम संभावित राष्ट्रपति उम्मीदवारों में लिया जाता है, ने कहा है कि शांति की नींव ताकत और आंतरिक एकता पर होनी चाहिए। उनका रुख बीजिंग से संपर्क पर चेंग के जोर की तुलना में अधिक संतुलित तरीका पेश करता है।

खबरों के मुताबिक, प्रतिस्पर्धी निर्वाचन क्षेत्रों में केएमटी के कुछ उम्मीदवारों ने आगामी स्थानीय चुनावों में मतदाताओं की नाराजगी के डर से अपनी अध्यक्ष की बयानबाजी से दूरी बनाई है। पार्टी को फिर शुरू हुए संपर्क के आकर्षण और इस जोखिम के बीच संतुलन बनाना होगा कि मतदाता इस यात्रा को जरूरत से ज्यादा समझौतापरस्त मानें।

ताइवान के सामने चेंग का रखा विकल्प

चेंग की राजनीतिक बाजी इस विश्वास पर टिकी है कि संवाद, सैन्य प्रतिरोध की तुलना में संघर्ष का खतरा अधिक प्रभावी ढंग से घटाता है। उन्होंने खुद को “शांति का पुल” बताया है और तर्क दिया है कि ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध तथा 1992 की सहमति को स्वीकार करना, युद्ध टालने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है।

शी से मुलाकात के बाद चेंग ने पत्रकारों से यह रुख स्पष्ट किया:

ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करके हम युद्ध से बच सकते हैं।

आलोचकों का कहना है कि उनका तरीका बीजिंग के इस चित्रण को स्वीकार करता है कि ताइवान अपने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार वाले संप्रभु राज्य के बजाय गृहयुद्ध का अनसुलझा मामला है। उनके अनुसार, दो राष्ट्राध्यक्षों के बजाय दो पार्टी नेताओं की मुलाकात का प्रारूप ऐसे ऐतिहासिक वर्णन को बढ़ावा देता है जो ताइवान की मौजूदा संप्रभुता को कमजोर करता है।

करीब एक दशक बाद किसी मौजूदा केएमटी अध्यक्ष की पहली यात्रा के जरिए चेंग ने आर्थिक रियायतें हासिल कीं और दोनों दलों के शीर्ष स्तर पर संपर्क फिर शुरू कराया। उन्हें उदारवादी मतदाताओं को दूर करने और वॉशिंगटन को असहज करने का जोखिम भी है। अब विवाद इस बात पर है कि उनकी कूटनीति संघर्ष का खतरा घटाती है या शांति की भाषा में बीजिंग के पसंदीदा राजनीतिक नतीजे को आगे बढ़ाती है।

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इस साल के आखिर में ताइवान के स्थानीय चुनाव और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव मतदाताओं को इस रुख पर फैसला करने का मौका देंगे। तत्काल कसौटियां अधिक ठोस हैं: रक्षा खर्च पर गतिरोध, बीजिंग के वादे वाले उपायों का क्रियान्वयन और ट्रंप-शी शिखर बैठक से जुड़ी कूटनीतिक चर्चाएं।

इन कसौटियों तक पहुंचने वाली घटनाओं का क्रम कई वर्षों में फैला है:

  • 1992: 1992 की सहमति के नाम से जानी जाने वाली समझ ने अलग-अलग व्याख्याओं के साथ एक चीन को स्वीकार करने का सूत्र दिया।
  • 2005: डीपीपी छोड़ने के बाद चेंग केएमटी में शामिल हुईं।
  • 2016: त्साई इंग-वेन के चुनाव के बाद बीजिंग ने ताइपे के साथ उच्चस्तरीय संपर्क तोड़ दिया।
  • 2025: चेंग ने केएमटी की कमान संभाली और नेशनल चेंगची यूनिवर्सिटी के अध्ययन में 62 प्रतिशत लोगों ने केवल ताइवानी पहचान बताई।
  • शुक्रवार, 12 अप्रैल 2026 से पहले: मुख्यभूमि चीन में अपने छह दिनों के दौरे के दौरान चेंग ने ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में शी से मुलाकात की।
  • चेंग के जाने के बाद: बीजिंग ने परिवहन, व्यापार, मीडिया और राजनीतिक संपर्क से जुड़े दस उपायों की घोषणा की।
  • मई 2026: ट्रंप की बीजिंग में शी से मुलाकात प्रस्तावित है।
  • 2026 के आखिर में और 2028 में: ताइवान में पहले स्थानीय चुनाव और फिर राष्ट्रपति चुनाव होंगे।

मुख्य बिंदु

  • चेंग ली-वुन करीब एक दशक में मुख्यभूमि चीन का दौरा करने वाली केएमटी की पहली मौजूदा अध्यक्ष बनीं और बीजिंग में शी जिनपिंग से मिलीं।
  • दोनों नेताओं ने ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध किया और साझा चीनी पहचान को बढ़ावा दिया।
  • केएमटी ने लाई के 40 अरब डॉलर के विशेष रक्षा बजट को रोक दिया है और 12 अरब डॉलर का विकल्प पेश किया है।
  • बीजिंग ने उड़ानों, आयात, प्रसारण, दलों के संपर्क और प्रस्तावित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े दस उपायों की घोषणा की।
  • केएमटी से संपर्क की पहल के साथ चीन ने ताइवान के पास सैन्य तैनाती और अभ्यास जारी रखे।
  • ताइवान सरकार ने कहा कि सरकारी अधिकार से जुड़े मामलों पर राजनीतिक दलों के बजाय सरकारों के बीच बातचीत होनी चाहिए।
  • 2025 के एक अध्ययन में 62 प्रतिशत लोगों ने केवल ताइवानी पहचान बताई, जो 1992 के 17.6 प्रतिशत से अधिक है; 2.5 प्रतिशत ने खुद को चीनी बताया।
  • शी के साथ ट्रंप की मई में प्रस्तावित बैठक और ताइवान के आगामी चुनाव चेंग की कूटनीति तथा रक्षा विवाद पर नजर बनाए रखेंगे।
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