लक्सन के पास फिलहाल बहुमत के आंकड़े, लेकिन अंतर बेहद कम
7 नवंबर 2026 के चुनाव के बाद नेशनल के नेतृत्व वाला न्यूज़ीलैंड का सत्तारूढ़ गठबंधन संसद की 67 सीटें जीत सकता है। इससे प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के लिए दूसरा कार्यकाल हासिल करने का रास्ता खुलता है। चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, नेशनल को 42, एसीटी न्यूज़ीलैंड को 13 और न्यूज़ीलैंड फर्स्ट को 12 सीटें मिल रही हैं। यह बहुमत के अनुमानित 66 सीटों के आंकड़े से अधिक है।
विषय-सूची
- लक्सन के पास फिलहाल बहुमत के आंकड़े, लेकिन अंतर बेहद कम
- शुरुआती सीटों के आंकड़े क्या बताते हैं
- संसद में 120 से अधिक सीटें क्यों हैं
- विशेष मत नतीजे बदल सकते हैं
- नेशनल के पांच करीबी मुकाबलों पर बड़े दांव
- ऑपर्च्युनिटी पहली बार संसद में, उसके सामने विकल्प
- स्थानीय चुनावी जीत से नेशनल के वरिष्ठ नेता संसद से बाहर
- माओरी निर्वाचन क्षेत्र और बंटे हुए वोट से संसद का स्वरूप तय
- अभियान में महंगाई अहम मुद्दा, अब सरकार गठन पर बातचीत
- मुख्य बातें
विशेष मतों और कुछ करीबी निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों से आधिकारिक परिणाम 27 नवंबर को घोषित होने से पहले यह स्थिति बदल सकती है। लक्सन ने जीत का दावा करने से परहेज किया, जबकि लेबर नेता क्रिस हिप्किंस ने भी हार स्वीकार नहीं की।
अब तक की सबसे पूरी शुरुआती मतगणना में संसद की 131 सीटें होने का अनुमान है। इसमें चुनाव प्रणाली के कारण बनी 11 अतिरिक्त सीटें शामिल हैं। लेबर को 36, ग्रीन्स को 16, ते पाती माओरी को पांच और पहली बार चुनाव लड़ रही ऑपर्च्युनिटी को सात सीटें मिल रही हैं। इन चारों दलों के पास कुल 64 सीटें होंगी, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या से दो कम हैं।
नेशनल की बढ़त देशभर के पार्टी वोट में स्पष्ट बढ़त के बजाय सीटों पर टिकी है। ताज़ा शुरुआती आंकड़ों के अनुसार लेबर को 710,223 वोट यानी 29.4% मिले, जबकि नेशनल को 706,642 वोट यानी 29.2%। फिर भी कई स्थानीय निर्वाचन क्षेत्रों में आगे रहने के कारण नेशनल के पास लेबर से छह सीटें अधिक हैं।
प्रधानमंत्री और नेशनल नेता के तौर पर ऑकलैंड में समर्थकों को संबोधित करते हुए लक्सन ने अपनी पार्टी की संभावना और उससे जुड़ी अनिश्चितता, दोनों को स्वीकार किया।
यह उत्साहजनक है कि अब तक के आंकड़ों के मुताबिक नेशनल एक बार फिर संसद में सबसे बड़ी पार्टी है और अगली सरकार बनाने का रास्ता हमारे पास है।
इसके बाद उन्होंने समर्थकों को आगाह किया:
लेकिन मुझे अभी आपको बताना होगा कि मुकाबला इतना करीबी है कि नतीजे का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है।
शुरुआती सीटों के आंकड़े क्या बताते हैं
अगर अंतिम मतगणना में सत्तारूढ़ तीनों दलों की कुल 67 सीटें बरकरार रहती हैं, तो उनके पास सत्ता में बने रहने का व्यावहारिक रास्ता होगा। नेशनल अकेले सरकार नहीं बना सकता। दूसरे दलों के समर्थन के बिना एसीटी या न्यूज़ीलैंड फर्स्ट को इस गठबंधन से बाहर भी नहीं रखा जा सकता।
- नेशनल: 42 सीटें, सभी निर्वाचन क्षेत्र के मुकाबलों से।
- एसीटी न्यूज़ीलैंड: 13 सीटें, जिनमें एक निर्वाचन क्षेत्र की सीट शामिल है।
- न्यूज़ीलैंड फर्स्ट: 12 सीटें, सभी पार्टी सूची से।
- लेबर: 36 सीटें, जिनमें निर्वाचन क्षेत्रों की 21 सीटें शामिल हैं।
- ग्रीन्स: 16 सीटें, जिनमें निर्वाचन क्षेत्रों की दो सीटें शामिल हैं।
- ते पाती माओरी: पांच सीटें, सभी माओरी निर्वाचन क्षेत्रों से।
- ऑपर्च्युनिटी: सात सीटें, सभी पार्टी सूची से।
मतगणना के दौरान संसद के अनुमानित आकार में बदलाव हुआ। पहले के आवंटन में 130 सदस्यीय सदन में लेबर को 35 सीटें दी गई थीं; बाद के आंकड़े में 131 सदस्यीय सदन में उसे 36 सीटें मिलीं। दोनों ही आवंटनों में नेशनल, एसीटी और न्यूज़ीलैंड फर्स्ट की सीटें कुल 67 हैं, जबकि बहुमत के लिए 66 सीटें जरूरी हैं।
इसका मतलब है कि सत्तारूढ़ गठबंधन न्यूनतम जरूरी संख्या से सिर्फ एक सीट आगे है। अंतिम आवंटन देशभर के पार्टी वोट और अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों, दोनों पर निर्भर करेगा।
संसद में 120 से अधिक सीटें क्यों हैं
न्यूज़ीलैंड में मिश्रित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली है, जिसे आम तौर पर एमएमपी कहा जाता है। हर मतदाता दो विकल्प चुनता है: एक अपने स्थानीय निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि के लिए और दूसरा किसी राजनीतिक दल के लिए। हर दल को मिलने वाली सीटों की संख्या मुख्यतः पार्टी वोट से तय होती है। स्थानीय स्तर पर जीती सीटों से आगे की जगहें पार्टी सूची के उम्मीदवारों से भरी जाती हैं।
आम तौर पर किसी दल को प्रतिनिधित्व के लिए पार्टी वोट का कम से कम 5% या किसी एक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल करनी होती है। संसद में आम तौर पर 120 सीटें होती हैं, लेकिन जब कोई दल अपने पार्टी वोट से मिलने वाली सीटों से अधिक स्थानीय सीटें जीतता है, तो संसद का आकार बढ़ जाता है। इन अतिरिक्त सीटों को ओवरहैंग सीटें कहा जाता है।
नेशनल की अनुमानित 42 निर्वाचन क्षेत्र की जीत पार्टी वोट के आधार पर उसे मिलने वाली सीटों से अधिक है। ते पाती माओरी की पांच निर्वाचन क्षेत्र सीटें भी ओवरहैंग बनाती हैं। ताज़ा अनुमान में कुल 11 ओवरहैंग सीटें हैं, जिससे सदन में 131 सदस्य होंगे। 2023 में चुनी गई संसद में 123 सीटें थीं।
व्यावहारिक तौर पर संसद का आकार बढ़ने के साथ बहुमत का आंकड़ा भी बदलता है। 131 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 66 सदस्यों की जरूरत है। इसलिए स्थानीय मुकाबले दो मायनों में अहम हैं: वे तय करते हैं कि किसी समुदाय का प्रतिनिधित्व कौन करेगा और संसद का आकार तथा सरकार बनाने का गणित भी बदल सकते हैं।
विशेष मत नतीजे बदल सकते हैं
विशेष मत अभी शुरुआती आंकड़ों में शामिल नहीं हैं। इनमें विदेश से डाले गए मत और अतिरिक्त जांच की जरूरत वाले मत शामिल हैं, जैसे अप्रकाशित मतदाता सूची में शामिल लोगों या विशेष मतदान व्यवस्था के तहत डाले गए मत।
लक्सन ने कहा कि करीब 300,000 विशेष मतों की गिनती बाकी है; चुनाव की रात के कुछ अन्य अनुमानों में यह संख्या लगभग 700,000 बताई गई। इसकी पुष्टि की गई संख्या नहीं दी गई। चुनाव आयोग के 27 नवंबर को आने वाले आधिकारिक नतीजों में इन मतों के साथ शुरुआती मतगणना की जांच भी शामिल होगी।
विशेष मतों से अक्सर लेबर और ग्रीन्स की स्थिति बेहतर हुई है। 2023 में विशेष मतों को शामिल किए जाने के बाद नेशनल की सीटें शुरुआती गिनती के 50 से घटकर 48 रह गई थीं। उस चुनाव की अंतिम गिनती में लेबर ने नेशनल से नेल्सन और ते अतातू सीटें भी छीन ली थीं।
लाइव नतीजों के पन्नों पर दिखाए गए प्रतिशत को सावधानी से समझना चाहिए। उदाहरण के लिए, 99.9% मतगणना पूरी होने का मतलब है कि मतदान केंद्रों में से इतने प्रतिशत ने नतीजे भेज दिए हैं, न कि डाले गए सभी मतों में से इतनी गिनती पूरी हो गई है। इसलिए करीब-करीब सभी केंद्रों के नतीजे आने के बाद भी लाखों विशेष मतों की गिनती बाकी हो सकती है।
आगे की प्रक्रिया का कार्यक्रम संक्षिप्त है:
- 7 नवंबर: शुरुआती मतगणना में नेशनल, एसीटी और न्यूज़ीलैंड फर्स्ट के संयुक्त रूप से बहुमत हासिल करने की संभावना।
- 27 नवंबर से पहले: विशेष मतों की गिनती और शुरुआती नतीजों की जांच।
- 27 नवंबर: आधिकारिक नतीजे आने की उम्मीद, जिसके बाद गठबंधन बनाने पर ठोस बातचीत के लिए सीटों की संख्या तय होगी।
- आधिकारिक गिनती के बाद: करीबी मुकाबलों में दोबारा मतगणना की मांग या कानूनी चुनौती संभव; दल सरकार बनाने की व्यवस्था पर बातचीत करेंगे।
नेशनल के पांच करीबी मुकाबलों पर बड़े दांव
वैरारापा नेशनल की सबसे असुरक्षित सीटों में से एक है। चुनाव की रात माइक बटरिक लेबर के कीरन मैकएनल्टी से सिर्फ 139 वोट आगे थे। हैमिल्टन ईस्ट में नेशनल के रायन हैमिल्टन ने लेबर की जॉर्जी डैनसी पर 456 वोटों की बढ़त बनाई।
नेशनल की तीन अन्य बढ़तें भी कम थीं: व्हांगारेई में लॉयड बड 1,061 वोट, नेल्सन में ब्लेयर कैमरन 1,210 वोट और ताकानिनी में रीमा नखले 1,484 वोट से आगे थीं। विशेष मतों की गिनती पूरी होने तक इन उम्मीदवारों का भविष्य तय नहीं होगा।
नेशनल की ओवरहैंग सीटों के कारण ये मुकाबले खास तौर पर अहम हैं। जब किसी दल के पास पार्टी वोट के आधार पर मिलने वाली सीटों से पहले ही अधिक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें हों, तो स्थानीय मुकाबला हारने से उसका कुल प्रतिनिधित्व घट सकता है; सीट सिर्फ पार्टी सूची के किसी दूसरे उम्मीदवार को नहीं मिलती। इसलिए कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में नतीजे बदलने से गठबंधन का बहुमत प्रभावित हो सकता है।
अन्य करीबी मुकाबलों से विपक्षी दलों के बीच सीटों का बंटवारा बदल सकता है। ते ताई तोकेराउ में ते पाती माओरी के अपेराहामा एडवर्ड्स ग्रीन्स की हुहाना लिंडन से 499 वोट आगे थे। दोनों दल मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन से बाहर हैं, लेकिन नतीजा उनकी ताकत और सीटों की अंतिम गणना को प्रभावित करेगा।
ऑपर्च्युनिटी पहली बार संसद में, उसके सामने विकल्प
अनुमान है कि ऑपर्च्युनिटी 6% पार्टी वोट और सात सीटों के साथ पहली बार संसद में पहुंचेगी। बिना किसी निर्वाचन क्षेत्र में जीत के संसद में प्रवेश करने के लिए जरूरी 5% सीमा से यह एक प्रतिशत अंक अधिक है।
नेता किउले वोंग ने कहा है कि वह दोनों पक्षों से बातचीत के लिए तैयार हैं। चुनाव प्रचार के दौरान लक्सन ने ऑपर्च्युनिटी के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था, हालांकि अंतिम सीटों में बदलाव से उसके समर्थन का महत्व किसी भी बड़ी पार्टी के लिए बढ़ सकता है।
चुनावी कवरेज के दौरान बातचीत के लिए साझेदार चुनने के वोंग के बताए मानदंड बदलते रहे: कभी सबसे अधिक वोट पाने वाली पार्टी और कभी सबसे अधिक सीटें पाने वाली पार्टी। बातचीत का क्रम सीधे तौर पर समझाते हुए उन्होंने कहा कि वह सबसे अधिक सीटें जीतने वाले दल से शुरुआत करेंगी।
ऑपर्च्युनिटी की नेता के तौर पर वोंग ने इसकी वजह बताई:
हमने यह फैसला इस आधार पर किया है कि सरकार बनाने के लिए संसद में सीटों का बहुमत जरूरी है। इसलिए हम इसी पर कायम रहेंगे।
ऑपर्च्युनिटी के भीतर भी मंजूरी की एक शर्त है: गठबंधन या विश्वास और आपूर्ति समझौते के लिए उसके बोर्ड के 75% सदस्यों का समर्थन जरूरी है। विश्वास और आपूर्ति समझौते के तहत कोई दल मंत्रिमंडल में शामिल हुए बिना सरकार के बने रहने और उसकी खर्च योजनाओं का समर्थन कर सकता है।
ताज़ा शुरुआती आंकड़ों में लेबर, ग्रीन्स और ते पाती माओरी के पास कुल 57 सीटें हैं। ऑपर्च्युनिटी की सात सीटें जोड़ने पर यह संख्या 64 होगी, जो 66 से कम है। वोंग की पार्टी तभी निर्णायक होगी, जब अंतिम गिनती में कोई ऐसा गठजोड़ बने जो बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सके।
स्थानीय चुनावी जीत से नेशनल के वरिष्ठ नेता संसद से बाहर
नेशनल के 42 सांसदों में सभी निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए प्रतिनिधि होंगे। पार्टी सूची के भरोसे सीट पाने वाले उम्मीदवारों के लिए कोई जगह नहीं बचती। ऐसे में लक्सन के दूसरे कार्यकाल की संभावना बने रहने के बावजूद पार्टी के कई अनुभवी नेता संसद से बाहर हो सकते हैं।
उपनेता निकोला विलिस, न्याय मंत्री पॉल गोल्डस्मिथ और स्पीकर गेरी ब्राउनली उन वरिष्ठ नेताओं में थे जिनका संसद से बाहर होना तय लग रहा था। परिवहन मंत्री क्रिस बिशप ने हट साउथ सीट पर हार स्वीकार की, जहां चुनाव की रात लेबर की गिन्नी एंडरसन 889 वोट आगे थीं। बिशप के पार्टी सूची से भी सीट पाने की संभावना नहीं थी।
समर्थकों को संबोधित करते हुए लक्सन ने इन हारों को स्वीकार किया। एसीटी और न्यूज़ीलैंड फर्स्ट के साथ अगली सरकार का स्वरूप तय करने के लिए बातचीत के बीच नेशनल को अपने संसदीय नेतृत्व के कुछ हिस्सों को फिर से खड़ा करना होगा।
पार्टी के वोट हिस्से से यह भी पता चलता है कि उसकी स्थिति कितनी बदली है। 2023 में नेशनल को लगभग 38% वोट मिले थे, जबकि ताज़ा शुरुआती गिनती में उसे 29.2% मिले हैं। यह करीब नौ प्रतिशत अंक की गिरावट है। स्थानीय मुकाबलों में लगातार मजबूत प्रदर्शन के कारण उसे पार्टी वोट के आधार पर मिलने वाली सीटों से अधिक सीटें मिली हैं।
माओरी निर्वाचन क्षेत्र और बंटे हुए वोट से संसद का स्वरूप तय
अनुमान है कि ते पाती माओरी सात में से पांच माओरी निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल करेगी, जबकि देशभर के पार्टी वोट में उसे केवल लगभग 0.6% मिले हैं। लेबर के बाकी दो माओरी सीटें जीतने की संभावना है।
माओरी निर्वाचन क्षेत्र उन मतदाताओं के लिए बनाए गए हैं जो माओरी मतदाता सूची में दर्ज हैं। ते पाती माओरी ने अपने समर्थकों से कहा कि वे निर्वाचन क्षेत्र के वोट में उसके उम्मीदवारों का समर्थन करें और पार्टी वोट वामपंथी दलों को दें। इससे स्थानीय जीत और पार्टी वोट के कम हिस्से के बीच का अंतर समझने में मदद मिलती है।
अनुमानित विजेताओं में हौराकी-वाइकाटो में हाना-रविति मैपी-क्लार्क, ते ताई हौआउरू में डेबी ङारेवा-पैकर, तामाकी मकाउराउ में ओरिनी कैपारा और वाइआरिकी में राविरी वेटिति शामिल हैं। ते ताई तोकेराउ में एडवर्ड्स की कम बढ़त पार्टी की अस्थायी पांचवीं सीट पूरी करती है।
एसीटी और न्यूज़ीलैंड फर्स्ट ने भी वोट बांटकर डालने की अपील की थी। उन्होंने समर्थकों से नेशनल के निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवारों का समर्थन करने और पार्टी वोट छोटी गठबंधन पार्टियों को देने को कहा। नेशनल ने सार्वजनिक रूप से इस रणनीति का विरोध किया। दोनों बड़ी पार्टियों के नेताओं ने ओवरहैंग के जरिए अतिरिक्त सीटें पाने के लिए वोट बांटने की कोशिशों की आलोचना की।
अभियान में महंगाई अहम मुद्दा, अब सरकार गठन पर बातचीत
घरेलू बजट, स्वास्थ्य सेवा और अर्थव्यवस्था चुनाव के प्रमुख मुद्दे रहे। तीसरी तिमाही में बेरोजगारी दर 5.7% पहुंच गई, जो 11 साल का उच्चतम स्तर है। मतदाता रोजमर्रा की चीजों की ऊंची कीमतों और घरों की कीमतों को वहन कर पाने की लगातार बनी चिंता से जूझ रहे थे।
नेशनल ने नए कर नहीं लगाने का वादा करते हुए प्रचार किया। लेबर ने मुफ्त डॉक्टर परामर्श और दवाओं के नुस्खों के साथ सार्वजनिक परिवहन किराए की अधिकतम सीमा के जरिए जीवन-यापन की लागत में राहत देने की पेशकश की। कौन-सी नीतियां सरकार के कार्यक्रम में शामिल होंगी, यह अंतिम सीटों और दलों के बीच बातचीत पर निर्भर करेगा।
मतदाताओं ने अग्रिम मतदान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। लगभग 1.91 मिलियन लोगों ने पहले ही वोट डाला, जबकि कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 के चुनाव में यह संख्या 1.98 मिलियन थी। चुनाव आयोग के अनुसार अग्रिम मतदान के पहले पांच दिनों में 913,762 वोट पड़े, जो 2023 की समान अवधि से 28% अधिक थे।
लक्सन ने कहा कि नतीजे तय होने तक कार्यवाहक सरकार के नियम लागू रहेंगे। मंत्री अपने पदों पर बने रहेंगे और सरकार का रोजमर्रा का काम जारी रहेगा। अगली सरकार बनने तक बड़े फैसले लेने में संयम बरता जाएगा।
अपर हट में समर्थकों को संबोधित करते हुए लेबर नेता हिप्किंस ने भी इंतज़ार की बात स्वीकार की:
आज रात न्यूज़ीलैंड ने अपनी बात कह दी है। आपने आखिर क्या कहा है, यह पूरी तरह समझने में हमें थोड़ा और समय लग सकता है।
अगली तय तारीख 27 नवंबर है। लक्सन ने कहा कि आधिकारिक नतीजे आने के बाद ही गठबंधन पर सार्थक बातचीत शुरू होगी। तब तक न्यूज़ीलैंड में मौजूदा सत्तारूढ़ दलों के पास संसद में संभावित बहुमत तो होगा, लेकिन आखिरकार सरकार कौन बनाएगा, यह तय नहीं होगा।
मुख्य बातें
- नेशनल, एसीटी और न्यूज़ीलैंड फर्स्ट के पास अनुमानित 67 सीटें होंगी, जो बहुमत के 66 सीटों के आंकड़े से अधिक हैं।
- ताज़ा शुरुआती आवंटन के मुताबिक संसद में 131 सीटें होंगी, जिनमें 11 ओवरहैंग सीटें शामिल हैं।
- पार्टी वोट में लेबर मामूली रूप से आगे है, जबकि निर्वाचन क्षेत्र की जीत के चलते नेशनल के पास अधिक सीटें हैं।
- विशेष मत और करीबी स्थानीय मुकाबले 27 नवंबर को घोषित होने वाले अंतिम सीट आवंटन को बदल सकते हैं।
- ऑपर्च्युनिटी को सात सीटें मिलने का अनुमान है, लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन से बाहर के चारों दलों के पास फिलहाल कुल 64 सीटें ही हैं।
- लक्सन ने जीत का दावा नहीं किया है। नतीजे और सरकार गठन तय होने तक कार्यवाहक सरकार के नियम लागू रहेंगे।






