अध्ययन का अनुमान: पोटैशियम युक्त नमक से भारत में हर साल करीब 4 लाख मौतें रोकी जा सकती हैं

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Potassium Enriched Salt Could Prevent Nearly 400,000 Deaths a Year in India, Study Estimates

नमक में बदलाव से स्वास्थ्य को बड़ा लाभ हो सकता है

193 देशों और क्षेत्रों को शामिल करने वाले एक अध्ययन के अनुसार, सामान्य नमक की जगह पोटैशियम युक्त मिश्रण इस्तेमाल करने से भारत में हर साल अनुमानित 399,884 मौतें और हृदय संबंधी तथा दीर्घकालिक गुर्दा रोग के 1,528,494 नए मामले रोके जा सकते हैं। अनुमानित लाभ घरों और व्यावसायिक रूप से तैयार भोजन, दोनों में इस्तेमाल होने वाले नमक को बदलने से मिलेंगे।

विषय-सूची
  1. नमक में बदलाव से स्वास्थ्य को बड़ा लाभ हो सकता है
  2. शोधकर्ताओं ने लाभ की गणना कैसे की
  3. सोडियम और पोटैशियम दोनों क्यों अहम हैं
  4. भारत में हुए परीक्षण में क्या नतीजे मिले
  5. घरों की रसोई से बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है
  6. खाद्य निर्माता और रेस्तरां भी भूमिका निभा सकते हैं
  7. गुर्दा रोग में खास सावधानियां जरूरी
  8. लक्षित रणनीति की शुरुआत चिकित्सा सेवाओं से हो सकती है
  9. कीमत, आपूर्ति और बेहतर आंकड़े बदलाव की राह तय करेंगे
  10. मुख्य बातें

4 नवंबर 2026 को Nature Health में प्रकाशित शोध का अनुमान है कि दुनिया भर में नमक बदलने से हर साल 2.96 million मौतें और 10.17 million नए मामले रोके जा सकते हैं। भारत और चीन को सबसे बड़ा कुल लाभ होगा, जो उनकी बड़ी आबादी, नमक की खपत और हृदय तथा गुर्दा रोगों के बोझ को दर्शाता है।

लिपिंग हुआंग और ब्रूस नील समेत शोधकर्ताओं ने ऐसे विकल्प का अध्ययन किया जिसमें 75% सोडियम क्लोराइड और 25% पोटैशियम क्लोराइड है। सामान्य नमक सोडियम क्लोराइड होता है। उसके एक चौथाई हिस्से को पोटैशियम क्लोराइड से बदलने पर सोडियम घटता है और पोटैशियम बढ़ता है। इससे उच्च रक्तचाप में योगदान देने वाले आहार के दो कारकों पर एक साथ असर पड़ता है।

ये आंकड़े कंप्यूटेशनल मॉडल से निकले सालाना अनुमान हैं। शोधकर्ताओं ने गणना की कि नमक की खपत में बदलाव से रक्तचाप और उसके जरिए बीमारी तथा मृत्यु का जोखिम किस तरह प्रभावित हो सकता है। इतना लाभ हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर इसे अपनाना, किफायती उत्पाद उपलब्ध कराना और उन लोगों के लिए सुरक्षा उपाय करना जरूरी होगा जिनके शरीर को पोटैशियम संभालने में कठिनाई होती है।

शोधकर्ताओं ने लाभ की गणना कैसे की

Nature Health के अध्ययन, जिसका शीर्षक Global health outcomes from replacing dietary sodium chloride with potassium-enriched salt है, में पांच तरीकों की तुलना की गई: मिलाए जाने वाले सभी नमक को बदलना, घरों में इस्तेमाल होने वाला नमक बदलना, प्रसंस्कृत और रेस्तरां के भोजन का नमक बदलना, और उच्च रक्तचाप से पीड़ित या उसका इलाज करा रहे लोगों के लिए दो सीमित रणनीतियां।

हाइपरटेंशन का अर्थ लगातार उच्च रक्तचाप है। मॉडल ने पहले सोडियम और पोटैशियम के सेवन में बदलाव का अनुमान लगाया, फिर उनसे सिस्टोलिक रक्तचाप यानी रक्तचाप माप में ऊपर की संख्या में होने वाले बदलाव की गणना की। इसके बाद इन बदलावों के आधार पर हृदय संबंधी और गुर्दे से जुड़े संभावित परिणामों का अनुमान लगाया गया।

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दुनिया भर में मिलाए जाने वाले सभी नमक को बदलने से सबसे बड़ा अनुमानित लाभ मिला: हर साल 2.96 million कम मौतें, जिसकी 95% अनिश्चितता सीमा 2.81 million से 3.12 million तक थी। यह सीमा गणना में इस्तेमाल किए गए आंकड़ों और मान्यताओं की अनिश्चितता से निकलने वाली संभावित रेंज बताती है।

अनुमानित कमी हृदय संबंधी और दीर्घकालिक गुर्दा रोगों से होने वाली सालाना मौतों का 14.6% और नए मामलों का 13.1% थी। शोधकर्ताओं ने यह भी गणना की कि हर साल विकलांगता-समायोजित जीवन-वर्षों के 69.43 million वर्ष बचाए जा सकते हैं। इस माप में जल्दी मृत्यु से गंवाए गए वर्षों और बीमारी या दिव्यांगता के साथ बिताए गए वर्षों, दोनों को जोड़ा जाता है।

मॉडल में रक्तचाप घटने से रोकी गई मौतों में से अधिक पोटैशियम के कारण संभावित मौतों को घटाया गया। नए रोग मामलों और विकलांगता-समायोजित जीवन-वर्षों के अनुमान में रक्तचाप घटने के जरिए मिलने वाले लाभ शामिल थे।

सोडियम और पोटैशियम दोनों क्यों अहम हैं

अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में सोडियम का औसत सेवन 4.3 ग्राम प्रतिदिन था, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश 2 ग्राम से कम की है। पोटैशियम का औसत सेवन प्रतिदिन 2.3 ग्राम था, जो अनुशंसित न्यूनतम 3.5 ग्राम से कम है।

सोडियम और नमक की माप अलग-अलग होती है: सोडियम, सोडियम क्लोराइड का एक घटक है। 2 ग्राम सोडियम लगभग 5 ग्राम सामान्य नमक के बराबर होता है। दोनों मापों को अलग रखने से यह समझने में मदद मिलती है कि नमक की दैनिक मात्रा सोडियम की सिफारिश से काफी बड़ी क्यों दिख सकती है।

अधिक सोडियम और कम पोटैशियम उच्च रक्तचाप में योगदान देते हैं, जिससे स्ट्रोक, दिल का दौरा और गुर्दा रोग का जोखिम बढ़ता है। पोटैशियम युक्त विकल्प आहार के इस संतुलन के दोनों पहलुओं को एक साथ बदलता है।

ऑस्ट्रेलिया के द जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ में वरिष्ठ प्रोफेसरियल फेलो ब्रूस नील ने इस संयुक्त तरीके के लाभ का वर्णन किया:

पोटैशियम युक्त नमक अपनाने से आहार की इन दोनों समस्याओं पर एक साथ असर पड़ता है और स्वास्थ्य को बड़ा लाभ मिलता है।

अध्ययन में पाया गया कि नमक पूरी तरह बदलने की स्थिति में 193 देशों और क्षेत्रों में से 133 में हृदय संबंधी मौतों का कम-से-कम 10% रोका जा सकता है। इनमें से कई देश एशिया, उत्तरी अमेरिका और लैटिन अमेरिका में थे।

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भारत में हुए परीक्षण में क्या नतीजे मिले

ग्रामीण भारत के साक्ष्य बताते हैं कि नमक बदलने से क्या असर हो सकता है। साल्ट सब्स्टिट्यूट इन इंडिया स्टडी में उच्च रक्तचाप से पीड़ित 502 लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें तीन महीने तक पोटैशियम युक्त विकल्प की तुलना सामान्य नमक से की गई।

द जॉर्ज इंस्टीट्यूट इंडिया ने अपने जनवरी 2025 के बयान में नतीजों का उल्लेख किया। प्रतिभागियों के पेशाब में नमक का शुरुआती औसत उत्सर्जन 10.4 ग्राम प्रतिदिन था। नमक के सेवन का आकलन करने के लिए इस माप का इस्तेमाल किया जाता है। यह WHO की अनुशंसित दैनिक नमक मात्रा से दोगुने से भी अधिक था।

विकल्प इस्तेमाल करने वाले प्रतिभागियों का सिस्टोलिक रक्तचाप सामान्य नमक इस्तेमाल करने वालों की तुलना में 4.6 मिलीमीटर पारा और डायस्टोलिक रक्तचाप 1.1 मिलीमीटर पारा कम हुआ। डायस्टोलिक रक्तचाप माप में नीचे की संख्या होती है और यह दिल की धड़कनों के बीच के दबाव को मापती है।

परीक्षण में पेशाब में पोटैशियम का स्तर बेहतर हुआ और सोडियम तथा पोटैशियम का अनुपात भी सुधरा। प्रतिभागियों ने नियमित इस्तेमाल की जानकारी दी और उन्हें इसका स्वाद स्वीकार्य लगा। ये नतीजे अहम हैं, क्योंकि आहार में बदलाव को जारी रखना तब आसान होता है जब लोग अपने परिचित व्यंजन बनाते रह सकें।

दिशानिर्देशों और शोध का क्रम दिखाता है कि साक्ष्य किस तरह आगे बढ़े हैं:

  • 2025 में WHO ने सोडियम का सेवन घटाने के तरीके के रूप में पोटैशियम युक्त, कम सोडियम वाले नमक विकल्पों का समर्थन किया।
  • 29 जनवरी 2025 को द जॉर्ज इंस्टीट्यूट इंडिया ने इस सिफारिश का स्वागत किया और 502 ग्रामीण प्रतिभागियों पर हुए अपने अध्ययन के नतीजे साझा किए।
  • 4 नवंबर 2026 को Nature Health के अध्ययन ने विश्लेषण को 193 देशों और क्षेत्रों में नमक बदलने की पांच रणनीतियों तक विस्तार दिया।

घरों की रसोई से बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है

मॉडल के अनुमान के अनुसार, अगर सिर्फ घर पर खाना पकाने और स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाला नमक बदला जाए, तो दुनिया भर में हर साल 1.85 million मौतें और हृदय संबंधी तथा दीर्घकालिक गुर्दा रोग के 6.19 million नए मामले रोके जा सकते हैं। इस तरीके से नमक के सभी स्रोत बदलने पर अनुमानित मौतों में कमी के करीब 63% लाभ मिले।

घरों में इस्तेमाल होने वाला नमक बदलने से अनुमानित वैश्विक लाभ में भारत, चीन, इंडोनेशिया और रूस का संयुक्त हिस्सा 60% से अधिक था। यह नतीजा सरकारों को खाद्य उद्योग में सुधार के साथ-साथ घरों तक विकल्प पहुंचाने पर विचार करने का ठोस कारण देता है।

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भारत में रोकी जा सकने वाली अनुमानित 399,884 मौतें, दुनिया भर के 2.96 million के अनुमान का लगभग 13.5% हैं। चीन में अनुमानित 1.08 million मौतें करीब 36.5% हैं। दोनों देशों को मिलाकर मॉडल के अनुसार दुनिया भर में मौतों में होने वाली कुल कमी का करीब आधा हिस्सा बनता है।

घरों में इस बदलाव का लाभ इस बात पर भी निर्भर करता है कि लोग इसका इस्तेमाल जारी रखें। शोधकर्ताओं द्वारा चर्चा किए गए सबसे बड़े और सबसे लंबे परीक्षण में, 25% पोटैशियम क्लोराइड वाला विकल्प लेने वाले 92% प्रतिभागी पांच साल बाद भी उसका इस्तेमाल कर रहे थे। शोधकर्ताओं ने बताया कि अधिकतर लोग स्वाद में बदलाव महसूस किए बिना नमक बदल सकते थे।

खाद्य निर्माता और रेस्तरां भी भूमिका निभा सकते हैं

अगर केवल प्रसंस्कृत और रेस्तरां के भोजन में इस्तेमाल होने वाला नमक बदला जाए, तो दुनिया भर में हर साल अनुमानित 1.56 million मौतें और बीमारी के 5.46 million नए मामले रोके जा सकते हैं। यह पूरी तरह नमक बदलने की रणनीति में अनुमानित मौतों में कमी के लाभ का करीब 53% है।

घरों और व्यावसायिक खाद्य पदार्थों के अनुमान अलग-अलग स्थितियों को दर्शाते हैं। संयुक्त मॉडल में यह हिसाब रखा गया है कि दोनों बदलाव एक ही आबादी को कैसे प्रभावित करते हैं और इससे 2.96 million मौतें रोकने का कुल अनुमान निकलता है।

यूरोप और उत्तरी अमेरिका में आहार से मिलने वाले 70% से अधिक नमक का स्रोत प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और रेस्तरां का भोजन है। इन जगहों पर लोगों के नमकदानी उठाने से पहले ही उन्हें काफी सोडियम मिल जाता है, इसलिए अनुमानित लाभ हासिल करने के लिए निर्माताओं और रेस्तरां के बदलाव अहम हैं।

पूरी तरह बदलाव होने पर ब्रिटेन में हर साल करीब 13,000 मौतें और हृदय तथा गुर्दा रोग के लगभग 60,000 नए मामले रोके जा सकते हैं। जब शोधकर्ताओं ने खास तौर पर व्यावसायिक रूप से तैयार भोजन पर ध्यान दिया, तो सबसे अधिक अनुमानित लाभ वाले चार देशों में रूस की जगह अमेरिका शामिल हुआ।

खाद्य उत्पादन में व्यावहारिक चुनौतियां हैं। निर्माताओं को व्यंजनों और उत्पादन प्रक्रियाओं में बदलाव करने, नियमों का पालन करने और पर्याप्त पोटैशियम क्लोराइड जुटाने की जरूरत होगी। शोधकर्ताओं ने कहा कि ये कारक व्यावसायिक खाद्य पदार्थों से मिलने वाले अनुमानित लाभ की सीमा तय कर सकते हैं।

गुर्दा रोग में खास सावधानियां जरूरी

गुर्दा रोग के गंभीर चरणों से पीड़ित लोगों और ऐसी दवाएं लेने वालों को, जो रक्त में पोटैशियम का स्तर काफी बढ़ाती हैं, इन विकल्पों का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। क्षतिग्रस्त गुर्दों के लिए अतिरिक्त पोटैशियम निकालना मुश्किल हो सकता है, जिससे वह रक्त में जमा होने लगता है। इस स्थिति को हाइपरकलेमिया कहते हैं। इससे दिल की धड़कन की खतरनाक गड़बड़ियां हो सकती हैं।

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दीर्घकालिक गुर्दा रोग के G3 से G5 चरण वाले लोगों में मॉडल ने अनुमान लगाया कि नमक पूरी तरह बदलने से रक्तचाप घटने के जरिए हर साल हृदय संबंधी 750,000 मौतें रोकी जा सकती हैं, जबकि हाइपरकलेमिया से 100,000 मौतें होने की आशंका है। अनुमानित संतुलन के अनुसार, हर एक संभावित मौत के मुकाबले हृदय संबंधी सात से अधिक मौतें रोकी जा सकती हैं।

फिर भी शोधकर्ताओं ने सुरक्षा को लागू करने की प्रक्रिया का एक केंद्रीय मुद्दा बताया। पहले के अधिकतर परीक्षणों में हाइपरकलेमिया के अधिक जोखिम वाले लोगों से कहा गया था कि वे खुद को अध्ययन से बाहर रखें। इन समूहों में पोटैशियम से जुड़े नुकसान के साक्ष्य अभी सीमित हैं और मॉडल की सुरक्षा संबंधी गणनाएं उस जोखिम के बारे में मान्यताओं पर निर्भर करती हैं।

भारत में द जॉर्ज इंस्टीट्यूट के गुर्दा रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ प्रोफेसरियल फेलो विवेक झा ने जरूरी सावधानियों का वर्णन किया:

गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों और ऐसी दवाएं लेने वालों को, जो रक्त में पोटैशियम का स्तर काफी बढ़ाती हैं, सावधानी बरतनी चाहिए। इस समूह के जोखिम को मरीजों की शिक्षा, उत्पादों पर लेबल और चिकित्सकीय निगरानी के जरिए प्रभावी ढंग से संभाला जा सकता है।

सुरक्षा के लिए सुझाए गए उपायों में गुर्दा रोग की जांच, मानक चेतावनी लेबल, खाद्य सामग्री की सूचियों में पोटैशियम युक्त नमक की पहचान और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर पोटैशियम की जानकारी शामिल हैं। द जॉर्ज इंस्टीट्यूट इंडिया के जनवरी 2025 के बयान में गुर्दा रोग से पीड़ित लोगों में सुरक्षा और प्रभावशीलता के अधिक साक्ष्य जुटाने की मांग भी की गई थी।

लक्षित रणनीति की शुरुआत चिकित्सा सेवाओं से हो सकती है

दुनिया भर में उच्च रक्तचाप का निदान पा चुके अनुमानित 658 million लोगों के लिए घर में इस्तेमाल होने वाला नमक बदलने से हर साल 590,000 मौतें रोकी जा सकती हैं। इस बदलाव को उच्च रक्तचाप का इलाज करा रहे 523 million लोगों तक सीमित रखने से 480,000 मौतें रोकी जा सकती हैं।

इन सीमित रणनीतियों से आबादी के स्तर पर कम लाभ होगा, लेकिन इनके जरिए बदलाव को पहले से मौजूद चिकित्सा परामर्श से जोड़ा जा सकता है। चिकित्सक गुर्दे की कार्यक्षमता और दवाओं की समीक्षा कर सकते हैं, उत्पादों के लेबल समझा सकते हैं और उन लोगों की पहचान कर सकते हैं जिन्हें अतिरिक्त पोटैशियम से बचना चाहिए।

मॉडल ने माना कि निदान पा चुके या इलाज करा रहे उच्च रक्तचाप के 20% वयस्कों को संभावित गुर्दा रोग या हाइपरकलेमिया के जोखिम के कारण इस विकल्प से बचने की सलाह दी जाएगी। यह अनुपात देशों और मरीजों के समूहों के अनुसार अलग-अलग होगा।

शोधकर्ताओं ने इसे अधूरे स्तर पर अपनाने की स्थिति भी जांची। सामान्य नमक का आधा हिस्सा बदलने से हर साल अनुमानित 1.72 million कम मौतें हो सकती हैं, जबकि पांचवां हिस्सा बदलने से 700,000 कम मौतें हो सकती हैं। ये गणनाएं बताती हैं कि पूरी तरह बदलाव से पहले भी बड़ा लाभ मिलना शुरू हो सकता है।

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कीमत, आपूर्ति और बेहतर आंकड़े बदलाव की राह तय करेंगे

अध्ययन के अनुसार, पोटैशियम युक्त नमक औसतन सामान्य नमक से करीब दोगुने दाम का है। पोटैशियम क्लोराइड, सोडियम क्लोराइड से महंगा है और विकल्प अक्सर खास स्वास्थ्य उत्पादों के रूप में बेचे जाते हैं।

द जॉर्ज इंस्टीट्यूट इंडिया के कार्यकारी निदेशक विवेकानंद झा ने संस्थान के जनवरी 2025 के बयान में किफायती कीमत, व्यापक उपलब्धता, स्पष्ट लेबल और सब्सिडी की मांग की। भारतीय परिवारों के लिए इन उपायों से तय होगा कि नमक बदलना रोजमर्रा की किराना खरीद का हिस्सा बन सकता है या नहीं।

दुनिया भर में बदलाव के लिए पोटैशियम क्लोराइड का अधिक उत्पादन और खुदरा विक्रेताओं, खाद्य निर्माताओं, चिकित्सकों तथा सरकारों की भागीदारी भी जरूरी होगी। शोधकर्ताओं का अनुमान था कि पूरी तरह लागू होने में दशकों लगेंगे। उन्होंने इसकी तुलना आयोडीन युक्त नमक अपनाने के लंबे अंतरराष्ट्रीय बदलाव से की।

हर देश को कितना लाभ होगा, यह अभी अनिश्चित है। कुछ मूल आंकड़े कई साल पुराने थे और घरों की तुलना में व्यावसायिक भोजन से मिलने वाले नमक के हिस्से की जानकारी सीमित थी। अतिरिक्त राष्ट्रीय आंकड़ों से सरकारों को शुरुआत की जगह चुनने में मदद मिलेगी।

सोडियम और पोटैशियम के रक्तचाप पर असर से जुड़ी मान्यताओं में बदलाव करने पर भी, नमक पूरी तरह बदलने की वैकल्पिक गणनाओं में हर साल 2.02 million से 2.72 million मौतें रोके जाने का अनुमान था। भारत के लिए व्यावहारिक चुनौती इस संभावना को किफायती उत्पादों और चिकित्सकीय सुरक्षा उपायों से जोड़ने की है, साथ ही नमक का सेवन घटाने और उच्च रक्तचाप का इलाज करने के प्रयास जारी रखने की भी।

मुख्य बातें

  • नमक पूरी तरह बदलने से भारत में हर साल अनुमानित 399,884 मौतें और हृदय संबंधी तथा दीर्घकालिक गुर्दा रोग के 1,528,494 नए मामले रोके जा सकते हैं।
  • वैश्विक अध्ययन में 193 देशों और क्षेत्रों के लिए 75% सोडियम क्लोराइड और 25% पोटैशियम क्लोराइड वाले मिश्रण का मॉडल बनाया गया।
  • दुनिया भर में नमक बदलने से हर साल 2.96 million मौतें और बीमारी के 10.17 million नए मामले रोके जा सकते हैं।
  • उच्च रक्तचाप से पीड़ित ग्रामीण भारत के 502 प्रतिभागियों पर हुए परीक्षण में तीन महीने तक विकल्प इस्तेमाल करने के बाद रक्तचाप कम दर्ज किया गया।
  • गुर्दा रोग के गंभीर चरणों से पीड़ित लोगों या पोटैशियम बढ़ाने वाली दवाएं लेने वालों को नमक बदलने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
  • कीमत, लेबल, आपूर्ति और खाद्य उत्पादकों की भागीदारी तय करेगी कि यह बदलाव कितने व्यापक स्तर पर अपनाया जा सकता है।
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