कम कीमत वाला एचआईवी रोकथाम विकल्प 120 देशों के और करीब
डॉ. रेड्डीज़ लेबोरेटरीज़ ने 2 नवंबर, 2026 को घोषणा की कि एचआईवी से बचाव के लिए साल में दो बार दिए जाने वाले इंजेक्शन लेनाकापाविर के उसके जेनेरिक संस्करण को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) से प्रारंभिक मंज़ूरी मिल गई है। गिलियड साइंसेज़ के साथ लाइसेंस समझौते में शामिल 120 देशों में इस दवा की कीमत प्रति व्यक्ति सालाना 40 डॉलर रहने की उम्मीद है।
विषय-सूची
- कम कीमत वाला एचआईवी रोकथाम विकल्प 120 देशों के और करीब
- प्रारंभिक मंज़ूरी का मतलब
- अमेरिकी कीमत से 40 डॉलर की तुलना
- हर छह महीने में इंजेक्शन क्यों मायने रखता है
- लेनाकापाविर एचआईवी से कैसे बचाता है
- इंजेक्शन के साथ एचआईवी जांच ज़रूरी
- लाइसेंस से नियोजित आपूर्ति तक का सफर
- इस प्रयास में भारतीय विनिर्माण की भूमिका
- मंज़ूरी से अपॉइंटमेंट तक
- मुख्य बातें
हैदराबाद की इस कंपनी को उम्मीद है कि शुरुआती आपूर्ति 2026 के अंत से पहले देशों तक पहुंच जाएगी और इसके बाद 2027 में व्यापक स्तर पर उपलब्धता बढ़ेगी। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी यूनिटएड के अनुसार, जो इस परियोजना को समर्थन दे रही है, ज़ाम्बिया शुरुआती खेप पाने वाले देशों में हो सकता है। राष्ट्रीय मंज़ूरियों और खरीद संबंधी व्यवस्थाओं के आधार पर कुछ शुरुआती आपूर्ति कुछ ही हफ्तों में शुरू हो सकती है।
डॉ. रेड्डीज़, गिलियड से लाइसेंस पाने वाले छह निर्माताओं में पहली कंपनी है जिसके जेनेरिक लेनाकापाविर को FDA से प्रारंभिक मंज़ूरी मिली है। अब तक गिलियड ही इसका एकमात्र आपूर्तिकर्ता रहा है और सीमित संसाधनों वाले देशों में मांग आपूर्ति से अधिक रही है।
इस फैसले से एक बेहद प्रभावी रोकथाम दवा उन लोगों के और करीब पहुंच गई है जिन्हें हर दिन गोली लेना मुश्किल लग सकता है। अब तात्कालिक चुनौती आपूर्ति के लिए धन जुटाने, नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करने और इंजेक्शन तथा एचआईवी जांच देने के लिए क्लीनिकों को तैयार करने की है।
प्रारंभिक मंज़ूरी का मतलब
FDA ने राष्ट्रपति की एड्स राहत आपात योजना, जिसे PEPFAR के नाम से जाना जाता है, के तहत उपलब्ध प्रक्रिया के माध्यम से जेनेरिक दवा का आकलन किया। यह प्रक्रिया अमेरिका के बाहर के कार्यक्रमों के लिए बनाई गई एचआईवी दवाओं की गुणवत्ता तय करने में मदद करती है।
प्रारंभिक मंज़ूरी का अर्थ है कि उत्पाद FDA के सुरक्षा, प्रभावशीलता और गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है। हालांकि, गिलियड की ब्रांडेड दवा येज़्टुगो पर लागू पेटेंट या विशिष्टता संबंधी संरक्षण के कारण अमेरिका में जेनेरिक दवा की बिक्री अब भी संभव नहीं है।
दवा पर विचार करते समय देश और अंतरराष्ट्रीय खरीद संगठन FDA के आकलन का उपयोग कर सकते हैं। यूनिटएड की तकनीकी अधिकारी जेसिका बरी ने कहा कि कुछ देशों के नियामक इस आकलन पर भरोसा करके अपने फैसले तेज़ कर सकते हैं।
व्यापक उपलब्धता के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्रीक्वालिफिकेशन और राष्ट्रीय नियामकीय मंज़ूरियों समेत आगे के कदम भी ज़रूरी होंगे। WHO प्रीक्वालिफिकेशन ऐसा आकलन है जो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरने वाली दवाओं की पहचान करने में मदद करता है। मरीज़ों को इंजेक्शन कब मिल सकेंगे, यह हर देश की मंज़ूरी और खरीद व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी कीमत से 40 डॉलर की तुलना
रोकथाम के एक साल के लिए नियोजित जेनेरिक कीमत 40 डॉलर है, जबकि येज़्टुगो की अमेरिका में सालाना सूची कीमत 28,218 डॉलर है। अमेरिकी सूची कीमत वह रकम है जो बीमा या मरीज़ के भुगतान को कम करने वाली अन्य व्यवस्थाओं से पहले तय होती है।
इन आंकड़ों के आधार पर, अमेरिका में ब्रांडेड दवा की सूची कीमत नियोजित जेनेरिक कीमत से लगभग 705 गुना अधिक है। ये कीमतें अलग-अलग बाजारों और खरीद व्यवस्थाओं पर लागू होती हैं: एक अमेरिका की सूची कीमत है, जबकि दूसरी सीमित संसाधनों वाले देशों में पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से हुए समझौते के तहत तय की गई है।
40 डॉलर की कीमत सितंबर 2025 में डॉ. रेड्डीज़, यूनिटएड, दक्षिण अफ्रीका के विट्स रिप्रोडक्टिव हेल्थ एंड एचआईवी इंस्टीट्यूट (विट्स RHI) और क्लिंटन हेल्थ एक्सेस इनिशिएटिव (CHAI) के बीच हुए समझौते के तहत तय की गई थी। साझेदारों ने विकास की प्रक्रिया तेज़ करने के लिए वित्तीय, तकनीकी और नियामकीय सहायता दी।
जेनेरिक दवा की सालाना कीमत समझौते में शामिल देशों में रोज़ ली जाने वाली मौजूदा रोकथाम गोलियों की लागत के बराबर भी है। सरकारों को दवा से जुड़ी सेवाओं के लिए भी धन देना होगा, जिनमें एचआईवी जांच, प्रशिक्षित कर्मचारी, अपॉइंटमेंट और क्लीनिकों तक दवा पहुंचाना शामिल है।
हर छह महीने में इंजेक्शन क्यों मायने रखता है
लेनाकापाविर का इस्तेमाल प्री-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस के लिए होता है, जिसे आमतौर पर PrEP कहा जाता है। इसका मतलब है एचआईवी के संभावित संपर्क से पहले दवा लेना, ताकि वायरस से संक्रमित होने की आशंका कम हो। यह दवा कम से कम 35 किलोग्राम वज़न वाले वयस्कों और किशोरों में यौन संपर्क से होने वाले एचआईवी-1 संक्रमण को रोकने के लिए बनाई गई है।
रोज़ ली जाने वाली मौखिक PrEP को पहली बार 2012 में मंज़ूरी मिली थी। इसे लेने वालों को नियमित रूप से गोलियां लेते रहना पड़ता है। एक अन्य इंजेक्शन विकल्प, कैबोटेग्राविर, हर दो महीने में देना होता है। लेनाकापाविर से यह अंतराल बढ़कर छह महीने हो जाता है, जिससे लोगों को रोकथाम की दवा कम बार लेनी पड़ती है।
यूनिटएड की एचआईवी प्रमुख कारमेन पेरेज़ कासास ने कहा कि रोज़ की खुराक छूटने से लोग ज़रूरी सुरक्षा से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने कम बार खुराक लेने वाले विकल्प को लेकर आशा जताई:
लेनाकापाविर के साथ हमें कहीं अधिक उम्मीद है।
काम, पढ़ाई, यात्रा या इस चिंता के बीच कि कोई उनकी दवा देख न ले, कम बार दवा लेना किसी व्यक्ति के लिए रोकथाम जारी रखना आसान बना सकता है। फिर भी क्लीनिकों को लोगों को तय समय पर लौटने में मदद करनी होगी, इसलिए दवा की सुविधा के साथ भरोसेमंद सेवाएं भी ज़रूरी हैं।
लेनाकापाविर एचआईवी से कैसे बचाता है
लेनाकापाविर एचआईवी के कैप्सिड को निशाना बनाता है, जो वायरस की आनुवंशिक सामग्री के चारों ओर मौजूद सुरक्षात्मक खोल है। कोशिकाओं को संक्रमित करने और अपनी प्रतियां बनाने के लिए एचआईवी को इस संरचना की ज़रूरत होती है। कैप्सिड में हस्तक्षेप करके लेनाकापाविर इस प्रक्रिया के कई चरणों को बाधित करता है।
यह दवा टीके से अलग तरीके से काम करती है। टीका प्रतिरक्षा प्रणाली को किसी खतरे की पहचान करना सिखाता है; लेनाकापाविर एक एंटीवायरल दवा है, जो शरीर में सक्रिय रहने तक वायरस पर असर करती है।
रोकथाम से जुड़े दो बड़े अध्ययनों में पाया गया कि लेनाकापाविर ने संक्रमण के उच्च जोखिम वाले प्रतिभागियों में एचआईवी के नए संक्रमणों को लगभग समाप्त कर दिया। इन नतीजों के आधार पर जून 2025 में अमेरिका में एचआईवी रोकथाम के लिए गिलियड की दवा को मंज़ूरी मिली। इसके बाद WHO ने अपने एचआईवी रोकथाम दिशानिर्देशों में साल में दो बार लेनाकापाविर देने की सिफारिश की।
इस शोध ने एचआईवी कार्यक्रमों से बाहर भी ध्यान खींचा। वैज्ञानिक पत्रिका साइंस ने कैप्सिड पर हुए काम और महीनों तक असर करने वाली रोकथाम दवा की संभावनाओं को देखते हुए लेनाकापाविर को 2024 की ‘ब्रेकथ्रू ऑफ द ईयर’ उपलब्धि चुना।
इंजेक्शन के साथ एचआईवी जांच ज़रूरी
लेनाकापाविर शुरू करने से पहले और उसके बाद हर इंजेक्शन के समय एचआईवी जांच ज़रूरी है। PrEP उन लोगों के लिए है जिन्हें एचआईवी नहीं है। जिस व्यक्ति को पहले से वायरस है, उसे एचआईवी के इलाज की पूरी दवा योजना की आवश्यकता होती है।
लेनाकापाविर का इस्तेमाल उन लोगों में किए जाने पर दवा-प्रतिरोधी एचआईवी के मामले सामने आए हैं जिनके पहले से मौजूद संक्रमण का पता नहीं चला था। प्रतिरोध का मतलब है कि वायरस में ऐसे बदलाव हो गए हैं जिनसे वह दवा का असर झेल सकता है और इलाज के विकल्प कठिन हो जाते हैं।
विट्स RHI में कार्यान्वयन विज्ञान की निदेशक साइका मुल्लिक ने कहा कि सभी PrEP विकल्पों के लिए जांच ज़रूरी है। सीमित संसाधनों वाले कई देशों में रैपिड टेस्ट इस्तेमाल होते हैं, इसलिए जांच की प्रक्रिया इस दवा को शुरू करने की तैयारियों का व्यावहारिक हिस्सा है।
आम दुष्प्रभावों में इंजेक्शन लगाने की जगह पर प्रतिक्रिया, सिरदर्द और मतली शामिल हैं। स्वास्थ्यकर्मियों को इन प्रभावों के बारे में बताना, मरीज़ों का आकलन करना और छह महीने के इंजेक्शन कार्यक्रम के साथ जांच तथा आगे की निगरानी जारी रखनी होगी।
लाइसेंस से नियोजित आपूर्ति तक का सफर
गिलियड ने अक्टूबर 2024 में डॉ. रेड्डीज़ को स्वैच्छिक लाइसेंस दिया था। छह जेनेरिक निर्माताओं के साथ हुए समझौते गैर-अनन्य और रॉयल्टी-मुक्त हैं। इनके तहत उप-सहारा अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के 120 निर्धारित देशों के लिए उत्पादन किया जा सकता है।
मुख्य पड़ाव दिखाते हैं कि जेनेरिक दवा की आपूर्ति से पहले लाइसेंस, वित्तपोषण और नियामकीय काम को किस तरह एक साथ आगे बढ़ाया गया:
- अक्टूबर 2024: गिलियड ने डॉ. रेड्डीज़ समेत छह निर्माताओं को स्वैच्छिक लाइसेंस दिए।
- जून 2025: गिलियड के लेनाकापाविर को एचआईवी रोकथाम के लिए अमेरिका में मंज़ूरी मिली।
- सितंबर 2025: डॉ. रेड्डीज़ ने यूनिटएड, विट्स RHI और CHAI के साथ विकास और पहुंच के लिए प्रति व्यक्ति सालाना 40 डॉलर की कीमत पर सहयोग समझौता किया।
- 2 नवंबर, 2026: डॉ. रेड्डीज़ ने अपने जेनेरिक उत्पाद को FDA से प्रारंभिक मंज़ूरी मिलने की घोषणा की।
- 2026 के अंत से पहले: शुरुआती जेनेरिक आपूर्ति सीमित संख्या में देशों तक पहुंचने की उम्मीद है।
- 2027: डॉ. रेड्डीज़ को पात्र बाजारों में व्यापक उपलब्धता की उम्मीद है।
CHAI के मुख्य कार्यकारी नील बडी शाह ने कहा कि रोकथाम के लिए मूल दवा को मंज़ूरी मिलने के केवल 16 महीने बाद जेनेरिक दवा को मंज़ूरी मिली। उन्होंने कहा कि पहुंच बढ़ाने के दूसरे प्रयासों के लिए भी इस गति को एक मॉडल बनना चाहिए:
रोकथाम के लिए मूल दवा को मंज़ूरी मिलने के एक दशक बाद नहीं, बल्कि सिर्फ 16 महीने में जेनेरिक दवा को मंज़ूरी मिलना दिखाता है कि शुरुआत से ही पहुंच को प्राथमिकता देने पर क्या संभव है। वैश्विक स्वास्थ्य के लिए यही नया मानक होना चाहिए।
इस प्रयास में भारतीय विनिर्माण की भूमिका
डॉ. रेड्डीज़ को ऐसी दवा विकसित और निर्मित करनी थी जो देने के बाद महीनों तक सक्रिय रहे। कंपनी ने कहा कि इस परियोजना के लिए जटिल इंजेक्शन उत्पाद के अनुकूल वैज्ञानिक क्षमता और विनिर्माण विशेषज्ञता की ज़रूरत थी।
डॉ. रेड्डीज़ में API और सेवा इकाई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक सप्रा ने इस मंज़ूरी को रोकथाम विकल्प की व्यापक आपूर्ति की दिशा में एक कदम बताया:
अमेरिकी FDA की मंज़ूरी इस काम को मान्यता देती है और हमें निम्न तथा मध्यम आय वाले देशों के लोगों के लिए साल में दो बार दिए जाने वाले इस एचआईवी रोकथाम विकल्प को उपलब्ध कराने के और करीब ले आती है।
घोषणा के समय गिलियड से लाइसेंस पाने वाले अन्य पांच निर्माताओं को अपने जेनेरिक संस्करणों के लिए FDA की मंज़ूरी नहीं मिली थी। भारतीय कंपनी हेटेरो भी गेट्स फाउंडेशन के साथ अलग से लेनाकापाविर पर काम कर रही है।
गिलियड ने कहा कि उसके लाइसेंस समझौतों का उद्देश्य तेज़ी और टिकाऊ तरीके से पहुंच बढ़ाना है। ये लाइसेंस तय देशों के समूह पर लागू होते हैं, इसलिए 40 डॉलर का समझौता उन्हीं पात्र बाजारों के लिए है, न कि दवा चाहने वाले हर देश के लिए।
मंज़ूरी से अपॉइंटमेंट तक
यूनिटएड के अनुसार, अफ्रीका के शुरुआती तौर पर दवा अपनाने वाले 10 देशों में 125,000 से अधिक लोग गिलियड का लेनाकापाविर लेना शुरू कर चुके हैं। जेनेरिक आपूर्ति से कार्यक्रम बहुत कम दवा कीमत पर कहीं अधिक लोगों तक पहुंच सकते हैं।
ज़रूरत का पैमाना इससे कहीं बड़ा है। CHAI के एचआईवी कार्यक्रम की प्रमुख कैरोलिन अमोल ने कहा कि दुनिया भर में लगभग 20 मिलियन लोगों को PrEP की ज़रूरत है। घोषणा के साथ उद्धृत WHO के आंकड़ों के अनुसार, एचआईवी के साथ जी रहे लोगों की संख्या लगभग 41 मिलियन है और पिछले वर्ष एचआईवी-संबंधी कारणों से 570,000 मौतें हुईं।
विट्स RHI का कहना है कि देशों को प्रशिक्षित सेवा प्रदाताओं, रोकथाम के नए विकल्प देने के लिए तैयार सेवाओं और उन्हें शुरू करने में शामिल समुदायों की ज़रूरत है। साझेदार देशों में शुरुआत और नियमित इस्तेमाल से मिलने वाले साक्ष्यों पर सरकारों, समुदायों, ग्लोबल फंड, अमेरिकी ब्यूरो ऑफ ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी एंड डिप्लोमेसी, गेट्स फाउंडेशन और अन्य संगठनों के साथ काम कर रहे हैं।
अमोल ने कहा कि दवा खरीदना और उसे लोगों तक पहुंचाना अब अगला काम है:
काम पूरा नहीं हुआ है। अब हमें इसे उन सभी लोगों के लिए खरीदने के लिए धन चाहिए जिन्हें इसकी ज़रूरत है। फिर इसे उन लाखों लोगों तक पहुंचाने का कठिन काम करना होगा जिन्हें इसकी ज़रूरत है और जो इसे चाहते हैं।
मरीज़ों के लिए असली बदलाव तब आएगा जब पास की कोई सेवा भरोसेमंद ढंग से इंजेक्शन दे सके, एचआईवी जांच कर सके और छह महीने बाद अगली मुलाकात तय कर सके। FDA का फैसला दवा को उस मुकाम के और करीब ले जाता है; 2026 के आखिर में नियोजित आपूर्ति और 2027 में व्यापक शुरुआत अगले पड़ाव हैं।
मुख्य बातें
- डॉ. रेड्डीज़ ने 2 नवंबर, 2026 को जेनेरिक लेनाकापाविर को FDA से प्रारंभिक मंज़ूरी मिलने की घोषणा की।
- गिलियड के स्वैच्छिक लाइसेंस में शामिल 120 देशों में नियोजित कीमत प्रति व्यक्ति सालाना 40 डॉलर है।
- पात्र वयस्कों और कम से कम 35 किलोग्राम वज़न वाले किशोरों में यौन संपर्क से होने वाले एचआईवी-1 संक्रमण को रोकने के लिए इंजेक्शन साल में दो बार दिया जाता है।
- शुरुआती आपूर्ति 2026 के अंत से पहले पहुंचने की उम्मीद है और 2027 में उपलब्धता व्यापक होगी। ज़ाम्बिया शुरुआती खेप पाने वाले देशों में हो सकता है।
- प्रारंभिक मंज़ूरी पुष्टि करती है कि FDA के मानक पूरे हुए हैं, लेकिन पेटेंट या विशिष्टता संबंधी संरक्षण के कारण अमेरिका में बिक्री प्रतिबंधित है।
- मंज़ूरी को वास्तविक पहुंच में बदलने के लिए एचआईवी जांच, राष्ट्रीय मंज़ूरियां, खरीद के लिए धन और तैयार स्वास्थ्य सेवाएं ज़रूरी हैं।






