शैक्षणिक हैंडबुक के आयात पर रोक, प्रतियां नष्ट करने का आदेश
थाईलैंड ने Routledge Handbook of Contemporary Thailand के दूसरे संस्करण के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस पुस्तक में 37 अध्यायों और 474 पृष्ठों में 45 विद्वानों के लेख शामिल हैं। एक आदेश के तहत पुलिस को प्रतियां जब्त कर नष्ट करने की अनुमति दी गई है। प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर तीन साल तक की जेल, 60,000 बाट तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
विषय-सूची
- शैक्षणिक हैंडबुक के आयात पर रोक, प्रतियां नष्ट करने का आदेश
- पुलिस आदेश में क्या कहा गया है
- दूसरे संस्करण में क्या बदला?
- दो कानून, अलग-अलग नतीजे
- छात्रों और पुस्तकालयों पर व्यावहारिक असर
- पाविन को उम्मीद, प्रतिबंध से पाठक ऑनलाइन तलाशेंगे
- इसी संपादक से जुड़ा दूसरा प्रतिबंध
- संपादक का निर्वासन और अलग कानूनी मामले
- प्रतिबंधों का घटनाक्रम
- मुख्य बातें
राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख समरन नुआलमा ने 30 अक्टूबर, 2026 को मुद्रण पंजीकरण अधिनियम बी.ई. 2550 (2007) की धारा 10 का हवाला देते हुए आदेश पर हस्ताक्षर किए। यह प्रतिबंध थाईलैंड में वितरण के लिए विदेशी प्रकाशन मंगाने या आयात करने पर लागू होता है। पुलिस का कहना है कि इसकी सामग्री राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और सार्वजनिक नैतिकता के लिए खतरा है।
अगस्त में अंग्रेजी में प्रकाशित इस हैंडबुक का संपादन पाविन चाचावलपोंगपुन ने किया है। वह क्योटो विश्वविद्यालय के दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर हैं और थाईलैंड में 2014 के सैन्य तख्तापलट के बाद से निर्वासन में रह रहे हैं। इसके अध्याय राजशाही, सेना, विरोध आंदोलनों और देश के राजपरिवार की मानहानि संबंधी कानून के इस्तेमाल की पड़ताल करते हैं। 2019 में प्रकाशित पहले संस्करण पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।
पाविन का कहना है कि राजशाही पर केंद्रित अध्यायों के कारण यह फैसला लिया गया। सरकार ने कहा है कि सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा करते हुए वह शैक्षणिक स्वतंत्रता का सम्मान करती है। इससे इस बात पर मूलभूत मतभेद सामने आता है कि क्या थाईलैंड की सबसे शक्तिशाली संस्थाओं पर शोध के प्रसार पर पाबंदी होनी चाहिए।
पुलिस आदेश में क्या कहा गया है
रॉयल थाई पुलिस के आदेश में हैंडबुक के लेखों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित रूप से हानिकारक और सार्वजनिक बेचैनी पैदा करने या अशांति को बढ़ावा देने में सक्षम बताया गया है। आदेश के तहत थाईलैंड में वितरण के लिए प्रकाशन लाने पर रोक है। आपराधिक दंड के साथ-साथ प्रतियां जब्त कर नष्ट भी की जा सकती हैं।
इस आदेश को आम तौर पर संख्या 555/2569 के रूप में पहचाना जाता है। इसमें थाई बौद्ध कैलेंडर का वर्ष इस्तेमाल हुआ है, जो 2026 के बराबर है। हालांकि, एक प्रकाशित प्रतिलिपि में संख्या 455/2569 दी गई है। कुछ विवरणों में रॉयल गजट में प्रकाशन की तारीख 4 नवंबर और कुछ में 5 नवंबर बताई गई है। हस्ताक्षर की तारीख लगातार 30 अक्टूबर दी गई है और कहा गया है कि प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
पुलिस ने उन खास अध्यायों या अंशों की पहचान नहीं की जिन्हें वह आपत्तिजनक मानती है। आदेश में इलेक्ट्रॉनिक संस्करणों का भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इन बातों के अभाव में पाठकों और शैक्षणिक संस्थानों को यह विस्तृत जानकारी नहीं मिलती कि किन तर्कों के कारण प्रतिबंध लगा या अधिकारी डिजिटल पहुंच से कैसे निपटेंगे।
थाईलैंड में छपी प्रतियां लाने वाले संगठनों के लिए तात्कालिक नतीजा स्पष्ट है: वितरण के उद्देश्य से विदेश से मंगाई गई पुस्तक के लिए जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चल सकता है, जबकि किताबें जब्त कर नष्ट की जा सकती हैं।
दूसरे संस्करण में क्या बदला?
पाविन ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य 2020 के प्रदर्शनों के बाद हुए राजनीतिक बदलावों को दर्ज करना था। उन प्रदर्शनों में युवा प्रदर्शनकारियों ने राजशाही और सेना, दोनों में सुधार की अभूतपूर्व मांगें उठाई थीं। संशोधित हैंडबुक 21वीं सदी में राजशाही और अधिकारियों द्वारा दंड संहिता की धारा 112 के इस्तेमाल की पड़ताल करती है। इस धारा को आम तौर पर राजपरिवार की मानहानि संबंधी कानून कहा जाता है।
यह पुस्तक शाही राजनीति से आगे भी जाती है। इसके अध्यायों में लोकतांत्रिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल की गई कानूनी रणनीतियां, सुधार की मांग करने वाले युवा आंदोलन, राज्य की निगरानी, थाईलैंड के दक्षिणी सीमावर्ती प्रांतों में हिंसा और लैंगिक व यौन अधिकार शामिल हैं। इसका दायरा राजशाही को इस व्यापक पड़ताल के भीतर रखता है कि सत्ता कैसे काम करती है और विभिन्न समूह राजनीतिक तथा सामाजिक बदलाव के लिए कैसे प्रयास करते हैं।
संपादक और राजशाही के प्रमुख आलोचक पाविन ने प्रतिबंध को सीधे पुस्तक के विषयों से जोड़ा:
इसी तरह के विषयों की वजह से उन्होंने इसे प्रतिबंधित करने का फैसला किया। थाईलैंड का लोकतंत्र पीछे जा रहा है और किताबों पर प्रतिबंध इसका स्पष्ट संकेत है।
2019 के संस्करण से तुलना अहम है, क्योंकि उस पर रोक नहीं लगी थी। इसलिए नया प्रतिबंध उस संस्करण को प्रभावित करता है जिसका उद्देश्य प्रदर्शनों के बाद के घटनाक्रमों को समझाना है, न कि हैंडबुक के नाम से प्रकाशित हर संस्करण को।
दो कानून, अलग-अलग नतीजे
मुद्रण पंजीकरण अधिनियम की धारा 10 राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख को राजशाही, राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या सार्वजनिक नैतिकता से जुड़े आधारों पर प्रकाशनों के आयात पर रोक लगाने का अधिकार देती है। कानून जब्ती और विनाश की भी अनुमति देता है। धारा 27 के तहत आयात प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर तीन साल तक की जेल, 60,000 बाट तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
दंड संहिता की धारा 112 एक अलग अपराध से संबंधित है: राजा, रानी, युवराज या रीजेंट की मानहानि करना, उनका अपमान करना या उन्हें धमकी देना। दोषसिद्धि पर प्रत्येक अपराध के लिए तीन से 15 साल तक की जेल हो सकती है। हैंडबुक में इस कानून पर चर्चा की गई है, जबकि आयात प्रतिबंध खुद मुद्रण संबंधी कानून पर आधारित है।
मामले पर नजर रखने वालों के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है। प्रकाशन पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर अधिकतम जेल की सजा तीन साल है। धारा 112 के तहत दोषसिद्धि पर एक अपराध के लिए इससे पांच गुना तक सजा हो सकती है, क्योंकि दोनों कानूनों के तहत अधिकतम सजा क्रमशः तीन और 15 साल है।
थाईलैंड के 2007 के मुद्रण कानून ने प्रकाशन की अनुमति लेने वाली पुरानी व्यवस्था की जगह पंजीकरण प्रणाली लागू की थी। प्रकाशकों को पहचान संबंधी जानकारी देनी होती है और प्रकाशित पुस्तकों की प्रतियां नेशनल लाइब्रेरी को भेजनी होती हैं। धारा 10 के तहत आयात पर रोक पुलिस को देश में आने वाले विदेशी प्रकाशनों पर नियंत्रण का एक अलग तरीका देती है।
छात्रों और पुस्तकालयों पर व्यावहारिक असर
पाविन ने हैंडबुक को मुख्यतः छात्रों के लिए लिखी गई शैक्षणिक कृति बताया और कहा कि इसके अधिकतर खरीदार विश्वविद्यालय और पुस्तकालय थे। इसलिए प्रतियों के आयात पर प्रतिबंध उन संस्थानों को प्रभावित करता है जो पढ़ाई, शोध और साझा संग्रहों के लिए किताबें खरीदते हैं, साथ ही व्यावसायिक वितरकों को भी।
पुस्तकालय की एक प्रति कई वर्षों तक अनेक पाठकों के काम आ सकती है। इसके पहुंचने पर रोक का असर उस व्यक्ति से कहीं आगे तक जाता है जिसने किताब मंगाई हो। खासकर ऐसी बड़ी शैक्षणिक पुस्तक के मामले में, जिसे छात्र अपनी प्रति खरीदे बिना पढ़ सकते थे।
पुस्तक में 45 योगदानकर्ताओं और 37 अध्यायों की मौजूदगी भी प्रभावित प्रकाशन का व्यापक दायरा दिखाती है। पुलिस ने पूरी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाया है। इसमें दक्षिणी सीमावर्ती इलाकों में हिंसा, निगरानी और यौन अधिकारों पर सामग्री भी शामिल है, साथ ही राजशाही से जुड़ी वह सामग्री भी, जिसे पाविन प्रतिबंध का कारण मानते हैं।
सरकार की उप प्रवक्ता लालिदा पेर्स्विवताना ने सरकार के रुख को सार्वजनिक हित की रक्षा और व्यक्तिगत तथा शैक्षणिक स्वतंत्रताओं के बीच संतुलन बताया। उन्होंने कहा कि थाईलैंड:
"अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शैक्षणिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता देता है"।
यह बयान सरकार की घोषित प्राथमिकताओं को सामने रखता है। विश्वविद्यालयों और वितरकों के लिए बाध्यकारी कदम पुलिस का आदेश है, जिसमें दंड और छपी प्रतियों को प्रसार से हटाने का अधिकार शामिल है।
पाविन को उम्मीद, प्रतिबंध से पाठक ऑनलाइन तलाशेंगे
प्रतिबंध पर प्रतिक्रिया देते हुए पाविन ने हैंडबुक की ओर ध्यान खींचने के लिए पुलिस का धन्यवाद किया। उनका तर्क था कि छपी प्रतियों के आयात पर रोक पाठकों को इलेक्ट्रॉनिक संस्करण तलाशने के लिए प्रेरित करेगी और पुस्तक को ऐसा प्रचार दिलाएगी जो अन्यथा शायद उसे न मिलता।
क्योटो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने फेसबुक पोस्ट में यह बात कही:
सोशल मीडिया और इंटरनेट के दौर में इस तरह का प्रतिबंध काम नहीं करता। लोग छपी प्रति छोड़कर ई-बुक ले सकते हैं।
उनकी प्रतिक्रिया भौतिक वितरण पर नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन माध्यमों के जरिए पाठकों तक पहुंच के बीच व्यावहारिक तनाव को उजागर करती है। छपी किताबें आयातकों, दुकानों और संस्थागत खरीद प्रणालियों से होकर गुजरती हैं। इलेक्ट्रॉनिक संस्करण अलग माध्यमों से पाठकों तक पहुंच सकते हैं, इसलिए पाविन को उम्मीद है कि कुछ पाठक अपना माध्यम बदलेंगे।
पाविन ने यह भी कहा कि विवाद से उन्हें और प्रकाशक को आर्थिक लाभ हो सकता है। अधिक ध्यान और बिक्री बढ़ने का उनका अनुमान प्रतिबंध के संभावित असर का उनका आकलन है; इसके साथ बिक्री के आंकड़े जारी नहीं किए गए।
इसी संपादक से जुड़ा दूसरा प्रतिबंध
थाईलैंड ने इससे पहले Rama X: The Thai Monarchy under King Vajiralongkorn पर प्रतिबंध लगाया था। इस पुस्तक का संपादन भी पाविन ने किया था और इसे येल विश्वविद्यालय के दक्षिण-पूर्व एशिया अध्ययन कार्यक्रम ने प्रकाशित किया था। अधिकारियों ने जुलाई 2023 में, पुस्तक जारी होने से पहले, इसके खिलाफ कदम उठाया और 21 जुलाई को संशोधित प्रतिबंध जारी किया।
पहले प्रतिबंध के साथ जारी पुलिस बयान में पुस्तक के आवरण और सामग्री को राजशाही का अपमान करने वाला तथा सार्वजनिक शांति और नैतिकता के लिए खतरा बताया गया था। नई कार्रवाई में भी शाही संस्था की पड़ताल करने वाले प्रकाशन के खिलाफ मुद्रण कानून का इस्तेमाल किया गया है।
कानूनी अधिकार संगठन iLaw ने 2007 के अधिनियम के तहत पुलिस के आयात प्रतिबंधों का सामना करने वाले कम से कम छह प्रकाशनों की पहचान की है। सभी राजशाही से संबंधित हैं। इनमें से दो पाविन से जुड़े हैं। अन्य चार हैं:
- थाईलैंड्स क्राइसिस एंड द फाइट फॉर डेमोक्रेसी, गाइल्स उंगपाकोर्न की पुस्तक।
- अ किंगडम इन क्राइसिस, एंड्रयू मैकग्रेगर मार्शल की पुस्तक।
- फ्रांसीसी संस्करण की मैरी क्लेयर पत्रिका का नवंबर 2015 अंक।
- द न्यू एज ऑफ द किंग्स: मॉडर्न मोनार्कीज़ इन मलेशिया एंड द वर्ल्ड में प्रकाशित लेख थाईलैंड: कोलॉसली पॉपुलर।
यह सूची दिखाती है कि इस अधिकार का इस्तेमाल किताबों, पत्रिका के एक अंक और एक बड़े संकलन में शामिल लेख समेत कई तरह के प्रकाशनों के खिलाफ किया गया है। छह पहचाने गए प्रकाशनों में राजशाही पर चर्चा साझा विषय है।
संपादक का निर्वासन और अलग कानूनी मामले
शिक्षा जगत में आने से पहले पाविन ने थाईलैंड के विदेश मंत्रालय में 16 साल तक काम किया। 2014 के सैन्य तख्तापलट के बाद उन्होंने सत्तारूढ़ जुंटा के समन पर पेश होने से इनकार कर दिया। उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया और गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ। तब से वह क्योटो में निर्वासन में रह रहे हैं।
उनकी राजनीतिक गतिविधियों में रॉयलिस्ट मार्केटप्लेस भी शामिल है, जिसे थाई भाषा में तलाद लुआंग कहा जाता है। यह फेसबुक समूह राजशाही और लोकतांत्रिक सुधार के प्रस्तावों पर चर्चा करता है। इसके सदस्यों की संख्या 20 लाख से अधिक हो गई थी। पाविन ने कहा कि इसे स्थापित करने के सिलसिले में 2020 में उन पर आरोप लगाए गए।
थाई लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स ने अगस्त 2026 में कहा कि पिछले महीने समूह में की गई पोस्ट के संबंध में पाविन उन तीन लोगों में शामिल थे जिन पर धारा 112 के तहत आरोप लगाए गए। ये कार्यवाहियां सोशल मीडिया गतिविधि से संबंधित हैं, जबकि पुलिस की नवीनतम कार्रवाई हैंडबुक के आयात पर रोक लगाती है।
इन घटनाओं का क्रम अधिकारियों और उस अकादमिक के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव को दिखाता है, जो विदेश से शाही राजनीति पर चर्चा जारी रखे हुए हैं। विदेश में रहने से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित करने का अवसर मिलता है, जबकि आयात आदेश थाईलैंड के भीतर छपी पुस्तक के प्रसार को सीमित करता है।
प्रतिबंधों का घटनाक्रम
हैंडबुक का प्रकाशन इतिहास थाईलैंड के हालिया राजनीतिक उथल-पुथल और सेंसरशिप संबंधी अधिकारों को बदलने के पुराने प्रयासों से जुड़ता है। प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं:
- 2007: थाईलैंड ने मुद्रण पंजीकरण अधिनियम लागू किया, जिसमें कुछ विदेशी प्रकाशनों पर प्रतिबंध लगाने की पुलिस की शक्तियां शामिल थीं।
- 2011: संस्कृति मंत्रालय ने रॉयल गजट में पहले प्रकाशन के बिना, मुद्रण, वितरण और आयात पर तत्काल रोक लगाने के व्यापक अधिकारों का प्रस्ताव दिया। काउंसिल ऑफ स्टेट ने चेतावनी दी कि यह प्रस्ताव संविधान से टकरा सकता है और इसे पुनर्विचार के लिए लौटा दिया।
- 2014: सैन्य तख्तापलट के बाद पाविन को समन भेजा गया, जिसे उन्होंने मानने से इनकार किया। इसके बाद उनका निर्वासन जारी रहा।
- 2019: हैंडबुक का पहला संस्करण बिना किसी प्रतिबंध के प्रकाशित हुआ।
- 2020: युवा प्रदर्शनकारियों ने राजशाही और सेना में बदलाव की मांग की। बाद में संशोधित हैंडबुक में इन घटनाक्रमों पर चर्चा की गई।
- जुलाई 2023: अधिकारियों ने पाविन की पुस्तक Rama X पर प्रतिबंध लगाया।
- अगस्त 2026: हैंडबुक का दूसरा संस्करण अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ।
- 30 अक्टूबर, 2026: राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख ने नवीनतम प्रतिबंध पर हस्ताक्षर किए, जिसे नवंबर की शुरुआत में सार्वजनिक किया गया।
2011 का प्रस्ताव दिखाता है कि प्रकाशनों पर नियंत्रण के दायरे की भी संवैधानिक समीक्षा हुई है। हैंडबुक पर मौजूदा प्रतिबंध विदेशी प्रकाशनों से संबंधित मौजूदा अधिकार का इस्तेमाल करता है और विवाद को सीधे आयातकों, वितरकों तथा पुस्तक हासिल करने की कोशिश कर रहे संस्थानों तक ले आता है।
मुख्य बातें
- थाईलैंड ने Routledge Handbook of Contemporary Thailand के दूसरे संस्करण को वितरण के लिए मंगाने या आयात करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
- उल्लंघन करने पर तीन साल तक की जेल, 60,000 बाट तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। पुलिस प्रतियां जब्त कर नष्ट कर सकती है।
- हैंडबुक में 45 विद्वानों के 37 अध्याय हैं। इसमें राजशाही, सेना, विरोध आंदोलन और अन्य राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर चर्चा है।
- 2019 के पहले संस्करण पर प्रतिबंध नहीं लगा था। पाविन का कहना है कि संशोधित संस्करण 2020 के प्रदर्शनों के बाद आए बदलावों को दर्शाता है।
- पुलिस ने सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला दिया है। पाविन का कहना है कि राजशाही से जुड़ी सामग्री प्रतिबंध की वजह बनी और उन्हें उम्मीद है कि पाठक इलेक्ट्रॉनिक संस्करण तलाशेंगे।
- पाविन द्वारा संपादित पुस्तक पर यह दूसरा प्रतिबंध है। इससे पहले 2023 में Rama X के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।






