बड़ी बढ़त उभरी, लेकिन मतगणना अभी अधूरी
थाईलैंड की प्रोग्रेसिव सोशल सिक्योरिटी टीम 11 अक्टूबर, 2026 की देर रात सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की बीमित श्रमिकों की सभी सात सीटों और नियोक्ताओं की सभी सात सीटों पर आगे रही। 23:13 बजे सामाजिक सुरक्षा कार्यालय के डैशबोर्ड के अनुसार, देशभर में उम्मीदवारों को मिले 1,007,422 वोटों की गिनती हो चुकी थी। बीमित श्रमिकों के लिए मतगणना 40.36% और नियोक्ताओं के लिए 46.86% पूरी हुई थी।
विषय-सूची
- बड़ी बढ़त उभरी, लेकिन मतगणना अभी अधूरी
- बीमित श्रमिकों की दौड़ में कौन आगे था?
- नियोक्ता पक्ष में भी शीर्ष सात स्थान टीम के पास
- मतदान चार गुना से अधिक बढ़ा
- शाम की मतगणना कैसे आगे बढ़ी
- छूटी हुई प्रविष्टियों और दोबारा मतगणना की खबर पर उठे सवाल
- पर्यवेक्षकों ने क्या देखा और आंशिक रूप से अमान्य मतों की गिनती कैसे हुई
- गलत मतदान केंद्र और पात्रता रिकॉर्ड में गड़बड़ी से दिक्कतें
- सभी 14 सीटें मिलने से टीम की सुधार योजनाओं को ताकत मिलती
- लाभ और नतीजों का प्रमाणीकरण अगली कसौटी
- मुख्य बिंदु
चुनाव समन्वय केंद्र ने 23:20 बजे ये आंकड़े जारी किए। वे अनौपचारिक थे और दोनों समूहों में आधे से अधिक मतों की गिनती बाकी थी। इस चुनाव में 21 सदस्यीय बोर्ड के लिए 14 प्रतिनिधि चुने जा रहे हैं। नतीजे सामाजिक सुरक्षा कोष के लाभ, निवेश और प्रशासन से जुड़े फैसलों के लिहाज से अहम हैं।
उम्मीदवार संख्या 042, थानापोंग चुआमुआंगफान, बीमित श्रमिकों की दौड़ में 132,019 वोटों के साथ आगे थे। नियोक्ता पक्ष में संख्या 064, सरारिन रुआंगपान्यावुत को 1,794 वोट मिले थे। दोनों समूहों में सातवें स्थान का उम्मीदवार आठवें से काफी आगे था, हालांकि न तो ये अंतर और न ही चुनावी रात को टीम के बयान प्रमाणित नतीजे थे।
मतदान में भी तेज उछाल आया। चुनाव समिति के अध्यक्ष, श्रम मंत्रालय के स्थायी सचिव पुलिस लेफ्टिनेंट कर्नल वान्नापोंग खोत्चरक ने शुरुआती आंकड़ों में कम से कम 670,000 बीमित श्रमिकों और 8,965 नियोक्ताओं के मतदान की जानकारी दी। कुल मिलाकर कम से कम 678,965 मतदाता हुए, जबकि 24 दिसंबर, 2023 को हुए पहले चुनाव में यह संख्या 158,335 थी।
मतदाताओं और उम्मीदवारों को मिले वोटों के बीच अंतर समझना जरूरी है। डैशबोर्ड का 1,007,422 का आंकड़ा उम्मीदवारों को मिले वोटों का है, मतदान केंद्रों पर पहुंचे लोगों का नहीं। इसलिए इसकी 2023 के मतदान आंकड़े से सीधे तुलना नहीं की जा सकती। मतदाता कई उम्मीदवारों को वोट दे सकते हैं, इसलिए उम्मीदवारों के वोटों की संख्या और मतदान में भागीदारी अलग-अलग चीजें मापती हैं।
बीमित श्रमिकों की दौड़ में कौन आगे था?
23:13 बजे के आंकड़ों में बीमित श्रमिकों के सभी सात अग्रणी उम्मीदवार प्रोग्रेसिव सोशल सिक्योरिटी टीम के थे। उनके वोटों की संख्या में बहुत बड़ा अंतर नहीं था: 123,031 से 132,019 के बीच। इसके बाद के तीनों उम्मीदवारों को 5,000 से कम वोट मिले थे।
- संख्या 042, थानापोंग चुआमुआंगफान: 132,019 वोट।
- संख्या 043, नरिथा फोखैयानन: 131,666 वोट।
- संख्या 041, रुंगरित लाओंगकित: 130,678 वोट।
- संख्या 044, सुत्सरम थम्माबूसादे: 130,228 वोट।
- संख्या 046, प्रत्ताना फोदी: 128,007 वोट।
- संख्या 047, पोनथिप मोंगयाई: 126,148 वोट।
- संख्या 038, लक्समी सुवन्नफकदी: 123,031 वोट।
आठवें स्थान पर संख्या 005, चतुरोंग फ्राइसिंग थे, जिन्हें 4,989 वोट मिले। उनके बाद संख्या 002, बून अरयाफोन को 4,738 और संख्या 007, ओरानॉन्ग निथिरक को 4,722 वोट मिले।
सातवें और आठवें उम्मीदवार के बीच 118,042 वोटों का अंतर था। यह उस समय टीम की बढ़त का पैमाना था, अंतिम नतीजे का पूर्वानुमान नहीं। मतगणना, सुधार और मतदान केंद्रों के रिकॉर्ड की जांच अभी बाकी थी।
नियोक्ता पक्ष में भी शीर्ष सात स्थान टीम के पास
नियोक्ताओं के अलग चुनाव में भी इसी टीम के उम्मीदवार शीर्ष सात स्थानों पर थे। उनके बीच केवल 98 वोटों का अंतर था। सरारिन पहले और फत्थारनित सिचंदोन सातवें स्थान पर थे।
- संख्या 064, सरारिन रुआंगपान्यावुत: 1,794 वोट।
- संख्या 065, रत्तनासित सुपाफोन: 1,784 वोट।
- संख्या 063, कृत्सदा अथित चिंतकानोन: 1,775 वोट।
- संख्या 066, कृतवित हरिमथेपथिप: 1,767 वोट।
- संख्या 067, सुखोथाई हत्तरात: 1,764 वोट।
- संख्या 062, अदिसोर्न कर्तमोंगखोन: 1,763 वोट।
- संख्या 068, फत्थारनित सिचंदोन: 1,696 वोट।
संख्या 020, सुरचित वोंगखामहेंग 227 वोटों के साथ आठवें स्थान पर थे। उनके बाद संख्या 019, अत्थायुत लियावनित को 218 और संख्या 018, नामचाई एकफत्फानित को 214 वोट मिले। सातवें उम्मीदवार की आठवें पर बढ़त 1,469 वोट थी।
नियोक्ता और बीमित श्रमिक अपने प्रतिनिधियों को अलग-अलग चुनते हैं। दोनों समूहों के वोटों को एक ही क्रम में नहीं देखना चाहिए, क्योंकि हर समूह अपने सात प्रतिनिधि चुनता है।
मतदान चार गुना से अधिक बढ़ा
2023 के चुनाव में 156,870 बीमित श्रमिकों और 1,465 नियोक्ताओं ने मतदान किया था। इन आंकड़ों की वान्नापोंग के 2026 के शुरुआती आंकड़ों से तुलना करें तो बीमित श्रमिकों में करीब 327% और नियोक्ताओं में 512% की बढ़ोतरी हुई। कुल मतदान 2023 के आंकड़े से लगभग 4.29 गुना रहा, यानी करीब 329% की वृद्धि।
शुरुआती कुल आंकड़ों को लेकर खबरों में थोड़ा अंतर है। एक रिपोर्ट में 679,000 से अधिक मतदाता बताए गए, साथ ही 670,000 से अधिक बीमित श्रमिकों और 9,000 से अधिक नियोक्ताओं का उल्लेख था। ये आंकड़े अंतिम नहीं थे और रिपोर्टों में यह लगातार स्पष्ट नहीं था कि कुल आंकड़े में दोनों समूह शामिल हैं या नहीं। अलग-अलग बताए गए 670,000 और 8,965 के आंकड़े तुलना का सबसे स्पष्ट आधार हैं।
दिन में पहले सामाजिक सुरक्षा कार्यालय की महासचिव जीरापा बून्यारत ने 300,000 से अधिक लोगों के मतदान की जानकारी दी थी और अनुमान जताया था कि मतदान पिछले चुनाव से करीब दोगुना हो सकता है। बाद में जारी आंकड़े इससे कहीं अधिक थे। ये चुनाव के दौरान दिए गए क्रमिक अनुमान थे, जब नतीजे अभी आ रहे थे; इन्हें देशभर के अंतिम आंकड़े नहीं माना जा सकता।
वान्नापोंग ने कहा कि पात्र लोगों को मतदान की इच्छा पहले दर्ज कराए बिना वोट देने की अनुमति से भागीदारी बढ़ी होगी। पंजीकरण के दौरान मतदाता अपना पसंदीदा मतदान केंद्र चुन सकते थे। पंजीकरण नहीं कराने वालों को उनके कार्यस्थल के आधार पर केंद्र आवंटित किए गए।
पात्र मतदाताओं की बड़ी संख्या ने व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया। अधिकारियों ने सी राचा में करीब 260,000 और समुत प्राकान में 200,000 पात्र मतदाताओं का उल्लेख किया। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, सिलॉम कॉम्प्लेक्स, जेजे मॉल और समुत प्राकान में हर जगह 200,000 से अधिक मतदाता पहुंचे। पात्र आबादी और वास्तविक मतदान अलग-अलग माप हैं, और स्थानीय मतदान के इन दावों की पुष्टि अभी बाकी है।
शाम की मतगणना कैसे आगे बढ़ी
मतदान सुबह 08:00 बजे शुरू हुआ और देशभर में 16:00 बजे समाप्त हुआ। मतदान केंद्रों की संख्या को लेकर रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है: एक में कुल 5,233 केंद्र बताए गए, जबकि वान्नापोंग ने 5,233 से अधिक कहा। अधिकारियों के मुताबिक सभी केंद्र खुले और मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना शुरू हुई।
- 17:35 बजे, डैशबोर्ड के शुरुआती आंकड़ों में प्रोग्रेसिव टीम के बीमित श्रमिक उम्मीदवार आगे चल रहे थे। नियोक्ता उम्मीदवार संख्या 062, 063 और 064 को 50-50 वोट मिले थे; संख्या 065 से 068 तक के उम्मीदवारों को 40-40 वोट मिले थे।
- शाम के शुरुआती समय में डैशबोर्ड में तकनीकी खराबी आई। अधिकारियों ने कहा कि इसे 18:30 बजे तक फिर से उपलब्ध कराने की उम्मीद है।
- 19:46 बजे, डैशबोर्ड पर उम्मीदवारों को मिले 60,667 वोटों की गिनती दिखाई गई। दोनों चुनावों में टीम आगे थी।
- 21:15 बजे, सुत्सरम ने बंग खाए में समर्थकों को संबोधित किया और कहा कि करीब 15% से 20% मतगणना पूरी हुई है।
- 22:00 बजे, डैशबोर्ड पर उम्मीदवारों को मिले 523,470 वोट दिखे। बीमित श्रमिकों के लिए 27.33% और नियोक्ताओं के लिए 34.68% मतगणना पूरी हुई थी।
- 23:13 बजे, कुल आंकड़ा 1,007,422 तक पहुंचा। दोनों समूहों के लिए मतगणना क्रमशः 40.36% और 46.86% पूरी हुई थी।
22:00 से 23:13 के बीच डैशबोर्ड पर उम्मीदवारों के 483,952 अतिरिक्त वोट जुड़ गए। यह दिखाता है कि जारी आंकड़े कितनी तेजी से बदल रहे थे, न कि कितने अतिरिक्त लोगों ने मतदान किया। मतदान पहले ही बंद हो चुका था।
अधिकारियों ने शुरुआत में कहा था कि नतीजे करीब 18:00 बजे दिखने लगेंगे और 20:00 बजे तक अनौपचारिक तस्वीर सामने आ सकती है। इनमें से कोई भी समय पूरी मतगणना की गारंटी नहीं था। वान्नापोंग ने बताया कि अपडेट केंद्रों का काम पूरा होने और नतीजे भेजने पर निर्भर थे। याला के क्रोंग पिनांग जिले के केंद्रों समेत छोटे केंद्रों में बड़े केंद्रों की तुलना में गिनती जल्दी पूरी हो रही थी।
छूटी हुई प्रविष्टियों और दोबारा मतगणना की खबर पर उठे सवाल
एसोसिएट प्रोफेसर और उम्मीदवार संख्या 044 सुत्सरम ने समुत प्राकान के बैंग फ्ली रत बमरुंग स्कूल के नतीजों को लेकर खास चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र 82 पर 50 मतदाता थे, लेकिन उम्मीदवार संख्या 038 लक्समी के वोट दर्ज नहीं किए गए, क्योंकि अधिकारी उनका कुल आंकड़ा दर्ज किए बिना चले गए थे। उनके मुताबिक यह चूक बिजली जाने के कारण नहीं हुई।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र 95 पर उनकी अपनी उम्मीदवारी के लिए कोई वोट दर्ज नहीं था। टीम की शिकायत के विस्तृत विवरण में कहा गया कि वहां कई उम्मीदवारों के वोटों की प्रविष्टियां नहीं थीं और केंद्र 94 की परिणाम-पत्रक प्रदर्शित नहीं की गई थी। टीम के अनुसार अधिकारी पहले ही जा चुके थे, इसलिए स्वयंसेवक रिकॉर्ड को लेकर तत्काल आपत्ति या स्पष्टीकरण नहीं मांग सके।
टीम ने रत्चबुरी के एक केंद्र पर भी गलती का आरोप लगाया। सुत्सरम ने कहा कि वोट गायब दिखने के बाद स्वयंसेवकों ने दोबारा मतगणना की मांग की और पोनथिप के वोट एक से बढ़कर 80 हो गए। यह 79 वोटों का सुधार होगा, लेकिन चुनाव समिति का अंतिम निष्कर्ष इस दावे के साथ जारी नहीं हुआ था।
ये मतों की गिनती और रिकॉर्डिंग से जुड़े खास आरोप हैं, धोखाधड़ी के स्थापित निष्कर्ष नहीं। ये अधिकारियों के समक्ष उठाए गए मतगणना-पत्रकों के ओवरलैप होने के सवालों से भी अलग हैं। वान्नापोंग और जीरापा ने अपनी जानकारी के समय कहा था कि उन्हें इस मुद्दे पर कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी। सूचना मिलने पर वे जांच करेंगे।
जीरापा ने कहा कि अनौपचारिक प्रविष्टियों की जांच जरूरी है, क्योंकि डेटा दर्ज करने की गलतियां, जैसे अतिरिक्त शून्य लग जाना, डैशबोर्ड के कुल आंकड़े को बिगाड़ सकती हैं। उनकी बात से स्पष्ट होता है कि डैशबोर्ड पर बड़ी बढ़त को भी प्रमाणित नतीजे से अलग रखना चाहिए।
पर्यवेक्षकों ने क्या देखा और आंशिक रूप से अमान्य मतों की गिनती कैसे हुई
नॉनथाबुरी के दूरसंचार केंद्र में 16:00 बजे मतदान समाप्त होने के बाद 33 मतदान केंद्रों पर गिनती शुरू हुई। वहां 20 से कम पर्यवेक्षक मौजूद बताए गए। कर्मचारियों ने मतपत्रों को चार श्रेणियों में बांटा: वैध, अमान्य, आंशिक रूप से अमान्य और ऐसे मतपत्र जिनमें किसी को पसंद नहीं किया गया था।
आंशिक रूप से अमान्य मतपत्र के सभी वोट अपने-आप रद्द नहीं होते। कर्मचारियों ने बताया कि जिन उम्मीदवारों के नाम वापस लिए जा चुके थे, उनके लिए दिए गए वोट नहीं गिने जाएंगे, जबकि अन्य उम्मीदवारों के वोट गिने जाएंगे। उस केंद्र पर जिन उम्मीदवारों की उम्मीदवारी वापस ली गई थी, उनकी संख्या 27, 29, 34, 37, 45, 61, 95 और 110 थी।
प्रक्रिया में एक अधिकारी मतपत्र पर दर्ज चयन जोर से पढ़ता था, दूसरा मिलान-पत्रक पर निशान लगाता था और तीसरा रिपोर्ट-पत्रक में नतीजे दर्ज करता था। पुलिस ने व्यवस्था में मदद की। बाद में इन अलग-अलग रिकॉर्डों का जारी किए गए कुल आंकड़ों से मिलान किया जाना था।
29 वर्षीय पर्यवेक्षक नत्थी, जो बीमित सदस्य नहीं थे, ने मतगणना क्षेत्र को तंग और व्यस्त बताया। उन्हें चिंता थी कि सीमित जगह से गलतियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने बताया था कि बाढ़ और बारिश के कारण केंद्र को दूसरी जगह ले जाया गया। उनकी चिंता गलती होने के जोखिम को लेकर थी, इस बात का सबूत नहीं कि वहां गलती हुई थी।
वान्नापोंग ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्था को सुचारू बताया। उनके मुताबिक यातायात मुख्य बाधा था और मौसम से कोई बड़ी परेशानी नहीं हुई। हालांकि, स्थानीय खबरों में बाढ़, केंद्र बदले जाने और मुश्किल सफर का जिक्र था। राष्ट्रीय स्तर पर कामकाज सुचारू रहने के आकलन का अर्थ यह नहीं कि हर जगह हालात एक जैसे थे।
गलत मतदान केंद्र और पात्रता रिकॉर्ड में गड़बड़ी से दिक्कतें
जीरापा ने आवंटित मतदान केंद्र को लेकर भ्रम को आम समस्या बताया। कुछ मतदाताओं ने जाने से पहले संदेश या सामाजिक सुरक्षा कार्यालय की वेबसाइट नहीं देखी थी। अन्य समस्याओं में अंशदान रिकॉर्ड, मतदाता क्रम संख्या का मेल न खाना और लोगों को मतदान के लिए अपात्र होने का पता चलना शामिल था।
एक मामले में किसी व्यक्ति के रिकॉर्ड में गलती से दिखाया गया था कि वह पहले ही मतदान कर चुका है। जीरापा ने कहा कि पात्रता जांच के दौरान एक अधिकारी ने गलती से मतदान की स्थिति चुन ली थी। मतपत्र की पर्ची की जांच में उस पर हस्ताक्षर नहीं मिले, इसलिए रिकॉर्ड सुधारने के बाद व्यक्ति को वोट देने दिया गया। यह प्रशासनिक गलती का मामला था, मतदाता के रूप में किसी और के मतदान करने की पुष्टि नहीं।
उन्होंने यह भी माना कि कुछ केंद्रों पर उम्मीदवारों के नाम जुड़ने या वापस होने के बाद पुरानी सूची छापी गई थी, जिससे उम्मीदवारों की संख्या को लेकर भ्रम हो सकता था। अधिकारियों ने कहा कि समस्याओं का समाधान किया गया। उन्होंने मतपत्र फाड़े जाने या मतदाता द्वारा उम्मीदवारों के नंबर खुद लिखकर लाने को लेकर अनसुलझी शिकायतें मिलने से इनकार किया।
नाखोन रत्चासिमा में मतदान केंद्र तय करने का पैमाना और जटिलता सामने आई। सामाजिक सुरक्षा कार्यालय ने अपने 32 जिलों में 147 केंद्र बनाए, जिनमें 53 कोरात चाचाई हॉल में थे। यानी प्रांत के करीब 36% केंद्र एक ही स्थान पर थे।
चाचाई हॉल में पहले से पंजीकरण नहीं कराने वाले पात्र बीमित श्रमिकों के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार मतदान की व्यवस्था थी, जबकि पहले से पंजीकरण कराने वालों को सेंट्रल कोरात शॉपिंग सेंटर भेजा गया। मतदाता थाईआईडी डिजिटल पहचान ऐप का उपयोग करके कार्यालय की ऑनलाइन प्रणाली से अपनी पात्रता और आवंटित केंद्र देख सकते थे।
सभी 14 सीटें मिलने से टीम की सुधार योजनाओं को ताकत मिलती
सुत्सरम ने कहा कि टीम के पास पहले बोर्ड की 21 में से छह सीटें थीं। सभी 14 निर्वाचित सीटें जीतने पर उसके पास दो-तिहाई सदस्य होंगे, जबकि पहले उसकी हिस्सेदारी करीब 29% थी। उन्होंने इसे सुधार कार्यक्रम आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त समर्थन बताया, हालांकि सीटों की पुष्टि अभी नहीं हुई थी।
टीम ने पद संभालने के पहले सात दिनों के भीतर बैठक की कार्यवाही सार्वजनिक करने और बोर्ड की बैठकों का प्रसारण करने का प्रस्ताव रखा। उसके घोषित कार्यक्रम में निवेश और प्रौद्योगिकी परियोजनाओं की जांच, निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना, केयर नाम की पेंशन गणना योजना और सरकारी अंशदान बकाया पर अधिक नियमित रिपोर्टिंग भी शामिल थी।
खर्च के मामले में टीम ने अंशदान से होने वाली आय के 3% तक प्रशासनिक बजट सीमित करने का प्रस्ताव रखा, जबकि मौजूदा सीमा 10% बताई गई थी। उसने प्रौद्योगिकी बजट को 1.5 अरब बाट से घटाकर अधिकतम 300 मिलियन बाट करने का प्रस्ताव भी दिया, यानी कम से कम 80% की कटौती। जहां संभव हो, सरकारी प्रणालियों को साझा रूप से इस्तेमाल करने की बात भी कही गई। ये चुनावी वादे थे, मंजूर बजट नहीं।
सुत्सरम ने कहा कि प्रशासन पर सालाना खर्च 5 अरब बाट से अधिक है और उन्होंने शून्य-आधारित बजट की वकालत की। इस तरीके में खर्च की शुरुआत से समीक्षा की जाती है और हर गतिविधि को अपना खर्च उचित ठहराना होता है, न कि पिछले आवंटन को अपने-आप जारी रखा जाता है।
उन्होंने टीम के पिछले काम का श्रेय देते हुए कहा कि बच्चों, बेरोजगारी, पेंशन और अक्ल दाढ़ के इलाज से जुड़े सुधारों समेत करीब 1.2 मिलियन लोगों को लाभ पहुंचा। ये टीम के रिकॉर्ड के बारे में उनके दावे थे, हर नीति में उसके योगदान की स्वतंत्र रूप से सत्यापित संख्या नहीं।
नियोक्ता उम्मीदवार सरारिन ने पारदर्शी प्रबंधन और ऐसे निवेश की इच्छा जताई जिससे कोष की दीर्घकालिक स्थिरता और बीमित सदस्यों के लाभ सुरक्षित रहें। सुत्सरम ने यह भी कहा कि टीम श्रम मंत्री जुलापुन अमोर्नविवत के साथ काम करने को तैयार है।
लाभ और नतीजों का प्रमाणीकरण अगली कसौटी
नीतिगत मांगें चुनावी खर्च प्रस्तावों तक सीमित नहीं थीं। नाखोन रत्चासिमा में सामाजिक सुरक्षा अधिनियम की धारा 33 के तहत बीमित श्रमिक 37 वर्षीय थानासक नियामसॉर्न ने बेहतर स्वास्थ्य और दंत चिकित्सा कवरेज की मांग की। उन्होंने कहा कि दंत उपचार के लिए सालाना भत्ता 900 बाट है और नए बोर्ड से इस पर फिर विचार करने का आग्रह किया।
"मैं बोर्ड से दंत चिकित्सा भत्ता बढ़ाने पर विचार करने का आग्रह करता हूं। यह फिलहाल सालाना 900 बाट है, ताकि बीमित श्रमिकों को उचित सेवाएं मिल सकें," थानासक ने कहा।
पीपुल्स पार्टी के नेता और सूची सांसद नत्थाफोंग रुआंगपान्यावुत ने 14:00 बजे बैंकॉक के तलिंग चान जिले के महन्नोपाराम स्कूल में नियोक्ता के रूप में मतदान किया। उन्होंने भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि बोर्ड यह तय करने में मदद करेगा कि अंशदान का पैसा कैसे खर्च हो। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने उम्मीदवार नहीं उतारे थे और चुनाव नतीजों के लिए कोई केंद्र नहीं बनाएगी। उन्होंने अधिकारियों से फेत्चबुरी में बाढ़ से प्रभावित मतदाताओं की मदद करने का आग्रह भी किया।
नए प्रतिनिधियों के पद संभालने से पहले मतदान केंद्रों के नतीजों की प्रांतीय और केंद्रीय चुनाव समितियों को जांच करनी होगी। अधिकारियों ने कहा कि प्रमाणीकरण के लिए मतपेटियों की सीलों की जांच और उम्मीदवारों की पात्रता की दोबारा पुष्टि भी जरूरी है। इसके बाद नियुक्ति के लिए श्रम मंत्री को प्रस्ताव भेजा जाएगा और रॉयल गजट में प्रकाशन होगा।
जीरापा ने 2026 के अंत से पहले प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा। पिछले चुनाव की करीब 70 दिन की प्रक्रिया से तुलना को लेकर रिपोर्टों में अंतर है: एक के अनुसार, अधिक मतदान के कारण इस चुनाव में ज्यादा समय लग सकता है, जबकि दूसरी में कहा गया कि उन्हें प्रक्रिया पिछली बार से लंबी होने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि प्रमाणीकरण के लिए कानून में कोई निश्चित समयसीमा नहीं है। पिछला बोर्ड कार्यवाहक के रूप में काम करता रहा।
विजेताओं की घोषणा के सात दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। जीरापा ने कहा कि आपत्तियों पर विचार के लिए 30 दिन का समय है और जरूरत पड़ने पर 30 दिन और दिए जा सकते हैं। सामाजिक सुरक्षा कार्यालय ने 12 अक्टूबर को मतगणना पर एक और ब्रीफिंग तय की थी। अंतिम मतदान आंकड़े, प्रमाणित विजेता और विवादित केंद्रों के रिकॉर्ड पर जांच के निष्कर्ष अभी लंबित थे।
मुख्य बिंदु
- 11 अक्टूबर, 2026 को 23:13 बजे प्रोग्रेसिव सोशल सिक्योरिटी टीम बीमित श्रमिकों की सभी सात और नियोक्ताओं की सभी सात सीटों पर आगे थी।
- डैशबोर्ड पर 1,007,422 उम्मीदवार-वोट दिखे, व्यक्तिगत मतदाताओं की संख्या नहीं।
- बीमित श्रमिकों के लिए मतगणना 40.36% और नियोक्ताओं के लिए 46.86% पूरी हुई थी।
- शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक कम से कम 678,965 मतदाताओं की भागीदारी 2023 के कुल आंकड़े से करीब 4.29 गुना थी।
- टीम ने समुत प्राकान में रिकॉर्ड दर्ज करने को लेकर चिंता जताई और रत्चबुरी में सुधार के बाद दोबारा मतगणना की जानकारी दी।
- प्रस्तावित सुधारों में बैठक के रिकॉर्ड सार्वजनिक करना, खर्च की समीक्षा और पेंशन तथा स्वास्थ्य नीतियों में बदलाव शामिल थे।
- अधिकारियों ने साल के अंत तक प्रमाणीकरण पूरा करने का लक्ष्य रखा और 12 अक्टूबर को एक और ब्रीफिंग तय की।






