महीनों की बातचीत के बाद वापसी का फैसला
ताइवान ने 6 नवंबर, 2026 को घोषणा की कि वह पोर्ट मोरेस्बी स्थित अपना प्रतिनिधि कार्यालय बंद करेगा, वहां तैनात सभी कर्मियों को वापस बुलाएगा और पापुआ न्यू गिनी में सहायता कार्यक्रम समाप्त करेगा। यह फैसला मिशन बंद करने की मांग को लेकर महीनों तक चली नाकाम बातचीत के बाद लिया गया। इससे हाजिर बाजार के जरिए पापुआ न्यू गिनी से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खरीद रोकने की भी पुष्टि हुई। ताइवान के मुताबिक, इस कारोबारी संबंध के तहत होने वाली खरीद प्रशांत देश के कुल एलएनजी निर्यात का लगभग एक-तिहाई है।
विषय-सूची
- महीनों की बातचीत के बाद वापसी का फैसला
- विवाद कैसे आगे बढ़ा
- पापुआ न्यू गिनी और ताइवान का पक्ष
- औपचारिक कूटनीतिक संबंधों के बिना भी कार्यालय क्यों अहम है
- कृषि, चिकित्सा और शिक्षा कार्यक्रम समाप्त होंगे
- हाजिर बाजार से एलएनजी खरीद रोकने का क्या मतलब है
- गैस संबंधी फैसले से कितना आर्थिक दबाव पड़ेगा?
- ताइवान का कहना है कि वैकल्पिक आपूर्ति तय है
- ऑस्ट्रेलिया और चीन व्यापक समीकरण को प्रभावित करते हैं
- मुख्य बिंदु
पापुआ न्यू गिनी ने जुलाई में सबसे पहले ताइवान के कार्यालय को तत्काल बंद करने की घोषणा की थी और इसके लिए अपनी ‘एक चीन’ नीति का हवाला दिया था। ताइवान ने इसका विरोध किया, कार्यालय चालू रखा और बातचीत जारी रखी। लेकिन एक तय समयसीमा के भीतर कर्मचारियों को जाने की नई मांगों के बाद यह कोशिश खत्म हो गई।
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय गरिमा, कूटनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हित का आकलन करने के बाद सरकार ने तत्काल वापसी का फैसला किया। मंत्रालय के प्रवक्ता श्याओ कुआंग-वेई ने कार्यालय बंद करने को ताइवान का अपना कूटनीतिक निर्णय बताया और कहा कि संसाधनों का आवंटन उसकी कूटनीतिक प्राथमिकताओं और सहयोग के व्यावहारिक नतीजों के आधार पर किया जाएगा।
इसका असर कार्यालय से कहीं आगे तक जाएगा। कृषि सहायता, चिकित्सा सेवाएं, छात्रवृत्तियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम समाप्त हो जाएंगे, जबकि ताइवान गैस की खरीद दूसरे आपूर्तिकर्ताओं की ओर मोड़ेगा। पापुआ न्यू गिनी एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार के साथ सहयोग का माध्यम खो देगा, जबकि ताइवान उस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी खो देगा जहां उसके अंतरराष्ट्रीय संबंध पहले से ही सीमित हैं।
विवाद कैसे आगे बढ़ा
जुलाई की घोषणा के बाद कार्यालय तुरंत बंद नहीं हुआ। ताइवान ने शुरुआत में कहा था कि वह सामान्य कामकाज जारी रखेगा, अपने हितों की रक्षा करेगा और अपने नागरिकों को जरूरी सेवाएं देगा। अधिकारियों ने पापुआ न्यू गिनी को फैसले पर फिर से विचार करने के लिए मनाने की कोशिश के साथ-साथ समान कूटनीतिक रुख वाले देशों से समर्थन भी मांगा।
घटनाक्रम से पता चलता है कि ताइवान ने बंदी का विरोध करने से लेकर संबंधों की मुख्य व्यवस्थाएं समाप्त करने तक का रास्ता कैसे तय किया:
- 2023 में पापुआ न्यू गिनी ने ताइवान में अपना व्यापार कार्यालय बंद कर दिया और उसकी जगह सीमित मौजूदगी वाला ‘पीएनजी ताइपे आर्थिक कार्यालय’ खोला।
- जुलाई 2026 में पापुआ न्यू गिनी ने घोषणा की कि ताइवान का प्रतिनिधि कार्यालय तत्काल बंद होना चाहिए।
- 28 जुलाई को ताइवान ने कहा कि बंदी की सूचना मिलने के एक सप्ताह के भीतर उसने हाजिर बाजार से एलएनजी खरीद रोक दी है, जबकि सहायता और कार्यालय का काम जारी रहेगा।
- सितंबर में ताइवान के नवनियुक्त प्रतिनिधि चिउ चेन-यू ने पापुआ न्यू गिनी पहुंचने के बाद वीडियो के जरिए शपथ ली।
- 6 अक्टूबर को ताइवान ने कहा कि मिशन काम कर रहा है और पापुआ न्यू गिनी के अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें जारी हैं।
- 6 नवंबर को ताइवान ने जाने की नई मांगों के बाद सभी तैनात कर्मियों को वापस बुलाने और सहायता कार्यक्रम समाप्त करने की घोषणा की।
इस तरह नवंबर का फैसला बातचीत के जरिए मिशन बचाए रखने की कई महीनों की कोशिश को समाप्त करता है। शुरुआती गैस खरीद प्रतिबंध लगाने के बाद भी ताइवान ने अपने कर्मचारियों की मौजूदगी और विकास सहयोग जारी रखा था।
पापुआ न्यू गिनी और ताइवान का पक्ष
पापुआ न्यू गिनी के विदेश मंत्री जस्टिन टकाचेंको ने ताइवान का कार्यालय हटाने को बीजिंग के साथ विश्वास मजबूत करने और अपनी सरकार की ‘एक चीन’ नीति की फिर से पुष्टि करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया। कार्यालय बंद करने की अपनी शुरुआती घोषणा में उन्होंने ताइवान की मौजूदगी को इन शब्दों में वर्णित किया था:
अब मान्यता प्राप्त नहीं है और न ही इसकी आवश्यकता है
ताइवान ने फैसले और उसे लेने की प्रक्रिया, दोनों पर सवाल उठाए। विदेश मंत्रालय के पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों के विभाग के महानिदेशक लिन चाओ-हंग ने जुलाई में कहा था कि टकाचेंको ने ताइवान से पहले चर्चा किए बिना पत्र जारी किया और सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को दरकिनार किया। इसके उलट, टकाचेंको ने कहा था कि घोषणा से पहले पापुआ न्यू गिनी के विदेश विभाग ने ताइपे कार्यालय से संपर्क किया था।
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने दबाव के लिए बीजिंग को जिम्मेदार ठहराया। वापसी की घोषणा में मंत्रालय ने कहा कि पापुआ न्यू गिनी की कार्रवाई:
दूसरे देशों के कूटनीतिक फैसलों में दखल देने और ताइवान के अंतरराष्ट्रीय दायरे को दबाने के लिए चीन द्वारा राजनीतिक दबाव और आर्थिक प्रभाव के लगातार इस्तेमाल को दर्शाती है
चीन ने कार्यालय बंद करने की पहले की घोषणा का स्वागत किया था, जबकि वॉशिंगटन ने चिंता जताई थी। ताइवान के नवंबर के फैसले पर टिप्पणी के अनुरोधों का पापुआ न्यू गिनी और चीन के विदेश मंत्रालयों ने तत्काल जवाब नहीं दिया। कर्मचारियों के जाने की समयसीमा और वापसी पूरी करने की व्यवस्था सार्वजनिक नहीं की गई।
औपचारिक कूटनीतिक संबंधों के बिना भी कार्यालय क्यों अहम है
पापुआ न्यू गिनी ने 1999 में कुछ समय के लिए ताइवान के साथ औपचारिक कूटनीतिक संबंध बनाए थे। बाद में पोर्ट मोरेस्बी मिशन ने दोनों देशों के बीच आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त दूतावासों के आदान-प्रदान के बिना आर्थिक, व्यापारिक और अन्य व्यावहारिक सहयोग का रास्ता दिया।
ताइवान के केवल 12 देशों के साथ औपचारिक कूटनीतिक संबंध हैं। इनमें प्रशांत द्वीप के तीन देश—पलाऊ, तुवालू और मार्शल द्वीपसमूह—शामिल हैं। फिजी में भी उसका एक प्रतिनिधि कार्यालय है। पोर्ट मोरेस्बी कार्यालय खोने से प्रशांत क्षेत्र में वे स्थान कम हो जाएंगे जहां ताइवान सहयोग संभालने और अपने नागरिकों की मदद के लिए कर्मचारियों को तैनात रख सकता है।
बीजिंग ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और ऐसी व्यवस्थाओं का विरोध करता है जो उसे एक अलग देश का दर्जा देती हों। ताइवान की सरकार इस दावे को खारिज करती है। कार्यालय बंद करने की घोषणा में उसके विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि ताइवान संप्रभु और स्वतंत्र है, वह चीन जनवादी गणराज्य के अधीन नहीं है और उसके लोगों को अपना भविष्य तय करने का अधिकार है।
यह विवाद इस बात से भी जुड़ा है कि पापुआ न्यू गिनी अपने साझेदार कैसे चुनता है। ताइपे का कहना है कि देशों को किसी तीसरे पक्ष के दबाव के बिना ताइवान के साथ सहयोग करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। इसके उलट, पोर्ट मोरेस्बी ने मिशन हटाने की वजह बताते हुए अपनी ‘एक चीन’ नीति को केंद्र में रखा है।
कृषि, चिकित्सा और शिक्षा कार्यक्रम समाप्त होंगे
ताइवान की वापसी केवल एक प्रशासनिक कार्यालय बंद करने तक सीमित नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह तकनीकी सहयोग और सहायता समाप्त करेगा। इसमें तकनीकी और चिकित्सा मिशन, छात्रवृत्तियां और पेशेवर कौशल विकसित करने के कार्यक्रम शामिल हैं।
यह बदलाव जुलाई में ताइवान के रुख को पलटता है। उस समय लिन ने कहा था कि ताइवान की सहयोग करने की इच्छा दिखाने के लिए कृषि सहायता, चिकित्सा रेफरल और छात्रवृत्तियां जारी हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि आगे के कार्यक्रमों की समीक्षा पापुआ न्यू गिनी की प्रतिक्रिया के आधार पर की जाएगी।
इन कार्यक्रमों से जुड़े लोगों के लिए नवंबर की घोषणा कूटनीतिक विवाद को व्यावहारिक बदलाव में बदल देती है। चिकित्सा सहयोग के लिए मरीजों और सेवा प्रदाताओं के बीच व्यवस्थाएं जरूरी हैं, छात्रवृत्तियों से विद्यार्थी और संस्थान जुड़े होते हैं और तकनीकी परियोजनाएं कर्मचारियों तथा स्थानीय साझेदारों पर निर्भर करती हैं। मंत्रालय ने कहा कि वह मौजूदा परियोजनाओं को उचित तरीके से संभालेगा और प्रभावित लोगों की सुरक्षा तथा अधिकारों की रक्षा करेगा।
ताइवान ने हर कार्यक्रम को समाप्त करने की सार्वजनिक समयसीमा नहीं दी और न ही बताया कि मौजूदा छात्रवृत्ति पाने वालों तथा मरीजों की व्यवस्था कैसे होगी। मौजूदा जिम्मेदारियां संभालने की उसकी प्रतिबद्धता तय करेगी कि वापसी से पहले से सहायता पा रहे लोगों पर क्या असर पड़ेगा।
हाजिर बाजार से एलएनजी खरीद रोकने का क्या मतलब है
तरलीकृत प्राकृतिक गैस, यानी एलएनजी, प्राकृतिक गैस को ठंडा करके तरल रूप में बदलने से बनती है, ताकि जहाजों से बड़ी मात्रा में उसका परिवहन किया जा सके। खरीदार वर्षों तक चलने वाले अनुबंधों के तहत या हाजिर बाजार से गैस ले सकते हैं, जहां कम अवधि में आपूर्ति के लिए अलग-अलग खेप खरीदी जाती हैं।
ताइवान का घोषित प्रतिबंध हाजिर बाजार पर लागू है: उसने इस माध्यम से पापुआ न्यू गिनी की एलएनजी खरीदना रोक दिया है और देश के साथ नए हाजिर खरीद अनुबंध नहीं करेगा। नवंबर की घोषणा में जुलाई में उठाए गए कदम की फिर पुष्टि की गई।
विदेश मंत्रालय के नवंबर के ब्योरे में लगभग 500,000 मीट्रिक टन को 2026 की पहली छमाही के लिए मूल रूप से तय हाजिर खरीद बताया गया। वहीं, 28 जुलाई की ब्रीफिंग में लिन ने आर्थिक मामलों के मंत्रालय और ताइवान की सरकारी ऊर्जा कंपनी सीपीसी कॉर्पोरेशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि उस अवधि में 500,000 टन की खरीद पहले ही की जा चुकी थी। इन बयानों से पूरी हो चुकी खरीद की मात्रा स्पष्ट नहीं होती।
लिन ने एक्सॉनमोबिल के साथ सालाना 1.2 मिलियन मीट्रिक टन का अनुबंध भी बताया था, जिसकी आपूर्ति केवल पापुआ न्यू गिनी से नहीं होती। ताइवान की घोषित कार्रवाई नई हाजिर खरीद से जुड़ी है, जबकि एक्सॉनमोबिल की व्यवस्था खरीद की एक अलग श्रेणी में आती है। मंत्रालय ने उस वार्षिक अनुबंध को रद्द करने की घोषणा नहीं की।
गैस संबंधी फैसले से कितना आर्थिक दबाव पड़ेगा?
ताइवान, पापुआ न्यू गिनी का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पापुआ न्यू गिनी का ताइवान को निर्यात सालाना 2 अरब डॉलर से अधिक का है और उसमें मुख्य रूप से एलएनजी शामिल है। ताइवान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ताइवान की खरीद पापुआ न्यू गिनी के कुल एलएनजी निर्यात का लगभग एक-तिहाई है।
यह हिस्सा बताता है कि ताइपे ने ऊर्जा खरीद को शुरुआती जवाब के तौर पर क्यों चुना। किसी महत्वपूर्ण ग्राहक की खरीद बंद होने पर निर्यातक को दूसरे खरीदार खोजने, नई बिक्री पर बातचीत करने और आपूर्ति की व्यवस्था बदलने की जरूरत पड़ सकती है। विदेशी मुद्रा से होने वाली कमाई का मतलब विदेश में बिक्री से अर्जित धन है, जो किसी देश को आयात और अन्य अंतरराष्ट्रीय देनदारियों का भुगतान करने में मदद करता है।
मंत्रालय ने कहा कि खरीद में बदलाव से पापुआ न्यू गिनी के गैस निर्यात और विदेशी मुद्रा से होने वाली कमाई पर काफी असर पड़ेगा। उसने राजस्व में संभावित नुकसान का कोई अनुमान नहीं दिया। वित्तीय असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी गैस दूसरे ग्राहकों को भेजी जाती है और उसकी क्या कीमत मिलती है।
दोनों आंकड़े संबंधों के अलग-अलग पहलुओं को बताते हैं: लगभग एक-तिहाई का आंकड़ा पापुआ न्यू गिनी के एलएनजी निर्यात में ताइवान की हिस्सेदारी से जुड़ा है, जबकि 500,000 टन 2026 की पहली छमाही में हाजिर खरीद से संबंधित है। तत्काल कारोबारी बदलाव यह है कि पापुआ न्यू गिनी से नई हाजिर खेपों का खरीदार अब ताइवान नहीं होगा।
ताइवान का कहना है कि वैकल्पिक आपूर्ति तय है
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने घरेलू गैस मांग और आपूर्ति का आकलन पूरा कर लिया है, खरीद की व्यवस्था बदली है और वैकल्पिक स्रोत ढूंढ लिए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, पापुआ न्यू गिनी से हाजिर खरीद खत्म होने के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और पर्याप्त रहेगी।
लिन के अनुसार, खरीद पर रोक लगाने से पहले ही सीपीसी ने जुलाई में अधिकारियों को भरोसा दिलाया था कि आपूर्ति सुरक्षित है। उन्होंने कहा था कि दूसरे देशों से हाजिर खेप खरीदी जा सकती हैं। नए आपूर्तिकर्ताओं और बदलावों की लागत का खुलासा नहीं किया गया।
ताइवान लंबी समयसीमा वाली आपूर्ति व्यवस्थाओं पर भी काम कर रहा है। अक्टूबर में घोषित उसकी अलास्का से एलएनजी खरीदने की योजना में सालाना 6 मिलियन मीट्रिक टन खरीद और 4.4 अरब डॉलर तक के संभावित निवेश का प्रावधान है। ताइवान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने कहा कि आपूर्ति 2032 से शुरू हो सकती है, हालांकि इसके लिए व्यावसायिक शर्तों, समीक्षाओं और मंजूरियों की प्रक्रिया अभी बाकी है।
मौजूदा मांग के लिए वैकल्पिक खरीद और 2032 से संभावित अलास्का आपूर्ति अलग-अलग अवधियों से जुड़ी हैं। ताइवान का कहना है कि उसकी तत्काल आपूर्ति का भरोसा उन खरीद व्यवस्थाओं पर टिका है जिन्हें वह पहले ही तय कर चुका है। अलास्का की योजना से बाद में एक और स्रोत जुड़ सकता है, बशर्ते बातचीत और परियोजना का विकास आगे बढ़े।
ऑस्ट्रेलिया और चीन व्यापक समीकरण को प्रभावित करते हैं
ऑस्ट्रेलिया के साथ पापुआ न्यू गिनी के संबंध भी इस कूटनीतिक पृष्ठभूमि का एक हिस्सा हैं। पुकपुक संधि सैन्य हमले की स्थिति में दोनों देशों को एक-दूसरे की रक्षा करने के लिए बाध्य करती है। लोवी इंस्टीट्यूट के शोध निदेशक मिहाई सोरा ने ताइवान के कार्यालय के खिलाफ फैसले को बीजिंग को भरोसा दिलाने के कदम के तौर पर देखा, जबकि पापुआ न्यू गिनी ऑस्ट्रेलिया के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ा रहा है।
सोरा ने कहा कि पापुआ न्यू गिनी यह संकेत देना चाहता था कि वह चीन के साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों को अहमियत देता है और अपनी विदेश नीति के फैसले खुद करता है। उनका आकलन बताता है कि रक्षा के मामले में कैनबरा के करीब जाने के साथ-साथ पोर्ट मोरेस्बी बीजिंग की मांग क्यों मान सकता है।
कार्यालय बंद करने की पिछली घोषणा से कुछ समय पहले टकाचेंको ने प्रशांत क्षेत्र में चीन के मिसाइल परीक्षण की सार्वजनिक आलोचना भी की थी। इसलिए चीन के साथ पापुआ न्यू गिनी के संबंधों में राजनीतिक भरोसा मजबूत करने की कोशिशों के साथ सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक असहमति भी शामिल थी।
ताइवान की मौजूदा प्रतिक्रिया में वापसी, सहायता समाप्त करना और ऊर्जा खरीद में बदलाव शामिल है। उसके विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीमित कूटनीतिक संसाधनों को मौजूदा सहयोगियों, ताइवान जैसा दृष्टिकोण रखने वाले देशों और उन अन्य स्थानों की ओर मोड़ा जाएगा जहां सहयोग से व्यावहारिक नतीजे मिल सकते हैं। तत्काल नतीजा यह है कि पापुआ न्यू गिनी में ताइवान की मौजूदगी कम होगी और दोनों अर्थव्यवस्थाओं तथा वहां के लोगों के बीच संपर्क के माध्यम सीमित हो जाएंगे।
मुख्य बिंदु
- ताइवान ने 6 नवंबर, 2026 को पोर्ट मोरेस्बी स्थित अपना कार्यालय बंद करने और सभी तैनात कर्मियों को वापस बुलाने की घोषणा की।
- पापुआ न्यू गिनी ने पहली बार जुलाई में कार्यालय बंद करने की मांग की थी, लेकिन महीनों की बातचीत के दौरान कार्यालय काम करता रहा।
- ताइवान तकनीकी और चिकित्सा मिशन, छात्रवृत्तियां तथा अन्य सहायता समाप्त करेगा और मौजूदा परियोजनाओं को संभालने की व्यवस्था करेगा।
- हाजिर बाजार से एलएनजी खरीद जुलाई में रोक दी गई थी और ताइवान का कहना है कि वह पापुआ न्यू गिनी के साथ कोई नया हाजिर खरीद अनुबंध नहीं करेगा।
- ताइवान के मुताबिक, उसकी खरीद पापुआ न्यू गिनी के एलएनजी निर्यात का लगभग एक-तिहाई है और गैस के वैकल्पिक स्रोत तय हैं।
- ताइपे ने चीन के दबाव को जिम्मेदार ठहराया है; पापुआ न्यू गिनी ने अपनी ‘एक चीन’ नीति का हवाला दिया है।






