पाकिस्तानी लड़ाकू विमान से नई मिसाइल ने भरी उड़ान
सेना के अनुसार, पाकिस्तान ने 3 नवंबर 2026 को अपनी पहली स्वदेशी रूप से विकसित हवा-से-हवा मिसाइल फ़ाज़ का परीक्षण किया। इस साल किए गए मिसाइल परीक्षणों की श्रृंखला में यह एक हवाई हथियार का परीक्षण था। जारी किए गए वीडियो में जेएफ-17 लड़ाकू विमान से मिसाइल दागते हुए दिखाया गया है। इससे इस नए हथियार का संबंध उस विमान से जुड़ता है जिसे पाकिस्तान वायु सेना पहले से इस्तेमाल करती है।
विषय-सूची
- पाकिस्तानी लड़ाकू विमान से नई मिसाइल ने भरी उड़ान
- सेना ने क्या घोषणा की
- जेएफ-17 से प्रक्षेपण क्यों अहम है
- हवाई लक्ष्य खोजने के दो तरीके
- घोषित प्रदर्शन और लंबी दूरी की महत्वाकांक्षा
- प्रदर्शनी के मॉडल से उड़ान परीक्षण तक
- विभिन्न भूमिकाओं वाली मिसाइलों के सालभर के परीक्षण
- स्वदेशी उत्पादन से क्या बदल सकता है
- मुख्य बातें
सेना की मीडिया शाखा, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर), ने उड़ान परीक्षण को सफल बताया और कहा कि मिसाइल लंबी दूरी पर हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए उन्नत टर्मिनल गाइडेंस का इस्तेमाल करती है। टर्मिनल गाइडेंस मिसाइल की उड़ान का अंतिम चरण होता है, जब उसका मार्गदर्शन तंत्र उसे लक्ष्य की ओर निर्देशित करता है।
फ़ाज़ पाकिस्तान के लिए अहम है, क्योंकि उसकी वायु सेना फिलहाल अमेरिकी और चीनी हवा-से-हवा हथियारों का इस्तेमाल करती है। इनमें एआईएम-120 एएमआरएएएम, पीएल-15 और चीनी पीएल परिवार की अन्य मिसाइलें शामिल हैं। स्वदेशी हथियार से पाकिस्तान को भविष्य में आपूर्ति, रखरखाव और उन्नयन पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है, बशर्ते विकास आगे बढ़कर उत्पादन और सेवा में शामिल होने तक पहुंचे।
सेना ने फ़ाज़ की परीक्षण की गई मारक दूरी, गति, पेलोड या अवरोधन के विस्तृत नतीजों का खुलासा नहीं किया। उड़ाई गई मिसाइल का सटीक संस्करण भी पुष्ट नहीं है और उत्पादन या सेवा में शामिल किए जाने की कोई तारीख घोषित नहीं की गई। ये विवरण तय करेंगे कि नई मिसाइल आखिरकार वायु सेना के मौजूदा हथियार भंडार में किस तरह शामिल होगी।
सेना ने क्या घोषणा की
आईएसपीआर ने कहा कि पाकिस्तान सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हथियार के विकास में शामिल वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के साथ परीक्षण देखा। मंगलवार देर रात जारी बयान में इस प्रक्षेपण को पाकिस्तान के रक्षा उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमता और अधिक आत्मनिर्भरता का प्रमाण बताया गया।
सेना की मीडिया शाखा ने मिसाइल की प्रस्तावित क्षमता का वर्णन इन शब्दों में किया:
अत्याधुनिक टर्मिनल गाइडेंस प्रणाली से लैस यह लंबी दूरी पर दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, सेना प्रमुख और रक्षा बलों के प्रमुख के रूप में पहचाने गए फ़ील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर तथा तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने विकास टीमों को बधाई दी। गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने भी इस परीक्षण का स्वागत करते हुए इसे स्वदेशी रक्षा विनिर्माण की प्रगति बताया।
इस घोषणा में तत्काल ध्यान उड़ान परीक्षण और मार्गदर्शन तकनीक पर है। पाकिस्तान वायु सेना के लिए व्यावहारिक लक्ष्य एक और ऐसा हथियार हासिल करना है जिसे उसके विमानों और संचालन संबंधी जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके और जिसके विकास में देश के इंजीनियर शामिल हों।
जेएफ-17 से प्रक्षेपण क्यों अहम है
जारी वीडियो में फ़ाज़ को जेएफ-17 से निकलते हुए दिखाया गया है, हालांकि सेना की लिखित घोषणा में प्रक्षेपण मंच की पहचान नहीं बताई गई। फुटेज के वर्णनों में विमान की पहचान क्रमांक 09-109 के रूप में की गई है। बताया जाता है कि यह लड़ाकू विमान का ब्लॉक-1 संस्करण है।
विमान से मिसाइल दागने के लिए कई प्रणालियों को साथ काम करना पड़ता है। हथियार को सुरक्षित ढंग से विमान पर ले जाना, उसके मिशन के लिए जरूरी जानकारी देना और परीक्षण के लिए चुनी गई परिस्थितियों में उसे विमान से अलग होना होता है। विमान के उपकरणों और सॉफ्टवेयर को भी हथियार के साथ संचार करना पड़ता है।
इसलिए जेएफ-17 इस कार्यक्रम को पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों के बेड़े से व्यावहारिक रूप से जोड़ता है। इंजीनियर परीक्षणों के जरिए विमान, उसके लक्ष्य निर्धारण उपकरण और मिसाइल के बीच तालमेल विकसित कर सकते हैं, बजाय इसके कि हथियार को एक अलग परियोजना के रूप में देखा जाए।
कार्यक्रम के वर्णनों में जे-10सीई के साथ संभावित एकीकरण का भी उल्लेख है। हालांकि घोषित उड़ान परीक्षण का केंद्र फुटेज में दिखाया गया जेएफ-17 है। दूसरे लड़ाकू विमान के साथ अनुकूलता के लिए अलग इंजीनियरिंग कार्य और परिचालन इस्तेमाल से पहले योग्यता परीक्षण जरूरी होंगे।
हवाई लक्ष्य खोजने के दो तरीके
फ़ाज़ परिवार के दो अलग तरह के टर्मिनल सीकर बताए गए हैं। यह वह सेंसर है जो अंतिम चरण में मिसाइल को लक्ष्य खोजने में मदद करता है। फ़ाज़-आरएफ सक्रिय रडार गाइडेंस का इस्तेमाल करती है, जबकि फ़ाज़-आईआईआर इमेजिंग इन्फ्रारेड गाइडेंस का।
सक्रिय रडार सीकर रडार संकेत भेजता है और उनकी परावर्तित तरंगों का इस्तेमाल करके लक्ष्य का पता लगाता है। इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर अवरक्त ऊर्जा का पता लगाता है और एक छवि बनाता है, जिससे लक्ष्य को ट्रैक करने में मदद मिलती है। इन तरीकों से डिजाइनरों को लक्ष्य पर हमले के दौरान विमान खोजने के अलग-अलग विकल्प मिलते हैं।
विश्लेषकों ने परीक्षण किए गए हथियार की संभावित पहचान फ़ाज़-आईआईआर के रूप में की है। बताया जाता है कि इसमें इमेजिंग इन्फ्रारेड गाइडेंस और लगभग 40 किलोमीटर की पहचान दूरी है। संस्करण की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। यह पहचान उसकी दिखावट के आकलन पर आधारित है, जबकि आईएसपीआर की घोषणा में अधिक व्यापक रूप से उन्नत टर्मिनल गाइडेंस का उल्लेख किया गया था।
यह अंतर अहम है, क्योंकि हर सीकर अलग तरह की जानकारी का इस्तेमाल करता है। रडार परावर्तित रेडियो संकेतों पर निर्भर करता है, जबकि इमेजिंग इन्फ्रारेड लक्ष्य के अवरक्त संकेत पर। उनकी उपयोगिता लक्ष्य की स्थिति, आसपास की परिस्थितियों और रक्षात्मक उपायों जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
कार्यक्रम के वर्णनों में नेविगेशन और टर्मिनल सीकर के काम संभालने से पहले संभावित डेटा अपडेट का भी उल्लेख है। आसान शब्दों में, मिसाइल को पहले उस क्षेत्र की ओर निर्देशित किया जा सकता है जहां लक्ष्य होने की आशंका है, फिर वह अपने सीकर से अंतिम चरण पूरा कर सकती है। इस परीक्षण के दौरान यह प्रक्रिया कैसे काम की, इस बारे में सेना ने बहुत कम जानकारी दी है।
घोषित प्रदर्शन और लंबी दूरी की महत्वाकांक्षा
फ़ाज़ परिवार का विपणन करने वाली ग्लोबल इंडस्ट्रियल एंड डिफेंस सॉल्यूशंस (जीआईडीएस) से जोड़े गए विनिर्देशों के मुताबिक, प्रस्तावित फ़ाज़-आरएफ की अनुमानित मारक दूरी 100 किलोमीटर से अधिक और अधिकतम गति मैक 3.5 है। मैक 3.5 का मतलब स्थानीय ध्वनि की गति से लगभग साढ़े तीन गुना है, जो वायुमंडलीय परिस्थितियों के साथ बदलती है।
फ़ाज़-1 के कुछ वर्णनों में इसकी मारक दूरी 120 किलोमीटर से अधिक बताई गई है। अधिक दूरी वाली फ़ाज़-2 कथित तौर पर विकासाधीन है। इसकी लक्षित मारक दूरी लगभग 180 किलोमीटर और कार्यक्रम के अन्य वर्णनों में 180 से 200 किलोमीटर या इससे अधिक बताई गई है। ये घोषित या लक्षित प्रदर्शन आंकड़े हैं; सेना ने नवंबर के परीक्षण के उड़ान माप सार्वजनिक नहीं किए।
मिसाइल की व्यावहारिक मारक दूरी हमले की परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है। प्रक्षेपण की ऊंचाई, विमान की गति, लक्ष्य की दिशा और उसकी चाल बदलने की क्षमता, ये सभी तय करते हैं कि अवरोधन के लिए पर्याप्त ऊर्जा बचाए रखते हुए मिसाइल कितनी दूर तक जा सकती है। प्रक्षेपण करने वाले विमान की ओर उड़ते लक्ष्य की स्थिति उससे अलग होती है जो उससे दूर जा रहा हो।
बताया गया है कि इस परिवार में जमीन से दागे जाने वाला एक प्रस्तावित संस्करण भी शामिल है, जिसकी मारक दूरी लगभग 20 से 25 किलोमीटर होगी। इससे संबंधित तकनीक को अलग भूमिका मिलेगी: लड़ाकू विमान से हमले में ले जाने के बजाय जमीन से किसी क्षेत्र की रक्षा करना।
प्रदर्शनी के मॉडल से उड़ान परीक्षण तक
फ़ाज़-आरएफ और फ़ाज़-आईआईआर के मॉडल पहली बार 2023 में इस्तांबुल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रक्षा उद्योग मेले में सार्वजनिक रूप से दिखाए गए थे। जीआईडीएस के मुख्य कार्यकारी असद कमाल ने वहां प्रदर्शित हथियारों को मॉडल बताया था, जिससे स्पष्ट होता है कि कार्यक्रम उस समय विकास के शुरुआती चरण में था।
इस कार्यक्रम का श्रेय नेशनल इंजीनियरिंग एंड साइंटिफिक कमीशन के अंतर्गत एयर वेपन्स कॉम्प्लेक्स को दिया जाता है, जिसे आमतौर पर एनईएससीओएम के नाम से जाना जाता है। जीआईडीएस इस मिसाइल परिवार का विपणन करती है। ये विवरण फ़ाज़ के सार्वजनिक प्रचार को पाकिस्तान के स्वदेशी हथियार विकास संगठनों से जोड़ते हैं।
नवंबर का प्रक्षेपण प्रदर्शनी में शुरुआत के बाद कार्यक्रम का एक नया पड़ाव है। प्रदर्शित मॉडल किसी डिजाइन और प्रस्तावित क्षमता को दिखाता है; उड़ान परीक्षण में वास्तविक प्रक्षेपण के लिए विमान, मिसाइल और परीक्षण संगठन एक साथ काम करते हैं।
पाकिस्तान के लिए औद्योगिक अवसर मिसाइल का ढांचा बनाने तक सीमित नहीं है। मार्गदर्शन, विमान के साथ इंटरफेस और परीक्षण का कौशल विकसित करने से राष्ट्रीय टीमों को आगे के संशोधनों पर अधिक प्रभाव मिल सकता है। परिचालन लाभ हथियार के अंतिम प्रदर्शन, उत्पादन के पैमाने और समर्थन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
विभिन्न भूमिकाओं वाली मिसाइलों के सालभर के परीक्षण
फ़ाज़ 2026 में पाकिस्तानी मिसाइलों से जुड़ी अन्य घोषणाओं के बाद आई है। इन घोषणाओं में विमान और जमीन से दागे जाने वाले हथियार शामिल हैं। उनकी भूमिकाएं अलग हैं: फ़ाज़ का उद्देश्य हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाना है, जबकि तैमूर क्रूज़ मिसाइल जमीन और समुद्र पर मौजूद लक्ष्यों पर हमले के लिए बनाई गई है।
वर्ष के दौरान बताए गए मुख्य पड़ाव ये थे:
- जनवरी 2026: पाकिस्तान वायु सेना ने स्वदेशी रूप से विकसित तैमूर क्रूज़ मिसाइल का परीक्षण किया। इसे विमान से दागा गया और इसकी मारक दूरी 600 किलोमीटर बताई गई।
- अक्टूबर 2026 की शुरुआत: पाकिस्तान ने जमीन से दागी जाने वाली फ़तह-IV, जिसे फ़तह-4 भी लिखा जाता है, क्रूज़ मिसाइल के विस्तारित संस्करण के परीक्षण की घोषणा की।
- 13 अक्टूबर 2026: पाकिस्तान ने फ़तह-2 एक्सटेंडेड रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण की जानकारी दी। इसे हाइपरसोनिक हथियार बताया गया।
- 3 नवंबर 2026: पाकिस्तान ने फ़ाज़ हवा-से-हवा मिसाइल का उड़ान परीक्षण किया।
बुनियादी फ़तह-4 की मारक दूरी लगभग 750 किलोमीटर बताई गई है, जबकि सेना ने विस्तारित संस्करण की दूरी का खुलासा नहीं किया। अक्टूबर का क्रूज़ मिसाइल परीक्षण उप-प्रणालियों, खासकर सटीकता और जीवित रहने की क्षमता से जुड़ी प्रणालियों में सुधारों को सत्यापित करने के लिए किया गया था।
फ़तह-2 एक्सटेंडेड रेंज की घोषणा में इसे उन्नत नेविगेशन और एवियोनिक्स से लैस सटीक हमले का हथियार बताया गया। एवियोनिक्स वे इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां हैं जिनका इस्तेमाल उड़ान को निर्देशित और नियंत्रित करने के लिए होता है। इसकी बैलिस्टिक उड़ान प्रणाली क्रूज़ मिसाइल से अलग है, जो लक्ष्य की ओर वायुमंडल में संचालित उड़ान भरती है।
स्वदेशी उत्पादन से क्या बदल सकता है
अमेरिकी और चीनी हवा-से-हवा मिसाइलों पर पाकिस्तान की मौजूदा निर्भरता बताती है कि फ़ाज़ में उसकी दिलचस्पी क्यों है। स्वदेशी रूप से विकसित हथियार से देश की टीमें वायु सेना की प्राथमिकताओं के अनुसार बदलाव कर सकती हैं और घरेलू भागीदारी के साथ नए हथियारों की आपूर्ति की योजना बना सकती हैं।
विमान के साथ एकीकरण खास तौर पर अहम है। मिसाइल के मार्गदर्शन, इंटरफेस और भविष्य के उन्नयन से जुड़े फैसले प्रभावित करते हैं कि लड़ाकू विमान उसका इस्तेमाल कैसे कर सकता है। इन फैसलों पर अधिक घरेलू नियंत्रण से वायु सेना को अपने बेड़े का रखरखाव या संशोधन करते समय ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं।
अब यह कार्यक्रम उस व्यावहारिक काम के चरण में पहुंच रहा है जो डिजाइन को परिचालन हथियार से जोड़ता है। आगे के परीक्षण, विमान के साथ योग्यता, विनिर्माण और समर्थन व्यवस्था तय करेंगे कि फ़ाज़ का इस्तेमाल कितने व्यापक स्तर पर हो सकता है। नवंबर का प्रक्षेपण इस प्रक्रिया का अब तक का सबसे नया ठोस कदम है। यह विभिन्न सैन्य भूमिकाओं के लिए मिसाइलें विकसित करने की पाकिस्तान की व्यापक कोशिश का भी हिस्सा है।
मुख्य बातें
- पाकिस्तान का कहना है कि उसने 3 नवंबर 2026 को अपनी पहली स्वदेशी हवा-से-हवा मिसाइल फ़ाज़ का सफल परीक्षण किया।
- जारी फुटेज में जेएफ-17 लड़ाकू विमान से मिसाइल दागते हुए दिखाया गया है।
- आईएसपीआर ने कहा कि मिसाइल लंबी दूरी पर हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए उन्नत टर्मिनल गाइडेंस का इस्तेमाल करती है।
- फ़ाज़ परिवार में घोषित रडार और इमेजिंग इन्फ्रारेड संस्करण शामिल हैं। फ़ाज़-2 कथित तौर पर विकासाधीन है।
- विश्लेषकों ने परीक्षण की गई मिसाइल की संभावित पहचान फ़ाज़-आईआईआर के रूप में की है। इसकी पहचान दूरी लगभग 40 किलोमीटर बताई गई है; आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
- प्रकाशित विनिर्देशों में प्रस्तावित फ़ाज़-आरएफ की अनुमानित मारक दूरी 100 किलोमीटर से अधिक और अधिकतम गति मैक 3.5 बताई गई है। सेना ने परीक्षण के विस्तृत माप साझा नहीं किए।
- यह प्रक्षेपण 2026 में तैमूर, फ़तह-4 और फ़तह-2 एक्सटेंडेड रेंज के पाकिस्तानी परीक्षणों के बाद हुआ है।
- विकास आगे बढ़ने के साथ स्वदेशी उत्पादन से पाकिस्तान को मिसाइलों की आपूर्ति और उन्नयन पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है।






