चीन पर निर्भर उद्योग के लिए परीक्षण की समय-सीमा
अमेरिकी संघीय संचार आयोग (एफसीसी) ने मतदान कर फैसला किया है कि 1 दिसंबर 2028 से अमेरिकी बाजार के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स का परीक्षण करने वाली चीनी प्रयोगशालाओं को बाहर रखा जाएगा। इससे उन निर्माताओं के लिए काम चीन से बाहर ले जाने की समय-सीमा तय हो गई है, जहां 2025 में ऐसे 82% परीक्षण हुए थे।
विषय-सूची
- चीन पर निर्भर उद्योग के लिए परीक्षण की समय-सीमा
- एफसीसी क्या बदल रहा है
- प्रयोगशालाएं सुरक्षा का मुद्दा क्यों बनीं
- गलत रिपोर्टिंग का मामला दिखाता है कि कार्रवाई कितनी अहम है
- निर्माता अपना परीक्षण कहां करा सकते हैं
- चीन मुख्य परीक्षण केंद्र कैसे बना
- काम स्थानांतरित करने की लागत
- दिसंबर 2028 तक पहुंचने वाले कदम
- टेलीफोन नंबरों को लेकर समानांतर विवाद
- मुख्य बिंदु
29 अक्टूबर 2026 का यह फैसला स्मार्टफोन, कैमरे और कंप्यूटर समेत कई उत्पादों पर लागू होता है। यह 2025 में शुरू किए गए उन प्रतिबंधों का विस्तार है, जिनका निशाना चीनी सरकार के स्वामित्व वाली या उसके नियंत्रण में काम करने वाली प्रयोगशालाएं थीं। नए तरीके में किसी प्रयोगशाला का स्थान और अमेरिका के साथ उसके देश की पारस्परिक व्यवस्थाएं पात्रता तय करने के प्रमुख आधार हैं।
एफसीसी अध्यक्ष ब्रेंडन कैर का कहना है कि 4% से भी कम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का परीक्षण अमेरिकी प्रयोगशालाओं में होता है। इस लिहाज से चीन की 82% हिस्सेदारी अमेरिका की हिस्सेदारी से 20 गुने से भी अधिक थी। इससे उस काम के पैमाने का पता चलता है जिसे निर्माताओं को दूसरी जगह स्थानांतरित करना पड़ सकता है।
मौजूदा उपकरण प्रमाणन वैध रहेंगे और पहले से मंजूर उत्पादों को इस बदलाव के कारण नए परीक्षण की जरूरत नहीं होगी। 1 दिसंबर 2028 से पहले जमा किए गए आवेदनों पर मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई होगी। निर्माताओं के लिए तत्काल चुनौती यह है कि वे इस समय-सीमा को ध्यान में रखकर भविष्य के उत्पादों और आवेदनों के परीक्षण की योजना बनाएं।
यह फैसला एफसीसी के मतदान के बाद तय की गई दिसंबर 2028 की समय-सीमा के बाद आया है। इसका व्यावहारिक असर प्रयोगशालाओं के मालिकों से आगे तक जाएगा: चीन में उपकरण विकसित करने वाली कंपनियों को प्रोटोटाइप दूसरी जगह भेजने, अपरिचित परीक्षण केंद्रों में जगह आरक्षित करने और उत्पादन कार्यक्रमों में बदलाव करने पड़ सकते हैं।
चीन ने इन प्रतिबंधों की निंदा करते हुए इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा शक्तियों का दुरुपयोग बताया है। परीक्षण कंपनियों ने चेतावनी दी है कि चीन की क्षमता का विकल्प तैयार करने में समय लगेगा, खासकर तब जब निर्माताओं को विशेष उपकरणों या विशेषज्ञता की जरूरत हो।
एफसीसी क्या बदल रहा है
एफसीसी उपकरण-अनुमोदन प्रणाली की देखरेख करता है। यह जांचती है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बाजार में आने से पहले अमेरिका की लागू आवश्यकताओं को पूरा करते हैं या नहीं। रेडियो तरंगें उत्सर्जित करने वाले उपकरणों के परीक्षण में रेडियो फ्रीक्वेंसी व्यवधान का मापन शामिल हो सकता है। इसका मतलब ऐसे अवांछित संकेतों से है जो दूसरे उपकरणों या संचार में बाधा डाल सकते हैं।
प्रयोगशालाएं तकनीकी माप करती हैं, जबकि प्रमाणन निकाय मंजूरी के लिए जरूरी साक्ष्यों की समीक्षा करते हैं। नए प्रतिबंध दोनों पर लागू होते हैं। किसी निर्माता के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला तक पहुंच खोने का मतलब है कि संबंधित अनुमोदन प्रक्रिया पूरी करने से पहले उसे कोई दूसरी पात्र सुविधा ढूंढनी होगी।
एफसीसी का कहना है कि वह उन देशों में स्थित परीक्षण और प्रमाणन निकायों को बाहर रखेगा जो अमेरिका स्थित प्रयोगशालाओं को समान अवसर नहीं देते। वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच नए तरीके के तहत जरूरी पारस्परिक मान्यता देने वाला कोई समझौता नहीं है।
पारस्परिक मान्यता समझौते के तहत भाग लेने वाली अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की प्रणालियों के अंतर्गत किए गए तय परीक्षण या प्रमाणन कार्य को स्वीकार कर सकती हैं। यह मान्यता समझौते के दायरे और नियामक की आवश्यकताओं पर निर्भर करती है। इसका यह मतलब नहीं कि हर उत्पाद को अपने आप मंजूरी मिल जाती है।
भौगोलिक आधार वाला यह नियम 2025 में अपनाए गए प्रतिबंधों से आगे जाता है। उन उपायों से चीनी सरकार से जुड़ी दर्जनों प्रयोगशालाएं प्रभावित हुई थीं, लेकिन एफसीसी का कहना है कि इसके बाद भी चीन की अधिकांश प्रयोगशालाएं अमेरिकी बाजार के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स का परीक्षण करती रहीं।
प्रयोगशालाएं सुरक्षा का मुद्दा क्यों बनीं
कैर की दलील इस बात पर केंद्रित है कि उत्पाद विकसित करने के दौरान प्रयोगशालाओं को किस तरह की पहुंच मिलती है। मंजूरी चाहने वाली कंपनी प्रोटोटाइप, डिजाइन और तकनीकी जानकारी ग्राहकों के लिए तैयार उपकरण उपलब्ध होने से कई महीने पहले साझा कर सकती है।
फैसले की व्याख्या करते हुए एफसीसी अध्यक्ष कैर ने इस पहुंच का जिक्र किया:
ये प्रयोगशालाएं अमेरिकी संचार ढांचे तक पहुंच का एक अहम द्वार हैं, और उनकी विशेष भूमिका के कारण उन्हें इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय जानकारी अक्सर उपकरण बाजार में आने से कई महीने पहले मिल जाती है,
एफसीसी का कहना है कि अविश्वसनीय प्रयोगशाला असुरक्षित उपकरणों को बाजार में पहुंचने दे सकती है, गोपनीय तकनीक को उजागर कर सकती है या संचार नेटवर्क को प्रभावित करने वाले व्यवधान का कारण बन सकती है। उसकी नीति इन सुरक्षा चिंताओं को अमेरिकी प्रयोगशालाओं के लिए पारस्परिक व्यावसायिक पहुंच की मांग के साथ जोड़ती है।
निर्माताओं के लिए इस बदलाव से अनुमोदन प्रक्रिया में एक और शर्त जुड़ गई है। उन्हें यह देखना होगा कि कोई प्रयोगशाला उपकरण के परीक्षण के लिए तकनीकी रूप से सक्षम है या नहीं, और एफसीसी के नियमों के तहत उसका स्थान अब भी पात्र है या नहीं।
गलत रिपोर्टिंग का मामला दिखाता है कि कार्रवाई कितनी अहम है
एफसीसी ने प्रयोगशालाओं के काम की विश्वसनीयता को लेकर अलग-अलग केंद्रों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। 25 जून 2026 को उसने परीक्षण से जुड़ी गलत जानकारी की जांच के बाद चीन के डोंगगुआन स्थित एसएलजी-सीपीसी टेस्ट लैबोरेटरी की मान्यता वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की।
एजेंसी ने कहा कि प्रयोगशाला ने कई ऐसी रिपोर्ट जमा करने की बात मानी जिनमें डेटा दूसरी रिपोर्टों से कॉपी किया गया था। जांचकर्ताओं ने एफसीसी उपकरण-अनुमोदन के 33 पहचानकर्ता पाए, जिन्हें प्रयोगशाला की तैयार की गई एक जैसी परीक्षण रिपोर्टों का समर्थन प्राप्त था।
एसएलजी-सीपीसी ने जाली रिपोर्टों के लिए अपने कर्मचारियों की अपर्याप्त समीक्षा प्रक्रियाओं को जिम्मेदार ठहराया। एफसीसी ने कहा कि यह उसकी बैड लैब्स पहल के तहत प्रयोगशाला की मान्यता वापस लेने के 23 मामलों में से एक है। इस पहल का निशाना विदेशी प्रतिद्वंद्वियों के स्वामित्व वाली या उनके निर्देश पर चलने वाली प्रयोगशालाएं हैं।
यह मामला दिखाता है कि प्रयोगशाला के रिकॉर्ड कितने महत्वपूर्ण हैं। प्रमाणन निकाय इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर तय करते हैं कि उपकरण तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं या नहीं। जब माप ठीक से करने के बजाय कॉपी किए जाते हैं, तो समीक्षा प्रक्रिया के पास जरूरी साक्ष्य नहीं रह जाते।
निर्माता अपना परीक्षण कहां करा सकते हैं
अमेरिका और पात्र पारस्परिक अर्थव्यवस्थाओं की प्रयोगशालाएं विकल्प बनी रहेंगी। 60 से अधिक अर्थव्यवस्थाओं को पारस्परिकता की शर्तें पूरी करने वाला बताया गया है। दूसरे परीक्षण इंतजामों पर विचार कर रहे निर्माताओं के लिए ताइवान, जापान और वियतनाम को संभावित स्थानों में शामिल किया गया है।
एफसीसी अमेरिकी प्रयोगशालाओं या उन देशों की प्रयोगशालाओं में जांचे गए उपकरणों के लिए एक सरल अनुमोदन प्रक्रिया की भी योजना बना रहा है जिन्हें वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं मानता। इससे निर्माताओं को अंतिम प्रतिबंध लागू होने से पहले काम स्थानांतरित करने का प्रोत्साहन मिलता है।
नीति पर बहस के दौरान हांगकांग के साथ व्यवहार बदल गया है। 30 अप्रैल 2026 के एक प्रस्ताव में चीन की मुख्य भूमि और हांगकांग, दोनों की प्रयोगशालाओं को शामिल करने की बात थी। उसमें अंतिम फैसले से पहले जनता से टिप्पणियां मांगने का भी प्रावधान था। अक्टूबर के बाद के विवरण में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग ढांचे के तहत दूरसंचार मान्यता व्यवस्थाओं के जरिए हांगकांग की प्रयोगशालाएं पात्र बनी रहेंगी।
इस तरह हांगकांग की स्थिति दूरसंचार परीक्षण में इस्तेमाल होने वाली मान्यता व्यवस्थाओं पर आधारित है। सुविधा चुन रही कंपनियों के लिए मुख्य शर्त यह है कि अपनाए गए नियमों के तहत प्रयोगशाला का स्थान और उसका प्राधिकरण पात्र हैं या नहीं।
मुख्य भूमि चीन में काम कर रही प्रयोगशाला के लिए सिर्फ विदेशी स्वामित्व होना समस्या का हल नहीं है। अक्टूबर की नीति कंपनी के स्वामित्व वाली राष्ट्रीयता के बजाय स्थान पर आधारित बताई गई है।
चीन मुख्य परीक्षण केंद्र कैसे बना
करीब दो दशकों में चीन की भूमिका तेजी से बढ़ी। 2007 में संबंधित इलेक्ट्रॉनिक्स परीक्षणों में चीनी प्रयोगशालाओं की हिस्सेदारी करीब 13% थी, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 31% थी। 2025 तक चीन की हिस्सेदारी 82% हो गई, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी 4% से नीचे आ गई।
ये आंकड़े चीन की हिस्सेदारी में 69 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी और अमेरिका की हिस्सेदारी में 27 प्रतिशत अंकों से अधिक की गिरावट दिखाते हैं। इनसे पता चलता है कि अमेरिकी बाजार में उत्पाद लाने के लिए जरूरी जांच निर्माता कहां करवाते हैं, इसमें बड़ा बदलाव आया है।
अंतरराष्ट्रीय परीक्षण कंपनी एलिमेंट ने इस संकेंद्रण के व्यावसायिक कारण बताए हैं। कारखानों के पास स्थित प्रयोगशालाएं ढुलाई लागत घटाती हैं और इंजीनियरों को प्रोटोटाइप बनाने, उसकी जांच करने और बदलाव करने के बीच तेजी से काम करने देती हैं।
एलिमेंट ने विनिर्माण और परीक्षण के बीच संबंध का वर्णन इस तरह किया:
कई वर्षों से वैश्विक निर्माताओं को चीन के व्यापक परीक्षण ढांचे का लाभ मिला है। इसकी एक अहम वजह यह है कि प्रयोगशालाएं विनिर्माण केंद्रों के करीब हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटती है और विकास चक्र छोटा होता है। इस क्षमता का विकल्प रातोंरात तैयार नहीं होगा।
पहले के आंकड़ों में चीन में हुए परीक्षणों की हिस्सेदारी करीब 75% बताई गई थी। एफसीसी का बाद का 82% वाला आंकड़ा 2025 से जुड़ा है और अक्टूबर के फैसले का दायरा समझाने के लिए कैर ने इसी आंकड़े का इस्तेमाल किया।
काम स्थानांतरित करने की लागत
एलिमेंट ने चेतावनी दी है कि परीक्षण को दूसरी मंजूरशुदा प्रयोगशालाओं में ले जाने से प्रतीक्षा अवधि बढ़ सकती है, खर्च बढ़ सकता है और समय तय करना मुश्किल हो सकता है। निर्माताओं की उन विशेषज्ञों तक पहुंच भी कम हो सकती है जो कम प्रचलित प्रकार के परीक्षण करते हैं।
परीक्षण में विफल प्रोटोटाइप में अक्सर बदलाव करने और फिर से माप लेने की जरूरत पड़ती है। प्रयोगशाला कारखाने के पास हो तो इंजीनियर कम ढुलाई और समय-निर्धारण के साथ यह चक्र पूरा कर सकते हैं। प्रयोगशाला का काम विदेश ले जाने से हर बार समय बढ़ सकता है, जब भी किसी उत्पाद की दोबारा जांच जरूरी हो।
पहले के प्रस्ताव से जुड़े लागत अनुमानों के मुताबिक, अमेरिका में परीक्षण का खर्च चीन में परीक्षण से तीन से चार गुना तक हो सकता है। स्थानांतरण की कुल लागत या खुदरा कीमतों पर उसके असर का कोई उद्योग-व्यापी अनुमान नहीं दिया गया है।
चाइनीज एकेडमी ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन के वरिष्ठ शोधकर्ता झोउ मी ने चेतावनी दी कि चीनी परीक्षण पर निर्भर कंपनियों को नीति के अनुरूप ढलने का खर्च उठाना पड़ेगा:
इससे अमेरिकी उत्पाद आपूर्ति शृंखलाओं में प्रत्यक्ष और बड़ी अनिश्चितता पैदा होगी। साथ ही, चीनी प्रयोगशालाओं की क्षमताओं पर निर्भर वैश्विक कंपनियों को इन नीतिगत बदलावों के अनुरूप ढलने की लागत उठानी पड़ेगी,
संक्रमण अवधि से निर्माताओं को विकल्प खोजने का समय मिलेगा। उनके सामने व्यावहारिक चुनौती नए उपकरणों के लिए पर्याप्त क्षमता जुटाने के साथ-साथ हर उत्पाद के लिए जरूरी खास परीक्षणों तक पहुंच बनाए रखने की है।
दिसंबर 2028 तक पहुंचने वाले कदम
ये प्रतिबंध एक बार में तत्काल रोक लगाने के बजाय कई फैसलों के जरिए विकसित हुए। यह क्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहले के कदम स्वामित्व पर केंद्रित थे, जबकि अक्टूबर का फैसला भौगोलिक स्थिति और पारस्परिक मान्यता को आधार बनाकर दायरा बढ़ाता है।
- मई 2025: एफसीसी ने उन संस्थाओं के स्वामित्व, नियंत्रण या निर्देशन वाली प्रयोगशालाओं पर प्रतिबंधों पर विचार किया जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम माना गया। उसी साल अपनाए गए प्रतिबंधों से दर्जनों केंद्र प्रभावित हुए।
- 30 अप्रैल 2026: एफसीसी ने चीन और हांगकांग की प्रयोगशालाओं से जुड़ा एक व्यापक प्रस्ताव आगे बढ़ाया। इसमें जनता से टिप्पणियां लेने और संक्रमण अवधि देने की संभावना शामिल थी।
- 25 जून 2026: गलत परीक्षण जानकारी के मामले में एफसीसी ने डोंगगुआन स्थित एसएलजी-सीपीसी टेस्ट लैबोरेटरी के खिलाफ कार्रवाई की।
- 29 अक्टूबर 2026: एफसीसी ने उन देशों की प्रयोगशालाओं और प्रमाणन निकायों को व्यापक रूप से बाहर रखने के पक्ष में मतदान किया, जो जरूरी पारस्परिक व्यवहार नहीं देते।
- 19 नवंबर 2026: एफसीसी की अमेरिकी टेलीफोन नंबरों तक पहुंच से जुड़े एक अलग प्रस्ताव पर मतदान की योजना है।
- 1 दिसंबर 2028: प्रयोगशालाओं पर प्रतिबंध लागू होने का कार्यक्रम है। इस तारीख से पहले जमा किए गए आवेदनों पर मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई होगी।
वैध प्रमाणन रखने वाले निर्माता उनका इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। बाद में आवेदन की तैयारी कर रही कंपनियों को विकास और अनुमोदन कार्यक्रमों में प्रयोगशाला से जुड़ी नई शर्तों को शामिल करना होगा।
टेलीफोन नंबरों को लेकर समानांतर विवाद
एफसीसी का 19 नवंबर को प्रस्तावित मतदान संचार प्रणाली के दूसरे हिस्से से जुड़ा है। इस प्रस्ताव के तहत चाइना मोबाइल, चाइना टेलीकॉम, चाइना यूनिकॉम और इंटरनेट प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करने वाली सेवाओं के अन्य प्रदाताओं को सीधे अमेरिकी टेलीफोन नंबर हासिल करने से रोका जाएगा।
एजेंसी का कहना है कि इस उपाय का मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकियों को अवैध रोबोकॉल से बचाना है। रोबोकॉल में स्वचालित डायलिंग प्रणालियों या रिकॉर्ड की गई आवाज के संदेशों का इस्तेमाल होता है। धोखेबाज इनसे बड़ी संख्या में संभावित पीड़ितों तक पहुंच सकते हैं।
एफसीसी उन सेवा प्रदाताओं पर भी प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है जो सुरक्षा जोखिम मानी जाने वाली कंपनियों, जैसे हुआवेई और जेडटीई, के उपकरण इस्तेमाल करते हैं। ये कदम दूरसंचार कनेक्शन, ड्रोन, उपभोक्ता राउटर और प्रतिबंधित कंपनियों के पुर्जे वाले उपकरणों से जुड़े दूसरे उपायों के साथ उठाए जा रहे हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने प्रयोगशाला और टेलीफोन नंबरों से जुड़े उपायों को खारिज करते हुए वॉशिंगटन पर राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा को जरूरत से ज्यादा फैलाने और चीनी कंपनियों के खिलाफ सरकारी शक्ति का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
गुओ ने कहा कि इन उपायों से चीनी और अमेरिकी कंपनियों के बीच सामान्य व्यापार को नुकसान पहुंचता है और वे कंपनियों तथा उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने चीन की प्रतिक्रिया इन शब्दों में दी:
चीन अपने वैध अधिकारों और हितों की दृढ़ता से रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा,
बीजिंग स्थित कटिंग-एज टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक झांग शियाओरोंग ने भी प्रयोगशाला नीति की आलोचना करते हुए इसे संरक्षणवाद बताया, जो वाणिज्यिक परीक्षण को राजनीतिक रंग देता है। इस विवाद में अब सुरक्षा, बाजार तक पहुंच और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की लागत पर परस्पर विरोधी रुख शामिल हैं।
मुख्य बिंदु
- एफसीसी ने 29 अक्टूबर 2026 को मतदान कर 1 दिसंबर 2028 से इलेक्ट्रॉनिक्स अनुमोदन प्रणाली में चीनी परीक्षण प्रयोगशालाओं को बाहर रखने का फैसला किया।
- कैर के मुताबिक, 2025 में संबंधित परीक्षणों में चीनी प्रयोगशालाओं की हिस्सेदारी 82% थी, जबकि अमेरिका में यह 4% से कम थी।
- मौजूदा प्रमाणन वैध रहेंगे और समय-सीमा से पहले जमा आवेदनों पर मौजूदा नियम लागू होंगे।
- व्यापक नीति का केंद्र प्रयोगशाला का स्थान और पारस्परिक मान्यता है। यह सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण पर आधारित पहले के प्रतिबंधों का विस्तार है।
- निर्माताओं को परीक्षण लागत, ढुलाई समय और विशेष प्रयोगशाला क्षमता के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने का सामना करना पड़ सकता है।
- अमेरिकी टेलीफोन नंबरों तक सीधी पहुंच से जुड़ा एफसीसी का अलग मतदान 19 नवंबर 2026 को होना तय है।
- चीन इन उपायों का विरोध करता है और कहता है कि वह अपने वैध हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएगा।






