घरेलू और व्यावसायिक गैस के बीच नया विभाजन
नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने प्रस्ताव दिया है कि एलपीजी उद्योगों को अपने मासिक गैस कोटे का 30 प्रतिशत व्यावसायिक दरों पर खरीदना और बेचना अनिवार्य हो। इससे तय व्यावसायिक आवंटन लागू होगा। साथ ही, कॉरपोरेशन अलग-अलग ब्रांडों के तहत काम कर रहे 58 उद्योगों के क्षेत्र में विलय को भी आगे बढ़ा रहा है।
विषय-सूची
- घरेलू और व्यावसायिक गैस के बीच नया विभाजन
- 30 प्रतिशत आवंटन कैसे काम करेगा
- सिलेंडर ब्रांड उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम हैं
- एनओसी ने उद्योगों से विलय की योजनाएं मांगीं
- विलय के दो आवेदन पहले से विचाराधीन
- उद्योगों का समर्थन, कर संबंधी शर्तों के साथ
- संचालक चाहते हैं कि विलय स्वैच्छिक रहें
- वितरण सुधार के साथ बड़ी आपूर्ति योजना
- मुख्य बातें
कॉरपोरेशन ने शुक्रवार को नेपाल एलपीजी उद्योग संघ के अधिकारियों के साथ बैठक में कोटे का प्रस्ताव रखा। व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए खास तौर पर बनाए गए अलग-अलग क्षमता के सिलेंडर बाजार में आने तक, उद्योगों को यह हिस्सा सीधे कॉरपोरेशन से व्यावसायिक कीमतों पर लेना होगा और इसे केवल कारोबार में इस्तेमाल के लिए बेचना होगा।
संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि गैस व्यावसायिक ग्राहकों तक पहुंचे या व्यावसायिक बिक्री के लिए खास ब्रांड तय करने होंगे। संघ के प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पर आंतरिक चर्चा करने और बैठक के एक सप्ताह के भीतर अपनी राय बताने पर सहमति जताई।
इस चर्चा में तीन संभावित बदलाव शामिल थे: व्यावसायिक गैस बिक्री को घरेलू बिक्री से अलग करना, परिचालन लागत घटाने के लिए एलपीजी कारोबारों का विलय करना और देशभर में वितरित सिलेंडरों पर एक ही लोगो लगाना। इनमें से हर बदलाव थोक गैस खरीदने से लेकर ग्राहक को सिलेंडर मिलने तक की प्रक्रिया के अलग-अलग हिस्से से जुड़ा है।
एलपीजी यानी द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस, वह ईंधन है जिसे खाना पकाने और अन्य कामों के लिए इस्तेमाल होने वाले सिलेंडरों में दबाव के तहत रखा जाता है। प्रस्तावित व्यावसायिक आवंटन कारोबार में इस्तेमाल के लिए बेची जाने वाली गैस से जुड़ा है, घरेलू खपत से नहीं। संचालकों के लिए इससे एक खास बाध्यता बनेगी, जिसमें मासिक आपूर्ति के एक हिस्से को खरीदने की कीमत और उसे बेचने वाले ग्राहक, दोनों तय होंगे।
30 प्रतिशत आवंटन कैसे काम करेगा
प्रस्तावित नियम हर उद्योग के मासिक कोटे पर लागू होगा। साधारण उदाहरण के तौर पर, अगर किसी संचालक को एलपीजी की 100 इकाइयां आवंटित हों, तो उसे 30 इकाइयां व्यावसायिक दरों पर खरीदकर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बेचना होगा। बाकी 70 इकाइयां इस खास व्यावसायिक शर्त के दायरे में नहीं आएंगी।
इस तरह किसी उद्योग के आवंटन में हर 10 में से तीन इकाइयां व्यावसायिक गैस की होंगी। प्रस्ताव ईंधन आपूर्ति के एक हिस्से से जुड़ा है, न कि 30 प्रतिशत कंपनियों को व्यावसायिक आपूर्तिकर्ता बनाने की शर्त से।
समर्पित व्यावसायिक सिलेंडर आने तक इस व्यवस्था को संभालने के लिए एनओसी ने दो तरीके बताए हैं। संचालक संबंधित गैस के व्यावसायिक इस्तेमाल का हिसाब रखकर उसे सुनिश्चित कर सकते हैं, या व्यावसायिक बिक्री के लिए खास ब्रांड तय कर सकते हैं। दोनों ही तरीकों में वितरण प्रणाली के भीतर व्यावसायिक लेन-देन की पहचान करने का तरीका जरूरी होगा।
घरेलू और व्यावसायिक गैस के बीच कीमत का अंतर, प्रस्ताव लागू होने की तारीख और अंतिम इस्तेमाल की विस्तृत जांच का तरीका तय नहीं किया गया है। इन्हीं बातों से व्यवसायों की अतिरिक्त खरीद लागत और वितरकों को रखने वाले रिकॉर्ड की मात्रा तय होगी। अगला तत्काल कदम उद्योग की ओर से सहमति जताई गई समयसीमा, यानी एक सप्ताह के भीतर जवाब देना है।
सिलेंडर ब्रांड उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम हैं
नेपाल के एलपीजी बाजार में अलग-अलग ब्रांडों के तहत 58 उद्योग काम कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को तब परेशानी हो सकती है, जब उनके पास एक कंपनी का खाली सिलेंडर हो, लेकिन आसपास उपलब्ध गैस किसी दूसरी कंपनी की हो। कई ब्रांड होने से सिलेंडरों का प्रबंधन, परिवहन खर्च और बाजार की निगरानी भी जटिल हो जाती है।
एनओसी के एलपीजी और विमानन विभाग के प्रमुख निदेशक बिनित मणि उपाध्याय ने विलय को बिक्री और वितरण आसान बनाने, परिचालन दक्षता बढ़ाने और उपभोक्ता हितों से जोड़ा है। कॉरपोरेशन उद्योगों और ब्रांडों की संख्या घटाना चाहता है, हालांकि उसने अंतिम संख्या का कोई लक्ष्य तय नहीं किया है।
घरेलू उपभोक्ता के लिए व्यावहारिक सवाल यह है कि उसके पास पहले से मौजूद सिलेंडर में रीफिल कैसे मिलेगी। कंपनियां विलय को किस तरह व्यवस्थित करती हैं, इसके आधार पर कुछ सिलेंडर साझा कारोबारी नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं। एनओसी को उम्मीद है कि अधिक व्यवस्थित बाजार से उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति आसान होगी।
शुक्रवार की बैठक में चर्चा किया गया एक लोगो सिलेंडरों की पहचान से जुड़ा है। साझा लोगो, ब्रांडों का एकीकरण और कंपनियों का कानूनी विलय अलग-अलग बदलाव हैं: एक सिलेंडर पर लगे निशान से जुड़ा है, दूसरा उस नाम से जिसके तहत गैस बेची जाती है, और तीसरा खुद कारोबारों से।
एनओसी ने उद्योगों से विलय की योजनाएं मांगीं
एनओसी का कहना है कि उसकी विलय पहल नेपाल के कैलेंडर के वित्त वर्ष 2083/84 के लिए स्वीकृत नीति और कार्यक्रम के बिंदु 32 पर आधारित है। कॉरपोरेशन ने एलपीजी उद्योगों से कार्ययोजनाएं तैयार करने और अलग-अलग नामों तथा ब्रांडों के तहत चल रहे कारोबारों के एकीकरण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।
कॉरपोरेशन के पत्राचार की तारीख 29 अक्टूबर बताई गई है, जबकि नेपाली भाषा के विवरणों में कार्तिक 12 का उल्लेख है; पत्रों की एक अन्य बताई गई तारीख 12 नवंबर है। इन तारीखों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
पहल में बताए गए मुख्य पड़ाव ये हैं:
- वित्त वर्ष 2083/84: एनओसी ने अपनी विलय नीति जारी रखने के आधार के रूप में स्वीकृत नीति और कार्यक्रम के बिंदु 32 का उल्लेख किया।
- 29 अक्टूबर: विलय की कार्ययोजनाएं मांगने के एनओसी के अनुरोध की तारीख यही बताई गई है, जबकि नेपाली भाषा के विवरणों में कार्तिक 12 और एक अन्य तारीख 12 नवंबर दी गई है।
- 2 नवंबर, 2026: एनओसी की विलय पहल और कंपनियों से योजनाएं तैयार करने का अनुरोध सार्वजनिक हुआ।
- शुक्रवार की बैठक, कैलेंडर तारीख निर्दिष्ट नहीं: एनओसी ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ 30 प्रतिशत व्यावसायिक कोटे, विलय और साझा सिलेंडर लोगो पर चर्चा की।
- बैठक के एक सप्ताह के भीतर: उद्योग प्रतिनिधियों को व्यावसायिक कोटे के प्रस्ताव पर अपनी राय बतानी है।
एनओसी इन पत्रों को प्रस्ताव तैयार करने और चर्चा आगे बढ़ाने का निर्देश बताता है। हालांकि नेपाल एलपीजी उद्योग संघ के अध्यक्ष दीवान बहादुर चंद ने कहा है कि संघ को विलय के बारे में एनओसी या मंत्रालय से कोई औपचारिक पत्राचार नहीं मिला। उनके मुताबिक हालिया बैठक शुरुआती चर्चा के स्तर पर थी।
विलय के दो आवेदन पहले से विचाराधीन
उपाध्याय ने एनओसी को मिले विलय के दो औपचारिक आवेदनों का जिक्र किया है: एक नेपाल गैस और एचपी गैस के बीच, और दूसरा नेपाल गैस गंडकी और राजधानी गैस के बीच। इन आवेदनों से व्यापक एकीकरण नीति के तहत विचार के लिए खास कंपनियां सामने आई हैं।
कॉरपोरेशन की प्राथमिकता में एक ही मालिक या कारोबारी समूह के नियंत्रण वाले ब्रांडों को एक साथ लाना शामिल है। उपाध्याय ने नेपाल गैस से जुड़े करीब आठ ब्रांडों का उदाहरण दिया, जिन्हें एक नाम के तहत जोड़ा जा सकता है। उन्होंने एवरेस्ट के विभिन्न ब्रांडों को एक साथ लाने का भी उल्लेख किया।
आठ ब्रांडों को एक करने से उस समूह में सात अलग-अलग ब्रांड पहचानें खत्म हो जाएंगी। इससे एनओसी जिस सरलीकरण पर चर्चा कर रहा है, उसका पैमाना समझ में आता है। हालांकि यह उदाहरण ब्रांडों से जुड़ा है और इससे यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि देश के 58 उद्योगों में से कितने बाकी रहेंगे।
दोनों आवेदन चर्चा के एक हिस्से को औपचारिक प्रक्रिया में ले जाते हैं। मंजूरी, कानूनी व्यवस्था और सिलेंडरों तथा वितरण नेटवर्क के प्रबंधन का तरीका, इन कारोबारों के एक होने पर ग्राहकों के अनुभव को प्रभावित करेगा।
उद्योगों का समर्थन, कर संबंधी शर्तों के साथ
चंद ने कहा है कि संचालक विलय के लिए तैयार हैं, लेकिन वे ऐसी कर और कानूनी व्यवस्था चाहते हैं जैसी वाणिज्यिक बैंकों के विलय के लिए उपलब्ध कराई गई थी। उनकी मुख्य चिंता आयकर अधिनियम की धारा 57 और स्वामित्व में बदलाव के वित्तीय परिणाम हैं।
विलय के तहत कारोबारों को सहमत स्वामित्व संरचना में जोड़ा जाता है। लेन-देन और लागू कर नियमों के आधार पर स्वामित्व बदलने से कर देनदारी बन सकती है। चंद का कहना है कि एलपीजी संचालकों को अपना कारोबार जोड़ने के लिए इन लागतों का समाधान जरूरी है।
संघ अध्यक्ष ने धारा 57 के तहत स्वामित्व में बदलाव से जुड़े पूंजीगत लाभ कर और अन्य देनदारियों का खास तौर पर मुद्दा उठाया है। वे चाहते हैं कि सरकार कानूनी स्पष्टता और कर रियायतें दे, ताकि इसमें शामिल उद्योगों के लिए विलय वित्तीय रूप से संभव हो।
चंद की इस मांग के साथ एनओसी के वितरण संबंधी लक्ष्य के सामने एक ठोस शर्त भी जुड़ गई है। कॉरपोरेशन परिचालन सरल और लागत कम करना चाहता है; संचालक नई संरचना अपनाने से पहले उसकी लागत जानना चाहते हैं। परिवहन या प्रशासनिक खर्च घटाने वाली योजना में भी विलय के समय कंपनियों को बड़ा खर्च उठाना पड़ सकता है।
संचालक चाहते हैं कि विलय स्वैच्छिक रहें
चंद ने यह भी कहा है कि भागीदारी स्वैच्छिक होनी चाहिए और सरकार को कंपनियों को विलय के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। वे उद्योगों की अंतिम संख्या अनिवार्य रूप से तय करने के विरोध में हैं। उनका कहना है कि जो कारोबार विलय करना चाहें, उन्हें आगे बढ़ने दिया जाए और बाकी स्वतंत्र रहें।
संघ अध्यक्ष ने हालिया बैठक को शुरुआती विचार-विमर्श बताया। उन्होंने कहा कि बैठक के रिकॉर्ड में चर्चा होने की बात दर्ज थी और कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ था। उनका यह विवरण विलय की शर्तों पर बातचीत को कार्ययोजनाओं के लिए एनओसी की पहल के साथ रखता है।
एनओसी का घोषित उद्देश्य उद्योगों और ब्रांडों की संख्या घटाना है, लेकिन उपाध्याय ने कहा है कि कोई सटीक संख्यात्मक लक्ष्य तय नहीं किया गया है। इस तरह दोनों पक्ष विलय पर विचार करने में रुचि रखते हैं, लेकिन शर्तों को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।
संचालकों के लिए यह तय करने में स्वैच्छिक भागीदारी, कर व्यवस्था और कानूनी प्रक्रियाएं अहम हैं कि विलय कारोबार के लिहाज से उचित है या नहीं। एनओसी ऐसा वितरण तंत्र चाहता है जिसे संभालना आसान हो और जो ग्राहकों के लिए अधिक सुविधाजनक हो। व्यावसायिक कोटे का प्रस्ताव इन चर्चाओं के दौरान उन्हीं कंपनियों के सामने एक और मुद्दा रखता है।
वितरण सुधार के साथ बड़ी आपूर्ति योजना
एनओसी भारत के मोतिहारी से नेपाल के सरलाही तक करीब 131 किलोमीटर लंबी एलपीजी पाइपलाइन और 50,000 टन भंडारण क्षमता की योजनाओं को भी आगे बढ़ा रहा है। प्रस्तावित पाइपलाइन और गैस भंडार का उद्देश्य आयातित ईंधन के बॉटलिंग संयंत्रों तक पहुंचने से पहले उसके परिवहन और भंडारण की व्यवस्था करना है।
परियोजना की शुरुआती रूपरेखा में रोजाना 25,000 सिलेंडर भरने में सक्षम संयंत्र और हर दिन कम से कम 100 गैस टैंकर लोड करने वाले उपकरण भी शामिल थे। नेपाल के 58 निजी बॉटलिंग और रीफिलिंग संयंत्र आगे की आपूर्ति व्यवस्था का हिस्सा बने रहेंगे।
रोजाना करीब 1,500 टन एलपीजी आयात के नियोजन आंकड़े के आधार पर 50,000 टन का पूरा भंडार करीब 33 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त होगा। यह नियोजित बफर क्षतिग्रस्त सड़कों, यातायात में देरी या परिवहन विवादों से होने वाली रुकावटों का मुकाबला करेगा।
विलय पहल आपूर्ति के एक अलग चरण से जुड़ी है: कंपनियां बॉटलिंग, ब्रांड, सिलेंडर और वितरण को कैसे व्यवस्थित करेंगी। व्यावसायिक कोटा आपूर्ति के एक हिस्से के आवंटन और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को उसकी बिक्री से जुड़ा होगा। दोनों प्रस्ताव थोक आयात से लेकर अंतिम ग्राहक तक पहुंचते हैं, लेकिन हर हिस्से के लिए अलग फैसले लेने होंगे।
उपभोक्ता और कारोबार इन बदलावों को व्यावहारिक बातों के जरिए महसूस करेंगे: वे किस सिलेंडर में रीफिल करा सकते हैं, कौन-सा ब्रांड उनकी सेवा देगा और गैस पर कौन-सी कीमत लागू होगी। अगला तत्काल घटनाक्रम प्रस्तावित 30 प्रतिशत व्यावसायिक आवंटन पर उद्योग की प्रतिक्रिया है। वहीं, विलय संबंधी चर्चा कंपनी की योजनाओं, स्वैच्छिक भागीदारी और कर व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
मुख्य बातें
- एनओसी ने एलपीजी उद्योगों के लिए मासिक कोटे का 30 प्रतिशत व्यावसायिक दरों पर खरीदना और कारोबार में इस्तेमाल के लिए बेचना अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है।
- उद्योग प्रतिनिधियों ने कोटे पर आंतरिक चर्चा करने और शुक्रवार की बैठक के एक सप्ताह के भीतर जवाब देने पर सहमति जताई।
- समर्पित सिलेंडर आने तक प्रस्ताव में व्यावसायिक इस्तेमाल का हिसाब रखने या व्यावसायिक बिक्री के लिए ब्रांड तय करने की व्यवस्था शामिल है।
- एनओसी वित्त वर्ष 2083/84 की नीति और कार्यक्रम के बिंदु 32 के तहत विलय को आगे बढ़ा रहा है।
- नेपाल में अलग-अलग ब्रांडों के तहत 58 एलपीजी उद्योग चल रहे हैं। एकीकरण का कोई अंतिम लक्ष्य घोषित नहीं किया गया है।
- विलय के दो औपचारिक आवेदन नेपाल गैस और एचपी गैस, तथा नेपाल गैस गंडकी और राजधानी गैस से जुड़े हैं।
- उद्योग प्रतिनिधि स्वैच्छिक विलय और आयकर अधिनियम की धारा 57 से जुड़े कर तथा कानूनी इंतजाम चाहते हैं।
- साझा सिलेंडर लोगो पर भी चर्चा हुई। इसके साथ पाइपलाइन और 50,000 टन के गैस भंडार की अलग योजनाएं भी हैं।






