13 कदम पूरे, लेकिन वित्तीय जांच जारी
सुधार कार्यक्रम के 15 में से 13 कदम पूरे करने के बावजूद, 30 अक्टूबर 2026 को म्यांमार वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की काली सूची में बना रहा। निगरानी संस्था ने देश से जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ी जांच जारी रखने को कहा और चेतावनी दी कि फरवरी 2027 तक आगे प्रगति नहीं हुई तो वह और कड़े कदमों पर विचार करेगी।
विषय-सूची
- 13 कदम पूरे, लेकिन वित्तीय जांच जारी
- ऑनलाइन घोटाले क्यों बने हुए हैं प्रमुख चिंता
- बाकी काम में क्या शामिल है
- म्यांमार यहां तक कैसे पहुंचा
- बैंकों से क्या अपेक्षा है
- व्यापार और औपचारिक बैंकिंग पर असर
- मानवीय सहायता और परिवारों को भेजी रकम सुरक्षित रहनी चाहिए
- जापान की कोशिश के सामने वित्तीय अपराध की कसौटी
- फरवरी 2027 से पहले क्या होगा
- मुख्य बातें
यह फैसला 26 से 30 अक्टूबर तक पेरिस में हुई पूर्ण बैठक के बाद आया। इसमें म्यांमार के केंद्रीय बैंक की गवर्नर डॉ. खिन नाइंग ऊ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। ऑनलाइन धोखाधड़ी, अपराध से हासिल धन का लेनदेन और धनशोधन के खिलाफ अधूरे उपाय प्रमुख चिंताएं बने रहे।
व्यवसायों और परिवारों के लिए इसका तात्कालिक असर अंतरराष्ट्रीय भुगतानों की लगातार जांच है। म्यांमार से जुड़े लेनदेन करने वाले बैंकों से अपेक्षा है कि वे शामिल लोगों, भुगतान के उद्देश्य और गतिविधि के संदिग्ध दिखने की संभावना की अधिक बारीकी से पड़ताल करें। सीमा पार धन भेजते समय इसके चलते अधिक सवालों और कागजी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
एफएटीएफ की उस श्रेणी में म्यांमार अब भी ईरान और उत्तर कोरिया के साथ है, जिसे औपचारिक रूप से कार्रवाई की मांग वाले उच्च जोखिम वाले क्षेत्राधिकार कहा जाता है। हालांकि, इन देशों पर लागू उपाय अलग-अलग हैं: म्यांमार पर बढ़ी हुई जांच जारी है, जबकि ईरान और उत्तर कोरिया को काउंटरमेजर्स कहे जाने वाले अधिक कड़े कदमों का सामना करना पड़ रहा है।
एफएटीएफ ने आम परिवारों के लिए सीधे अहम एक निर्देश भी दोहराया: जांच के दौरान मानवीय सहायता और प्रवासी कामगारों की घर भेजी रकम समेत वैध धन हस्तांतरण सुरक्षित रहने चाहिए। इस फैसले में म्यांमार के वित्तीय अधिकारियों पर दबाव जारी रखने के साथ-साथ इन जरूरी माध्यमों को चालू रखने की मांग भी शामिल है।
ऑनलाइन घोटाले क्यों बने हुए हैं प्रमुख चिंता
एफएटीएफ ने म्यांमार में आपराधिक गतिविधियों के बारे में जून में किए गए अपने आकलन का हवाला दिया। अक्टूबर के बयान में निगरानी संस्था ने समस्या के पैमाने का वर्णन किया:
म्यांमार में धोखाधड़ी और साइबर घोटाले की गतिविधियां अब भी व्यापक हैं और अवैध वित्तीय गतिविधियों के गंभीर जोखिम पैदा करती हैं।
धनशोधन वह प्रक्रिया है जिसमें अपराध से कमाए गए धन को इस तरह स्थानांतरित या छिपाया जाता है कि वह वैध स्रोत से आया हुआ लगे। ऑनलाइन धोखाधड़ी से अपराधियों को ऐसा धन मिलता है, जिसे उन्हें हासिल करना, स्थानांतरित करना और खर्च करना होता है। इसलिए घोटालों को सहारा देने वाले वित्तीय माध्यम भी पीड़ितों को निशाना बनाने वाली गतिविधियों की समस्या का हिस्सा हैं।
2021 में सेना के सत्ता पर कब्जे के बाद से घोटाले के कामकाज और उनसे जुड़े धनशोधन का विस्तार हुआ है, खासकर म्यांमार के दूरदराज इलाकों में। संघर्ष के साथ पूर्वी म्यांमार में अवैध मादक पदार्थों, विशेषकर मेथामफेटामाइन, के उत्पादन और तस्करी में भी बढ़ोतरी हुई है। इन दोनों गतिविधियों से अपराध की कमाई होती है, जिसका पता अधिकारियों को लगाना है।
एफएटीएफ ने सेना समर्थित सरकार की ओर से घोटाले के नेटवर्क के खिलाफ उठाए गए कदमों को स्वीकार किया, लेकिन उनसे जुड़े धन प्रवाह पर और कार्रवाई की मांग की। एफएटीएफ के अध्यक्ष गाइल्स थॉमसन ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि ऑनलाइन घोटालों के खिलाफ कदम उठाने और निगरानी संस्था की मांगें पूरी करने में नाकाम रहने पर म्यांमार को और कड़े उपायों का सामना करना पड़ सकता है।
बाकी काम में क्या शामिल है
म्यांमार ने 15 में से 13 कदम पूरे किए हैं, यानी संख्या के लिहाज से उसके कार्यक्रम का करीब 87 प्रतिशत पूरा हो चुका है। दो कदम अब भी अधूरे हैं। एफएटीएफ ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और अवैध वित्तीय प्रवाह के खिलाफ कड़े उपायों के साथ इन्हें पूरा करने का आग्रह किया।
निगरानी संस्था की मांगों में म्यांमार की वित्तीय खुफिया इकाई के कामकाज और उसकी सूचना साझा करने की व्यवस्था में सुधार शामिल है। ऐसी इकाई संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर उसकी जांच करती है और उपयोगी निष्कर्ष उन एजेंसियों को भेजती है जो आगे जांच कर सकती हैं।
एफएटीएफ ने धनशोधन की जांच और अभियोजन की भी मांग की। व्यावहारिक रूप से अधिकारियों को संदिग्ध धन से जुड़ी जानकारी को ऐसे मामलों में बदलना होगा, जिन पर न्याय व्यवस्था के तहत कार्रवाई हो सके। पूरे किए गए कदमों की गिनती प्रगति का एक पैमाना है; काली सूची में बनाए रखने का फैसला दिखाता है कि निगरानी संस्था को अब भी और नतीजों की जरूरत है।
पेरिस बैठक के दौरान केंद्रीय बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने म्यांमार की प्रगति पर चर्चा की। एफएटीएफ के प्रमुख सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने उसके प्रयासों का समर्थन जताया। फिर भी नतीजे में मौजूदा जांच का स्तर बरकरार रखा गया और संभावित रूप से और कड़ी कार्रवाई की नई चेतावनी दी गई।
म्यांमार यहां तक कैसे पहुंचा
म्यांमार का अधूरा कार्यक्रम 2021 के तख्तापलट से भी पहले का है। 2018 के आकलन में कमजोरियों की पहचान की गई थी और अधिकारियों ने फरवरी 2020 में कार्ययोजना पर सहमति दी थी। इसे पूरा करने की समयसीमा सितंबर 2021 में समाप्त हो गई।
प्रमुख तारीखें बताती हैं कि सुधार कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय वित्तीय दबाव का लंबा स्रोत कैसे बन गया:
- 2018: एक आकलन में धनशोधन और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ म्यांमार की सुरक्षा व्यवस्था में कमजोरियों की पहचान की गई।
- फरवरी 2020: म्यांमार ने इन कमजोरियों को दूर करने के लिए कार्ययोजना पर सहमति दी।
- सितंबर 2021: कार्यक्रम पूरा करने की समयसीमा समाप्त हुई।
- 21 अक्टूबर 2022: एफएटीएफ ने म्यांमार को काली सूची में रखा और बढ़ी हुई जांच का आह्वान किया।
- 26 से 30 अक्टूबर 2026: एफएटीएफ की पेरिस में बैठक हुई और म्यांमार का दर्जा बरकरार रखा गया।
- फरवरी 2027: आगे कोई प्रगति नहीं होने पर एफएटीएफ काउंटरमेजर्स पर विचार करेगा।
अक्टूबर 2026 का फैसला म्यांमार के काली सूची वाली श्रेणी में आने के चार साल बाद आया। यह लंबी अवधि उन कंपनियों के लिए मायने रखती है जो बार-बार भुगतान करती हैं: देश से जुड़े कारोबार में कड़ी जांच अब एक स्थायी शर्त बन गई है।
ताजा चेतावनी से पहले भी एक समयसीमा तय की गई थी। फरवरी 2026 में एफएटीएफ ने कहा था कि जून तक म्यांमार ने आगे प्रगति नहीं की तो वह काउंटरमेजर्स पर विचार करेगा। अक्टूबर के फैसले में बढ़ी हुई जांच जारी रखी गई और कड़ी कार्रवाई पर विचार के लिए फरवरी 2027 अगली घोषित तारीख तय की गई। पहले म्यांमार की अधूरी कार्ययोजना की जांच में धनशोधन से जुड़ी जांच, अभियोजन और अपराध की कमाई जब्त करने पर ध्यान था।
बैंकों से क्या अपेक्षा है
1989 में स्थापित अंतर-सरकारी संस्था एफएटीएफ धनशोधन और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मानकों का समन्वय करती है। इसके फैसले यह दिशा देते हैं कि देश और वित्तीय संस्थान खास क्षेत्राधिकारों से जुड़े जोखिमों पर कैसी प्रतिक्रिया दें।
अक्टूबर के बयान में निगरानी संस्था ने बताया कि म्यांमार से जुड़े कारोबारी संबंध बनाए रखने वाले संस्थानों से वह क्या अपेक्षा करती है:
निगरानी का स्तर और उसका स्वरूप बढ़ाएं
एफएटीएफ ने कहा कि निगरानी से यह पता लगाने में मदद मिलनी चाहिए कि लेनदेन या गतिविधियां असामान्य अथवा संदिग्ध तो नहीं हैं। बैंक ग्राहक के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मांग सकता है, जैसे धन कहां से आया, उसे क्यों भेजा जा रहा है और किसी कंपनी का वास्तविक मालिक कौन है।
उदाहरण के लिए, आयातित सामान के भुगतान पर बैंक लेनदेन को समझने के लिए कारोबारी दस्तावेज मांग सकता है। ग्राहक की सामान्य गतिविधियों से काफी अलग कोई हस्तांतरण होने पर और सवाल पूछे जा सकते हैं। इसका व्यावहारिक बोझ ग्राहकों के साथ-साथ जांच करने वाले संस्थानों पर भी पड़ता है।
काउंटरमेजर्स अधिक कड़ी प्रतिक्रिया होंगे। इनमें बैंकिंग संबंधों पर कड़ी निगरानी या पाबंदियां शामिल हो सकती हैं, जिससे वित्तीय संस्थानों के लिए देश से जुड़ी सेवाएं जारी रखना कठिन हो सकता है। एफएटीएफ ने म्यांमार के लिए विशिष्ट उपायों पर अभी फैसला नहीं किया है; फरवरी 2027 समीक्षा की एक सशर्त तारीख है, पाबंदियां अपने आप लागू होने की तारीख नहीं।
व्यापार और औपचारिक बैंकिंग पर असर
म्यांमार के एक निजी बैंक के अधिकारी ने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय बैंक विदेश भेजे जाने वाले धन के लिए अधिक दस्तावेज मांग सकते हैं। अधिकारी ने आयातकों और निर्यातकों को और देरी होने की आशंका भी जताई और कहा कि औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंच सीमित होने से अनौपचारिक हुंडी बाजार का विस्तार हो सकता है।
हुंडी हस्तांतरण में दलाल सामान्य बैंकिंग माध्यमों के बाहर भुगतान की व्यवस्था करते हैं। औपचारिक सेवाओं तक पहुंच कठिन होने पर ग्राहक इन विकल्पों का रुख कर सकते हैं। अधिकारी की चेतावनी एक व्यावहारिक दुविधा दिखाती है: कड़ी जांच का मकसद संदिग्ध धन का पता लगाना आसान बनाना है, लेकिन बैंकों के इस्तेमाल में मुश्किलें वैध ग्राहकों को ऐसे माध्यमों की ओर धकेल सकती हैं जिन पर कम निगरानी होती है।
आयातकों को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करना होता है और निर्यातकों को खरीदारों से धन प्राप्त करना होता है। अतिरिक्त जांच से बिक्री तय होने और भुगतान पूरा होने के बीच का समय बढ़ सकता है। इससे कारोबारियों को यह अनिश्चितता हो सकती है कि सामान का भुगतान कब होगा या आमदनी कब आएगी।
उसी अधिकारी ने कहा कि धन स्थानांतरित करने में मुश्किलें और प्रतिबंधों का जोखिम अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को नया निवेश करने से रोक सकता है। इन कंपनियों के लिए म्यांमार में प्रवेश का फैसला कारोबारी संभावनाओं के साथ-साथ इस बात पर भी निर्भर करता है कि वे बैंकों के जरिए भरोसेमंद तरीके से धन भेज पाएंगी या नहीं।
मानवीय सहायता और परिवारों को भेजी रकम सुरक्षित रहनी चाहिए
एफएटीएफ ने मानवीय सहायता, वैध गैर-लाभकारी कार्यों और धन प्रेषण का स्पष्ट रूप से जिक्र किया। धन प्रेषण यानी विदेश में काम करने वाले लोगों द्वारा घर भेजी गई रकम, जिसका इस्तेमाल अक्सर रिश्तेदार रोजमर्रा के खर्चों के लिए करते हैं।
अपने बयान में निगरानी संस्था ने देशों को बढ़ी हुई जांच लागू करते समय इन धन प्रवाहों की सुरक्षा करने का निर्देश दिया:
देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मानवीय सहायता, वैध [गैर-लाभकारी] गतिविधियों और धन प्रेषण के लिए धन का प्रवाह न तो बाधित हो और न ही हतोत्साहित किया जाए।
प्रवासी कामगारों के लिए धन भेजने का सुचारु माध्यम विदेश की कमाई को म्यांमार में परिवार के खर्चों से जोड़ता है। मानवीय संगठनों के लिए भुगतान तक पहुंच से सहायता के लिए धन जुटाने और संचालन खर्च पूरा करने में मदद मिलती है। देरी होने या बैंकिंग सुविधा तक पहुंच खोने का असर उस धन का इंतजार कर रहे लोगों पर पड़ता है।
बैंकों के सामने मुख्य चुनौती यह है कि आपराधिक गतिविधियों की पहचान के लिए लेनदेन की पर्याप्त जांच करते हुए वैध भुगतानों को जारी रखा जाए। एफएटीएफ का निर्देश दोनों जिम्मेदारियों को एक ही फैसले में रखता है। जांच लागू करने वाले देशों से यह भी कहा गया है कि वे सहायता और परिवारों के लिए धन भेजने के माध्यम खुले रखें।
जापान की कोशिश के सामने वित्तीय अपराध की कसौटी
जापान सरकार ने कारोबार को प्रोत्साहन देने के प्रयास में म्यांमार को काली सूची से हटाने की मांग की थी। इसमें वित्तीय लेनदेन की बढ़ी हुई जांच के लिए एफएटीएफ के आह्वान को समाप्त करना भी शामिल था। इस प्रयास से परिचित एक अज्ञात व्यक्ति के अनुसार, कम से कम एक अन्य प्रमुख एशियाई देश ने भी सूची से हटाने का समर्थन किया।
अक्टूबर के फैसले में यह कोशिश सफल नहीं हुई। म्यांमार के कार्ययोजना में प्रगति की खबरों और पेरिस में चर्चा के दौरान मिले समर्थन के बावजूद उसका दर्जा बरकरार रखा गया। ऑनलाइन घोटाले और अवैध वित्तीय प्रवाह निगरानी संस्था की चिंताओं के केंद्र में बने रहे।
जापान का रुख म्यांमार के साथ फिर से जुड़ाव की व्यापक क्षेत्रीय कोशिशों का हिस्सा है। अप्रैल 2026 में प्रत्यक्ष सैन्य शासन की जगह सेना समर्थित नागरिक संस्थाओं वाला प्रशासन आया और तख्तापलट के नेता मिन आंग ह्लाइंग राष्ट्रपति बने।
इसके बाद मिन आंग ह्लाइंग ने प्रमुख साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने और दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) में पूरी तरह फिर से शामिल होने की कोशिश की है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी हाल के महीनों में कई बार म्यांमार के अधिकारियों से सीधे बातचीत की है, जिनमें कभी-कभी जापान का समर्थन भी रहा है।
इन संपर्कों से राजनीतिक और वाणिज्यिक जुड़ाव के अवसर बनते हैं। हालांकि, बैंक एफएटीएफ की कड़ी निगरानी की मांग के दायरे में बने हुए हैं। बेहतर राजनयिक संबंध चाहने वाली सरकार और निवेश पर विचार कर रही कंपनी, दोनों को म्यांमार के दर्जे से जुड़ी वित्तीय शर्तों का सामना करना होगा।
फरवरी 2027 से पहले क्या होगा
अब म्यांमार के सामने दो जुड़े हुए काम हैं: सुधार कार्यक्रम के बाकी कदम पूरे करना और व्यापक ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े अवैध वित्तीय जोखिमों से निपटना। एफएटीएफ ने कहा है कि वह इन जोखिमों पर देश के साथ काम जारी रखेगा।
निगरानी संस्था के बताए काम में वित्तीय खुफिया जानकारी से लेकर आपराधिक मामलों तक सब शामिल है। बेहतर जानकारी जांचकर्ताओं तक पहुंचनी चाहिए, संदिग्ध धन की पड़ताल होनी चाहिए और धनशोधन के मामलों में अभियोजन चलना चाहिए। घोटाले के नेटवर्क के खिलाफ प्रयासों में उन्हें सहारा देने वाली वित्तीय गतिविधियों को भी निशाना बनाना होगा।
फरवरी 2027 अगली घोषित तारीख है, जिस पर कारोबारियों, बैंकों और सहायता संगठनों की नजर रहेगी। आगे की प्रगति से निगरानी संस्था का आकलन प्रभावित हो सकता है; प्रगति न होने पर और कड़े उपायों पर विचार किया जा सकता है। तब तक बढ़ी हुई जांच लागू रहेगी और वैध सहायता तथा धन प्रेषण का प्रवाह खुला रखने का निर्देश भी कायम रहेगा।
मुख्य बातें
- पेरिस में पूर्ण बैठक के बाद एफएटीएफ ने 30 अक्टूबर 2026 को म्यांमार को काली सूची में बनाए रखा।
- म्यांमार ने 15 में से 13 कदम पूरे किए थे; दो अब भी अधूरे हैं।
- व्यापक ऑनलाइन घोटाले और उनसे जुड़े अवैध वित्तीय जोखिम प्रमुख चिंता बने रहे।
- म्यांमार पर बढ़ी हुई जांच लागू है; ईरान और उत्तर कोरिया को अधिक कड़े काउंटरमेजर्स का सामना करना पड़ रहा है।
- आगे प्रगति नहीं होने पर एफएटीएफ फरवरी 2027 तक म्यांमार के लिए काउंटरमेजर्स पर विचार करेगा।
- निगरानी संस्था ने कहा कि मानवीय सहायता, वैध गैर-लाभकारी गतिविधियों और धन प्रेषण तक पहुंच बनी रहनी चाहिए।
- म्यांमार को सूची से हटाने की जापान की कोशिश से अक्टूबर का फैसला नहीं बदला।






