240 मंजूरियों से उपचार के वित्तपोषण की कमी उजागर
मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनवरी से सितंबर 2026 के बीच GLP-1 उपचार के 240 आवेदनों को मंजूरी दी, जिन पर RM2.56 मिलियन खर्च हुए। हालांकि, बजट 2026 में इन दवाओं के लिए कोई अलग आवंटन नहीं था। स्वास्थ्य मंत्री दातुक सेरी डॉ. जुल्केफ्ली अहमद ने कहा कि मंत्रालय मोटापे और मधुमेह से पीड़ित मरीजों की पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष वित्तपोषण मांगता रहेगा।
विषय-सूची
- 240 मंजूरियों से उपचार के वित्तपोषण की कमी उजागर
- मरीजों को फिलहाल कैसे मिलता है उपचार
- दवा का चुनाव मरीज की स्थिति पर निर्भर
- हृदय और गुर्दे की बीमारी भी दवा का चुनाव तय करती है
- मोटापे की देखभाल दवा के पर्चे तक सीमित नहीं
- 33 क्लिनिक पहले से देखभाल का नेटवर्क देते हैं
- संसद ने पहुंच बढ़ाने की मांग उठाई
- मुख्य बिंदु
इन मंजूरियों का खर्च मंत्रालय के मौजूदा आवंटन से उबात केलुलुसान खास (UKK), यानी विशेष मंजूरी वाली दवा व्यवस्था के तहत उठाया गया। इस तरह सरकार की ओर से अलग बजट आवंटन बनाए बिना भी मरीजों को विशेष मंजूरी के रास्ते उपचार मिल सका है।
जुल्केफ्ली ने मलेशिया की संसद के निचले सदन दीवान रक्यात में मौखिक प्रश्न सत्र के दौरान यह स्थिति बताई। वह पाकातन हरापन के बुकित गेलुगोर के प्रतिनिधि रामकरपाल सिंह के सवाल का जवाब दे रहे थे। सिंह ने उपचार पाने वाले मरीजों, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए वित्तपोषण और पहल की प्रभावशीलता के बारे में पूछा था।
चर्चा में ओज़ेम्पिक और मौनजारो जैसी दवाएं शामिल थीं, जिनके मधुमेह और वजन प्रबंधन में इस्तेमाल को लेकर ध्यान दिया गया है। मरीजों के लिए तत्काल सवाल यह है कि मंत्रालय अतिरिक्त संसाधन जुटाने की कोशिश करते हुए उपलब्ध वित्तपोषण के भीतर चिकित्सकीय जरूरत कैसे पूरी कर सकता है।
मरीजों को फिलहाल कैसे मिलता है उपचार
जुल्केफ्ली के मुताबिक, बजट 2026 में इन दवाओं से उपचार के लिए कोई विशेष आवंटन नहीं था। मंत्रालय ने अतिरिक्त वित्तपोषण मांगा है, लेकिन उसे अभी तक अलग आवंटन नहीं मिला है।
जुल्केफ्ली ने संसद को मंजूरियों की कुल संख्या और उनकी लागत बताई:
उन्होंने कहा, "रिकॉर्ड के लिए, जनवरी से सितंबर 2026 तक उपचार के 240 आवेदनों को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लागत RM2.56 मिलियन रही।"
RM2.56 मिलियन को 240 से भाग देने पर प्रति मंजूर आवेदन औसतन करीब RM10,667 खर्च आता है। मंत्री ने यह नहीं बताया कि हर मंजूरी कितने समय के उपचार को कवर करती है, इसलिए मरीज इस औसत को सालाना उपचार की कीमत नहीं मान सकते।
वित्तपोषण का क्रम सीधा है:
- बजट 2026: उपचार के लिए कोई अलग आवंटन नहीं किया गया।
- जनवरी से सितंबर 2026: मंत्रालय ने अपने मौजूदा आवंटन से RM2.56 मिलियन खर्च कर 240 आवेदनों को मंजूरी दी।
- संसद में जवाब के समय: मंत्रालय पहुंच बढ़ाने के लिए अलग वित्तपोषण मांगता रहा।
सेवाओं की योजना बनाने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है। अलग आवंटन का मतलब इस उपचार के लिए विशेष रूप से तय धन होगा, जबकि मौजूदा व्यवस्था में मंजूर आवेदनों का खर्च मंत्रालय के पहले से उपलब्ध संसाधनों से दिया जाता है।
दवा का चुनाव मरीज की स्थिति पर निर्भर
जुल्केफ्ली ने कहा कि मधुमेह का उपचार हर मरीज के स्वास्थ्य, मोटापे की स्थिति और अन्य बीमारियों के अनुसार होना चाहिए। मेटफॉर्मिन, रक्त शर्करा कम करने वाली एक मौखिक दवा, मधुमेह से पीड़ित अधिकांश मरीजों के लिए आम तौर पर पहला उपचार बनी हुई है।
मोटापा या वजन से जुड़ी जटिलताएं होने पर GLP-1 दवाओं पर विचार किया जा सकता है। GLP-1 का पूरा नाम ग्लूकागॉन-जैसा पेप्टाइड-1 है। यह रक्त शर्करा नियंत्रण और भूख से जुड़ा एक हार्मोन है। इस मार्ग पर काम करने वाली दवाएं शरीर को रक्त शर्करा नियंत्रित करने और भोजन का सेवन घटाने में मदद कर सकती हैं।
ओज़ेम्पिक में सेमाग्लूटाइड होता है, जो GLP-1 रिसेप्टर पर काम करता है। मौनजारो में टिरज़ेपाटाइड होता है, जो GLP-1 के साथ GIP नामक एक अन्य हार्मोन मार्ग पर भी काम करता है। उपचार का विस्तार करने की चर्चा में दोनों दवाओं का जिक्र हुआ, हालांकि इनके काम करने के तरीके एक जैसे नहीं हैं।
मंत्री का दृष्टिकोण दवा के ब्रांड के बजाय पहले चिकित्सकीय निर्णय को प्राथमिकता देता है। जिस मरीज की मुख्य जरूरत रक्त शर्करा नियंत्रण है, उसका उपचार मेटफॉर्मिन से शुरू हो सकता है, जबकि वजन से जुड़ी गंभीर जटिलताएं होने पर किसी अन्य उपचार पर विचार किया जा सकता है। फैसला व्यक्ति की स्थिति के आधार पर होता है, न कि इस आधार पर कि एक ही दवा सभी के लिए शुरुआती उपचार बन जाए।
हृदय और गुर्दे की बीमारी भी दवा का चुनाव तय करती है
मोटापा न होने पर भी हृदय रोग या क्रोनिक किडनी रोग जैसी अन्य स्थितियों से पीड़ित मरीजों के लिए SGLT2 इन्हिबिटर पर विचार किया जा सकता है। मंत्रालय के अनुसार, इन दवाओं की कीमत आम तौर पर GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट से कम होती है।
SGLT2 इन्हिबिटर गुर्दों के जरिए काम करते हैं और शरीर को पेशाब के माध्यम से ग्लूकोज़ बाहर निकालने में मदद करते हैं। उपचार में इनकी भूमिका में हृदय और गुर्दों की सुरक्षा भी शामिल हो सकती है, जो दवा और मरीज के निदान पर निर्भर करती है। क्रोनिक किडनी रोग का अर्थ है लंबे समय तक रहने वाली ऐसी क्षति, जिससे गुर्दों की कार्यक्षमता घट जाती है।
मंत्रालय के लिए इसका मतलब है कि उपचार के एक से अधिक रास्ते हैं। मधुमेह और मोटापे से पीड़ित व्यक्ति की जरूरतें मधुमेह और गुर्दे की बीमारी वाले व्यक्ति से अलग हो सकती हैं। वित्तपोषण की चर्चा में लागत भी शामिल है, लेकिन जुल्केफ्ली ने कहा कि उपचार के विकल्पों का आकलन हर मरीज की जरूरतों और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार किया जाएगा।
यह दृष्टिकोण यह भी बताता है कि GLP-1 उपचार की पहुंच बढ़ाना मधुमेह सेवाओं के व्यापक काम का एक हिस्सा है। मंत्रालय को रक्त शर्करा की समस्या, अधिक वजन, हृदय रोग और गुर्दे की बीमारी के अलग-अलग मेल वाली स्थितियों में मरीजों को उपयुक्त उपचार देना होगा।
मोटापे की देखभाल दवा के पर्चे तक सीमित नहीं
जुल्केफ्ली ने मोटापे को ऐसी दीर्घकालिक बीमारी बताया जिसके लिए लगातार उपचार और प्रबंधन की जरूरत होती है। उन्होंने इसे टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय-वाहिका रोग और कुछ कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा। इससे यह मुद्दा केवल दिखावट का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का बन जाता है।
मंत्री ने कहा कि 30 से अधिक बॉडी मास इंडेक्स वाले लोगों को मंत्रालय की क्लिनिकल प्रैक्टिस गाइडलाइंस के तहत मोटापा प्रबंधन में ध्यान दिया जाना चाहिए। बॉडी मास इंडेक्स, यानी BMI, किसी व्यक्ति के वजन और लंबाई के आधार पर निकाला जाता है और आकलन के दौरान जांच के एक मानक के रूप में इस्तेमाल होता है।
जुल्केफ्ली ने बताया कि दवाएं देखभाल का केवल एक हिस्सा हैं:
उन्होंने कहा, "मोटापे का उपचार केवल दवाओं पर निर्भर नहीं करता। इसके लिए व्यापक और व्यक्ति की जरूरतों के अनुरूप दृष्टिकोण जरूरी है।"
उनके बताए उपचार विकल्पों में जीवनशैली में बदलाव, स्वस्थ खानपान, शारीरिक गतिविधि, भोजन के विकल्प के तौर पर विशेष पोषण उत्पाद और चिकित्सकीय जरूरत होने पर बेरिएट्रिक सर्जरी शामिल हैं। भोजन के विकल्प वाली चिकित्सा में कुछ भोजन की जगह पहले से तय पोषण उत्पाद दिए जाते हैं। बेरिएट्रिक सर्जरी पाचन तंत्र में बदलाव कर उपयुक्त मरीजों को वजन और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रबंधन में मदद करती है।
मरीजों के लिए इसका मतलब है कि मोटापे की उपचार योजना में एक साथ कई तरह की सहायता शामिल हो सकती है। दवा के पर्चे के साथ पोषण संबंधी देखभाल, गतिविधि में बदलाव और लगातार आकलन हो सकते हैं। जिनकी चिकित्सकीय स्थिति इसकी मांग करती है, उनके लिए सर्जरी पर भी विचार किया जा सकता है।
33 क्लिनिक पहले से देखभाल का नेटवर्क देते हैं
मंत्रालय पहले से ही 33 स्वास्थ्य क्लिनिकों में मोटापे के बहुविषयक एकीकृत प्रबंधन कार्यक्रम चलाता है, जिसे MIMO के नाम से जाना जाता है। मंत्रालय के 13 अस्पतालों के विशेषज्ञ इस कार्यक्रम को सहयोग देते हैं।
MIMO मोटापे के प्रबंधन में स्वास्थ्य के अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़ता है, ताकि देखभाल केवल शरीर के वजन तक सीमित न रहे। यह नेटवर्क मरीजों के आकलन, उपचार के समन्वय और मधुमेह या अन्य बीमारियों से भी जूझ रहे लोगों को लगातार सहायता देने की व्यवस्था करता है।
क्लिनिकों और अस्पतालों के आंकड़े इस सेवा के दो अलग हिस्से बताते हैं: 33 क्लिनिक कार्यक्रम चलाते हैं और 13 अस्पताल विशेषज्ञ सहायता देते हैं। दोनों को मिलाकर देखें तो वित्तपोषण की मांग मोटापे की मौजूदा देखभाल व्यवस्था के साथ जुड़ी है।
मधुमेह और मोटापे, दोनों के साथ जी रहे किसी व्यक्ति के लिए समन्वित देखभाल का मतलब हो सकता है कि एक ही उपचार योजना में रक्त शर्करा, वजन और संबंधित स्थितियों पर विचार किया जाए। जुल्केफ्ली ने दवाओं तक पहुंच के साथ इस निरंतर प्रबंधन को मंत्रालय की प्रतिक्रिया का अहम हिस्सा बताया।
संसद ने पहुंच बढ़ाने की मांग उठाई
रामकरपाल ने पूछा कि क्या सरकार GLP-1 दवाओं को मोटापे का मानक उपचार बनाने का इरादा रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि ये दवाएं बीमा के दायरे में नहीं आतीं, जिससे सार्वजनिक वित्तपोषण से बाहर मरीजों के सामने आने वाली आर्थिक बाधाओं पर ध्यान गया।
बुकित गेलुगोर के सांसद ने कहा कि 54.4 प्रतिशत मलेशियाई मोटापे से प्रभावित हैं और पांच से 19 वर्ष की उम्र के करीब हर तीन में से एक बच्चा इससे प्रभावित है। संसद में दिए गए विवरण में इन आंकड़ों के पीछे का सांख्यिकीय डेटासेट और परिभाषाएं नहीं बताई गईं।
उनके सवाल पहुंच और नतीजों, दोनों से जुड़े थे: कितने लोगों को उपचार मिला, स्वास्थ्य सुविधाओं तक कितना वित्तपोषण पहुंचा और पहल कितनी प्रभावी रही। जुल्केफ्ली के जवाब में मंजूरियों की संख्या और खर्च बताया गया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि मंत्रालय मरीजों के अनुरूप उपचार को प्राथमिकता देता है।
अलग आवंटन या GLP-1 दवाओं को मोटापे का मानक उपचार बनाने के फैसले के लिए कोई समयसीमा घोषित नहीं की गई। फिलहाल मंत्रालय के मौजूदा धन से विशेष मंजूरी के जरिए उपचार उपलब्ध है और अतिरिक्त वित्तपोषण की मांग जारी है।
मुख्य बिंदु
- स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनवरी से सितंबर 2026 के बीच GLP-1 उपचार के 240 आवेदनों को मंजूरी दी। इनकी कुल लागत RM2.56 मिलियन रही।
- बजट 2026 में कोई अलग आवंटन नहीं था; मंजूर उपचार का खर्च UKK व्यवस्था के तहत मौजूदा संसाधनों से दिया गया।
- मंत्रालय पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष वित्तपोषण मांगता रहा है।
- मधुमेह से पीड़ित अधिकांश मरीजों के लिए मेटफॉर्मिन आम तौर पर पहला उपचार है; अन्य दवाएं चिकित्सकीय जरूरतों के अनुसार चुनी जाती हैं।
- मोटापे की देखभाल में पोषण, शारीरिक गतिविधि, दवाएं और उपयुक्त होने पर सर्जरी शामिल हैं।
- MIMO कार्यक्रम 33 स्वास्थ्य क्लिनिकों में चलता है और मंत्रालय के 13 अस्पतालों के विशेषज्ञ इसे सहयोग देते हैं।






