एक सदी का जीवन, सेवा से जुड़ा करियर
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण और स्वास्थ्य शिक्षा को ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने वाली अग्रणी मलेशियाई डॉक्टर टुन डॉ. सिति हसमा मोहम्मद अली का 28 सितंबर, 2026 को सुबह 9.20 बजे कुआलालंपुर के नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट (IJN) में निधन हो गया। वह 100 वर्ष की थीं। उनके बेटे, तान श्री मुखरिज़ महाथिर ने उनके निधन की पुष्टि की।
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उसी दिन शाम 6.20 बजे राजकीय अंतिम संस्कार के बाद उन्हें पुत्रजया के प्रीसिंक्ट 20 स्थित पुसारा नेगारा में दफनाया गया। उनके पति और पूर्व प्रधानमंत्री टुन डॉ. महाथिर मोहम्मद, उनके बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। इस दंपति ने 5 अगस्त, 1956 को शादी की थी और उनके निधन से कुछ समय पहले साथ के 70 वर्ष पूरे किए थे।
1981 से 2003 और फिर 2018 से 2020 तक महाथिर के कार्यकाल के दौरान उन्हें देशभर में प्रधानमंत्री की पत्नी के रूप में जाना गया, लेकिन महाथिर के पद संभालने से बहुत पहले ही सिति हसमा ने जनसेवा में अपनी अलग पहचान बना ली थी। 1965 में वह मातृ एवं बाल स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा अधिकारी नियुक्त होने वाली पहली महिला बनीं और 1974 में केदाह राज्य की मातृ एवं बाल स्वास्थ्य अधिकारी का पद संभालने वाली पहली महिला बनीं।
उनका करियर गांवों के क्लीनिकों और दाइयों के प्रशिक्षण से लेकर नशीले पदार्थों के दुरुपयोग, ग्रामीण महिलाओं और महिलाओं के अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों तक फैला था। उन्होंने 1997 से 2012 तक मल्टीमीडिया यूनिवर्सिटी की कुलाधिपति के रूप में भी सेवा दी और मलेशियाई बैडमिंटन से उनका गहरा जुड़ाव रहा।
उन्होंने 12 जुलाई को अपना 100वां जन्मदिन मनाया था। अगस्त 2026 में ASEAN Records ने उन्हें किसी पूर्व प्रधानमंत्री की जीवित सबसे उम्रदराज जीवनसंगिनी के रूप में मान्यता दी। उनके परिवार में महाथिर, उनकी सात संतानें—तीन बेटियां और चार बेटे—18 पोते-पोतियां और चार परपोते-परपोतियां हैं।
परिवार ने उनके आखिरी दिनों को याद किया
मुखरिज़ ने कहा कि परिवार उनके निधन से स्तब्ध था, क्योंकि एक दिन पहले IJN में उनसे मिलने आए रिश्तेदारों के साथ वह खुशमिजाज थीं। उन्होंने कहा कि हाल के पारिवारिक मिलन से परिवार को सुकून मिला और उन्हें बार-बार साथ समय बिताने का मौका मिला।
अंतिम संस्कार के बाद मुखरिज़ ने उस विचार को खारिज किया कि कोई एक आखिरी पल उनकी मां के साथ उनके रिश्ते को बयां कर सकता है।
"कोई एक आखिरी याद नहीं है। लाखों यादें हैं," उन्होंने कहा।
उन्होंने निधन से पहले के महीनों, हफ्तों और दिनों में परिवार को उनके साथ बिताए समय के लिए आभार भी जताया।
"मैं बहुत खुश हूं कि हमें उनके साथ इतना समय बिताने का मौका मिला। पिछले महीनों, हफ्तों और दिनों में हमारे कई पारिवारिक मिलन हुए। इसलिए हमारे पास बहुत सारी यादें हैं," उन्होंने कहा।
मुखरिज़ ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था में मदद के लिए सुरक्षा कर्मियों, सेना, रॉयल मलेशिया पुलिस और सरकारी एजेंसियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि परिवार की योजना इशा की नमाज़ के बाद घर पर ताहलील की दुआ करने और संभवतः अगले दो दिनों तक भी इसे जारी रखने की थी। ताहलील के आयोजनों में दिवंगत की याद में दुआएं और धार्मिक पाठ किए जाते हैं।
उनके निधन के विवरण में मृत्यु का कोई कारण नहीं बताया गया। उनके बेटे के अनुसार, एक दिन पहले की मुलाकात परिवार को उनके आखिरी घंटों के अनुभव के बारे में बताती है, लेकिन इससे चिकित्सकीय परिस्थितियों का पता नहीं चलता।
क्लांग से सिंगापुर के मेडिकल कॉलेज तक
12 जुलाई, 1926 को सेलांगोर के क्लांग स्थित कम्पुंग जावा में जन्मीं सिति हसमा, मोहम्मद अली ताइब और सिति खदीजा अहमद की 10 संतानों में छठी थीं। जब वह तीन साल की थीं, तब उनका परिवार कुआलालंपुर चला गया। बाद में उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने तीन बेटियों और सात बेटों, सभी को शिक्षा के समान अवसर दिए।
कुआलालंपुर में उन्होंने मेथोडिस्ट गर्ल्स स्कूल, सेंट मेरीज़ स्कूल और पुडु इंग्लिश गर्ल्स स्कूल में पढ़ाई की। पढ़ने और लिखने के शौक के कारण शुरुआत में वह पत्रकार बनना चाहती थीं। जापानी कब्जे के दौरान उनकी मां की बीमारी ने उनका रुझान चिकित्सा की ओर मोड़ने में मदद की।
1947 में उन्होंने सरकारी छात्रवृत्ति पर सिंगापुर के किंग एडवर्ड सप्तम कॉलेज ऑफ मेडिसिन में दाखिला लिया। अपने बैच में वह अकेली मलय महिला थीं और जून 1955 में स्नातक हुईं। मेडिकल कॉलेज में ही उनकी मुलाकात महाथिर से हुई, जो केदाह के उनके सहपाठी थे।
उनके चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश के अलग-अलग पड़ावों का उल्लेख मिलता है। एक विवरण उन्हें कॉलेज में चिकित्सा की पढ़ाई का प्रस्ताव पाने वाली पहली मलय महिला बताता है, जबकि दूसरे में उनका अपना बयान दर्ज है कि वह देश की डॉक्टर बनने वाली तीसरी मलय महिला थीं। ये दावे अलग-अलग चरणों—दाखिले और डॉक्टर की योग्यता हासिल करने—से जुड़े हैं, और इनसे यह स्थापित नहीं होता कि वह मलेशिया की पहली मलय महिला डॉक्टर थीं।
स्नातक होने के बाद उन्होंने कुआलालंपुर अस्पताल में पर्यवेक्षण के तहत प्रशिक्षण लिया। 1956 में शादी के बाद वह अलोर सेतार चली गईं और शहर के जनरल अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम किया। केदाह ही उस जनस्वास्थ्य कार्य का केंद्र बना, जिसने उनके पेशेवर करियर को परिभाषित किया।
ग्रामीण केदाह तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना
केदाह में सिति हसमा का काम उन समस्याओं से जुड़ा था जिनका समाधान केवल अस्पताल में इलाज से नहीं हो सकता था। ग्रामीण परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सेवाओं तक पहुंच में कमी का सामना करना पड़ता था, जबकि गरीबी और कुछ पारंपरिक प्रथाएं गर्भावस्था, प्रसव और शिशु देखभाल को जटिल बनाती थीं।
1962 में वह उत्तरी केदाह की कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक बनीं। बाद में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने जित्रा स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण स्कूल की प्रधानाचार्य के रूप में सेवा दी।
उनकी टीमें इलाज, टीकाकरण और स्वास्थ्य शिक्षा देने के लिए गांवों तक जाती थीं। उनके काम में पोषण, संक्रामक रोगों की रोकथाम, मलेरिया उन्मूलन और अधिक चिकित्सकीय जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की देखभाल शामिल थी। बच्चों में तपेदिक, पोलियो, काली खांसी, डिप्थीरिया और टिटनेस जैसी बीमारियों को लेकर चिंता थी।
गांवों की पारंपरिक दाइयों को प्रशिक्षण देना इस प्रयास का एक और व्यावहारिक हिस्सा था। मौजूदा प्रसव सहायिकाओं को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से अलग मानने के बजाय, स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें सुरक्षित प्रसव के तरीके सिखाए और जीवाणुरहित UNICEF प्रसव किट दीं। उद्देश्य उन जगहों पर देखभाल बेहतर करना था जहां महिलाएं पहले से प्रसव कर रही थीं।
लोगों का भरोसा जीतने में समय लगा। सेलांगोर से आईं और स्थानीय बोली न बोल पाने वाली डॉक्टर के तौर पर सिति हसमा को शुरुआत में दुभाषिए की जरूरत पड़ी और कुछ गांवों में उन्हें संदेह का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने बताया कि केदाह के समुदायों ने उन्हें स्वीकार किया, यह उनकी सबसे गर्व की उपलब्धियों में से एक थी।
उनकी जनस्वास्थ्य विरासत के आंकड़े
बताया जाता है कि उनके कार्यकाल में केदाह में शिशु मृत्यु दर प्रति 1,000 जन्म पर 75 से घटकर सात रह गई। एक श्रद्धांजलि में इस बदलाव का श्रेय परदाना लीडरशिप फाउंडेशन के आंकड़ों को दिया गया। इसका अर्थ है प्रति 1,000 जन्म पर 68 कम मौतें, यानी करीब 91 प्रतिशत की कमी।
यह तुलना उस अवधि में हुए सुधार के पैमाने का अंदाजा देती है, लेकिन शुरुआत और अंत के सटीक वर्षों का उल्लेख नहीं है। इसे उनके व्यक्तिगत योगदान का नियंत्रित माप नहीं माना जाना चाहिए। शिशु जीवित रहने की दर में बदलाव के संदर्भ में डॉक्टरों, नर्सों, दाइयों, टीकाकरण कार्यक्रमों और जीवन-स्थितियों में व्यापक सुधार, सभी शामिल हैं।
सिति हसमा खुद जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों को समुदायों की स्वीकृति को अहम मानती थीं। 1997 में कुआलालंपुर में R.I. डिस्ट्रिक्ट 3300 के उद्घाटन समारोह में भाषण देते हुए, पूर्व जनस्वास्थ्य डॉक्टर ने केदाह में बिताए वर्षों को याद किया:
"जब मैंने केदाह छोड़ा, तो मुझे गहरी संतुष्टि थी कि लोगों ने सरकार के स्वास्थ्य कार्यक्रमों को स्वीकार किया और उनसे लाभ उठाया," उन्होंने कहा।
उनकी पेशेवर रुचियों में पारिवारिक चिकित्सा और गर्भावस्था व प्रसव को प्रभावित करने वाले सामाजिक तथा आर्थिक कारकों पर लेखन भी शामिल था। हैजा के प्रकोप से निपटने में उनकी भूमिका के लिए केदाह ने 1964 में उन्हें उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया।
उन्होंने 1979 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति ली, फिर 1981 तक यूनिवर्सिटी मलाया के दंत चिकित्सा संकाय में अंशकालिक रूप से सामाजिक चिकित्सा पढ़ाई। इस तरह उनका राष्ट्रीय सार्वजनिक जीवन में प्रवेश, चिकित्सकीय, प्रशासनिक और शिक्षण क्षेत्र के लंबे करियर के बाद हुआ।
मलेशिया से आगे स्वास्थ्य की पैरोकारी
मंत्रियों और उपमंत्रियों की पत्नियों के कल्याण संगठन BAKTI की अध्यक्ष के रूप में सिति हसमा ने मलेशियाई युवाओं में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खतरों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा दिया। 1985 में अमेरिका की प्रथम महिला नैन्सी रीगन ने उन्हें वॉशिंगटन में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर प्रथम महिलाओं के सम्मेलन में आमंत्रित किया। 1987 में वियना में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने मलेशिया का प्रतिनिधित्व किया।
उनकी रुचियों में मानसिक स्वास्थ्य भी शामिल था। अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला रोज़लिन कार्टर ने उन्हें वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ मेंटल हेल्थ की राष्ट्रीय समिति में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
उन्होंने पैन पैसिफिक एंड साउथईस्ट एशिया विमेन्स एसोसिएशन की मलेशियाई शाखा की संरक्षक के रूप में भी सेवा दी और 1984 में टोक्यो, 1991 में बैंकॉक तथा 1994 में टोंगा में हुए सम्मेलनों में मुख्य भाषण दिए। 1992 में जिनेवा में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक उन्नति के लिए प्रथम महिला शिखर सम्मेलन में उन्हें एशिया-प्रशांत के छह प्रमुख समूह आरंभकर्ताओं में से एक चुना गया।
सितंबर 1995 में उन्होंने बीजिंग में महिलाओं पर संयुक्त राष्ट्र के चौथे विश्व सम्मेलन में मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उनके भाषण का विषय था समानता, विकास और शांति: देखभाल करने वाली दुनिया। इसमें स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में उनके घरेलू काम को महिलाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंडे से जोड़ा गया।
2001 में उन्होंने इराक के 15 सदस्यीय मानवीय सहायता प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस समूह में डॉक्टर, शिक्षक, लेखक और शिक्षाविद शामिल थे। यह दल वहां की आबादी, खासकर संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रह रहे बच्चों की स्थितियों का जायजा लेने गया था।
शिक्षा, खेल और सार्वजनिक सम्मान
सिति हसमा ने 1997 से 2012 तक 15 वर्षों के लिए मल्टीमीडिया यूनिवर्सिटी की कुलाधिपति के रूप में सेवा दी। उनकी सार्वजनिक भूमिकाओं में मलेशियाई गर्ल गाइड्स एसोसिएशन का नेतृत्व और साक्षरता, परिवार नियोजन तथा सामुदायिक कल्याण की पैरोकारी भी शामिल थी।
खेल उनके लिए व्यक्तिगत रुचि भी था और लंबे समय तक निभाई गई सार्वजनिक प्रतिबद्धता भी। उन्होंने 75 वर्ष की उम्र तक प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन खेला और दो दशक से अधिक समय तक बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ मलेशिया की संरक्षक रहीं। इसमें 1992 में मलेशिया की थॉमस कप जीत का समय भी शामिल था। राष्ट्रीय खिलाड़ी उन्हें मां समान मानते थे।
वह मलेशियाई व्हीलचेयर टेनिस एसोसिएशन की पूर्व संरक्षक भी थीं। बाद के जीवन में भी उनकी रुचियां जारी रहीं: उन्होंने सत्तर के दशक में फ्रेंच सीखी, अस्सी के दशक में फिर से वायलिन बजाना शुरू किया और 2015 में चीनी तार वाला वाद्य एरहू सीखना शुरू किया।
31 अक्टूबर, 2003 को उन्हें सेरी सेतिया महकोटा मलेशिया (SSM) से सम्मानित किया गया, जो टुन की उपाधि वाला एक संघीय सम्मान है। यह पुरस्कार पाने वाली वह मलेशियाई प्रधानमंत्री की पहली पत्नी थीं। बाद के सम्मानों में 2019 का एशिया HRD लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और 2020 का नेशनल एंटी ड्रग आइकन स्पेशल अवॉर्ड शामिल हैं।
राजनीति से उनका रिश्ता केवल उससे दूरी बनाए रखने का मामला नहीं था। उन्होंने राजनीति में भागीदारी से बचने के लिए सिविल सेवा के सिद्धांत का पालन करने की बात कही थी, लेकिन जीवनी संबंधी विवरणों में वनीता UMNO की सदस्यता का भी उल्लेख है। उन्होंने 19 मई, 2008 को महिला शाखा छोड़ दी और अप्रैल 2009 में फिर से जुड़ गईं।
आठ दशकों के पड़ाव
उनका जीवन मलाया की स्वतंत्रता से पहले के चिकित्सा प्रशिक्षण को 21वीं सदी तक जारी जनसेवा से जोड़ता है। प्रमुख तारीखें दिखाती हैं कि प्रधानमंत्री की पत्नी के रूप में बिताए वर्षों से पहले ही उनके पेशेवर योगदान का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका था।
- 1947: सरकारी छात्रवृत्ति पर सिंगापुर के किंग एडवर्ड सप्तम कॉलेज ऑफ मेडिसिन में दाखिला लिया।
- जून 1955: चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की और कुआलालंपुर में अस्पताल प्रशिक्षण शुरू किया।
- 5 अगस्त, 1956: महाथिर मोहम्मद से शादी की और बाद में अलोर सेतार में काम किया।
- 1965 और 1974: मातृ एवं बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी नियुक्तियां हासिल कीं, जिनमें केदाह का राज्य पद भी शामिल था।
- 1979 से 1981: सरकारी सेवा छोड़ी और यूनिवर्सिटी मलाया में सामाजिक चिकित्सा पढ़ाई।
- 1981 से 2003 और 2018 से 2020: महाथिर के दोनों कार्यकालों के दौरान मलेशिया के प्रधानमंत्री की जीवनसंगिनी रहीं।
- सितंबर 1995: बीजिंग में संयुक्त राष्ट्र महिला सम्मेलन में मलेशिया के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
- जुलाई से सितंबर 2026: 100 वर्ष की हुईं, ASEAN Records से मान्यता मिली और 28 सितंबर को निधन हुआ।
उनके दफनाए जाने के बाद महाथिर ने PAS अध्यक्ष तान श्री अब्दुल हादी अवांग के साथ उनकी कब्र पर जाकर श्रद्धांजलि दी। महाथिर के फेसबुक पेज पर साझा तस्वीरों में वह फूल चढ़ाते और दुआ करते दिखे। उनके बेटे, दातुक सेरी मुखरिज़ महाथिर ने कब्र के पास अब्दुल हादी का अभिवादन किया। इस मुलाकात की तारीख का उल्लेख नहीं किया गया।
मुख्य बातें
- सिति हसमा का 28 सितंबर, 2026 को सुबह 9.20 बजे कुआलालंपुर के IJN में 100 वर्ष की उम्र में निधन हुआ।
- उनका राजकीय अंतिम संस्कार हुआ और उसी दिन शाम 6.20 बजे पुत्रजया के पुसारा नेगारा में उन्हें दफनाया गया।
- उनका चिकित्सा करियर मातृ एवं बाल स्वास्थ्य, टीकाकरण, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और दाइयों के प्रशिक्षण पर केंद्रित था।
- महाथिर के प्रधानमंत्री बनने से पहले, 1965 और 1974 में उन्होंने जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी पद संभाले।
- उनके अंतरराष्ट्रीय कार्य में नशीले पदार्थों का दुरुपयोग, ग्रामीण महिलाओं का कल्याण और महिलाओं के अधिकार शामिल थे।
- उनके परिवार में महाथिर, सात बच्चे, 18 पोते-पोतियां और चार परपोते-परपोतियां हैं।






