प्रशिक्षण को प्राथमिकता, 382 डॉक्टरों की कमी पर ध्यान
मलेशिया सबाह और सरावाक में सेवा दे रहे चिकित्सा अधिकारियों के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षण की 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की योजना बना रहा है। दोनों राज्यों में स्थायी नियुक्ति की पेशकश किए गए 382 डॉक्टरों ने ड्यूटी पर रिपोर्ट नहीं किया था। स्वास्थ्य मंत्री ज़ुल्केफ्ली अहमद ने 8 अक्टूबर को दीवान राक्यात में इस उपाय की घोषणा की और स्वास्थ्य मंत्रालय को इसका अध्ययन कर इसे लागू करने का निर्देश दिया।
विषय-सूची
- प्रशिक्षण को प्राथमिकता, 382 डॉक्टरों की कमी पर ध्यान
- तैनाती के आंकड़े वास्तव में क्या बताते हैं
- स्थायी नियुक्तियां क्यों ठुकराई जा रही हैं
- सांसद कोटे से आगे प्राथमिकता की मांग कर रहे हैं
- स्थानांतरण सहायता से वेतन पर बहस खत्म नहीं होती
- अस्पतालों के ब्यौरे बताते हैं कि स्टाफ का दबाव असमान है
- डॉक्टर शुद्ध स्टाफ संख्या का आकलन चाहते हैं
- तैनाती की स्पष्ट जानकारी और स्थानीय डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की मांग
- तैनाती की समय-सीमा और अनसुलझे फैसले
- मुख्य बिंदु
राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक, सरावाक में नियुक्ति की पेशकश पाने वाले 527 अधिकारियों में से 337 ने ड्यूटी पर रिपोर्ट किया। सबाह में 528 में से 336 अधिकारियों ने ऐसा किया। कुल मिलाकर 1,055 पेशकशों में से 673 अधिकारी पहुंचे, यानी इच्छित नियुक्त लोगों में से हर तीन में एक से अधिक पद खाली रहे। ये आंकड़े 7 अक्टूबर तक के बताए गए।
प्रस्तावित प्रशिक्षण आवंटन को 1,650 हदियाह लतीहान पर्सेकुतुआन (HLP) सीटों में से लगभग 500 बताया गया। HLP आगे की पेशेवर पढ़ाई से जुड़ी संघीय प्रशिक्षण छात्रवृत्ति योजना है। 1,650 का ठीक 30 प्रतिशत 495 होता है, इसलिए लगभग 500 सीटों का उल्लेख घोषित हिस्से के अनुरूप है।
यह नीति उन डॉक्टरों की बार-बार जताई गई चिंता का जवाब देती है जो पूर्वी मलेशिया में तैनाती पर विचार कर रहे हैं: उन्हें आशंका है कि ग्रामीण या दूरदराज की जगह पर तैनाती स्वीकार करने से विशेषज्ञ बनने की उनकी संभावनाएं सीमित हो सकती हैं। मंत्रालय विशेषज्ञ प्रशिक्षण और अध्ययन अवकाश के आवेदनों पर विचार करते समय सबाह और सरावाक में पहले सेवा दे चुके अधिकारियों को अतिरिक्त मेरिट देने की भी योजना बना रहा है।
हालांकि, घोषणा में यह नहीं बताया गया कि आरक्षित सीटें कब उपलब्ध होंगी, पात्रता कैसे तय होगी या उन्हें विभिन्न विशेषज्ञताओं और दोनों राज्यों के बीच कैसे बांटा जाएगा। चिकित्सा प्रतिनिधि और सांसद बेहतर वेतन, तैनाती की स्पष्ट शर्तों और ऐसे स्टाफ आंकड़ों की मांग भी कर रहे हैं जिनसे पता चले कि अस्पतालों में वास्तव में डॉक्टरों की संख्या बढ़ी है या नहीं।
तैनाती के आंकड़े वास्तव में क्या बताते हैं
राज्यवार विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, रिपोर्ट करने की दर 63.8 प्रतिशत और रिपोर्ट न करने की दर 36.2 प्रतिशत है। पूर्ण प्रतिशत में ये आंकड़े क्रमशः 64 और 36 प्रतिशत होते हैं। सरावाक में 190 अधिकारियों ने रिपोर्ट नहीं किया, जबकि सबाह में यह संख्या 192 रही।
फिर भी, खबरों में दिए गए कुल आंकड़े अलग-अलग हैं। संसद में दिए गए जवाब की कई खबरों में रिपोर्ट करने की दर 63 प्रतिशत बताई गई है। एक अन्य खबर में 1,055 पेशकशों में से 669 अधिकारियों के पहुंचने की बात है, हालांकि उसमें दिए राज्यवार आंकड़ों का जोड़ 673 है। एक अलग खबर में 1,056 पेशकशों में से 673 अधिकारियों के पहुंचने का उल्लेख है। राज्यवार आंकड़ों में एकरूपता 1,055 में से 673 के कुल का समर्थन करती है, लेकिन विरोधाभासी आंकड़ों पर स्पष्टीकरण जरूरी है।
पिछले वर्षों से तुलना में भी असंगति है। खबरों के मुताबिक, मंत्री ने कहा कि रिपोर्ट न करने की दर 2025 के 42 प्रतिशत से पांच प्रतिशत अंक कम हुई। एक अन्य खबर में 42 प्रतिशत का आंकड़ा 2020 से 2025 की अवधि से जोड़ा गया है, जबकि एक और रिपोर्ट में रिपोर्ट करने की दर में 4.38 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है।
42 प्रतिशत और मौजूदा गणना की गई 36.2 प्रतिशत दर के आधार पर गिरावट लगभग 5.8 प्रतिशत अंक की होती है। इससे व्यापक रूप से सुधार का संकेत मिलता है, लेकिन तुलना की अवधि और गणनाओं से जुड़े मतभेद हल नहीं होते। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रतिशत अंकों का बदलाव प्रतिशत वृद्धि या गिरावट के समान नहीं होता।
स्थायी नियुक्तियां क्यों ठुकराई जा रही हैं
ज़ुल्केफ्ली ने नियुक्तियां ठुकराने के पीछे पारिवारिक, आर्थिक और पेशेवर चिंताओं का मेल बताया। डॉक्टरों ने परिवार से दूर रहने, माता-पिता या भाई-बहनों की जिम्मेदारियों, स्वास्थ्य समस्याओं, स्थानांतरण के खर्च और व्यवस्थागत मुश्किलों का हवाला दिया। कुछ डॉक्टरों ने शहरी अस्पतालों को प्राथमिकता दी या ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों में सेवा देने से इनकार किया।
करियर को लेकर अनिश्चितता भी बार-बार सामने आई। अधिकारियों ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें विशेषज्ञ प्रशिक्षण के पर्याप्त अवसर मिलेंगे और क्या बाद में वे प्रायद्वीपीय मलेशिया या अपने गृह क्षेत्र में जा सकेंगे। स्थायी नियुक्ति से रोजगार की स्थिरता मिल सकती है, लेकिन डॉक्टर कहां रहेंगे या तैनाती कितने समय तक चलेगी, यह अनिश्चितता बनी रह सकती है।
स्वास्थ्य मंत्री ज़ुल्केफ्ली ने तैनाती ठुकराने वाले अधिकारियों की मुश्किलों को स्वीकार किया:
ये वास्तविक चुनौतियां हैं, जिन्हें हम हल्के में नहीं लेते।
पुलाई के सांसद सुहाइज़ान कायत ने मंत्रियों के प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए पूछा कि कितने लोगों ने रिपोर्ट नहीं किया, इसके क्या कारण थे और मंत्रालय ने क्या कदम उठाए। उन्होंने कहा कि सबाह के संसदीय समिति के दौरे में भारी कार्यभार, भौगोलिक मुश्किलों, अपर्याप्त प्रोत्साहनों और खराब कार्यस्थल के माहौल को संभावित बाधाओं के रूप में पहचाना गया।
उन्होंने कोटा किनाबालु के एक अस्पताल में विशेषज्ञों और चिकित्सा अधिकारियों के एक ही परामर्श कक्ष साझा करने का भी जिक्र किया। ज़ुल्केफ्ली ने कहा कि मंत्रालय ने स्टाफ की कमी, प्रशिक्षण की कठिनाइयों और सुविधाओं की सीमाओं पर विचार किया, साथ ही बताया कि प्रायद्वीपीय मलेशिया में भी परामर्श कक्षों में भीड़ होती है। प्रशिक्षण कोटा इस समस्या के एक हिस्से को संबोधित करता है, नियुक्ति स्वीकार करने पर असर डालने वाली सभी परिस्थितियों को नहीं।
सांसद कोटे से आगे प्राथमिकता की मांग कर रहे हैं
बांदर कुचिंग के सांसद डॉ. केल्विन यी ने प्रस्तावित आवंटन का स्वागत किया, लेकिन सरकार से सबाह और सरावाक में सेवा दे रहे डॉक्टरों को व्यापक प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उनके प्रस्ताव में अतिरिक्त वरीयता स्थानीय विश्वविद्यालयों के मास्टर और विशेषज्ञ कार्यक्रमों के आवेदनों पर भी लागू होगी, न कि मान्यता केवल आरक्षित HLP सीटों तक सीमित रहेगी।
सरावाक के एक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉक्टर और सांसद यी ने यह मांग रखी:
मैं मंत्रालय से आग्रह करता हूं कि वह 30 प्रतिशत कोटे से आगे बढ़े। सबाह और सरावाक में तैनात सभी डॉक्टरों को हमारे स्थानीय विश्वविद्यालयों के मास्टर और विशेषज्ञता कार्यक्रमों के आवेदनों में प्राथमिकता या अतिरिक्त वरीयता दी जानी चाहिए, न कि उन्हें केवल उस 30 प्रतिशत कोटे तक सीमित रखा जाए।
उन्होंने माना कि अगर किसी विशेषज्ञता में दोनों राज्यों से उपयुक्त उम्मीदवार बहुत कम हों या कार्डियोथोरेसिक सर्जरी और न्यूरोसर्जरी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की तत्काल राष्ट्रीय जरूरत हो, तो अपवादों की आवश्यकता पड़ सकती है। इस तरह उनका रुख सबसे अधिक जरूरत वाले क्षेत्रों में सेवा को तरजीह देने और विशेषज्ञों की मांग के अनुसार लचीलापन बनाए रखने, दोनों को जोड़ता है।
पहले सेवा दे चुके अधिकारियों को अतिरिक्त मेरिट देने का मंत्रालय का अलग वादा संभावित रूप से आरक्षित आवंटन से बाहर के डॉक्टरों पर भी लागू हो सकता है। हालांकि, अंक देने के विस्तृत नियम, पात्रता के लिए जरूरी सेवा अवधि या आवेदन की समय-सारिणी की घोषणा नहीं हुई। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कोटा और अतिरिक्त मेरिट साथ में कैसे काम करेंगे।
स्थानांतरण सहायता से वेतन पर बहस खत्म नहीं होती
मंत्रालय का कहना है कि पात्र स्थानांतरित अधिकारियों को लागू स्थानांतरण भत्तों का 100 प्रतिशत मिल सकता है। इनमें भोजन, होटल में ठहरने या आवास, यात्रा किराया और निजी सामान ले जाने का खर्च शामिल है। स्थानांतरण के पूरे खर्च की भरपाई 2025 से लागू होने की खबर है। अपने गृह क्षेत्र लौटने वाले अधिकारी एक महीने के मूल वेतन के बराबर विस्थापन भत्ते के भी पात्र हो सकते हैं।
अन्य रिपोर्ट की गई सहायता में RM830 से RM1,300 तक के आवास भत्ते, RM360 का भत्ता, RM500 से RM2,500 तक के विशेषज्ञ भत्ते और दूरदराज की तैनाती के लिए स्थान व कठिनाई के आधार पर हर महीने RM500 से RM1,500 तक के प्रोत्साहन शामिल हैं। इन मदों की पात्रता शर्तें अलग-अलग हैं, इसलिए इन्हें ऐसा पैकेज नहीं समझना चाहिए जो हर चिकित्सा अधिकारी को मिलता हो। खास तौर पर, विशेषज्ञ भत्ते विशेषज्ञ प्रशिक्षण पाने की कोशिश कर रहे अधिकारियों पर अपने-आप लागू नहीं होते।
क्षेत्रीय प्रोत्साहन भुगतान (BIW) को लेकर विवाद जारी है। दिसंबर 2024 में इसे वेतन के प्रतिशत के आधार पर मिलने वाले भुगतान से बदलकर एक निश्चित दर पर कर दिया गया। एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि उन्हें RM360 का BIW मिलने के साथ RM300 का बंतुआन इम्बुहान सारा हिदुप (BISH) भत्ता बंद हो गया, जिससे कुल अतिरिक्त रकम RM60 रह गई। यह एक व्यक्ति का अनुभव है, हर अधिकारी के लिए सत्यापित गणना नहीं।
यी ने BIW की क्रमिक दरों वाली व्यवस्था बहाल करने या भत्ता बढ़ाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वी मलेशिया के ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों को लोकम काम, यानी अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में अस्थायी भुगतान वाली शिफ्टों से अतिरिक्त आय कमाने के अवसर कम मिलते हैं।
तैनाती के आधार पर वेतन के अंतर को लेकर अपनी चिंता बताते हुए यी ने कहा:
अगर क्लांग घाटी में सेवा देने और सबाह या सरावाक के किसी ग्रामीण क्लिनिक में काम करने के वेतन में बहुत कम अंतर है, तो वहां जाने का कोई वास्तविक प्रोत्साहन नहीं है।
अस्पतालों के ब्यौरे बताते हैं कि स्टाफ का दबाव असमान है
अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों की खबरें बताती हैं कि राज्य के कुल स्वीकृति आंकड़े स्थानीय स्तर पर गंभीर कमी को छिपा सकते हैं। सोशल मीडिया पर आई खबरों में कहा गया कि कानोवित, केनिंगाउ, बेलुरान और सिपितांग अस्पतालों में तैनाती प्रक्रिया के दौरान किसी चिकित्सा अधिकारी ने रिपोर्ट नहीं किया। ये अंतिम स्टाफ संख्या की सत्यापित गणना नहीं हैं और कुछ जानकारियां 7 अक्टूबर की रिपोर्टिंग समय-सीमा से पहले दर्ज की गई थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, श्री अमन अस्पताल में 28 सितंबर को सुबह 10:45 बजे तक तैनात किए गए 20 चिकित्सा अधिकारियों में से छह पहुंचे थे। उस समय 70 प्रतिशत अनुपस्थित थे, लेकिन यह जरूरी नहीं कि अंतिम स्थिति भी यही रही हो। खबरों के अनुसार, कुदात क्षेत्रीय स्वास्थ्य कार्यालय को 17 तैनातियों में से चार डॉक्टर मिले, यानी करीब 76 प्रतिशत ने रिपोर्ट नहीं किया।
बताया गया कि बेलुरान अस्पताल में छह डॉक्टर काम कर रहे थे, जबकि सिपितांग में आठ थे। कहा गया कि रणाऊ अस्पताल में तीन डॉक्टरों के प्रस्ताव ठुकराने और एक के रिपोर्ट करने के बाद छह चिकित्सा अधिकारी बचे थे। केनिंगाउ से मिली जानकारियों में सर्जरी विभाग में पांच, मेडिसिन में आठ, ऑर्थोपेडिक्स में छह और बाल रोग विभाग में छह अधिकारी बताए गए।
अन्य उदाहरण बताते हैं कि पहुंचे अधिकारियों को अपने-आप अतिरिक्त स्टाफ नहीं गिना जा सकता। खबरों के मुताबिक, मिरी अस्पताल में स्थायी नियुक्ति पर 35 अधिकारी रिपोर्ट हुए, लेकिन उनमें से केवल 16 उस केंद्र के लिए नए थे। उसके बाल रोग विभाग में दो नए अधिकारी आए। कपित संभागीय स्वास्थ्य कार्यालय में बताया गया कि नौ डॉक्टरों का तबादला बाहर हुआ और दो वहां आए, यानी इन तबादलों से सात डॉक्टरों का शुद्ध नुकसान हुआ।
ये आंकड़े अलग-अलग संस्थानों और रिपोर्टिंग के अलग-अलग समय से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें जोड़कर क्षेत्र का भरोसेमंद कुल आंकड़ा नहीं निकाला जा सकता। फिर भी वे उस व्यावहारिक सवाल को सामने लाते हैं जिसका जवाब मंत्रालय के प्रमुख आंकड़े नहीं देते: किन अस्पतालों और क्लिनिकों की काम करने की क्षमता बढ़ी और किनकी घटी?
डॉक्टर शुद्ध स्टाफ संख्या का आकलन चाहते हैं
मलेशियाई चिकित्सा संघ (MMA) के अध्यक्ष डॉ. सिवानेसन लेचुमनन ने कहा कि संघ की सबाह शाखा से मिली प्रतिक्रिया के मुताबिक, कुछ अस्पताल विभागों में चिकित्सा अधिकारियों की शुद्ध संख्या घटी है। बताया गया कि डॉक्टर एक दिन छोड़कर ड्यूटी कॉल कर रहे थे और लगातार ड्यूटी 33 घंटे तक चल रही थी।
नियुक्तियों और वास्तविक स्टाफ संख्या के बीच अंतर पर बात करते हुए सिवानेसन ने MMA के एक बयान में कहा:
हम रिपोर्ट की गई प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन हमारी सबाह शाखा से मिली प्रतिक्रिया बताती है कि आंकड़े जमीन पर वास्तविक स्टाफ स्थिति को नहीं दर्शा सकते।
संघ चाहता है कि मंत्रालय स्पष्ट करे कि पहुंचने के आंकड़ों में सबाह में जन्मे डॉक्टर और प्रायद्वीपीय मलेशिया के वे अधिकारी भी शामिल हैं या नहीं जो पहले से सबाह में सेवा दे रहे थे और वहीं रहने का फैसला किया। किसी मौजूदा अधिकारी को अनुबंध से स्थायी पद पर बदलने से रोजगार की सुरक्षा बढ़ती है, लेकिन इससे उस केंद्र में डॉक्टरों की संख्या अपने-आप नहीं बढ़ती।
MMA ने अस्पताल और क्लिनिक के हिसाब से तैनाती का ब्योरा, रिपोर्ट करने वाले अधिकारियों के गृह क्षेत्रों और सबाह से प्रायद्वीपीय मलेशिया जाने वाले डॉक्टरों की संख्या मांगी। उसने सबाह में जन्मे राज्य छोड़कर जाने वाले अधिकारियों और प्रायद्वीपीय मलेशिया के वापस लौटने वाले अधिकारियों के अलग-अलग आंकड़े भी मांगे।
संघ के प्रस्तावित राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यबल वितरण डैशबोर्ड में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के स्टाफ की संख्या, वितरण और कमी के आंकड़े नियमित रूप से अपडेट किए जाएंगे। इसमें मुख्य पैमाना हर स्थान पर शुद्ध वृद्धि या कमी होगा, जिसमें आने और जाने वाले दोनों अधिकारियों को गिना जाएगा, न कि केवल स्थायी नियुक्तियां स्वीकार करने वालों की संख्या को।
तैनाती की स्पष्ट जानकारी और स्थानीय डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की मांग
मंत्रालय का कहना है कि उसने तैनाती तय करने के लिए एल्गोरिदम इस्तेमाल कर ईप्लेसमेंट को उन्नत किया है। वह फैसले पहले जारी कर रहा है और अधिकारियों को तैयारी के लिए अधिक समय देने के वास्ते जानकारी सत्र आयोजित कर रहा है। एल्गोरिदम नियमों का ऐसा समूह है जिसके जरिए जानकारी संसाधित कर आवंटन किए जाते हैं। केवल इसका इस्तेमाल यह साबित नहीं करता कि तैनाती पारिवारिक परिस्थितियों, करियर योजनाओं या स्वास्थ्य केंद्रों की सबसे जरूरी जरूरतों के अनुरूप है।
यी ने प्रस्ताव दिया कि तैनाती पत्रों में शुरू से ही सेवा का सटीक स्थान और अवधि लिखी हो। उन्होंने कहा कि कभी-कभी पत्र में केवल राज्य का नाम दिया जाता है, जिससे डॉक्टरों को यह नहीं पता चलता कि वे किस क्षेत्र या क्लिनिक में काम करेंगे। उन्होंने संघीय और राज्य सरकारों से खासकर ग्रामीण इलाकों में कर्मचारियों के आवासों की मरम्मत और उन्नयन तेज करने का आग्रह भी किया।
सबाह मेडिकल सर्विसेज यूनियन और MAPSU नाम से जाने जाने वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ट्रेड यूनियनों के महासंघ के अध्यक्ष अजुलाहिन जापिन ने दीर्घकालीन उपाय के रूप में सबाह से अधिक डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्नातक आम तौर पर अपने गृह राज्य में सेवा देने के लिए अधिक इच्छुक होते हैं, लेकिन उनकी संख्या मौजूदा रिक्तियां भरने के लिए पर्याप्त नहीं है।
29 यूनियनों को साथ लाने वाले MAPSU ने कहा कि उसके सर्वेक्षण में प्रायद्वीपीय मलेशिया के कुछ डॉक्टरों में सबाह की तैनाती स्वीकारने को लेकर अनिच्छा मिली, खासकर ग्रामीण इलाकों में। सर्वेक्षण में कितने लोग शामिल थे या विस्तृत नतीजे क्या थे, यह नहीं बताया गया। अजुलाहिन ने प्रायद्वीपीय मलेशिया के स्नातकों को हाउसमेंशिप के जरिए सबाह से परिचित कराने का भी प्रस्ताव रखा। हाउसमेंशिप चिकित्सा अधिकारी बनने से पहले किया जाने वाला पर्यवेक्षित व्यावहारिक प्रशिक्षण है।
अजुलाहिन ने BIW की पहले की दरों का जिक्र किया, जो मूल वेतन का 17 से 25 प्रतिशत थीं, और करीब 10 प्रतिशत ग्रामीण भत्ते की बात कही। उन्होंने प्रोत्साहनों पर फिर से विचार करने की मांग की। उनके प्रस्ताव सिफारिशें हैं, घोषित भर्ती या प्रशिक्षण प्रतिबद्धताएं नहीं।
तैनाती की समय-सीमा और अनसुलझे फैसले
2026 की तैनाती प्रक्रिया में कई तारीखें और चरण शामिल थे। शुरुआत में अधिकारियों ने अनुबंध की स्थिति में रिपोर्ट किया और बाद में स्थायी नियुक्तियां लागू हुईं। इस प्रक्रिया का मकसद अधिकारियों को स्थानांतरण खर्च का दावा करने का अवसर देना था।
- जून 2026: उप स्वास्थ्य मंत्री हनीफा हाजर ताइब के अनुसार, इस भर्ती चरण में सबाह भेजे गए 39 डॉक्टरों में से 20 ने ड्यूटी पर रिपोर्ट किया।
- 20 अगस्त: ईप्लेसमेंट भर्ती के दूसरे चरण के नतीजे जारी किए गए।
- 28 सितंबर: अधिकारियों को अनुबंध की स्थिति में अपने नए केंद्रों पर रिपोर्ट करना था।
- 5 अक्टूबर: स्थायी नियुक्तियां लागू होनी थीं।
- 7 अक्टूबर: रिपोर्ट न करने वाले अधिकारियों के लिए मंत्रालय की बढ़ाई गई समय-सीमा खत्म हुई। उस तारीख तक राज्य के आंकड़ों में 382 अधिकारी अनुपस्थित दर्ज थे।
- 8 अक्टूबर: ज़ुल्केफ्ली ने संसद में विशेषज्ञ प्रशिक्षण कोटे की घोषणा की।
राष्ट्रीय कुल आंकड़ों में भी तालमेल की जरूरत है। एक खबर में 2026 में चिकित्सा अधिकारियों की 4,500 स्थायी नियुक्तियों की योजना बताई गई है, जिनमें जून में 328 और अक्टूबर में 4,172 नियुक्तियां थीं। दूसरी खबर में ईप्लेसमेंट के दूसरे चरण के लिए 4,255 पेशकशों का उल्लेख है। ये अलग-अलग आंकड़े हैं और किसी स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट नहीं होता कि वे संशोधित आवंटन को दर्शाते हैं या अलग श्रेणियों को।
पिछले वर्षों के ब्यौरे के मुताबिक, 2022 में 78 अधिकारियों ने रिपोर्ट नहीं किया था, जो पेशकशों का लगभग 2 प्रतिशत था। 2023 में यह संख्या 1,100 से अधिक, यानी लगभग 20 प्रतिशत बताई गई। 2023 के बाद राष्ट्रीय स्तर पर 40 प्रतिशत का एक अन्य आंकड़ा दिया गया है, लेकिन उसकी तुलना की सटीक अवधि स्पष्ट नहीं है। ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या पूर्वी मलेशिया तक सीमित नहीं है, लेकिन उनसे हर साल की एकसमान श्रृंखला नहीं बनती।
दीवान राक्यात का सत्र 8 दिसंबर तक जारी रहने का कार्यक्रम था। कोटा लागू करने, स्वास्थ्य केंद्रों के स्टाफ आंकड़े प्रकाशित करने या संशोधित भत्तों पर फैसले लेने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई। तत्काल अनसुलझे सवाल यह हैं कि प्रशिक्षण में प्राथमिकता कैसे दी जाएगी और क्या इससे बेहतर तैनाती, आवास और वेतन व्यवस्था के साथ अस्पतालों को पर्याप्त डॉक्टर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मुख्य बिंदु
- मंत्रालय सबाह और सरावाक में सेवा दे रहे चिकित्सा अधिकारियों के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षण में 30 प्रतिशत कोटे की योजना बना रहा है। इसे 1,650 HLP सीटों में से लगभग 500 बताया गया है।
- राज्यवार ब्यौरे में 1,055 पेशकशों में से 673 डॉक्टरों के रिपोर्ट करने और 7 अक्टूबर तक 382 के रिपोर्ट न करने का उल्लेख है।
- खबरों में कुल आंकड़ों, रिपोर्ट करने की दरों और पिछले वर्षों से तुलना को लेकर मतभेद हैं।
- स्थानांतरण सहायता उपलब्ध है, लेकिन सांसद और यूनियन बेहतर नियमित प्रोत्साहन, सेवा की स्पष्ट शर्तें और बेहतर कर्मचारी आवास चाहते हैं।
- MMA चाहता है कि हर अस्पताल और क्लिनिक में स्टाफ के बदलाव का आकलन किया जाए, जिसमें वहां से जाने वाले और पहले से काम कर रहे अधिकारी भी शामिल हों।
- कोटा कब शुरू होगा, पात्रता के विस्तृत नियम क्या होंगे और विभिन्न विशेषज्ञताओं में सीटें कैसे बांटी जाएंगी, इसकी घोषणा नहीं हुई है।






