नतीजे फिर गिरे, लगभग आधे परीक्षार्थी असफल
बांग्लादेश की 2026 की उच्चतर माध्यमिक प्रमाणपत्र (एचएससी) और समकक्ष परीक्षाओं में 594,113 छात्र असफल रहे और राष्ट्रीय उत्तीर्ण दर 52.12% रही। इसके साथ ही नतीजों में तेज गिरावट का सिलसिला जारी रहा। शिक्षा मंत्री ए. एन. एम. एहसानुल हक मिलन ने शनिवार, 31 अक्टूबर को ढाका के सचिवालय में नतीजों की घोषणा की।
विषय-सूची
- नतीजे फिर गिरे, लगभग आधे परीक्षार्थी असफल
- नतीजों में कितनी गिरावट आई?
- किस बोर्ड का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा?
- पास होने में लड़कियां आगे, सर्वोच्च ग्रेड में लड़के
- चट्टोग्राम में सर्वोच्च ग्रेड पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट
- स्थानीय नतीजों से कॉलेजों के बीच बड़ा अंतर उजागर
- शिक्षकों के अनुसार किन पहलुओं की जांच जरूरी
- संस्थागत समीक्षा के बाद मिले सहायता
- दोबारा परीक्षा से छात्रों को एक और मौका
- मुख्य बातें
11 शिक्षा बोर्डों के तहत परीक्षा देने वाले 1,240,798 परीक्षार्थियों में से 646,685 उत्तीर्ण हुए। 2025 में उत्तीर्ण दर 58.83% थी, जो इस साल 6.71 प्रतिशत अंक घट गई। सीधे शब्दों में कहें तो इस साल हर 100 में से लगभग 52 परीक्षार्थी पास हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या लगभग 59 थी।
सर्वोच्च ग्रेड पॉइंट औसत, यानी जीपीए-5, हासिल करने वालों की संख्या घटकर 40,084 रह गई, जो पहले 69,097 थी। इसका मतलब है कि 29,013 कम छात्रों ने सर्वोच्च ग्रेड हासिल किया, यानी लगभग 42% की गिरावट। गिरावट सिर्फ सर्वोच्च अंक पाने वालों तक सीमित नहीं है: असफल छात्रों की संख्या पिछले साल के 508,701 से 85,412 बढ़कर लगभग 16.8% अधिक हो गई।
मिलन ने नतीजों को असंतोषजनक बताया और कहा कि सरकार पढ़ाई में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि एक या अधिक विषयों में असफल छात्र एक से दो महीने के भीतर उन विषयों की दोबारा परीक्षा दे सकेंगे।
इसलिए परिवारों की तात्कालिक चिंता दोहरी है: यह समझना कि इतने सारे छात्र पढ़ाई में क्यों पिछड़े और यह जानना कि असफल परीक्षार्थी दोबारा प्रयास के लिए कितनी जल्दी तैयारी कर सकते हैं। कॉलेजों और शिक्षा अधिकारियों के लिए नतीजे संस्थानों, क्षेत्रों और छात्र समूहों के बीच बड़े अंतर की ओर भी इशारा करते हैं।
नतीजों में कितनी गिरावट आई?
नौ सामान्य शिक्षा बोर्डों की उत्तीर्ण दर 51.62% रही, जो 2025 के 57.12% से 5.50 प्रतिशत अंक कम है। राष्ट्रीय आंकड़े में शामिल करने से पहले इनके नतीजे मदरसा शिक्षा बोर्ड और तकनीकी शिक्षा बोर्ड से अलग गिने जाते हैं।
बांग्लादेश शैक्षिक सूचना एवं सांख्यिकी ब्यूरो (BANBEIS) के रिकॉर्ड के अनुसार, सामान्य बोर्डों की उत्तीर्ण दर 2004 में 47.73% और 2005 में 59.16% थी। 2026 का आंकड़ा 2004 के बाद सबसे कम है। राष्ट्रीय नतीजों के साथ दी गई व्यापक ऐतिहासिक तुलना में 2004 की दर 47.74% बताई गई है; सामान्य बोर्डों की श्रृंखला नियमित एचएससी परीक्षाओं के लिए अधिक विशिष्ट तुलना देती है।
सामान्य बोर्डों में कुल 1,048,530 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी और 507,281 असफल रहे। 1990 से शुरू होने वाले BANBEIS रिकॉर्ड में इस समूह में इससे पहले किसी साल इतने परीक्षार्थी असफल नहीं हुए। बड़े परीक्षा समूह में असफल छात्रों की यह रिकॉर्ड संख्या है।
जीपीए-5 पाने वालों की संख्या भी 2018 के बाद सबसे कम रही। उस साल 29,262 छात्रों ने सर्वोच्च ग्रेड हासिल किया था। यह संख्या 2019 में बढ़कर 47,286 हो गई थी, जबकि इस साल 40,084 रही। उत्तीर्ण दर में गिरावट और सर्वोच्च ग्रेड पाने वालों की घटती संख्या, दोनों मिलकर बताते हैं कि उपलब्धि के एक से अधिक स्तरों पर कठिनाइयां हैं।
किस बोर्ड का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा?
11 बोर्डों में ढाका की उत्तीर्ण दर सबसे अधिक 61.80% रही, जिसके बाद मदरसा शिक्षा बोर्ड 61.07% पर रहा। बरिशाल में सबसे कम 44.84% छात्र उत्तीर्ण हुए। ढाका और बरिशाल के बीच अंतर 16.96 प्रतिशत अंक का था।
बोर्डवार नतीजों में व्यापक अंतर दिखा:
- ढाका: 61.80%।
- मदरसा शिक्षा बोर्ड: 61.07%।
- चट्टोग्राम: 52.07%।
- मयमनसिंह: 51.44%।
- सिलहट: 50.90%।
- तकनीकी शिक्षा बोर्ड: 49.43%।
- कुमिल्ला: 48.04%।
- दिनाजपुर: 45.98%।
- राजशाही: 45.06%।
- जशोर: 44.92%।
- बरिशाल: 44.84%।
छह बोर्डों की उत्तीर्ण दर 50% से कम रही, यानी इन सभी में पास होने वालों से अधिक परीक्षार्थी असफल हुए। सबसे अच्छे प्रदर्शन वाले ढाका बोर्ड में भी परीक्षा देने वाले हर 100 छात्रों में लगभग 38 असफल रहे।
पास होने में लड़कियां आगे, सर्वोच्च ग्रेड में लड़के
लड़कियों की राष्ट्रीय उत्तीर्ण दर 56.31% रही, जबकि लड़कों की 47.75% थी। यह 8.56 प्रतिशत अंक का बड़ा अंतर है, खासकर ऐसी परीक्षा में जिसमें लगभग आधे परीक्षार्थी असफल रहे।
633,149 छात्राओं में से 356,528 पास हुईं। 607,649 छात्रों में से 290,157 उत्तीर्ण हुए। इस तरह परीक्षा देने वालों की संख्या और उत्तीर्ण परीक्षार्थियों के अनुपात, दोनों में लड़कियों की संख्या अधिक रही।
हालांकि, लड़कों ने लड़कियों से अधिक जीपीए-5 हासिल किए: लड़कों को 20,363 और लड़कियों को 19,721, यानी 642 का अंतर। पास होना और सर्वोच्च ग्रेड हासिल करना प्रदर्शन के अलग-अलग पहलुओं को मापते हैं। किसी समूह में सर्वोच्च ग्रेड पाने वाले अधिक हो सकते हैं, जबकि उसी समूह में असफल होने वालों का अनुपात भी अधिक हो सकता है।
चट्टोग्राम में सर्वोच्च ग्रेड के मामले में तस्वीर अलग रही। वहां पास होने और जीपीए-5 पाने, दोनों में लड़कियां आगे रहीं। उनकी उत्तीर्ण दर 53.49% थी, जबकि लड़कों की 47.62%। बोर्ड के कुल 2,929 जीपीए-5 में से लड़कियों ने 1,596 हासिल किए। लड़कों को शेष 1,333 मिले।
चट्टोग्राम में सर्वोच्च ग्रेड पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट
चट्टोग्राम शिक्षा बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर परवेज साज्जाद चौधरी ने 31 अक्टूबर को बोर्ड के नतीजों की घोषणा की। इसकी उत्तीर्ण दर 2025 के 52.57% से घटकर 52.07% रह गई, जो 15 साल का सबसे निचला स्तर है।
बोर्ड में चट्टोग्राम, कॉक्स बाजार, रंगामाटी, बंदरबन और खगराछड़ी के कुल 99,878 छात्र पंजीकृत थे। इनमें से 96,335 ने 114 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा दी। वे 280 कॉलेजों के छात्र थे और उनमें से 50,166 पास हुए। पंजीकरण के आंकड़ों में वे छात्र भी शामिल होते हैं जिन्होंने अंततः परीक्षा नहीं दी; उत्तीर्ण दर परीक्षा में शामिल हुए छात्रों के आधार पर निकाली जाती है।
जीपीए-5 पाने वालों की संख्या घटकर 2,929 रह गई। बोर्ड के नतीजों के साथ दिए गए आंकड़ों में पिछले साल की संख्या 6,130 बताई गई है, यानी 3,201 की गिरावट। एक अन्य प्रकाशित विवरण में कमी 3,168 बताई गई है, जिससे पिछली संख्या 6,097 बैठती है। दोनों तुलनाओं के अनुसार सर्वोच्च ग्रेड पाने वालों की संख्या आधे से अधिक घट गई।
चट्टोग्राम की हाल के वर्षों की उत्तीर्ण दरें लंबी गिरावट दिखाती हैं: 2021 में 89.4%, 2022 में 78.8%, 2023 में 74% और 2024 में 70.4%, फिर 2025 में घटकर 52.57%। 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई विशेष मूल्यांकन प्रणाली के जरिए सभी परीक्षार्थियों को पास किया गया था, सामान्य परीक्षा प्रक्रिया से नहीं।
स्थानीय नतीजों से कॉलेजों के बीच बड़ा अंतर उजागर
चट्टोग्राम शहर में उत्तीर्ण दर 66.20% रही, जबकि बंदरबन में 41.42%, रंगामाटी में 33.24% और खगराछड़ी में 29.85% थी। शहर और खगराछड़ी के बीच 36.35 प्रतिशत अंक का अंतर था। प्रभावी शिक्षण तक पहुंच की पड़ताल में भौगोलिक स्थिति इसलिए एक अहम चिंता है।
चट्टोग्राम बोर्ड के तहत तीन कॉलेजों के सभी नौ परीक्षार्थी असफल रहे: सृजनी ट्रस्ट स्कूल एंड कॉलेज के पांच, मेरोन सन कॉलेज के दो और कॉक्स बाजार के बियाम लेबोरेटरी स्कूल एंड कॉलेज के दो छात्र।
छह अन्य संस्थानों में उत्तीर्ण दर 100% रही: बरबकुंडा हाई स्कूल एंड कॉलेज, फौजदारहाट कैडेट कॉलेज, काफको स्कूल एंड कॉलेज, क्वांटम कॉस्मो कॉलेज, रामू कैंटोनमेंट इंग्लिश स्कूल एंड कॉलेज और लीडर्स स्कूल एंड कॉलेज। इनमें परीक्षार्थियों की संख्या छह से 134 तक थी, इसलिए हर प्रतिशत के पीछे छात्रों की संख्या भी मायने रखती है।
फौजदारहाट के विस्तृत नतीजों में 43 छात्रों ने जीपीए-5 हासिल किया, जिनमें 32 को गोल्डन जीपीए-5 मिला। हालांकि, बोर्ड की कॉलेज सूची में उसके कुल परीक्षार्थियों की संख्या 44 बताई गई। प्रिंसिपल लेफ्टिनेंट कर्नल अदनान कबीर ने कॉलेज की लगातार सफलता का श्रेय पाठ्यपुस्तकों के अध्ययन, नियमित अभ्यास, शिक्षकों की प्रतिबद्धता, अभिभावकों के सहयोग और कमजोर छात्रों को अतिरिक्त मार्गदर्शन देने को दिया।
फुलबाड़ी में स्थानीय शिक्षा अधिकारियों ने भी संस्थानों के कमजोर नतीजों की पहचान की। उत्तर लक्ष्मीपुर स्कूल एंड कॉलेज के पांच परीक्षार्थियों में कोई पास नहीं हुआ, जबकि पोखुरी स्कूल एंड कॉलेज के 10 में से एक छात्र पास हुआ। चिंतामन सरकारी कॉलेज के 225 परीक्षार्थियों में से 179 उत्तीर्ण हुए, यानी उत्तीर्ण दर 79.55% रही। उपजिला माध्यमिक शिक्षा अधिकारी अबुल कलाम आजाद ने कहा कि खराब प्रदर्शन करने वाले संस्थानों की जांच की जाएगी। प्रशासकों ने अंग्रेजी में कठिनाई को एक बड़ी चिंता बताया।
शिक्षकों के अनुसार किन पहलुओं की जांच जरूरी
लोकशिक्षा अभियान की कार्यकारी निदेशक राशेदा के. चौधरी ने कमजोर नतीजों को एक के बाद एक आए कई दबावों से जोड़ा। उन्होंने महामारी के कारण पढ़ाई में आई कमियों, जुलाई विद्रोह के आसपास की बाधाओं और शिक्षकों की कमी को संभावित वजह बताया।
चौधरी ने परिवार की आय और स्थान के अंतर की ओर भी ध्यान दिलाया। संपन्न परिवारों के छात्र पढ़ाई में अतिरिक्त मदद ले सकते हैं, जिसका खर्च गरीब परिवारों के लिए उठाना मुश्किल हो सकता है। वहीं, ग्रामीण संस्थानों में अक्सर संसाधन कम होते हैं। उनकी सलाह थी कि कक्षा में पढ़ाई के साथ इन अंतरों की भी जांच हो, न कि पूरी जिम्मेदारी छात्रों पर डाल दी जाए।
ढाका विश्वविद्यालय के शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक प्रोफेसर सिद्दीकुर रहमान ने कारणों का पता लगाने के लिए प्रतिनिधि नमूने पर आधारित शोध की मांग की। उन्होंने कहा कि 2024 के विद्रोह के दौरान संस्थान बंद रहने से पढ़ाई प्रभावित हुई हो सकती है। उन्होंने यह भी जांचने की सिफारिश की कि क्या पहले अंक देने के तरीके जरूरत से ज्यादा उदार थे।
रहमान ने अंग्रेजी में लंबे समय से चली आ रही कमजोरी और माध्यमिक स्कूल से कॉलेज जाने के बाद कुछ छात्रों को होने वाली कठिनाइयों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने जांच की सिफारिश की कि माध्यमिक स्कूल प्रमाणपत्र (एसएससी) परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पढ़ाई के अगले चरण में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त मदद मिलती है या नहीं।
संस्थागत समीक्षा के बाद मिले सहायता
रहमान ने उन कॉलेजों की विशेष समीक्षा का प्रस्ताव दिया जहां 20% से कम परीक्षार्थी पास हुए। इन समीक्षाओं में पढ़ाने की गुणवत्ता, नियमित कक्षाओं, कमजोर छात्रों को अतिरिक्त पाठ और शिक्षकों से पर्याप्त मदद मिलने की जांच की जाएगी।
उन्होंने उन संस्थानों का अध्ययन करने की भी सिफारिश की जहां सभी छात्र पास हुए। उनके शिक्षण और सहायता व्यवस्थाओं की कमजोर कॉलेजों से तुलना करने पर शिक्षा अधिकारियों को ऐसे व्यावहारिक तरीके मिल सकते हैं जिन्हें अन्य जगहों पर अपनाया जा सके। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों, सभी से सलाह ली जानी चाहिए।
चौधरी ने उन संस्थानों पर स्वतंत्र शोध की मांग की जहां कोई भी परीक्षार्थी पास नहीं हुआ। उन्होंने शिक्षकों के खाली पदों, खास विषयों के योग्य शिक्षकों की कमी, अपर्याप्त सुविधाओं और प्रबंधन की कमजोरियों की जांच करने और फिर हर संस्थान की जरूरत के अनुसार सहायता देने की सिफारिश की।
उनका कहना था कि नियमित निगरानी के साथ सलाह और सहायता भी दी जानी चाहिए। इसमें स्थानीय शिक्षा प्रशासकों और अभिभावकों को शामिल किया जाए, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों को। उन्होंने थाईलैंड में अपनाए गए एक तरीके का उदाहरण दिया, जिसमें कमजोर प्रदर्शन वाले संस्थानों पर एक से दो साल तक विशेष ध्यान दिया जाता है। बांग्लादेश के लिए उनकी सिफारिश थी कि पहचानी गई कमियों को दूर करने के लिए लगातार मदद दी जाए।
दोबारा परीक्षा से छात्रों को एक और मौका
मिलन ने कहा कि एक या अधिक विषयों में असफल परीक्षार्थी एक से दो महीने के भीतर केवल उन्हीं विषयों की दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। इससे छात्र उन प्रश्नपत्रों की तैयारी पर ध्यान दे पाएंगे जिन्हें पास करना जरूरी है, और उन्हें पहले से उत्तीर्ण विषय दोबारा नहीं देने होंगे।
मंत्री की घोषणा में चौधरी द्वारा एक या दो विषयों में असफल छात्रों के लिए एक महीने के भीतर दोबारा परीक्षा के अवसर का स्वागत करते समय बताए गए प्रावधान से अधिक बड़ा समूह और लंबी अवधि शामिल थी। दोबारा परीक्षा की कोई निश्चित तारीख, पंजीकरण की समयसीमा या विस्तृत प्रक्रिया नहीं बताई गई।
चौधरी ने सरकार से पढ़ाई में अधिक कठिनाइयों का सामना कर रहे छात्रों के लिए विकल्प देने का भी आग्रह किया। उन्होंने असफल परीक्षार्थियों की पढ़ाई जारी रखने में मदद के साथ-साथ रोजगार में उपयोगी तकनीकी और व्यावसायिक कौशल, भाषाओं और अन्य क्षमताओं के छोटे पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव रखा।
परीक्षा और नतीजों का कार्यक्रम कई महीनों तक चला:
- 2 जुलाई, 2026: एचएससी और समकक्ष परीक्षाएं शुरू हुईं।
- 8 अगस्त: अधिकांश बोर्डों की लिखित परीक्षाएं समाप्त हुईं।
- 9 सितंबर: चट्टोग्राम में बाढ़ के कारण स्थगित लिखित परीक्षाएं पूरी हुईं।
- 31 अक्टूबर: राष्ट्रीय स्तर पर और शिक्षा बोर्डों ने नतीजों की घोषणा की।
- घोषणा के एक से दो महीने के भीतर: मंत्री ने असफल परीक्षार्थियों को दोबारा परीक्षा का अवसर देने की बात कही।
छात्र आधिकारिक ऑनलाइन नतीजा पोर्टलों, अपने शिक्षण संस्थानों और एसएमएस सेवाओं के जरिए परिणाम देख सकते हैं। संस्थानों को सलाह दी गई कि वे अपने शिक्षा बोर्ड के विवरण और शैक्षिक संस्थान पहचान संख्या, जिसे ईआईआईएन कहा जाता है, का उपयोग करके नतीजे डाउनलोड करें और प्रकाशित करें।
मुख्य बातें
- बांग्लादेश में 2026 की एचएससी और समकक्ष परीक्षाओं की उत्तीर्ण दर 2025 के 58.83% से घटकर 52.12% रही।
- परीक्षा में शामिल 1,240,798 परीक्षार्थियों में से 646,685 पास हुए और 594,113 असफल रहे।
- जीपीए-5 पाने वालों की संख्या लगभग 42% घटकर 40,084 रह गई।
- सामान्य बोर्डों की उत्तीर्ण दर 2004 के बाद सबसे कम और असफल परीक्षार्थियों की संख्या 1990 से शुरू होने वाले BANBEIS रिकॉर्ड में सबसे अधिक रही।
- राष्ट्रीय उत्तीर्ण दर में लड़कियां लड़कों से 8.56 प्रतिशत अंक आगे रहीं; लड़कों ने 642 अधिक जीपीए-5 हासिल किए।
- शिक्षाविदों ने शोध, कॉलेजों की लक्षित समीक्षा, कक्षा में बेहतर शिक्षण और वंचित छात्रों की मदद की सिफारिश की।
- शिक्षा मंत्री ने असफल विषयों की एक से दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा की घोषणा की; विस्तृत कार्यक्रम अभी आना बाकी है।






