डकैट के 167 रन और डॉसन के चार विकेट से इंग्लैंड ने श्रीलंका को 55 रन से हराया

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Duckett's 167 and Dawson's Four Wickets Give England 55-Run Win Over Sri Lanka

एक और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का बचाव करते हुए इंग्लैंड ने संयम बनाए रखा

बेन डकैट ने 132 गेंदों पर 167 रन बनाए और लियाम डॉसन ने 49 रन देकर चार विकेट लिए। इसकी बदौलत इंग्लैंड ने लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में श्रीलंका को 55 रन से हराया। लगातार तीन हार के बाद यह उसकी त्रिकोणीय श्रृंखला में पहली जीत थी।

विषय-सूची
  1. एक और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का बचाव करते हुए इंग्लैंड ने संयम बनाए रखा
  2. डकैट और बैंटन ने 163 रन की मजबूत नींव रखी
  3. ब्रूक और मध्यक्रम ने इंग्लैंड की रनगति बनाए रखी
  4. पिछली सफलता के बाद श्रीलंकाई गेंदबाजों को संघर्ष
  5. मेंडिस और रत्नायके ने लक्ष्य को पहुंच के भीतर ला दिया
  6. डॉसन ने इंग्लैंड को निर्णायक विकेट दिलाए
  7. दबाव में ब्रूक की कप्तानी के मैक्कलम कायल
  8. मुश्किल टूर्नामेंट का अंत, आगे बढ़ने के लिए कुछ आधार
  9. अगली परीक्षा ऑस्ट्रेलिया में
  10. मुख्य बातें

इंग्लैंड के पांच विकेट पर 386 रन के जवाब में श्रीलंका को 387 रन का लक्ष्य मिला, लेकिन लक्ष्य का पीछा करते हुए मुकाबला काफी देर तक रोमांचक बना रहा। 40 ओवर के बाद श्रीलंका का स्कोर पांच विकेट पर 300 रन था और आखिरी 60 गेंदों में उसे 87 रन चाहिए थे। इसके बाद इंग्लैंड ने उसे 45.1 ओवर में 331 रन पर समेट दिया।

पवन रत्नायके के 77 गेंदों पर 118 रन और कप्तान कुसल मेंडिस के 71 गेंदों पर 89 रन ने इंग्लैंड के एक और बड़े स्कोर को हार में बदलने की उम्मीद जगा दी थी। इस बार डॉसन की कसी हुई गेंदबाजी और विकेटों ने इंग्लैंड को लक्ष्य बचाने में मदद की। श्रीलंका की पारी में 29 गेंदें बाकी थीं।

इस जीत से इंग्लैंड ने 2005 के बाद पाकिस्तान में अपना पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबला जीता। कप्तान हैरी ब्रूक के लिए भी टूर्नामेंट का समापन जीत के साथ हुआ। उनकी टीम की बल्लेबाजी बार-बार बड़े स्कोर बनाने के मौके दे रही थी, लेकिन गेंदबाजी उन स्कोरों का बचाव करने में जूझ रही थी।

इंग्लैंड पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुका था, जबकि श्रीलंका और मेजबान पाकिस्तान फाइनल में पहुंच चुके थे। इसलिए इस जीत से फाइनलिस्ट नहीं बदले, बल्कि इंग्लैंड का टूर्नामेंट में आखिरी नतीजा बेहतर हुआ। श्रीलंका के सामने अब खिताबी मुकाबले से पहले महंगे गेंदबाजी प्रदर्शन से उबरने की चुनौती थी।

डकैट और बैंटन ने 163 रन की मजबूत नींव रखी

श्रीलंकाई कप्तान मेंडिस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। जवाब में डकैट और टॉम बैंटन ने 151 गेंदों पर 163 रन जोड़कर टूर्नामेंट की सबसे बड़ी सलामी साझेदारी की।

बैंटन ने 75 गेंदों पर 74 रन बनाए, जिसमें आठ चौके और दो छक्के शामिल थे। उनकी पारी ने डकैट को स्थिर साथ दिया और इंग्लैंड को बिना शुरुआती विकेट गंवाए पारी संवारने का मौका मिला। पाकिस्तान के खिलाफ पिछली पारी में शुरुआती झटकों ने इंग्लैंड को काफी नुकसान पहुंचाया था।

डकैट ने 46 गेंदों पर 50, 89 गेंदों पर शतक और 118 गेंदों पर 150 रन पूरे किए। इन पड़ावों से उनकी पारी की रफ्तार का पता चलता है: दूसरा अर्धशतक 43 गेंदों में आया, जबकि अगला 29 गेंदों में।

उनके 24 चौकों से 167 में से 96 रन बने। छक्का लगाए बिना डकैट ने लगभग 126.5 रन प्रति 100 गेंद की दर से रन बनाए और इंग्लैंड के कुल स्कोर में 43 प्रतिशत से कुछ अधिक योगदान दिया। इशान मलिंगा ने आखिरकार उन्हें आउट किया, लेकिन तब तक सलामी बल्लेबाज इंग्लैंड को एक और बड़े स्कोर की मजबूत नींव दे चुका था।

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ब्रूक और मध्यक्रम ने इंग्लैंड की रनगति बनाए रखी

नंबर तीन पर डकैट के साथ उतरे ब्रूक ने अपने वनडे करियर में पहली बार इस स्थान पर बल्लेबाजी की। दोनों ने 75 गेंदों पर 107 रन जोड़े और 38वें ओवर में इंग्लैंड का स्कोर दो विकेट पर 270 रन तक पहुंचाया।

कप्तान ने 34 गेंदों पर 44 रन बनाए, जिसमें तीन चौके और दो छक्के शामिल थे। श्रीलंका के खिलाफ पिछली भिड़ंत में लगाए गए दोहरे शतक को वह दोहरा नहीं सके, लेकिन उनकी तेज रनगति ने बैंटन के आउट होने के बाद भी दबाव बनाए रखा।

विल जैक्स ने 21 गेंदों पर 30, जॉर्डन कॉक्स ने 27 गेंदों पर 43 रन बनाए और सैम करन 12 गेंदों पर 21 रन बनाकर नाबाद लौटे। इंग्लैंड ने आखिरी 10 ओवर में 92 रन जोड़े और उसकी औसत रनगति 7.72 रन प्रति ओवर रही।

यह स्कोर गद्दाफी स्टेडियम में वनडे का पिछला सर्वोच्च स्कोर पार कर गया। पाकिस्तान ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन विकेट पर 375 रन बनाए थे, जिसे इंग्लैंड ने 11 रन से पीछे छोड़ दिया। इंग्लैंड ने किसी एक तेज उछाल के बजाय कई साझेदारियों के दम पर रन बनाए, जिससे विकेट लेने के बाद भी श्रीलंका के लिए नियंत्रण हासिल करना मुश्किल रहा।

पिछली सफलता के बाद श्रीलंकाई गेंदबाजों को संघर्ष

असिथा फर्नांडो श्रीलंका के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 10 ओवर में 63 रन देकर दो विकेट लिए। दिलशान मदुशंका, मलिंगा और दासुन शनाका को एक-एक विकेट मिला।

मलिंगा ने अपने 10 ओवर में 101 रन दिए, जबकि दुनिथ वेल्लालगे 75 रन देकर कोई विकेट नहीं ले सके। दोनों के 20 ओवरों में 176 रन बने, जो इंग्लैंड के कुल स्कोर का करीब 46 प्रतिशत था।

इसी मैदान पर पिछले मैच में श्रीलंका ने पाकिस्तान को 110 रन पर आउट किया था। इंग्लैंड के 386 रन ने बिल्कुल अलग चुनौती पेश की। सलामी साझेदारी के चलते श्रीलंकाई गेंदबाजों को पारी का बड़ा हिस्सा जम चुके बल्लेबाजों को रोकने में लगाना पड़ा।

इंग्लैंड ने अपनी टीम में एक बदलाव करते हुए जेमी ओवरटन की जगह सॉनी बेकर को शामिल किया। लक्ष्य का पीछा करते हुए बेकर ने शुरुआती सफलता दिलाई और चौथे ओवर में श्रीलंका के 13 रन के स्कोर पर कामिंडु मेंडिस को चार रन पर बोल्ड कर दिया।

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मेंडिस और रत्नायके ने लक्ष्य को पहुंच के भीतर ला दिया

अविष्का फर्नांडो और कुसल मेंडिस ने 84 रन की साझेदारी कर शुरुआती नुकसान की भरपाई की। अविष्का ने 50 गेंदों पर 48 रन की पारी में आठ चौके और एक छक्का लगाया। डॉसन की गेंद पर जैक्स ने उनका कैच पकड़ा, जिससे श्रीलंका का स्कोर दो विकेट पर 97 रन हो गया।

इसके बाद मेंडिस और रत्नायके ने केवल 59 गेंदों पर 80 रन जोड़े। कप्तान की 89 रन की पारी में आठ चौके और पांच छक्के शामिल थे। बाउंड्री से उन्होंने 62 रन बनाए। शुरू से 7.74 रन प्रति ओवर की दर से रन बनाने की जरूरत के बावजूद उनके आक्रामक खेल ने श्रीलंका की रनगति बनाए रखी।

इंग्लैंड की सफल अपील के बाद जो रूट ने मेंडिस को आउट कर 177 के स्कोर पर तीसरा विकेट दिलाया। इसके बाद डॉसन ने एक और सफल अपील पर शनाका को चार रन पर एलबीडब्ल्यू किया और श्रीलंका का स्कोर चार विकेट पर 186 रन हो गया।

रत्नायके ने आक्रमण जारी रखा। उनके 118 रन में 15 चौके और एक छक्का शामिल था। उन्होंने करीब 153.2 रन प्रति 100 गेंद की दर से रन बनाए, जो डकैट की रनगति से तेज थी। जनिथ लियानगे ने 17 गेंदों पर 27 और सहान आराचिगे ने 24 गेंदों पर 30 रन बनाकर श्रीलंका को पारी के आखिरी चरण तक मुकाबले में बनाए रखा।

रत्नायके ने अपनी 12वीं वनडे पारी में तीसरा शतक पूरा किया। उपुल थरंगा को तीन शतकों तक पहुंचने में 21 पारियां लगी थीं। मैच हाथ से निकलने के बावजूद रत्नायके की पारी श्रीलंका के लिए एक और बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि रही।

डॉसन ने इंग्लैंड को निर्णायक विकेट दिलाए

आखिरी 10 ओवर में पांच विकेट बाकी रहते श्रीलंका को 87 रन चाहिए थे। यानी उसे 8.7 रन प्रति ओवर बनाने थे। यह मुश्किल दर थी, लेकिन टूर्नामेंट में पहले दिखी आक्रामक बल्लेबाजी के बाद इसे हासिल करना असंभव नहीं था।

45वें ओवर में रत्नायके को आउट कर डॉसन ने लक्ष्य का पीछा रोकने में मदद की। उन्होंने अपने पूरे 10 ओवर में 49 रन दिए, यानी 4.9 रन प्रति ओवर। ऐसे मैच में, जिसमें दोनों टीमों ने 330 से अधिक रन बनाए, यह किफायती गेंदबाजी थी।

बेकर ने दो विकेट लिए, जबकि करन, हेनरी क्रोकॉम्ब और रूट ने एक-एक विकेट हासिल किया। श्रीलंका की पारी 45.1 ओवर में समाप्त हुई। क्रिकेट की इस संकेतन पद्धति में इसका अर्थ है 45 पूरे ओवर और एक अतिरिक्त वैध गेंद, न कि ओवर का दशमलव अंश।

टूर्नामेंट में डॉसन ने 21.42 रन प्रति विकेट की औसत से सात विकेट लिए। पाकिस्तान के अराफात मिन्हास ने 16.11 की औसत से नौ विकेट लिए। प्रतियोगिता में बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी करने वाले गेंदबाजों की सफलता का यह एक और उदाहरण था।

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दबाव में ब्रूक की कप्तानी के मैक्कलम कायल

सीमित ओवरों की क्रिकेट में इंग्लैंड के कोच ब्रेंडन मैक्कलम ने कहा कि उनकी टीम एक बार फिर दबाव में आ गई थी, लेकिन जरूरी विकेट लेने में सफल रही। उन्होंने उस मुश्किल दौर को संभालने का श्रेय ब्रूक को दिया।

सच कहूं तो जब उनके पांच विकेट गिर चुके थे, तब शायद हम मैच में पीछे थे। लेकिन ब्रूकी ने खेल की रफ्तार धीमी की, कुछ योजनाएं बनाईं और फिर हमें जरूरी विकेट मिल गए।

मैक्कलम ने गेंदबाजी में बदलाव या फील्डिंग की जगह तय करने जैसे फैसलों से आगे बढ़कर ब्रूक की तारीफ की। उन्होंने खिलाड़ियों के बीच ब्रूक की प्रतिष्ठा और फैसलों में दूसरों को शामिल करने की उनकी इच्छा को सराहा।

मैं उनकी कप्तानी की जितनी तारीफ करूं, कम है। सिर्फ उनकी रणनीति ही नहीं, बल्कि उनका नेतृत्व भी।

इंग्लैंड के टीम चयन में भी परिस्थितियों का असर दिखा। आखिरी तीन मैचों में आदिल राशिद को बाहर रखा गया और डॉसन ने प्रमुख स्पिनर की भूमिका निभाई। मैक्कलम ने कहा कि तीनों टीमों के बीच लेग स्पिन का इस्तेमाल सीमित रहा और उन्होंने डॉसन को अनुभवी तथा बेहद प्रतिस्पर्धी बताया।

मुश्किल टूर्नामेंट का अंत, आगे बढ़ने के लिए कुछ आधार

इंग्लैंड की यह जीत उन दो बड़े उदाहरणों के बाद आई, जब व्यक्तिगत बल्लेबाजी उपलब्धियां जीत में नहीं बदल सकी थीं। 22 अक्टूबर को रावलपिंडी में ब्रूक के दोहरे शतक की बदौलत इंग्लैंड ने चार विकेट पर 429 रन बनाए, लेकिन श्रीलंका ने 430 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया। वनडे इतिहास का यह दूसरा सबसे बड़ा सफल रनचेज था।

इसके बाद 25 अक्टूबर को लाहौर में पाकिस्तान के खिलाफ इंग्लैंड की पारी ढहने के दौरान डकैट ने 105 रन बनाए, लेकिन पूरी टीम 241 रन पर आउट हो गई। श्रीलंका के खिलाफ उनके 167 रन लगातार मैचों में शतक बने, जबकि बैंटन ने टूर्नामेंट में तीन बार कम से कम 50 रन बनाए।

अभियान की मुख्य घटनाएं इस क्रम में रहीं:

  • 22 अक्टूबर: ब्रूक ने रावलपिंडी में 202 रन बनाए, लेकिन श्रीलंका ने इंग्लैंड का 430 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया।
  • 25 अक्टूबर: लाहौर में पाकिस्तान के खिलाफ इंग्लैंड के 241 रन पर आउट होने के दौरान डकैट ने 105 रन बनाए।
  • सोमवार: पाकिस्तान पर श्रीलंका की जीत से इंग्लैंड के फाइनल में पहुंचने की आखिरी उम्मीद खत्म हो गई।
  • आखिरी लीग मैच: डकैट के 167 रन और डॉसन के चार विकेट से इंग्लैंड को पहली जीत मिली।

तीन जीत के साथ पाकिस्तान और दो जीत के साथ श्रीलंका फाइनल में पहुंचे। फाइनल गद्दाफी स्टेडियम में शनिवार, 31 अक्टूबर को होना तय था, हालांकि रविवार को भी मैच का दिन बताया गया था। कार्यक्रम में इस विसंगति का समाधान नहीं हुआ।

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अगली परीक्षा ऑस्ट्रेलिया में

इंग्लैंड का अगला दौरा नवंबर में ऑस्ट्रेलिया का है, जहां तीन वनडे और पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जाएंगे। मैक्कलम ने वनडे श्रृंखला से पहले वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक अभ्यास मैच का भी जिक्र किया।

कोच ने पाकिस्तान के अनुभव को दक्षिण अफ्रीका में करीब 12 महीने बाद शुरू होने वाले विश्व कप की तैयारी का हिस्सा बताया। इंग्लैंड इस दौरे से यह सबूत लेकर लौटेगा कि उसकी बल्लेबाजी असाधारण स्कोर बना सकती है, साथ ही इन स्कोरों का बचाव करने की चुनौती के बार-बार सामने आने की याद भी।

मैक्कलम ने फाइनल में नहीं पहुंच पाने पर निराशा जताई और साथ ही बताया कि इंग्लैंड आगे क्या हासिल करना चाहता है।

हम ऐसी टीम बनना चाहते हैं जो 12 महीने बाद विश्व कप में गंभीर चुनौती पेश कर सके। हमें पता है कि हमें बेहतर होना है, और हम होंगे भी। मुझे यकीन है कि हम इन सबक से सीखेंगे।

लाहौर में एक ठोस सुधार दिखा: इंग्लैंड ने लक्ष्य का पीछा करते हुए जरूरी विकेट लिए, जबकि श्रीलंका एक बार फिर उसके कुल स्कोर के करीब पहुंच रहा था। ऑस्ट्रेलिया में ब्रूक और उनके गेंदबाजों को इस सफल समापन को अधिक नियमित प्रदर्शन में बदलने का एक और मौका मिलेगा।

मुख्य बातें

  • इंग्लैंड ने लाहौर में पांच विकेट पर 386 रन बनाने के बाद श्रीलंका को 55 रन से हराया।
  • बेन डकैट ने 132 गेंदों पर 167 रन बनाए और टॉम बैंटन के साथ 163 रन की सलामी साझेदारी की।
  • श्रीलंका की ओर से पवन रत्नायके ने 118 और कुसल मेंडिस ने 89 रन बनाए। टीम 331 रन पर आउट हुई।
  • लियाम डॉसन ने 49 रन देकर चार विकेट लिए और लगातार तीन हार के बाद इंग्लैंड की पहली जीत में अहम भूमिका निभाई।
  • पाकिस्तान और श्रीलंका पहले ही त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल के लिए क्वालीफाई कर चुके थे।
  • इंग्लैंड नवंबर में तीन वनडे और पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना होगा।
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