चिकित्सा शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर नई भूख हड़ताल
डॉ. गोविंदा केसी ने नेपाल से चिकित्सा पाठ्यक्रमों की मंजूरी और छात्रों की सीटों में बढ़ोतरी के फैसले वापस लेने की मांग करते हुए इलाम के नारायण मंदिर में अपनी 25वीं भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि ये फैसले तय मानकों पर खरे नहीं उतरते। उनके बयान के मुताबिक, हड़ताल नेपाली कैलेंडर के कार्तिक 12, 2083 को गुरुवार शाम 5 बजे शुरू हुई।
विषय-सूची
- चिकित्सा शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर नई भूख हड़ताल
- गेटा चिंता का मुख्य केंद्र क्यों है
- सीटों के आवंटन से नियामक पर उठे सवाल
- छात्रवृत्ति की मांग छात्रों के लिए क्या मायने रखती है
- मंत्रालय का कहना है कि सुधार और कार्यदल आगे बढ़ रहे हैं
- विवाद एक और भूख हड़ताल तक कैसे पहुंचा
- नेपाल भर के मरीज और प्रस्तावित कॉलेज
- मुख्य बातें
चिकित्सा शिक्षा के लिए अभियान चलाने वाले केसी ने छह मांगें रखी हैं। इनमें वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ स्वतंत्र जांच, गेटा शिक्षण अस्पताल को पूरी तरह चालू करना और सार्वजनिक या सरकारी संसाधनों का उपयोग करने वाले संस्थानों में कम से कम 75 प्रतिशत सीटें छात्रवृत्ति के लिए आरक्षित करने की शर्त लागू करना शामिल है।
विवाद के केंद्र में सुदूरपश्चिम प्रदेश के कैलाली स्थित गेटा में शहीद दशरथ चंद स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय है। केसी ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र में एमबीबीएस और नर्सिंग कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि संस्थान में जरूरी बुनियादी ढांचे और योग्य शिक्षकों की कमी है तथा वह कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं करता।
नेपाल का शिक्षा मंत्रालय कहता है कि गेटा में इसी शैक्षणिक वर्ष के दौरान पढ़ाई शुरू होगी। मंत्रालय का यह भी कहना है कि कार्यदल केसी के साथ हुए पहले के समझौते को लागू कर रहे हैं। इस पर मतभेद है कि सरकारी कार्रवाई से वादा किए गए सुधार हो रहे हैं या नहीं।
डॉक्टर और चिकित्सा शिक्षा सुधार अभियान के अगुआ केसी ने कहा कि उनकी मांगों पर कार्रवाई किए बिना बढ़ाई गई समयसीमा भी समाप्त हो गई। अपना फैसला घोषित करते हुए उन्होंने कहा:
मैं आज शाम 5 बजे से अपनी भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा करता हूं, क्योंकि सरकार बढ़ाई गई समयसीमा के भीतर भी हमारी मांगों पर कार्रवाई करने में विफल रही है।
यह विवाद विश्वविद्यालयों में दाखिले तक सीमित नहीं है। केसी चिकित्सा प्रशिक्षण की गुणवत्ता को मरीजों को मिलने वाले इलाज, डॉक्टर या नर्स बनने की लागत और पश्चिमी नेपाल में लोगों को स्वास्थ्य सेवा पाने के लिए करनी पड़ने वाली लंबी यात्राओं से जोड़ते हैं।
गेटा चिंता का मुख्य केंद्र क्यों है
वर्षों के अभियान के बाद सार्वजनिक संसाधनों से गेटा मेडिकल कॉलेज और शिक्षण अस्पताल बनाए गए। केसी का कहना है कि निर्माण पूरा हुए आधे दशक से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी अस्पताल पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा।
केसी चाहते हैं कि अस्पताल को तुरंत पूरी तरह चालू किया जाए और शिक्षकों, बुनियादी ढांचे तथा कानूनी जरूरतों को पूरा करने के बाद शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू हों। उनकी मांग में पढ़ाई के विस्तार से पहले अस्पताल का संचालन प्राथमिकता है।
शिक्षण अस्पताल के दो जुड़े हुए काम होते हैं: मरीजों का इलाज करना और भावी डॉक्टरों तथा नर्सों को निगरानी में व्यावहारिक अनुभव देना। एमबीबीएस डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने वाली स्नातक चिकित्सा डिग्री है। छात्रों को कक्षा में पढ़ाई के साथ-साथ चालू नैदानिक सेवाओं और योग्य शिक्षकों की जरूरत होती है।
केसी का आरोप है कि जरूरी सुविधाओं और कानूनी मानकों की कमी वाले संस्थानों को नए कार्यक्रमों के समर्थन में शिक्षण अस्पतालों के रूप में पेश किया जा रहा है। वह विश्वविद्यालय के संचालन कानून के उन प्रावधानों में बदलाव भी चाहते हैं जिन्हें वह विवादित और दलगत राजनीति से प्रभावित बताते हैं।
शिक्षा मंत्रालय गेटा में प्रस्तावित पाठ्यक्रमों को चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने की पहल बताता है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में वहां कई विषयों की पढ़ाई शुरू होगी। इसलिए मुख्य मतभेद पाठ्यक्रम शुरू करने की शर्तों को लेकर है, जबकि दोनों पक्ष सार्वजनिक चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को लक्ष्य बताते हैं।
सीटों के आवंटन से नियामक पर उठे सवाल
चिकित्सा शिक्षा आयोग तय करता है कि संस्थान कितने छात्रों को दाखिला दे सकते हैं। केसी चाहते हैं कि उन सभी कॉलेजों में बढ़ी हुई सीटों की मंजूरी वापस ली जाए जो कथित तौर पर निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। अधिक दाखिलों का अर्थ है कि ज्यादा छात्र संस्थान के शिक्षकों, नैदानिक प्रशिक्षण स्थलों और सुविधाओं को साझा करेंगे।
केसी ने आयोग के उपाध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि अधिकारी पहले नेपाल आर्मी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य रह चुके हैं और बाद में कॉलेज की सीटें बढ़ाई गईं। उनका यह भी आरोप है कि उपाध्यक्ष के परिवार के एक सदस्य को छात्र कोटा तय करने वाली समिति में नियुक्त किया गया।
हितों का टकराव तब हो सकता है जब किसी अधिकारी के निजी संबंध या संस्थागत जुड़ाव उस सार्वजनिक फैसले से जुड़े हों, जिसे तय करने में वह मदद कर रहा हो। केसी चाहते हैं कि इस मामले में जांच हो कि क्या ऐसे हितों ने नियुक्तियों या फैसलों को प्रभावित किया।
केसी आयोग के निदेशक का पद खाली होने की ओर भी ध्यान दिलाते हैं, जबकि सीटों के आवंटन में इस पद की अहम जिम्मेदारियां हैं। वह आयोग के उपाध्यक्ष और गेटा विश्वविद्यालय के कुलपति तथा रजिस्ट्रार को उच्च स्तर की स्वतंत्र जांच पूरी होने तक निलंबित करने की मांग कर रहे हैं।
प्रस्तावित जांच में नियुक्ति प्रक्रिया, शैक्षणिक योग्यता, पेशेवर अनुभव, हितों के संभावित टकराव और अधिकारियों के पद संभालने के बाद लिए गए फैसलों की पड़ताल की जाएगी। केसी दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई चाहते हैं। ये केसी के आरोप और मांगें हैं; मंत्रालय का जवाब संस्थागत सुधारों का जिक्र करता है, लेकिन हर आरोप पर अलग-अलग बात नहीं करता।
छात्रवृत्ति की मांग छात्रों के लिए क्या मायने रखती है
केसी चाहते हैं कि सरकारी या सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग करने वाले संस्थानों में कम से कम 75 प्रतिशत सीटें छात्रवृत्ति के लिए रखने की शर्त सख्ती से लागू हो। सीधे शब्दों में कहें तो 100 छात्रों के प्रवेश में कम से कम 75 छात्रवृत्ति वाली सीटें होंगी।
उनकी मांग सार्वजनिक खर्च से बनी इमारतों और संस्थानों को उन छात्रों की पहुंच से जोड़ती है जो चिकित्सा शिक्षा की पूरी लागत नहीं उठा सकते। केसी छात्रवृत्ति के इस हिस्से में किसी भी कटौती और तय मानकों पर खरे न उतरने वाले अधिक दाखिलों का विरोध करते हैं।
शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय चिकित्सा शिक्षा अधिनियम, 2075 के बाद नि:शुल्क छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों का चयन और प्रबंधन इसकी उपलब्धियों में शामिल हैं। केसी की शिकायत यह है कि संस्थानों के विस्तार के साथ इन सुरक्षा उपायों को लागू किया जा रहा है या नहीं।
केसी का तर्क है कि छात्रवृत्तियां घटाने और पर्याप्त सुविधाओं के बिना दाखिले बढ़ाने से निजी व्यावसायिक हितों को फायदा हो सकता है। चिकित्सा प्रशिक्षण के उद्देश्य पर अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा:
चिकित्सा शिक्षा व्यावसायिक हितों का साधन नहीं है। यह नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन से सीधे जुड़ी सेवा है। इसकी गुणवत्ता, निष्पक्ष नियमन या सार्वजनिक संस्थानों के प्रभावी संचालन से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मंत्रालय का कहना है कि सुधार और कार्यदल आगे बढ़ रहे हैं
नेपाल के शिक्षा मंत्रालय ने चिकित्सा शिक्षा सुधार में केसी के योगदान को महत्वपूर्ण बताया है। मंत्रालय का कहना है कि अभियानकर्ता और अलग-अलग सरकारों के बीच हुए समझौतों से नीतिगत और संस्थागत बदलाव लाने में मदद मिली।
मंत्रालय राष्ट्रीय चिकित्सा शिक्षा अधिनियम, 2075 को चिकित्सा शिक्षा आयोग की स्थापना, साझा प्रवेश परीक्षा शुरू करने और नि:शुल्क छात्रवृत्ति के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित करने का आधार बताता है। साझा प्रवेश परीक्षा से आवेदकों को चिकित्सा शिक्षा में दाखिले का एक समान रास्ता मिलता है, बजाय इसके कि हर संस्थान की अलग प्रवेश प्रक्रिया हो।
मंत्रालय का यह भी कहना है कि संबद्धता से जुड़े फैसले, जिनके जरिए शैक्षणिक निकाय संस्थानों को चिकित्सा शिक्षा देने की अनुमति देते हैं, अब अधिक पारदर्शी और मानकों पर आधारित हैं। उसका कहना है कि केसी के साथ समझौते में शामिल विषयों पर कार्यदल बनाए गए हैं और वे सक्रिय हैं।
केसी का कहना है कि समझौते पर करीब तीन महीने से अमल नहीं हुआ है और बाद के फैसले उसके उद्देश्य के विपरीत हैं। मंत्रालय जारी कामकाज की बात करता है; केसी अस्पताल, नियुक्तियों, छात्रवृत्तियों और दाखिलों पर पूरी कार्रवाई चाहते हैं।
विवाद एक और भूख हड़ताल तक कैसे पहुंचा
केसी इससे पहले धनगढी में अपनी 24वीं भूख हड़ताल कर चुके हैं। उस विरोध प्रदर्शन में चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र की नियुक्तियों और गेटा शिक्षण अस्पताल को पूरी तरह चालू करने से जुड़ी मांगें शामिल थीं।
उनके बयान में बताया गया घटनाक्रम उस पिछली हड़ताल को मौजूदा भूख हड़ताल से जोड़ता है:
- धनगढी में 24वीं भूख हड़ताल के दौरान केसी ने गेटा में कार्रवाई और विवादित नियुक्तियों का मुद्दा उठाया।
- केसी के बयान और मंत्रालय के विवरण के मुताबिक, सरकार ने सावन 11, 2083 को स्वास्थ्य, शिक्षा, सुशासन और सामाजिक न्याय पर उनसे समझौता किया।
- इसके बाद के करीब तीन महीनों में केसी का कहना है कि समझौते की प्रतिबद्धताओं पर अमल नहीं हुआ।
- बढ़ाई गई समयसीमा समाप्त होने के बाद उन्होंने कार्तिक 12, 2083 को शाम 5 बजे इलाम में अपनी 25वीं भूख हड़ताल शुरू की।
शुरुआती घटनाक्रम में अलग-अलग तारीखें दी गई हैं: समझौते की तारीख 25 जून और हड़ताल शुरू होने की तारीख अक्टूबर 29, 2083 बताई गई है। केसी के विस्तृत बयान में इसके बजाय सावन 11 और कार्तिक 12, 2083 का उल्लेख है; इन तारीखों के अंतर को सुलझाया नहीं गया है।
केसी नेपाल में 9 सितंबर, 2025 को हुई आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ की जांच से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को लागू करने की मांग भी करते हैं। यह उस व्यापक सुशासन और सामाजिक न्याय समझौते का हिस्सा है जिसे वह सरकार से पूरा करने को कह रहे हैं।
नेपाल भर के मरीज और प्रस्तावित कॉलेज
केसी का तर्क है कि सार्वजनिक अस्पतालों की सेवाएं सीमित रहने पर सुदूरपश्चिम के लोगों को सीधे नुकसान उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि कई लोगों को इलाज के लिए नेपालगंज, काठमांडू या भारत जाना पड़ता है, जिससे चिकित्सा खर्च के साथ यात्रा और ठहरने का खर्च भी जुड़ जाता है।
केसी इन यात्राओं और आर्थिक दबाव को इलाज में देरी तथा मौत, लंबे समय की बीमारी या विकलांगता के जोखिम से जोड़ते हैं। उनके अनुसार, गेटा को पूरी तरह चालू करने से उस आबादी को अधिक इलाज उपलब्ध होगा, जिसकी सेवा के लिए यह संस्थान बनाया गया था।
उनकी छठी मांग इलाम, उदयपुर और डडेलधुरा में सरकारी मेडिकल कॉलेज या स्वास्थ्य विज्ञान अकादमी की स्थापना में तेजी लाने की है। केसी का कहना है कि शुरुआती प्रक्रियाएं शुरू हो चुकी हैं और वह पहले की प्रतिबद्धताओं पर अमल चाहते हैं। वह हर प्रदेश में कम से कम एक सरकारी मेडिकल कॉलेज या स्वास्थ्य विज्ञान अकादमी बनाने की मांग भी दोहराते हैं।
मधेश प्रदेश का बर्दिबास भी मतभेद का एक मुद्दा है। केसी का कहना है कि सरकार ने मेडिकल कॉलेज निर्माण परियोजना रद्द कर दी और वह इस फैसले को पलटकर निर्माण कार्य फिर शुरू करने की मांग करते हैं। वहीं शिक्षा मंत्रालय बर्दिबास के साथ सुर्खेत और बुटवल को भी उन जगहों में गिनाता है जहां चिकित्सा शिक्षा का बुनियादी ढांचा विकसित करने का काम जारी है।
इन दोनों पक्षों के बयानों से संस्थान का व्यावहारिक स्तर पर क्या हुआ है, यह इंतजार कर रहे लोगों के लिए स्पष्ट नहीं है। प्रस्तावित कॉलेजों को लेकर केसी की मांगें दो ठोस प्राथमिकताओं को जोड़ती हैं: काठमांडू से बाहर अधिक सार्वजनिक संस्थान और छात्रों तथा मरीजों की सेवा के लिए पर्याप्त कर्मचारी, सुविधाएं और छात्रवृत्ति सीटें।
मुख्य बातें
- गोविंदा केसी ने इलाम के नारायण मंदिर में अपनी 25वीं भूख हड़ताल शुरू की और इसके शुरू होने का समय शाम 5 बजे बताया।
- वह चाहते हैं कि जरूरी शर्तें पूरी करके शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने से पहले गेटा शिक्षण अस्पताल पूरी तरह चालू हो।
- केसी विवादित पाठ्यक्रम मंजूरियों और सीटों में बढ़ोतरी वापस लेने के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की स्वतंत्र जांच चाहते हैं।
- उनकी मांग है कि सार्वजनिक या सरकारी संसाधनों का उपयोग करने वाले संस्थानों में कम से कम 75 प्रतिशत सीटें छात्रवृत्ति के लिए हों।
- शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि सुधार आगे बढ़ रहे हैं और कार्यदल केसी के साथ हुए समझौते को लागू कर रहे हैं।
- केसी इलाम, उदयपुर और डडेलधुरा में सार्वजनिक चिकित्सा संस्थान तथा बर्दिबास निर्माण परियोजना बहाल करने की भी मांग करते हैं।






