बेंगलुरु मेट्रो की पिंक लाइन को सुरक्षा मंजूरी, 15 नवंबर को उद्घाटन की पुष्टि का इंतजार

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Bengaluru Metro Pink Line Gets Safety Clearance, November 15 Opening Awaiting Confirmation

सुरक्षा मंजूरी से बन्नेरघट्टा रोड मेट्रो का उद्घाटन करीब

बेंगलुरु मेट्रो की एलिवेटेड पिंक लाइन को कलेना अग्रहारा और तवरेकेरे के बीच यात्री सेवाएं शुरू करने के लिए सुरक्षा मंजूरी मिल गई है। इससे बन्नेरघट्टा रोड के छह स्टेशन खुलने के करीब आ गए हैं। 28 अक्टूबर को जारी इस अनुमति से नियामकीय प्रक्रिया का एक अहम चरण पूरा हुआ है, हालांकि उद्घाटन की तारीख की पुष्टि अभी बाकी है।

विषय-सूची
  1. सुरक्षा मंजूरी से बन्नेरघट्टा रोड मेट्रो का उद्घाटन करीब
  2. मेट्रो सुरक्षा आयुक्त ने क्या अधिकृत किया
  3. अक्टूबर के निरीक्षण से मंजूरी तक
  4. उद्घाटन की तारीख की पुष्टि क्यों बाकी है
  5. छह स्टेशन और नया इंटरचेंज
  6. 90 किमी प्रति घंटे के परीक्षण के बावजूद सीमा 80 किमी प्रति घंटे क्यों
  7. यात्री सुरक्षा के इंतजाम पटरियों से आगे तक
  8. ऑटोमेशन, कैमरे और सेवा का पहला महीना
  9. एलिवेटेड खंड लंबी लाइन का पहला हिस्सा
  10. मुख्य बातें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को इस खंड का उद्घाटन कर सकते हैं। ग्रेटर बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि केंद्र के प्रतिनिधियों ने नवंबर के मध्य में संभावित दौरे के संकेत दिए थे, लेकिन तारीख की पक्की पुष्टि नहीं की थी।

इस कॉरिडोर की लंबाई आम तौर पर 7.5 किमी बताई जाती है। सुरक्षा आदेश में अधिकृत खंड की लंबाई 7.38 किमी दर्ज है। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMRCL) पांच ट्रेनें चलाने की योजना बना रहा है। व्यस्त समय में हर छह मिनट और बाकी समय हर 10 मिनट में सेवा उपलब्ध होगी।

एलिवेटेड खंड खुलने से बेंगलुरु का परिचालनरत मेट्रो नेटवर्क 96.10 किमी से बढ़कर 103.60 किमी हो जाएगा। यात्रियों के लिए इसका तात्कालिक लाभ बन्नेरघट्टा रोड के沿 एक नया रेल संपर्क होगा, जिसमें जयदेव अस्पताल पर इंटरचेंज भी शामिल है। मध्य बेंगलुरु से उत्तर की ओर नागवारा तक लंबी यात्रा के लिए पिंक लाइन का बाकी कॉरिडोर बाद में खुलना जरूरी है।

मेट्रो सुरक्षा आयुक्त ने क्या अधिकृत किया

दक्षिणी सर्कल के मेट्रो रेलवे सुरक्षा आयुक्त वी. वेंकटसुब्रमणियन ने निरीक्षण, तकनीकी दस्तावेजों और गति परीक्षण के बाद यात्री सेवाओं को मंजूरी दी। 28 अक्टूबर 2026 के आदेश में दोनों दिशाओं की नई पटरियां और 750 वोल्ट डायरेक्ट करंट आपूर्ति से चलने वाली इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन प्रणाली शामिल है।

आयुक्त ने मेट्रो रेल (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 की धारा 15(1) के तहत इस खंड का आकलन किया। नई मेट्रो रेल पर यात्रियों को सफर की अनुमति देने की कानूनी प्रक्रिया का यह एक हिस्सा है।

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वेंकटसुब्रमणियन ने मंजूरी आदेश में अपने फैसले का आधार बताया:

किए गए निरीक्षणों, परीक्षणों और गति परीक्षणों के नतीजों तथा BMRCL की ओर से सौंपे गए प्रमाणपत्रों/दस्तावेजों और अन्य जानकारी की समीक्षा के आधार पर मेरी राय है कि मेट्रो रेल (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 की धारा 15(1) के प्रावधानों का पर्याप्त रूप से पालन किया गया है,

अनुमति में संचालन की सीमाएं और BMRCL के लिए आगे की आवश्यकताएं भी शामिल हैं। यात्री सेवाएं शुरू करने से पहले निगम को प्रमाणित करना होगा कि पटरियां और ट्रेनें इस्तेमाल के लिए उपयुक्त हैं, संचालन और रखरखाव कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण देना होगा तथा यात्री सुविधाओं और सुरक्षा उपकरणों की जरूरी जांच पूरी करनी होगी।

अक्टूबर के निरीक्षण से मंजूरी तक

वेंकटसुब्रमणियन और उनकी टीम ने 6 से 8 अक्टूबर तक एलिवेटेड कॉरिडोर का निरीक्षण किया। समीक्षा में कोथनूर रखरखाव डिपो और बैयप्पनहल्ली स्थित ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर भी शामिल थे। इस तरह जांच सिर्फ स्टेशनों और पटरियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ट्रेन के रखरखाव और निगरानी से जुड़ी सुविधाओं को भी इसमें शामिल किया गया।

BMRCL को 9 अक्टूबर को निरीक्षण संबंधी टिप्पणियां मिलीं। समीक्षा में 36 समस्याएं दर्ज की गईं, जिनमें अग्नि सुरक्षा के जरूरी इंतजामों की कमी, खराब लिफ्ट, क्षतिग्रस्त इलेक्ट्रिकल अर्थिंग कनेक्शन और ट्रेन परीक्षण से जुड़े लंबित मामले शामिल थे। अर्थिंग बिजली के दोष की स्थिति में करंट को सुरक्षित रास्ता देती है, जिससे लोगों और उपकरणों को बिजली के झटके से बचाने में मदद मिलती है।

BMRCL अधिकारियों ने इन टिप्पणियों को अंतिम सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि इनमें संरचनात्मक दोष या गंभीर सुरक्षा चिंताएं शामिल नहीं थीं। निगम ने तस्वीरों और तकनीकी विवरणों के साथ अनुपालन दस्तावेज तैयार किए, 15 अक्टूबर को कागजात जमा किए और बाद में उससे अतिरिक्त जानकारी मांगी गई।

मंजूरी की दिशा में उठाए गए मुख्य कदम:

  • 6 से 8 अक्टूबर: सुरक्षा आयुक्त और उनकी टीम ने कॉरिडोर तथा उससे जुड़ी सुविधाओं का निरीक्षण किया।
  • 9 अक्टूबर: BMRCL को निरीक्षण संबंधी टिप्पणियां मिलीं।
  • 15 अक्टूबर: BMRCL ने अनुपालन दस्तावेज जमा किए; इसके बाद अतिरिक्त सामग्री मांगी गई।
  • 22 अक्टूबर: बायरे गौड़ा ने कहा कि परीक्षण सेवाएं पूरी हो चुकी हैं और चार से पांच दिनों में मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
  • 27 अक्टूबर: गति परीक्षण के दौरान एक विशेष ट्रेन 90 किमी प्रति घंटे तक पहुंची।
  • 28 अक्टूबर: सुरक्षा आयुक्त ने शर्तों के साथ यात्री सेवाओं को अधिकृत किया।

बायरे गौड़ा ने कहा कि सुरक्षा और बिजली संबंधी परीक्षण सात से आठ महीने तक चले। अंतिम निरीक्षण और उसके बाद दस्तावेजों की जांच इस लंबी परीक्षण प्रक्रिया के आखिरी चरण थे।

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उद्घाटन की तारीख की पुष्टि क्यों बाकी है

शिवकुमार ने सार्वजनिक रूप से 15 नवंबर की तारीख का सुझाव दिया है, लेकिन बायरे गौड़ा ने कहा कि केंद्र के प्रतिनिधियों की ओर से पक्की सहमति अभी बाकी है। उद्घाटन की तारीख तय कराने के लिए उन्होंने नवंबर की शुरुआत में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने की योजना बनाई।

ग्रेटर बेंगलुरु विकास के जिम्मेदार मंत्री बायरे गौड़ा ने एक सार्वजनिक बयान में राज्य सरकार का रुख बताया:

भारत सरकार से उद्घाटन की तारीख मिलते ही हम सार्वजनिक सेवा शुरू करने के लिए तैयार हैं। हमने तारीख का अनुरोध करते हुए उन्हें पत्र भेज दिया है। हम एलिवेटेड पिंक लाइन के उद्घाटन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

3 नवंबर की तारीख पर भी संभावित उद्घाटन के रूप में चर्चा हुई थी। यह मोदी की उपलब्धता और पुणे मेट्रो की लाइन 3 के एक तय कार्यक्रम पर निर्भर था। बेंगलुरु के कुछ निवासियों को उम्मीद थी कि कर्नाटक स्थापना दिवस, कन्नड़ राज्योत्सव, यानी 1 नवंबर को कॉरिडोर खुल जाएगा।

इन बयानों में उद्घाटन की पक्की तारीख, यात्री सेवाओं का पहला दिन, किराया और रोजाना संचालन के घंटे घोषित नहीं किए गए हैं। यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों के लिए अगला व्यावहारिक पड़ाव BMRCL की यह घोषणा है कि ट्रेनें यात्रियों को कब से लेकर चलेंगी।

यह इंतजार उन पुरानी सार्वजनिक मांगों के बाद जारी है जिनमें सुरक्षा मंजूरी मिलते ही तैयार मेट्रो खंड खोलने की मांग की गई थी। देरी के विरोध में निवासी पहले प्रतीकात्मक उद्घाटन कर चुके हैं, जबकि जनदबाव के बाद कुछ खंड औपचारिक समारोह का इंतजार किए बिना सेवाएं शुरू कर चुके हैं।

छह स्टेशन और नया इंटरचेंज

एलिवेटेड कॉरिडोर में कलेना अग्रहारा से तवरेकेरे की ओर क्रम से छह स्टेशन हैं:

  • कलेना अग्रहारा
  • हुलिमावु
  • IIMB
  • जेपी नगर चौथा चरण
  • जयदेव अस्पताल
  • तवरेकेरे

जयदेव अस्पताल बेंगलुरु का तीसरा मेट्रो इंटरचेंज स्टेशन बनने जा रहा है। इंटरचेंज से यात्री एक लाइन से दूसरी लाइन पर जा सकते हैं और किसी एक कॉरिडोर के सीधे सेवा वाले स्टेशनों से आगे भी यात्रा जारी रख सकते हैं।

व्यस्त समय में हर छह मिनट पर ट्रेन चलाने की BMRCL की योजना के तहत, अगर सेवाएं बराबर अंतराल पर चलें तो हर दिशा में लगभग 10 ट्रेनें प्रति घंटे होंगी। व्यस्त समय के अलावा 10 मिनट का अंतराल लगभग छह ट्रेनें प्रति घंटे के बराबर होगा। ये गणनाएं प्रस्तावित आवृत्ति के आधार पर हैं; वास्तविक सेवा व्यवस्था के लिए यात्रियों को प्रकाशित समय-सारणी देखनी होगी।

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एलिवेटेड खंड पर शुरुआती सेवा के लिए पांच ट्रेनें चलाने की योजना है। बन्नेरघट्टा रोड पर यात्रा करने वालों को इस कॉरिडोर से छह स्टेशन क्षेत्रों और इंटरचेंज को जोड़ने वाला नया सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलेगा। इन स्टेशनों से आगे की यात्रा के लिए यात्रियों को मेट्रो की दूसरी सेवा, सड़क मार्ग या पैदल सफर करना होगा।

90 किमी प्रति घंटे के परीक्षण के बावजूद सीमा 80 किमी प्रति घंटे क्यों

27 अक्टूबर के गति परीक्षण में दोनों पटरियों पर एक विशेष ट्रेन चलाई गई और वह 90 किमी प्रति घंटे तक पहुंची। सुरक्षा आदेश सामान्य संचालन की अधिकतम गति 80 किमी प्रति घंटे तय करता है, या फिर ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली जितनी कम गति की अनुमति दे। प्लेटफॉर्म पर अधिकतम गति 60 किमी प्रति घंटे तय की गई है।

ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन, जिसे आम तौर पर ATP कहा जाता है, ट्रेन की आवाजाही पर नजर रखता है और सुरक्षा सीमाएं लागू कर सकता है। अगर किसी खास हिस्से पर यह प्रणाली 80 किमी प्रति घंटे से कम गति की अनुमति देती है, तो ट्रेन को उसी कम सीमा का पालन करना होगा।

परीक्षण ट्रेन में OMS 2000 मापन प्रणाली लगी थी। आदेश में दर्ज है कि परीक्षण के दौरान अधिकतम त्वरण 0.15 g से अधिक नहीं था। यहां g का मतलब गुरुत्वाकर्षण के कारण होने वाला त्वरण है। मंजूरी से पहले समीक्षा की गई तकनीकी जानकारी में यह माप भी शामिल था।

ट्रेन को अधिकृत यात्री गति से तेज चलाकर परीक्षण करने से आयुक्त को नियंत्रित परिस्थितियों में रेलवे के व्यवहार की जानकारी मिलती है। रोजमर्रा का संचालन मंजूरी में तय सीमाओं के अनुसार होगा और इसमें स्टेशन पर रुकना तथा ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की पाबंदियां भी लागू रहेंगी।

यात्री सुरक्षा के इंतजाम पटरियों से आगे तक

आयुक्त के निर्देश उन उपकरणों को भी कवर करते हैं जिनका यात्रियों को सफर के दौरान इस्तेमाल करना होगा। सभी लिफ्ट और एस्केलेटर की उचित संचालन और सुरक्षा के लिए जांच जरूरी है। यात्रियों को ट्रेन के दरवाजों की जगह पहचानने में मदद देने के लिए BMRCL को प्लेटफॉर्म पर दरवाजों की स्थिति के निशान भी लगाने होंगे।

अन्य आवश्यकताओं में तय स्टेशनों पर संकेतक लगाना और उनकी जांच करना तथा सामान स्कैनर, डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर, हाथ में पकड़े जाने वाले मेटल डिटेक्टर और कैमरे चालू करना शामिल है। इन उपायों से रेलवे की तकनीकी मंजूरी और स्टेशनों को सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए तैयार करने का व्यावहारिक काम जुड़ता है।

आयुक्त ने दरवाजे बंद होते समय रुकावट का पता लगाने वाला एंटी-ड्रैग फीचर लगाने का भी निर्देश दिया। इसका उद्देश्य दरवाजे में फंसी किसी वस्तु की पहचान करना है, ताकि चलती ट्रेन उसे अपने साथ न खींच ले।

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एलिवेटेड खंड के लिए दिए गए निर्देशों में जल निकासी व्यवस्था में सुधार भी शामिल है। BMRCL को पीन्या में बैकअप ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर चालू करने को प्राथमिकता देनी होगी। मुख्य केंद्र उपलब्ध न होने पर बैकअप कंट्रोल सेंटर से दूसरी जगह से रेलवे संचालन की निगरानी की जा सकती है।

मंजूरी के तहत स्वतंत्र सुरक्षा आकलनकर्ता की तय शर्तों का पूरी तरह पालन करना होगा। यह आकलनकर्ता रेलवे का निर्माण या संचालन करने वाले संगठन से अलग होकर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करता है।

ऑटोमेशन, कैमरे और सेवा का पहला महीना

एलिवेटेड पिंक लाइन को ग्रेड ऑफ ऑटोमेशन 2 पर संचालन की मंजूरी मिली है, जिसे आम तौर पर GoA2 कहा जाता है। इसमें ट्रेन नियंत्रण के कुछ काम स्वचालित होते हैं, जबकि चालक संचालन में शामिल रहता है। BMRCL की आगे चलकर GoA4 पर जाने की योजना है, जिसमें ट्रेन बिना चालक के चल सकती है।

GoA2 से आगे बढ़ने से पहले BMRCL को साइबर सुरक्षा योजना के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेनी होगी। इस दस्तावेज में बताया जाता है कि अहम प्रणालियों को डिजिटल खतरों से कैसे सुरक्षित रखा जाता है। स्वतंत्र प्रमाणित विशेषज्ञों को महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणालियों की साइबर सुरक्षा का आकलन करना होगा।

आयुक्त ने CCTV बैंडविड्थ बढ़ाने का भी निर्देश दिया, ताकि रिकॉर्ड की गई जानकारी को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सके। साथ ही, चेहरे की पहचान और भीड़भाड़ का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के औजार इस्तेमाल करने को कहा। भीड़ का पता लगाने की शर्त का उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां यात्रियों की संख्या पर अधिक ध्यान देने की जरूरत पड़ सकती है।

BMRCL को यात्री सेवाओं के पहले महीने की करीबी निगरानी करनी होगी और टिप्पणियों तथा जरूरत पड़ने पर किए गए सुधारात्मक उपायों की रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस तरह उद्घाटन के बाद संचालन की एक तय समीक्षा अवधि होगी, जिसमें यात्रियों के साथ रेलवे के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।

एलिवेटेड खंड लंबी लाइन का पहला हिस्सा

पूरी पिंक लाइन कलेना अग्रहारा से नागवारा तक चलाने की योजना है। इसकी घोषित 21.3 किमी लंबाई में 7.5 किमी का एलिवेटेड खंड और 13.8 किमी का भूमिगत कॉरिडोर शामिल है, जो डेयरी सर्कल, एम.जी. रोड, शिवाजीनगर और टैनरी रोड जैसे इलाकों से होकर गुजरेगा।

प्रकाशित लंबाइयों के हिसाब से भूमिगत खंड पूरी प्रस्तावित लाइन का लगभग 65% है। इसलिए एलिवेटेड खंड खुलने पर पिंक लाइन का करीब एक तिहाई हिस्सा ही सेवा में आएगा; मार्ग का बड़ा हिस्सा भूमिगत खंड के चालू होने पर निर्भर रहेगा।

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BMRCL की योजना नवंबर में बाकी कॉरिडोर पर परीक्षण सेवाएं शुरू करने की थी। उस खंड के अगले साल खुलने की संभावना है। भूमिगत मार्ग पिंक लाइन को मध्य बेंगलुरु से होते हुए नागवारा तक पहुंचाएगा और शहर के दक्षिणी तथा उत्तरी हिस्सों के बीच लंबा संपर्क बनाएगा।

एलिवेटेड खंड का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था। देरी की वजहों में मूल ठेकेदार की ओर से दायित्व पूरे न करने के आरोपों के बाद BMRCL का उसका अनुबंध समाप्त करना शामिल था। लंबे निर्माण काल के बाद सुरक्षा मंजूरी एक प्रगति का संकेत है, जबकि उद्घाटन का कार्यक्रम अभी लंबित व्यवस्थाओं पर निर्भर है।

पूरे मेट्रो नेटवर्क में मौजूदा 96.10 किमी में 7.5 किमी जुड़ने का मतलब लगभग 7.8% की वृद्धि होगी। 103.60 किमी का नया कुल आंकड़ा बेंगलुरु को 100 किमी से अधिक परिचालनरत मेट्रो मार्गों वाला शहर बना देगा। यह पहले से यात्रियों को सेवा दे रही पर्पल, ग्रीन और येलो लाइनों पर विस्तार होगा।

मुख्य बातें

  • 28 अक्टूबर की सुरक्षा मंजूरी कलेना अग्रहारा और तवरेकेरे के बीच एलिवेटेड पिंक लाइन पर लागू होती है।
  • इस खंड में छह स्टेशन हैं, जिनमें जयदेव अस्पताल पर बनने वाला इंटरचेंज भी शामिल है।
  • उद्घाटन के लिए 15 नवंबर की तारीख सुझाई गई है, लेकिन पक्की तारीख और यात्री सेवा शुरू होने की तारीख की पुष्टि नहीं हुई है।
  • BMRCL पांच ट्रेनें चलाने की योजना बना रहा है: व्यस्त समय में हर छह मिनट और बाकी समय हर 10 मिनट पर।
  • यात्री सेवाओं की गति 80 किमी प्रति घंटे या ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की कम सीमा तक होगी; प्लेटफॉर्म पर सीमा 60 किमी प्रति घंटे है।
  • BMRCL को सेवा शुरू करने की तैयारी से जुड़ी आवश्यकताएं पूरी करनी होंगी और यात्री सेवाओं के पहले महीने की रिपोर्ट देनी होगी।
  • एलिवेटेड खंड खुलने से बेंगलुरु का परिचालनरत मेट्रो नेटवर्क 96.10 किमी से बढ़कर 103.60 किमी हो जाएगा।
  • नागवारा की ओर जाने वाला भूमिगत कॉरिडोर पूरी 21.3 किमी लंबी पिंक लाइन का बाद का चरण है।
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