जेट ईंधन की लागत बढ़ने पर इंडिगो ने ईंधन शुल्क बढ़ाया, अन्य भारतीय एयरलाइंस भी पीछे-पीछे

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IndiGo Raises Fuel Charges as Jet Fuel Costs Surge, With Other Indian Airlines Following

दिल्ली में जेट ईंधन 137 रुपये प्रति लीटर पहुंचा, नए बुकिंग शुल्क लागू

इंडिगो ने 6 अक्टूबर 2026 को 00:01 बजे से की गई नई बुकिंग पर घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन शुल्क बढ़ाकर 375 से 1,300 रुपये और अंतरराष्ट्रीय मार्गों के लिए 1,000 से 10,000 रुपये कर दिया है। यह कदम दिल्ली में एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत जुलाई में करीब 110 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अक्टूबर में 137 रुपये पहुंचने के बाद उठाया गया है। यह लगभग 24.5% की वृद्धि है।

विषय-सूची
  1. दिल्ली में जेट ईंधन 137 रुपये प्रति लीटर पहुंचा, नए बुकिंग शुल्क लागू
  2. घरेलू यात्रियों को कितना अधिक भुगतान करना होगा?
  3. अंतरराष्ट्रीय शुल्क में क्षेत्रों के हिसाब से अलग-अलग बढ़ोतरी
  4. अलग-अलग आंकड़ों का क्या अर्थ है
  5. ईंधन की लगातार तीन मासिक बढ़ोतरी ने जुलाई की राहत खत्म की
  6. एयर इंडिया और अकासा ने अपनी-अपनी शुल्क व्यवस्था लागू की
  7. लागत की आंशिक भरपाई, पूरी भरपाई नहीं
  8. यात्रियों की मांग पहले से कमजोर पड़ रही थी
  9. सरकार ईंधन कोष और मूल्य निर्धारण में बदलाव पर विचार कर रही है
  10. ऋण सहायता और अहम तारीखें
  11. मुख्य बिंदु

एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर ने भी 8 अक्टूबर को शुल्क में बदलाव की घोषणा की, जो 9 अक्टूबर से की गई नई बुकिंग पर लागू हैं। इन फैसलों से त्योहारी सीजन से पहले यात्रा बजट पर नया दबाव पड़ा है। यह ऐसे समय में हुआ है जब अगस्त के यात्री आंकड़ों में पहले ही गिरावट दिख चुकी थी।

इंडिगो ने कहा कि ईंधन की लागत में उसकी नवीनतम मासिक वृद्धि 14% से अधिक रही, जिससे एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ पिछले दशक के सबसे महंगे स्तरों में पहुंच गया है। एयरलाइन रोजाना 2,200 से अधिक उड़ानें संचालित करती है और भारत के घरेलू हवाई यातायात का करीब दो-तिहाई हिस्सा वहन करती है। इससे उसके मूल्य संबंधी फैसलों का व्यापक असर पड़ता है।

यह बदलाव नई बुकिंग पर लागू है, पहले खरीदे जा चुके टिकटों पर नहीं। यह अंतर महत्वपूर्ण है: 6 अक्टूबर बुकिंग की कटऑफ तारीख है, न कि यह शर्त कि उस तारीख से उड़ान भरने वाले हर यात्री को संशोधित शुल्क देना होगा।

ईंधन अधिभार हवाई किराये का एक अलग घटक है, जिसका उद्देश्य ईंधन पर हुए खर्च की कुछ भरपाई करना है। यह टिकट की पूरी कीमत नहीं है। अंतिम राशि अब भी मूल किराये और अन्य शुल्कों से तय होती है, इसलिए अधिभार बढ़ने से हर किराये में होने वाले सटीक बदलाव का पता नहीं चलता।

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घरेलू यात्रियों को कितना अधिक भुगतान करना होगा?

इंडिगो ने घरेलू उड़ानों के लिए दूरी के पांच स्लैब बरकरार रखे हैं। अप्रैल में लागू पिछली व्यवस्था की तुलना में प्रति उड़ान सेक्टर यानी उड़ान के हर अलग हिस्से का अतिरिक्त शुल्क 100 से 350 रुपये के बीच है।

  • 500 किमी तक: 375 रुपये, पहले 275 रुपये; 100 रुपये की वृद्धि।
  • 501 से 1,000 किमी: 600 रुपये, पहले 400 रुपये; 200 रुपये की वृद्धि।
  • 1,001 से 1,500 किमी: 900 रुपये, पहले 600 रुपये; 300 रुपये की वृद्धि।
  • 1,501 से 2,000 किमी: 1,150 रुपये, पहले 800 रुपये; 350 रुपये की वृद्धि।
  • 2,000 किमी से अधिक: 1,300 रुपये, पहले 950 रुपये; 350 रुपये की वृद्धि।

प्रतिशत के लिहाज से सबसे बड़ी वृद्धि बीच के दो स्लैब में है: 400 से 600 रुपये और 600 से 900 रुपये, दोनों में 50% की बढ़ोतरी है। सबसे छोटे स्लैब में करीब 36.4% और सबसे लंबे में करीब 36.8% की वृद्धि हुई है। ये प्रतिशत केवल ईंधन शुल्क के हैं, पूरे टिकट की कीमत के नहीं।

मार्गों के उदाहरण इस बदलाव का दायरा दिखाते हैं। दिल्ली-जयपुर सबसे छोटे स्लैब में, दिल्ली-मुंबई 1,001 से 1,500 किमी वाले स्लैब में और दिल्ली-बेंगलुरु 1,501 से 2,000 किमी वाले स्लैब में आता है। आखिरी स्लैब में दो सेक्टर वाली वापसी यात्रा पर अधिभार कुल 700 रुपये बढ़ेगा। किराये के अन्य घटकों में किसी बदलाव को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय शुल्क में क्षेत्रों के हिसाब से अलग-अलग बढ़ोतरी

इंडिगो की अंतरराष्ट्रीय शुल्क व्यवस्था में दक्षिण एशिया के लिए दूरी के स्लैब हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों के लिए क्षेत्रवार शुल्क है। सार्क का अर्थ दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन है, जबकि जीसीसी का मतलब खाड़ी सहयोग परिषद है।

  • 500 किमी तक के सार्क मार्ग: 1,000 रुपये, पहले 900 रुपये।
  • 501 किमी या उससे अधिक के सार्क मार्ग: 3,000 रुपये, पहले 2,500 रुपये।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया, जीसीसी और मध्य पूर्व, तथा उत्तर और पूर्वी एशिया: 5,500 रुपये।
  • अफ्रीका: 6,000 रुपये, पहले 5,000 रुपये।
  • यूरोप: 10,000 रुपये।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सबसे बड़ी बताई गई वृद्धि प्रति सेक्टर 2,500 रुपये है। पश्चिम एशिया की 2,000 किमी तक की उड़ानों के लिए शुल्क 3,000 से बढ़कर 5,500 रुपये हो गया है, यानी करीब 83.3% की वृद्धि। पश्चिम एशिया की लंबी उड़ानों पर पहले 5,000 रुपये शुल्क लगता था, इसलिए उनमें 500 रुपये की वृद्धि हुई है।

दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के लिए पहले 2,000 किमी तक की उड़ानों पर 3,500 रुपये और लंबी उड़ानों पर 5,000 रुपये शुल्क था। अब दोनों पर 5,500 रुपये लगेंगे। इसलिए यही नया शुल्क छोटे मार्गों पर 2,000 रुपये और लंबे मार्गों पर 500 रुपये की वृद्धि दर्शाता है।

यूरोप के मामले में भी अंतर समझना जरूरी है। ग्रीस और तुर्किये के लिए शुल्क 7,500 से बढ़कर 10,000 रुपये हो गया है, जबकि यूरोप के बाकी हिस्सों के लिए पहले से लागू 10,000 रुपये का शुल्क बरकरार है। इसलिए अधिकतम शुल्क हर यूरोपीय यात्री के लिए नई बढ़ोतरी नहीं है।

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अलग-अलग आंकड़ों का क्या अर्थ है

अधिकांश खबरों में इंडिगो की घोषित घरेलू शुल्क सीमा 375 से 1,300 रुपये और अंतरराष्ट्रीय शुल्क सीमा 1,000 से 10,000 रुपये बताई गई है। हालांकि, कुछ विवरणों में अंतर है, जो किराये की गणना के लिए महत्वपूर्ण हैं।

एक खबर में 500 किमी से कम के घरेलू मार्गों के लिए 425 रुपये और सार्क मार्गों के लिए 500 तथा 1,000 रुपये का शुल्क दिया गया है। ये आंकड़े व्यापक रूप से रिपोर्ट की गई मौजूदा दरों से मेल नहीं खाते, जिनमें घरेलू शुल्क 375 रुपये और सार्क मार्गों के लिए 1,000 या 3,000 रुपये बताया गया है। एक अन्य खबर में यूरोप के लिए 10,000 रुपये के बजाय 6,000 रुपये शुल्क बताया गया है, जबकि घोषित व्यवस्था और अधिकांश अन्य खबरों में 10,000 रुपये दर्ज है।

बदलाव के क्रम को भी अलग-अलग तरह से बताया गया है। इसे तीसरी बढ़ोतरी, मार्च के बाद दूसरा संशोधन और शुल्क को फिर से लागू करना कहा गया है। विस्तृत खबरों में मार्च का शुरुआती शुल्क, अप्रैल का बदलाव और अक्टूबर का संशोधन दर्ज है। कुछ खबरों में जुलाई के आसपास शुल्क घटने का भी जिक्र है, लेकिन बीच की पूरी इंडिगो शुल्क-सूची नहीं दी गई है।

अप्रैल की तारीखों में भी अंतर है: एक खबर में 1 अप्रैल को पिछला संशोधन बताया गया है, जबकि दूसरी के अनुसार पिछली दरें 2 अप्रैल से की गई बुकिंग पर लागू थीं। इन अंतरों से 6 अक्टूबर की लगातार रिपोर्ट की गई बुकिंग कटऑफ नहीं बदलती, लेकिन इससे पहले हुए सभी बदलावों की निश्चित संख्या बताना संभव नहीं होता।

ईंधन की लगातार तीन मासिक बढ़ोतरी ने जुलाई की राहत खत्म की

घरेलू ईंधन की कीमतों का क्रम दिखाता है कि राहत का दौर कितनी जल्दी खत्म हुआ। जून में एटीएफ करीब 115 रुपये प्रति लीटर था, जुलाई में घटकर 110 रुपये हुआ, अगस्त में फिर 115 रुपये पहुंचा और सितंबर में करीब 121 रुपये हो गया। अक्टूबर में कीमत 137 रुपये पहुंची, जो लगातार तीसरी मासिक बढ़ोतरी के बाद हुई।

सितंबर की 121.28 रुपये प्रति लीटर की अधिक सटीक कीमत के आधार पर अक्टूबर में 15.72 रुपये प्रति लीटर यानी करीब 13% की वृद्धि होती है। यह करीब 16 रुपये की बढ़ोतरी बताने वाली खबरों के अनुरूप है। इंडिगो के बयान में मासिक वृद्धि 14% से अधिक बताई गई है। दिल्ली की कीमत पर आधारित गणना और एयरलाइन की बताई वृद्धि में अंतर है, और दोनों के बीच तालमेल का आधार स्पष्ट नहीं किया गया है।

जेट ईंधन का वैश्विक औसत मूल्य 187.34 डॉलर प्रति बैरल बताया गया, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले 1% अधिक था। संघर्ष से पहले बताई गई 85 से 90 डॉलर की सीमा की तुलना में यह दोगुने से भी अधिक है। निगरानी के सटीक सप्ताह का उल्लेख नहीं है, इसलिए इस आंकड़े को अक्टूबर के किसी खास दिन का मूल्य नहीं मानना चाहिए।

खबरों के अनुसार संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। अलग से, फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने अप्रैल 2026 से पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण परिचालन पर पड़ रहे दबाव का जिक्र किया है। इससे युद्ध की किसी दूसरी पुष्ट शुरुआत की तारीख तय नहीं होती।

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एयर इंडिया और अकासा ने अपनी-अपनी शुल्क व्यवस्था लागू की

एयर इंडिया एक्सप्रेस के संशोधित शुल्क 9 अक्टूबर को 00:00 भारतीय मानक समय से की गई बुकिंग पर लागू हैं, जबकि एयर इंडिया के शुल्क उसी दिन 11:00 बजे से लागू होते हैं। अकासा एयर की कटऑफ 9 अक्टूबर को 00:01 बजे है। एक शोध सारांश में एयर इंडिया समूह की दोनों टाइमिंग उलट बताई गई हैं, लेकिन एयरलाइन के उद्धृत बयान और विस्तृत खबरों के अनुसार एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए आधी रात और एयर इंडिया के लिए सुबह 11 बजे का समय है।

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने घरेलू शुल्क 500 किमी तक 400 रुपये, 501 से 1,000 किमी के लिए 600 रुपये, 1,001 से 1,500 किमी के लिए 850 रुपये और दोनों लंबी दूरी वाले स्लैब के लिए 1,200 रुपये तय किया है।

इंडिगो की तुलना में इसका मतलब है कि सबसे छोटे स्लैब में शुल्क 25 रुपये अधिक, दूसरे स्लैब में समान, तीसरे में 50 रुपये कम, 1,501 से 2,000 किमी के लिए 50 रुपये अधिक और 2,000 किमी से अधिक दूरी पर 100 रुपये कम है। ये अधिभार की तुलनाएं हैं, इस बात का प्रमाण नहीं कि किसी एक एयरलाइन का पूरा टिकट सस्ता होगा।

एयर इंडिया समूह के चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय शुल्क पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के लिए 55 डॉलर, ब्रिटेन समेत यूरोप के लिए 135 डॉलर, ऑस्ट्रेलिया के लिए 210 डॉलर और उत्तरी अमेरिका के लिए 215 डॉलर हैं। ये शुल्क डॉलर में दिए गए हैं, जबकि इंडिगो की दरें रुपये में हैं। इसलिए सीधी तुलना के लिए लागू मुद्रा विनिमय दर का इस्तेमाल करना होगा।

अकासा के घरेलू शुल्क 2,000 किमी तक इंडिगो के बराबर हैं: संबंधित स्लैब में 375, 600, 900 और 1,150 रुपये। 1,500 किमी से अधिक के सभी सेक्टरों के लिए अकासा 1,150 रुपये ही लेता है, जिससे 2,000 किमी से अधिक दूरी पर उसका शुल्क इंडिगो से 150 रुपये कम रहता है। कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड और वियतनाम के लिए भारत से जाने वाले मार्गों पर उसका अंतरराष्ट्रीय शुल्क 2,500 रुपये है।

लागत की आंशिक भरपाई, पूरी भरपाई नहीं

इंडिगो का कहना है कि संशोधित शुल्क से ईंधन पर हुए अतिरिक्त खर्च की केवल आंशिक भरपाई होगी। फैसले की वजह बताते हुए एयरलाइन ने कहा कि पूरा लागत-वृद्धि खर्च निकालने के लिए इससे कहीं बड़ी वृद्धि जरूरी होती।

"ईंधन की लागत में बढ़ोतरी की पूरी भरपाई के लिए ईंधन शुल्क में काफी बड़ी वृद्धि करनी पड़ती। लेकिन ग्राहकों पर असर कम रखने के लिए इंडिगो ने सीमित और अपेक्षाकृत मामूली बदलाव किया है," एयरलाइन ने कहा।

इस बयान को यात्रियों के खर्च के संदर्भ में भी समझना चाहिए। कोई बदलाव एयरलाइन की अतिरिक्त लागत की केवल आंशिक भरपाई कर सकता है, फिर भी कुछ शुल्क स्लैब में 50% या उससे अधिक की वृद्धि हो सकती है। ये दोनों अलग बातें बताते हैं: एयरलाइन का कुल खर्च और टिकट पर लगने वाला शुल्क।

खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी के अनुमान भी अलग-अलग हैं। कई खबरों में इसे परिचालन लागत का करीब 40% या 40% से अधिक बताया गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस के अनुसार मौजूदा हिस्सेदारी 55% से 60% है, जबकि ऐतिहासिक रूप से यह 30% से 40% थी। एक अन्य खबर में इसे परिवर्तनीय लागत का 30% से 40% बताया गया है, जो कुल परिचालन लागत से संकीर्ण श्रेणी है। इन आंकड़ों की सीधे तुलना नहीं की जा सकती।

हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध, मार्ग बदलने और रुपये के अवमूल्यन से ईंधन की कीमत के अलावा भी दबाव बढ़ता है। लंबे मार्गों पर अधिक ईंधन की जरूरत पड़ सकती है, जबकि रुपये की कमजोरी से डॉलर से जुड़े खर्चों की घरेलू मुद्रा में लागत बढ़ जाती है।

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यात्रियों की मांग पहले से कमजोर पड़ रही थी

अधिभार में बदलाव अगस्त के हवाई यातायात में गिरावट के बाद आया है। नागर विमानन महानिदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2026 में घरेलू यात्रियों की संख्या 129.47 लाख यानी 12.947 मिलियन थी, जो अगस्त में घटकर 121.26 लाख यानी 12.126 मिलियन रह गई। यह महीने-दर-महीने 6.34% की गिरावट है, यानी करीब 8.21 लाख कम यात्री।

अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ के आंकड़ों में अलग से दिखा कि अगस्त में भारत के घरेलू राजस्व यात्री किलोमीटर एक साल पहले की तुलना में 7.5% घटे। इस माप में भुगतान करने वाले यात्रियों की संख्या को उड़ान की दूरी से गुणा किया जाता है, इसलिए यह यात्रियों की संख्या और यात्रा की लंबाई, दोनों को दर्शाता है। यह नागर विमानन महानिदेशालय की मासिक यात्री संख्या से अलग माप है।

खबरों में कमजोर मांग को महंगे टिकटों से जोड़ा गया है और बताया गया है कि कुछ यात्री परिवहन के दूसरे साधनों की ओर जा रहे हैं। हालांकि, आंकड़े यह नहीं बताते कि किरायों के कारण कितनी गिरावट आई या ईंधन अधिभार का असर कितना था। अगस्त का यातायात अक्टूबर के बदलावों से पहले का है।

इससे एक स्पष्ट चुनौती सामने आती है: एयरलाइंस बढ़ती लागत की भरपाई करना चाहती हैं, लेकिन कीमतें इतनी नहीं बढ़ाना चाहतीं कि लोग बुकिंग से पीछे हट जाएं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने चेतावनी दी है कि समय रहते राहत न मिली तो कंपनियां आर्थिक रूप से टिकाऊ न रहने वाले मार्गों से सेवाएं हटा सकती हैं। किसी खास मार्ग पर सेवा बंद होने की जानकारी नहीं दी गई है।

सरकार ईंधन कोष और मूल्य निर्धारण में बदलाव पर विचार कर रही है

नागर विमानन मंत्री के राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों के साथ ईंधन लागत पर चर्चा कर रही है। आईक्यूएफएम संगोष्ठी 2026 से इतर बोलते हुए उन्होंने पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुए दबाव का जिक्र किया।

"सबसे अहम मुद्दों में से एक पश्चिम एशिया संकट है और यह एटीएफ की कीमतों पर कितना बड़ा दबाव डाल रहा है। लेकिन हम एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों, दोनों के साथ अब भी बातचीत कर रहे हैं। देखते हैं कि यह चर्चा किस दिशा में आगे बढ़ती है," उन्होंने कहा।

केंद्र सरकार 10,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण कोष को फिर शुरू करने पर विचार कर रही है। इसकी पिछली रूपरेखा में 115 रुपये प्रति लीटर का मानक तय था, लेकिन तय समयसीमा में किसी भी घरेलू एयरलाइन ने सरकारी स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियों के साथ जरूरी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिसके बाद योजना समाप्त हो गई।

जब एयरलाइंस ने हस्ताक्षर नहीं किए, उस समय बाजार भाव अस्थायी रूप से इस मानक से नीचे आ गए थे। अक्टूबर का 137 रुपये का मूल्य इससे 22 रुपये अधिक है और बदली हुई परिस्थितियों को दिखाता है। संशोधित रूपरेखा को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और शुरू करने की तारीख भी घोषित नहीं हुई है।

फेडरेशन घरेलू एटीएफ के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के बजाय उत्पादन लागत के साथ मार्जिन जोड़कर कीमत तय करने की मांग भी कर रहा है। साथ ही वह निश्चित उत्पाद शुल्क और करों तथा हवाई अड्डा शुल्कों में राहत जारी रखने की मांग करता है। स्थानीय स्तर पर रिफाइन किया गया ईंधन भी वैश्विक कीमतों, डॉलर की विनिमय दर, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य मूल्यवर्धित कर से प्रभावित हो सकता है। इसलिए घरेलू उत्पादन एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव से अपने आप नहीं बचाता।

इन प्रस्तावों से यात्रियों के किराये घटेंगे या नहीं, यह मूल्य निर्धारण के सूत्र, कच्चे तेल की कीमतों, करों और एयरलाइंस द्वारा बचत का लाभ यात्रियों तक पहुंचाने पर निर्भर करेगा। किसी सहमति वाली नीति या किराये में इससे होने वाली कटौती की घोषणा नहीं हुई है।

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ऋण सहायता और अहम तारीखें

एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने 25 सितंबर को लिखे पत्र में सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। उसने आपातकालीन ऋण लाइन गारंटी योजना यानी ईसीएलजीएस 5.0 के तहत मंजूर रकम तेजी से जारी करने की भी मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि कुछ एयरलाइंस को मंजूर ऋण का केवल एक हिस्सा मिला, क्योंकि ऋणदाताओं ने बाकी रकम जारी करने में देरी की।

यह योजना पात्र ऋणों के लिए सरकार की गारंटी देती है, जिससे बैंकों का ऋण जोखिम घटता है। राष्ट्रीय ऋण गारंटी न्यासी कंपनी के माध्यम से लागू इस योजना में पात्र छोटे कारोबार, अन्य योग्य व्यवसाय और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस शामिल हैं। इससे ऋण तक पहुंच मिलती है, ईंधन की कीमत सीधे कम नहीं होती।

मंत्री ने ईंधन लागत पर तत्काल चर्चा के साथ विमानन क्षेत्र के दीर्घकालीन लक्ष्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत करीब 4 अरब डॉलर के एयरोस्पेस उपकरण और पुर्जे बनाता है और दशक के अंत तक इसे 10 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है, यानी मौजूदा मूल्य का 2.5 गुना। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़ान ने दस वर्षों में 693 मार्ग शुरू किए हैं। इन दोनों आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि या क्षेत्रीय सहायता मौजूदा ईंधन वृद्धि की भरपाई कर देगी।

घटनाओं का प्रमुख क्रम इस प्रकार है:

  • मार्च 2026: इंडिगो ने घरेलू उड़ानों के लिए 425 रुपये का एकसमान ईंधन शुल्क लागू किया। शुरुआती अंतरराष्ट्रीय शुल्क 425 से 2,300 रुपये के बीच थे।
  • अप्रैल 2026: इंडिगो ने घरेलू शुल्क को दूरी के आधार पर 275 से 950 रुपये के स्लैब में बदला और अंतरराष्ट्रीय शुल्क संशोधित किए।
  • 25 सितंबर: एयरलाइन महासंघ ने सरकार से राहत मांगी।
  • 1 अक्टूबर: घरेलू एटीएफ की कीमत बढ़कर करीब 137 रुपये प्रति लीटर हो गई।
  • 5 और 6 अक्टूबर: इंडिगो ने शुल्क में बदलाव की घोषणा की और फिर 6 अक्टूबर को 00:01 बजे से नई बुकिंग पर इसे लागू किया।
  • 8 और 9 अक्टूबर: एयर इंडिया समूह और अकासा ने बदलावों की घोषणा की और फिर 9 अक्टूबर को अपनी-अपनी बुकिंग कटऑफ के समय से इन्हें लागू किया।

एयरलाइंस ने कहा है कि वे ईंधन की कीमतों और शुल्कों की समीक्षा जारी रखेंगी। अधिभार की अगली समीक्षा, स्थिरीकरण कोष को दोबारा शुरू करने की समयसीमा या लंबित ऋण जारी करने का कार्यक्रम नहीं बताया गया है।

मुख्य बिंदु

  • इंडिगो के संशोधित शुल्क 6 अक्टूबर 2026 को 00:01 बजे से की गई नई बुकिंग पर लागू हैं; पहले की बुकिंग प्रभावित नहीं होंगी।
  • घरेलू शुल्क 375 से 1,300 रुपये तक हैं। प्रति सेक्टर 100 से 350 रुपये की वृद्धि हुई है।
  • अंतरराष्ट्रीय शुल्क 1,000 से 10,000 रुपये तक हैं। क्षेत्र और दूरी के अनुसार बढ़ोतरी अलग-अलग है।
  • एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा ने 9 अक्टूबर से अपनी संशोधित शुल्क व्यवस्थाएं लागू कीं।
  • दिल्ली में एटीएफ की कीमत जुलाई के करीब 110 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अक्टूबर में 137 रुपये हो गई, यानी लगभग 24.5% की वृद्धि।
  • सरकार ईंधन मूल्य निर्धारण और संभावित स्थिरीकरण कोष को फिर शुरू करने पर चर्चा कर रही है, लेकिन अंतिम रूपरेखा या शुरू करने की तारीख घोषित नहीं हुई है।
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