हरिद्वार का सफर होगा छोटा, लेकिन खुलने की तारीख तय होना बाकी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि नया सड़क संपर्क शुरू होने पर दिल्ली और हरिद्वार के बीच यात्रा का समय करीब तीन से चार घंटे से घटकर 90 मिनट रह सकता है। इससे डेढ़ से ढाई घंटे की संभावित बचत होगी और राष्ट्रीय राजधानी से उत्तराखंड के इस तीर्थ शहर पहुंचना काफी आसान हो जाएगा।
विषय-सूची
- हरिद्वार का सफर होगा छोटा, लेकिन खुलने की तारीख तय होना बाकी
- यात्रियों का कितना समय बच सकता है?
- सड़क खुलने की समय-सीमा
- चार धाम की सड़कों पर बढ़ रहा है यातायात
- उत्तराखंड से आगे तक तीर्थयात्रा के लिए निवेश
- 36 ग्रीन एक्सप्रेसवे और दिल्ली के लिए बड़ा कार्यक्रम
- लॉजिस्टिक्स के आंकड़ों का क्या मतलब है?
- निर्माण पर खर्च का असर सड़क से आगे तक क्यों पहुंचता है?
- तेज सड़कों के साथ निर्माण गुणवत्ता की कसौटी भी
- मुख्य बातें
गडकरी ने भारतीय उद्योग परिसंघ के सम्मेलन, ‘भारत के राजमार्गों का भविष्य: स्मार्ट, सुरक्षित और टिकाऊ’ में यह योजना बताई। 27 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित उनकी घोषणा में अगले महीने सड़क खोलने की बात कही गई थी, यानी नवंबर 2026 में। उनकी टिप्पणियों के एक अन्य विवरण में काम पूरा होने की अनुमानित अवधि दो महीने बताई गई। खुलने की सटीक तारीख, विस्तृत मार्ग और टोल शुल्क की जानकारी नहीं दी गई।
मंत्री ने हरिद्वार परियोजना को एक्सप्रेसवे, तीर्थ मार्गों और सुरंगों की व्यापक योजना से जोड़ा। उन्होंने कहा कि तेज संपर्क से धार्मिक स्थलों पर अधिक लोग पहुंच रहे हैं, रोजगार पैदा हो रहा है और कारोबारियों को कम लागत में सामान भेजने में मदद मिल रही है।
गंगा के दर्शन के लिए तीर्थयात्रियों के पहुंचने वाला हरिद्वार इस तर्क के केंद्र में है। 90 मिनट की यात्रा से यात्रियों को अपने गंतव्य पर अधिक समय मिलेगा और एक दिन में छोटी यात्रा करना आसान होगा। यात्रियों की सेवा करने वाले परिवहन संचालकों और कारोबारियों के लिए भी कम यात्रा समय का अर्थ एक ही कार्यदिवस में अधिक फेरे हो सकता है।
बताया गया यात्रा समय नए संपर्क मार्ग का अनुमान है। हर यात्री की वास्तविक यात्रा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वह दिल्ली में कहां से रवाना होता है, सड़क तक पहुंचने के रास्ते में कितना यातायात है और हरिद्वार में उसका अंतिम गंतव्य कहां है।
यात्रियों का कितना समय बच सकता है?
दिल्ली से हरिद्वार की यात्रा तीन घंटे से घटकर डेढ़ घंटे होने का मतलब समय आधा रह जाना होगा। चार घंटे की यात्रा की तुलना में ढाई घंटे की बचत होगी, यानी 62.5%। ये गणनाएं दिखाती हैं कि कभी-कभार यात्रा करने वालों के लिए भी यह घोषणा क्यों अहम है।
गडकरी ने हरिद्वार को दिल्ली से दूसरे मार्गों पर हुए सुधारों के बाद अगला कदम बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में शुरू हुए दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से यात्रा का समय सात घंटे से घटकर करीब दो घंटे रह गया है। एक अन्य विवरण में पहले की यात्रा अवधि पांच से छह घंटे बताई गई; दोनों में बेहतर संपर्क के बाद करीब दो घंटे का समय बताया गया।
मंत्री ने दिल्ली-मेरठ मार्ग का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक वहां यात्रा का समय साढ़े तीन घंटे से घटकर करीब 40 से 50 मिनट रह गया है। दिल्ली-जयपुर यात्रा पांच घंटे से घटकर दो घंटे हो गई है।
बेंगलुरु और चेन्नई के लिए गडकरी ने सड़क सुधारों के बाद यात्रा समय में और कमी आने का अनुमान जताया: करीब चार से पांच घंटे से घटकर लगभग दो घंटे। इस तरह उनके उदाहरणों में उन मार्गों के यात्रा समय भी शामिल थे जिनमें उनके अनुसार पहले ही सुधार हो चुका है, और उन परियोजनाओं से होने वाली संभावित बचत भी जो अभी पूरी हो रही हैं।
सड़क खुलने की समय-सीमा
गडकरी के मुताबिक हरिद्वार की घोषणा दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर शुरू होने के बाद आई। यह क्रम अहम है, क्योंकि मंत्री ने इन दोनों संपर्कों को दिल्ली से उत्तराखंड पहुंचने की सुविधा में क्रमिक सुधार के तौर पर पेश किया।
- हरिद्वार की घोषणा से पहले: गडकरी ने कहा कि दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर हाल ही में शुरू हुआ था और इससे यात्रा का समय करीब दो घंटे रह गया।
- 27 अक्टूबर, 2026: अगले महीने सड़क खोलने की घोषणा प्रकाशित हुई। साथ ही दिल्ली से हरिद्वार की यात्रा 90 मिनट होने का अनुमान दिया गया।
- नवंबर 2026: अगले महीने सड़क खोलने की घोषणा से यही लक्ष्य निकलता है, जबकि एक अन्य विवरण में काम पूरा होने की समय-सीमा दो महीने बताई गई।
तीर्थयात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को यह जानने के लिए परिचालन शुरू होने की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा कि नया मार्ग कब उपलब्ध होगा। गडकरी की टिप्पणियों में निर्धारित कार्यक्रम और यात्रा समय बताया गया, जबकि संपर्क मार्ग के इस्तेमाल की व्यवस्था का विवरण आना बाकी था।
चार धाम की सड़कों पर बढ़ रहा है यातायात
गडकरी ने कहा कि चार धाम सड़क परियोजना का 80% से 85% काम पूरा हो चुका है। करीब 12,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों तक पहुंच बेहतर बनाने के सरकार के प्रयासों का एक और बड़ा हिस्सा है।
मंत्री ने कहा कि दिल्ली से बद्रीनाथ और केदारनाथ की ओर जाने वाला यातायात पहले के मुकाबले तीन गुना बढ़ गया है। सीधे शब्दों में कहें तो यातायात तीन गुना होने का अर्थ है कि पहले की अवधि में हर 100 यात्राओं के मुकाबले अब करीब 300 यात्राएं हो रही हैं।
इस बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए मंत्री ने खास तौर पर बद्रीनाथ और केदारनाथ के नाम लिए। उनकी टिप्पणियों में इस बढ़ोतरी को सड़क सुधारों से जोड़ा गया, हालांकि उन्होंने तुलना की अवधि या यातायात की मूल संख्या नहीं बताई।
हरिद्वार और चार धाम के मार्ग पर्यटन से जुड़े इसी तर्क का हिस्सा हैं: पहुंच आसान होने से तीर्थयात्रियों की सेवा करने वाले आवास, भोजनालय, परिवहन सेवाओं और अन्य कारोबारों को अधिक ग्राहक मिल सकते हैं। यातायात बढ़ने से इन मार्गों के आसपास रहने और काम करने वालों के लिए सड़क की हालत और भरोसेमंद यात्रा समय की अहमियत भी बढ़ जाती है।
उत्तराखंड से आगे तक तीर्थयात्रा के लिए निवेश
गडकरी ने अयोध्या और महाराष्ट्र में सड़क विकास का भी जिक्र किया, जिसमें पंढरपुर पालखी मार्ग की परियोजनाएं शामिल हैं। इन उदाहरणों से उन्होंने अपनी दलील को एक एक्सप्रेसवे से आगे बढ़ाया और धार्मिक यात्राओं को सड़कों, पुलों और सुरंगों के राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा बताया।
मंत्री ने धार्मिक पर्यटन से जुड़ी करीब 1 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं और निर्माणाधीन 2 लाख करोड़ रुपये की सुरंग परियोजनाओं का जिक्र किया। एक लाख करोड़ रुपये का अर्थ एक ट्रिलियन रुपये है, इसलिए ये आंकड़े क्रमशः करीब 1 ट्रिलियन और 2 ट्रिलियन रुपये के बराबर हैं।
इन कार्यक्रमों में बुनियादी ढांचे के अलग-अलग प्रकार शामिल हैं। सड़कें सतह पर गंतव्यों को जोड़ती हैं, जबकि सुरंगें कठिन भूभाग से होकर अधिक सीधा रास्ता दे सकती हैं। व्यापक संपर्क सुधार के प्रयास के तहत गडकरी ने पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में निर्माण कार्यों का भी उल्लेख किया।
स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए सरकार की दलील दो चरणों में है। पहले निर्माण से श्रमिकों और सामग्री की मांग पैदा होती है। मार्ग खुलने के बाद यात्रियों और कारोबारों से यात्रा, आवास, भोजन और व्यापार के जरिए अतिरिक्त खर्च हो सकता है। बाद की आर्थिक गतिविधि का पैमाना इस पर निर्भर करेगा कि कितने लोग हर संपर्क मार्ग का इस्तेमाल करते हैं और वे अपना पैसा कहां खर्च करते हैं।
36 ग्रीन एक्सप्रेसवे और दिल्ली के लिए बड़ा कार्यक्रम
गडकरी ने कहा कि सरकार पूरे भारत में 36 ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाने की योजना पर काम कर रही है और दिल्ली के लिए करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। दिल्ली के लिए यह राशि करीब 1.6 ट्रिलियन रुपये के बराबर है और इसमें अकेले हरिद्वार संपर्क से कहीं बड़ा कार्यक्रम शामिल है।
मंत्री ने ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर भी चर्चा की। ग्रीनफील्ड सड़क किसी मौजूदा सड़क को सिर्फ चौड़ा करने के बजाय नए मार्ग पर बनाई जाती है। नया मार्ग स्थानों को अलग तरीके से जोड़ सकता है और ऐसे जिलों तक पहुंच आसान कर सकता है जिनका बड़े वाणिज्यिक केंद्रों से सीधा संपर्क पहले कम था।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे इस दृष्टिकोण का उनका उदाहरण था। बेहतर संपर्क से लाभ पाने वाले जिलों में उन्होंने राजस्थान के अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर और बूंदी, मध्य प्रदेश के रतलाम और झाबुआ तथा गुजरात के दाहोद के नाम लिए।
गडकरी ने इन संपर्क मार्गों को ग्रामीण इलाकों, आदिवासी समुदायों और विकास के लिए लक्षित जिलों को दिल्ली और मुंबई के करीब लाने का जरिया बताया। ऐसे किसी जिले के उत्पादक के लिए बेहतर सड़क से खरीदार या वितरण केंद्र तक पहुंचने का समय घट सकता है। कारोबार के लिए स्थान चुन रही कंपनियों के वास्ते परिवहन तक पहुंच यह तय करने का एक पहलू है कि सामान और श्रमिक कितनी कुशलता से आ-जा सकते हैं।
लॉजिस्टिक्स के आंकड़ों का क्या मतलब है?
गडकरी ने कहा कि भारत की लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद के पहले के 16% के अनुमान से घटकर करीब 9% रह गई है। लॉजिस्टिक्स में सामान को ले जाने, भंडारित करने और पहुंचाने से जुड़ा काम और खर्च शामिल है। सकल घरेलू उत्पाद, या जीडीपी, किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापता है।
उनके आंकड़ों के अनुसार यह सात प्रतिशत अंक की गिरावट है। उन्होंने भारत के मौजूदा अनुमान की तुलना चीन के करीब 8% और अमेरिका के 12% से की। इस हिसाब से भारत चीन से एक प्रतिशत अंक ऊपर और अमेरिका से तीन अंक नीचे है।
मंत्री ने कम लागत का श्रेय बेहतर बुनियादी ढांचे को दिया और कहा कि बेहतर परिवहन से कृषि, उद्योग और व्यापार को मदद मिल सकती है। किसान या निर्माता को तब लाभ होता है जब माल भेजने में कम समय और कम लागत लगती है, हालांकि किसी खास कारोबार की बचत उसके मार्ग, माल और अन्य परिचालन खर्चों पर निर्भर करती है।
इन टिप्पणियों में गडकरी ने राष्ट्रीय अनुमानों की मापन अवधि या गणना की पद्धति नहीं बताई। इसलिए ये आंकड़े उनके बताए गए तुलनात्मक अनुमान ही हैं। नीतिगत लक्ष्य यह है कि उत्पादों को उनके उत्पादन स्थल से जरूरत की जगह तक पहुंचाने में लगने वाला समय और खर्च कम किया जाए।
निर्माण पर खर्च का असर सड़क से आगे तक क्यों पहुंचता है?
गडकरी ने कहा कि बुनियादी ढांचे पर खर्च किए गए हर 100 रुपये से 325 रुपये का सकारात्मक आर्थिक प्रभाव पैदा होता है। अर्थशास्त्री इसे गुणक प्रभाव कहते हैं: शुरुआती भुगतान से आगे की गतिविधियां शुरू होती हैं, क्योंकि ठेकेदार सामग्री खरीदते हैं, आपूर्तिकर्ता श्रमिकों को भुगतान करते हैं और वे श्रमिक अपनी कमाई का कुछ हिस्सा खर्च करते हैं।
सड़क निर्माण से सीमेंट, इस्पात और भारी मशीनरी की मांग पैदा होती है। इसमें परिवहन, इंजीनियरिंग, निगरानी और श्रम की भी जरूरत होती है। गडकरी ने बुनियादी ढांचे में निवेश को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया, क्योंकि निर्माण के दौरान खर्च कई उद्योगों तक पहुंचता है और सड़क खुलने के बाद भी आगे की गतिविधियों को सहारा दे सकता है।
100 रुपये के खर्च के साथ जुड़ी आर्थिक गतिविधि के उनके अनुमान को 325 रुपये का आंकड़ा बताता है। इसका तंत्र खरीद, मजदूरी और सेवाओं के जरिए पैसे का व्यापक प्रवाह है, न कि शुरुआती निवेश करने वाले व्यक्ति को सीधे भुगतान लौटाया जाना।
हरिद्वार की प्रस्तावित परियोजना इस तर्क को स्थानीय स्तर पर दिखाती है। संपर्क मार्ग के निर्माण से खुलने से पहले ही रोजगार पैदा होता है। इसके बाद कम यात्रा समय से पर्यटकों का खर्च और परिवहन गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिनका लाभ अलग-अलग चरणों में अलग-अलग कारोबारों तक पहुंचेगा।
तेज सड़कों के साथ निर्माण गुणवत्ता की कसौटी भी
गडकरी ने विस्तार योजनाओं के साथ राजमार्गों के खराब निर्माण पर चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से समझौता करने वाली कंपनियों, ठेकेदारों, सलाहकारों और अधिकारियों पर कड़े दंड लगाए जाएंगे। इनमें काली सूची में डालना भी शामिल है, जिससे किसी कंपनी को आगे के ठेके मिलने से रोका जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सैकड़ों परियोजनाओं की समीक्षा की है और जनता से सोशल मीडिया के जरिए खामियों की जानकारी देने की अपील की। राजमार्ग गुणवत्ता की निगरानी के बारे में गडकरी ने कहा:
पिछले कुछ महीनों से मैं व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी कर रहा हूं और सैकड़ों परियोजनाओं की समीक्षा कर चुका हूं। सड़क के कुछ हिस्सों में गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं की जानकारी देने में सोशल मीडिया पोस्ट भी मददगार रहे हैं। मैं जनता से अपील करता हूं कि इन समस्याओं को सोशल मीडिया पर साझा करें,
गडकरी ने कहा कि कड़ी निगरानी से ऐसी समस्याओं में पहले ही 30% की कमी आई है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दो वर्षों में बाकी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा स्वचालित सड़क सतह आकलन के लिए नेटवर्क सर्विलांस वाहनों का इस्तेमाल अनिवार्य किया है। ये वाहन 40 से 80 किमी/घंटा की रफ्तार से चलते हुए कई सेंसरों की मदद से सड़क की सतह की जांच करते हैं।
इससे मिलने वाला सड़क की हालत का डेटा आरएएमएस डेटा लेक समेत विभिन्न प्रणालियों में दर्ज किया जाता है। यह एक डिजिटल संग्रह है जिसका इस्तेमाल सड़क रखरखाव से जुड़े फैसलों में मदद के लिए होता है। इसका उद्देश्य मापी गई सड़क स्थिति के आधार पर खामियों की पहचान और मरम्मत की योजना बनाना है। बेयरिंग और एक्सपैंशन जॉइंट बनाने वाली कंपनियों को भी गुणवत्ता परीक्षण में विफल रहने के बाद काली सूची में डाला गया था। ये पुर्जे पुलों को भार सहने और फैलाव-सिकुड़न के अनुरूप गति की गुंजाइश देने में मदद करते हैं।
दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले यात्रियों के लिए रखरखाव भी छोटे मार्ग के वादे जितना ही व्यावहारिक पहलू है: सड़क खुलने के बाद भरोसेमंद यात्रा के लिए उसकी सतह अच्छी होनी चाहिए और समय पर मरम्मत जरूरी है।
मुख्य बातें
- गडकरी ने दिल्ली से हरिद्वार की यात्रा का समय 90 मिनट रहने का अनुमान दिया है, जबकि अभी इसमें करीब तीन से चार घंटे लगते हैं।
- 27 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित घोषणा में नवंबर में सड़क खोलने का लक्ष्य बताया गया; एक अन्य विवरण में काम पूरा होने की समय-सीमा दो महीने दी गई।
- मंत्री ने कहा कि 12,000 करोड़ रुपये की चार धाम सड़क परियोजना का 80% से 85% काम पूरा हो चुका है।
- उनके मुताबिक दिल्ली से बद्रीनाथ और केदारनाथ की ओर यातायात तीन गुना बढ़ गया है।
- व्यापक कार्यक्रम में 36 प्रस्तावित ग्रीन एक्सप्रेसवे और दिल्ली के लिए करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं शामिल हैं।
- निर्माण की खामियों पर सरकार की बताई गई कार्रवाई में स्वचालित सड़क जांच, दंड और काली सूची में डालना शामिल है।






