भर्ती विवाद से काम का प्रमुख रास्ता बंद
मलेशिया ने 15 अक्टूबर से चिकित्सा जांच के लिए नए नेपाली श्रमिकों का पंजीकरण रोक दिया है। इससे कॉलिंग वीजा पाने के लिए जरूरी एक चरण रुक गया है। दोनों सरकारों के बीच इस बात को लेकर विवाद है कि नेपाली श्रमिकों की भर्ती कौन कर सकता है। विवाद मलेशिया द्वारा 25 प्रमुख भर्ती एजेंसियों और 250 सहायक एजेंसियों के चयन पर केंद्रित है। नेपाल ने इस व्यवस्था को मंजूरी देने से इनकार किया है।
विषय-सूची
- भर्ती विवाद से काम का प्रमुख रास्ता बंद
- एजेंसियों की सूची क्यों अहम है
- दोनों सरकारें अपने-अपने तरीके का बचाव कर रही हैं
- विवाद से भर्ती प्रक्रिया कैसे ठप हुई
- एजेंसी मालिकों की जांच
- भर्ती लागत भी विवाद का हिस्सा
- खाड़ी देशों में भर्ती घटने से श्रमिकों का एक विकल्प खत्म
- प्रस्तावित वेतन वृद्धि से दांव और बढ़े
- अगली वार्ताओं में किन मुद्दों पर सहमति जरूरी
- मुख्य बिंदु
इस रुकावट का असर उस गंतव्य पर पड़ा है, जहां पिछले वित्त वर्ष में करीब 132,000 नेपाली श्रमिक गए थे। करीब 400,000 नेपाली पहले से मलेशिया में काम करते हैं। नेपाल को मिलने वाले कुल प्रेषण में मलेशिया का हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत है। प्रेषण वह धन है जो श्रमिक अपने परिवारों को घर भेजते हैं।
मलेशिया के विदेशी श्रमिक केंद्रीकृत प्रबंधन सिस्टम (FWCMS) का संचालन करने वाली कंपनी वेस्टिनेट्स एसडीएन बीएचडी ने चिकित्सा पंजीकरण फिर शुरू करने को इस शर्त से जोड़ा है कि चयनित 25 प्रमुख एजेंसियां सक्रिय हों। दूसरी ओर, नेपाल ने इन एजेंसियों से जुड़ी भर्ती मंजूरियां रोक दी हैं और उनके चयन की जांच शुरू की है।
नतीजतन, प्रक्रिया के दोनों छोर पर रुकावट है। मलेशिया नियोक्ताओं के लिए अपनी मंजूर एजेंसियों का इस्तेमाल अनिवार्य करता है, जबकि नेपाल उन एजेंसियों को श्रमिक भेजने के लिए जरूरी अनुमतियां नहीं दे रहा। इन स्थितियों में बदलाव होने तक नई नौकरियां तलाश रहे लोग भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते।
नेपाल ने विवाद सुलझाने और दोनों देशों के श्रम समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण करने के लिए 18–19 नवंबर या 2–3 दिसंबर को संयुक्त कार्य समूह की बैठकें करने का प्रस्ताव दिया है। बैठक की तारीख या चिकित्सा पंजीकरण दोबारा शुरू करने की तारीख पर कोई सहमति घोषित नहीं की गई है।
एजेंसियों की सूची क्यों अहम है
मलेशिया के मानव संसाधन मंत्रालय ने 22 अगस्त को घोषणा की थी कि विदेशी श्रमिकों की भर्ती करने वाले नियोक्ताओं को FWCMS में पंजीकृत एजेंसियों का इस्तेमाल करना होगा। नेपाल के लिए इस व्यवस्था का अर्थ है कि 25 प्रमुख एजेंसियों को सिस्टम तक पहुंच मिलेगी और हर एजेंसी अधिकतम 10 सहयोगी या सहायक एजेंसियों के साथ काम कर सकेगी।
FWCMS एक डिजिटल सिस्टम है, जो विदेशी श्रमिकों की भर्ती के कई चरणों को जोड़ता है। इनमें नियोक्ताओं के आवेदन, भर्ती एजेंसियां, चिकित्सा प्रक्रियाएं और वीजा प्रक्रिया शामिल हैं। विदेशी श्रमिक रखने के लिए नियोक्ताओं को मंजूरी लेनी होती है और प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी भर्ती एजेंसी चुननी होती है।
नेपाल चाहता है कि सभी 1,114 सक्रिय और लाइसेंस प्राप्त भर्ती कंपनियां प्रमुख एजेंसी के तौर पर पंजीकरण के लिए पात्र हों। मलेशिया द्वारा चुनी गई 25 प्रमुख एजेंसियां इस कुल संख्या का करीब 2.2 प्रतिशत हैं। सहायक एजेंसियां सिस्टम में प्रमुख एजेंसी के जरिए काम करेंगी, उन्हें सिस्टम में वही दर्जा नहीं मिलेगा।
मलेशिया की सूचियां देश के अनुसार अलग-अलग हैं: फिलीपींस की 99, श्रीलंका और वियतनाम की 40-40, बांग्लादेश की 25, कंबोडिया की 23, भारत, म्यांमार और पाकिस्तान की 10-10, तथा थाईलैंड की एक एजेंसी। नेपाल चयन के मूल्यांकन मानदंड और अपनी एजेंसियों को चुनने के तरीके का स्पष्टीकरण मांग रहा है।
दोनों सरकारें अपने-अपने तरीके का बचाव कर रही हैं
नेपाल ने अपनी आपत्तियां विदेशी रोजगार अधिनियम, 2007, विदेशी रोजगार नियमावली, 2008 और 2018 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय श्रम समझौता ज्ञापन के आधार पर रखी हैं। श्रम मंत्री रामजी यादव ने मलेशिया से सभी लाइसेंस प्राप्त नेपाली एजेंसियों को समान अवसर देने का आग्रह किया है।
नेपाल के श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता मीरा आचार्य ने बताया कि नेपाल चाहता है कि मलेशिया भर्ती कंपनियों के गृह देश में उन पर लागू कानूनों का भी ध्यान रखे।
हम यह समझना चाहते हैं कि नेपाली भर्ती एजेंसियों के चयन के लिए किन मानदंडों और किस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया," आचार्य ने कहा। "हमारी चिंता यह है कि जब एक देश अपनी नीति लागू करता है, तो उसे दूसरे देश के कानूनी ढांचे को भी ध्यान में रखना चाहिए।
मलेशिया के मानव संसाधन मंत्रालय ने 6 अक्टूबर, 2026 को यादव को लिखे पत्र में अपना पक्ष रखा। पत्र में कहा गया कि नेपाल के अनुरोध पर विचार करने और मंत्रिमंडल स्तर पर चर्चा के बाद मलेशिया 25 प्रमुख एजेंसियों और अधिकतम 250 सहायक एजेंसियों की व्यवस्था बरकरार रखेगा।
मलेशिया का कहना है कि नियंत्रित भर्ती व्यवस्था से अनैतिक भर्ती, अत्यधिक शुल्क, शोषण और अनुबंध में बदलाव कम हो सकते हैं। अनुबंध में बदलाव तब होता है, जब श्रमिक को दी गई नौकरी की शर्तें भर्ती के समय किए गए वादे से अलग हों, जैसे कम वेतन या अलग काम।
यादव से बातचीत के बाद मानव संसाधन मंत्री रामानन रामकृष्णन ने इस व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य श्रमिकों की सुरक्षा करना और नियोक्ताओं के लिए भर्ती प्रक्रिया आसान बनाना है।
"श्रम मामलों पर हमारा रुख स्पष्ट है। हमने जो व्यवस्था लागू की है, उससे श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए, नियोक्ताओं के लिए प्रक्रियाएं सरल होनी चाहिए और शोषण तथा दुर्व्यवहार रोका जाना चाहिए," रामकृष्णन ने कहा।
विवाद से भर्ती प्रक्रिया कैसे ठप हुई
अक्टूबर में चिकित्सा पंजीकरण रुकने से पहले ही नेपाल ने प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए थे। 22 सितंबर से विदेशी रोजगार विभाग ने चयनित एजेंसियों के जरिए जमा किए गए मांगपत्रों के लिए पूर्व मंजूरी देना बंद कर दिया। मांगपत्रों में नियोक्ताओं की श्रमिकों की जरूरत और प्रस्तावित नौकरियों का विवरण होता है।
शुरुआत में 22 सितंबर से पहले जारी मलेशियाई कोटे के तहत भर्ती जारी रही। इसके बाद चिकित्सा पंजीकरण बंद होने से नए आवेदकों के लिए एक और जरूरी चरण रुक गया और पहले से इस्तेमाल हो रहा भर्ती मार्ग भी पहले की तरह काम नहीं कर सका।
- 22 अगस्त: मलेशिया ने घोषणा की कि विदेशी श्रमिकों की भर्ती FWCMS में पंजीकृत एजेंसियों के जरिए होगी।
- 11 सितंबर, 2026: नेपाल ने राजनयिक नोट भेजकर मलेशिया से एजेंसियों पर लगे प्रतिबंधों पर फिर विचार करने को कहा।
- 16 सितंबर: यादव ने मलेशियाई प्रभारी राजदूत मोहम्मद फिरदौस आजम से संयुक्त तकनीकी वार्ता कराने और चयन के मानदंड देने में मदद मांगी।
- 22 सितंबर: नेपाल ने चयनित एजेंसियों के जरिए जमा मांगपत्रों की पूर्व मंजूरी रोक दी।
- 24 सितंबर, 2026: दोनों देशों के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसका उल्लेख बाद में मलेशिया के पत्र में किया गया।
- 6 अक्टूबर, 2026: मलेशिया ने लिखित रूप में पुष्टि की कि वह भर्ती व्यवस्था बरकरार रखेगा।
- 15 अक्टूबर: FWCMS ने चिकित्सा जांच के लिए नए नेपाली श्रमिकों का पंजीकरण रोक दिया।
- 5 नवंबर: मलेशिया ने इसे अपनी मंजूर सूची से बाहर की एजेंसियों के श्रमिक भेजने पर रोक लागू होने की तारीख तय किया।
नेपाल ने अपनी चिंताओं को लेकर तीन औपचारिक पत्र भेजे हैं, जबकि मलेशिया ने अपने रुख के बचाव में दो राजनयिक नोट जारी किए हैं। नेपाल अनिश्चितता दूर करने के लिए द्विपक्षीय समझौता होने तक पिछली व्यवस्थाएं जारी रखने की मांग कर रहा है।
एजेंसी मालिकों की जांच
नेपाल के विदेशी रोजगार विभाग ने राजनयिक वार्ता के साथ-साथ कानूनी जांच भी शुरू की है। विदेशी रोजगार न्यायाधिकरण ने जांचकर्ताओं को पूछताछ करने देने के लिए 25 प्रमुख एजेंसियों के मालिकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की अनुमति दी। एजेंसी मालिक रबिन गुरुङ को हिरासत में लिया गया है।
विभाग ने छह क्षेत्रों में स्पष्टीकरण मांगा। इनमें कंपनियों का FWCMS में पंजीकरण कैसे हुआ, उनके चयन के लिए कौन से मानदंड और मूल्यांकन अपनाए गए, तथा किन अधिकारियों ने उनके पंजीकरण की सिफारिश या मंजूरी दी, यह शामिल है।
जांचकर्ताओं ने यह भी पूछा कि क्या इस व्यवस्था से प्रतिस्पर्धा सीमित हुई, क्या कोई गैरकानूनी वित्तीय गतिविधि हुई और क्या प्रक्रिया नेपाल के विदेशी रोजगार कानूनों के अनुरूप थी। प्रमुख एजेंसियों से इसी तरह का स्पष्टीकरण मांगने के बाद विभाग ने 250 सहायक एजेंसियों को अपने चयन के बारे में बताने के लिए सात दिन दिए।
जांच और कानूनी कार्यवाही पूरी होने तक चयनित एजेंसियों से जुड़ी श्रम परमिट की पूर्व मंजूरी रोक दी गई है। विभाग ने कंपनियों का निरीक्षण भी शुरू कर दिया है।
एक अन्य नोटिस में विदेशी रोजगार मामलों में गिरफ्तारी वारंट का जवाब न देने वाले लोगों को प्रकाशन के 35 दिनों के भीतर विभाग या नेपाल पुलिस से संपर्क करने को कहा गया। पेश न होने पर उनके बैंक खातों और यात्रा पर पाबंदियां लग सकती हैं और आगे कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
एजेंसी मालिकों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के लेनदेन से जुड़े मांगे गए दस्तावेज जमा कर दिए हैं और जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं। उन्होंने नेपाल से राजनयिक माध्यमों से FWCMS से उनका नाम हटाने का अनुरोध करने को भी कहा है। उनका तर्क है कि इस व्यवस्था से अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा होती है।
भर्ती लागत भी विवाद का हिस्सा
भर्ती के लिए किए जाने वाले भुगतान से यह समझने में मदद मिलती है कि मलेशिया में नौकरियों तक पहुंच पर नियंत्रण इतना विवादास्पद क्यों है। पहले नेपाली एजेंसियां मलेशिया की लाइसेंस प्राप्त भर्ती कंपनियों को करीब 1,000 मलेशियाई रिंगिट देती थीं, जबकि बांग्लादेशी एजेंसियों का भुगतान करीब 4,000 से 4,500 रिंगिट था।
बाद में रोजगार मांग के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर नेपाली एजेंसियों से जुड़े कुछ भुगतान 10,000 रिंगिट तक पहुंच गए। यह पहले के 1,000 रिंगिट के आंकड़े का दस गुना है। नेपाली बाजार में बढ़े भुगतान से बांग्लादेशी एजेंसियों पर भी अधिक भुगतान का दबाव पड़ा।
ये आंकड़े भर्ती कंपनियों के बीच होने वाले भुगतान से जुड़े हैं। श्रमिकों की अपनी लागत इस बात पर निर्भर करती है कि भर्ती शुल्क किस तरह तय और वसूले जाते हैं। श्रमिकों की सुरक्षा के उद्देश्य वाली व्यवस्था में भुगतान का हिसाब रखने, हर लागत का बोझ किस पर है यह पहचानने और अनधिकृत शुल्कों की जांच करने का तरीका होना चाहिए।
नेपाल की आपत्तियां आंशिक रूप से इस बात पर केंद्रित हैं कि चयन प्रक्रिया लाइसेंस प्राप्त कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा सीमित करती है या नहीं। मलेशिया का बचाव इस बात पर केंद्रित है कि क्या निगरानी वाले छोटे समूह से भर्ती एजेंसियों पर नजर रखना आसान हो सकता है। विवाद सुलझाने के लिए बाजार तक पहुंच और उसके भीतर भर्ती को नियंत्रित करने वाले नियमों, दोनों पर सहमति जरूरी है।
नेपाल एसोसिएशन ऑफ फॉरेन एम्प्लॉयमेंट एजेंसीज़ के अध्यक्ष दिक बहादुर खत्री ने भर्ती को चयनित समूह तक सीमित करने के बजाय सभी लाइसेंस प्राप्त एजेंसियों को शामिल करने की मांग की है।
एसोसिएशन किसी भी ऐसी व्यवस्था का समर्थन नहीं करता जो एकाधिकार पैदा करे," खत्री ने कहा। "सभी भर्ती एजेंसियों की भागीदारी, पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित होने चाहिए।
खाड़ी देशों में भर्ती घटने से श्रमिकों का एक विकल्प खत्म
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों के लिए नेपाली श्रमिकों की नई भर्ती 52 प्रतिशत से अधिक घट गई है। ऐसे में मलेशिया के लिए भर्ती रुकना उन लोगों के लिए खास तौर पर अहम है, जो विदेश में काम तलाश रहे हैं।
पिछले वित्त वर्ष में रोजगार के लिए मलेशिया गए 132,000 नेपाली इस भर्ती मार्ग के पैमाने को दिखाते हैं, जो अब प्रभावित हुआ है। आवेदकों को चिकित्सा और वीजा प्रक्रिया पूरी करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि नेपाल से नए श्रमिक चाहने वाले मलेशियाई नियोक्ता ऐसी भर्ती प्रक्रिया के बीच फंसे हैं जिसे फिलहाल कोई भी सरकार पूरी तरह मंजूर नहीं कर रही।
इसका असर नेपाल की घरेलू आय पर भी पड़ता है। देश को मिलने वाले कुल प्रेषण में मलेशिया का हिस्सा लगभग पांचवां है। इसलिए विदेश से भेजी जाने वाली कमाई पर निर्भर परिवारों के लिए मलेशियाई श्रम बाजार तक लगातार पहुंच महत्वपूर्ण है।
विवाद में बताई गई पाबंदियां नई भर्ती से जुड़ी हैं। करीब 400,000 नेपाली पहले से मलेशिया में काम कर रहे हैं। वहां वेतन नियम और रोजगार की शर्तें उनके रोजमर्रा के जीवन का अलग पहलू हैं।
प्रस्तावित वेतन वृद्धि से दांव और बढ़े
मलेशिया ने जून 2027 से मासिक न्यूनतम वेतन 1,700 रिंगिट से बढ़ाकर 2,000 रिंगिट करने की योजना घोषित की है। प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने 2027 के बजट की घोषणा के दौरान इस वृद्धि की जानकारी देते हुए कहा कि इससे 40 लाख से अधिक श्रमिकों को लाभ होगा।
यह वृद्धि हर महीने 300 रिंगिट की है, जो मौजूदा न्यूनतम वेतन से करीब 17.6 प्रतिशत अधिक है। मलेशिया के न्यूनतम वेतन नियम विदेशी श्रमिकों पर भी लागू होते हैं। इनमें उन नौकरियों में काम करने वाले नेपाली भी शामिल हैं जिन पर ये नियम लागू हैं।
50 मिलियन रिंगिट से कम वार्षिक कारोबार वाले व्यवसायों को तुरंत इसे लागू करने से छूट मिलेगी। इसलिए इन व्यवसायों के श्रमिकों को वेतन वृद्धि उन नियोक्ताओं के श्रमिकों के मुकाबले बाद में मिलेगी, जिन्हें इसे शुरुआत से लागू करना होगा।
बजट पेश करते हुए अनवर ने इस कदम को घरेलू खर्चों और उत्पादकता तथा वेतन के बीच के अंतर से जोड़ा।
"श्रमिकों की उत्पादकता और वेतन के बीच का अंतर कम करना जरूरी है। वेतन वृद्धि बढ़ती कीमतों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई है, जिससे श्रमिकों पर जीवनयापन की लागत का बोझ बढ़ा है," उन्होंने कहा।
मलेशिया मध्यवर्ती कौशल वाले श्रमिकों और विश्वविद्यालय स्नातकों के लिए 2,500 रिंगिट का न्यूनतम शुरुआती वेतन भी लागू करने की योजना बना रहा है। सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के अलावा अन्य कंपनियों के लिए वेतन खर्च पर कर कटौती के नियम सख्त करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत भुगतान स्वीकृत तरीकों से सत्यापित बैंक खातों के जरिए करना होगा।
अगली वार्ताओं में किन मुद्दों पर सहमति जरूरी
नेपाल की ओर से प्रस्तावित 18–19 नवंबर या 2–3 दिसंबर की बैठकें एजेंसी चयन के मानदंडों की समीक्षा करने, दोनों देशों के कानूनों के अनुरूप भर्ती का तरीका स्पष्ट करने और श्रम समझौता ज्ञापन के नवीनीकरण पर बातचीत का अवसर देंगी।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने भी मलेशिया के राजनयिक प्रतिनिधि के साथ इस विवाद पर चर्चा की है। नेपाल में संगठन के देश प्रमुख नुमान ओज़कान ने आजम से मुलाकात कर निष्पक्ष भर्ती, गरिमापूर्ण काम, सुरक्षित और नियमित प्रवासन तथा प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर बातचीत की।
नेपाल बातचीत के दौरान व्यापक भागीदारी और पिछली व्यवस्थाओं को जारी रखने की मांग कर रहा है। मलेशिया अपनी मंजूर एजेंसियों की व्यवस्था पर अड़ा है। व्यावहारिक समझौते में नेपाल की भर्ती अनुमतियों को मलेशिया की नियोक्ता मंजूरियों, चिकित्सा पंजीकरण और वीजा प्रक्रिया से जोड़ना होगा।
नौकरियों की प्रतीक्षा कर रहे श्रमिकों के लिए इन सभी चरणों का एक साथ फिर शुरू होना जरूरी है। केवल एक ओर अनुमति मिलने से दूसरी ओर आवेदन अटके रहेंगे। इस बीच चयनित एजेंसियों की जांच नेपाल की कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी है।
मुख्य बिंदु
- मलेशिया में नौकरी तलाश रहे नए नेपाली श्रमिकों के लिए चिकित्सा पंजीकरण 15 अक्टूबर को रोक दिया गया, जिससे कॉलिंग वीजा की प्रक्रिया रुक गई।
- मलेशिया 25 प्रमुख और अधिकतम 250 सहायक भर्ती एजेंसियों की व्यवस्था पर अड़ा है; नेपाल सभी 1,114 सक्रिय और लाइसेंस प्राप्त कंपनियों को पात्र बनाना चाहता है।
- नेपाल ने चयनित एजेंसियों से जुड़ी मंजूरियां रोक दी हैं और उनके चयन की जांच कर रहा है।
- विदेशी रोजगार न्यायाधिकरण ने एजेंसी मालिकों से पूछताछ के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करने की अनुमति दी; रबिन गुरुङ को हिरासत में लिया गया है।
- नेपाल ने 18–19 नवंबर या 2–3 दिसंबर को वार्ता का प्रस्ताव दिया है। बैठक या पंजीकरण फिर शुरू करने की तारीख पर कोई सहमति घोषित नहीं हुई है।
- करीब 400,000 नेपाली मलेशिया में काम करते हैं। नेपाल को मिलने वाले कुल प्रेषण में मलेशिया का हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत है।
- मलेशिया जून 2027 से मासिक न्यूनतम वेतन 2,000 रिंगिट करने की योजना बना रहा है; छोटे व्यवसायों में इसे देर से लागू किया जाएगा।






