पांच प्रांतों में 50 निरीक्षण दल तैनात
थाईलैंड पांच प्रांतों में 1,500 से अधिक कचरा कारखानों की जांच के लिए 50 दल भेज रहा है। जांच में हजारों टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा और प्रदूषण से जुड़े संदिग्ध अपराध सामने आने के बाद सरकार अधिक कड़े डंपिंग दंड और संभावित संपत्ति जब्ती पर भी विचार कर रही है।
विषय-सूची
- पांच प्रांतों में 50 निरीक्षण दल तैनात
- कारखानों के लाइसेंस में क्या शामिल है
- रायोंग की तलाशी में कम से कम 2,500 टन कचरा मिला
- प्राचिन बुरी में बहाव के बाद पुलिस में शिकायत
- जुर्माना बढ़ाने और संपत्ति जब्त करने की पहल
- मामले खत्म होने से पहले खतरनाक कचरा हटाने की मांग
- जांचकर्ताओं की नजर स्वामित्व और धन पर
- आयात जांच का दायरा कबाड़ की खेपों तक
- बाढ़ के पानी के बीच तेज कार्रवाई की मांग
- कार्रवाई कैसे आगे बढ़ी
- मुख्य बिंदु
उद्योग मंत्री वरावुत सिल्पा-अर्चा ने 22 अक्टूबर 2026 को प्रतिनिधि सभा को बताया कि निरीक्षक रायोंग, चोन बुरी, चाचोएंगसाओ, सामुत प्राकान और प्राचिन बुरी में कारखानों की जांच करेंगे। हर प्रांत में 10 दल तैनात होंगे। इन पांच प्रांतों में मिलाकर कचरा प्रबंधन की श्रेणी 105 और 106 के तहत लाइसेंस प्राप्त थाईलैंड के 3,049 कारखानों में से लगभग आधे हैं।
वरावुत ने कहा कि कानून तोड़ने वाले कारखानों का विवरण एक से दो महीने में सामने आना चाहिए। यानी अपेक्षित निष्कर्ष नवंबर या दिसंबर 2026 के आसपास आ सकते हैं। कानून तोड़ते पाए जाने वाले कारखानों को बंद किया जा सकता है, उनका लाइसेंस रद्द हो सकता है और परिसर में मौजूद कचरे के निपटारे के आदेश दिए जा सकते हैं।
इस अभियान में कचरा कारोबार के अलग-अलग पहलुओं की तीन जांचें शामिल हैं: थाईलैंड में क्या आयात हो रहा है, प्रसंस्करण केंद्रों के भीतर क्या होता है और संबंधित कंपनियों पर वास्तव में किसका नियंत्रण है। दूषित जमीन और जलमार्गों के पास रहने वाले लोगों के लिए सबसे तात्कालिक सवाल यह है कि आपराधिक मामले जारी रहने के दौरान खतरनाक सामग्री हटाई जा सकती है या नहीं।
अवैध कचरा आयात का विरोध करते हुए वरावुत ने सांसदों से कहा:
थाईलैंड दुनिया का कूड़ाघर नहीं है।
रायोंग का प्रतिनिधित्व करने वाले पीपुल्स पार्टी के सांसद वाचरापोंग सिरिरक ने सरकार से उन आरोपों पर जवाब मांगा कि आयातित कचरे को कुचलकर मिट्टी और कभी-कभी मुर्गियों के खाद के उर्वरक में मिलाया गया, फिर कम लागत पर खेतों को भरने के लिए उपलब्ध कराया गया। उन्होंने मामलों के खत्म होने का इंतजार किए बिना कड़ी जांच, मुकदमा चलाने, मुआवजा देने और पर्यावरण बहाली की मांग की।
वरावुत के बताए आंकड़े अवैध निपटान के आर्थिक प्रोत्साहन को स्पष्ट करते हैं: कचरे का उचित उपचार 800,000 से 1 मिलियन बाट तक पड़ सकता है, जबकि जुर्माना 200,000 से 300,000 बाट है। इन आंकड़ों के मुताबिक, कानूनी तरीके से निपटान की लागत बताए गए जुर्माने से लगभग 2.7 से पांच गुना है। इसलिए सरकार की प्रतिक्रिया में दंड बढ़ाने का प्रस्ताव अहम है।
कारखानों के लाइसेंस में क्या शामिल है
औद्योगिक कार्य विभाग का कचरा कारखाना डेटासेट निरीक्षण के केंद्र में मौजूद श्रेणियों की व्याख्या करता है। श्रेणी 105 में कारखाना अधिनियम के तहत जारी 1992 के मंत्रिस्तरीय विनियम संख्या 2 के अनुसार कचरे और छोड़ी गई सामग्री की छंटाई या उसे जमीन में दबाना शामिल है।
श्रेणी 106 में वे कारखाने आते हैं जो छोड़े गए औद्योगिक उत्पादों या कारखाने के कचरे को औद्योगिक प्रसंस्करण के जरिए नए कच्चे माल या उत्पादों में बदलते हैं। सरल शब्दों में, निरीक्षण अभियान में अवांछित सामग्री संभालने वाले कारोबार और उसे दोबारा इस्तेमाल के लिए प्रसंस्कृत करने वाले कारोबार, दोनों शामिल हैं।
सरकार की राष्ट्रीय कैटलॉग प्रविष्टि में श्रेणी 101 भी सूचीबद्ध है, जिसमें केंद्रीय कचरा उपचार संयंत्र आते हैं। विभाग के मुताबिक, संबंधित डेटाबेस में औद्योगिक संपदाओं के बाहर स्थित कारखाने शामिल हैं। व्यापक कंपनी आंकड़ों से इन रिकॉर्ड की तुलना करते समय यह सीमा प्रासंगिक है।
वरावुत ने पहले की प्रवर्तन कार्रवाई में कमियों को स्वीकार किया। इनमें छंटाई गोदामों के रूप में चलने वाली इकाइयां और ऐसी जांचें शामिल हैं जो हर केंद्र तक नहीं पहुंची थीं। उन्होंने स्थानीय प्रशासकों और गांव के नेताओं से असामान्य गोदामों या गतिविधियों की सूचना देने को कहा, ताकि अधिकारी उन जगहों की भी जांच कर सकें जो लाइसेंस प्राप्त कारखानों की मौजूदा सूची में नहीं हैं।
रायोंग की तलाशी में कम से कम 2,500 टन कचरा मिला
निखोम फत्ताना जिले में रायोंग इंडस्ट्रियल कंपनी के गोदामों का परिसर इस काम के पैमाने और जटिलता को दिखाता है। अधिकारियों के निष्कर्षों के अनुसार, 12 अक्टूबर को 15 इमारतों की जांच में छह इमारतें श्रेणी 105 और 106 के तहत पंजीकृत मिलीं, जबकि नौ के पास कारखाना चलाने का लाइसेंस नहीं था।
पांच इमारतों के भीतर अधिकारियों को कतरने और छंटाई की मशीनें मिलीं। साथ ही, तार, तांबे और एल्युमिनियम का मिला-जुला कचरा कम से कम 3,000 घन मीटर जगह में फैला था। रायोंग प्रांतीय उद्योग कार्यालय ने 14 अक्टूबर को कारखाना अधिनियम 1992 के तहत इन इमारतों की सामग्री जब्त की।
अधिकारियों ने बाकी 10 इमारतों की जांच के लिए 16 अक्टूबर को रायोंग प्रांतीय अदालत के तलाशी वारंट के साथ दोबारा परिसर का दौरा किया। वहां उन्हें धातु कतरने, छांटने, निकालने और गलाने की मशीनें मिलीं। साथ ही बिजली के उपकरण, धातु के पुर्जे और कम से कम 2,500 टन वजन का कटा हुआ इलेक्ट्रॉनिक कचरा मिला।
बाद की तलाशी के दौरान प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने सामग्री के 14 नमूने, मिट्टी की तलछट का एक नमूना और पानी का एक नमूना लिया। पोर्टेबल एक्स-रे फ्लोरेसेंस उपकरण से की गई शुरुआती जांच में संकेत मिला कि सामग्री उद्योग मंत्रालय की 2013 की अधिसूचना की सूची 5.2 के तहत श्रेणी 3 के खतरनाक पदार्थों में आती है। इस सूची में रासायनिक कचरा शामिल है।
एक्स-रे फ्लोरेसेंस, जिसे आम तौर पर एक्सआरएफ कहा जाता है, नमूने में मौजूद तत्वों की पहचान करने में मदद करता है। अधिकारियों ने नमूनों को आगे की जांच के लिए भेजा और बिना अनुमति कारखाना चलाने तथा खतरनाक पदार्थ रखने के आरोप में निखोम फत्ताना पुलिस से शिकायत दर्ज कराने के लिए समन्वय किया। कचरे और मशीनरी को सबूत के तौर पर रखा गया।
प्राचिन बुरी में बहाव के बाद पुलिस में शिकायत
प्राकृतिक संसाधन एवं पर्यावरण मंत्री सुचार्त चोमक्लिन ने 20 अक्टूबर को कहा कि प्राचिन बुरी के श्री महा फोट जिले में एक कंपनी का रोक बांध टूट गया, जिससे रासायनिक अपवाह बाहर निकल गया। बताया गया कि पानी में इंद्रधनुषी रंग दिखाई दे रहे थे।
सुचार्त ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग के निरीक्षकों ने लक्षित कारखाने के एक किलोमीटर के दायरे में जांच की और पेट्रोलियम से जुड़े पदार्थ बड़ी मात्रा में पाए। अधिकारियों ने श्री महा फोट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मंत्री ने कहा कि एक संचालक ने उनसे संपर्क कर दलील दी कि कारखाने के पास वैध लाइसेंस है और वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। सुचार्त ने कहा कि ड्रोन से लिए गए दृश्यों में कंपनी का बांध टूटा हुआ दिखा और उन्होंने कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया। उन्होंने बार-बार अस्थायी रूप से बंद कर सुधार का मौका देने के बजाय बार-बार उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने का भी समर्थन किया।
प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने जवाबी कार्रवाई में समन्वय के लिए एजेंसियों की बैठक बुलाई। इस काम में उद्योग, पर्यावरण, वित्त और वाणिज्य मंत्रालय, विशेष जांच विभाग, धनशोधन निरोधक कार्यालय और प्रांतीय प्राधिकरण शामिल हैं। प्रदूषण निरीक्षक पदार्थों की पहचान और संदूषण का आकलन करते हैं, जबकि अन्य एजेंसियों के पास कारखानों, आयात, कंपनी के स्वामित्व और आपराधिक जांच से जुड़े अधिकार हैं।
जुर्माना बढ़ाने और संपत्ति जब्त करने की पहल
वरावुत ने कहा कि औद्योगिक कार्य विभाग से संबंधित विधेयक पर प्रतिनिधि सभा की एक समिति विचार कर रही है। उन्होंने दंड बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, क्योंकि उनके बताए जुर्माने की रकम कचरे के कानूनी उपचार की लागत से काफी कम है।
मंत्री के आंकड़ों के मुताबिक, जुर्माने और उचित उपचार में से किसी एक को चुनने वाले संचालक के लिए 500,000 से 800,000 बाट का अंतर हो सकता है। सरकार की प्रस्तावित कार्रवाई का मकसद दंड बढ़ाकर और अवैध गतिविधियों के पीछे लगे धन का पता लगाकर इस गणना को बदलना है।
उद्योग मंत्रालय धनशोधन निरोधक कार्यालय के साथ ऐसे कानूनी रास्ते पर समन्वय कर रहा है, जिससे अवैध औद्योगिक कचरा डंपिंग वित्तीय जांच और संपत्ति जब्ती के दायरे में आ सके। सुचार्त यह भी चाहते हैं कि विशेष जांच विभाग उपयुक्त मामलों को विशेष जांच के तौर पर ले, खासकर उन मामलों को जिनमें सीमा पार नेटवर्क सक्रिय हों।
संपत्ति जब्ती से कार्रवाई केवल जुर्माने या प्रसंस्करण केंद्र बंद करने तक सीमित नहीं रहेगी। जांचकर्ता अपराधों से जुड़ी रकम और संपत्ति का पता लगाने की कोशिश करेंगे, ताकि गतिविधि को धन देने वाले कारोबारों और लोगों तक पहुंचा जा सके।
पर्यावरण अधिकारी प्राचिन बुरी की एक कार्रवाई से जुड़े भूमि दस्तावेजों की भी जांच कर रहे हैं। सुचार्त ने कहा कि अधिकारियों को तीन नोर सोर 3 कोर भूमि प्रमाणपत्र मिले हैं। माना जाता है कि यह जमीन 1987 में राष्ट्रीय आरक्षित वन का हिस्सा थी। अधिकारी भूमि संहिता की धारा 61 के तहत इन प्रमाणपत्रों को जारी किए जाने की जांच करेंगे और दस्तावेज अवैध रूप से जारी हुए पाए जाने पर उन्हें रद्द करने की मांग करेंगे।
मामले खत्म होने से पहले खतरनाक कचरा हटाने की मांग
वाचरापोंग ने पूछा कि क्या अदालत में कार्यवाही जारी रहने के दौरान कचरा हटाया जा सकता है और क्षतिग्रस्त इलाकों को बहाल किया जा सकता है, ताकि सबूत स्थल पर रहने के कारण स्थानीय लोगों को खतरे का सामना न करना पड़े। उन्होंने अंतिम फैसले से पहले प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की भी मांग की।
वरावुत ने कहा कि अगर जब्त कचरे को वहीं छोड़ने से जनता को खतरा हो, तो उद्योग मंत्रालय उसे हटाने की अनुमति के लिए पुलिस से अनुरोध कर सकता है। औद्योगिक कार्य विभाग को पहले धन जुटाना होगा, जो केंद्रीय निधि या सरकारी बजट से आ सकता है। मामले का अंतिम फैसला होने पर संचालकों से खर्च वसूलने की मांग की जाएगी।
कचरा कहां पड़ा है, इससे यह भी तय होता है कि कार्रवाई किस एजेंसी के दायरे में आएगी। वरावुत ने कहा कि कारखाने के भीतर पड़ा कचरा उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी है। अगर संचालक किसी खेत या तालाब में सामग्री डालता है, तो मंत्रालय कानूनी कार्रवाई कर कारखाने को उसे वापस लेने के लिए कह सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग राष्ट्रीय पर्यावरण गुणवत्ता संवर्धन और संरक्षण अधिनियम के तहत पर्यावरणीय नुकसान के लिए कार्रवाई कर सकता है। इसलिए कचरे को भौतिक रूप से हटाने और पर्यावरणीय क्षति के दावे अलग-अलग, लेकिन आपस में जुड़े अधिकार क्षेत्रों के तहत आते हैं। सफाई या मुआवजे के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई। प्रस्तावित दंड और आयात नियमों का सटीक दायरा भी विचाराधीन रहा।
जांचकर्ताओं की नजर स्वामित्व और धन पर
व्यवसाय विकास विभाग के महानिदेशक कित्तिवात पट्चिमनान ने कहा कि प्राचिन बुरी में शुरुआती जांच में चार ऐसी कंपनियों की पहचान हुई है जिन पर थाई नामधारी शेयरधारकों का इस्तेमाल करने का संदेह है। जांच के लिए जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजी गई, जिसमें थाई शेयरधारकों के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल भी शामिल है।
नामधारी व्यवस्था में कोई व्यक्ति कंपनी के रिकॉर्ड में शेयरधारक के रूप में दर्ज होता है, लेकिन वह किसी और की ओर से काम करता है। असल में धन कोई और देता है या कंपनी पर नियंत्रण रखता है। जांचकर्ता कंपनी गठन, निवेश के स्रोत, स्वामित्व संरचना, वास्तविक प्रबंधन अधिकारों और अन्य कारोबारों से संबंधों की पड़ताल कर रहे हैं।
उप प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री सुपाजे सुथुम्पुन ने प्राचिन बुरी के उन कचरा कारोबारों तक जांच बढ़ाने का आदेश दिया जिनमें विदेशी शेयरधारक हैं। विभाग की इंटेलिजेंस बिजनेस एनालिटिक्स प्रणाली ने ऐसी 44 कंपनियों की पहचान की: 41 गैर-खतरनाक कचरे का काम करती हैं और तीन खतरनाक कचरे का।
इनमें से 39 कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 50% से कम थी और पांच में कम से कम 50% थी। जांच का ध्यान कंपनी के दस्तावेजों में दर्ज स्वामित्व के साथ-साथ इस बात पर है कि निवेश किसने दिया और फैसलों पर नियंत्रण किसका है।
विभाग के 30 सितंबर 2026 के राष्ट्रीय आंकड़ों में विदेशी शेयरधारकों वाली 2,863 कचरा कंपनियां दर्ज थीं। इनमें से 2,568 गैर-खतरनाक कचरे के कारोबार में और 295 खतरनाक कचरे के कारोबार में थीं। यानी कुल कंपनियों में खतरनाक कचरे की श्रेणी का हिस्सा लगभग 10.3% था।
2,863 का आंकड़ा कारोबार की गतिविधि और शेयरधारिता के आधार पर कंपनियों की गिनती है। वरावुत का 3,049 का आंकड़ा श्रेणी 105 और 106 के तहत कारखानों की गिनती है। कंपनियों और लाइसेंस प्राप्त केंद्रों को अलग-अलग रखने से पाठक दोनों जांचों को सही तरह समझ सकते हैं: एक कारोबार के नियंत्रण की पड़ताल करती है, जबकि दूसरी कचरा संचालन की।
आयात जांच का दायरा कबाड़ की खेपों तक
वरावुत ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि थाईलैंड ने 2020 से इलेक्ट्रॉनिक कचरे के आयात पर रोक लगा रखी है और उसी साल औद्योगिक कार्य विभाग ने कच्चे माल के रूप में इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया था। उनका कहना था कि सीमा शुल्क अधिकारियों को माल की घोषणा के बाद हर कंटेनर की जांच करने का अधिकार मिलना चाहिए।
मंत्री ने एक ऐसे कंटेनर का जिक्र किया जिसके सामने के हिस्से में कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल के लिए प्लास्टिक का कबाड़ था, जबकि उसके पीछे कचरा छिपाया गया था। वाचरापोंग ने जोखिम वाले माने जाने वाले आयात की एक्स-रे जांच की मांग की और वरावुत ने अधिक कड़ी जांच का समर्थन किया।
विदेश व्यापार विभाग की महानिदेशक अरादा फुआंगथोंग ने कहा कि उनके विभाग ने 22 अक्टूबर को प्रदूषण नियंत्रण विभाग को पत्र लिखकर धातु के कबाड़ और रबर के कबाड़ पर व्यापक नियंत्रण का प्रस्ताव दिया। सीमा शुल्क विभाग ने दोनों के आयात को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव रखा था। सुझाई गई शर्तों में छह से 12 महीने की संक्रमण अवधि, आयात को उन कारखानों तक सीमित करना जो सामग्री का इस्तेमाल खुद करते हैं, और मात्रा को वास्तविक उत्पादन क्षमता तक सीमित रखना शामिल है।
अन्य प्रस्तावों में खेप भेजे जाने से पहले निरीक्षण प्रमाणपत्र और खतरनाक कचरा मिलने पर माल वापस भेजने का खर्च आयातकों से वसूलना शामिल है। इसके परिणामस्वरूप जारी होने वाली वाणिज्य मंत्रालय की कोई भी अधिसूचना 1979 के वस्तुओं के निर्यात और आयात अधिनियम के तहत लागू होगी।
अरादा ने यह भी कहा कि मंत्रालय की अधिसूचनाओं के तहत नगरपालिका कचरा, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, प्लास्टिक का कबाड़, इस्तेमाल किए गए टायर और रबर का कबाड़ पहले से प्रतिबंधित हैं। वहीं, 22 अक्टूबर के प्रस्ताव में रबर के कबाड़ और धातु के कबाड़ पर और नियंत्रण लगाने की मांग की गई। प्रस्तावित बदलावों से रबर की कौन-सी श्रेणियां प्रभावित होंगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया।
विभाग सीमा शुल्क, प्रदूषण अधिकारियों और औद्योगिक नियामकों के साथ संयुक्त जांच पर चर्चा कर रहा है, खासकर ऐसे धातु के कबाड़ की जांच पर जिसके भीतर इलेक्ट्रॉनिक कचरा छिपा हो सकता है। वह विदेशी दूतावासों से निर्यातकों को थाईलैंड के प्रतिबंधों के बारे में आगाह करने को भी कह रहा है, साथ ही उद्योग के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले कबाड़ की वैध उपलब्धता बनाए रखने की बात कर रहा है।
बाढ़ के पानी के बीच तेज कार्रवाई की मांग
स्वतंत्र शिक्षाविद कमोल कमोलत्राकुल ने 23 अक्टूबर को सरकार से विषैले कचरे के निपटान के कारोबार को बढ़ावा देने वाली नीतियां खत्म करने, विषैले कचरे के प्रसंस्करण संयंत्र बंद करने और विषैले कचरे के आयात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उनकी मांगें सरकार की जांच, चुनिंदा इकाइयां बंद करने और आयात की शर्तें संशोधित करने की नीति से आगे जाती हैं।
कमोल ने चेताया कि बारिश और बाढ़ का पानी कचरे के ढेरों से रसायन बहाकर मिट्टी, खेतों और जलमार्गों तक पहुंचा सकता है। उन्होंने प्राचिन बुरी को लेकर अपनी चिंता का संबंध नीचे की ओर स्थित चाचोएंगसाओ, बांग पाकोंग नदी और थाईलैंड की खाड़ी से जोड़ा।
उन्होंने रामाथिबोडी अस्पताल की सीसा विषाक्तता और परिधीय तंत्रिकाओं को होने वाले नुकसान से जुड़ी चिकित्सकीय जानकारी का भी जिक्र किया। ये तंत्रिकाएं मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संकेत पहुंचाती हैं। ऐसे नुकसान से हाथ-पैरों में कमजोरी हो सकती है। उनका तर्क था कि बार-बार होने वाली बारिश से प्रदूषण और फैलने से पहले कचरा हटा दिया जाना चाहिए।
लोग संदिग्ध अवैध कचरा गतिविधि की सूचना उद्योग मंत्रालय की 1564 हेल्पलाइन पर दे सकते हैं। वरावुत ने कहा कि यह हेल्पलाइन चौबीसों घंटे चालू रहती है। संदिग्ध नामधारी कंपनियों की सूचना व्यवसाय विकास विभाग को 0 2547 4419 या 1570 पर दी जा सकती है।
कार्रवाई कैसे आगे बढ़ी
अक्टूबर में हुई कार्रवाई अलग-अलग गोदामों के निरीक्षण से शुरू होकर कारखाना लाइसेंस, प्रदूषण शिकायतों, स्वामित्व की जांच और प्रस्तावित व्यापार नियंत्रणों से जुड़े व्यापक अभियान में बदल गई।
- 30 सितंबर 2026: कंपनी पंजीकरण के आंकड़ों में देशभर में विदेशी शेयरधारकों वाली 2,863 कचरा कंपनियां दर्ज थीं।
- 12 अक्टूबर: अधिकारियों ने रायोंग के गोदाम परिसर की 15 इमारतों का निरीक्षण किया।
- 14 अक्टूबर: प्रांतीय उद्योग अधिकारियों ने पांच इमारतों की सामग्री जब्त की।
- 16 अक्टूबर: अदालत की अनुमति से अन्य 10 इमारतों की तलाशी में कम से कम 2,500 टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा और कबाड़ मिला।
- 20 अक्टूबर: सुचार्त ने प्राचिन बुरी की प्रदूषण शिकायत और सख्त कार्रवाई की योजनाओं का विवरण दिया।
- 22 अक्टूबर: वरावुत ने संसद में 50 निरीक्षण दलों की योजना बताई, जबकि वाणिज्य एजेंसियों ने स्वामित्व जांच और आयात प्रस्तावों का विवरण दिया।
- नवंबर से दिसंबर: उद्योग मंत्रालय को मंत्री द्वारा बताई गई एक से दो महीने की अवधि में निरीक्षणों का विवरण मिलने की उम्मीद है।
मुख्य बिंदु
- पांच प्रांतों में 50 दल 1,500 से अधिक कचरा कारखानों की जांच करेंगे।
- रायोंग के एक गोदाम की तलाशी में कम से कम 2,500 टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा और कबाड़ मिला।
- प्राचिन बुरी में प्रदूषण से जुड़े निष्कर्षों के बाद श्री महा फोट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज हुई।
- चार कंपनियों के खिलाफ संदिग्ध थाई नामधारी शेयरधारकों को लेकर जांच चल रही है।
- मंत्री अधिक कड़े दंड, वित्तीय जांच और संभावित संपत्ति जब्ती चाहते हैं।
- कार्यवाही जारी रहने के दौरान खतरनाक जब्त कचरे को हटाने के लिए अधिकारी अनुमति मांग सकते हैं। पहले सरकारी धन का इस्तेमाल होगा और बाद में संचालकों से खर्च वसूला जाएगा।






