CPRAM की संरक्षित तुलसी: घरों में उगा सकते हैं, लेकिन बिक्री के लिए पौधे तैयार करने को अनुमति जरूरी

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CPRAM's Protected Basil: Households Can Grow It, but Selling Propagated Plants Requires Permission

चार संरक्षित किस्में, पूरी थाई तुलसी नहीं

CPRAM की चार पवित्र तुलसी की किस्मों को मिला संरक्षण 12 साल तक, यानी 2024 से 2036 तक लागू है। हालांकि, थाईलैंड के कृषि मंत्रालय का कहना है कि परिवार इन संरक्षित किस्मों को भी अपने उपभोग के लिए उगा सकते हैं। कृषि मंत्री सुरिया जुआंगरूंगरुआंगकिट ने जिस पाबंदी का जिक्र किया, वह बिना अनुमति संरक्षित पौधों को बिक्री के लिए बढ़ाने से जुड़ी है।

विषय-सूची
  1. चार संरक्षित किस्में, पूरी थाई तुलसी नहीं
  2. परिवार और किसान क्या कर सकते हैं
  3. किस्मों का पंजीकरण कैसे हुआ
  4. प्रयोगशाला में क्या बदलाव किए गए
  5. किसानों को बीजों की चिंता क्यों है
  6. सार्वजनिक शोध और स्वामित्व का सवाल
  7. तुलसी के अन्य विकल्प उपलब्ध
  8. UPOV 1991 बहस का हिस्सा क्यों है
  9. मुख्य बातें

चारों किस्में, काएव जूरी 01, 02, 03 और 04, CPR1 नाम की देशी तुलसी की किस्म से विकसित की गईं। काएव जूरी 01 का पंजीकरण 12 मार्च 2024 को और बाकी तीन का 24 मई 2024 को पादप किस्म संरक्षण अधिनियम, बी.ई. 2542 के तहत हुआ। यह 1999 का थाई कानून है, जो पादप किस्मों पर अधिकारों को नियंत्रित करता है।

कृषि विभाग का कहना है कि CPRAM इन चार किस्मों के बीज आम लोगों को नहीं बेचती। इसके बजाय, कंपनी अपने खाद्य कारखानों को आपूर्ति करने वाले अनुबंधित किसानों के लिए इनका उत्पादन करती है। इसलिए तात्कालिक मुद्दा यह नहीं है कि देशभर में लोग तुलसी कैसे खरीदते या उगाते हैं, बल्कि यह है कि ये संरक्षित किस्में एक खास व्यावसायिक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा हैं।

फिर भी, नॉनथाबुरी प्रांत के बान माई के किसान चिंतित हैं कि वर्षों तक पौधे उगाने और खुद बीज इकट्ठा करने के बाद संरक्षण के कारण उन्हें निजी कंपनियों से मिलने वाले बीजों पर निर्भर होना पड़ सकता है। उनकी चिंता दो मुद्दों से जुड़ी है: इन चार पंजीकरणों का मौजूदा मतलब क्या है, और क्या थाई कानून में भविष्य में बदलाव से बीज बचाकर रखने और साझा करने पर कड़ी पाबंदियां लग सकती हैं।

CPRAM का कहना है कि उसके अधिकार चार पंजीकृत किस्मों तक सीमित हैं, थाईलैंड की हर तरह की पवित्र तुलसी पर नहीं। कंपनी के अनुसार, देश में 200 से अधिक किस्में हैं। विभाग का कहना है कि किसान सामान्य तुलसी की किस्मों का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं, जिनमें उनके बीज इकट्ठा करना या बोने के लिए बीज खरीदना शामिल है।

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परिवार और किसान क्या कर सकते हैं

कृषि एवं सहकारिता मंत्री सुरिया ने 22 अक्टूबर 2026 को बताया कि निजी कंपनियां शोध के जरिए विकसित नई पादप किस्मों के संरक्षण के लिए आवेदन कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि आम लोग संरक्षित तुलसी को घरेलू उपभोग के लिए उगा सकते हैं, जबकि बिक्री के लिए उसका प्रवर्धन करने के लिए अनुमति जरूरी है।

प्रवर्धन का मतलब है अधिक पौधे तैयार करना, उदाहरण के लिए बीज बोकर या कलम उगाकर। इसलिए मंत्री की व्याख्या के अनुसार, घर में पकाने के लिए तुलसी उगाना और संरक्षित पौधों की संख्या बढ़ाकर उन्हें बेचने का कारोबार करना दो अलग-अलग गतिविधियां हैं।

मंत्री ने जिस व्यावसायिक पाबंदी का जिक्र किया, वह संरक्षित किस्म के और पौधे बिक्री के लिए तैयार करने से जुड़ी है। CPRAM के कारखानों को आपूर्ति करने वाले अनुबंधित किसानों के लिए विभाग ने एक अलग, व्यवस्थित रास्ते का उल्लेख किया है, जिसके जरिए कंपनी उत्पादन के लिए रोपण सामग्री उपलब्ध कराती है।

विभाग के अनुसार, इन चार किस्मों के अलावा दूसरी तुलसी उगाने वाले किसान अपनी सामान्य खेती जारी रख सकते हैं। CPRAM का पंजीकरण खास नाम वाली किस्मों पर लागू होता है, इसलिए किसान के लिए शुरुआत यह जानने से होती है कि उसके पास कौन-सी किस्म है और वह उसका क्या करना चाहता है।

किस्मों का पंजीकरण कैसे हुआ

CPRAM ने प्रजनन का काम अप्रैल 2020 में शुरू किया था, यानी पहले पंजीकरण से करीब चार साल पहले। इस विकास कार्यक्रम में प्रयोगशाला तकनीकों के साथ-साथ नाखोन पाथोम स्थित कसेत्सार्ट विश्वविद्यालय के काम्फेंग सेन परिसर और पथुम थानी स्थित CPRAM में खेती के परीक्षण शामिल थे।

इस प्रक्रिया में शोध, आवेदन और अंततः संरक्षण मिलने के अलग-अलग चरण थे:

  • अप्रैल 2020: CPR1 नाम की देशी तुलसी की किस्म का इस्तेमाल कर विकास कार्य शुरू हुआ।
  • 3 फरवरी 2023: काएव जूरी 01, 02, 03 और 04 के लिए कृषि विभाग में आवेदन जमा किए गए।
  • 12 मार्च 2024: काएव जूरी 01 को पंजीकरण मिला।
  • 24 मई 2024: काएव जूरी 02, 03 और 04 को पंजीकरण मिला।
  • 22 अक्टूबर 2026: सुरिया ने घरेलू खेती और व्यावसायिक प्रवर्धन के नियमों की व्याख्या की।
  • 2036: संरक्षण की बताई गई अवधि समाप्त होगी।

इन पंजीकरणों से CPRAM को तय अवधि के लिए मौजूदा थाई कानून के तहत अधिकार मिलते हैं। अंतरराष्ट्रीय UPOV 1991 कन्वेंशन से जुड़े संभावित बदलावों पर व्यापक बहस इस बात को लेकर है कि अलग कानूनी ढांचा किन गतिविधियों की अनुमति दे सकता है या उन पर रोक लगा सकता है।

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प्रयोगशाला में क्या बदलाव किए गए

कृषि विभाग के आवेदन दस्तावेजों में चारों किस्मों का स्रोत CPR1 नाम की देशी पवित्र तुलसी की किस्म बताया गया है। शोधकर्ताओं ने खाद्य उत्पादन के लिए उपयुक्त पौधों का चयन करने से पहले ऊतक संवर्धन के साथ-साथ गुणसूत्र सेटों की संख्या बढ़ाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल किया।

गुणसूत्रों में पौधे के आनुवंशिक निर्देश होते हैं। गुणसूत्र सेटों की संख्या बढ़ाने से पौधे की विशेषताएं बदल सकती हैं, जिससे प्रजनकों को जांच और चयन के लिए पौधे मिलते हैं। ऊतक संवर्धन में पौधे के छोटे हिस्सों को नियंत्रित परिस्थितियों में उगाया जाता है, जिससे शोधकर्ता आगे के अध्ययन और खेती के लिए पौधे तैयार कर सकते हैं।

CPRAM का कहना है कि उसने तेज सुगंध, तीखे स्वाद, तेजी से बढ़ने और लगातार उपज देने वाली तुलसी पर शोध किया, उसका प्रजनन किया और चयन किया। कंपनी के अनुसार, तैयार भोजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के लिए ये उसके घोषित प्रजनन लक्ष्य हैं।

खेती के परीक्षणों के जरिए प्रयोगशाला का काम विश्वविद्यालय परिसर और कंपनी की परिस्थितियों से जोड़ा गया। खाद्य निर्माता के लिए तुलसी का लगातार उत्पादन महत्वपूर्ण है, क्योंकि कारखानों को अपने उत्पादों के लिए जरूरी स्वाद और दूसरी विशेषताओं वाली सामग्री की भरोसेमंद आपूर्ति चाहिए।

किसानों को बीजों की चिंता क्यों है

बान माई के किसानों ने रोजमर्रा की खेती से जुड़ी चिंता जताई है: क्या आखिरकार उन्हें अपनी फसल से बीज बचाकर रखने के बजाय किसी निजी कंपनी से बीज खरीदने पड़ेंगे? बीज बचाकर रखने से किसान हर बार नई खरीद किए बिना अगले मौसम के लिए रोपण सामग्री जुटा सकता है।

कृषि विभाग की व्याख्या सामान्य तुलसी के मौजूदा हालात को स्पष्ट करती है। किसान आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली किस्मों से बीज इकट्ठा कर सकते हैं या बोने के लिए बीज खरीद सकते हैं, जबकि CPRAM के अधिकार केवल उसकी चार पंजीकृत किस्मों तक सीमित हैं।

CPRAM की कारखानों को आपूर्ति की व्यवस्था यह भी समझाती है कि ये किस्में क्यों विकसित की गईं। कंपनी खाद्य निर्माण के लिए खास विशेषताओं वाली तुलसी चाहती है और इस कारोबार को आपूर्ति करने वाले किसानों के जरिए रोपण सामग्री वितरित करती है। इस व्यवस्था से बाहर के किसानों के पास चुनने के लिए दूसरी किस्में हैं।

इसलिए बीज आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता की चिंता CPRAM के बीजों की मौजूदा उपलब्धता से आगे जाती है। यह इस बात से जुड़ी है कि किसानों के पास कितने विकल्प रहेंगे, कौन-सी किस्में उपलब्ध रहेंगी और रोपण सामग्री बचाकर रखने, बढ़ाने या आपस में बांटने पर कौन-से नियम लागू होंगे।

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सार्वजनिक शोध और स्वामित्व का सवाल

इस मामले में कसेत्सार्ट विश्वविद्यालय की दो भूमिकाएं हैं। उसके काम्फेंग सेन परिसर में CPRAM के प्रजनन कार्यक्रम के लिए खेती के परीक्षण हुए और विश्वविद्यालय को तुलसी की एक दूसरी किस्म का भी संरक्षण मिला है।

विश्वविद्यालय की भागीदारी ने एक सार्वजनिक संस्थान में निजी धन से समर्थित शोध को लेकर सवाल खड़ा किया है: उससे मिलने वाले अधिकार किसके पास होने चाहिए और जनता को उसका लाभ कैसे मिलना चाहिए? कंपनियां भरोसेमंद सामग्री और शोध पर खर्च की गई रकम का लाभ चाह सकती हैं, जबकि सार्वजनिक विश्वविद्यालय की शोध और ज्ञान साझा करने की जिम्मेदारियां भी होती हैं।

इस विवाद से जुड़ी जानकारी में इस शोध को नियंत्रित करने वाली स्वामित्व और वित्तपोषण की शर्तें सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई हैं। UPOV 1991 से जुड़े बदलावों पर फैसले की कोई तारीख नहीं बताई गई है।

सरकार की प्रतिक्रिया में सार्वजनिक पादप शोध भी शामिल है। सुरिया ने कहा कि कृषि विभाग के शोधकर्ता किसानों के इस्तेमाल के लिए पादप किस्मों का विकास जारी रखे हुए हैं। इससे सार्वजनिक रूप से विकसित रोपण सामग्री तक पहुंच के साथ निजी प्रजनकों को मिलने वाला कानूनी संरक्षण भी सामने आता है।

तुलसी के अन्य विकल्प उपलब्ध

कृषि विभाग किसानों के लिए विकल्प के तौर पर देशी तुलसी और बाजार में मौजूद दूसरी किस्मों का उल्लेख करता है। विभाग राष्ट्रीय आनुवंशिक अभियांत्रिकी और जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के शोध का भी जिक्र करता है, जिसे BIOTEC के नाम से जाना जाता है।

उल्लेखित BIOTEC किस्में किउ BIOTEC 1, किउ BIOTEC 2 और डेंग BIOTEC 3 हैं। देशी किस्मों और अन्य व्यावसायिक रोपण सामग्री के साथ, ये दिखाती हैं कि तुलसी का विकास CPRAM के कार्यक्रम से आगे भी जारी है।

थाई तुलसी की 200 से अधिक किस्में होने का CPRAM का आंकड़ा उसके चार पंजीकरणों को व्यापक संदर्भ में रखता है। कंपनी ने तुलसी की कहीं अधिक विविधता में से चुनी गई कुछ किस्मों के अधिकार मांगे हैं। किसानों के लिए रोपण सामग्री के व्यापक विकल्पों तक पहुंच बनाए रखना जरूरी है।

किस्म चुनना अब भी इस व्यावहारिक फैसले पर निर्भर करता है कि किसान कौन-सी फसल उगाना चाहता है और उसे किस खरीदार को बेचेगा। CPRAM के घोषित लक्ष्य कारखानों के लिए सामग्री से जुड़े हैं, जबकि विभाग का आश्वासन उन दूसरी तुलसी किस्मों के इस्तेमाल को जारी रखने से संबंधित है जो किसानों को पहले से उपलब्ध हैं।

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UPOV 1991 बहस का हिस्सा क्यों है

जैव विविधता के लिए काम करने वाले संगठन BioThai ने चेतावनी दी है कि थाई कानून को UPOV 1991 के अनुरूप बनाने से पादप प्रजनकों के अधिकार मजबूत हो सकते हैं और संरक्षित किस्मों के बीज बचाकर रखने या साझा करने की किसानों की स्वतंत्रता घट सकती है। UPOV नई पादप किस्मों के संरक्षण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा है।

संगठन की चिंता सिर्फ बीज बेचने तक सीमित नहीं है। उसका कहना है कि कड़े नियमों से अगले मौसम में बोने के लिए संरक्षित बीज बचाकर रखना, बिना भुगतान के भी उन्हें दूसरों के साथ साझा करना और आगे चयन या प्रजनन के लिए पौध सामग्री इस्तेमाल करना प्रभावित हो सकता है।

प्रजनकों के अधिकार किसी संरक्षित किस्म के तयशुदा उपयोगों पर विकासकर्ता को कानूनी नियंत्रण देते हैं। नीतिगत बहस इस नियंत्रण के दायरे और किसानों तथा शोधकर्ताओं के लिए पौधों के साथ काम जारी रखने की बची गुंजाइश पर है। BioThai ने प्रस्तावित कानूनी बदलावों की समीक्षा की मांग की है, जिसमें जनहित को ध्यान में रखा जाए और पादप किस्मों पर नियंत्रण के केंद्रीकरण को रोका जाए।

सुरिया की व्याख्या मौजूदा थाई कानून के तहत CPRAM की चार पंजीकृत किस्मों से संबंधित है: परिवार संरक्षित तुलसी को उपभोग के लिए उगा सकते हैं, जबकि व्यावसायिक प्रवर्धन के लिए अनुमति जरूरी है। BioThai की चेतावनी इस बात पर केंद्रित है कि भविष्य के कानूनी ढांचे में किसानों के विकल्प कैसे बदल सकते हैं। इन दोनों फैसलों को अलग-अलग समझने से मौजूदा नियमों और प्रस्तावित बदलावों के बीच अंतर स्पष्ट होता है।

मुख्य बातें

  • CPRAM को काएव जूरी 01, 02, 03 और 04 का संरक्षण मिला है। इनका पंजीकरण 2024 में हुआ और संरक्षण 12 साल, यानी 2036 तक है।
  • कृषि मंत्री सुरिया के अनुसार, परिवार संरक्षित तुलसी को उपभोग के लिए उगा सकते हैं, लेकिन बिक्री के लिए उसका प्रवर्धन करने को अनुमति जरूरी है।
  • कृषि विभाग का कहना है कि चारों किस्में आम लोगों को बीज के रूप में बेचने के बजाय CPRAM के कारखानों को आपूर्ति करने वाले अनुबंधित किसानों के लिए उगाई जाती हैं।
  • विभाग की व्याख्या के अनुसार, किसान तुलसी की अन्य किस्में उगाना और उनके बीज इकट्ठा करना जारी रख सकते हैं।
  • प्रजनन कार्यक्रम अप्रैल 2020 में CPR1 नाम की देशी किस्म, गुणसूत्रों की संख्या बढ़ाने और ऊतक संवर्धन के इस्तेमाल से शुरू हुआ।
  • BioThai ने चेतावनी दी है कि UPOV 1991 से जुड़े बदलाव संरक्षित बीजों को बचाकर रखने, साझा करने और उनसे प्रजनन करने पर और पाबंदियां लगा सकते हैं।
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