जरूरी चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर दबाव
ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति के अधीन सांख्यिकी एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच ताजिकिस्तान में डीजल की कीमतें 51.6% और गाजर की कीमतें 52.2% बढ़ीं। पेट्रोल 38% महंगा हुआ और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की कीमत 36.2% बढ़ी। यात्रा, सामान की ढुलाई और रोजमर्रा के भोजन में इस्तेमाल होने वाली चीजों में ये सबसे बड़ी बढ़ोतरी में शामिल हैं।
विषय-सूची
- जरूरी चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर दबाव
- महंगाई के आंकड़े अलग-अलग तस्वीर क्यों दिखाते हैं
- ईंधन की कीमतें अन्य वस्तुओं से कहीं तेज बढ़ीं
- वसंत में ही कीमतों में बढ़ोतरी दिखने लगी थी
- आयात ताजिकिस्तान को बाहरी ईंधन बाजारों से जोड़ता है
- गाजर के दाम उछले, जबकि कई अन्य खाद्य पदार्थ सस्ते हुए
- उपयोगिता सेवाओं से नियमित खर्च और बढ़ा
- सितंबर के बाद परिवारों के सामने क्या है
- मुख्य बातें
देशभर में उपभोक्ता कीमतें इन नौ महीनों में इससे काफी कम, 2.8% बढ़ीं। सितंबर में महंगाई 0.1% रही, जबकि वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें सितंबर 2025 के मुकाबले 4.1% अधिक थीं। 21 अक्टूबर को जारी आंकड़े दिखाते हैं कि देश की कुल महंगाई दर अपेक्षाकृत कम रहने के बावजूद कुछ जरूरी चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है।
उपयोगिता सेवाओं के शुल्क में साल की शुरुआत से 12.3% की बढ़ोतरी ने दबाव और बढ़ाया। खीरे, अंडे, टमाटर और चावल समेत कुछ खाद्य पदार्थ सस्ते हुए। इनकी कीमतों में गिरावट से कुल महंगाई दर पर लगाम लगी, जबकि ईंधन खरीदने या उपयोगिता सेवाओं के बिल चुकाने वाले परिवारों को बड़ी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा।
सितंबर के बाद दुशांबे के पेट्रोल पंपों पर भी कीमतें और बढ़ीं। 16 अक्टूबर को किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि पिछले तीन सप्ताह में प्रति लीटर औसत कीमत 92 ऑक्टेन पेट्रोल के लिए 80 दिराम, डीजल के लिए 90 दिराम और आम तौर पर एलपीजी कहलाने वाली तरलीकृत पेट्रोलियम गैस के लिए 33 दिराम बढ़ी।
महंगाई के आंकड़े अलग-अलग तस्वीर क्यों दिखाते हैं
आंकड़ों में कई तरह की तुलनाओं का इस्तेमाल किया गया है और हर तुलना अलग सवाल का जवाब देती है। 2.8% का आंकड़ा 2025 के अंत से सितंबर 2026 तक के बदलाव को मापता है। 4.1% का आंकड़ा सितंबर की तुलना एक साल पहले के उसी महीने से करता है। सितंबर की 0.1% बढ़ोतरी केवल एक महीने का बदलाव है।
एक और माप जनवरी से सितंबर के औसत दामों की तुलना पिछले साल की इसी अवधि के औसत दामों से करता है। इस आधार पर 2026 में महंगाई 3.9% रही, जबकि 2025 में यह 3.4% थी। यानी महंगाई दर में 0.5 प्रतिशत अंक की तेजी आई।
उपभोक्ता महंगाई के आंकड़े में कई तरह की खरीदारी को एक टोकरी में शामिल किया जाता है। खर्च के तौर-तरीकों के आधार पर अलग-अलग उत्पादों और सेवाओं को इसमें अलग महत्व दिया जाता है। किसी एक चीज की कीमत में तेज बढ़ोतरी की भरपाई दूसरी चीजों के सस्ता होने से कुछ हद तक हो सकती है। इसलिए किसी परिवार पर पड़ने वाला असर इस बात पर निर्भर करता है कि वह क्या खरीदता है और उसके बजट का कितना हिस्सा हर खर्च पर जाता है।
नौ महीनों में सेवाओं की औसत कीमतें 5.9% बढ़ीं, जबकि एक साल पहले 4.3% की बढ़ोतरी हुई थी। गैर-खाद्य वस्तुओं की औसत कीमतें 2.5% बढ़ीं, जो 2.8% से कम थी। ये आंकड़े पूरी अवधि के औसत की तुलना करते हैं, जबकि अलग-अलग ईंधनों के आंकड़े साल की शुरुआत से हुए बदलाव बताते हैं।
ईंधन की कीमतें अन्य वस्तुओं से कहीं तेज बढ़ीं
राष्ट्रीय आंकड़ों में शामिल तीन मुख्य ईंधनों में डीजल की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी। 51.6% की बढ़ोतरी का अर्थ है कि 2025 के अंत में 100 सोमोनी में मिलने वाली उतनी ही मात्रा की कीमत सितंबर में 151.60 सोमोनी होती। इसी तरह पेट्रोल की खरीद 138 सोमोनी और एलपीजी की 136.20 सोमोनी की पड़ती।
सितंबर में पेट्रोल और एलपीजी की कीमतों में एक और तेज बढ़ोतरी हुई। महीने के दौरान पेट्रोल 7.3% और एलपीजी 8.1% महंगी हुई। सितंबर में डीजल की कीमत थोड़ी घटी, हालांकि वह साल की शुरुआत के स्तर से काफी ऊपर बनी रही।
16 अक्टूबर के सर्वेक्षण ने अगले महीने की तस्वीर भी सामने रखी। इसमें दुशांबे के पेट्रोल पंपों को शामिल किया गया और प्रति लीटर दिराम में बदलाव मापा गया, जबकि जनवरी से सितंबर के आंकड़े राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिशत बदलाव बताते हैं। राजधानी में वाहन चालकों के लिए सर्वेक्षण ने टंकी भरवाने के खर्च में और बढ़ोतरी का संकेत दिया।
कपड़ों, जूतों और दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी कहीं कम रही। साल की शुरुआत से कपड़ों और जूतों की कीमतें 1.8% बढ़ीं और दवा उत्पाद 0.7% महंगे हुए। इसलिए गैर-खाद्य खर्च में दबाव की एक खास वजह ईंधन था, न कि सभी गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में समान रूप से तेज बढ़ोतरी।
वसंत में ही कीमतों में बढ़ोतरी दिखने लगी थी
सितंबर के आंकड़े आने से कई महीने पहले ही दुशांबे के वाहन चालकों को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ा था। 27 अप्रैल तक, पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतें मार्च की शुरुआत से औसतन 8% से 9% बढ़ चुकी थीं। सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एआई-92 पेट्रोल की कीमत 1.05 डॉलर से बढ़कर 1.13 डॉलर प्रति लीटर हो गई, जबकि डीजल 1.14 डॉलर से बढ़कर 1.24 डॉलर प्रति लीटर हो गया।
उस वसंत अवधि में एलपीजी की कीमत करीब 6% बढ़कर 0.62 डॉलर प्रति लीटर हो गई। राजधानी के अलग-अलग इलाकों में भी कीमतों में अंतर था। वाहन चालकों ने बताया कि दुशांबे के मध्यवर्ती इलाके बाहरी क्षेत्रों से महंगे हैं। डॉलर में दी गई कीमतें वसंत के बाजार की एक झलक देती हैं, जबकि बाद के राष्ट्रीय आंकड़े लंबी अवधि के बदलाव दर्ज करते हैं।
कीमतों में बढ़ोतरी के मुख्य चरण:
- मार्च की शुरुआत से 27 अप्रैल तक: दुशांबे में ईंधन की कीमतें औसतन 8% से 9% बढ़ीं।
- जनवरी से सितंबर तक: राष्ट्रीय स्तर पर डीजल 51.6%, पेट्रोल 38% और एलपीजी 36.2% महंगी हुई।
- सितंबर: महीने के दौरान पेट्रोल 7.3% और एलपीजी 8.1% और महंगी हुई, जबकि डीजल की कीमत थोड़ी घटी।
- 16 अक्टूबर: दुशांबे के पेट्रोल पंपों के सर्वेक्षण में पिछले तीन सप्ताह के दौरान और बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- 21 अक्टूबर: जनवरी से सितंबर तक के महंगाई के आंकड़े जारी किए गए।
इन तारीखों से पता चलता है कि साल के कई महीनों में ईंधन की कीमतें चिंता का विषय बनी रहीं। सितंबर में डीजल की कीमत में मामूली गिरावट के बाद राजधानी में अक्टूबर के सर्वेक्षण में बढ़ोतरी दर्ज हुई।
आयात ताजिकिस्तान को बाहरी ईंधन बाजारों से जोड़ता है
2025 में रूस ने ताजिकिस्तान को 12 लाख टन से अधिक ईंधन और एलपीजी की आपूर्ति की, जो कुल आयात का 70% से ज्यादा था। कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान ने इससे कम मात्रा में आपूर्ति की। इस निर्भरता के कारण रूसी ईंधन की कीमतों और आपूर्ति को प्रभावित करने वाली परिस्थितियां ताजिकिस्तान के बाजार के लिए खास मायने रखती हैं।
2026 की पहली तिमाही के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों का आयात 3,25,000 मीट्रिक टन से अधिक रहा, जिसका मूल्य 25.1 करोड़ डॉलर से ज्यादा था। 2025 की इसी अवधि की तुलना में आयात की मात्रा 11.4% और मूल्य 8.6% बढ़ा। आयात का औसत घोषित मूल्य करीब 772 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था।
आपूर्तिकर्ताओं ने वसंत में खुदरा कीमतें बढ़ने की एक वजह उत्पादकों द्वारा वसूले जाने वाले ऊंचे दामों को बताया। अप्रैल की रिपोर्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधा को भी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर दबाव की वजह बताया गया।
यह जलडमरूमध्य जहाजों के लिए एक संकरा मार्ग है, जहां से दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति गुजरती है। यहां बाधा आने से व्यापक बाजार प्रभावित हो सकता है, क्योंकि खरीदार ईंधन के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं और आपूर्तिकर्ता आपस में जुड़े व्यापारिक मार्गों पर कीमतें बदलते हैं। ताजिकिस्तान की आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता के चलते बाहरी बाजारों में कीमतों का उतार-चढ़ाव घरेलू लागत तक पहुंचता है।
मार्च और अप्रैल के दौरान मध्य एशिया के अन्य हिस्सों में ईंधन की कीमतें करीब 2% से 5% बढ़ने की खबरें आईं, जबकि उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान में कीमतें ज्यादातर स्थिर रहीं। दुशांबे के वसंत के आंकड़े मार्च की शुरुआत से शुरू होने वाली अलग अवधि के हैं, लेकिन वे दिखाते हैं कि पूरे क्षेत्र में कीमतों का दबाव एक जैसा नहीं था।
गाजर के दाम उछले, जबकि कई अन्य खाद्य पदार्थ सस्ते हुए
2026 के पहले नौ महीनों में गाजर की कीमत 52.2% बढ़ी, जो डीजल की बढ़ोतरी से भी थोड़ी ज्यादा थी। नींबू 25.1% और सेब 17.9% महंगे हुए। चीनी, वनस्पति तेल और आटे की कीमतें भी बढ़ीं, हालांकि इन रोजमर्रा की चीजों के लिए अलग-अलग प्रतिशत नहीं दिए गए।
साल की शुरुआत से खाद्य पदार्थों की कीमतें कुल मिलाकर 2.5% बढ़ीं। कुछ बड़ी गिरावटों से इस बढ़ोतरी को सीमित रखने में मदद मिली: 2025 के अंत की तुलना में खीरे 27.9%, अंडे 16.3% और टमाटर 15% सस्ते हुए, जबकि चावल की कीमत 8.7% घटी।
इन बदलावों का असर हर बार की खरीदारी में परिवारों पर अलग-अलग पड़ता है। पिछले साल के अंत की तुलना में चावल या अंडे खरीदना सस्ता हुआ, जबकि गाजर, फल और कुछ जरूरी खाद्य पदार्थ खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़े। परिवार यह मानकर नहीं चल सकते कि उनकी आम खरीदारी की टोकरी में हर चीज की कीमत एक ही दिशा में जाएगी।
आंकड़ों में कीमतों के बदलाव दिए गए हैं, लेकिन हर खाद्य पदार्थ के लिए विस्तृत कारण नहीं बताया गया। किसी खास चीज की कीमत बढ़ने या घटने की वजह जानने के लिए फसल की परिस्थितियों, आपूर्ति और व्यापार लागत की अतिरिक्त जानकारी जरूरी होगी।
उपयोगिता सेवाओं से नियमित खर्च और बढ़ा
साल की शुरुआत से सितंबर तक उपयोगिता सेवाओं के शुल्क 12.3% बढ़े, जो सशुल्क सेवाओं में दर्ज सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। इस अवधि में सशुल्क सेवाओं की कुल कीमतें 4.2% बढ़ीं, जबकि सितंबर में इनकी औसत मासिक बढ़ोतरी 0.3% रही।
अन्य सेवाओं की कीमतें धीमी गति से बढ़ीं। होटल सेवाएं 1.5% और दुशांबे से मॉस्को के हवाई किराए 1.4% महंगे हुए। यानी उपयोगिता सेवाओं की बढ़ोतरी इन दोनों श्रेणियों के बदलाव से कहीं ज्यादा थी।
उपयोगिता सेवाओं के बिल नियमित खर्च हैं, इसलिए हर बिलिंग अवधि में बढ़ोतरी से परिवारों के पास अन्य खरीदारी के लिए कम पैसा बचता है। ईंधन महंगा होने से काम के लिए गाड़ी चलाने वालों या सामान ढोने वाले व्यवसायों की परिचालन लागत भी बढ़ सकती है। किसी खास परिवार या व्यवसाय पर असर उसके उपभोग और खर्च पर निर्भर करता है।
सितंबर के बाद परिवारों के सामने क्या है
ताजिकिस्तान ने अक्टूबर में कदम रखा तो कुल उपभोक्ता महंगाई अब भी ईंधन, उपयोगिता सेवाओं और कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के मुकाबले कम थी। फिर भी जनवरी से सितंबर तक महंगाई की औसत दर एक साल पहले के 3.4% से बढ़कर 3.9% हो गई थी। राजधानी में अक्टूबर के ईंधन सर्वेक्षण ने पेट्रोल पंपों पर दबाव जारी रहने का संकेत दिया।
सितंबर में मासिक महंगाई की मामूली बढ़ोतरी से कुल सूचकांक को कुछ राहत मिली, जबकि अंडे, चावल और कई सब्जियों के सस्ते होने से खाद्य बजट पर दबाव कम हुआ। वाहन चालकों और उपयोगिता सेवाओं पर ज्यादा खर्च करने वाले परिवारों को अलग स्थिति का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनके नियमित खर्च में बड़ी बढ़ोतरी हुई।
ईंधन की कीमतों में कमी की कोई तारीख या सरकार की नई प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया। अगले मासिक राष्ट्रीय आंकड़ों से पता चलेगा कि दुशांबे में देखी गई अक्टूबर की बढ़ोतरी का देशभर की कीमतों पर क्या असर पड़ा।
मुख्य बातें
- 2026 की शुरुआत से सितंबर तक उपभोक्ता कीमतें 2.8% बढ़ीं और सितंबर 2025 की तुलना में 4.1% अधिक रहीं।
- पहले नौ महीनों में डीजल 51.6%, पेट्रोल 38% और एलपीजी 36.2% महंगी हुई।
- गाजर की कीमत 52.2% बढ़ी, जबकि खीरे, अंडे, टमाटर और चावल सस्ते होने से खाद्य महंगाई 2.5% तक सीमित रही।
- उपयोगिता सेवाओं के शुल्क 12.3% बढ़े, जबकि सशुल्क सेवाओं की कुल कीमतों में 4.2% की बढ़ोतरी हुई।
- 16 अक्टूबर के सर्वेक्षण में दुशांबे में पिछले तीन सप्ताह के दौरान ईंधन की कीमतें और बढ़ने का पता चला।
- 2025 में ताजिकिस्तान के ईंधन और एलपीजी आयात का 70% से अधिक हिस्सा रूस से आया।






