मलेशिया में डॉक्टरों के 3,510 इस्तीफे, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में 13,072 पद खाली

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Malaysia Records 3,510 Doctor Resignations as Public Health Service Faces 13,072 Vacancies

डॉक्टरों की कमी के बीच हजारों ने छोड़ी नौकरी

मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2024 से 2026 के बीच चिकित्सा अधिकारियों के 3,510 इस्तीफे दर्ज किए, जबकि 30 जून तक डॉक्टरों के 13,072 पद खाली थे। स्वास्थ्य मंत्री दातुक सेरी डॉ. जुल्केफ्ली अहमद ने संसद को यह जानकारी दी। इस्तीफा देने वालों में आधे से अधिक ने निजी क्षेत्र में नौकरी की। इससे डॉक्टरों की भर्ती के साथ-साथ उन्हें सेवा में बनाए रखने पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है।

विषय-सूची
  1. डॉक्टरों की कमी के बीच हजारों ने छोड़ी नौकरी
  2. नौकरी छोड़ने वाले डॉक्टर कहां गए
  3. लंबे समय के आंकड़ों में इस्तीफों के बदलते रुझान
  4. स्थायी नियुक्तियों को भरे हुए पदों में बदलने की चुनौती
  5. प्रशिक्षण के पद उपलब्ध, लेकिन कई खाली
  6. वेतन और विशेषज्ञ करियर भी उपायों का हिस्सा
  7. पदों पर अधिक नियंत्रण, लेकिन बड़ी चुनौती बरकरार
  8. छह अस्पतालों में प्रतीक्षा अवधि घटी
  9. डॉक्टरों ने काम के घंटों और मरीजों की देखभाल में बदलाव मांगे
  10. मुख्य बिंदु

खाली पदों में विशेषज्ञ योग्यता के बिना चिकित्सा अधिकारियों के 11,412 पद और विशेषज्ञों के 1,660 पद शामिल थे। इस्तीफा देने वालों में अनुबंध पर कार्यरत डॉक्टरों की संख्या 2,258 थी, जबकि स्थायी डॉक्टरों के 1,252 इस्तीफे दर्ज किए गए। इसका मतलब है कि दर्ज किए गए लगभग 64% इस्तीफे अनुबंध पर कार्यरत अधिकारियों के थे।

जुल्केफ्ली ने क्लांग से पकातन हरापन के सांसद वी गणबातिराउ को लिखित संसदीय जवाब में ये आंकड़े दिए। गणबातिराउ ने इस्तीफों, विदेश जाने, विशेषज्ञों की कमी, हाउसमेंशिप नियुक्तियों और डॉक्टरों को सार्वजनिक सेवा में बनाए रखने के प्रयासों के बारे में पूछा था।

इसी अवधि में मंत्रालय ने 14,064 चिकित्सा अधिकारियों को स्थायी और 9,847 को अनुबंध पर नियुक्त किया। उसने 2026 में अनुबंध पर कार्यरत 4,500 डॉक्टरों को स्थायी नियुक्ति की पेशकश भी की। लेकिन भरे हुए पदों की संख्या में गिरावट दिखाने वाले पहले के आंकड़े और स्थायी नियुक्तियां मिलने के बावजूद काम पर रिपोर्ट न करने वाले डॉक्टर बताते हैं कि भर्ती की घोषणाएं पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं।

कमी के बावजूद मरीजों को कुछ सुधार दिख रहे हैं। छह सरकारी अस्पतालों ने गैर-आपातकालीन स्थिति वाले कम से कम 70% मरीजों का दो घंटे के भीतर इलाज करने का लक्ष्य हासिल किया, जबकि चुनिंदा सरकारी क्लिनिकों के खुलने का समय बढ़ाए जाने के बाद अस्पतालों में मरीजों की संख्या घटी। मलेशिया अधिक डॉक्टरों को सरकारी सेवा में बनाए रखने के साथ मरीजों को ऐसे केंद्रों की ओर भेजने की कोशिश कर रहा है जहां उनका जल्दी इलाज हो सके।

नौकरी छोड़ने वाले डॉक्टर कहां गए

चिकित्सा अधिकारियों के इस्तीफों में निजी क्षेत्र की नौकरी का हिस्सा 51.4% था। इसके बाद 36.8% इस्तीफे निजी कारणों से हुए। दोनों श्रेणियां मिलकर कुल इस्तीफों का 88.2% थीं। विदेश में काम करने या बसने वालों का हिस्सा काफी कम, 2.9% था।

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अन्य कारणों में वैधानिक निकायों में नौकरी (4.5%), स्वास्थ्य समस्याएं (2.6%), आगे की पढ़ाई (1.5%) और क्लिनिक खोलना (0.3%) शामिल थे। वैधानिक निकाय कानून के तहत स्थापित सार्वजनिक संगठन होते हैं, जहां रोजगार की शर्तें मंत्रालय की सेवा से अलग हो सकती हैं।

जुल्केफ्ली ने इस अवधि में इस्तीफा देने या विदेश जाने वाले आठ चिकित्सा विशेषज्ञों का भी जिक्र किया। एक अन्य संसदीय जवाब के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच 1,257 चिकित्सा और दंत विशेषज्ञों ने सार्वजनिक सेवा छोड़ी: 2023 में 359, 2024 में 420 और 2025 में 478। ये आंकड़े अलग-अलग अवधियों और पेशेवर समूहों से जुड़े हैं; हाल में बताए गए आठ मामलों का सटीक दायरा स्पष्ट नहीं किया गया।

मंत्रालय ने कहा है कि चिकित्सा अधिकारियों को निजी क्षेत्र में नौकरी तलाशने से रोकने या निजी नियोक्ताओं और पंजीकृत विदेशी टैलेंट सर्च एजेंसियों को भर्ती करने से रोकने के लिए उसके पास कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसलिए उसका जवाब वेतन, करियर सुरक्षा, प्रशिक्षण और कामकाजी परिस्थितियों पर केंद्रित है।

लंबे समय के आंकड़ों में इस्तीफों के बदलते रुझान

सीनेटर रॉबर्ट लाउ हुई येव को 4 अगस्त को दिए लिखित देवान नेगारा जवाब में 2021 से 2025 के बीच चिकित्सा अधिकारियों के 6,212 इस्तीफे दर्ज किए गए। इनमें से 4,380 अनुबंध पर कार्यरत डॉक्टरों के और 1,832 स्थायी डॉक्टरों के थे।

अनुबंध पर कार्यरत डॉक्टरों के इस्तीफे 2022 में 1,354 के उच्चतम स्तर से घटकर 2025 में 577 रह गए, यानी लगभग 57% की कमी आई। स्थायी डॉक्टरों के इस्तीफे इसके उलट हर साल बढ़े: 2021 में 238 से बढ़कर 2025 में 498 हो गए, यानी इस अवधि में दोगुने से अधिक।

मेरबोक से पेरिकतन नेशनल के सांसद मोहम्मद नज़री अबू हसन को दिए जवाब में 2023 से 2025 तक चिकित्सा अधिकारियों के सालाना आंकड़े क्रमशः 1,283, 1,153 और 1,075 बताए गए। इनका कुल योग 3,511 है, जबकि बाद की और आंशिक रूप से समान अवधि 2024 से 2026 के लिए यह संख्या 3,510 है।

एक-दूसरे से मिलती अवधियों के इन आंकड़ों को जोड़ना उचित नहीं है। सालाना आंकड़े अधिक उपयोगी तुलना देते हैं: 2025 तक अनुबंध पर कार्यरत डॉक्टरों के औपचारिक इस्तीफे कम हुए, जबकि इस्तीफा देने वाले स्थायी डॉक्टरों की संख्या बढ़ी।

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स्थायी नियुक्तियों को भरे हुए पदों में बदलने की चुनौती

स्थायी नियुक्तियां 2021 के 329 से तेजी से बढ़कर 2022 में 3,215 और 2023 में 5,489 हो गईं। इसके बाद 2024 में 4,057 और 2025 में 4,518 नियुक्तियां हुईं। समाप्ति की तारीख वाले अनुबंध की तुलना में स्थायी नौकरी डॉक्टरों को अधिक करियर सुरक्षा देती है, इसलिए सेवा में बनाए रखने की कोशिशों में यह अहम है।

नियुक्ति स्वीकार करवाना भी एक चुनौती रहा है। संसदीय आंकड़ों के अनुसार, 2022 में 78 डॉक्टर स्थायी नियुक्ति के लिए काम पर रिपोर्ट नहीं हुए, जो प्रस्तावों का लगभग 2% था। 2023 में यह संख्या बढ़कर 1,118 यानी लगभग 20% हो गई। जुल्केफ्ली ने मार्च में संसद को बताया था कि देशभर में लगभग 40% डॉक्टर स्थायी नियुक्तियों पर काम शुरू करने नहीं पहुंचे।

स्थायी पद ठुकराने वाले डॉक्टरों के अनुबंध समाप्त होने पर वे बाद में सेवा छोड़ सकते हैं। ऐसा औपचारिक इस्तीफे के बिना भी हो सकता है। इसलिए कार्यबल की योजना बनाते समय अनुबंध खत्म होने और नियुक्ति पाने वाले डॉक्टरों के वास्तव में काम शुरू करने पर भी नजर रखना जरूरी है।

उप स्वास्थ्य मंत्री हनीफा हाजर तैयब ने अनुमान जताया कि सबाह में स्थायी पदों की पेशकश पाने वाले आधे डॉक्टर काम पर रिपोर्ट नहीं कर सकते हैं। राज्य में किसी स्वीकृत पद को भरना सरकार की ओर से नियुक्ति का प्रस्ताव जारी करने के साथ-साथ डॉक्टर के उस पद पर कार्यभार संभालने पर भी निर्भर करता है।

भरे हुए स्थायी और अनुबंध वाले चिकित्सा अधिकारी पदों की संख्या 2022 के 54,632 से घटकर 2025 में 43,713 रह गई। यह 10,919 या लगभग 20% की गिरावट है। इससे पता चलता है कि जारी किए गए प्रस्तावों की संख्या के साथ मौजूदा कर्मचारियों को बनाए रखना और नई नियुक्तियों को स्वीकार करवाना भी क्यों महत्वपूर्ण है।

प्रशिक्षण के पद उपलब्ध, लेकिन कई खाली

जुल्केफ्ली ने कहा कि पात्र चिकित्सा स्नातकों के लिए हाउसमेंशिप की कोई प्रतीक्षा सूची नहीं थी। हाउसमेंशिप वह पर्यवेक्षित व्यावहारिक प्रशिक्षण है जो स्नातक चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम शुरू करने से पहले पूरा करते हैं।

मंत्रालय के 48 अस्पतालों में हाउसमेंशिप प्रशिक्षण के 12,198 पद थे, जिनमें से 6,580 भरे हुए थे। लगभग 54% पदों पर प्रशिक्षणार्थी थे, जबकि 5,618 पद खाली थे। जुल्केफ्ली ने कहा कि इन आंकड़ों से पात्र स्नातकों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण क्षमता का पता चलता है।

हाउसमेंशिप की क्षमता और चिकित्सा अधिकारियों के खाली पद डॉक्टर के करियर के अलग-अलग चरणों से जुड़े हैं। अस्पतालों को नए स्नातकों के प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त पदों के साथ ऐसे पर्याप्त डॉक्टर भी चाहिए जो प्रशिक्षण पूरा करें, सेवा में आएं और उन स्थानों तथा विशेषज्ञताओं में बने रहें जहां उनकी जरूरत है।

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मलेशियाई मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सिवनेसन लेचुमनन ने प्रशिक्षण में भर्ती का एक और आंकड़ा दिया: जनवरी में पेश किए गए हाउसमेंशिप के केवल 529 पद भरे गए। बजट 2027 के लिए उनके प्रस्तावों में सरकार की उस योजना को समर्थन देने के लिए धन की मांग शामिल थी, जिसके तहत पात्र हाउस ऑफिसरों को हाउसमेंशिप पूरी होने के बाद स्थायी पद दिए जाने हैं। यह योजना 2028 तक लागू करने के लक्ष्य के साथ है।

वेतन और विशेषज्ञ करियर भी उपायों का हिस्सा

मंत्रालय के डॉक्टरों को सेवा में बनाए रखने के उपायों में ग्रेड यूडी9 के चिकित्सा अधिकारियों के लिए 5,380 रिंगिट का शुरुआती वेतन और 225 रिंगिट की सालाना वेतन वृद्धि शामिल है। मंत्रालय ने निर्धारित लोकम ड्यूटी और वैकल्पिक सर्जरी के काम के लिए 80 रिंगिट प्रति घंटे का भत्ता भी बताया। लोकम ड्यूटी अतिरिक्त चिकित्सकीय शिफ्ट होती हैं, जिनमें सामान्य दफ्तर समय के बाहर का काम भी शामिल है।

संसद को दिए गए एक पिछले जवाब में चिकित्सा अधिकारियों के ऑन-कॉल भत्ते में 1 अक्टूबर, 2025 से 40% वृद्धि की घोषणा की गई थी। ऑन-कॉल काम में सामान्य कामकाजी घंटों के बाहर की ड्यूटी शामिल होती है, जब अस्पतालों को मरीजों की जांच और इलाज के लिए डॉक्टर उपलब्ध रखने होते हैं।

विशेषज्ञों के लिए मंत्रालय ने सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण हेतु संघीय प्रशिक्षण पुरस्कार के तहत प्रायोजन का जिक्र किया। सुपर-स्पेशियलिटी किसी विशेषज्ञता के भीतर अधिक सीमित क्षेत्र होता है, जिसमें डॉक्टर किसी खास बीमारी या उपचार में अधिक गहन कौशल हासिल कर सकता है।

जुल्केफ्ली ने मेडिकल एक्ट 1971 में संशोधनों के तहत मास्टर कार्यक्रमों और समानांतर प्रशिक्षण मार्गों का भी उल्लेख किया। स्वास्थ्य सेवा के लिए उपलब्ध विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने की कोशिशों में ये रास्ते शामिल हैं।

एमएमए चाहती है कि वरिष्ठता और वेतन वृद्धि की गणना करते समय अनुबंध पर की गई पिछली सेवा को भी मान्यता दी जाए। उसने विशेषज्ञों की पदोन्नति के लिए 80% वस्तुनिष्ठ और मापने योग्य मानदंडों तथा 20% संरचित पेशेवर आकलन पर आधारित मूल्यांकन का प्रस्ताव भी दिया। एसोसिएशन के अनुसार, विशेषज्ञ के रूप में औपचारिक मान्यता मिलने के बाद दसवें वर्ष तक सलाहकार डॉक्टरों का पदोन्नति के लिए आकलन होना चाहिए।

पदों पर अधिक नियंत्रण, लेकिन बड़ी चुनौती बरकरार

लोक सेवा विभाग ने अप्रैल में स्वास्थ्य मंत्रालय के कार्यबल प्रबंधन के लिए एक टास्क फोर्स स्थापित की। 9 जुलाई, 2026 को विभाग ने मंत्रालय को उसके स्वीकृत पदों का प्रबंधन, संगठन और वितरण करने का अधिकार दिया, ताकि भर्ती और कर्मचारियों की तैनाती तेज की जा सके।

स्वास्थ्य मंत्रालय और उच्च शिक्षा मंत्रालय ने स्वास्थ्यकर्मियों की आपूर्ति को मौजूदा जरूरतों के अनुरूप रखने के लिए समन्वय भी शुरू किया है। इससे शिक्षा और प्रशिक्षण से जुड़े फैसलों को अस्पतालों और क्लिनिकों की कर्मचारियों संबंधी जरूरतों के साथ जोड़ा जा सकेगा।

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उपायों और प्रस्तावित अगले कदमों का क्रम इस प्रकार है:

  • 1 अक्टूबर, 2025: चिकित्सा अधिकारियों के ऑन-कॉल भत्ते में घोषित 40% वृद्धि लागू होने की तारीख।
  • अप्रैल 2026: कार्यबल प्रबंधन टास्क फोर्स की स्थापना।
  • 9 जुलाई, 2026: स्वीकृत पदों के प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को अधिक अधिकार।
  • बजट 2027: कर्मचारियों की कमी और उन्हें सेवा में बनाए रखने की समस्याओं पर एमएमए की ओर से मांगे गए कदम।
  • 2028: हाउसमेंशिप पूरी करने के बाद पात्र डॉक्टरों को स्थायी नियुक्ति देने का लक्ष्य।

कर्मचारियों की कमी की चुनौती सिर्फ डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। डॉ. सिवनेसन ने स्वास्थ्य पर संसदीय विशेष चयन समिति के समक्ष पेश लोक सेवा विभाग के आंकड़ों का हवाला दिया। इनके अनुसार, मंत्रालय में खाली पद 2017 के 10,419 से बढ़कर 2024 में 54,362 हो गए। भरे हुए पदों का अनुपात 96% से घटकर 83% रह गया।

ये आंकड़े मंत्रालय के व्यापक कार्यबल से जुड़े हैं, जबकि हाल में बताए गए 13,072 खाली पद डॉक्टरों के हैं। एमएमए ने नर्सों के लगभग 18% पद खाली होने और देशभर में करीब 11,000 विशेषज्ञों की कमी का भी जिक्र किया। यह जरूरत का व्यापक आकलन है, जबकि मंत्रालय के विशेषज्ञों के 1,660 स्वीकृत पद खाली हैं।

छह अस्पतालों में प्रतीक्षा अवधि घटी

जुल्केफ्ली ने तंजुंग करांग के निर्दलीय सांसद डॉ. जुल्काफपेरी हनापी को दिए जवाब में अस्पतालों में प्रतीक्षा के आंकड़े बताए। सभी छह अस्पतालों ने ग्रीन ज़ोन में आने वाले कम से कम 70% मरीजों का दो घंटे के भीतर इलाज करने का लक्ष्य हासिल किया। इस श्रेणी में गैर-आपातकालीन मामले आते हैं। पहले औसतन चार से छह घंटे इंतजार करना पड़ता था।

इपोह के राजा पर्माइसुरी बैनुन अस्पताल में सबसे अधिक 98.61% मरीजों का इलाज लक्ष्य अवधि में हुआ। इसके बाद अम्पांग अस्पताल में 88.78%, सेलेयांग अस्पताल में 74.1%, जोहोर बाहरू के सुल्ताना अमीना अस्पताल में 73.2%, क्लांग के तेंगकु अम्पुआन रहीमा अस्पताल में 72.2% और कुआलालंपुर अस्पताल में 71.8% मरीजों का इलाज हुआ।

चुनिंदा सरकारी क्लिनिकों ने सप्ताह के दिनों में रात 9 बजे तक और सप्ताहांत तथा सार्वजनिक अवकाश के दिन सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक खुलने का समय बढ़ाया। जुल्केफ्ली ने कहा कि इसके बाद छह बड़े अस्पतालों में मरीजों की संख्या 9% घट गई, क्योंकि मामूली बीमारियों वाले मरीजों को इलाज के लिए एक और जगह मिल गई।

अस्पतालों में भीड़ घटाने के लिए विशेष टास्क फोर्स की सभी आठ पहल जून तक लागू कर दी गई थीं। इनमें निजी सामान्य चिकित्सकों से इलाज की सेवाएं खरीदना, मरीजों के प्रवाह में सुधार करना और 545 स्वास्थ्य क्लिनिकों में जाने से पहले डिजिटल जांच का विस्तार करना शामिल था।

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डॉक्टरों ने काम के घंटों और मरीजों की देखभाल में बदलाव मांगे

एमएमए के बजट 2027 प्रस्तावों में वेतन और स्थायी नौकरियों के साथ कामकाजी परिस्थितियों को भी शामिल किया गया है। एसोसिएशन ने लोक सेवा पारिश्रमिक प्रणाली, जिसे एसएसपीए के नाम से जाना जाता है, के तहत 45 घंटे के साप्ताहिक मानक के अनुरूप कामकाजी व्यवस्था और लगातार 24 घंटे की शिफ्ट के बाद सुनिश्चित आराम की मांग की।

एमएमए अध्यक्ष डॉ. सिवनेसन ने कर्मचारियों की थकान का मरीजों को मिलने वाली देखभाल से सीधा संबंध बताया:

थका हुआ, जरूरत से ज्यादा काम के बोझ तले दबा और पर्याप्त सहयोग से वंचित कार्यबल सुरक्षित स्वास्थ्य प्रणाली को बनाए नहीं रख सकता। स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी है।

एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, लोक सेवा विभाग और उच्च शिक्षा मंत्रालय की भागीदारी वाला राष्ट्रीय कार्यबल डैशबोर्ड बनाने का भी प्रस्ताव दिया। इसमें खाली पदों, कर्मचारियों के वितरण, प्रशिक्षण क्षमता और सेवा छोड़ने वालों पर नजर रखी जाएगी, ताकि अलग-अलग आंकड़ों और रिपोर्टिंग अवधियों में दी जा रही जानकारी एक साथ उपलब्ध हो सके।

निजी क्लिनिक भी उसके प्रस्तावों का हिस्सा हैं। एमएमए चाहती है कि मलेशिया के 11,000 से अधिक निजी सामान्य चिकित्सक क्लिनिकों को जांच, इलाज, फॉलो-अप और निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क में शामिल किया जाए। उसने निजी स्वास्थ्य सेवा विकास प्रभाग बनाने और निजी स्वास्थ्य सेवाओं के पंजीकरण तथा लाइसेंस को एक डिजिटल मंच पर लाने के लिए 10 मिलियन रिंगिट देने का प्रस्ताव भी रखा।

अन्य मांगों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में निवेश बढ़ाना और पांच लोगों की जान लेने वाली हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद फ्लाइंग डॉक्टर सेवा के लिए अधिक धन देना शामिल है। एसोसिएशन ने विमान, रखरखाव, उपकरण और संचालन के लिए सहायता के साथ 1978 से अपरिवर्तित कर्मियों के भत्तों की समीक्षा की मांग की।

मलेशिया के सामने तत्काल चुनौती प्रशिक्षण क्षमता, नियुक्ति प्रस्तावों और स्वीकृत पदों को कार्यरत सेवाओं में बदलने की है। अस्पतालों के नतीजे दिखाते हैं कि क्लिनिकों के लंबे समय तक खुले रहने और मरीजों के प्रवाह में बदलाव से अभी दबाव घट सकता है। इन सुधारों को बनाए रखने के लिए डॉक्टरों को सार्वजनिक सेवा में बनाए रखना अहम है।

मुख्य बिंदु

  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2024 से 2026 के बीच चिकित्सा अधिकारियों के 3,510 इस्तीफे दर्ज किए; 51.4% ने निजी क्षेत्र में नौकरी की।
  • 30 जून तक डॉक्टरों के 13,072 पद खाली थे, जिनमें विशेषज्ञों के 1,660 पद शामिल हैं।
  • भरे हुए चिकित्सा अधिकारी पदों की संख्या 2022 के 54,632 से घटकर 2025 में 43,713 रह गई।
  • हाउसमेंशिप के 12,198 प्रशिक्षण पदों में से 6,580 भरे हुए थे, यानी पदों पर 54% प्रशिक्षणार्थी थे।
  • मंत्रालय ने 2026 में अनुबंध पर कार्यरत 4,500 डॉक्टरों को स्थायी नियुक्ति की पेशकश की और स्वीकृत पदों पर अधिक नियंत्रण हासिल किया।
  • छह अस्पतालों ने दो घंटे के भीतर कम से कम 70% गैर-आपातकालीन मरीजों का इलाज करने का लक्ष्य हासिल किया।
  • एमएमए बजट 2027 में डॉक्टरों को सेवा में बनाए रखने, काम के घंटों, करियर में प्रगति और कार्यबल योजना पर कदम उठाने की मांग कर रही है।
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