सेना के परीक्षण में आज़माई गईं दो लेज़र प्रणालियाँ
हनवा सिस्टम्स के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 को ग्योंगगी प्रांत के यांगप्योंग में सेना के एक अभ्यास के दौरान दो दक्षिण कोरियाई लेज़र हथियारों ने तीनों लक्ष्य ड्रोन मार गिराए। इस प्रदर्शन में स्थिर चेओंगवांग वायु रक्षा प्रणाली के साथ लगभग 30 किलोवाट क्षमता वाले एक अलग वाहन-आधारित लेज़र को शामिल किया गया। इस तरह मौजूदा रक्षा हथियार और अधिक गतिशील डिज़ाइन, दोनों को एक ही अभ्यास में आज़माया गया।
विषय-सूची
- सेना के परीक्षण में आज़माई गईं दो लेज़र प्रणालियाँ
- चेओंगवांग और मोबाइल तोप अलग-अलग परियोजनाएँ हैं
- बिजली से लागत का हिसाब कैसे बदलता है
- शीतलन से मोबाइल लेज़र का इस्तेमाल व्यावहारिक बनता है
- लेज़र के साथ जैमिंग और गोलीबारी भी
- तैनाती के बाद प्रदर्शनों की श्रृंखला
- विदेशी खरीदारों के लिए 50 किलोवाट का वाहन
- दक्षिण कोरिया मोबाइल उत्तराधिकारी पर भी विचार कर रहा है
- मुख्य बातें
हनवा ने नतीजों की घोषणा 15 अक्टूबर को की। आर्मी टाइगर+ एकीकृत भविष्य युद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 500 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें सेना प्रमुख जनरल किम ग्यु-हा, सैन्य अधिकारी और उद्योग, विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
तीनों सफल अवरोधनों के साथ प्रदर्शन में शामिल लेज़र प्रणालियों की संयुक्त सफलता दर 100 प्रतिशत रही। हनवा ने यह नहीं बताया कि किस हथियार ने किस ड्रोन को नष्ट किया, लक्ष्य के मॉडल क्या थे, अवरोधन कितनी दूरी पर हुए या वाहन-आधारित लेज़र किस वाहन पर लगा था।
यह अभ्यास ऐसे समय हुआ है जब हनवा चेओंगवांग के लिए विदेशी ग्राहक तलाश रही है और 50 किलोवाट लेज़र से लैस अधिक शक्तिशाली बख्तरबंद वाहन विकसित कर रही है। कंपनी की बिक्री की दलील एक उल्लेखनीय लागत तुलना पर आधारित है: कंपनी के मुताबिक, चेओंगवांग से एक लेज़र शॉट की लागत लगभग 2,000 वॉन, यानी करीब 1.50 डॉलर है, जबकि पारंपरिक वायु रक्षा गोला-बारूद कहीं अधिक महंगा हो सकता है।
चेओंगवांग और मोबाइल तोप अलग-अलग परियोजनाएँ हैं
चेओंगवांग, जिसका अर्थ है "आकाश का प्रकाश", औपचारिक रूप से लेज़र वायु रक्षा हथियार ब्लॉक-I कहलाता है। दक्षिण कोरिया की रक्षा विकास एजेंसी ने इसका नेतृत्व किया, जबकि हनवा सिस्टम्स ने प्रोटोटाइप ठेकेदार और निर्माता के रूप में हिस्सा लिया। इसकी तैनाती दिसंबर 2024 में शुरू हुई।
इसके साथ प्रदर्शित 30 किलोवाट की मोबाइल तोप को कोरिया रक्षा प्रौद्योगिकी योजना एवं उन्नति अनुसंधान संस्थान (KRIT) के प्रबंधन में विकसित किया गया। हनवा इसकी प्रमुख विकासकर्ता थी। हथियार के पुर्ज़ों को छोटा और हल्का बनाया गया, ताकि इसे लड़ाकू वाहन पर ले जाया जा सके।
दोनों प्रणालियाँ तैनाती की अलग-अलग ज़रूरतें पूरी करती हैं। स्थिर स्थापना किसी खास स्थान की रक्षा कर सकती है, जबकि लेज़र से लैस वाहन को दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। सैनिकों और खरीद अधिकारियों के लिए गतिशीलता अहम है, क्योंकि इकाइयों के आगे बढ़ने या खतरे बदलने के साथ सुरक्षा की ज़रूरत वाली जगह भी बदल सकती है।
किलोवाट शक्ति की इकाई है, यानी यह बताती है कि ऊर्जा कितनी तेज़ी से दी जाती है। 30 किलोवाट की रेटिंग मोबाइल लेज़र के आउटपुट को दर्शाती है। यांगप्योंग में घोषित नतीजा दोनों शामिल हथियारों का संयुक्त परिणाम है।
बिजली से लागत का हिसाब कैसे बदलता है
चेओंगवांग से प्रति शॉट लगभग 2,000 वॉन की लागत का हनवा का अनुमान, इस हथियार के आकर्षण का मुख्य आधार है। छोटे ड्रोन इतने सस्ते हो सकते हैं कि उन्हें बार-बार भेजा जा सके। इससे रक्षकों को हर आने वाले लक्ष्य के महत्व की तुलना उसे नष्ट करने में इस्तेमाल होने वाले गोला-बारूद की कीमत और उपलब्धता से करनी पड़ती है।
प्रदर्शन के साथ दिए गए लागत के आँकड़ों के मुताबिक, वायु रक्षा मिसाइलों की कीमत प्रति मिसाइल कई लाख से लेकर करोड़ों येन तक हो सकती है, जबकि कुछ तोप के गोला-बारूद की कीमत कई लाख येन होती है। लेज़र किरण डालने की अनुमानित लागत लगभग 200 येन थी। इसलिए हर मुठभेड़ में संभावित बचत काफी अधिक है।
2,000 वॉन के आँकड़े में लेज़र किरण डालने की लागत शामिल है। बिजली की खपत और शीतलन प्रणाली के रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च होता है। इसके अलावा उपकरण खरीदने, चलाने और बनाए रखने की व्यापक लागत भी है। सैन्य बजट की योजना बनाते समय पूरी प्रणाली के साथ-साथ अवरोधन के दौरान इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा का खर्च भी जोड़ना पड़ता है।
हनवा का कहना है कि बिजली आपूर्ति उपलब्ध होने पर चेओंगवांग 24 घंटे काम कर सकता है और इसके लिए अलग से गोला-बारूद पहुँचाने की ज़रूरत नहीं होती। पारंपरिक तोपों और मिसाइल लॉन्चरों में फायरिंग के बाद नए राउंड भरने पड़ते हैं; लेज़र बिजली और संचालन के दौरान पैदा होने वाली गर्मी को संभालने में सक्षम उपकरणों पर निर्भर करता है।
शीतलन से मोबाइल लेज़र का इस्तेमाल व्यावहारिक बनता है
30 किलोवाट की वाहन-आधारित तोप गर्मी नियंत्रित करने के लिए अवस्था-परिवर्तन शीतलन तकनीक का इस्तेमाल करती है। सरल शब्दों में, शीतलन सामग्री भौतिक अवस्था बदलते समय गर्मी सोख लेती है। इससे शक्तिशाली उपकरणों के संचालन के दौरान पैदा होने वाली गर्मी को संभालने में मदद मिलती है।
हनवा का मोबाइल डिज़ाइन इस शीतलन पद्धति को छोटे और हल्के पुर्ज़ों के साथ जोड़ता है। लड़ाकू वाहन पर ये दोनों बातें अहम हैं, जहाँ लेज़र, उसके सहायक उपकरण और शीतलन प्रणाली को जगह और वज़न की सीमाओं के भीतर रखना होता है।
शक्तिशाली लेज़र को लक्ष्य पर ऊर्जा केंद्रित करनी होती है और साथ ही अपने उपकरणों का तापमान काम करने लायक बनाए रखना पड़ता है। इसलिए शीतलन हथियार की संचालन क्षमता का हिस्सा है, ठीक उसके किरण आउटपुट की तरह। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक गतिशीलता और स्थिर संचालन में मदद करती है।
वाहन-आधारित प्रदर्शन से सेना को यह परखने का मौका मिलता है कि यह उपकरण एक बड़े युद्ध अभ्यास में किस तरह काम करता है। घोषित नतीजों में ड्रोन अवरोधनों पर ध्यान दिया गया, जबकि इंजीनियरिंग से जुड़े विकल्प दिखाते हैं कि हनवा किस तरह इस प्रणाली को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने योग्य बना रही है।
लेज़र के साथ जैमिंग और गोलीबारी भी
यांगप्योंग अभ्यास में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और आने वाले ड्रोन पर K21 बख्तरबंद वाहन से गोलीबारी भी शामिल थी। सेना एक ही तरह के खतरे से निपटने के कई तरीके दिखा रही थी, न कि लेज़र हथियारों को अलग-थलग पेश कर रही थी।
इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग रेडियो हस्तक्षेप के ज़रिए उन संचार या नेविगेशन संकेतों को बाधित करती है जिन पर ड्रोन निर्भर हो सकता है। गोलीबारी विमान को भौतिक रूप से निशाना बनाती है। लेज़र उस पर केंद्रित ऊर्जा डालता है। अलग-अलग तरीकों से रक्षकों को अलग डिज़ाइन और उड़ान व्यवहार वाले ड्रोन का जवाब देने के कई विकल्प मिलते हैं।
दक्षिण कोरिया के पास इन रक्षा प्रणालियों को बेहतर करने की ठोस वजह है। दिसंबर 2022 में उत्तर कोरिया के पाँच ड्रोन सीमा पार कर आए थे, जिनमें से एक सियोल तक पहुँच गया। लड़ाकू विमान, अटैक हेलीकॉप्टर और चेतावनी के लिए चलाई गई गोलियाँ उन्हें गिराने में नाकाम रहीं।
इसके बाद से चेओंगवांग को संवेदनशील स्थानों पर सेवा में लगाया गया है। जून 2026 तक प्रमुख सरकारी परिसरों में लगभग पाँच इकाइयाँ तैनात थीं, जिनमें राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय की इमारत भी शामिल है। इन स्थानों पर इसका काम सीधा है: छोटे विमान को निगरानी करने या हमला करने से पहले रोकना।
तैनाती के बाद प्रदर्शनों की श्रृंखला
अक्टूबर का अभ्यास 16 सितंबर को 2026 रक्षा ड्रोन प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी में हुए एक और सफल अवरोधन प्रदर्शन के बाद हुआ। हनवा ने कहा कि सेना के स्यंगजिन प्रशिक्षण मैदान में चेओंगवांग ने लगातार चार ड्रोन और दो बड़े मानवरहित विमानों को नष्ट किया।
सितंबर और अक्टूबर के आयोजनों में कुल नौ लक्ष्य अवरोधन घोषित किए गए: सितंबर में छह और अक्टूबर में तीन। सितंबर के अवरोधन चेओंगवांग ने किए, जबकि अक्टूबर का नतीजा स्थिर प्रणाली और अलग मोबाइल लेज़र के संयुक्त प्रदर्शन का था।
मुख्य तारीखें तैनाती, प्रदर्शनों और निर्यात की तैयारियों की प्रगति दिखाती हैं:
- दिसंबर 2024: दक्षिण कोरिया ने चेओंगवांग ब्लॉक-I को तैनात करना शुरू किया।
- जून 2026: प्रमुख सरकारी परिसरों में लगभग पाँच इकाइयाँ तैनात थीं।
- सितंबर 2026: हनवा ने पोलैंड के किल्से में MSPO रक्षा प्रदर्शनी में अपने 50 किलोवाट बख्तरबंद वाहन की अवधारणा पेश की।
- 16 सितंबर 2026: रक्षा ड्रोन प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी में चेओंगवांग ने छह लक्ष्य रोके।
- 14 अक्टूबर 2026: आर्मी टाइगर+ प्रशिक्षण के दौरान चेओंगवांग और 30 किलोवाट की मोबाइल तोप ने तीन ड्रोन रोके।
- 15 अक्टूबर 2026: हनवा ने सेना के अभ्यास के नतीजों की घोषणा की।
हनवा चेओंगवांग को दुनिया का पहला संचालन में तैनात लेज़र हथियार बताती है। इसकी तैनाती दिसंबर 2025 में इज़राइल के आयरन बीम की आपूर्ति से पहले शुरू हुई थी, हालांकि वास्तविक युद्ध में इस्तेमाल के मामले में आयरन बीम अधिक आगे बढ़ चुका है। किसी हथियार की तैनाती और युद्ध के दौरान उसका इस्तेमाल, रक्षा प्रणाली को सेवा में लाने के अलग-अलग पड़ाव हैं।
विदेशी खरीदारों के लिए 50 किलोवाट का वाहन
हनवा की अगली निर्यात परियोजना 50 किलोवाट क्षमता वाला लेज़र बख्तरबंद वाहन है। यह अक्टूबर के अभ्यास में इस्तेमाल मोबाइल तोप से 20 किलोवाट अधिक है, यानी इसकी निर्धारित क्षमता लगभग 67 प्रतिशत ज़्यादा है।
कंपनी का कहना है कि यह डिज़ाइन अधिक गतिशीलता और शक्ति की विदेशी ग्राहकों की ज़रूरतों को पूरा करता है। हनवा ने किल्से में MSPO 2026 में इसका मॉडल प्रदर्शित किया और इस परियोजना को एक प्रमुख यूरोपीय रक्षा प्रदर्शनी में संभावित खरीदारों के सामने रखा।
हनवा सिस्टम्स के प्रबंधक ह्युंगुन पार्क ने प्रदर्शनी में कहा कि एक प्रोटोटाइप बनाया जा चुका है और 2027 के अंत तक उत्पादन की योजना है। कंपनी की विकास समय-सारणी भी 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखती है। पार्क ने कहा कि चेओंगवांग के निर्यात को लेकर यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के संभावित खरीदारों से बातचीत चल रही है।
हनवा सिस्टम्स के लेज़र सिस्टम्स बिज़नेस सेंटर के प्रमुख शिन जू-हुन ने इस तकनीक को लेकर कंपनी की महत्वाकांक्षा के बारे में कहा:
लेज़र हथियार ऐसी प्रमुख संपत्तियाँ हैं जो वायु रक्षा के खेल को बुनियादी तौर पर बदल देंगी।
शिन ने कहा कि हनवा चेओंगवांग और 50 किलोवाट बख्तरबंद वाहन के साथ वैश्विक विस्तार की कोशिश करेगी। इन परियोजनाओं से कंपनी के पास बिक्री के लिए पहले से तैनात प्रणाली और विकास के दौर में अधिक शक्तिशाली मोबाइल डिज़ाइन, दोनों मौजूद हैं।
दक्षिण कोरिया मोबाइल उत्तराधिकारी पर भी विचार कर रहा है
दक्षिण कोरिया के 2027 के प्रस्तावित रक्षा बजट में चेओंगवांग के मोबाइल ब्लॉक-II संस्करण पर अनुसंधान शुरू करने के लिए धन शामिल है। इस प्रस्ताव से घरेलू सैन्य विकास का एक रास्ता खुलता है, जो विदेशी ग्राहकों के लिए 50 किलोवाट वाहन पर हनवा के काम के साथ आगे बढ़ेगा।
इन परियोजनाओं के घोषित उद्देश्य और समय-सारणी अलग हैं। ब्लॉक-II सरकार के बजट प्रस्ताव में अनुसंधान के लिए शामिल है, जबकि हनवा ने अपने निर्यात वाहन का प्रोटोटाइप तैयार होने और उत्पादन का लक्ष्य तय होने की बात कही है। आगे के ठोस पड़ाव बजट पर फैसला और 2027 के अंत तक उत्पादन की दिशा में कंपनी की नियोजित प्रगति हैं।
दक्षिण कोरिया के लिए तात्कालिक बदलाव यह है कि लेज़र रक्षा अब चुनिंदा परिसरों की सुरक्षा कर रही है और दूसरे हथियारों के साथ अभ्यास में शामिल है। हनवा के लिए अक्टूबर का प्रदर्शन एक और सार्वजनिक नतीजा है, जो कंपनी को कम किरण-लागत, बिजली और अधिक गतिशीलता पर आधारित प्रणालियों के खरीदार तलाशने में मदद करेगा।
मुख्य बातें
- 14 अक्टूबर को यांगप्योंग में सेना के अभ्यास के दौरान चेओंगवांग और एक अलग 30 किलोवाट मोबाइल लेज़र ने तीनों लक्ष्य ड्रोन नष्ट किए।
- सेना प्रमुख जनरल किम ग्यु-हा सहित लगभग 500 लोगों ने अभ्यास में हिस्सा लिया।
- हनवा का अनुमान है कि चेओंगवांग से प्रति लेज़र शॉट किरण डालने की लागत लगभग 2,000 वॉन है; संचालन के अन्य खर्च अलग से जुड़ते हैं।
- चेओंगवांग की तैनाती दिसंबर 2024 में शुरू हुई। जून 2026 तक लगभग पाँच इकाइयाँ प्रमुख सरकारी परिसरों की रक्षा कर रही थीं।
- हनवा निर्यात के लिए 50 किलोवाट का बख्तरबंद वाहन विकसित कर रही है, जिसका उत्पादन 2027 के अंत तक शुरू करने की योजना है।
- दक्षिण कोरिया के 2027 के प्रस्तावित रक्षा बजट में मोबाइल चेओंगवांग ब्लॉक-II के अनुसंधान के लिए धन शामिल है।






