पांच साल के गतिरोध के बाद भूटान शीतकालीन सत्र में खनन विधेयक पर बहस की तैयारी में

पढ़ने में 14 मिनट
Bhutan Prepares Mining Bill for Winter Debate After Five Years of Deadlock

खनन से किसे लाभ मिले, तय करने की नई कोशिश

भूटान का संशोधित खान एवं खनिज विधेयक मंत्रिमंडल तक पहुंच गया है। इसे 12 नवंबर से 28 दिसंबर, 2026 तक प्रस्तावित राष्ट्रीय सभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाना है। इसके साथ ही स्वामित्व, प्रबंधन और खनन से होने वाले मुनाफे के बंटवारे पर वह बहस फिर शुरू हो रही है, जो जून 2021 में ठहर गई थी।

विषय-सूची
  1. खनन से किसे लाभ मिले, तय करने की नई कोशिश
  2. विधेयक एक और शीतकालीन सत्र तक कैसे पहुंचा
  3. राज्य का स्वामित्व और खनन का अधिकार
  4. कानूनी ढांचा क्यों अहम है
  5. उत्पादन और कर के आंकड़े क्या बताते हैं
  6. कड़े दंड, लेकिन निरीक्षण की क्षमता सीमित
  7. पुनर्वास और स्थानीय हिस्सेदारी की स्पष्ट व्यवस्था
  8. किसानों की लागत और इंजीनियरिंग में देरी पर भी ध्यान
  9. विधायी कार्यसूची में और क्या है
  10. मुख्य बिंदु

भूविज्ञान एवं खान विभाग ने खान एवं खनिज प्रबंधन अधिनियम, 1995 में प्रस्तावित व्यापक बदलाव के तहत रणनीतिक खनिजों से जुड़े प्रावधानों को संशोधित किया है। जब सांसद बैठक करेंगे, तब इस कानून को 31 साल हो चुके होंगे। राष्ट्रीय सभा के उपाध्यक्ष संगाय खांडू ने कहा कि इस सत्र में तीन नए उपायों पर विचार किए जाने की अस्थायी योजना है, जिनमें खनन कानून भी शामिल है। हालांकि, कार्यसूची को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

इस विधेयक का असर राष्ट्रीय राजस्व से लेकर अलग-अलग खानों के आसपास की धूल, पानी और रोजगार तक है। 2025 में खनन से कॉरपोरेट आयकर 1.2714 अरब नगुल्ट्रम तक पहुंचा। वहीं, सरकार अधिक कड़े दंड, देश में खनिजों के अधिक प्रसंस्करण और समुदायों को लाभ में हिस्सा देने के नए तरीकों पर विचार कर रही है।

वैश्विक विनिर्माण में भी भूटान की एक उल्लेखनीय जगह है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के भूटान खनिज अवलोकन के अनुसार, 2024 में फेरोसिलिकॉन उत्पादन के मामले में देश दुनिया में सातवें स्थान पर था और वैश्विक उत्पादन में उसका अनुमानित हिस्सा 2.1 प्रतिशत था। लौह और सिलिकॉन की मिश्रधातु फेरोसिलिकॉन का इस्तेमाल इस्पात बनाने में होता है।

इस एजेंसी के अनुसार, 2024 में खनिज वस्तुओं का भूटान के सकल घरेलू उत्पाद में 2.0 प्रतिशत योगदान था। संसद के सामने मुख्य सवाल यह है कि राज्य के स्वामित्व वाले संसाधनों को सार्वजनिक आय और स्थानीय लाभ में कैसे बदला जाए, साथ ही खनन कंपनियों के लिए व्यावहारिक शर्तें तय हों और भूमि की रक्षा भी की जा सके।

विज्ञापन

विधेयक एक और शीतकालीन सत्र तक कैसे पहुंचा

राष्ट्रीय सभा और राष्ट्रीय परिषद के बीच सहमति नहीं बनने के कारण पहले का विवाद संयुक्त समिति की छह बैठकों तक चला। जून 2021 में समिति की अध्यक्ष किनले वांगचुक ने बताया कि सदस्य सहमति पर नहीं पहुंच सके हैं। इसके बाद अध्यक्ष ने विधेयक पर विचार टाल दिया।

सरकार ने नए नियम और बाद में संशोधित विधेयक तैयार किए, जबकि नियमन 1995 के अधिनियम के तहत जारी रहा। प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार रहे:

  • 2020: पहले के खान एवं खनिज विधेयक में खनिज संसाधनों के लाइसेंस, नियमन और आवंटन के लिए नया ढांचा प्रस्तावित किया गया।
  • जून 2021: दोनों सदनों के बीच मतभेद दूर नहीं होने के बाद संसद ने विधेयक पर विचार टाल दिया।
  • 2022: आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने खान एवं खनिज प्रबंधन विनियम जारी किए।
  • 15 जून, 2024: ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री गेम छेरिंग ने नियमों की समीक्षा और सार्वजनिक तथा निजी, दोनों संस्थाओं की भागीदारी पर विचार करने की योजना बताई।
  • मार्च 2025: आईजीएफ की खनन नीति ढांचा समीक्षा में मंजूरियों, निगरानी, सामुदायिक परामर्श और लाभ वितरण की कमियों की पहचान की गई।
  • 2026: भूविज्ञान एवं खान विभाग ने प्रस्तावित शीतकालीन बहस से पहले संशोधित विधेयक मंत्रिमंडल को सौंपा।

विभाग का कहना है कि नया मसौदा खनिज विकास नीति 2017 के अनुरूप है और इसमें खनिज अन्वेषण दिशानिर्देश 2023 तथा 2022 के विनियमों को आधार बनाया गया है। सरकार इस कानून को अपने 10X आर्थिक रोडमैप और डायमंड रणनीति से भी जोड़ रही है।

राज्य का स्वामित्व और खनन का अधिकार

भूविज्ञान एवं खान विभाग के 2020 के मसौदा विधेयक में कहा गया था कि खनिज संसाधनों पर अधिकार राज्य का है। इसमें प्रमाणित खनिज भंडार को प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए या किसी सरकारी उद्यम को आवंटित करने का प्रस्ताव भी था। रणनीतिक खनिजों और भंडारों के लिए सरकार अलग से निर्णय ले सकती थी।

बहस में स्वामित्व और संचालन अलग-अलग मुद्दे हैं। किसी खनिज भंडार का मालिक राज्य हो सकता है, जबकि पट्टे के तहत किसी कंपनी को उसका खनन करने और खनिज बेचने की अनुमति दी जा सकती है। विवाद इस बात पर है कि यह अनुमति किसे मिले, वह कितना भुगतान करे और इससे होने वाली आय नागरिकों तक किस तरह पहुंचे।

राष्ट्रीय परिषद ने अपने रुख के समर्थन में संविधान के अनुच्छेद 1.12 का हवाला दिया, जो खनिज संसाधनों पर राज्य के स्वामित्व से संबंधित है। उसने गरीबी और संपत्ति के संकेंद्रण से जुड़े अनुच्छेद 9.7 का भी उल्लेख किया। बहस में उद्धृत अन्य प्रावधान निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और एकाधिकार पर पाबंदियों से संबंधित हैं।

विज्ञापन

परिषद ने ऐतिहासिक कारोबारी आंकड़ों के आधार पर सरकारी उद्यमों के पक्ष में अपना तर्क रखा। उसने बताया कि निजी कंपनी जेएमसीएल ने 2019 में डोलोमाइट के निर्यात का घोषित मूल्य 520 नगुल्ट्रम प्रति मीट्रिक टन रखा था। 2020 में खानों का जिम्मा स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को दिए जाने के बाद यह मूल्य 1,150 नगुल्ट्रम प्रति मीट्रिक टन हो गया। परिषद ने 2019/20 में एसएमसीएल के कर-पश्चात लाभ का आंकड़ा 802 नगुल्ट्रम प्रति मीट्रिक टन बताया, जबकि 2018 में ड्रुक सताइर कॉरपोरेशन लिमिटेड का यह आंकड़ा 398 नगुल्ट्रम था।

ये आंकड़े बताते हैं कि खनन अधिकारों का आवंटन राजनीतिक रूप से विवादास्पद क्यों हुआ: परिषद का तर्क था कि सरकारी संचालन से भूटान के लिए अधिक मूल्य हासिल किया जा सकता है। अब सरकार ऐसे ढांचे पर विचार कर रही है जिसमें सरकारी और निजी, दोनों पक्ष भाग ले सकें।

कानूनी ढांचा क्यों अहम है

1995 के अधिनियम में कई अहम बातें स्पष्ट नहीं हैं या उन्हें नियमों-विनियमों के भरोसे छोड़ा गया है। इससे ऐसे फैसलों का दबाव बढ़ता है जिन्हें संसद का अधिक मजबूत समर्थन चाहिए। कार्यपालिका अपने कानूनी अधिकारों के भीतर नियमों में संशोधन कर सकती है, लेकिन अधिनियम बदलने के लिए संसदीय प्रक्रिया जरूरी है।

पहले का मसौदा दिखाता है कि खनन सुधार का दायरा कितना व्यापक हो सकता है। इसमें 1995 के खान कानून और स्थानीय सरकार अधिनियम 2009, वन एवं प्रकृति संरक्षण अधिनियम 1995 तथा जल अधिनियम 2011 के कुछ प्रावधानों को निरस्त करने का प्रस्ताव था। इसमें एक स्वायत्त खनन नियामक प्राधिकरण बनाने का भी प्रस्ताव था, जिसे निरीक्षण, पट्टों का अनुपालन, खदानों के पुनर्वास और राजस्व संग्रह की जिम्मेदारी दी जाती।

2021 में विधेयक को टालने के बाद प्रक्रिया से जुड़ा विवाद भी बना हुआ है। संविधान का अनुच्छेद 13(8) कहता है कि यदि विधेयक पेश करने वाला सदन दूसरे सदन की आपत्तियों या संशोधनों को स्वीकार नहीं करता, तो विधेयक संयुक्त बैठक के लिए ड्रुक ग्यालपो को भेजा जाएगा। इसके बजाय संसद ने अपनी विधायी प्रक्रिया नियमावली की धारा 59(ए) के तहत खनन विधेयक पर विचार टाल दिया था। इस फैसले का संवैधानिक आधार अब भी बहस का विषय है।

अब तक सार्वजनिक घोषणाओं में संशोधित 2026 विधेयक के पूरे प्रावधानों, जिनमें रणनीतिक खनिजों के लिए अंतिम व्यवस्था और प्रस्तावित नियामक ढांचा शामिल हैं, का ब्योरा नहीं दिया गया है। संसद में पेश होने वाला अंतिम पाठ तय करेगा कि पहले के मसौदे के कितने हिस्से कायम रहते हैं।

उत्पादन और कर के आंकड़े क्या बताते हैं

भूटान में खनन से कॉरपोरेट आयकर 2023 के 1.1486 अरब नगुल्ट्रम से बढ़कर 2025 में 1.2714 अरब नगुल्ट्रम हो गया। 2024 में यह घटकर 1.1003 अरब नगुल्ट्रम रह गया था। 2024 से 2025 के बीच इसमें करीब 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रॉयल्टी और खनिज किराये से भी सरकार को आय होती है।

विज्ञापन

अलग-अलग खनिजों का उत्पादन अलग दिशाओं में गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, फेरोसिलिकॉन का उत्पादन 2023 के 127,293 मीट्रिक टन से बढ़कर 2024 में 151,495 मीट्रिक टन हो गया, यानी करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि। इसी अवधि में जिप्सम का उत्पादन 1,098,565 मीट्रिक टन से घटकर 513,477 मीट्रिक टन रह गया, यानी करीब 53 प्रतिशत की गिरावट।

कुचले हुए डोलोमाइट का उत्पादन भी 2023 के 2,937,930 मीट्रिक टन से घटकर 2024 में 2,760,377 मीट्रिक टन रह गया। 15 जनवरी, 2026 तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित उत्पादन तालिका के ये आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार को इस क्षेत्र में अलग-अलग व्यावसायिक परिस्थितियों से जूझना पड़ रहा है।

प्रस्तावित कानून में खनिज संवर्धन यानी ऐसी प्रक्रिया का प्रावधान होगा, जिससे सामग्री में उपयोगी खनिज की मात्रा या उसका व्यावसायिक मूल्य बढ़ता है। इसमें निम्न-श्रेणी और अस्वीकृत अयस्क का इस्तेमाल, मुख्य भंडार के साथ पाए जाने वाले अन्य खनिजों की प्राप्ति तथा महत्वपूर्ण खनिजों और रणनीतिक खनन परिसंपत्तियों के प्रबंधन के मुद्दे भी शामिल होंगे।

ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे मंत्री गेम छेरिंग ने जून 2024 की संसदीय चर्चा में खनन विकास को पर्यावरणीय शर्तों से जोड़ा था:

इसे पर्यावरण नीति के अनुरूप होना चाहिए।

सरकार भूटान के भीतर प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए कर व्यवस्था की भी समीक्षा कर रही है। कारोबारियों के लिए इससे कच्चा माल निर्यात करने और देश में उपकरणों तथा कौशल में निवेश कर अधिक मूल्यवान उत्पाद बनाने के बीच का हिसाब बदल सकता है।

कड़े दंड, लेकिन निरीक्षण की क्षमता सीमित

प्रस्तावित विधेयक में क्रमिक दंड का प्रावधान होगा, जिससे नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले खनन संचालकों के खिलाफ अधिक कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। मौजूदा कुछ निश्चित जुर्माने 5,000 नगुल्ट्रम जितने कम हैं। मंत्रालय का मानना है कि उल्लंघन रोकने के लिए यह रकम बहुत कम है।

भूविज्ञान एवं खान विभाग सात क्षेत्रीय कार्यालयों के जरिए खनन गतिविधियों की निगरानी करता है। 2022 के विनियमों के तहत सामान्य खानों का साल में दो बार निरीक्षण होता है, जिसमें बिना पूर्व सूचना के जांच भी शामिल है। अधिक उत्पादन वाली या पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील जगहों का निरीक्षण हर तीन महीने या उससे भी अधिक बार किया जाता है।

निरीक्षक खनन कार्यों की तुलना मंजूर व्यवहार्यता अध्ययनों से करते हैं और कांटा पुल के रिकॉर्ड तथा परिवहन परमिट के जरिए उत्पादन का मिलान करते हैं। विभाग बिखरी हुई खनन स्थलों की निगरानी में मदद के लिए उपग्रह चित्रों और ड्रोन का इस्तेमाल शुरू कर रहा है। सीमित कर्मचारियों, परिवहन और तकनीकी क्षमता के कारण सभी स्थलों पर लगातार निरीक्षण करना मुश्किल है।

विज्ञापन

विभाग का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में देशभर में कोई बड़ा अपराध या गंभीर नियामक उल्लंघन दर्ज नहीं हुआ। आम समस्याओं में खदानों की सीढ़ीनुमा सतह का ठीक से न बनाना, धूल पर पर्याप्त नियंत्रण न रखना और ऊपरी मिट्टी तथा चट्टानों को गलत तरीके से संभालना शामिल है। खनिज भंडार तक पहुंचने के लिए इन्हें हटाया जाता है।

सीमा से बाहर खनन और खुदाई को सामान्य भूमि विकास के रूप में दिखाना अब भी चिंता का विषय है। कुछ दूरस्थ पत्थर खदानों और ड्रेजिंग स्थलों पर प्रमाणित कांटा पुल नहीं हैं, इसलिए अधिकारियों को मात्रा की पुष्टि हाथ से करनी पड़ती है। वार्षिक प्रशिक्षण का मकसद एक और कमी दूर करना है: कुछ संचालकों के पास मंजूर खनन योजनाएं लागू करने के लिए पर्याप्त योग्य कर्मचारी नहीं हैं।

पुनर्वास और स्थानीय हिस्सेदारी की स्पष्ट व्यवस्था

खनन शुरू करने से पहले संचालकों को पर्यावरण और अन्य मंजूरियां लेनी होती हैं, प्रमाणित प्रबंधक नियुक्त करना होता है और खदान बंद करने तथा पुनर्वास की योजना तैयार करनी होती है। उन्हें पर्यावरण बहाली बांड भी देना होता है, यानी स्थल की मरम्मत के लिए सुरक्षा के तौर पर जमा रकम।

खदान बंद करने की शर्तों में बुनियादी ढांचा हटाना, खुदाई वाली ढलानों को स्थिर करना, ऊपरी मिट्टी वापस डालना और वनस्पति बहाल करना शामिल है। निगरानी में स्थल स्थिर पाए जाने और वहां की वनस्पति के जीवित रहने की पुष्टि के बाद ही बांड की रकम लौटाई जाती है। खनन के दौरान सुरक्षा उपायों में तलछट रोकने वाले तालाब, जलधाराओं के आसपास बफर क्षेत्र, सड़कों पर पानी का छिड़काव और ढककर खनिजों का परिवहन शामिल हैं।

मार्च 2025 की आईजीएफ समीक्षा में अलग-अलग मंजूरियों, कमजोर निगरानी और अपर्याप्त सामुदायिक परामर्श तथा लाभ वितरण की पहचान की गई। भूटान के भ्रष्टाचार निरोधक आयोग, रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और फ्रांस के ऑडेंसिया बिजनेस स्कूल से जुड़े 2016 के एक अध्ययन में भी शासन और निगरानी की कमजोरियां सामने आई थीं।

संशोधित ढांचा सामुदायिक विकास कोष और स्थानीय सामग्री नीतियों के जरिए समुदायों को लाभ पहुंचा सकता है। ऐसी नीतियां स्थानीय कामगारों, आपूर्तिकर्ताओं और कारोबारों को अवसर देने में मदद कर सकती हैं। पहले के मसौदे में प्रस्तावित नियामक बोर्ड को सामुदायिक विकास कोष के इस्तेमाल की मंजूरी देने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

खनन अधिकारों तक पहुंच में पारदर्शिता भी एक अनसुलझी चिंता है। विभाग और मंत्रालय ने खान तथा पत्थर खदानों के मालिकों की सूची देने के अनुरोध ठुकरा दिए। वहीं, विभाग ने कहा कि खनन पट्टों की दो की सीमा एसएमसीएल पर लागू नहीं होती। इसलिए आवंटन के नियम तय करने के साथ यह सवाल भी अहम है कि उन नियमों और उनसे लाभ पाने वालों का रिकॉर्ड कितनी पारदर्शिता से रखा जाता है।

किसानों की लागत और इंजीनियरिंग में देरी पर भी ध्यान

सांसदों ने पूर्ण बैठक में निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े करीब 225 मुद्दे उठाए, जिनमें खेतों तक सड़क और पानी की आपूर्ति शामिल थे। इन मुद्दों की छंटाई कर संबंधित मंत्रालयों को भेजा गया। पेमागात्शेल ज़ोंगखाग की दो चिंताओं पर समिति ने ध्यान दिया।

विज्ञापन

पहला मुद्दा कृषि सामग्री की लागत में किसानों के योगदान का अनुपात तय न होने से जुड़ा है। एक स्थानीय सरकार के नेता ने कहा कि पहले किसान और सरकार बराबर खर्च उठाते थे। बाद की व्यवस्थाओं में सरकार ने 70 प्रतिशत या 60 प्रतिशत योगदान दिया, फिर भी कुछ किसानों को कथित तौर पर 70 प्रतिशत खर्च खुद उठाना पड़ा।

इससे किसानों पर पड़ने वाले खर्च में बड़ा अंतर आता है। एक ही कीमत वाली वस्तु के लिए 70 प्रतिशत भुगतान करने वाले किसान का योगदान, 30 प्रतिशत देने वाले किसान के मुकाबले दोगुने से भी अधिक होता है। पेमागात्शेल की जिला परिषद एक स्पष्ट और समान व्यवस्था चाहती है, जिसमें या तो योगदान का अनुपात तय हो या सामग्री मुफ्त बांटी जाए।

सरकारी अध्ययनों में पाया गया कि मुफ्त में मिली वस्तुओं की किसान कभी-कभी कम देखभाल करते थे। बताया गया कि देखभाल न होने के कारण बांटे गए लाखों फलदार पौधे नष्ट हो गए। इसलिए नीति बनाते समय यह संतुलन जरूरी है कि किसान सामग्री खरीद सकें और सार्वजनिक निवेश की देखभाल भी हो ताकि उसका लाभ कायम रहे।

दूसरा मुद्दा क्षेत्रीय इंजीनियरिंग क्लस्टरों और स्थानीय विकास में देरी से जुड़ा है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बुनियादी ढांचा एवं परिवहन मंत्रालय के सात क्षेत्रीय कार्यालयों में 156 मंजूर पदों में से 83 भरे गए हैं, यानी करीब 53 प्रतिशत। कुछ कार्यालयों में छह या सात इंजीनियर हैं, जिनमें से ज्यादातर हाल के स्नातक हैं। जबकि आमतौर पर 15 से अधिक इंजीनियरों की जरूरत होती है।

मंत्रालय के अधिकारियों ने पहले बताया था कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रभावी कार्य निष्पादन की दर 92 प्रतिशत रही। इसमें 233 डिजाइन सेवाएं, 641 निजी नक्शों की जांच और परियोजना सहायता के 23 मामले शामिल थे। सुशासन समिति का आकलन तय करेगा कि कर्मचारियों और लागत साझा करने से जुड़ी इन चिंताओं पर विधानसभा में औपचारिक बहस की जरूरत है या नहीं।

विधायी कार्यसूची में और क्या है

वित्त मंत्री लेके दोरजी के वेतन संशोधन विधेयक पेश करने की उम्मीद है। यह धन विधेयक है, इसलिए इसे उसी सत्र में पारित करना होगा। संगाय खांडू ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से जुड़े एक समझौते को भी प्रस्तावित नए उपायों में शामिल बताया। इसका मकसद पेट्रोलियम संबंधी मुद्दों और सदस्य देशों के साथ सहयोग से निपटना है।

राष्ट्रीय परिषद से आए जाब्मी (संशोधन) विधेयक और तंबाकू नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2026 के तीसरे वाचन पर भी सभा विचार करेगी। उसकी योजना आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर बिम्सटेक अभिसमय और भूटान के दिवाला एवं पुनर्वास विधेयक को अंतिम रूप देने की है।

इस तरह खनन विधेयक कई अन्य मांगों के बीच सत्र में पेश होगा। उसका मुख्य मकसद स्पष्ट है: पुराने कानूनी ढांचे की जगह ऐसा कानून लाना जो खनन तक पहुंच, सार्वजनिक राजस्व, पर्यावरणीय जिम्मेदारियों और समुदायों तक पहुंचने वाले लाभों पर स्पष्ट फैसले करे।

मुख्य बिंदु

  • संशोधित खनन विधेयक मंत्रिमंडल को सौंपा गया है और 12 नवंबर से 28 दिसंबर, 2026 तक प्रस्तावित विधानसभा सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
  • स्वामित्व, प्रबंधन और मुनाफे के बंटवारे पर असहमति के बाद पहले के विधेयक पर जून 2021 में विचार टाल दिया गया था।
  • खनन से कॉरपोरेट आयकर 2025 में 1.2714 अरब नगुल्ट्रम तक पहुंचा।
  • प्रस्तावित बदलावों में अधिक कड़े दंड, देश में प्रसंस्करण के प्रावधान और समुदायों को लाभ पहुंचाने की संभावित व्यवस्थाएं शामिल हैं।
  • निरीक्षण क्षमता, स्वामित्व में पारदर्शिता और पर्यावरणीय पुनर्वास सुधार की बहस के मुख्य मुद्दे बने हुए हैं।
  • सांसद कृषि सामग्री में किसानों के योगदान, इंजीनियरों की कमी और कई अन्य विधायी उपायों पर भी विचार कर रहे हैं।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है