कम दूरी तक बिना सांस फूले चल पाना बना स्वस्थ होने की उम्मीद
प्रेरित बहुशक्तिशाली स्टेम कोशिकाओं से बनी हृदय की मांसपेशियों की तीन शीट लगवाने वाली 50 वर्ष से अधिक उम्र की एक महिला का कहना है कि ओसाका में सर्जरी के बाद वह अधिक गहरी सांस ले पा रही हैं। उनका स्वस्थ होना RiHeart को अनुमोदित पुनर्योजी चिकित्सा उत्पाद के रूप में पहली बार इस्तेमाल किए जाने का संकेत है। पूर्ण मंजूरी पाने के लिए अब 75 मरीजों पर बड़ा अध्ययन करना जरूरी है।
विषय-सूची
- कम दूरी तक बिना सांस फूले चल पाना बना स्वस्थ होने की उम्मीद
- चार साल तक घटती रही हृदय की कार्यक्षमता
- तीन शीट से हृदय को मदद मिलने की उम्मीद
- बाईं पसलियों के बीच से 50 मिनट का ऑपरेशन
- आठ मरीजों के परीक्षण में क्या नतीजे आए
- अस्पताल से छुट्टी के बाद भी सुरक्षा की निगरानी जारी
- 75 मरीज और 2033 क्यों अहम हैं
- 5.32 करोड़ येन कीमत और इलाज के लिए सख्त पात्रता
- ओसाका से बाहर के अस्पतालों तक आपूर्ति
- मुख्य बातें
कानागावा प्रान्त की निवासी का ऑपरेशन 29 सितंबर, 2026 को ओसाका केइसेत्सु अस्पताल में हुआ। 21 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि उन्हें अगले दिन अस्पताल से छुट्टी मिलने वाली थी। सर्जरी करने वाले अस्पताल के अध्यक्ष योशिकी सावा ने कहा कि उनकी सेहत में सुधार अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है।
मरीज ने ऑपरेशन के बाद के शुरुआती हफ्तों में महसूस हुए बदलाव के बारे में बताया:
सर्जरी के करीब एक हफ्ते बाद मैं अधिक गहरी सांस ले पाई। मुझे फर्क महसूस हुआ।
ओसाका विश्वविद्यालय के स्टार्टअप Cuorips द्वारा विकसित RiHeart को मार्च 2026 में सशर्त मंजूरी मिली और 1 सितंबर से यह सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा के दायरे में आ गया। यह उत्पाद एक खास समूह के लिए है: इस्केमिक कार्डियोमायोपैथी के कारण गंभीर हृदय विफलता से जूझ रहे वे लोग, जिनकी हालत मानक उपचार से पर्याप्त रूप से बेहतर नहीं हुई है।
जापान के स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय ने आठ मरीजों पर पहले किए गए परीक्षण के नतीजे प्रकाशित किए हैं। इनमें लक्षणों और व्यायाम क्षमता के कुछ मापों में सुधार दिखा, जबकि हृदय की पंप करने की क्षमता में बदलाव के नतीजे कम एकसमान रहे। अगले चरण में लंबे समय तक मरीजों की स्थिति देखी जाएगी और उनके नतीजों की तुलना एक बाहरी समूह से की जाएगी।
चार साल तक घटती रही हृदय की कार्यक्षमता
महिला को 2022 में दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद कैथेटर से उपचार और दवाएं दी गईं, लेकिन उनके हृदय की कार्यक्षमता घटती रही। चलने पर उन्हें बहुत अधिक सांस फूलती और दिल की धड़कन तेज महसूस होती थी। भारी सामान उठाना भी मुश्किल हो गया था।
दिल का दौरा तब पड़ता है जब हृदय की मांसपेशी के किसी हिस्से तक रक्त नहीं पहुंच पाता। आम तौर पर इसकी वजह हृदय की धमनी में रुकावट होती है। इससे हुआ नुकसान हृदय को इतना कमजोर कर सकता है कि वह रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए पर्याप्त रक्त पंप न कर सके। इस्केमिक कार्डियोमायोपैथी उस स्थिति को कहते हैं जिसमें रक्त की आपूर्ति घटने से हृदय की मांसपेशी क्षतिग्रस्त और कमजोर हो जाती है।
बाद में मरीज ने ओसाका केइसेत्सु अस्पताल में इलाज कराया, जिसे अंग्रेजी में ओसाका पुलिस अस्पताल के नाम से भी जाना जाता है। सर्जरी के दो दिन बाद उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष से सामान्य वार्ड में ले जाया गया और उन्होंने चलकर पुनर्वास शुरू किया। अस्पताल से छुट्टी के बाद भी वह दवाएं लेंगी और जांच के लिए डॉक्टरों के पास जाती रहेंगी।
उनके लक्ष्य रोजमर्रा के हैं: अपने कुत्ते को टहलाना, समुद्र किनारे जाना और बीमारी के कारण छूट गए शौक फिर से शुरू करना। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने उन गतिविधियों के बारे में बताया, जिन्हें वह फिर से करना चाहती हैं:
मैं अपने कुत्ते को टहलाना, अच्छी दौड़ लगाना और अपने शौक का आनंद लेना चाहती हूं।
तीन शीट से हृदय को मदद मिलने की उम्मीद
RiHeart में दानकर्ता की iPS कोशिकाओं से विकसित हृदय की मांसपेशी कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें करीब चार सेंटीमीटर चौड़ी शीट का आकार दिया जाता है। सर्जन ऐसी तीन शीट हृदय की सतह पर लगाते हैं।
iPS कोशिकाएं वयस्क शरीर की ऐसी कोशिकाएं हैं जिन्हें दोबारा इस अवस्था में ढाला जाता है कि वे कई अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं में विकसित हो सकें। RiHeart बनाने की प्रक्रिया में इन्हें हृदय की मांसपेशी कोशिकाओं में विकसित किया जाता है, फिर शुद्ध करके शीट का आकार दिया जाता है।
मंत्रालय के बीमा कवरेज दस्तावेज़ में, जिसे 22 जुलाई को केंद्रीय सामाजिक बीमा चिकित्सा परिषद के लिए तैयार किया गया था, इलाज के अपेक्षित तरीके का वर्णन है। प्रत्यारोपित कोशिकाएं साइटोकाइन और वृद्धि कारकों समेत संकेत देने वाले प्रोटीन छोड़ती हैं। उम्मीद है कि इससे नई रक्त वाहिकाएं बनने को बढ़ावा मिलेगा और फाइब्रोसिस, यानी निशान ऊतक के जमाव, को सीमित करने में मदद मिलेगी।
मौजूदा हृदय की मांसपेशी की स्थिति में सुधार करके इस उपचार का लक्ष्य हृदय की कार्यक्षमता और व्यायाम क्षमता को बेहतर बनाना या बनाए रखना है। मरीज के लिए व्यायाम क्षमता का मतलब यह है कि सांस फूलने से पहले वह कितनी दूर तक चल सकता है या कितनी गतिविधि कर सकता है।
Cuorips के मुताबिक, इस शोध की शुरुआत 2008 में सावा के समूह और iPS कोशिकाओं के अग्रणी क्योटो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शिन्या यामानाका के बीच सहयोग से हुई। कंपनी ने अपनी निर्माण प्रक्रिया विकसित करने के लिए क्योटो विश्वविद्यालय के iPS कोशिका अनुसंधान एवं अनुप्रयोग केंद्र से मिली चिकित्सकीय iPS कोशिकाओं का इस्तेमाल किया।
बाईं पसलियों के बीच से 50 मिनट का ऑपरेशन
सावा ने महिला का ऑपरेशन करीब 50 मिनट में पूरा किया। वह ओसाका विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस और Cuorips के निदेशक भी हैं तथा इस उपचार को विकसित करने में उनकी अहम भूमिका रही है।
Cuorips अपने RiHeart उत्पाद पृष्ठ पर बताती है कि इस प्रक्रिया में बाईं पसलियों के बीच करीब सात सेंटीमीटर का चीरा लगाकर शीट अंदर पहुंचाई जाती हैं। कंपनी इसे पारंपरिक ओपन-चेस्ट सर्जरी के बिना की जाने वाली प्रक्रिया बताती है। मंत्रालय के दस्तावेज़ में इसे सामान्य बेहोशी देकर बाईं ओर थोराकोटॉमी के जरिए किया जाने वाला प्रत्यारोपण बताया गया है। थोराकोटॉमी में छाती को सर्जरी के लिए खोला जाता है।
दोनों विवरणों में हृदय तक छाती के बाईं ओर से पहुंचकर उसकी सतह पर शीट लगाने की बात है। Cuorips का कहना है कि इस तरीके में हृदय की मांसपेशी में छेद नहीं किया जाता और इसका उद्देश्य प्रक्रिया का बोझ कम करना है।
सावा ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि पहला उपचार किस तरह के अस्पताल में किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अस्पताल के अध्यक्ष ने कहा:
इस ऑपरेशन का एक मध्यम आकार के निजी अस्पताल में होना महत्वपूर्ण है।
Cuorips करीब 20 अस्पतालों में यह उपचार उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। ओसाका केइसेत्सु अस्पताल 10 और मरीजों के ऑपरेशन पर विचार कर रहा है। विश्वविद्यालय के शोध केंद्र से बाहर भी यह उपचार उपलब्ध कराना योजना को आगे बढ़ाने का तत्काल हिस्सा है।
आठ मरीजों के परीक्षण में क्या नतीजे आए
मंत्रालय के विवरण के अनुसार, देश में किए गए परीक्षण में इस्केमिक कार्डियोमायोपैथी से गंभीर हृदय विफलता वाले आठ लोगों को शामिल किया गया। इसमें कई चिकित्सा केंद्र शामिल थे। परीक्षण ओपन-लेबल था, यानी मरीजों और चिकित्सकों को पता था कि उपचार दिया जा रहा है। तुलना के लिए किसी अलग उपचार पाने वाला नियंत्रण समूह नहीं था।
मुख्य माप 26 सप्ताह पर अल्ट्रासाउंड से आंका गया बाएं निलय का इजेक्शन फ्रैक्शन (LVEF) था। LVEF बताता है कि हृदय के मुख्य पंपिंग कक्ष से हर धड़कन में कितना रक्त बाहर पंप होता है। आठ में से दो मरीजों में कम से कम 5% सुधार की परीक्षण सीमा पूरी हुई।
52 सप्ताह पर, जिन सात मरीजों के माप उपलब्ध थे, उनमें से चार की चरम ऑक्सीजन खपत में कम से कम 10% सुधार हुआ। चरम ऑक्सीजन खपत, जिसे अक्सर पीक VO2 कहा जाता है, यह मापती है कि कोई व्यक्ति कठिन व्यायाम के दौरान कितनी ऑक्सीजन का उपयोग कर सकता है और इससे उसकी शारीरिक गतिविधि की क्षमता का आकलन करने में मदद मिलती है। एक मरीज का माप उपलब्ध नहीं था।
न्यूयॉर्क हार्ट एसोसिएशन वर्गीकरण में सभी आठ मरीजों में कम से कम एक श्रेणी का सुधार हुआ। यह वर्गीकरण बताता है कि हृदय के लक्षण शारीरिक गतिविधि को कितना सीमित करते हैं। CT स्कैन से LVEF के अलग आकलन में, जिन छह मरीजों के माप उपलब्ध थे, उनमें से दो में कम से कम 5% सुधार दिखा।
इस तरह नतीजे स्वस्थ होने के अलग-अलग पहलुओं का ब्यौरा देते हैं: लक्षणों के वर्गीकरण में सभी आठ मरीजों का सुधार हुआ, व्यायाम क्षमता के माप में सात में से चार बेहतर हुए और मुख्य अल्ट्रासाउंड सीमा आठ में से दो ने पूरी की। मंत्रालय ने माना कि ये नतीजे सशर्त मंजूरी के तहत प्रभावकारिता की उचित उम्मीद के मानदंडों पर खरे उतरते हैं।
अस्पताल से छुट्टी के बाद भी सुरक्षा की निगरानी जारी
मंत्रालय के दस्तावेज़ में दर्ज है कि परीक्षण के आठ प्रतिभागियों में बताई गई अनुवर्ती अवधि के दौरान किसी की मृत्यु नहीं हुई: पांच मरीजों के लिए यह अवधि तीन साल और तीन मरीजों के लिए पांच साल थी। आकलन के समय तक उत्पाद से जुड़े किसी ट्यूमर का मामला भी दर्ज नहीं हुआ।
Cuorips का कहना है कि उसका क्लिनिकल परीक्षण जनवरी 2020 में शुरू हुआ था और अब तक इस उपचार से कैंसर होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। iPS कोशिकाओं के निर्माण में ट्यूमर बनने की आशंका रहती है, क्योंकि अविभेदित अवस्था में बची कोशिकाएं बढ़ती रह सकती हैं। कंपनी ऐसी कोशिकाओं को हटाने के लिए बनाई गई निर्माण प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करती है।
दानकर्ता की कोशिकाओं से प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा प्रत्यारोपित कोशिकाओं पर हमला किए जाने, यानी प्रतिरोपण अस्वीकृति, का जोखिम भी रहता है। मंत्रालय ने प्रत्यारोपण के अगले दिन से 90 दिनों तक प्रतिरक्षा-दमनकारी दवाएं देने की योजना का ब्यौरा दिया है।
बीमा प्रस्तावों में इन दवाओं की खुराक सटीक रूप से तय करने के लिए उनके रक्त में स्तर मापने का खर्च शामिल है। इसलिए मरीजों को ऑपरेशन और पुनर्वास के साथ-साथ कुछ समय तक दवाएं लेनी होंगी और निगरानी में रहना होगा।
75 मरीज और 2033 क्यों अहम हैं
RiHeart को सात साल के लिए सशर्त मंजूरी मिली है। पूरी मंजूरी पाने के लिए Cuorips को 75 मरीजों से और साक्ष्य जुटाकर इस अवधि के भीतर नया आवेदन देना होगा। कंपनी का लक्ष्य 2033 तक इसकी प्रभावकारिता साबित करना है।
मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत उपचार पाने वाले हर मरीज की निगरानी की जाएगी और उनके नतीजों की तुलना एक बाहरी नियंत्रण समूह से होगी। मुख्य आकलन प्रत्यारोपण के 52 सप्ताह बाद होगा। इसमें व्यायाम क्षमता और हृदय की बनावट के एक माप को शामिल किया जाएगा।
मुख्य आकलन पर खरा उतरने के लिए मरीज की चरम ऑक्सीजन खपत में कम से कम 10% की बढ़ोतरी होनी चाहिए। बाएं निलय के अंतिम सिस्टोलिक आयतन सूचकांक (LVESVI) में भी सुधार होना चाहिए या उसका माप अध्ययन में तय सीमा के भीतर रहना चाहिए। LVESVI बताता है कि धड़कन के बाद हृदय के मुख्य पंपिंग कक्ष में कितना रक्त बचा है, और इसे शरीर के आकार के हिसाब से समायोजित किया जाता है। प्रोटोकॉल के तहत इसमें कमी, कोई बदलाव न होना या 10% से कम की बढ़ोतरी स्वीकार्य है।
शोधकर्ता हृदय विफलता के कारण अस्पताल में भर्ती होने, जीवित रहने और हृदय की कार्यक्षमता के अन्य मापों पर भी नजर रखेंगे। पहले मरीज का सुधार कितने समय तक बना रहेगा और दूसरे मरीजों को कितनी नियमितता से लाभ होगा, इन सवालों के जवाब निगरानी कार्यक्रम से मिलने की उम्मीद है।
मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं:
- जनवरी 2020: क्लिनिकल परीक्षण शुरू हुआ।
- मार्च 2026: RiHeart को निर्माण और बिक्री की सशर्त मंजूरी मिली।
- 1 सितंबर, 2026: सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा कवरेज शुरू हुआ।
- 29 सितंबर, 2026: अनुमोदित उत्पाद से पहला ऑपरेशन हुआ।
- 21 अक्टूबर, 2026: मरीज ने अपने स्वस्थ होने के बारे में बताया। उन्हें 22 अक्टूबर को छुट्टी मिलने की योजना थी।
- 2033 तक: Cuorips का लक्ष्य सात साल की मंजूरी अवधि के भीतर प्रभावकारिता साबित करना और पूरी मंजूरी पाना है।
5.32 करोड़ येन कीमत और इलाज के लिए सख्त पात्रता
मंत्रालय के जुलाई के दस्तावेज़ में RiHeart की प्रतिपूर्ति कीमत 5.32 करोड़ येन रखने का प्रस्ताव था, जबकि कंपनी ने 5.34 करोड़ येन मांगे थे। इस उत्पाद का क्लिनिकल इस्तेमाल 5.32 करोड़ येन की कीमत पर शुरू हुआ।
सार्वजनिक बीमा और जापान की उच्च चिकित्सा खर्च लाभ योजना से पात्र मरीजों को अपनी जेब से चुकाई जाने वाली रकम सीमित रहती है। बताया गया कि मरीजों का भुगतान अधिकतम कुछ लाख येन तक होगा, हालांकि किसी व्यक्ति का बिल उसके बीमा प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
बीमा कवरेज केवल इस्केमिक कार्डियोमायोपैथी के कारण गंभीर हृदय विफलता वाले उन मरीजों के लिए है, जिनके लिए दवाओं और इनवेसिव प्रक्रियाओं समेत मानक उपचार पर्याप्त नहीं रहे। चिकित्सकों को संबंधित चिकित्सा संस्थाओं के उचित इस्तेमाल संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा और इलाज देने के चिकित्सकीय कारण दर्ज करने होंगे। प्रति मरीज शीट के लिए प्रतिपूर्ति केवल एक बार तक सीमित है।
मंत्रालय के दस्तावेज़ में पात्र मरीजों की अनुमानित संख्या 690 बताई गई है। इसमें दसवें साल तक सालाना इस्तेमाल 96 मरीजों तक पहुंचने और करीब 5.11 अरब येन की वार्षिक बिक्री का अनुमान है। ये योजना संबंधी अनुमान हैं। जापान में दीर्घकालिक हृदय विफलता से करीब 12 लाख लोग प्रभावित हैं, जबकि RiHeart का अनुमोदित इस्तेमाल बीमारी के खास कारण और गंभीरता वाले कहीं छोटे समूह के लिए है।
मंत्रालय ने इस चरण में उत्पाद को औपचारिक लागत-प्रभावशीलता आकलन के लिए नहीं चुना। उसका कहना है कि उत्पाद को दोबारा मंजूरी मिलने पर इस फैसले पर फिर विचार किया जाएगा। इसलिए सशर्त मंजूरी की अवधि में जुटाए गए साक्ष्य इलाज के फैसलों और भविष्य में खर्च के आकलन, दोनों के लिए अहम होंगे।
ओसाका से बाहर के अस्पतालों तक आपूर्ति
Cuorips ओसाका प्रान्त के मिनोह में अपनी CLiC-1 इकाई में कोशिकाएं तैयार करती है। यह इकाई अगस्त 2020 में शुरू हुई थी और कोशिका प्रसंस्करण, निर्माण प्रक्रिया के विकास तथा व्यावसायिक उत्पादन में मदद करती है।
कंपनी का कहना है कि तैयार शीट को विशेष परिवहन घोल में कमरे के तापमान पर करीब दो दिन तक ले जाया जा सकता है। एक उदाहरण के तौर पर उसने शिंकानसेन समेत मिनोह से टोक्यो के अस्पतालों तक परिवहन का जिक्र किया है। Cuorips के मुताबिक, अस्पतालों को उत्पाद शीट के रूप में मिलता है और प्रत्यारोपण से पहले इसे हल्के से धोना भर जरूरी होता है।
करीब 20 केंद्रों तक आपूर्ति की योजना के लिए यह परिवहन अवधि व्यावहारिक रूप से अहम है: जीवित कोशिका शीट को इस्तेमाल योग्य हालत में सर्जरी करने वाली टीम तक पहुंचना होगा। इस योजना में केवल दवा को फार्मेसियों तक भेजना शामिल नहीं, बल्कि निर्माण, परिवहन, सर्जरी और बाद की निगरानी भी शामिल हैं।
पार्किंसन रोग के लिए सुमितोमो फार्मा के iPS कोशिका उत्पाद Amchepry को भी RiHeart के साथ ही सशर्त मंजूरी मिली और सार्वजनिक बीमा कवरेज हासिल हुआ। इसका पहला ऑपरेशन अक्टूबर में होना तय था, लेकिन 21 अक्टूबर को हृदय उपचार से जुड़ा अपडेट आने तक कंपनी ने यह नहीं बताया था कि ऑपरेशन हुआ या नहीं।
RiHeart पाने वाली मरीज के लिए तात्कालिक पड़ाव घर लौटना और रोजमर्रा की गतिविधियां फिर से शुरू करना है। Cuorips और आगे के ऑपरेशन की तैयारी कर रहे अस्पतालों के लिए अगला काम 75 मरीजों से जरूरी माप जुटाना है, ताकि पहली मरीज के उत्साहजनक सुधार को उपचार के लाभ और सुरक्षा के व्यापक साक्ष्य में बदला जा सके।
मुख्य बातें
- 50 वर्ष से अधिक उम्र की एक महिला को 29 सितंबर, 2026 को ओसाका केइसेत्सु अस्पताल में RiHeart दिया गया। उन्होंने बताया कि अब सांस लेना आसान है।
- करीब 50 मिनट के ऑपरेशन में दानकर्ता की iPS कोशिकाओं से बनी हृदय की मांसपेशी की तीन शीट उनके हृदय पर लगाई गईं।
- मानक उपचार पर्याप्त न होने पर गंभीर इस्केमिक कार्डियोमायोपैथी के पात्र मरीजों को यह उपचार बीमा के तहत उपलब्ध है।
- पहले परीक्षण में आठ मरीज शामिल थे। लक्षणों, व्यायाम क्षमता और हृदय की पंपिंग के मापों में सुधार अलग-अलग रहा।
- RiHeart की कीमत 5.32 करोड़ येन है और सार्वजनिक बीमा से पात्र मरीजों का अपनी जेब से भुगतान सीमित रहता है।
- Cuorips को सात साल के भीतर 75 मरीजों से और साक्ष्य जुटाने हैं। कंपनी का लक्ष्य 2033 तक पूरी मंजूरी पाना है।






