अदालत के आदेश की रकम चुकाने के लिए मोटरसाइकिल और पाली गई मछलियां
उमनो यूथ प्रमुख डॉ. मुहम्मद अकमल सालेह, हलाल प्रमाणन पर उनकी टिप्पणियों के जवाब को लेकर मानहानि का मुकदमा हारने के बाद, सेपुतेह की सांसद टेरेसा कोक को देय RM300,000 जुटाने के लिए अपनी Honda X-ADV मोटरसाइकिल और पाली गई तिलापिया मछलियों की नीलामी की पेशकश कर रहे हैं।
विषय-सूची
- अदालत के आदेश की रकम चुकाने के लिए मोटरसाइकिल और पाली गई मछलियां
- अकमल क्या बेच रहे हैं और बोली कैसे लगेगी
- प्रमाणन का प्रस्ताव मानहानि के मुकदमे में कैसे बदला
- न्यायाधीश ने अकमल के पक्ष को क्यों खारिज किया
- कानूनी बचाव क्यों नाकाम रहे
- RM300,000 के आदेश में हर्जाने के अलावा भी रकम शामिल
- फैसले के बाद दो सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं
- विवाद की अहम तारीखें
- मुख्य बातें
मेलाका हाई कोर्ट ने अकमल को सामान्य और बढ़े हुए हर्जाने के रूप में RM250,000 और कानूनी खर्च के रूप में RM50,000 देने का आदेश दिया। न्यायिक आयुक्त ईसा अजीज़ इब्राहिम ने 19 अक्टूबर, 2026 को फैसला सुनाया। उनके लिखित फैसले में बताया गया कि टिप्पणियां राजनीतिक असहमति से आगे बढ़कर व्यक्तिगत हमले में क्यों बदल गईं।
अकमल ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि उनकी बचत इस रकम को चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पास बेचने के लिए न जमीन है, न घर, और मोटरसाइकिल व तिलापिया ही उनकी ऐसी संपत्तियां हैं जिनका पूरा भुगतान हो चुका है और जिन्हें वे बेच सकते हैं।
समर्थकों ने चंदा जुटाने के लिए एक कोष खोलने का सुझाव दिया था। अकमल ने उनका आभार जताया, लेकिन कहा कि वे पहले खुद रकम जुटाने की कोशिश करना चाहते हैं, क्योंकि समर्थकों के भी परिवार, वित्तीय जिम्मेदारियां और अपनी मुश्किलें हैं।
उनकी इस घोषणा से उस विवाद का ठोस वित्तीय परिणाम सामने आया है, जो सितंबर 2024 में शुरू हुआ था। कोक ने उन रेस्तरां और खाद्य कारोबारों के लिए हलाल प्रमाणन अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर सवाल उठाया था जो सूअर का मांस या शराब नहीं परोसते। जवाब में अकमल ने एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें अपमानजनक बातें और आरोप थे। अदालत ने उन्हें मानहानिकारक पाया।
अकमल क्या बेच रहे हैं और बोली कैसे लगेगी
अकमल ने गंभीर बोलीदाताओं से अपने बैंक खाते में RM100 जमा करने और फिर भुगतान की रसीद के साथ यह जानकारी भेजने को कहा कि वे कौन-सी संपत्ति चाहते हैं और उनकी बोली कितनी है। उन्होंने कहा कि जिनकी बोली सफल नहीं होगी, उन्हें पूरी जमा राशि वापस कर दी जाएगी।
घोषणा में नीलामी की अंतिम तारीख, Honda की न्यूनतम कीमत, उपलब्ध तिलापिया की मात्रा या दोनों बिक्री से जुटाई जाने वाली अनुमानित रकम का उल्लेख नहीं था।
अकमल ने कहा कि मोटरसाइकिल और मछली पालन का कारोबार उनके काम, यादों और आनंद से जुड़ी चीजें हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें बेचना मुश्किल होगा, लेकिन वित्तीय मदद के लिए दूसरों से कहने से पहले वे अपनी संपत्ति के जरिये देय रकम जुटाने की कोशिश करना पसंद करेंगे।
उन्होंने उन लोगों का भी आभार जताया जिन्होंने उनके लिए दुआ और हौसला-अफजाई की पेशकश की। समर्थकों से कहा कि अगर वे कुछ खरीद या योगदान नहीं कर सकें तो उन्हें अपराधबोध नहीं होना चाहिए। उसी पोस्ट में उन्होंने कहा कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, उसका पालन करने को तैयार हैं और रकम चुकाने की पूरी जिम्मेदारी लेंगे।
प्रमाणन का प्रस्ताव मानहानि के मुकदमे में कैसे बदला
कोक, जो डीएपी की उपाध्यक्ष भी हैं, ने प्रस्तावित हलाल प्रमाणन अनिवार्यता की लागत पर चिंता जताई थी, खासकर छोटे कारोबारों के लिए। यह प्रस्ताव उन रेस्तरां और खाद्य कारोबारों से संबंधित था जो सूअर का मांस या शराब नहीं परोसते।
हलाल का अर्थ है इस्लामी नियमों के तहत अनुमेय। खाद्य प्रमाणन में यह जांचना शामिल है कि कोई कारोबार संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करता है या नहीं। किसी रेस्तरां का सूअर का मांस और शराब न परोसने का फैसला, सामग्री और भोजन तैयार करने से जुड़े व्यापक सवाल का एक हिस्सा है। कोक ने कहा था कि उनकी चिंता यह थी कि अनिवार्य प्रमाणन प्रक्रिया कारोबारियों पर बोझ डाल सकती है।
अकमल ने सितंबर 2024 में TikTok, Facebook और Instagram पर एक वीडियो पोस्ट करके जवाब दिया। उन्होंने कोक को "बूढ़ी न्योन्या" कहा, उन्हें चुप रहने को कहा और उनके माथे पर "गैर-हलाल" का लेबल लगाने का सुझाव दिया।
अदालत ने इन अपमानजनक टिप्पणियों से आगे भी वीडियो की जांच की। उसने वीडियो में लगाए गए इस आरोप पर भी विचार किया कि कोक बार-बार राष्ट्रीय सद्भाव को नुकसान पहुंचाती हैं। अकमल द्वारा उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के निष्कर्ष में यह आरोप अहम रहा।
अक्टूबर 2026 के फैसले से पहले कानूनी विवाद करीब दो साल चला। अकमल, जो मेरलीमाऊ के राज्य विधानसभा सदस्य भी हैं, फैसला सुनाए जाने के समय अदालत में मौजूद नहीं थे।
न्यायाधीश ने अकमल के पक्ष को क्यों खारिज किया
न्यायिक आयुक्त ईसा ने पाया कि कोक पर राष्ट्रीय सद्भाव को लगातार बिगाड़ने का आरोप लगाने के लिए अकमल के पास कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था। 19 अक्टूबर को दिनांकित और 20 अक्टूबर को जारी अपने फैसले में उन्होंने वीडियो से निकलने वाले अर्थ का वर्णन किया:
इस वीडियो में गंभीर मानहानिकारक आरोप था कि वादी लगातार और बार-बार राष्ट्रीय सद्भाव को बिगाड़ती हैं।
सरल शब्दों में, न्यायाधीश ने पाया कि दर्शकों को कोक को ऐसे व्यक्ति के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया गया, जो देश के भीतर संबंधों को बार-बार नुकसान पहुंचाती हैं। यह उनके आचरण के बारे में गंभीर आरोप था, जो प्रमाणन पर उनके रुख से असहमति से कहीं आगे जाता था।
ईसा ने यह भी कहा कि अकमल ने माना था कि उन्होंने बिना पहले स्पष्टीकरण मांगे, गुस्से में वीडियो रिकॉर्ड किया था। अदालत ने पाया कि उनका मुख्य मकसद कोक पर व्यक्तिगत हमला करना था।
अकमल ने वीडियो को ऑनलाइन रहने दिया था और न तो माफी मांगी थी, न ही अपनी टिप्पणियां वापस ली थीं। अदालत ने वीडियो की सामग्री के साथ-साथ उसके प्रकाशन के बाद उनके आचरण का आकलन करते समय इन बातों पर भी विचार किया।
कानूनी बचाव क्यों नाकाम रहे
अकमल ने निष्पक्ष टिप्पणी का बचाव किया, जो जनहित के मामलों पर व्यक्त राय से संबंधित है। अदालत ने इसे खारिज कर दिया, क्योंकि कोक पर राष्ट्रीय सद्भाव को लगातार बाधित करने के आरोप का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था।
ईसा ने बताया कि बिना आधार वाले आरोप पर राय कायम करने में क्या समस्या है:
कोई प्रतिवादी अप्रमाणित तथ्य गढ़कर या उनसे निष्कर्ष निकालकर उन पर टिप्पणी नहीं कर सकता।
अकमल ने सीमित विशेषाधिकार का दावा भी किया। यह बचाव उन परिस्थितियों में किए गए संवाद की रक्षा कर सकता है जहां किसी व्यक्ति का जानकारी देने का कर्तव्य या हित हो और पाने वाले का उसे प्राप्त करने में समान हित हो। अदालत ने टिप्पणियों के व्यापक प्रसार और कोक पर व्यक्तिगत हमलों का हवाला देते हुए इस दलील को खारिज कर दिया।
न्यायाधीश ने यह दलील भी खारिज कर दी कि कोक ने अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिये विवाद भड़काया था। यह सुझाव कि उनकी शब्दावली से अकमल का जवाब जायज हो गया, इस पर ईसा ने लिखा:
किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अपूर्ण अनुवाद या दुर्भाग्यपूर्ण शब्द-चयन किसी प्रतिद्वंद्वी को बिना सबूत चरित्रहनन करने की छूट नहीं देता।
ईसा के लिखित फैसले में व्यक्तिगत आचरण को लेकर एक संक्षिप्त याद दिलाने वाली बात भी थी: "व्यवहार ही व्यक्ति को महान बनाता है।" उनके तर्क का केंद्र बिना आधार वाला आरोप, अपमानजनक टिप्पणियां और उन्हें प्रकाशित करने में अकमल का उद्देश्य था।
RM300,000 के आदेश में हर्जाने के अलावा भी रकम शामिल
कोक को सामान्य और बढ़े हुए हर्जाने के रूप में RM250,000 दिए गए। सामान्य हर्जाना प्रतिष्ठा को नुकसान जैसे मामलों की भरपाई करता है। बढ़ा हुआ हर्जाना प्रतिवादी के आचरण के तरीके से हुए अतिरिक्त नुकसान की भरपाई के लिए होता है, जिसमें प्रकाशन से जुड़ा व्यवहार भी शामिल है।
अदालत ने अलग से RM50,000 कानूनी खर्च देने का आदेश दिया। इन दोनों रकमों का कुल योग RM300,000 है, जिसे जुटाने की कोशिश करने की बात अकमल ने कही है। कुल रकम का छह में से पांचवां हिस्सा हर्जाना है, जबकि छह में से एक हिस्सा कानूनी खर्च है।
आदेश में अकमल को सात दिन के भीतर अपने सोशल मीडिया खातों से वीडियो हटाने को भी कहा गया। कोक के वकील एस. एन. नायर ने कहा कि हटाने की शर्त अकमल के सभी सोशल मीडिया मंचों पर मौजूद मानहानिकारक टिप्पणियों पर लागू होती है।
अकमल को उन टिप्पणियों या समान अर्थ वाले शब्दों को दोबारा प्रकाशित करने से भी रोका गया। इस रोक में अलग शब्दों में मानहानिकारक संदेश दोहराना और मूल बयान फिर से पोस्ट करना, दोनों शामिल हैं।
फैसले के बाद दो सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं
अकमल की नीलामी की घोषणा से पहले फैसले पर फेसबुक पर उनकी एक अधिक चुनौतीपूर्ण प्रतिक्रिया आई थी। उस शुरुआती प्रतिक्रिया में उमनो यूथ प्रमुख ने लिखा:
यह सत्ता में आपका समय है। जो करना है कीजिए। मैं कभी पीछे नहीं हटूंगा। चुनाव प्रचार की शुभकामनाएं।
उस पोस्ट को 15,500 से अधिक लाइक मिले और टिप्पणियों में समर्थन तथा आलोचना, दोनों दिखे। बाद में रकम जुटाने के उनके संदेश में भुगतान की जिम्मेदारी स्वीकार करने और संपत्ति बेचकर धन जुटाने की कोशिश पर जोर था।
व्यावहारिक रूप से मुकदमे के नतीजे के लिए यह बदलाव अहम है। राजनीतिक घोषणा समर्थकों को संबोधित करती है, जबकि नीलामी अदालत की एक खास देनदारी चुकाने के लिए रकम जुटाने की कोशिश है। अकमल ने कहा है कि वे चंदा जुटाने के कोष का रुख करने से पहले खुद यह देनदारी चुकाने की कोशिश करेंगे।
कोक को मिले हर्जाने के साथ मानहानिकारक टिप्पणियों के आगे प्रसार पर नियंत्रण भी जुड़ा है, जिसके तहत अदालत ने वीडियो हटाने और टिप्पणियां दोहराने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। ये शर्तें RM300,000 जुटाने के काम से अलग हैं।
विवाद की अहम तारीखें
यह मामला कारोबारी नियमों पर असहमति से बढ़कर करीब दो साल में प्रतिष्ठा को हुए नुकसान पर फैसले तक पहुंचा। प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
- सितंबर 2024: कोक द्वारा प्रस्तावित अनिवार्य हलाल प्रमाणन की आवश्यकता पर सवाल उठाने के बाद अकमल ने TikTok, Facebook और Instagram पर वीडियो प्रकाशित किया।
- 19 अक्टूबर, 2026: मेलाका हाई कोर्ट ने कोक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए RM250,000 हर्जाने और RM50,000 खर्च देने का आदेश दिया। लिखित फैसले पर यही तारीख दर्ज है।
- 20 अक्टूबर, 2026: लिखित फैसला जारी हुआ, जिसमें अकमल के बचाव खारिज करने और उनके व्यक्तिगत हमलों के बारे में अदालत के निष्कर्षों का विवरण था।
- आदेश के सात दिन के भीतर: अकमल को अपने सोशल मीडिया खातों से वीडियो हटाना था।
अब अकमल की बिक्री की घोषणा से विवाद का केंद्र भुगतान पर आ गया है। उन्होंने इस कोशिश के लिए मोटरसाइकिल और तिलापिया को अपनी संपत्ति के रूप में पहचाना है, जबकि अदालत की पाबंदियां तय करती हैं कि वे मानहानिकारक आरोपों के बारे में क्या प्रकाशित कर सकते हैं।
मुख्य बातें
- टेरेसा कोक को अदालत की देनदारी के रूप में देय RM300,000 जुटाने में मदद के लिए अकमल Honda X-ADV मोटरसाइकिल और पाली गई तिलापिया बेचने की पेशकश कर रहे हैं।
- कुल रकम में सामान्य और बढ़े हुए हर्जाने के RM250,000 तथा कानूनी खर्च के RM50,000 शामिल हैं।
- बोलीदाताओं से RM100 जमा करने को कहा गया था; बोली सफल न होने पर यह पूरी रकम वापस की जाएगी।
- अदालत ने पाया कि कोक पर राष्ट्रीय सद्भाव को लगातार नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाने के लिए अकमल के पास कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था।
- अकमल को सात दिन के भीतर वीडियो हटाने का आदेश दिया गया और मानहानिकारक टिप्पणियां या समान अर्थ वाले शब्द दोहराने से रोका गया।
- अकमल ने कहा कि वे फैसले का सम्मान करते हैं और चंदा मांगने से पहले खुद रकम जुटाने की कोशिश करना चाहते हैं।






