झुलसे हाथ, फंसे परिवार और सिकुड़ता आश्रय
हाथों और पैरों पर जलने के घाव वाली एक मां ओरंगुटान, उसका शिशु बेटा और धुएं के संपर्क में आने के बाद खांसता एक वयस्क नर उन जानवरों में शामिल हैं जो इंडोनेशिया की जंगल की आग में फंस गए। 12 सितंबर, 2026 को पश्चिम कालीमंतन में उनका बचाव बताता है कि क्षेत्रीय धुंध संकट का जमीन पर क्या मतलब है: घायल वन्यजीव, क्षतिग्रस्त जंगल और सुरक्षित रिहाई-स्थलों की प्रतीक्षा कर रहे पुनर्वास केंद्र।
विषय-सूची
- झुलसे हाथ, फंसे परिवार और सिकुड़ता आश्रय
- स्थानीय लोगों ने मामा पेंजा और कुंबांग को बचाने में कैसे मदद की
- नोविता की वापसी सिर्फ जलने के घाव भरने पर निर्भर नहीं
- बचाव अभियान की समयरेखा क्या बताती है
- राष्ट्रीय उद्यानों में बचावकर्मियों के लिए जरूरी आवास नष्ट हो रहा है
- सूखे और पीट के कारण आग बुझाना मुश्किल क्यों है
- धुआं सीमाएं पार कर रहा है, सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं
- उड़ानें, आग बुझाने के प्रयास और नुकसान के विवादित अनुमान
- बारिश का पूर्वानुमान और वन्यजीवों के लिए अगले कदम
- मुख्य बिंदु
इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने इन तीनों की पहचान लगभग 20 वर्षीय मामा पेंजा, उसके एक वर्षीय बेटे पेंजा और करीब 15 वर्षीय कुंबांग के रूप में की। 8 अक्टूबर तक मंत्रालय ने देशभर में सहायता प्राप्त कर रहे 290 जंगली जानवरों का रिकॉर्ड दर्ज किया था, जिनमें 96 बोर्नियन ओरंगुटान शामिल थे। सहायता में निकासी, सुरक्षित आवास की ओर ले जाना, स्थानांतरण, इलाज और पुनर्वास शामिल थे।
पश्चिम कालीमंतन की संरक्षण एजेंसी और इंडोनेशियाई संरक्षण संगठन YIARI ने बाद में 6 अगस्त से 51 ओरंगुटान को निकालने की सूचना दी। कालीमंतन में, जो बोर्नियो का इंडोनेशियाई हिस्सा है, बचाव दलों को जंगल को आग से घिरते देख जले हुए, निर्जलित या फंसे हुए जानवर मिले हैं।
आपात स्थिति वन्यजीवों के आवास से कहीं आगे तक पहुंचती है। इंडोनेशियाई अधिकारियों ने 13 अक्टूबर तक सात प्रांतों में सांस संबंधी बीमारियों के 283,270 मामले दर्ज किए। अगस्त के मध्य से धुंध के कारण करीब 2,400 उड़ानें प्रभावित हुईं, जबकि इंडोनेशिया और पड़ोसी देशों में स्कूल बंद किए गए और बाहरी गतिविधियों पर रोक लगाई गई।
बचाव के ये आंकड़े कार्रवाई के अलग-अलग हिस्सों का ब्योरा देते हैं। मंत्रालय के दर्ज 96 ओरंगुटान को कालीमंतन में कई तरह की सहायता मिली; 51 का आंकड़ा पश्चिम कालीमंतन में निकासी से जुड़ा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य कालीमंतन में देखभाल किए गए 25 ओरंगुटान की गिनती पूरे प्रांत में हुई थी, सिर्फ तंजुंग पुटिंग राष्ट्रीय उद्यान में नहीं।
स्थानीय लोगों ने मामा पेंजा और कुंबांग को बचाने में कैसे मदद की
वानिकी मंत्रालय के 17 सितंबर के बयान में कायोंग उतारा में बचाव अभियान का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। अदे नाम के एक निवासी ने 10 सितंबर को पेनजालान गांव में अपने ताड़ के तेल के बागान में एक ओरंगुटान दिखने की सूचना दी। एक संयुक्त दल 12 सितंबर को उस इलाके में पहुंचा।
बचावकर्मियों ने मामा पेंजा को बेहोश कर पेंजा के साथ उसे सुरक्षित निकाला। YIARI के पशु चिकित्सकों को मां के हाथों और पैरों पर जलने के घाव मिले। उन्होंने इलाज किया, एंटीबायोटिक दिए और दोनों जानवरों को संगठन के पुनर्वास केंद्र ले जाने से पहले चिकित्सकीय नमूने लिए। संरक्षणकर्मियों ने बताया कि मां और बच्चा गंभीर रूप से निर्जलित और कुपोषित भी थे।
इसके बाद दल पादु बंजार गांव पहुंचा, जहां एक स्थानीय ग्राम वन प्रबंधन संगठन ने बताया था कि आसपास का जंगल जलने के बाद एक वयस्क नर बगीचों में आ रहा था और घरों के पास पहुंच रहा था। बचावकर्मियों ने 12 सितंबर को दोपहर 12:59 बजे उसे निकाला।
माइक्रोचिप से जानवर की पहचान कुंबांग के रूप में हुई, जिसे इससे पहले फरवरी 2022 में बचाया गया था। पशु चिकित्सकों को एयर राइफल की गोली से लगा पुराना घाव मिला और खांसी भी, जिसके बारे में उन्हें संदेह था कि वह जंगल की आग के घने धुएं के कारण हुई। मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा उसकी हालत अपेक्षाकृत अच्छी थी।
स्थानीय निवासियों, ग्राम वन संगठनों, सरकारी संरक्षण अधिकारियों, YIARI और यायासन पालुंग ने अभियान में हिस्सा लिया। उनके काम से खतरे में पड़े जानवर की पहली सूचना को पशु चिकित्सा देखभाल और परिवहन से जोड़ा गया। मंत्रालय ने कहा कि तीनों ओरंगुटान तब तक निगरानी में रहेंगे, जब तक मौसम और जंगल की स्थिति उनकी वापसी के अनुकूल नहीं हो जाती।
नोविता की वापसी सिर्फ जलने के घाव भरने पर निर्भर नहीं
मध्य कालीमंतन के कटुने जंगल में एक अन्य बचाव अभियान नोविता पर केंद्रित था। तीन से चार साल की मानी जा रही यह मादा ओरंगुटान धुएं और जली हुई जमीन से घिरे लगभग पत्ताविहीन पेड़ पर मिली थी। बोर्नियो ओरंगुटान सर्वाइवल फाउंडेशन के अध्यक्ष जमार्तिन सिहिते ने यह जानकारी दी।
बचावकर्मियों ने उसे ढूंढने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया और पास की आग को रोकने के लिए रातभर काम किया। आखिरकार उन्होंने जमीन से उसे बेहोश किया और जाल में पकड़ लिया। नोविता को ऑक्सीजन और नस के जरिए तरल देने के बाद न्यारू मेंतेंग पुनर्वास केंद्र ले जाया गया। उसके बचाव के विस्तृत विवरण में बताया गया कि उसके शरीर का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा जल गया था।
सिहिते ने बताया कि उसे चोटें संभवतः कैसे लगीं:
उसकी हथेलियों और पैरों के तलवों पर जलने के घाव थे। संभवतः पेड़ तक पहुंचने की कोशिश में जले हुए इलाके से गुजरते समय नोविता को ये चोटें लगीं,
जलने के घाव भरने के बाद पशु चिकित्सक आकलन करेंगे कि नोविता पेड़ों पर चढ़कर स्वतंत्र रूप से जीवित रह सकती है या नहीं। ओरंगुटान के लिए हाथों और पैरों की चोटों से भोजन तक पहुंचने और पेड़ों के बीच आने-जाने के लिए जरूरी बुनियादी गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
संपुर्णा, करीब 20 साल का माना जाने वाला एक नर ओरंगुटान, नहीं बच पाया। पश्चिम कालीमंतन के केतापांग जिले में ताड़ के तेल के एक बागान में स्थानीय लोगों ने उसे सांस लेने के लिए जूझते हुए पाया। वानिकी मंत्रालय ने बताया कि बचाव के कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। उसकी मौत दिखाती है कि जब कोई जानवर पहले से गंभीर रूप से बीमार हो, तो बचाव दलों के पास कितना कम समय हो सकता है।
बचाव अभियान की समयरेखा क्या बताती है
यह अभियान कई महीनों से जारी है। प्रांतीय निकासी के आंकड़े और राष्ट्रीय वन्यजीव आंकड़े अलग-अलग अभियानों को मापते हैं। मंत्रालय के सितंबर के बयान में पश्चिम कालीमंतन की संरक्षण एजेंसी और YIARI द्वारा 23 ओरंगुटान को निकालने का रिकॉर्ड था। इसके साथ नौ पैंगोलिन, तीन स्लो लोरिस, एक सूंड बंदर, एक कस्तूरी बिलाव और एक सिल्वर लीफ लंगूर को भी निकाला गया था।
मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार हैं:
- 6 अगस्त: पश्चिम कालीमंतन अभियान की शुरुआत की तारीख; बाद में इस अभियान ने 51 ओरंगुटान को निकालने की सूचना दी।
- 10 सितंबर: एक निवासी ने उस ओरंगुटान को देखने की सूचना दी, जिसकी पहचान बाद में मामा पेंजा के रूप में हुई।
- 12 सितंबर: दलों ने कायोंग उतारा में मामा पेंजा, पेंजा और कुंबांग को बचाया।
- 29 सितंबर: वानिकी मंत्रालय ने कालीमंतन और सुमात्रा के आग प्रभावित इलाकों से 254 जानवरों को बचाए जाने का रिकॉर्ड दर्ज किया।
- 8 अक्टूबर: मंत्रालय ने देशभर में सहायता प्राप्त कर रहे 290 जंगली जानवरों का रिकॉर्ड दर्ज किया। इनमें कालीमंतन के चार प्रांतों में 272 जानवर और 96 बोर्नियन ओरंगुटान शामिल थे।
- 17 अक्टूबर: तीन संरक्षण एजेंसियों ने मध्य कालीमंतन के हमपांगन गांव से करीब 20 वर्षीय एक नर ओरंगुटान को निकाला।
पश्चिम कालीमंतन दल की बताई गई रिपोर्टिंग अवधि 19 अक्टूबर को समाप्त होती है, हालांकि 51 निकासी का आंकड़ा देने वाला क्षेत्रीय अपडेट 18 अक्टूबर का है। इन 51 निकासियों की सटीक अंतिम तारीख स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
हमपांगन में मिले जानवर को बेहोश कर उसकी जांच की गई और पुनर्वास केंद्र ले जाया गया। व्यापक बचाव अभियान में देखभाल की जरूरत वाले जानवरों की संख्या पशु चिकित्साकर्मियों, परिवहन दलों और केंद्रों पर लगातार दबाव डाल रही है, जबकि आग अभी भी सक्रिय है।
राष्ट्रीय उद्यानों में बचावकर्मियों के लिए जरूरी आवास नष्ट हो रहा है
4,12,000 हेक्टेयर में फैला बोर्नियो के ओरंगुटान का प्रमुख आवास तंजुंग पुटिंग राष्ट्रीय उद्यान आग बुझाने के अभियान का मुख्य केंद्र बन गया है। स्वयंसेवक मोनकोस ने स्थानीय संरक्षण समूह के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि करीब 54,000 हेक्टेयर जल चुका है, जिसमें उद्यान के मुख्य संरक्षण क्षेत्र के कुछ हिस्से भी शामिल हैं। वानिकी मंत्रालय ने इस क्षेत्रफल के अनुमान की पुष्टि नहीं की थी।
इन आंकड़ों के अनुसार उद्यान का करीब 13 प्रतिशत हिस्सा नष्ट हो चुका है। संसाधनों और पानी तक पर्याप्त पहुंच न होने के कारण 60 स्वयंसेवकों के एक समूह ने आग बुझाने का काम छोड़ दिया और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से अधिक मदद की अपील की।
29 वर्षीय स्वयंसेवक मोनकोस ने इस फैसले के बारे में कहा:
हमने आग वाली जगहों से पीछे हटने का फैसला किया है, क्योंकि अब हमारी क्षमता बेकाबू आग की रफ्तार का मुकाबला नहीं कर पा रही थी,
आग सेबांगाउ और गुनुंग पालुंग राष्ट्रीय उद्यानों तक भी पहुंच गई। सुमात्रा में संरक्षण संगठन KKI वारसी ने अनुमान लगाया कि अगस्त के आखिर से बेरबाक-सेम्बिलांग राष्ट्रीय उद्यान का कम से कम 20,336 हेक्टेयर हिस्सा जल चुका है।
बचाव अभियान पूरा करने के लिए सुरक्षित जंगल जरूरी है। सलामत इलाके भोजन और आश्रय दे सकते हैं, जबकि जले हुए जंगल के रास्ते ओरंगुटान के समूहों को एक-दूसरे से अलग कर देते हैं। खेतों और बस्तियों की ओर जाने वाले जानवरों का लोगों से सामना होने का खतरा बढ़ता है। विस्थापित जानवरों के लिए जंगल के बचे हुए हिस्सों में भी भोजन सीमित हो सकता है।
WWF इंडोनेशिया के संरक्षण समन्वयक फेंकी विरादा ने कहा कि दलों को जंगल के छोटे-छोटे हिस्सों में कुछ ओरंगुटान अब भी मिले हैं। मामा पेंजा, पेंजा और कुंबांग की रिहाई स्थगित करने का वानिकी मंत्रालय का फैसला इसी व्यावहारिक समस्या को दर्शाता है: इलाज के बाद उन्हें सुरक्षित ठिकाना भी मिलना चाहिए।
सूखे और पीट के कारण आग बुझाना मुश्किल क्यों है
एल नीनो ने बोर्नियो और सुमात्रा में लंबे समय से जारी शुष्क मौसम को और तीव्र कर दिया है। इस मौसम प्रणाली से उष्णकटिबंधीय महासागर और वायुमंडल की स्थितियां बदलती हैं और कुछ इलाकों में बारिश कम हो जाती है। सूखी वनस्पति आसानी से आग पकड़ती है, जबकि पानी की घटती उपलब्धता से आग बुझाना और कठिन हो जाता है।
सिंगापुर के नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर वांग जिंग्यु ने क्षेत्रीय सूखे को स्थानीय समुद्र की सतह के ठंडे तापमान और वाष्पीकरण में कमी से जोड़ा। वातावरण में कम पानी पहुंचने का मतलब है कि बारिश बनाने के लिए नमी भी कम उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि पूर्वी एशिया के अन्य हिस्सों में तूफानी प्रणालियां भी आग प्रभावित क्षेत्रों से नमी खींच रही थीं।
वांग ने तात्कालिक कठिनाई बताते हुए कहा:
पर्याप्त बारिश नहीं हो रही है। आग आसानी से नहीं बुझाई जा सकती।
पीट की वजह से चुनौती और बढ़ जाती है। आंशिक रूप से विघटित पौधों के पदार्थों की यह मोटी परत आमतौर पर दलदली जंगलों में पानी रोककर रखती है। सूखने पर यह ईंधन बन जाती है, जो लपटें दिखाई देना बंद होने के बाद भी सतह के नीचे सुलगती रह सकती है।
बोस्टन यूनिवर्सिटी की मानवविज्ञानी चेरिल नॉट, जो 1990 के दशक की शुरुआत से ओरंगुटान का अध्ययन कर रही हैं, ने चेतावनी दी कि प्राथमिक वर्षावन में आग जारी रहने से इस प्रजाति के जीवित रहने की संभावनाएं खतरे में पड़ती हैं। 1985 से 2001 के बीच बोर्नियो का आधे से अधिक तराई वाला जंगल पहले ही साफ किया जा चुका था। संरक्षण संबंधी रिपोर्ट में दिए गए एक अनुमान के मुताबिक 1999 से 2018 के बीच बोर्नियन ओरंगुटान की आबादी का करीब आधा हिस्सा खत्म हो गया हो सकता है।
धुआं सीमाएं पार कर रहा है, सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं
इंडोनेशिया के सात प्रांतों में दर्ज सांस संबंधी बीमारियों के मामले 9 सितंबर के 113,336 से बढ़कर 13 अक्टूबर को 283,270 हो गए। यह 169,934 मामलों, यानी करीब 150 प्रतिशत की वृद्धि है। बाद का आंकड़ा पहले की कुल संख्या का लगभग ढाई गुना है।
PM2.5, जंगल की आग से उठने वाली धुंध का एक प्रमुख प्रदूषक है। यह 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कणों से बना होता है। इंसान का एक सामान्य बाल करीब 100 माइक्रोमीटर चौड़ा होता है, यानी इन कणों से लगभग 40 गुना बड़ा। ये कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और इनके संपर्क में आने से अस्थमा तथा सांस की दूसरी बीमारियां बिगड़ सकती हैं।
मोनाश यूनिवर्सिटी की जलवायु और वायु गुणवत्ता अनुसंधान इकाई के प्रमुख युमिंग गुओ ने बताया कि सूक्ष्म कण रक्तप्रवाह तक पहुंचकर शरीर के अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से सांस की बीमारी वाले लोगों को खास जोखिम है।
18 अक्टूबर से पहले वाले सप्ताह में सिंगापुर के पश्चिमी इलाकों में PM2.5 का प्रति घंटे का स्तर 284 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। वहां 24 घंटे का प्रदूषण मानक सूचकांक भी बेहद अस्वास्थ्यकर स्तर पर पहुंच गया। PM2.5 एक प्रदूषक को मापता है; PSI छह प्रदूषकों की जानकारी को मिलाकर वायु गुणवत्ता सूचकांक बनाता है।
सिंगापुर की राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी के उप निदेशक जेसन इवांस टैन ने कहा कि 5 अक्टूबर से शुरू हुआ अस्वास्थ्यकर हवा का दौर देश में 2015 के गंभीर धुंध संकट के बाद सबसे लंबा था। 18 अक्टूबर को वायु गुणवत्ता निगरानी संस्था IQAir ने सिंगापुर और कुआलालंपुर को दुनिया के पांच सबसे प्रदूषित बड़े शहरों में शामिल किया।
धुआं 800 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित फिलीपींस तक भी पहुंचा, जबकि मलेशिया के सारावाक में अधिकारियों ने आपात स्थिति घोषित की। स्कूल बंद होने और बाहरी गतिविधियों पर पाबंदियों से इंडोनेशिया, मलेशिया और तिमोर-लेस्ते के परिवारों का रोजमर्रा का जीवन भी प्रभावित हुआ।
उड़ानें, आग बुझाने के प्रयास और नुकसान के विवादित अनुमान
इंडोनेशिया के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि अगस्त के मध्य से धुंध के कारण करीब 2,400 उड़ानें प्रभावित हुईं। हवाई अड्डों के आसपास दृश्यता घटने से उड़ानों में देरी हुई, सेवाएं बाधित हुईं और उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इससे उस संकट में परिवहन की मुश्किलें भी जुड़ गईं जो पहले ही स्वास्थ्य और स्कूली पढ़ाई को प्रभावित कर रहा था।
मंत्रालय ने अपने परिचालन संबंधी फैसलों की वजह बताते हुए कहा:
धुंध से हवाई अड्डों के आसपास दृश्यता घटती है, जिससे उड़ानों में देरी हो सकती है, सेवाएं बाधित हो सकती हैं और उड़ानें रद्द भी करनी पड़ सकती हैं। परिचालन से जुड़ा हर फैसला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर लिया जाता है,
जमीन पर आग बुझाने के लिए 60,000 से अधिक संयुक्त कर्मियों को तैनात किया गया, खास तौर पर मध्य कालीमंतन और दक्षिण सुमात्रा में। पानी की बौछार और बादलों में कृत्रिम वर्षा कराने के अभियानों में करीब 50 विमान शामिल थे। जापान ने आग बुझाने में मदद दी, जबकि पानी की कमी से जमीन पर काम में बाधा आई।
वानिकी मंत्रालय ने कहा कि तंजुंग पुटिंग के पास घनी धुंध ने हवाई अभियान में बाधा डाली, हालांकि जमीन पर काम जारी रहा। 12 अक्टूबर को राष्ट्रपति प्रबोवो को दी गई जानकारी में छह प्रांतों के 639 हेक्टेयर क्षेत्र में जारी आग बुझाने के अभियान का ब्योरा था। यह उस समय सक्रिय अभियान वाले इलाकों का आंकड़ा है; पूरे मौसम में जली जमीन के अनुमान इससे कहीं बड़े हैं।
सरकारी आंकड़ों में जनवरी से जुलाई के बीच 2,02,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन जलने का रिकॉर्ड है। अगस्त तक की अवधि के लिए पर्यावरण संगठन औरगा ने 6,37,000 हेक्टेयर से अधिक नुकसान का अनुमान लगाया, जबकि उपग्रह निगरानी परियोजना नुसंतारा एटलस ने करीब 8,96,000 हेक्टेयर जलने का अनुमान दिया। अगस्त के इन दोनों अनुमानों में करीब 2,59,000 हेक्टेयर का अंतर है।
पश्चिम कालीमंतन के नागरिक समाज संगठनों के एक गठबंधन ने आग की रोकथाम और प्रबंधन में कथित लापरवाही को लेकर प्रशासन पर मुकदमा दायर किया। राष्ट्रपति भवन ने आरोप से इनकार किया। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब स्थानीय स्वयंसेवक अधिक सहायता मांग रहे हैं और संरक्षण दल जानवरों को खतरे से निकालना जारी रखे हुए हैं।
बारिश का पूर्वानुमान और वन्यजीवों के लिए अगले कदम
इंडोनेशिया की मौसम एजेंसी के मुताबिक अक्टूबर में शुरू होने वाली मौसमी बारिश नवंबर तक टलने की आशंका थी। एजेंसी ने अनुमान लगाया कि एल नीनो का असर 2027 की पहली तिमाही तक जारी रहेगा, जबकि आने वाला बारिश का मौसम आग के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा।
पुनर्वास दलों को जानवरों का इलाज जारी रखते हुए उनकी सेहत और संभावित रिहाई-स्थलों की स्थिति, दोनों का आकलन करना होगा। नोविता को फिर से पेड़ों पर चढ़ने में सक्षम होना होगा। मामा पेंजा, पेंजा और कुंबांग की सुरक्षित वापसी के लिए जंगल की स्थिति अनुकूल होनी चाहिए। जो जानवर बचे हुए छोटे आवासों में हैं, उनकी निगरानी भी जारी रखनी होगी।
वानिकी मंत्रालय ने लोगों से अपील की कि वे खुद जानवरों को पकड़ने की कोशिश करने के बजाय प्रशिक्षित अधिकारियों से संपर्क करें। खतरे में वन्यजीव दिखने पर लोग उसका सही स्थान बताएं, उसकी हालत का विवरण दें और सिर्फ तभी तस्वीर या वीडियो लें, जब ऐसा करना सुरक्षित हो।
मंत्रालय ने कालीमंतन में वन्यजीव बचाव के लिए ये नंबर दिए:
- पश्चिम कालीमंतन संरक्षण एजेंसी: 0811-577-6767।
- मध्य कालीमंतन संरक्षण एजेंसी: 0811-5218-500।
- पूर्वी कालीमंतन संरक्षण एजेंसी: 0821-1333-8181।
स्थानीय लोगों की सूचनाओं से बचावकर्मियों को मामा पेंजा और कुंबांग तक पहुंचने में मदद मिली। लगातार बारिश, आग बुझाने के प्रभावी प्रयास और जंगल के बचे हुए हिस्से तय करेंगे कि इलाज करा रहे जानवर पुनर्वास केंद्रों से कब निकलकर जंगल लौट पाएंगे।
मुख्य बिंदु
- पश्चिम कालीमंतन के बचाव दलों ने 6 अगस्त से 51 ओरंगुटान को निकालने की सूचना दी।
- वानिकी मंत्रालय ने 8 अक्टूबर तक 96 बोर्नियन ओरंगुटान को कई तरह की सहायता दिए जाने का रिकॉर्ड दर्ज किया।
- बचाए गए जानवरों में मामा पेंजा, उसका शिशु पेंजा, कुंबांग और नोविता शामिल हैं; बचाव के कुछ घंटे बाद संपुर्णा की मौत हो गई।
- इंडोनेशिया के सात प्रांतों में सांस संबंधी बीमारियों के मामले 13 अक्टूबर तक 283,270 पहुंच गए, जो 9 सितंबर की संख्या का करीब ढाई गुना है।
- धुंध से करीब 2,400 उड़ानें प्रभावित हुईं और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में रोजमर्रा का जीवन बाधित हुआ।
- आवास के नुकसान और जारी आग के कारण वन्यजीवों की रिहाई टल रही है, जबकि मौसमी बारिश नवंबर में आने का अनुमान था।






