कंबोडिया और तुर्किये ने सैन्य ढाँचा समझौते पर हस्ताक्षर किए, एर्दोगन ने थाईलैंड के साथ शांति की अपील की

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Cambodia and Türkiye Sign Military Framework Agreement as Erdogan Urges Peace With Thailand

रक्षा समझौता व्यापार और कूटनीति को बढ़ावा देने की व्यापक कोशिश का हिस्सा

कंबोडिया और तुर्किये ने 16 अक्टूबर, 2026 को सैन्य ढाँचा समझौते पर हस्ताक्षर किए। कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत और तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने सैन्य संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय व्यापार को 1 अरब डॉलर तक पहुँचाने की कोशिश फिर से शुरू की। एर्दोगन ने थाईलैंड के साथ कंबोडिया के सीमा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की भी अपील की और कहा कि लड़ाई से प्रभावित 3,000 से अधिक लोगों तक तुर्किये की सहायता पहुँची है।

विषय-सूची
  1. रक्षा समझौता व्यापार और कूटनीति को बढ़ावा देने की व्यापक कोशिश का हिस्सा
  2. सैन्य समझौते से क्या बदलेगा
  3. थाई सीमा विवाद पर बातचीत की अपील
  4. तुर्किये की सहायता 3,000 से अधिक लोगों तक पहुँची
  5. 1 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य अभी दूर
  6. कारोबारी समूह व्यावहारिक सहयोग पर सहमत
  7. सीधी उड़ानें, छात्रवृत्तियाँ और सांस्कृतिक संबंध
  8. सहयोग संयुक्त राष्ट्र, आसियान और गाजा तक फैला
  9. संबंध यहाँ तक कैसे पहुँचे
  10. मुख्य बिंदु

तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय और कंबोडिया की सरकारी समाचार एजेंसी, एजेंस कंम्पुचिया प्रेस (AKP) के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस्तांबुल स्थित डोलमाबाहचे राष्ट्रपति कार्यालय में बातचीत के बाद समझौते पर हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता की। AKP की बातचीत की रिपोर्ट के मुताबिक बैठक 16 अक्टूबर की दोपहर इस्तांबुल में हुई; जबकि उसकी हस्ताक्षर समारोह की तस्वीर का कैप्शन और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के कैप्शन में शाम के कार्यक्रमों का स्थान अंकारा बताया गया है।

तुर्किये की ओर से विदेश मंत्री हाकान फिदान ने समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि कंबोडिया की ओर से उप रक्षा मंत्री प्राक सोवन्ना ने हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं ने रक्षा उद्योगों, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और संस्कृति के साथ-साथ इस्तांबुल और नोम पेन्ह के बीच संभावित सीधी उड़ानों पर चर्चा की।

इस यात्रा में उस रिश्ते के कई पहलू एक साथ आए, जिसकी शुरुआत 7 नवंबर, 1959 को राजनयिक संबंधों की स्थापना के साथ हुई थी। कंबोडिया अपने और तुर्किये के सशस्त्र बलों के बीच व्यावहारिक सहयोग चाहता है। साथ ही, वह तुर्किये की कंपनियों को कंबोडियाई कारखानों, कृषि प्रसंस्करण, परिवहन और प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

सैन्य समझौते से क्या बदलेगा

हुन मानेत ने ढाँचा समझौते को दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच व्यावहारिक सहयोग मजबूत करने का आधार बताया। उन्होंने कहा कि नेताओं ने राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा संबंधों को गहरा करने के उपायों पर चर्चा की।

ढाँचा समझौता सहयोग के लिए व्यापक आधार तय करता है, जबकि अलग-अलग गतिविधियाँ आगे के फैसलों के जरिए तय होती हैं। घोषणाओं में समझौते के विस्तृत प्रावधानों, कार्यान्वयन की समय-सीमा, उपकरणों की खरीद या वित्तीय प्रतिबद्धताओं का ब्योरा नहीं दिया गया।

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एर्दोगन ने तुर्किये के रक्षा उत्पादों में कंबोडिया की दिलचस्पी का स्वागत किया। तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बयान में राष्ट्रपति ने इस दिलचस्पी को करीबी सहयोग की संभावना से जोड़ा:

हमें खुशी है कि कंबोडिया हमारे रक्षा उद्योग के उत्पादों में दिलचस्पी दिखा रहा है। इस क्षेत्र में हमारे पास काफी संभावनाएँ हैं और इंशाअल्लाह, हम उनके साथ सहयोग बढ़ाएँगे।

यह समझौता व्यापक राजनयिक संबंधों के भीतर सैन्य सहयोग को औपचारिक स्थान देता है। हुन मानेत ने इसे संबंधों को अधिक व्यावहारिक बनाने की कोशिश का हिस्सा बताया, जो सरकारों के बीच मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान से आगे तक जाएगा।

थाई सीमा विवाद पर बातचीत की अपील

एर्दोगन ने कंबोडिया-थाईलैंड सीमा विवाद पर बात करते हुए तुर्किये को रक्षा साझेदार और शांति का समर्थक, दोनों रूपों में पेश किया। उनकी यह टिप्पणी 2025 के आखिर में हुए संघर्ष-विराम के बाद आई। उस संघर्ष-विराम ने 20 दिनों की फिर से शुरू हुई लड़ाई को रोका था, जिसमें कम से कम 101 लोग मारे गए और 500,000 से अधिक विस्थापित हुए।

कंबोडिया और थाईलैंड एक-दूसरे पर समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं। क्षेत्रीय दावों और सैनिकों की तैनाती को लेकर मतभेदों के कारण तनाव बना हुआ है। घर छोड़ने को मजबूर परिवारों के लिए यह विवाद निजी सुरक्षा और अपने समुदायों में लौटने की संभावना से जुड़ा है, साथ ही सीमा की स्थिति से भी।

तुर्किये के राष्ट्रपति के रूप में बोलते हुए एर्दोगन ने अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर बातचीत की अपील की:

हमें उम्मीद है कि कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा विवाद का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से होगा।

हुन मानेत और एर्दोगन ने अपनी द्विपक्षीय चर्चा के दौरान अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के सम्मान पर भी जोर दिया। उनके बयानों में सैन्य संबंधों के विस्तार के साथ शांतिपूर्ण बातचीत को भी अहमियत दी गई।

तुर्किये की सहायता 3,000 से अधिक लोगों तक पहुँची

एर्दोगन ने कहा कि तुर्किये ने कंबोडियाई अधिकारियों के समन्वय से 3,000 से अधिक लोगों तक सहायता पहुँचाई है और अपना मानवीय कार्य जारी रखेगा। उन्होंने इस सहायता को सीधे सीमा संघर्ष से प्रभावित आम लोगों से जोड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक 500,000 से अधिक लोगों का विस्थापन इस उथल-पुथल के पैमाने का अंदाजा देता है। तुर्किये की सहायता इस प्रतिक्रिया का एक ठोस हिस्सा है, जो लोगों तक पहुँच रही है, जबकि राजनयिक कोशिशें आगे की लड़ाई रोकने की राह तलाश रही हैं।

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तुर्किये के साथ कंबोडिया का विकास सहयोग आपातकालीन सहायता से आगे भी फैला है। हुन मानेत ने तुर्किये सहयोग और समन्वय एजेंसी (TIKA) का बुनियादी ढाँचे, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और कंबोडिया की मुस्लिम महिलाओं की मदद करने वाली पहलों में किए गए काम के लिए आभार जताया।

इसलिए यात्रा में दो अलग-अलग जरूरतों पर चर्चा हुई: संघर्ष से प्रभावित आम लोगों के लिए तत्काल मदद और रोजमर्रा की जिंदगी बेहतर बनाने के उद्देश्य से लंबी अवधि की परियोजनाएँ। दोनों नेताओं ने इन गतिविधियों को अपने देशों के संबंधों का हिस्सा बताया।

1 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य अभी दूर

2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 400 मिलियन डॉलर रहा, जो 2024 के करीब 338 मिलियन डॉलर से लगभग 18% अधिक था। हुन मानेत ने कारोबारों से इस वृद्धि को आगे बढ़ाने और 2018 में तय 1 अरब डॉलर के लक्ष्य की दिशा में काम करने का आग्रह किया। उस समय कंबोडिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री हुन सेन ने तुर्किये का दौरा किया था।

400 मिलियन डॉलर के स्तर पर वार्षिक व्यापार लक्ष्य का करीब 40% है। 1 अरब डॉलर तक पहुँचने के लिए सालाना कारोबार में 600 मिलियन डॉलर और जोड़ने होंगे, यानी 2025 के कुल व्यापार का ढाई गुना। यह तुलना दिखाती है कि नेताओं ने राजनयिक बैठकों के साथ कारोबारी संगठनों से जुड़ी चर्चाएँ क्यों कीं।

इस्तांबुल में कंबोडिया-तुर्किये व्यापार मंच की मेजबानी कंबोडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स और तुर्किये के विदेश आर्थिक संबंध बोर्ड (DEİK) ने संयुक्त रूप से की। एर्दोगन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह बैठक दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच संबंध मजबूत करेगी।

हुन मानेत ने निवेशकों से व्यापार की बाधाओं को दूर करने और निवेश तेज करने के लिए संयुक्त आर्थिक आयोग और कंबोडिया-तुर्किये व्यापार परिषद का उपयोग करने का आग्रह किया। ये निकाय कारोबारियों और अधिकारियों को उन समस्याओं पर काम करने के माध्यम देते हैं, जिनसे सौदों या परियोजनाओं में देरी हो सकती है।

कारोबारी समूह व्यावहारिक सहयोग पर सहमत

कंबोडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स और DEİK ने कारोबारियों के बीच संपर्क, बाजार संबंधी जानकारी साझा करने और संयुक्त उपक्रम विकसित करने से जुड़ा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। संयुक्त उपक्रम में कारोबार किसी परियोजना पर साथ काम करते हैं और संसाधन तथा जिम्मेदारियाँ साझा करते हैं।

हुन मानेत ने विनिर्माण, कृषि प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल प्रौद्योगिकी और टिकाऊ पर्यटन को सहयोग के क्षेत्रों के रूप में बताया। यह सूची निवेश के अवसरों को ठोस गतिविधियों से जोड़ती है, जिनमें कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण, सामान की ढुलाई और ऊर्जा की आपूर्ति शामिल हैं।

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कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) के जरिए अपने देश को एशिया के व्यापक बाजारों का प्रवेशद्वार भी बताया। RCEP एक क्षेत्रीय व्यापार समझौता है, जो इसके सदस्य देशों के बीच कारोबार के नियम तय करता है। निवेशक के लिए पड़ोसी बाजारों तक पहुँच यह तय करने में अहम हो सकती है कि उत्पादन या वितरण का काम कहाँ स्थापित किया जाए।

हुन मानेत ने कहा कि कंबोडिया व्यापार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और कंपनियों के बीच साझेदारी मजबूत करने के लिए तुर्किये के कारोबारियों के साथ काम करने को तैयार है। कारोबारी समझौता ज्ञापन इन लक्ष्यों की दिशा में एक संगठनात्मक कदम है, जबकि व्यापार के आँकड़े दिखाते हैं कि अभी कितनी वृद्धि की जरूरत है।

सीधी उड़ानें, छात्रवृत्तियाँ और सांस्कृतिक संबंध

हुन मानेत और एर्दोगन ने इस्तांबुल और नोम पेन्ह के बीच सीधी उड़ानें शुरू करने के साथ-साथ पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा की। सीधा संपर्क दोनों शहरों के बीच आने-जाने वाले पर्यटकों, कारोबारियों और अन्य यात्रियों के लिए सफर को आसान बना सकता है।

शिक्षा पहले से ही दोनों देशों के संबंधों का हिस्सा है। एर्दोगन ने कहा कि तुर्किये अपने तुर्किये स्कॉलरशिप कार्यक्रमों के जरिए कंबोडियाई छात्रों की मदद करता है, जबकि TIKA और युनुस एमरे संस्थान सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देते हैं।

छात्रों, पर्यटन कारोबारियों और कंपनियों की जरूरतें इस एजेंडे के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी हैं। छात्रवृत्तियाँ पढ़ाई में मदद करती हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं और परिवहन संपर्क यात्राओं को आसान बना सकते हैं। नेताओं ने इन गतिविधियों को व्यापार और रक्षा के साथ एक ही चर्चा में शामिल किया।

प्रस्तावित हवाई संपर्क से पर्यटन में उनकी दिलचस्पी को व्यावहारिक रूप भी मिलता है। अगर दोनों देशों के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक हो, तो इस क्षेत्र में तुर्किये का निवेश कंबोडिया के लिए पर्यटकों की बढ़ती संख्या से जोड़ना आसान होगा।

सहयोग संयुक्त राष्ट्र, आसियान और गाजा तक फैला

एर्दोगन ने गाजा बोर्ड ऑफ पीस के संस्थापक सदस्य के रूप में कंबोडिया की भागीदारी का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि नोम पेन्ह फिलिस्तीन में दो-राष्ट्र समाधान पर आधारित काम में योगदान देगा। दो-राष्ट्र समाधान का अर्थ है कि इजरायल और फिलिस्तीन, दोनों के स्वतंत्र राष्ट्र साथ-साथ मौजूद हों।

हुन मानेत ने शांति और स्थिरता, खासकर मध्य पूर्व में, के लिए तुर्किये की राजनयिक सक्रियता की सराहना की। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (ASEAN) के जरिए सहयोग को भी रेखांकित किया।

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हुन मानेत ने आसियान के साथ तुर्किये की सक्रियता का स्वागत किया और क्षेत्रीय संपर्क तथा साझा समृद्धि पर करीबी सहयोग की अपील की। कंबोडिया के लिए इससे दोनों सरकारों के बीच हुए समझौतों के साथ संबंधों को एक क्षेत्रीय आयाम भी मिलता है।

कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने एर्दोगन को आधिकारिक यात्रा पर कंबोडिया आने का निमंत्रण दिया। यह निमंत्रण सैन्य सहयोग, कारोबारी संबंधों और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आदान-प्रदान पर चर्चा आगे बढ़ाने का एक और अवसर देता है।

संबंध यहाँ तक कैसे पहुँचे

कंबोडिया और तुर्किये के बीच छह दशकों से अधिक समय से राजनयिक संबंध हैं। अक्टूबर की यात्रा ने इस इतिहास और आठ साल पहले हुन सेन की यात्रा के दौरान तय आर्थिक लक्ष्य को आगे बढ़ाया।

  • 7 नवंबर, 1959: कंबोडिया और तुर्किये ने राजनयिक संबंध स्थापित किए।
  • 2018: हुन सेन और एर्दोगन ने द्विपक्षीय व्यापार को 1 अरब डॉलर तक पहुँचाने की कोशिश पर सहमति जताई।
  • 2024: द्विपक्षीय व्यापार करीब 338 मिलियन डॉलर रहा।
  • 2025: व्यापार लगभग 400 मिलियन डॉलर तक पहुँचा, जो करीब 18% की वृद्धि थी।
  • 2025 के आखिर में: संघर्ष-विराम ने कंबोडिया और थाईलैंड के बीच फिर से शुरू हुई 20 दिनों की लड़ाई रोक दी।
  • 16 अक्टूबर, 2026: हुन मानेत और एर्दोगन ने बातचीत की और सैन्य ढाँचा समझौते पर हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता की।
  • 17 अक्टूबर, 2026: कंबोडिया सरकार के आधिकारिक माध्यमों ने बातचीत और हस्ताक्षर का ब्योरा प्रकाशित किया, जबकि एर्दोगन ने फेसबुक पर करीबी सहयोग का अपना संदेश दोहराया।

तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय की बैठक संबंधी घोषणा में डोलमाबाहचे में आधिकारिक स्वागत, उसके बाद दोनों नेताओं की निजी बैठक और उनके प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत का जिक्र है। फिदान भी मौजूद थे।

इस यात्रा में सैन्य ढाँचा और कारोबारी सहयोग का समझौता ज्ञापन हुआ, साथ ही उड़ानों, निवेश और शिक्षा पर व्यापक एजेंडा तय किया गया। इसका तत्काल राजनयिक संदेश भी स्पष्ट था: कंबोडिया और तुर्किये के बीच मजबूत होते संबंधों के साथ थाई सीमा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की कोशिशें भी जारी रहनी चाहिए।

मुख्य बिंदु

  • कंबोडिया और तुर्किये ने 16 अक्टूबर, 2026 को सैन्य ढाँचा समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • हुन मानेत ने कहा कि इससे दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच व्यावहारिक सहयोग को समर्थन मिलेगा।
  • एर्दोगन ने कंबोडिया और थाईलैंड से बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के जरिए सीमा विवाद सुलझाने की अपील की।
  • तुर्किये ने कहा कि उसकी मानवीय सहायता लड़ाई से प्रभावित 3,000 से अधिक लोगों तक पहुँची है।
  • 2025 में द्विपक्षीय व्यापार करीब 400 मिलियन डॉलर रहा, जो 1 अरब डॉलर के लक्ष्य का लगभग 40% है।
  • नेताओं ने निवेश, सीधी उड़ानों, छात्रवृत्तियों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के जरिए सहयोग पर चर्चा की।
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