फुकेत वार्ता से समझौता पूरा होने के करीब
फुकेत में वार्ता के दसवें दौर के बाद यूरोपीय संघ और थाईलैंड ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के अधिकांश अध्यायों को अस्थायी रूप से अंतिम रूप दे दिया है। अब शेष काम बाजार पहुंच और संवेदनशील नीतिगत फैसलों पर केंद्रित होगा। दोनों पक्षों का लक्ष्य 2026 के अंत तक वार्ता पूरी करना है, लेकिन बाजार कितने खुले होंगे, यह अभी तय नहीं हुआ है।
विषय-सूची
- फुकेत वार्ता से समझौता पूरा होने के करीब
- अस्थायी रूप से अंतिम रूप देने का असल मतलब
- फुकेत में किन मुद्दों पर प्रगति हुई?
- बाजार पहुंच वार्ता का मुख्य मुद्दा बनी
- नौवें दौर ने कैसे जमीन तैयार की
- वार्ता का सिलसिला 2013 से जारी
- वार्ता के पीछे का व्यापारिक रिश्ता
- थाईलैंड अवसरों और बदलाव की लागत का आकलन कर रहा है
- हस्ताक्षर से पहले क्या प्रकाशित होगा?
- मुख्य बातें
हालिया प्रगति में स्वच्छता और पादप स्वच्छता उपायों, सेवाओं और निवेश तथा शुरुआती प्रावधानों पर सैद्धांतिक सहमति शामिल है। सरकारी खरीद, ऊर्जा और कच्चे माल तथा मूल-स्थान के नियमों पर भी अस्थायी सहमति बनी है, हालांकि बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे बाकी हैं। ये शर्तें अहम हैं: व्यापार को नियंत्रित करने वाले नियमों पर सहमति से यह तय नहीं होता कि कारोबारियों को हर तरह की वाणिज्यिक रियायत मिलेगी।
फुकेत दौर की अवधि को लेकर खबरों में अंतर है। यूरोपीय आयोग के निष्कर्षों का वर्णन करने वाली एक रिपोर्ट के अनुसार वार्ता 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चली। थाईलैंड की खबरों में तारीखें 28 सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 बताई गई हैं। थाई व्यापार प्रतिनिधि वीरापोंग प्राफा ने कहा कि चर्चा करीब 10 दिन चली। समाप्ति की तारीखों में इस अंतर का कारण स्पष्ट नहीं है।
यूरोपीय आयोग के समझौते के दस्तावेजों वाले पृष्ठ पर दसवें दौर की रिपोर्ट अक्टूबर 2026 के तहत सूचीबद्ध है। पृष्ठ पर रिपोर्ट के विस्तृत निष्कर्ष नहीं दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि वार्ता का उद्देश्य बाजार पहुंच के नए अवसर, व्यापार और निवेश बढ़ाना तथा सतत विकास है।
अस्थायी रूप से अंतिम रूप देने का असल मतलब
किसी अध्याय को अस्थायी रूप से अंतिम रूप देना वार्ता में प्रगति का संकेत है, पूरे समझौते के पूरा होने या लागू होने का नहीं। यह फर्क खास तौर पर तब अहम है, जब वार्ताकार किसी अध्याय के सामान्य प्रावधानों पर सहमत हों, लेकिन बाजार पहुंच की प्रतिबद्धताएं अनसुलझी रहें।
कंपनियों के लिए शेष प्रतिबद्धताएं यह तय कर सकती हैं कि किन उत्पादों पर कम शुल्क लगेगा, कौन-सी सेवाएं दी जा सकेंगी और किन सरकारी ठेकों तक पहुंच मिलेगी। जब तक ये बारीकियां तय नहीं होतीं, तब तक बड़े पैमाने पर सहमत कानूनी ढांचे को नए व्यापारिक अधिकारों का पूरा सेट नहीं माना जा सकता।
घोषित अगला कदम इसी बदलाव को दर्शाता है। वार्ता पूर्ण दौरों के बजाय विशेष प्रारूपों में जारी रहने की उम्मीद है, जहां बाजार पहुंच और बाकी मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। हालिया दौर की खबरों में इन चर्चाओं की तारीखें घोषित नहीं की गई हैं।
नतीजों का ब्यौरा देने वाली जानकारी में अध्यायों की कुल संख्या भी प्रकाशित नहीं की गई है। थाई अधिकारियों ने कहा था कि नौवें दौर तक समझौते के करीब दो-तिहाई हिस्से पर सहमति बन चुकी थी। दसवें दौर में शेष एक-तिहाई हिस्से पर चर्चा हुई, लेकिन अधिकांश अध्यायों को अस्थायी रूप से अंतिम रूप दिए जाने के बयान से यह साबित नहीं होता कि हर अनसुलझे प्रावधान पर सहमति बन गई है।
फुकेत में किन मुद्दों पर प्रगति हुई?
स्वच्छता और पादप स्वच्छता उपाय उन क्षेत्रों में शामिल थे, जिन पर सैद्धांतिक सहमति बनी। इन्हें अक्सर एसपीएस कहा जाता है। इन उपायों का संबंध खाद्य सुरक्षा तथा पशु और पौधों के स्वास्थ्य की रक्षा से है। व्यापार समझौते में इनका प्रावधान इसलिए अहम है कि शुल्क घटने पर भी कृषि और खाद्य उत्पादों को आयातक बाजार की शर्तें पूरी करनी होती हैं।
थाईलैंड की वार्ता संबंधी खबरों में कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच को उन प्रावधानों में शामिल किया गया, जिन पर साझा आधार मिला। यह प्रगति नौवें दौर के बाद हुई है, जब एसपीएस उपायों पर मतभेद अब भी बताए गए थे।
सेवाओं और निवेश के साथ शुरुआती प्रावधानों पर भी सैद्धांतिक सहमति बनी। शुरुआती प्रावधान किसी समझौते के परिचयात्मक हिस्से होते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी सेवा क्षेत्रों या निवेश गतिविधियों को बिना किसी पाबंदी के खोल दिया जाएगा। थाई अधिकारियों ने अलग से सेवाओं और निवेश तक पहुंच को बाकी वार्ता का हिस्सा बताया।
ऊर्जा और कच्चे माल, सरकारी खरीद तथा मूल-स्थान के नियमों पर भी इसी तरह की शर्तें लागू होती हैं। मूल-स्थान के नियम तय करते हैं कि किसी उत्पाद को साझेदार अर्थव्यवस्था में बना हुआ माना जाएगा या नहीं और क्या उसे तरजीही शुल्क मिल सकता है। आयातित पुर्जों का इस्तेमाल करने वाले निर्माताओं के लिए अंतिम शर्तें बेहद अहम हो सकती हैं।
फुकेत में चर्चा किए गए जटिल मुद्दों में बौद्धिक संपदा भी शामिल थी। हालांकि, नतीजों के विवरण से यह साबित नहीं होता कि बौद्धिक संपदा के पूरे अध्याय को अंतिम रूप दे दिया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कौन-से प्रावधान अब भी अनसुलझे हैं।
बाजार पहुंच वार्ता का मुख्य मुद्दा बनी
उपप्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री सुपाजे सुथुम्पुन ने कहा कि बाकी मुद्दे मुख्य रूप से बाजार पहुंच और नीतिगत विषयों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि वार्ता अपने अंतिम और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है और दोनों पक्ष संतुलित तथा पारस्परिक रूप से स्वीकार्य नतीजा चाहते हैं।
संवेदनशील आर्थिक क्षेत्रों का ध्यान रखने की जरूरत पर जोर देते हुए सुपाजे ने प्रस्तावों के आदान-प्रदान का मकसद समझाया:
श्रीमती सुपाजे ने कहा, "इसका उद्देश्य बाजार खोलना और दोनों पक्षों के लिए ठोस आर्थिक, व्यापारिक और निवेश के अवसर पैदा करना है, साथ ही संवेदनशील उत्पादों और कारोबारी क्षेत्रों का ध्यान रखना है।
बाजार पहुंच का दायरा वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क से आगे तक फैला है। बाकी चर्चाओं में सेवाएं, निवेश, सरकारी खरीद और कारोबार से जुड़े नियम शामिल हैं। उदाहरण के लिए, सरकारी खरीद में समझौते का वाणिज्यिक महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि किन खरीद संस्थाओं और ठेकों को इसमें शामिल किया गया है, न कि सिर्फ इस पर कि किसी सामान्य अध्याय पर सहमति बनी है या नहीं।
वस्तुओं के मामले में वार्ताकारों को हर उत्पाद के लिए अलग-अलग शर्तें तय करनी होंगी। वार्ता संबंधी खबरों में जिन संभावित व्यवस्थाओं का जिक्र है, उनमें तुरंत शुल्क में कटौती, चरणबद्ध कटौती, कोटा और संवेदनशील उत्पादों के लिए विशेष व्यवस्था शामिल हैं। ये वार्ता के विकल्प हैं, किसी खास थाई या यूरोपीय उत्पाद के लिए घोषित नतीजे नहीं।
वीरापोंग ने कहा कि अंतिम चरण में यह तय करने पर ध्यान होगा कि दोनों पक्ष अपने बाजार कितनी हद तक खोलेंगे। इसलिए समझौते के आर्थिक मूल्य के लिए अधूरा काम केंद्रीय महत्व रखता है, भले ही इसके बड़े हिस्से के पाठ पर प्रगति हो चुकी हो।
नौवें दौर ने कैसे जमीन तैयार की
22 से 26 जून को ब्रसेल्स में हुए वार्ता के नौवें दौर में प्रतिस्पर्धा और सब्सिडी, सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों और विवाद निपटारे के अध्यायों को पहले ही अस्थायी रूप से अंतिम रूप दिया गया था। तकनीकी व्यापार बाधाओं से जुड़े ऑटोमोटिव परिशिष्ट पर भी सहमति बनी थी।
तकनीकी व्यापार बाधाओं में उत्पाद मानकों और अनुरूपता आकलन जैसी शर्तें आती हैं। अनुरूपता आकलन वह प्रक्रिया है, जिससे साबित किया जाता है कि सामान लागू नियमों को पूरा करता है। ऑटोमोटिव परिशिष्ट में वाहनों के लिए इन मुद्दों का प्रावधान हो सकता है, लेकिन उस पर अस्थायी सहमति से अपने आप शुल्क की शर्तें तय नहीं होतीं और न ही वाहन बिक्री की हर शर्त हटती है।
ब्रसेल्स दौर में सेवाओं और निवेश, बौद्धिक संपदा, भौगोलिक संकेतकों, सरकारी खरीद, मूल-स्थान के नियमों और शुल्क उदारीकरण पर भी काम आगे बढ़ा। भौगोलिक संकेतक ऐसे नाम हैं, जो उन उत्पादों की पहचान करते हैं जिनकी गुणवत्ता या प्रतिष्ठा किसी खास जगह से जुड़ी होती है।
उस समय एसपीएस उपायों, कुछ खास उत्पादों के मूल-स्थान के नियमों तथा ऊर्जा और कच्चे माल को लेकर मतभेद बाकी थे। फुकेत में इन्हीं विषयों पर प्रगति से पता चलता है कि दसवें दौर में पहले की स्थिति से आगे बढ़ा गया, हालांकि कुछ क्षेत्रों में बाजार पहुंच संबंधी शर्तें अब भी लागू हैं।
थाईलैंड की खबरों के अनुसार नौवें दौर के अंत तक समझौते के करीब दो-तिहाई हिस्से पर सहमति बन चुकी थी। यह अनुमान वार्ता में हुई प्रगति बताता है, न कि द्विपक्षीय व्यापार के उस हिस्से को जिस पर शुल्क में सहमत कटौतियां पहले से लागू हैं।
वार्ता का सिलसिला 2013 से जारी
फुकेत की चर्चाएं एक दशक से अधिक समय पहले शुरू हुई प्रक्रिया का हिस्सा हैं। वार्ता 2013 में शुरू हुई, 2014 में थाईलैंड में सैन्य तख्तापलट के बाद रोक दी गई और 2023 में फिर शुरू हुई। आयोग की प्रकाशित सूची में सितंबर 2023 से अक्टूबर 2026 तक वार्ता के दस दौर दर्ज हैं।
- 2013: थाईलैंड और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू की।
- 2014: थाईलैंड में सैन्य तख्तापलट के बाद वार्ता रोक दी गई।
- सितंबर 2023: दोबारा शुरू हुई वार्ता का पहला दौर हुआ।
- जनवरी, जून और नवंबर 2024: दूसरा, तीसरा और चौथा दौर हुआ।
- मार्च से अप्रैल, जून और अक्टूबर 2025: पांचवें, छठे और सातवें दौर दर्ज किए गए।
- फरवरी 2026: आठवां दौर हुआ।
- 22 से 26 जून 2026: नौवां दौर ब्रसेल्स में हुआ।
- सितंबर से अक्टूबर 2026: दसवां दौर फुकेत में हुआ। इसके समापन की तारीख को लेकर खबरों में अंतर है।
- 2026 का अंत: दोनों पक्ष वार्ता पूरी करने का लक्ष्य रखते हैं।
यह सिलसिला मौजूदा लक्ष्य और समझौते के अंततः कानूनी रूप से लागू होने के बीच का फर्क समझने में मदद करता है। दिसंबर तक वार्ता पूरी होने का अर्थ यह नहीं कि समझौता उसी समय अपने आप लागू हो जाएगा। प्रकाशन, हस्ताक्षर और अनुमोदन अलग-अलग चरण हैं।
वार्ता के पीछे का व्यापारिक रिश्ता
2025 में चीन, अमेरिका और जापान के बाद यूरोपीय संघ थाईलैंड का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। द्विपक्षीय व्यापार 45 अरब अमेरिकी डॉलर बताया गया, जो 2024 के मुकाबले 3.44% अधिक था। इस मौजूदा व्यापार के आधार पर प्रस्तावित समझौता आगे बढ़ेगा।
यूरोपीय संघ को थाईलैंड का निर्यात 9.27% बढ़कर 26.5 अरब डॉलर पहुंचा, जबकि यूरोपीय संघ से आयात 3.86% घटकर 18.6 अरब डॉलर रहा। थाईलैंड का व्यापार अधिशेष 7.86 अरब डॉलर बताया गया। इस तरह साल के दौरान निर्यात में बढ़ोतरी और आयात में गिरावट विपरीत दिशाओं में रही।
प्रकाशित आंकड़ों को अलग-अलग स्तर तक पूर्णांकित किया गया है। 26.5 अरब डॉलर के निर्यात और 18.6 अरब डॉलर के आयात का कुल जोड़ 45.1 अरब डॉलर होता है, जबकि कुल व्यापार का मुख्य आंकड़ा 45 अरब डॉलर है। पूर्णांकित आयात को निर्यात से घटाने पर 7.9 अरब डॉलर मिलता है, जो बताए गए 7.86 अरब डॉलर के अधिशेष के करीब है।
इन पूर्णांकित आंकड़ों के आधार पर कुल व्यापार में निर्यात का हिस्सा करीब 59% था। यह गणना मौजूदा व्यापार संतुलन बताती है, समझौते के संभावित प्रभावों का अनुमान नहीं।
थाईलैंड के प्रमुख निर्यातों में कंप्यूटर, परिधीय उपकरण और पुर्जे; रत्न और आभूषण; एयर कंडीशनर और उनके पुर्जे; रबर उत्पाद; तथा विद्युत ट्रांसफॉर्मर और उनके पुर्जे शामिल थे। यूरोपीय संघ से प्रमुख आयात में मशीनरी और पुर्जे, चिकित्सा और दवा उत्पाद, रसायन, विद्युत मशीनरी और पुर्जे तथा वैज्ञानिक और चिकित्सा उपकरण शामिल थे।
थाईलैंड अवसरों और बदलाव की लागत का आकलन कर रहा है
सुपाजे ने कहा कि अधिकारियों को यह आकलन करना होगा कि संबंधित क्षेत्र कितने तैयार हैं और संभावित प्रभाव क्या होंगे, खासकर संवेदनशील क्षेत्रों में। इस समझौते में कई मंत्रालयों और एजेंसियों की जिम्मेदारियां और नियम शामिल हैं, इसलिए बाकी नीतिगत फैसले सिर्फ शुल्क पर मोलभाव तक सीमित नहीं हैं।
वीरापोंग ने बताया कि हालिया दौर से पहले के तीन महीनों में तैयारियों के तहत सरकारी एजेंसियों, बड़ी कंपनियों, मध्यम और छोटे कारोबारों, नागरिक समाज और शिक्षाविदों से शोध और परामर्श किया गया। उन्होंने कहा कि थाईलैंड अलग-अलग उत्पादों और सेवाओं को खोलने की सीमा पर सावधानी से विचार करेगा।
ये परामर्श सीधे तौर पर अनसुलझी वार्ता से जुड़े हैं। यूरोप में ज्यादा पहुंच चाहने वाले कारोबार व्यापक रियायतों के पक्ष में हो सकते हैं, जबकि अधिक आयात प्रतिस्पर्धा का सामना करने वाले क्षेत्रों को समायोजन के लिए समय या अलग शर्तों की जरूरत हो सकती है। अंतिम व्यवस्थाओं से पता चलेगा कि वार्ताकार इन हितों के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।
फुकेत के नतीजों के विवरण में संवेदनशील उत्पादों की सहमत सूची, शुल्क कटौती की समय-सारिणी या किसी क्षेत्र के लिए बाजार खोलने की खास प्रतिबद्धताएं सार्वजनिक नहीं की गई हैं। इसलिए किसी उद्योग के लिए निश्चित नए लाभ हासिल होने के दावे घोषित जानकारी से आगे जाएंगे।
हस्ताक्षर से पहले क्या प्रकाशित होगा?
आयोग ने सितंबर 2023, जनवरी 2024 और जुलाई 2024 में तीन चरणों में यूरोपीय संघ के पाठ संबंधी प्रस्ताव प्रकाशित किए हैं। इनमें वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा, डिजिटल व्यापार, प्रतिस्पर्धा, सतत विकास, सीमा शुल्क, नियामक मामलों और अन्य विषयों के प्रस्ताव शामिल हैं।
ये दस्तावेज वार्ता के प्रस्ताव हैं, अंतिम सहमत संधि नहीं। आयोग साफ कहता है कि ये यूरोपीय संघ के शुरुआती प्रस्तावित कानूनी पाठ हैं और वह इनमें बदलाव कर सकता है, इन्हें पूरक कर सकता है या प्रावधान हटा सकता है। जुलाई 2024 में प्रकाशित दस्तावेज मोटर वाहनों के परिशिष्ट से संबंधित था।
यह फर्क सार्वजनिक रिकॉर्ड को गलत समझने से बचाता है। यूरोपीय संघ के किसी प्रस्ताव में शामिल प्रावधान को यह नहीं माना जा सकता कि थाईलैंड ने उसे स्वीकार कर लिया है। इसी तरह, शुरुआती प्रस्ताव में अनुपस्थित प्रावधान को अंतिम समझौते से बाहर मानना भी सही नहीं होगा।
आयोग का कहना है कि वार्ता पूरी होने के बाद, हस्ताक्षर और अनुमोदन से काफी पहले, पूरे समझौते का पाठ सार्वजनिक किया जाएगा। अध्यायों को अंतिम रूप देने की घोषणाओं के बजाय अंतिम प्रतिबद्धताओं का आकलन इसी पाठ के आधार पर किया जा सकेगा।
अगला अहम पड़ाव बाकी बाजार पहुंच और नीतिगत मुद्दों पर सहमति बनाना है। 2026 का अंत वार्ता पूरी करने का लक्ष्य है, हस्ताक्षर की पुष्टि की गई तारीख या समझौता लागू होने की समय-सीमा नहीं। इस दौर की खबरों में हस्ताक्षर, अनुमोदन या लागू होने की कोई सटीक समय-सारिणी घोषित नहीं की गई है।
मुख्य बातें
- फुकेत में वार्ता के दसवें दौर के बाद अधिकांश अध्यायों को अस्थायी रूप से अंतिम रूप दिया गया।
- एसपीएस उपायों, सेवाओं और निवेश तथा शुरुआती प्रावधानों पर सैद्धांतिक सहमति बनी।
- सरकारी खरीद, ऊर्जा और कच्चे माल तथा मूल-स्थान के नियमों पर बाजार पहुंच से जुड़ी शर्तें अब भी बाकी हैं।
- खबरों के अनुसार वार्ता 2 या 6 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुई।
- बाकी वार्ता विशेष प्रारूपों में बाजार पहुंच और लंबित नीतिगत मुद्दों पर केंद्रित होगी।
- दोनों पक्षों का लक्ष्य 2026 के अंत तक वार्ता पूरी करना है।
- 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 45 अरब डॉलर बताया गया, जिसमें थाईलैंड का अधिशेष 7.86 अरब डॉलर था।
- वार्ता पूरी होने के बाद, हस्ताक्षर और अनुमोदन से पहले अंतिम पाठ प्रकाशित किया जाएगा।






