विश्व कप टीम में जगह, लेकिन विश्व कप में खेलने का मौका नहीं
युजवेंद्र चहल ने 78 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 96 विकेट लिए हैं, भारत की 2024 टी20 विश्व कप टीम में जगह बनाई और ₹18 करोड़ का आईपीएल अनुबंध हासिल किया। फिर भी लेग स्पिनर ने अब तक टी20 विश्व कप का एक भी मैच नहीं खेला है। यह कमी समझाती है कि भारतीय टीम में वापसी अब भी उनके लिए इतनी मायने क्यों रखती है।
विषय-सूची
- विश्व कप टीम में जगह, लेकिन विश्व कप में खेलने का मौका नहीं
- 2023 में भारत ने उन्हें बाहर क्यों रखा
- 2021 में बाहर होना सबसे ज्यादा क्यों खला
- रोहित और कोहली ने वापसी में कैसे मदद की
- वह टेस्ट खेलने का मौका क्यों चाहते थे
- वह इम्पैक्ट प्लेयर नियम में बदलाव क्यों चाहते हैं
- ₹18 करोड़ के अनुबंध का उनके लिए क्या मतलब है
- कोहली और डिविलियर्स ने उनकी गेंदबाजी को कैसे निखारा
- धोनी का सख्त मार्गदर्शन
- मुख्य बातें
पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा के साथ ‘बैट एंड बॉल’ पॉडकास्ट पर बातचीत में चहल ने बताया कि चयन के फैसलों, टीम संयोजन और प्रतिस्पर्धा ने उनके करियर को कैसे आकार दिया। उन्होंने टेस्ट खेलने की अधूरी ख्वाहिश, एमएस धोनी और विराट कोहली से मिले मार्गदर्शन और आईपीएल के इम्पैक्ट प्लेयर नियम से गेंदबाजी मुश्किल होने की अपनी राय पर भी बात की।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के 2024 टीम के ऐलान में, जो उसी साल 30 अप्रैल को जारी हुआ था, अमेरिका और वेस्टइंडीज में होने वाले टूर्नामेंट के लिए चुने गए 15 खिलाड़ियों में चहल का नाम था। रोहित शर्मा कप्तान थे और भारत का पहला मैच 5 जून को न्यूयॉर्क में आयरलैंड के खिलाफ तय था।
पूरे टूर्नामेंट में चहल को खेलने का मौका नहीं मिला। उनका आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच अगस्त 2023 में लॉडरहिल में वेस्टइंडीज के खिलाफ था, जबकि उनका आखिरी वनडे उसी साल जनवरी में हुआ था। उनकी बातों से समझ आता है कि कोई गेंदबाज बड़े टूर्नामेंट के लिए विचाराधीन रहने के बावजूद अंतिम एकादश में जगह पाने के लिए क्यों जूझ सकता है।
2023 में भारत ने उन्हें बाहर क्यों रखा
स्पिनर के मुताबिक, रोहित ने उन्हें 2023 वनडे विश्व कप टीम से बाहर रखने की वजह सीधे बताई थी। भारत ज्यादा बल्लेबाजी विकल्प और एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज के लिए जगह चाहता था।
इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलने की तैयारी के दौरान तत्कालीन भारतीय कप्तान के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए चहल ने कहा:
2023 में, जब मैं काउंटी खेलने गया था, तो रोहित ने मुझसे कहा था कि हम आठवें नंबर तक बल्लेबाज चाहते हैं, इसलिए हम उसी हिसाब से टीम बना रहे हैं। उन्होंने साफ बताया कि वे विश्व कप के लिए एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज भी तलाश रहे हैं। इसलिए मुझे बात स्पष्ट कर दी गई थी। विश्व कप के बाद मैंने चयन के बारे में सोचना ही छोड़ दिया,
आठवें नंबर तक बल्लेबाजी का मतलब है कि उस स्थान पर ऐसे खिलाड़ी को चुनना जो उपयोगी रन बना सके। इससे विशेषज्ञ गेंदबाजों के लिए जगह कम रह जाती है। चहल की बात बताती है कि टीम बनाने के इस फैसले का उनकी गैरमौजूदगी से क्या संबंध था।
यह फैसला यह भी दिखाता है कि चयन केवल विकेट लेने पर निर्भर नहीं करता। कप्तान को अंतिम एकादश में बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी और स्पिन के बीच संतुलन बनाना होता है और हर चुनाव किसी दूसरे खिलाड़ी के लिए उपलब्ध जगह को प्रभावित करता है। चहल के मामले में भारत के पसंदीदा संतुलन के कारण घरेलू मैदान पर होने वाले विश्व कप की टीम में उनके लिए जगह नहीं बनी।
2021 में बाहर होना सबसे ज्यादा क्यों खला
चहल ने कहा कि 2021 टी20 विश्व कप टीम में जगह न मिलना, टूर्नामेंट में शामिल होने के बावजूद खेलने का मौका न मिलने से ज्यादा तकलीफदेह था। 2022 में वे टीम का हिस्सा थे, हालांकि उन्हें कोई मैच खेलने को नहीं मिला।
भारतीय स्पिनर ने बताया कि रोहित ने उनसे कहा था कि 2022 में खेलने का मौका एक खास टीम संयोजन पर निर्भर करेगा:
2021 में मुझे ज्यादा बुरा लगा, क्योंकि मैं टीम में था ही नहीं। 2022 में कम से कम मैं टीम में तो था। कभी-कभी आपको पता होता है कि संयोजन शायद काम नहीं करेगा, इसलिए मैंने ज्यादा नहीं सोचा। लेकिन हमेशा लगता है कि कम से कम एक विश्व कप मैच तो खेलना चाहिए था। रोहित ने मुझसे कहा था कि मैं तभी खेलूंगा, जब एक खास संयोजन काम करेगा। इसलिए कम से कम मुझे स्थिति स्पष्ट थी,
उनका रिकॉर्ड इस निराशा को और खास बनाता है। 2016 में टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण के बाद से चहल ने 78 मैचों में 96 विकेट लिए हैं, यानी हर मैच में औसतन करीब 1.23 विकेट। इसके बावजूद 2021, 2022 और 2024 के टी20 विश्व कप में उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। वे 2026 के संस्करण में भी शामिल नहीं थे।
रोहित और कोहली ने वापसी में कैसे मदद की
चहल ने 2024 टी20 विश्व कप टीम में वापसी का श्रेय रोहित और विराट कोहली को दिया। उन्होंने कहा कि दोनों वरिष्ठ खिलाड़ियों ने उनके चयन में अहम भूमिका निभाई थी और उस आईपीएल सत्र के दौरान रोहित ने उनका समर्थन किया था।
चहल ने बताया कि 2024 आईपीएल में उन्होंने चयन का अतिरिक्त दबाव लिए बिना खेलने की कोशिश की:
2024 आईपीएल में मैं सिर्फ खेल का आनंद लेने आया था और खुद पर अतिरिक्त दबाव नहीं डाला। उस सत्र में मैंने अच्छा प्रदर्शन किया और रोहित ने मुझसे कहा कि वह मुझे टीम में चाहते हैं, चयन बैठक में देखते हैं,
बीसीसीआई की अंतिम टीम में चहल के साथ स्पिन विकल्पों में रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल और कुलदीप यादव भी शामिल थे। चयन के साथ वे भारत की टूर्नामेंट योजनाओं में लौटे, लेकिन स्पिन के कई विकल्प होने का मतलब था कि टीम घोषित होने के बाद भी खेलने की जगह के लिए प्रतिस्पर्धा जारी रही।
उनके हालिया अंतरराष्ट्रीय करियर के अहम पड़ाव दिखाते हैं कि खेलने के मौके किस तरह कम होते गए:
- 2021: टी20 विश्व कप के लिए चहल का चयन नहीं हुआ।
- 2022: वे टी20 विश्व कप टीम में शामिल हुए, लेकिन खेले नहीं।
- जनवरी 2023: उन्होंने अपना आखिरी वनडे खेला।
- अगस्त 2023: उन्होंने लॉडरहिल में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला।
- 30 अप्रैल 2024: बीसीसीआई ने उन्हें टी20 विश्व कप टीम में शामिल किया; टूर्नामेंट के दौरान उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला।
- अगस्त 2026: 49 मैचों में 148 विकेट लेने के बाद उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लिया।
वह टेस्ट खेलने का मौका क्यों चाहते थे
चहल ने इस बात को खारिज किया कि सीमित ओवरों के क्रिकेट का विशेषज्ञ होना हमेशा उनकी अपनी पसंद थी। उन्होंने कहा कि दूसरे लोगों ने उन्हें यह पहचान दी थी, जबकि वे टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते थे।
उन्होंने 2017 से 2019 के दौर को टेस्ट टीम में जगह बनाने का अपना सबसे अच्छा मौका बताया। रविचंद्रन अश्विन, जडेजा और कुलदीप भी जगह के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, जिससे टीम में प्रवेश कठिन था, जबकि चहल को लगता था कि वे तैयार हैं।
टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों को टी20 मैच के चार ओवरों से कहीं ज्यादा लंबे समय तक गेंदबाजी करनी पड़ती है। चहल ने कहा कि उन्हें भरोसा था कि वे 35 या 40 ओवर गेंदबाजी कर सकते हैं, हालांकि दूसरे लोग उनकी शारीरिक बनावट को लेकर आशंकित थे। उन्हें इस बात की निराशा थी कि उनके शरीर को लेकर बनी धारणाएं चयन की पहले से ही कठिन प्रतिस्पर्धा के साथ जुड़ी हुई लगती थीं।
चहल ने प्रथम श्रेणी करियर में 49 मैचों में 148 विकेट लिए। इसमें इंग्लैंड की काउंटी क्रिकेट में नॉर्थम्पटनशायर की ओर से खेले गए मैच भी शामिल हैं। उनका औसत लगभग हर मैच में तीन विकेट का रहा। अब वे इस प्रारूप से दूर हो गए हैं। उनका कहना है कि इस फैसले से उन्हें उन प्रारूपों पर ज्यादा मेहनत करने का मौका मिलेगा जिनमें वे अब भी भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं।
वह इम्पैक्ट प्लेयर नियम में बदलाव क्यों चाहते हैं
गेंदबाजों के अवसरों को लेकर चहल की चिंताएं आईपीएल तक फैली हैं। उन्होंने इम्पैक्ट प्लेयर नियम की आलोचना की, जिसके तहत टीमें मैच के दौरान एक स्थानापन्न खिलाड़ी को शामिल कर सकती हैं और विशेषज्ञ बल्लेबाजों या गेंदबाजों को इस्तेमाल करने में उन्हें ज्यादा लचीलापन मिलता है।
उनका तर्क था कि इस नियम ने संतुलन को बल्लेबाजी की ओर बहुत ज्यादा झुका दिया है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब टीमें पावरप्ले के छह ओवरों में कम से कम 70 रन की उम्मीद करती हैं। इस दौरान बाउंड्री के पास क्षेत्ररक्षकों पर पाबंदियों से रन बनाने के ज्यादा मौके मिलते हैं।
छह ओवर में 70 रन बनाने के लिए प्रति ओवर करीब 11.7 रन की गति चाहिए। चहल ने इस उम्मीद का जिक्र यह बताने के लिए किया कि पारी की शुरुआत से ही गेंदबाजों पर कितना दबाव रहता है, जब तक कि उन्हें मुकाबले में अपनी लय पाने का ज्यादा समय नहीं मिला होता।
उनका पसंदीदा समाधान नियम को हटाना था। उन्होंने इसके विकल्प के तौर पर कुछ बदलाव भी सुझाए: एक अतिरिक्त क्षेत्ररक्षक को अनुमति देना, बाउंड्री लंबी करना या पिच पर घास ज्यादा छोड़ना। इन बदलावों से मुकाबले के अलग-अलग पहलुओं पर असर पड़ेगा। कप्तानों को क्षेत्ररक्षण के लिए ज्यादा कवर मिलेगा, बाउंड्री पार करना मुश्किल होगा या पिच से गेंदबाजों को ज्यादा मदद मिलेगी।
₹18 करोड़ के अनुबंध का उनके लिए क्या मतलब है
पंजाब किंग्स ने 2025 आईपीएल सत्र की नीलामी में चहल को ₹18 करोड़ का अनुबंध दिया। उन्होंने कहा कि वे इस रकम के हकदार थे, क्योंकि इससे पहले राजस्थान रॉयल्स के साथ उन्हें ₹6.5 करोड़ मिलते थे।
इस बढ़ोतरी से उनकी रकम ₹11.5 करोड़ बढ़ी और अनुबंध का मूल्य पहले से करीब 2.77 गुना हो गया। चहल ने यह सवाल भी उठाया कि नीलामी में इतनी ही चर्चा बटोरने वाले विदेशी खिलाड़ियों की तुलना में बड़े अनुबंध पाने वाले भारतीय खिलाड़ियों की ज्यादा पड़ताल क्यों होती है।
उनकी टिप्पणियां क्रिकेट करियर को मापने के दो अलग-अलग तरीकों को जोड़ती हैं। आईपीएल की कोई फ्रेंचाइजी किसी खिलाड़ी के कौशल का ऊंचा वित्तीय मूल्य तय कर सकती है, जबकि राष्ट्रीय टीम ऐसा संयोजन चुन सकती है जिसमें उस खिलाड़ी के लिए जगह न हो।
चहल ने कहा कि भारत की जर्सी दोबारा पहनने से उन्हें पैसे से ज्यादा संतुष्टि मिलेगी। तीन साल से अधिक समय तक टीम में खेलने का मौका न मिलने के बावजूद उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने की उनकी महत्वाकांक्षा मजबूत है। संभावित वापसी की कोई तारीख तय नहीं है।
कोहली और डिविलियर्स ने उनकी गेंदबाजी को कैसे निखारा
चहल ने 2015 में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ आईपीएल मैच को याद किया, जब सुरेश रैना ने उनकी लगातार तीन गेंदों पर छक्के लगाए थे। कोहली ने उन्हें अपने तरीके पर भरोसा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया और चहल ने बताया कि बाद में उन्होंने रैना को आउट किया।
लेग स्पिनर के लिए इस तरह का समर्थन मायने रखता है, क्योंकि विकेट लेने की कोशिश से बल्लेबाज को रन बनाने का मौका भी मिल सकता है। चहल ने इस घटना को महंगे ओवर के बाद भी अपनी रणनीति पर टिके रहने की सीख के तौर पर याद किया।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के नेट्स में एबी डिविलियर्स ने उन्हें एक अलग तरह की सीख दी। चहल ने कहा कि उन्हें डिविलियर्स को गेंदबाजी करने से फायदा हुआ, क्योंकि वह पारंपरिक बल्लेबाजी शैली अपनाते थे और उपयोगी प्रतिक्रिया देते थे।
इन दोनों अनुभवों के मकसद अलग थे। मैच के दबाव में कोहली ने चहल का साथ दिया, जबकि डिविलियर्स ने अभ्यास के जरिए उन्हें सीखने में मदद की। दोनों यादें दिखाती हैं कि वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ बातचीत ने उनके कौशल को निखारने में कैसी भूमिका निभाई।
धोनी का सख्त मार्गदर्शन
एमएस धोनी का भी चहल पर गहरा असर पड़ा। इनमें 2017 में बेंगलुरु में इंग्लैंड के खिलाफ छह विकेट लेने वाला उनका प्रदर्शन भी शामिल था। चहल ने याद किया कि धोनी ने उन्हें डांटा था और वे सुन्न पड़ गए थे। बाद में रैना ने उन्हें भरोसा दिलाया।
यह याद इसलिए खास है, क्योंकि यह एक सफल गेंदबाजी प्रदर्शन के दौरान की है। विकेट लेने के बावजूद चहल को अनुभवी विकेटकीपर से सख्त प्रतिक्रिया मिल रही थी, जो सीधे स्टंप के पीछे खड़े होकर खेल देख रहे थे।
चहल ने कहा कि धोनी ने उनके और कुलदीप, दोनों के मार्गदर्शन में अहम भूमिका निभाई। विकेटकीपर गेंद की दिशा और बल्लेबाज की प्रतिक्रिया को करीब से देखता है, इसलिए मैच के दौरान स्पिनर को मार्गदर्शन देने के लिए उसकी स्थिति उपयोगी होती है।
धोनी, कोहली, रोहित और डिविलियर्स की बातों में चहल ने स्पष्ट संवाद के महत्व पर जोर दिया। प्रोत्साहन से उन्हें लगातार कोशिश करते रहने में मदद मिली, उपयोगी प्रतिक्रिया से सुधार करने में और सीधे समझाने से चयन के कठिन फैसलों को समझना आसान हुआ। उनकी तात्कालिक महत्वाकांक्षा इन अनुभवों से विकसित कौशल को भारत के लिए एक और मौके में बदलना है।
मुख्य बातें
- चहल ने कहा कि रोहित ने समझाया था कि भारत की 2023 वनडे विश्व कप योजनाओं में आठवें नंबर तक बल्लेबाजी और एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज की जरूरत थी।
- बीसीसीआई ने उन्हें 2024 टी20 विश्व कप के लिए चुना, लेकिन वे कोई मैच नहीं खेले।
- उन्होंने 78 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 96 विकेट लिए हैं और आखिरी बार अगस्त 2023 में भारत के लिए खेले थे।
- उन्होंने 49 मैचों में 148 विकेट लेने के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की महत्वाकांक्षा बरकरार रखी।
- चहल चाहते हैं कि आईपीएल का इम्पैक्ट प्लेयर नियम हटाया जाए या ऐसे बदलावों से संतुलित किया जाए जो गेंदबाजों को ज्यादा मदद दें।
- राजस्थान रॉयल्स के साथ ₹6.5 करोड़ के मुकाबले पंजाब किंग्स के साथ उनका अनुबंध बढ़कर ₹18 करोड़ हो गया, लेकिन उन्होंने कहा कि भारत में वापसी पैसे से ज्यादा मायने रखती है।






