पांच विकेट लेकर वापसी, पैर में अब भी लगे हैं स्क्रू
करीब दो साल बाद रणजी ट्रॉफी में लौटे रोहित शर्मा ने 21.2 ओवर में 5/36 के आंकड़े दर्ज किए। उनके प्रदर्शन की बदौलत गत चैंपियन जम्मू-कश्मीर ने श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में मध्य प्रदेश को 196 रन पर समेट दिया। इन आंकड़ों के पीछे एचिलीज़ टेंडन के फटने, एड़ी की हड्डी टूटने और उसी जगह पर फिर लगी चोट से उबरने की कहानी थी। 32 वर्षीय तेज गेंदबाज के पैर में अब भी स्क्रू लगे हैं, जो उनकी गेंदबाजी की लय से पड़ने वाले दबाव को सहता है।
विषय-सूची
- पांच विकेट लेकर वापसी, पैर में अब भी लगे हैं स्क्रू
- ऐसी चोट जिससे एक से अधिक बार उबरना पड़ा
- खेलने के इंतजार का मानसिक दबाव
- मैच की पूर्व संध्या पर एक और चोट
- सुनील कुमार ने दबाव को विकेटों में बदला
- शुभम शर्मा ने मध्य प्रदेश की पारी को संभाले रखा
- आखिरी विकेट से मुकाबला खुला रहा
- रोहित के करियर में इस वापसी का स्थान
- रणजी के व्यस्त शुरुआती दौर में निजी उपलब्धि
- प्रमुख बातें
रविवार, 11 अक्टूबर को उनके प्रदर्शन ने 2026-27 ग्रुप ए अभियान में जम्मू-कश्मीर को मजबूत शुरुआत दिलाई। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सुनील कुमार ने 4/69 का योगदान दिया, जबकि औकीब नबी ने 1/42 विकेट लिया। रोहित और सुनील ने मिलकर मध्य प्रदेश के 10 में से नौ विकेट लिए।
मेहमान टीम को कप्तान शुभम शर्मा ने संभाला, जिन्होंने 174 गेंदों में 79 रन बनाए। खेल खत्म होने से पहले उन्होंने पलटवार भी किया: दिन की आखिरी से एक पहले गेंद पर आवेश खान ने शुभम खजूरिया को आउट कर दिया। इससे जम्मू-कश्मीर का स्कोर 3/1 हो गया और टीम अब भी 193 रन पीछे थी।
पूर्व भारतीय कप्तान के समान नाम वाले रोहित के लिए यह दिन लंबी गैरमौजूदगी के बाद प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटने का था। साथ ही, यह टीम के लिए उनका तत्काल योगदान भी था, जो अपने पहले रणजी ट्रॉफी खिताब का बचाव शुरू कर रही थी।
ऐसी चोट जिससे एक से अधिक बार उबरना पड़ा
रोहित की गैरमौजूदगी एचिलीज़ टेंडन के फटने और एड़ी की हड्डी टूटने के बाद शुरू हुई। एचिलीज़ टेंडन पिंडली की मांसपेशियों को एड़ी से जोड़ता है और पैर को जमीन से धकेलने में मदद करता है। तेज गेंदबाज को दौड़ना, उछलना और बार-बार जमीन पर उतरना पड़ता है, इसलिए इस हिस्से की चोट खेल के लिए जरूरी बुनियादी गतिविधियों को प्रभावित करती है।
ठीक होकर क्रिकेट में लौटने के बाद रोहित को उसी जगह फिर चोट लगी। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक पुनर्वास से गुजरना पड़ा। इस मैच से पहले उनका आखिरी रणजी ट्रॉफी मुकाबला अक्टूबर 2024 में सर्विसेज के खिलाफ था, जिसमें वह कोई विकेट नहीं ले पाए थे।
मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनकी सर्जरी हुई। सर्जन के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज ने बताया कि वह क्रिकेट को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाए रखने के लिए कितने दृढ़ थे।
मैंने सर्जन से कहा, 'सर, मुझे फिर खेलना है। मेरे पैर के साथ जो करना हो कीजिए, लेकिन मैं क्रिकेट में लौटना चाहता हूं।'
श्रीनगर में लिए गए पांच विकेट ने उस इरादे को ठोस नतीजे में बदल दिया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि वापसी के पीछे चल रही शारीरिक मेहनत खत्म हो गई थी। पुनर्वास अब भी उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा है।
खेलने के इंतजार का मानसिक दबाव
रोहित 2011 से राज्य स्तर पर क्रिकेट खेल रहे हैं। प्रतिस्पर्धा में हिस्सा न ले पाने से कई वर्षों से बनी दिनचर्या बाधित हुई। उन्होंने बताया कि शरीर के तैयार होने से पहले ही लौटने की इच्छा से पैदा हुई निराशा से जूझना पड़ा।
ठीक होने की प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए रोहित ने कहा कि मानसिक चुनौती, शारीरिक चुनौती से बड़ी थी।
यह शारीरिक से ज्यादा मानसिक है। आप खेलना चाहते हैं, लेकिन आपका शरीर इसकी इजाजत नहीं देता। यह चुनौतीपूर्ण होता है,
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन ने पुनर्वास के दौरान उन्हें टीम के साथ रखा। इससे मैदान पर न उतर पाने के बावजूद वह साथियों और ड्रेसिंग रूम से जुड़े रहे। उन्होंने इस दौरान अपनी फिटनेस और गेंदबाजी पर भी काम किया।
प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहने के दौरान उन्हें जम्मू में अपनी पत्नी, माता-पिता और मामा के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका मिला। उस समय छह महीने की उनकी बेटी भी खुशी का एक और स्रोत थी। रोहित ने इस विराम को ऐसे पारिवारिक अवसरों में शामिल होने का मौका बताया, जिनसे क्रिकेट के सीजन के दौरान अक्सर दूर रहना पड़ता।
उनकी कहानी इस वापसी को स्कोरकार्ड से आगे का अर्थ देती है: उन्हें ठीक होने की अनिश्चितता और राज्य के लिए खेलने की जानी-पहचानी लय खोने, दोनों से जूझना पड़ा।
मैच की पूर्व संध्या पर एक और चोट
मध्य प्रदेश के खिलाफ मुकाबले से ठीक पहले एक और दर्दनाक घटना ने उनकी वापसी को मुश्किल बना दिया। मैच की पूर्व संध्या पर नेट्स में बल्लेबाजी करते समय उमरान मलिक की एक गेंद रोहित को उस जगह लगी, जहां उनकी सर्जरी हुई थी।
इस चोट की गंभीरता के बारे में जानकारी नहीं दी गई। इसके बावजूद रोहित अगले दिन खेले और 21.2 ओवर पूरे किए, यानी 128 वैध गेंदें फेंकीं। हर ओवर में सर्जरी से ठीक किए गए पैर पर बार-बार दबाव पड़ा।
अपने शरीर पर पड़ रहे लगातार दबाव के बारे में बताते हुए रोहित ने कहा कि स्क्रू अब भी लगे हैं और ठीक होने की प्रक्रिया के लिए काम जारी रखना जरूरी है।
मेरे उतरने वाले पैर में अब भी स्क्रू लगे हैं। टखने के पास की जो हड्डी टूटी थी, उसे स्क्रू से ठीक किया गया है। गेंदबाजी करते समय मेरे उतरने वाले पैर पर दबाव पड़ता है, इसलिए पुनर्वास और रोजाना का अभ्यास अब भी जरूरी है। यह इस पेशे का हिस्सा है,
उनके गेंदबाजी के आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने उस दिन क्या हासिल किया, लेकिन उनसे यह साबित नहीं होता कि चोट को लेकर चिंताएं खत्म हो गई हैं। आगे की किसी चिकित्सकीय जांच या पुनर्वास का काम कम करने की समयसीमा की जानकारी नहीं दी गई।
सुनील कुमार ने दबाव को विकेटों में बदला
टॉस जीतकर जम्मू-कश्मीर ने गेंदबाजी चुनी। सुनील कुमार ने मध्य प्रदेश के सलामी बल्लेबाजों को परेशान किया और फिर यश दुबे को आउट किया। इसके बाद रोहित ने भी दबाव बनाया और मेहमान टीम को लगातार लय हासिल नहीं करने दी।
पारी को 200 रन से नीचे रोकने में सुनील के चार विकेट अहम रहे। उनके पास पांच विकेट लेने का मौका था, लेकिन शुभम शर्मा का तेज रिटर्न कैच उनसे छूट गया। बाद में उन्होंने आर्यन पांडे को आउट किया और अगली ही गेंद पर आवेश खान को चलता कर निचले क्रम को अंतिम सत्र में झटका दिया।
रोहित ने लगभग 1.69 रन प्रति ओवर खर्च कर 5/36 के आंकड़े दर्ज किए। विकेट लेने और रन रोकने के इस मेल ने जम्मू-कश्मीर को नियंत्रण बनाए रखने में मदद की, भले ही मध्य प्रदेश ने साझेदारियां कीं। सुनील ने 4/69 के साथ पारी खत्म की, जबकि लय हासिल करने में जूझ रहे नबी ने आखिरकार बचा हुआ विकेट लिया।
चैंपियन के रूप में जम्मू-कश्मीर के पहले मैच के लिए विकेटों का यह बंटवारा अहम है। जिस दिन नबी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से नीचे रहे, उस दिन दो अन्य तेज गेंदबाजों ने लगभग सभी विकेट लिए। रोहित की वापसी ने उस गेंदबाजी आक्रमण में एक उपयोगी विकल्प जोड़ा, जिसमें जगह के लिए पहले से ही कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
शुभम शर्मा ने मध्य प्रदेश की पारी को संभाले रखा
मध्य प्रदेश ने तीन पदार्पण करने वाले खिलाड़ियों को उतारा, जिससे अनुभवी बल्लेबाजों पर खास जिम्मेदारी आ गई। कप्तान शुभम शर्मा ने धैर्य से खेलते हुए आठ चौकों की मदद से 79 रन बनाए। उनका स्कोर टीम के कुल 196 रनों का लगभग 40.3 प्रतिशत था।
उन्होंने पदार्पण कर रहे चंचल राठौर के साथ चौथे विकेट के लिए 65 रन जोड़े, फिर आर्यन पांडे के साथ सातवें विकेट के लिए 51 रन की साझेदारी की। इन दोनों साझेदारियों में 116 रन बने, जो मध्य प्रदेश की पारी के कुल स्कोर का लगभग 59.2 प्रतिशत था।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि मेहमान टीम का काफी प्रतिरोध अलग-अलग चरणों में साझेदारियां बनाने की कप्तान की क्षमता पर निर्भर था। शुरुआती विकेट गिरने के बाद भी पांडे के साथ उनकी साझेदारी ने मध्य प्रदेश को ज्यादा प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचने का रास्ता दिया।
जम्मू-कश्मीर ने अंतिम सत्र में यह रास्ता बंद कर दिया। मध्य प्रदेश ने आखिरी चार विकेट 34 रन पर गंवा दिए। सुनील के लगातार दो विकेटों ने पारी को खत्म करने में मदद की। शुभम के योगदान से टीम का स्कोर इससे कम नहीं रहा, लेकिन वह मेहमान टीम को 196 से आगे नहीं ले जा सके।
आखिरी विकेट से मुकाबला खुला रहा
दिन का खेल खत्म होने तक जम्मू-कश्मीर की जवाबी पारी पूरी तरह सहज नहीं थी। आवेश खान ने आखिरी से दूसरी गेंद पर सलामी बल्लेबाज शुभम खजूरिया को एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। इससे घरेलू टीम का स्कोर 3/1 हो गया।
एलबीडब्ल्यू तब दिया जाता है जब गेंद बल्लेबाज के शरीर से टकराती है और अंपायर नियमों के तहत गेंद की दिशा और टकराने की जगह को देखते हुए मानता है कि वह वरना स्टंप पर लगती। यहां इस फैसले से खेल खत्म होने से ठीक पहले मध्य प्रदेश को सफलता मिली।
जम्मू-कश्मीर की गेंदबाजी ने उसे अच्छी स्थिति में पहुंचा दिया था, लेकिन उसकी बल्लेबाजी की शुरुआत ही हुई थी। पहली पारी में मध्य प्रदेश के स्कोर की बराबरी करने के लिए उसे 193 रन और बनाने थे, जबकि उसके नौ विकेट बाकी थे।
यह फर्क अहम है: किसी टीम को कम स्कोर पर आउट करने से मौका मिलता है, मैच का फैसला नहीं होता। पहले दिन के खेल की खबरों में नतीजे, बाद की पारी के स्कोर या आगे के खेल के पुष्ट कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी।
रोहित के करियर में इस वापसी का स्थान
मध्य प्रदेश का सामना करने से पहले रोहित 22 प्रथम श्रेणी मैच खेल चुके थे और 34.66 के औसत से 39 विकेट ले चुके थे। श्रीनगर में पांच विकेट लेने के साथ उनके करियर में कुल विकेटों की संख्या 44 हो गई। उन्होंने आठ लिस्ट ए मैच और पांच टी20 मैच भी खेले थे। इन प्रारूपों में उन्होंने कुल आठ विकेट लिए थे और सभी लिस्ट ए क्रिकेट में आए थे।
रिपोर्टों में इस बात पर अंतर है कि श्रीनगर का प्रदर्शन उनका पहला या दूसरा पांच विकेट का प्रदर्शन था। उनके करियर और मैच के विस्तृत ब्योरों में इसे प्रथम श्रेणी क्रिकेट का दूसरा पांच विकेट का प्रदर्शन बताया गया है। शुरुआती दिन के मैचों की एक व्यापक समीक्षा इसे उनका पहला ऐसा प्रदर्शन कहती है। मैच के दर्ज आंकड़े, 5/36, एक जैसे हैं।
टीम में लौटने की उनकी हालिया यात्रा के तीन अहम पड़ाव रहे:
- अक्टूबर 2024: रोहित सर्विसेज के खिलाफ खेले और गैरमौजूदगी से पहले अपने आखिरी रणजी ट्रॉफी मैच में कोई विकेट नहीं लिया।
- अक्टूबर 2026 की शुरुआत: उन्हें जम्मू-कश्मीर की ईरानी कप टीम में चुना गया, लेकिन वह अंतिम एकादश में जगह नहीं बना पाए। श्रीनगर में रेस्ट ऑफ इंडिया ने 167 रन से जीत दर्ज की।
- 11 अक्टूबर, 2026: मध्य प्रदेश के खिलाफ लौटे और पहले दिन पांच विकेट लिए।
ईरानी कप टीम में चयन ने उनकी वापसी की उम्मीद जगाई थी। रणजी के शुरुआती मैच ने उन्हें मुकाबले में अपना योगदान दिखाने का मौका दिया।
रणजी के व्यस्त शुरुआती दौर में निजी उपलब्धि
जिस दिन रोहित ने प्रदर्शन किया, उसी दिन अन्य जगहों पर कई स्थापित खिलाड़ियों और उभरते बल्लेबाजों ने भी उल्लेखनीय योगदान दिए। कल्याणी में दिल्ली के खिलाफ बंगाल के लिए मोहम्मद शमी ने 17.3 ओवर में 4/30 विकेट लिए और दिल्ली को 240 रन पर समेटने में मदद की। उनके स्पेल में नौ मेडन ओवर थे, यानी ऐसे ओवर जिनमें गेंदबाज के खाते में कोई रन नहीं जुड़ा।
ग्रुप ए में अक्षय वाडकर और यश राठौड़ ने शतक जड़े। उनकी मदद से विदर्भ ने 54/5 से वापसी करते हुए पुडुचेरी के खिलाफ 5 विकेट पर 300 रन बनाए। कर्नाटक के कप्तान रविचंद्रन स्मरण ने आंध्र के खिलाफ 218 गेंदों में 126 रन बनाए। उनकी टीम का स्कोर एक समय 22/4 था और उनके योगदान से कर्नाटक 274 रन तक पहुंचा।
इन प्रदर्शनों के बीच श्रीनगर का स्पेल उस शुरुआती दौर का हिस्सा बना, जिसमें गेंदबाजों को सफलता मिली और बल्लेबाजी करने वाली टीमों ने वापसी की। रोहित के प्रदर्शन की खासियत यह थी कि उनके योगदान के पीछे चोट के कारण लंबी गैरमौजूदगी थी और गत चैंपियन को इसका तत्काल फायदा मिला।
उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका भी बदला है। अभ्यास के बारे में बताते हुए जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज ने कहा कि अब उनका लक्ष्य मुकाबले में लगने वाली मेहनत को अभ्यास में दोहराना होता है।
अब जब भी मैं अभ्यास करता हूं, तो मैच में जितनी तीव्रता बनाए रखूंगा, उसी तीव्रता से गेंदबाजी करने की कोशिश करता हूं,
जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाजी आक्रमण में जगह के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। हालांकि, पहले दिन रोहित ने अपना योगदान साफ तौर पर दिया: पांच विकेट, लगातार नियंत्रण और उस प्रारूप में सफल वापसी जिसमें वह करीब दो साल से नहीं खेले थे।
प्रमुख बातें
- जम्मू-कश्मीर के लिए रणजी ट्रॉफी में लौटे रोहित शर्मा ने 21.2 ओवर में 5/36 के आंकड़े दर्ज किए।
- मध्य प्रदेश 196 रन पर आउट हुआ। सुनील कुमार ने 4/69 और औकीब नबी ने 1/42 विकेट लिए।
- रोहित की वापसी एचिलीज़ टेंडन के फटने, एड़ी की हड्डी टूटने, सर्जरी और उसी जगह पर फिर लगी चोट के बाद हुई।
- मध्य प्रदेश के कप्तान शुभम शर्मा ने 174 गेंदों में 79 रन बनाए और 65 तथा 51 रन की साझेदारियां कीं।
- आवेश खान के शुभम खजूरिया को आउट करने के बाद पहले दिन जम्मू-कश्मीर का स्कोर 3/1 था।
- करियर के विस्तृत ब्योरों में रोहित के इस प्रदर्शन को प्रथम श्रेणी क्रिकेट का दूसरा पांच विकेट का प्रदर्शन बताया गया है, हालांकि एक समीक्षा इसे उनका पहला बताती है।






