विश्व कप जीत के बाद हरमनप्रीत कौर के कप्तानी छोड़ने पर स्मृति मंधाना बनीं भारत की कप्तान

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Smriti Mandhana Takes Over India Captaincy as Harmanpreet Kaur Steps Down After World Cup Triumph

स्वर्ण पदक और विश्व खिताब के बाद नेतृत्व में बदलाव

हरमनप्रीत कौर के 6 अक्टूबर, 2026 को पद छोड़ने के बाद स्मृति मंधाना को भारत की महिला क्रिकेट टीम का तीनों अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में कप्तान नियुक्त किया गया है। यह बदलाव 5 अक्टूबर को गुवाहाटी में हुई समीक्षा बैठक के बाद हुआ और हरमनप्रीत के भारत को पहला महिला क्रिकेट विश्व कप खिताब दिलाने के एक साल से भी कम समय बाद आया है।

विषय-सूची
  1. स्वर्ण पदक और विश्व खिताब के बाद नेतृत्व में बदलाव
  2. गुवाहाटी की समीक्षा बैठक में क्या हुआ?
  3. हाल के खिताबों से बहस क्यों नहीं थमी
  4. मंधाना के पास अनुभव और मजबूत बल्लेबाजी रिकॉर्ड
  5. मोगा से करियर बदल देने वाली पारी तक
  6. कठिन फैसलों और करीबी हार से गढ़ी कप्तानी
  7. विश्व कप की ऐतिहासिक जीत और आखिरी स्वर्ण
  8. बदलाव को परिभाषित करने वाली तारीखें
  9. हरमनप्रीत और अगले अभियान के लिए क्या बदलेगा?
  10. मुख्य बातें

37 वर्षीय हरमनप्रीत का कप्तानी रिकॉर्ड पांच टेस्ट, 51 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (वनडे) और 155 ट्वेंटी20 अंतरराष्ट्रीय (टी20आई) मैचों का है। उनके कार्यकाल के अंतिम अभियान में भारत ने जापान के निसिन में लगातार दूसरा एशियाई खेल स्वर्ण पदक जीता, जहां फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराया। नेतृत्व में बदलाव से पहले भारत ने 2026 महिला एशिया कप भी जीता था।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की 6 अक्टूबर को प्रकाशित कप्तानी की घोषणा के मुताबिक, मंधाना तीनों प्रारूपों में भारत की अगुआई करेंगी। 30 वर्षीय सलामी बल्लेबाज इससे पहले राष्ट्रीय टीम की 18 टी20आई और चार वनडे में कप्तानी कर चुकी हैं, जिससे उपकप्तान की अपनी लंबे समय से चली आ रही भूमिका से आगे उन्हें नेतृत्व का अनुभव मिला है।

यह नेतृत्व से विदाई है, संन्यास की घोषणा नहीं। हरमनप्रीत खेलना जारी रखना चाहती हैं, इसलिए यह संभव है कि टीम छोड़ने वाली कप्तान अपनी उत्तराधिकारी की अगुआई वाली टीम का हिस्सा बनी रहें।

हरमनप्रीत ने इंस्टाग्राम पोस्ट में इस फैसले के बारे में बताया। उन्होंने इसे अपने क्रिकेट करियर का अंत नहीं, बल्कि एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी से मुक्ति के रूप में पेश किया।

मुझे लगता है कि मैंने अपना कर्तव्य निभा दिया है। मैंने इस टीम को अपना सब कुछ दिया।

इस नियुक्ति के साथ दो अलग-अलग हकीकतें सामने आती हैं: भारत ने हाल में बड़े खिताब जीते हैं, लेकिन टी20 विश्व कप में लगातार शुरुआती दौर से बाहर होने और हरमनप्रीत के घटते बल्लेबाजी प्रदर्शन के कारण बदलाव का दबाव बढ़ा था।

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गुवाहाटी की समीक्षा बैठक में क्या हुआ?

5 अक्टूबर की बैठक में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव देवजीत सैकिया, मुख्य कोच अमोल मजूमदार, हरमनप्रीत और मंधाना शामिल हुए। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने भी जून के बाद टीम के प्रदर्शन और आगामी टूर्नामेंटों की तैयारियों पर चर्चा की। 6 अक्टूबर को एक और बैठक होने की खबर आई, जिसके बाद बोर्ड ने उसी शाम मंधाना की नियुक्ति की घोषणा की।

रिपोर्टों में इस बात पर मतभेद है कि क्या हरमनप्रीत कप्तानी की कुछ जिम्मेदारी अपने पास रख सकती थीं। एक खबर के अनुसार, वह टी20 कप्तानी छोड़ने को तैयार थीं, लेकिन वनडे और टेस्ट में नेतृत्व जारी रखने की उम्मीद कर रही थीं। इसके बाद बोर्ड ने तीनों प्रारूपों के लिए मंधाना को चुना। दूसरी खबर के मुताबिक, उन्हें वनडे कप्तान बने रहने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उन्होंने सभी प्रारूपों से पद छोड़ने का फैसला किया।

ये खबरें एक ही नतीजे तक पहुंचने के अलग-अलग रास्ते बताती हैं। चर्चाओं के दौरान दिए गए विकल्पों के किसी एक सर्वसम्मत विवरण की पुष्टि इनमें से कोई नहीं करती। पुष्टि की गई बात यह है कि टेस्ट, वनडे और टी20आई में मंधाना उनकी उत्तराधिकारी होंगी।

खबरों के मुताबिक, अमिता शर्मा की अध्यक्षता वाली चयन समिति इस बदलाव पर बंटी हुई थी। हरमनप्रीत ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में भारत की अगुआई करने की इच्छा भी जताई थी। इसलिए उनका जाना अगले द्विपक्षीय दौरे से कहीं आगे तक की नेतृत्व योजनाओं को बदलता है।

हाल के खिताबों से बहस क्यों नहीं थमी

जून 2026 में इंग्लैंड में हुए टी20 विश्व कप में भारत का लगातार दूसरी बार ग्रुप चरण से बाहर होना जांच-पड़ताल का प्रमुख कारण था। टीम 2024 में संयुक्त अरब अमीरात में हुए टूर्नामेंट के नॉकआउट दौर में भी नहीं पहुंची थी।

हरमनप्रीत की बल्लेबाजी ने भी चिंता बढ़ाई। उन्होंने 2026 एशिया कप में पांच मैचों में 71 रन और एशियाई खेलों में तीन मैचों में 59 रन बनाए। इस तरह आठ मैचों में उनके कुल 130 रन बने। ये आंकड़े मैचों में उनके कुल रन बताते हैं, बल्लेबाजी औसत नहीं, क्योंकि औसत इस पर भी निर्भर करता है कि वह कितनी बार आउट हुईं।

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जून में विश्व कप से बाहर होने के बाद नतीजे बेहतर रहे। भारत ने जुलाई में लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट जीता, फिर एशिया कप अपने नाम किया और एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक बरकरार रखा। यह अंतर बताता है कि फैसले पर अलग-अलग राय क्यों बनी: हाल की टीम सफलता नेतृत्व जारी रखने के पक्ष में थी, जबकि टी20 विश्व कप के नतीजे और व्यक्तिगत फॉर्म बदलाव के समर्थन में थे।

भारत की पूर्व कप्तान डायना इडुल्जी ने बदलाव का समर्थन किया और इसे "सही दिशा में उठाया गया कदम" बताया। उन्होंने टीम को उसके सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाने का श्रेय हरमनप्रीत को भी दिया। पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा ने कहा कि हरमनप्रीत का अनुभव अब भी मूल्यवान है।

भारत की एक और पूर्व कप्तान मिताली राज ने मंधाना की नियुक्ति का समर्थन करते हुए खिलाड़ियों और टीम के माहौल से उनकी परिचितता का उल्लेख किया। उनका तर्क था कि नए विचारों के लिए जगह बननी चाहिए, लेकिन इसके लिए निवर्तमान कप्तान की उपलब्धियों को नकारना जरूरी नहीं है।

मंधाना के पास अनुभव और मजबूत बल्लेबाजी रिकॉर्ड

मंधाना ने 2013 में भारत के लिए पदार्पण किया था और कई साल से नेतृत्व समूह का हिस्सा रही हैं। कप्तान के रूप में उनके 22 पिछले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों, जिनमें 18 टी20आई और चार वनडे शामिल हैं, का अर्थ है कि वह इस भूमिका का व्यावहारिक अनुभव लेकर जिम्मेदारी संभालेंगी। आधिकारिक घोषणा में टेस्ट कप्तानी के किसी पिछले कार्यभार का उल्लेख नहीं है।

भारत की घरेलू फ्रेंचाइजी प्रतियोगिता महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) में उनका रिकॉर्ड उनकी योग्यता का एक और पहलू है। उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 2024 और 2026 में खिताब दिलाए, जिससे राष्ट्रीय टीम से बाहर भी कप्तान के रूप में उनकी सफलता साबित हुई।

आईसीसी के मुताबिक, मंधाना हाल में मिताली राज को पीछे छोड़कर महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बनीं। परिषद ने उन्हें तीनों प्रारूपों में 18 अंतरराष्ट्रीय शतकों का श्रेय भी दिया है, जो महिला क्रिकेट में सर्वाधिक हैं। नियुक्ति के समय उनके करियर के प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने 308 मैचों में 11,066 रन बनाए थे, जिनमें 172 टी20आई में 4,867 रन शामिल हैं।

बाएं हाथ की सलामी बल्लेबाज मंधाना ने आईसीसी की ओर से जारी बयान में अपनी नियुक्ति पर बात की।

भारत की अगुआई की जिम्मेदारी मिलना बहुत खास सम्मान है। भारत का प्रतिनिधित्व करना हमेशा मेरे लिए बहुत मायने रखता है और अब टीम का नेतृत्व करने का अवसर मिलना ऐसी बात है जिसे मैं दिल से संजोकर रखूंगी।

उन्होंने हरमनप्रीत के योगदान को भी स्वीकार किया और बदलाव को पहले के पूरे दौर से नाता तोड़ने के रूप में पेश नहीं किया।

मैं हरमनप्रीत और वर्षों तक कप्तान के रूप में उनके योगदान को भी स्वीकार करना चाहूंगी। उन्होंने बड़ी प्रतिबद्धता के साथ टीम की अगुआई की है और हमारी यात्रा का अहम हिस्सा रही हैं।

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मोगा से करियर बदल देने वाली पारी तक

हरमनप्रीत का सफर पंजाब के मोगा से शुरू हुआ, जहां परिवार के सहयोग से वह क्रिकेट को आगे बढ़ा सकीं। इडुल्जी की मदद से रेलवे में जाना और बाद में मुंबई पहुंचना राष्ट्रीय क्रिकेट तक उनके सफर का हिस्सा रहा। उन्होंने 20 साल की उम्र में 2009 में भारत के लिए पदार्पण किया।

अपने करियर के पहले दशक के अधिकांश समय में उन्होंने मध्यक्रम की दमदार बल्लेबाजी, ऑफ स्पिन गेंदबाजी और चुस्त क्षेत्ररक्षण से योगदान दिया। आक्रामक बल्लेबाजी की उनकी क्षमता ने भारत को ऐसा विकल्प दिया जो अपेक्षाकृत सतर्क बल्लेबाजी शैली से अलग था।

शुरुआती दौर का निर्णायक प्रदर्शन 2017 वनडे विश्व कप के ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में आया। हरमनप्रीत की नाबाद 171 रन की पारी ने भारत को फाइनल में पहुंचाया और उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे पहचानी जाने वाली खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। बाद में लॉर्ड्स में भारत इंग्लैंड से नौ रन से हार गया, लेकिन वह पारी इस बात का स्थायी उदाहरण बन गई कि टीम सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती दे सकती है।

मिताली राज ने हरमनप्रीत के अंतरराष्ट्रीय करियर पर विचार करते हुए उनकी ताकत को योगदान का केंद्रीय हिस्सा बताया।

जब हरमनप्रीत ने पदार्पण किया, तो उनकी बल्लेबाजी की ताकत खास तौर पर नजर आती थी। उनमें गेंद को साफ-सुथरा मारने और गेंदबाजों पर हावी होने की क्षमता थी, जो भारतीय टीम के लिए एक मूल्यवान गुण था।

171 रन की उस पारी के आठ साल बाद, हरमनप्रीत ने विश्व कप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को फिर हराने में भारत की मदद की। इस बार जीत के बाद एक और करीबी निराशा के बजाय खिताब मिला।

कठिन फैसलों और करीबी हार से गढ़ी कप्तानी

हरमनप्रीत ने पहली बार 2012 में टी20आई में भारत की कप्तानी की। उनकी नियमित कप्तानी शुरू होने के समय को लेकर रिपोर्टें अलग-अलग हैं: कई रिपोर्टों में 2016 में नियमित टी20 कप्तान नियुक्त किए जाने की बात है, जबकि एक अन्य के अनुसार उन्होंने 2018 में मिताली राज से पूरी जिम्मेदारी संभाली। उनकी कप्तानी तीनों प्रारूपों में कब फैली, इस बारे में भी रिपोर्टें 2022 और 2023 के बीच अलग-अलग हैं, हालांकि वनडे कप्तान बनने का साल 2022 बताया गया है।

2018 में उन्होंने कैरेबियाई क्षेत्र में भारत को टी20 विश्व कप सेमीफाइनल तक पहुंचाया। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में मिताली को टीम से बाहर रखना, जबकि वह पहले दो अर्धशतक बना चुकी थीं, चयन को लेकर बड़ा विवाद बन गया। भारत आठ विकेट से हार गया और हरमनप्रीत ने फैसले का बचाव किया।

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दो साल बाद भारत पहली बार महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में पहुंचा। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस मैच को 86,174 दर्शकों ने देखा। भारत हार गया, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचना हरमनप्रीत की अगुआई में एक और प्रगति थी।

2023 के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार खास तौर पर दर्दनाक थी। केपटाउन में 173 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत का स्कोर तीन विकेट पर 28 रन हो गया, जिसके बाद हरमनप्रीत और जेमिमा रोड्रिग्स ने 69 रन जोड़े। हरमनप्रीत ने 32 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और 52 रन पर रन आउट हुईं, जब दूसरा रन पूरा करने की कोशिश में उनका बल्ला जमीन में फंस गया।

भारत ने आठ विकेट पर 167 रन बनाए और पांच रन से पीछे रह गया। इस मैच में उनके कार्यकाल की ताकत और निराशा, दोनों दिखीं: उनकी बल्लेबाजी ने मुश्किल लक्ष्य का पीछा फिर पटरी पर ला दिया, लेकिन भारत एक बार फिर विश्व कप फाइनल से बस थोड़ा दूर रह गया।

विश्व कप की ऐतिहासिक जीत और आखिरी स्वर्ण

भारत में 2025 वनडे विश्व कप के दौरान नतीजा बदल गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में हरमनप्रीत ने 89 रन बनाए, जबकि रोड्रिग्स ने शतक जड़ा। उनके योगदान से भारत नवी मुंबई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में पहुंचा।

भारत ने फाइनल 52 रन से जीता और अपना पहला सीनियर महिला विश्व कप खिताब हासिल किया। हरमनप्रीत भारत को इस उपलब्धि तक पहुंचाने वाली पहली महिला कप्तान बनीं और जीत पूरी करने वाला कैच भी उन्होंने ही पकड़ा।

उनकी कप्तानी के रिकॉर्ड में तीन एशिया कप खिताब, एशियाई खेलों के दो स्वर्ण पदक और 2022 राष्ट्रमंडल खेलों का रजत पदक शामिल हैं। उनके कार्यकाल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी पहली टेस्ट जीत भी दर्ज की।

वनडे में उन्होंने कप्तान के रूप में 51 में से 30 मैच जीते, यानी लगभग 58.8 प्रतिशत। तीनों अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में कप्तान के तौर पर उनके कुल 211 मैच बताए गए हैं। इनमें 155 टी20आई थे, यानी करीब 73.5 प्रतिशत, जिससे पता चलता है कि उनके नेतृत्व करियर का कितना बड़ा हिस्सा सबसे छोटे प्रारूप में बीता। वह 150 टी20आई में किसी टीम की कप्तानी करने वाली पहली क्रिकेटर भी बनीं।

उनका आखिरी स्वर्ण जापान में श्रीलंका पर 147 रन की जीत के साथ आया। इसके समय को लेकर रिपोर्टें अलग-अलग हैं: दो रिपोर्टों में एशियाई खेलों की जीत सितंबर में बताई गई है, जबकि एक अन्य के अनुसार हरमनप्रीत के इस्तीफे से पहले यह अक्टूबर में हुई। सभी इस बात पर सहमत हैं कि यह भारत की कप्तान के रूप में उनका आखिरी अभियान था।

बदलाव को परिभाषित करने वाली तारीखें

यह बदलाव टूर्नामेंटों के अलग-अलग नतीजों, समीक्षा बैठकों और सार्वजनिक घोषणाओं के बाद आया। मुख्य तारीखें इस प्रकार हैं:

  • 2025: भारत ने नवी मुंबई में दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर अपना पहला महिला क्रिकेट विश्व कप जीता।
  • जून 2026: भारत लगातार दूसरे टूर्नामेंट में ग्रुप चरण के दौरान टी20 विश्व कप से बाहर हुआ।
  • जुलाई 2026: भारत ने लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट जीता।
  • 6 अक्टूबर, 2026 से पहले: भारत ने एशिया कप और लगातार दूसरा एशियाई खेल स्वर्ण पदक जीता।
  • 5 अक्टूबर, 2026: टीम के नेतृत्वकर्ताओं ने गुवाहाटी में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया से मुलाकात की।
  • 6 अक्टूबर, 2026: हरमनप्रीत ने कप्तानी छोड़ने की घोषणा की और मंधाना को तीनों प्रारूपों की कप्तान नियुक्त किया गया।
  • 16 अक्टूबर, 2026: जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत की घरेलू श्रृंखला शुरू होने का कार्यक्रम था।

जिम्बाब्वे श्रृंखला नए नेतृत्व के कामकाज में ढलने का पहला निर्धारित अवसर है। आईसीसी के अनुसार, इसमें तीन टी20आई के बाद तीन वनडे होंगे।

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हरमनप्रीत और अगले अभियान के लिए क्या बदलेगा?

कप्तानी छोड़ने से भविष्य की टीमों में हरमनप्रीत की जगह तय नहीं होती। उन्होंने कहा है कि वह खिलाड़ी के रूप में बने रहना चाहती हैं, लेकिन चयन, हर प्रारूप में उनकी भूमिका और उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की अवधि अलग-अलग फैसले हैं।

अगले डब्ल्यूपीएल सत्र में उनसे मुंबई इंडियंस की कप्तानी जारी रखने की भी उम्मीद है। फ्रेंचाइजी उस सत्र में तीसरे खिताब के लिए प्रयास करेगी। यह उम्मीद उनके क्लब की भूमिका से जुड़ी है और भारत की कप्तानी छोड़ने के उनके फैसले को नहीं बदलती।

मंधाना के सामने तत्काल चुनौती उस टीम की जिम्मेदारी संभालना है जिसे वह पहले से जानती हैं, साथ ही भूमिकाओं और संयोजनों पर अपने फैसले तय करना भी। हरमनप्रीत की टीम में मौजूदगी से बल्लेबाजी समूह में अनुभव बना रह सकता है, लेकिन बदलाव से जुड़ी खबरों में उनकी जगह को लेकर किसी खास व्यवस्था की घोषणा नहीं हुई है।

मिताली ने फरवरी 2027 में भारत में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी को मंधाना का अगला बड़ा टूर्नामेंट बताया। उन्होंने 2028 टी20 विश्व कप, लॉस एंजिलिस ओलंपिक और 2029 वनडे विश्व कप को भी आगे की योजना के लक्ष्य के रूप में गिनाया। ये तारीखें दीर्घकालीन योजना बताती हैं; कप्तानी की आधिकारिक घोषणा में भारत की अगली श्रृंखला 16 अक्टूबर से शुरू होने की बात है।

तत्काल फर्क यह है कि नेतृत्व का फैसला हो चुका है, जबकि खेलने से जुड़े फैसले अभी बाकी हैं। मंधाना तीनों प्रारूपों की नई कप्तान हैं। हरमनप्रीत की खेलते रहने की इच्छा भी स्पष्ट है, लेकिन भविष्य में उनका चयन आगे के फैसलों पर निर्भर करेगा।

मुख्य बातें

  • हरमनप्रीत कौर ने 6 अक्टूबर, 2026 को सभी प्रारूपों में भारत की कप्तानी छोड़ दी, लेकिन वह खेलना जारी रखना चाहती हैं।
  • स्मृति मंधाना ने जिम्मेदारी संभाली है। वह पहले भारत की 18 टी20आई और चार वनडे में कप्तानी कर चुकी हैं।
  • हरमनप्रीत ने 211 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की अगुआई की, जिनमें 51 वनडे शामिल हैं। इनमें भारत ने 30 मैच जीते।
  • उनके कार्यकाल में 2025 वनडे विश्व कप खिताब, तीन एशिया कप और एशियाई खेलों के दो स्वर्ण पदक शामिल हैं।
  • टी20 विश्व कप में लगातार ग्रुप चरण से बाहर होने और बल्लेबाजी प्रदर्शन घटने से नेतृत्व में बदलाव का दबाव बढ़ा।
  • मंधाना ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 2024 और 2026 में डब्ल्यूपीएल खिताब दिलाए।
  • जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत की घरेलू श्रृंखला 16 अक्टूबर से शुरू होने का कार्यक्रम था। इसमें पहले तीन टी20आई और फिर तीन वनडे होने थे।
  • हरमनप्रीत का भविष्य में चयन और खिलाड़ी के रूप में उनकी भूमिका कप्तानी के फैसले से अलग हैं।
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