दक्षिणी ताइवान में जेट हमलावर ड्रोन का परीक्षण आगे बढ़ा
ताइवान और अमेरिकी रक्षा ठेकेदार क्रेटोस ने दक्षिणी ताइवान में माइटी हॉर्नेट IV हमलावर ड्रोन का उड़ान मूल्यांकन पूरा कर लिया है। क्रेटोस के कार्यकारी स्टीव फेंडली ने कहा कि तेज हवाओं और जोरदार झोंकों के बावजूद विमान ने मूल्यांकन के सभी लक्ष्य हासिल किए। 16 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित विवरण के अनुसार, यह विमान लैंडिंग जहाजों पर हमला करने, रनवे के बिना उड़ान भरने और प्रति इकाई 500,000 अमेरिकी डॉलर से कम लागत के लिए बनाया गया है।
विषय-सूची
- दक्षिणी ताइवान में जेट हमलावर ड्रोन का परीक्षण आगे बढ़ा
- परीक्षण के पड़ाव कैसे जुड़े हैं
- प्रशिक्षण लक्ष्य को हथियार में बदलना
- प्रदर्शन के आंकड़ों का मतलब
- तटीय रक्षा मुख्य मिशन क्यों है
- बड़ी संख्या में उत्पादन की लागत
- अवरोधन और अन्य प्रस्तावित भूमिकाएं
- ताइवान में उत्पादन की ओर तीन चरण
- विदेशी दिलचस्पी और बड़ा विमान बनाने की संभावना
- मुख्य बातें
इस कार्यक्रम में क्रेटोस के MQM-178 फायरजेट लक्ष्य ड्रोन को संशोधित करके उसमें ताइवान के नेशनल चुंग-शान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NCSIST) के विकसित सेंसर, मिशन प्रणालियां और विस्फोटक वारहेड जोड़े गए हैं। इसकी बताई गई मारक दूरी 1,000 किलोमीटर तक है। फेंडली के अनुसार, यह करीब दो घंटे तक उड़ सकता है और इसकी गति मैक 0.7 से मैक 0.85 के बीच है।
ये उड़ान मूल्यांकन इससे पहले हासिल किए गए, सीमित दायरे के एक पड़ाव के बाद हुए। 5 फरवरी, 2026 की अपनी संयुक्त परीक्षण घोषणा में क्रेटोस ने कहा था कि साझेदारों ने विमान के साथ ताइवान के पेलोड और मिशन प्रणाली का सफल परीक्षण किया और डिजाइन में संशोधन की जरूरत नहीं पड़ी। उस घोषणा में 2026 के बाद के महीनों में उड़ान परीक्षण करने की योजना थी।
ताइवान के लिए इस हथियार का आकर्षण यह है कि इसे हवाई अड्डों पर केंद्रित रखने के बजाय तट पर अलग-अलग जगहों पर तैनात किया जा सकता है। साझेदारों के सामने अगली चुनौती सफलतापूर्वक परीक्षण किए गए विमान का बड़े पैमाने पर उत्पादन करना है। उनकी प्रस्तावित योजना के तहत शुरुआत में एयरफ्रेम अमेरिका से आएंगे और फिर ताइवान में असेंबली होगी। अंततः प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अमेरिकी सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
परीक्षण के पड़ाव कैसे जुड़े हैं
माइटी हॉर्नेट IV पहली बार सितंबर 2025 में सार्वजनिक रूप से सामने आया। यह फायरजेट से बना हमलावर विमान है, जिसे मूल रूप से सैन्य प्रशिक्षण में लक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया था। इसके विकास में अलग-अलग तरह के परीक्षण हुए हैं, जिनमें अलग-अलग प्रणालियों से लेकर एकीकृत विमान तक की जांच शामिल है।
- सितंबर 2025: क्रेटोस और NCSIST ने विमान का अनावरण किया। यह ताइपे एयरोस्पेस एंड डिफेंस टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी में प्रदर्शित हुआ। 19 सितंबर को प्रकाशित एक विवरण में जहाजों पर हमला करने की इसकी भूमिका बताई गई।
- जनवरी 2026: विकास से जुड़ी एक शुरुआती रिपोर्ट में अमेरिका में परीक्षण, विनिर्माण प्रक्रिया की जांच और इंजीनियरिंग सुधारों की योजनाओं का जिक्र था।
- 5 फरवरी, 2026: क्रेटोस ने सफल एकीकरण परीक्षण की घोषणा की और कहा कि उसी साल आगे उड़ान परीक्षण किए जाएंगे।
- अक्टूबर 2026: फेंडली ने दक्षिणी ताइवान में सफल उड़ान मूल्यांकन की जानकारी दी। 16 अक्टूबर को प्रकाशित विवरण के अनुसार, मूल्यांकन के सभी लक्ष्य पूरे हुए।
जनवरी में बताई गई समय-सारिणी प्रस्तावित थी। फरवरी की कंपनी घोषणा में एकीकरण परीक्षण के पड़ाव और अगले नियोजित उड़ान चरण का विवरण था; अक्टूबर की रिपोर्ट में इसके बाद के उड़ान परिणाम बताए गए।
क्रेटोस के अनमैन्ड सिस्टम्स डिविजन के अध्यक्ष फेंडली ने कंपनी की घोषणा में फरवरी की उपलब्धि के बारे में कहा:
दोनों संगठनों के इस परीक्षण की सफलता एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिससे उड़ान परीक्षण की ओर आगे बढ़ना संभव हुआ है।
NCSIST की तकनीकी टीम ने आवश्यकताओं और डिजाइन कार्य को अंतिम रूप देने के लिए ओक्लाहोमा सिटी स्थित क्रेटोस के डिजाइन और उत्पादन केंद्र का भी दौरा किया। फरवरी की घोषणा के अनुसार, यह दौरा साझेदारों के अपने-अपने केंद्रों में कई महीनों तक चली योजना, डिजाइन और उप-प्रणाली परीक्षणों के बाद हुआ।
प्रशिक्षण लक्ष्य को हथियार में बदलना
इस परियोजना का मुख्य विमान MQM-178 फायरजेट है। संशोधित विमान को हमले के मिशन के लिए जरूरी उपकरण NCSIST देता है। इनमें स्थानीय स्तर पर विकसित सेंसर, मार्गदर्शन और नियंत्रण उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां और उच्च-विस्फोटक वारहेड शामिल हैं।
फेंडली का विवरण बताता है कि साझेदार मूल डिजाइन का दोबारा इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं। विमान की नाक में लगा वह उपकरण, जो दूसरे विमान के रडार संकेतों की नकल कर सकता था, सेंसर से बदला गया है। पंखों के नीचे वे स्थान, जहां पहले लक्ष्य प्रशिक्षण के उपकरण लगाए जा सकते थे, अब वारहेड के लिए तैयार किए गए हैं।
इस विमान को जेट इंजन से चलने वाला घूमकर लक्ष्य तलाशने वाला हथियार बताया गया है। ऐसा हथियार हमला करने से पहले हवा में रहकर लक्ष्य की तलाश कर सकता है या उसके इंतजार में मंडरा सकता है। बताया गया है कि माइटी हॉर्नेट IV उड़ान के दौरान टोही कर सकता है और अंतिम चरण में गोता लगाकर लक्ष्य पर हमला कर सकता है।
क्रेटोस की घोषित रणनीति हर पुर्जे को नए सिरे से विकसित करने के बजाय पहले से स्थापित अमेरिकी विमान को ताइवान के मिशन उपकरणों के साथ जोड़ना है। फरवरी की घोषणा में कंपनी ने कहा था कि परिपक्व फायरजेट तकनीक के इस्तेमाल से शुरुआती अवधारणा से काम करने वाली प्रणाली तक पहुंचने में कम समय लगा। साझेदारों का घोषित लक्ष्य ताइवान में माइटी हॉर्नेट IV प्रणालियों की बड़ी संख्या तैयार करना है, ताकि हमले को रोका जा सके और जरूरत पड़ने पर इन्हें अभियान में तैनात किया जा सके।
प्रदर्शन के आंकड़ों का मतलब
फेंडली के अनुसार, विमान की गति मैक 0.7 से मैक 0.85 के बीच है। क्रेटोस की फरवरी की घोषणा में गति मैक 0.8 बताई गई थी, जबकि विकास से जुड़ी पहले की एक रिपोर्ट में यह करीब मैक 0.69 थी। मैक ध्वनि की गति के सापेक्ष गति बताता है, इसलिए ये आंकड़े ध्वनि की गति से कम रफ्तार पर तेज उड़ान को दर्शाते हैं।
क्रेटोस के अनुसार, विमान की परिचालन सीमा 35,000 फीट से अधिक है। यह वह अधिकतम ऊंचाई है जहां विमान को प्रभावी ढंग से काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। फेंडली के बाद के विवरण में विमान के कुछ समय के लिए 12G और लगातार 9G का दबाव सहने की क्षमता भी बताई गई है। यह उनके बताए सामान्य, धीमी गति वाले ड्रोन के करीब 2G से 3G के मुकाबले अधिक है।
G, पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की तुलना में त्वरण का माप है। अधिक G सीमा विमान को तीखे मोड़ सहने देती है, हालांकि इससे उसकी संरचना पर दबाव भी बढ़ता है। फेंडली ने कहा कि ताइवान में तेज हवाओं और झोंकों के दौरान स्वायत्त उड़ान नियंत्रण सॉफ्टवेयर ने अच्छा प्रदर्शन किया।
बताई गई 1,000 किलोमीटर की दूरी और करीब दो घंटे की उड़ान क्षमता प्रदर्शन के अलग-अलग पहलू हैं: विमान कितनी दूर जा सकता है और कितनी देर हवा में रह सकता है। विकास से जुड़ी एक पहले की रिपोर्ट में वारहेड का वजन करीब 30 किलोग्राम बताया गया था। उड़ानों की सटीक तारीखें, परीक्षण के विस्तृत नतीजे, इन आंकड़ों से जुड़े उड़ान मार्ग, आपूर्ति की मात्रा और परिचालन तैनाती की समय-सारिणी सार्वजनिक नहीं की गई है।
तटीय रक्षा मुख्य मिशन क्यों है
फेंडली के अनुसार, ताइवान में माइटी हॉर्नेट IV की मुख्य भूमिका तटीय रक्षा होगी। उनकी प्रस्तावित तैनाती योजना में तटरेखा के पास छिपे हुए स्थानों, जिनमें वन क्षेत्र भी शामिल हैं, से लॉन्च प्रणाली चलाना शामिल है। वहां से विमान आक्रमणकारी बल को ले जा रहे जहाजों पर हमला कर सकते हैं।
ड्रोन वायवीय रेल या रॉकेट की मदद से उड़ान भर सकता है, इसलिए उसे पारंपरिक रनवे की जरूरत नहीं है। फेंडली के अनुसार, इस प्रणाली को तैनात करके 30 मिनट के भीतर उड़ान पर भेजा जा सकता है। इसलिए तटीय रक्षा योजना में लॉन्च उपकरण, उसका परिवहन और उसे चलाने वाले दल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस तरह अलग-अलग जगहों पर तैनाती से विरोधी को हथियार की तलाश के लिए बड़े क्षेत्र में नजर रखनी होगी। विमान सिर्फ स्थापित हवाई अड्डों से उड़ान भरने के बजाय तट के कई ठिकानों से उड़ान भर सकते हैं। फेंडली के मुताबिक, छिपे हुए लॉन्च स्थलों और तेज गति का यह मेल हमले की कोशिश के दौरान लैंडिंग जहाजों को निशाना बनाने में मदद करेगा।
इस मिशन को पहले के उन प्रस्तावों से भी जोड़ा गया है, जिनमें ड्रोन को ताइवान की ह्सिउंग फेंग II और ह्सिउंग फेंग III जहाजरोधी मिसाइलों के साथ इस्तेमाल करने की बात थी। इस प्रस्तावित संयोजन से रक्षकों को पास आती नौसैनिक टुकड़ी पर अलग-अलग लागत और उड़ान विशेषताओं वाले कई तरह के हथियार इस्तेमाल करने का विकल्प मिलेगा।
बड़ी संख्या में उत्पादन की लागत
फेंडली ने प्रति विमान कीमत 500,000 अमेरिकी डॉलर से कम रहने का अनुमान दिया है। उनका दावा है कि यह विमान पारंपरिक लड़ाकू विमान की लगभग 90 प्रतिशत लड़ाकू क्षमता दे सकता है। उन्होंने इस तुलना को बड़ी संख्या में विमान खरीदने के वाणिज्यिक और सैन्य तर्क के हिस्से के रूप में पेश किया, लेकिन प्रतिशत के लिए कोई साझा मापदंड नहीं दिया।
उनकी अधिक ठोस तुलना अवरोधन की लागत से जुड़ी है। उनके अनुसार, वायु रक्षा मिसाइलों की कीमत 1 से 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक हो सकती है। 500,000 अमेरिकी डॉलर से कम कीमत वाले ड्रोन की तुलना में, ऐसी एक मिसाइल हमलावर विमान से दो से चार गुना से भी अधिक महंगी होगी।
इस उदाहरण में दबाव खर्च और गोला-बारूद के भंडार, दोनों पर पड़ता है। बार-बार होने वाले ड्रोन हमलों पर महंगी मिसाइलें दागने से रक्षक अपने ऐसे हथियार इस्तेमाल करते हैं जिन्हें जल्दी दोबारा हासिल करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, गोलीबारी रोकने पर जहाज या किसी दूसरे लक्ष्य पर हमले का जोखिम बना रहता है।
क्रेटोस अपनी रणनीति को "किफायती संख्या" कहता है। इसका मतलब है कि अपेक्षाकृत कम लागत वाले पर्याप्त विमान उपलब्ध हों, ताकि बड़ी संख्या में तैनाती बल की ताकत बने। ताइवान के लिए इसका व्यावहारिक लाभ यह है कि हमले की क्षमता कुछ महंगे हथियारों में केंद्रित करने के बजाय कई प्लेटफॉर्म में बांटी जा सकती है।
अवरोधन और अन्य प्रस्तावित भूमिकाएं
फेंडली तेज हमलावर ड्रोन के खिलाफ भी इसकी भूमिका देखते हैं। उन्होंने खास तौर पर यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल की जा रही रूस की गेरान-4 और गेरान-5 प्रणालियों का जिक्र किया। उनका तर्क है कि इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी से चलने वाले कुछ धीमे अवरोधक तेज लक्ष्यों को पकड़ने में मुश्किल महसूस कर सकते हैं, जबकि माइटी हॉर्नेट IV का जेट इंजन उसे अधिक गति देता है।
इस प्रस्ताव से परियोजना में वायु रक्षा की भूमिका जुड़ जाएगी, जबकि इसे मुख्य रूप से हमले के हथियार के रूप में पेश किया गया है। किसी चलते हुए विमान को ढूंढ़ने, उस पर नजर रखने और उस तक पहुंचने के लिए सेंसर और मिशन प्रणालियों को यह काम करने में सक्षम होना होगा। इसके लिए विमान की गति और फुर्ती भी जरूरी होगी।
विकास से जुड़े पहले के विवरणों में टोही, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, संचार रिले और लक्ष्य या छलावा मिशनों के लिए अन्य संभावित रूपों का भी जिक्र था। संचार रिले उन उपयोगकर्ताओं के बीच संकेत पहुंचाता है जो सीधे संपर्क नहीं कर सकते; इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के उपकरण इलेक्ट्रॉनिक संकेतों का पता लगा सकते हैं या उनमें बाधा डाल सकते हैं।
लंबी दूरी के हमले की अवधारणा में माइटी हॉर्नेट IV को ह्सिउंग फेंग IIE क्रूज मिसाइल के साथ इस्तेमाल करना शामिल है। एक पहले की रिपोर्ट में इस मिसाइल की मारक दूरी 500 से 700 किलोमीटर बताई गई थी, जबकि ड्रोन की बताई गई दूरी 1,000 किलोमीटर है। इस प्रस्तावित संयोजन में कम लागत वाले हमलावर प्लेटफॉर्म को पहले से मौजूद मिसाइल प्रणाली के साथ जोड़ा जाएगा।
ताइवान में उत्पादन की ओर तीन चरण
क्रेटोस और NCSIST ताइवान में तीन चरणों में उत्पादन की योजना बना रहे हैं। पहले चरण में एयरफ्रेम अमेरिका से आते रहेंगे और ताइवान में मिशन उपकरण जोड़े जाएंगे। दूसरे चरण में अमेरिकी साझेदार से मिले पुर्जों के सेट का इस्तेमाल करके असेंबली और परीक्षण ताइवान में किए जाएंगे।
तीसरे चरण में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और ताइवानी निर्माताओं द्वारा स्वतंत्र रूप से बड़े पैमाने पर उत्पादन शामिल होगा, जो अमेरिकी सरकार की मंजूरी पर निर्भर है। अंतिम चरण के लिए यह मंजूरी जरूरी बताई गई है। इसलिए उत्पादन व्यवस्था का विस्तार कार्यक्रम के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना विमान का उड़ान प्रदर्शन।
पहले के विकास कार्यों में विनिर्माण प्रक्रिया की पुष्टि और इंजीनियरिंग सुधार शामिल थे। कार्बन आधारित कंपोजिट की विशेषज्ञ कंपनी कार्बन-बेस्ड टेक्नोलॉजी को एयरोस्पेस कार्बन फाइबर निर्माण प्रक्रियाएं और इंजीनियरिंग सहायता देने वाली कंपनी के रूप में पहचाना गया। इसमें संरचनात्मक मजबूती, गर्मी सहने की क्षमता, विश्वसनीयता और बार-बार एक जैसी गुणवत्ता के साथ उत्पादन पर ध्यान दिया गया।
प्रोटोटाइप से बड़ी संख्या में उत्पादन की ओर बढ़ने पर ये जरूरतें और कठिन हो जाती हैं। हर विमान की संरचना और पुर्जों का निर्माण एक समान गुणवत्ता से होना चाहिए, ताकि वे नियोजित गति और मोड़ के दौरान लगने वाले दबाव को सह सकें। इसलिए उत्पादन संबंधी काम का एक हिस्सा यह तय करना है कि एक ही मानक पर बड़ी संख्या में विमान कैसे बनाए जाएं।
एक पहले की रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इस कार्यक्रम को 1.25 ट्रिलियन न्यू ताइवान डॉलर के प्रस्तावित विशेष रक्षा बजट में शामिल करने पर विचार हो रहा है। यह रकम व्यापक प्रस्तावित खर्च पैकेज के लिए है, न कि माइटी हॉर्नेट IV के लिए तय की गई राशि।
विदेशी दिलचस्पी और बड़ा विमान बनाने की संभावना
अक्टूबर के परीक्षण विवरण के साथ जारी जानकारी के अनुसार, दर्जनों देशों ने माइटी हॉर्नेट IV में दिलचस्पी दिखाई है। सात देश बजट और कीमत के बारे में बातचीत के अगले चरण तक पहुंचे हैं। स्थानीय उत्पादन बढ़ने के साथ ताइवान के अलावा अन्य संभावित ग्राहक भी मिल सकते हैं।
क्रेटोस और NCSIST XQ-58 वल्किरी पर आधारित बड़े विमान के संयुक्त विकास की संभावना भी तलाश रहे हैं। यह अवधारणा उनके काम के बंटवारे को आगे बढ़ाएगी और अमेरिकी विमान मंच को ताइवानी प्रणालियों तथा तकनीक के साथ जोड़ेगी।
प्रस्तावित वल्किरी परियोजना में चालक दल वाले और बिना चालक दल वाले विमानों के बीच संभावित सहयोग शामिल है। सरल शब्दों में, इसका मतलब है कि पायलट वाले विमान बिना पायलट के विमानों के साथ काम करेंगे और उनके मिशन तथा प्रणालियां आपस में तालमेल से चलेंगी।
माइटी हॉर्नेट IV के मौजूदा कार्यक्रम का काम अधिक स्पष्ट है: दक्षिणी ताइवान में उड़ान के नतीजों को ऐसी उत्पादन व्यवस्था में बदलना, जो साझेदारों की चाही गई बड़ी संख्या में विमान दे सके। इसकी प्रगति उड़ान नियंत्रण, ताइवान के मिशन उपकरणों, लचीली लॉन्च व्यवस्था और बार-बार किए जाने वाले हमलों की लागत को एक साथ जोड़ती है। उत्पादन क्षमता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की मंजूरियां तय करेंगी कि इस योजना का विस्तार कितना हो सकता है।
मुख्य बातें
- माइटी हॉर्नेट IV ने दक्षिणी ताइवान में उड़ान मूल्यांकन पूरा किया। फेंडली के अनुसार, तेज हवाओं के बावजूद मूल्यांकन के सभी लक्ष्य हासिल हुए।
- क्रेटोस की 5 फरवरी, 2026 की घोषणा में पेलोड और मिशन प्रणाली के एकीकरण का पहले का परीक्षण दर्ज था। इसके बाद उड़ान परीक्षण की योजना थी।
- इस विमान में संशोधित MQM-178 फायरजेट के साथ ताइवान के सेंसर, मिशन उपकरण और वारहेड शामिल हैं।
- फेंडली के अनुसार, इसकी गति मैक 0.7 से मैक 0.85 है, उड़ान क्षमता करीब दो घंटे है और प्रति इकाई कीमत 500,000 अमेरिकी डॉलर से कम है।
- मुख्य प्रस्तावित मिशन तटीय रक्षा है, जिसके लिए बिना रनवे के उड़ान और अलग-अलग स्थानों पर तैनाती की सुविधा है।
- तीन चरणों वाली विनिर्माण योजना का लक्ष्य ताइवान में उत्पादन तक पहुंचना है। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अमेरिकी मंजूरी पर निर्भर होगा।






