नेपाल ने सऊदी अरब और मलेशिया के राजदूत पद के नामांकन ठुकराए, जापान पर फैसला रोका

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Nepal Rejects Saudi Arabia and Malaysia Ambassador Nominees, Holds Japan Decision

सर्वसम्मति से दो नामांकन खारिज, 13 राजनयिक नियुक्तियों की प्रक्रिया बाधित

नेपाल की संसदीय सुनवाई समिति ने सऊदी अरब में प्रस्तावित राजदूत गिरि बहादुर सुनार और मलेशिया में प्रस्तावित राजदूत चुडा मणि खरेल के नामांकन खारिज कर दिए, जबकि जापान के लिए ज्ञान कुमार थापा का नामांकन अतिरिक्त दस्तावेजों के इंतजार में लंबित रखा। समिति ने भारत, चीन और अमेरिका के लिए प्रस्तावित उम्मीदवारों सहित अन्य 10 नामांकनों को मंजूरी दी।

विषय-सूची
  1. सर्वसम्मति से दो नामांकन खारिज, 13 राजनयिक नियुक्तियों की प्रक्रिया बाधित
  2. नामांकन यहां तक कैसे पहुंचे
  3. सुनार सुनवाई में क्यों नाकाम रहे
  4. खरेल के नामांकन खारिज होने में पैसों और भर्ती कारोबार से जुड़े संबंधों की भूमिका
  5. विदेश से पुष्टि का इंतजार कर रहे जापान के उम्मीदवार
  6. इंतजार करने को लेकर सदस्यों में मतभेद
  7. मंजूरी पाने वाले 10 उम्मीदवार
  8. पहले विवादित नामांकन वापस ले लिए गए थे
  9. सऊदी अरब और मलेशिया के पद क्यों अहम हैं
  10. मुख्य बातें

ये फैसले बुधवार को काठमांडू के सिंहदरबार में हुई बैठक में लिए गए। समिति अध्यक्ष बोध नारायण श्रेष्ठ ने सुनार के आचरण और खरेल के वित्तीय तथा कारोबारी लेन-देन से जुड़ी शिकायतों की सांसदों द्वारा जांच के बाद दोनों नामांकन खारिज किए जाने की घोषणा की। 15 सदस्यों वाली समिति ने दोनों नामांकन सर्वसम्मति से ठुकराए।

यह नतीजा असामान्य था, क्योंकि सत्तारूढ़ दल के सांसद समिति में भारी बहुमत में हैं। सरकार का समर्थन दोनों में से किसी उम्मीदवार की मंजूरी सुनिश्चित नहीं कर सका। मौजूदा मंजूरी प्रक्रिया के तहत उनकी नियुक्तियां आगे नहीं बढ़ सकतीं।

सुनार पर एक महिला के खिलाफ हिंसा और धमकी देने का आरोप था। जर्मनी से कथित तौर पर निर्वासित किए जाने को लेकर सवाल उठे और पैसों तथा राजनीतिक संपर्कों से जुड़े आरोप भी लगे। खरेल से वित्तीय लेन-देन, विदेश में रोजगार के लिए कामगारों की भर्ती करने वाले कारोबारों से कथित संबंधों और उनकी योग्यताओं को लेकर सवाल किए गए। दोनों ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया।

थापा के मामले में अलग रुख अपनाया गया। उन्होंने कहा कि वह जापान की स्थायी निवास की अनुमति पहले ही छोड़ चुके हैं, लेकिन समिति इस दावे की पुष्टि करने वाले दस्तावेजों का इंतजार कर रही थी। श्रेष्ठ ने कहा कि मांगी गई जानकारी पर विचार करने के बाद दशैं पर्व के पश्चात फैसला लिया जाएगा।

नामांकन यहां तक कैसे पहुंचे

मंत्रिमंडल ने नेपाल के कैलेंडर की एक तारीख असोज 2 को हुई बैठक में 13 देशों के लिए राजदूतों की सिफारिश की थी। इसके बाद संसदीय समिति ने सुनवाई के जरिए उम्मीदवारों की जांच की। इस दौरान सांसद उनकी उपयुक्तता पर सवाल पूछ सकते थे और शिकायतों पर विचार कर सकते थे।

सरकार का नामांकन किसी व्यक्ति को पद के लिए प्रस्तावित करता है। संसदीय मंजूरी इस प्रक्रिया का एक अलग चरण है। इस समूह में 13 में से 10 उम्मीदवारों को मंजूरी मिली, यानी करीब 77 प्रतिशत को। दो नामांकन खारिज हुए और एक लंबित रहा।

  • असोज 2: मंत्रिमंडल ने 13 देशों के लिए राजदूतों के नामों की सिफारिश की।
  • सुनवाई के दौरान: सांसदों ने उम्मीदवारों से सवाल किए और शिकायतों, दस्तावेजों तथा अन्य सामग्री की जांच की।
  • असोज 28: समिति ने 10 नामांकनों को मंजूरी दी, सुनार और खरेल को खारिज किया तथा थापा का नामांकन रोक लिया।
  • दशैं के बाद: अतिरिक्त दस्तावेज मिलने और उनकी जांच के बाद समिति से थापा के मामले पर फिर विचार करने की उम्मीद थी।

समिति सदस्य और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद दीपक बोहरा ने नतीजे को 10 मंजूरियों, दो अस्वीकृतियों और एक स्थगित फैसले के रूप में बताया। अलग-अलग नतीजे मंत्रिमंडल की पूरी सूची पर एक ही फैसला लेने के बजाय हर उम्मीदवार के समिति के आकलन को दर्शाते थे।

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सुनार सुनवाई में क्यों नाकाम रहे

समिति ने निष्कर्ष निकाला कि गिरि बहादुर सुनार राजदूत से अपेक्षित उच्च नैतिक चरित्र के मानक पर खरे नहीं उतरते, जिसके बाद उनका नामांकन खारिज कर दिया गया। एक महिला के खिलाफ हिंसा और धमकी देने का आरोप सुनवाई में पूछताछ का मुख्य विषय था।

विदेश में रह रही महिला ने शिकायतकर्ता के जरिए अपना पक्ष रखा। उसका आरोप था कि संबंध खत्म होने के बाद सुनार ने उसे धमकी दी और उसके परिवार के सदस्यों को निजी सामग्री भेजी। समिति ने ललितपुर पुलिस से निजी वीडियो हटाने के एक समझौते से जुड़े दस्तावेज भी हासिल किए।

सांसदों ने सुनार से संबंध, कथित धमकियों और पुलिस के साथ हुए समझौते के बारे में सवाल किए। उन्होंने किसी भी गलत काम से इनकार किया और कहा कि उनके खिलाफ पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई, गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं हुआ और कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने इस दावे का भी खंडन किया कि विवाहित रहते हुए उन्होंने यह संबंध बनाया था। उनका कहना था कि उस समय उनका तलाक हो चुका था और उनके पास तलाक के कागजात थे।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद वर्षमान पुन ने सुनवाई के दौरान सुनार से अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का आग्रह किया। बोहरा और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की सांसद गजाला शमीम मियां मिक्रानी समेत अन्य सदस्यों ने भी उन्हें नाम वापस लेने की सलाह दी। सुनार ने नामांकन वापस लेने से इनकार किया, जिसके बाद समिति को औपचारिक फैसला करना पड़ा।

समिति सदस्य और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के मुख्य सचेतक कबीन्द्र बुर्लाकोटी ने कहा कि सुनार की प्रस्तुति, दस्तावेज और योग्यताएं अच्छी दिखी थीं, लेकिन पहले की घटना ने उनके चरित्र पर सवाल खड़ा किया। बुर्लाकोटी ने दलित समुदाय के सदस्य के रूप में सुनार के काम को भी स्वीकार किया।

बुर्लाकोटी ने बताया कि उनके विचार में राजनयिक पद के लिए कैसा मानक जरूरी है। नेपाली में उन्होंने कहा:

राजदूत का उच्च नैतिक चरित्र होना चाहिए। उनकी घटना पुरानी होने के बावजूद, वह उनके चरित्र से जुड़ी हुई दिखती है।

समिति ने सुनार से इस आरोप पर भी सवाल किए कि जर्मन अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लेकर निर्वासित किया था। सुनार ने निर्वासित किए जाने से इनकार किया। श्रेष्ठ ने कहा कि उम्मीदवार को लेकर कई चिंताओं पर चर्चा के बाद नामांकन खारिज किया गया।

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खरेल के नामांकन खारिज होने में पैसों और भर्ती कारोबार से जुड़े संबंधों की भूमिका

चुडा मणि खरेल की सुनवाई में कथित वित्तीय गड़बड़ी, हितों के संभावित टकराव और विदेश में भर्ती कारोबार चलाने वालों से संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया गया। सदस्यों ने यह भी पूछा कि क्या उनकी योग्यताएं मलेशिया में नियुक्ति के अनुकूल थीं।

हितों का टकराव तब होता है जब किसी व्यक्ति के निजी हित किसी सार्वजनिक पद की जिम्मेदारियों के आड़े आ सकते हैं। राजदूत के मामले में सांसद यह जांच रहे थे कि क्या निजी वित्तीय या कारोबारी संबंध नेपाल की ओर से लिए जाने वाले फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।

खरेल पर आरोप था कि उन्होंने स्थानीय सरकारों के लिए अनुदान की व्यवस्था करने का वादा कर पैसे लिए थे। विजय मिश्रा से जुड़े एक भर्ती कारोबार की ओर से करीब 2 करोड़ नेपाली रुपये दिए जाने के आरोप पर भी सवाल उठे। खरेल ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया।

सांसदों तक आरोप पहुंचने का तरीका असामान्य था। समिति के समक्ष खरेल के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई थी, लेकिन सदस्यों को व्हाट्सऐप के जरिए आरोपों के साथ ऑडियो और वीडियो सामग्री मिली। उन्होंने सुनवाई के दौरान खरेल से पूछताछ के लिए उस सामग्री का इस्तेमाल किया।

समिति ने खरेल से नाम वापस लेने को कहने के लिए बैठक रोक दी। उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद सदस्यों ने उनके नामांकन पर अलग से फैसला लिया और उसे सर्वसम्मति से खारिज कर दिया।

सुनार से भी वित्तीय मामलों पर सवाल किए गए। एक शिकायत में आरोप था कि उन्होंने और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद खगेन्द्र सुनार ने एक पुलिस उपमहानिरीक्षक की पदोन्नति के सिलसिले में 33 लाख रुपये लिए थे। एक अन्य आरोप में कहा गया कि गिरि बहादुर सुनार ने खगेन्द्र सुनार द्वारा जुटाए गए पैसे का प्रबंधन किया। पैसों के बारे में पूछे जाने पर उम्मीदवार ने खुद को बहन के घर रहने वाला और अपना गुजारा करने के लिए वेतन कमाने वाला व्यक्ति बताया।

सुनार के राजनीतिक संपर्कों को लेकर सवालों में हमारा नेपाल पार्टी से उनकी कथित संबद्धता और विदेश मंत्रालय में उनके नामांकन के समर्थन के प्रयास शामिल थे। इन प्रयासों में कथित तौर पर आध्यात्मिक गुरु स्वामी आनंद अरुण भी शामिल थे। ये बातें उनकी पृष्ठभूमि की व्यापक जांच का हिस्सा बनीं।

विदेश से पुष्टि का इंतजार कर रहे जापान के उम्मीदवार

ज्ञान कुमार थापा का नामांकन रोक लिया गया, क्योंकि समिति को जापान की स्थायी निवास की अनुमति से संबंधित अपेक्षित दस्तावेज नहीं मिले थे। थापा ने सदस्यों से कहा कि वह यह दर्जा पहले ही छोड़ चुके हैं।

स्थायी निवास, जिसे अक्सर पीआर कहा जाता है, आम तौर पर किसी व्यक्ति को दूसरे देश के नियमों के तहत अनिश्चित काल तक वहां रहने की अनुमति देता है। यह नागरिकता से अलग है। नेपाल के जापान में राजदूत के रूप में मंजूरी देने से पहले समिति थापा की मौजूदा स्थिति की पुष्टि करना चाहती थी।

समिति ने सरकार के जरिए जापान से अतिरिक्त जानकारी मांगी। श्रेष्ठ के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने पत्र भेजकर बताया कि मांगी गई जानकारी अभी नहीं आई है। इसलिए समिति के पास थापा का स्पष्टीकरण तो था, लेकिन वह अब भी मांगी गई पुष्टि का इंतजार कर रही थी।

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सदस्यों ने कहा कि थापा करीब 25 साल जापान में रहे हैं और सात साल तक स्थायी निवास की अनुमति उनके पास थी। उन्होंने उनके परिवार की परिस्थितियों पर भी चिंता जताई और कहा कि उनकी पत्नी के पास जापान में स्थायी निवास की अनुमति और संपत्ति है।

ये सवाल सिर्फ उनके अपने निवास संबंधी दस्तावेज तक सीमित नहीं थे। सांसदों ने चर्चा की कि जिस देश में वह काम करेंगे, वहां परिवार के हित और संपत्ति राजनयिक भूमिका में जिम्मेदारियों का टकराव पैदा कर सकते हैं या नहीं। कुछ सदस्यों ने उनकी योग्यता और नैतिक उपयुक्तता पर भी सवाल किए।

श्रेष्ठ ने विदेश मंत्रालय के ऐसे पत्र का इंतजार करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें स्थायी निवास छोड़ने और इस बात, दोनों पर जानकारी हो कि क्या थापा को सरकारी धन से पैसे मिले थे। समिति ने स्पष्टीकरण मिलने तक नामांकन लंबित रखने पर सहमति जताई।

इंतजार करने को लेकर सदस्यों में मतभेद

कबीन्द्र बुर्लाकोटी ने दलील दी कि जरूरी दस्तावेज आने तक थापा का नामांकन रोककर रखा जाना चाहिए। वर्षमान पुन की राय अलग थी। उनका कहना था कि समिति को नामांकन खारिज कर देना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद मधुकुमार चौलागाईं ने इंतजार करने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि समिति ने जब और जानकारी के लिए पत्र लिखा है, तो जवाब आने से पहले फैसला करना अनुचित होगा।

सीपीएन-यूएमएल की सांसद पद्माकुमारी अर्याल ने भी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दस्तावेजों की जांच का समर्थन किया। उन्होंने थापा के बारे में सकारात्मक बात कही और कोई बाधा न होने पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने का समर्थन किया, साथ ही माना कि समिति को मांगे गए दस्तावेजों का इंतजार करना चाहिए।

विरोधी विचार सुनने के बाद श्रेष्ठ ने बैठक स्थगित कर दी। अगला कदम दशैं के बाद फैसला लेना था, जो दस्तावेज मिलने और उनकी जांच पर निर्भर था। बैठक की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई।

इस नतीजे के बाद थापा की स्थिति सुनार और खरेल से अलग रही। उनका नामांकन विचार के लिए खुला रहा और समिति उस जानकारी का इंतजार कर रही थी जिसे सदस्य फैसला लेने के लिए जरूरी मानते थे।

मंजूरी पाने वाले 10 उम्मीदवार

समिति ने एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के 10 देशों में नियुक्तियों के लिए उम्मीदवारों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इन मंजूरियों में भारत, चीन और अमेरिका भी शामिल थे।

मंजूर किए गए उम्मीदवार थे:

  • भारत: डॉ. निश्चल नाथ पांडे।
  • चीन: डॉ. कल्याण राज शर्मा।
  • अमेरिका: चिरण जंग थापा।
  • यूनाइटेड किंगडम: गौरव शमशेर जंग बहादुर राणा।
  • जर्मनी: सरु जोशी।
  • इजराइल: सुरेश कुमार कर्ण।
  • ओमान: डॉ. पद्माक्षी राणा।
  • दक्षिण कोरिया: प्रो. डॉ. संगम श्रेष्ठ।
  • स्पेन: प्राप्ति शेरचन।
  • श्रीलंका: डॉ. मञ्चला कुमारी झा।

मंजूरी के बाद ये नामांकन नियुक्ति प्रक्रिया में आगे बढ़ सके। समिति की घोषणा संसदीय समर्थन से जुड़ी थी; इसमें उम्मीदवारों के पदभार संभालने की तारीखें नहीं दी गईं।

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पहले विवादित नामांकन वापस ले लिए गए थे

इन दो अस्वीकृतियों को नेपाल के संसदीय इतिहास में राजदूत पदों के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित उम्मीदवारों के नामांकन खारिज किए जाने की पहली संभावित घटना बताया गया। पहले विवादित नामांकन समिति द्वारा औपचारिक रूप से खारिज किए जाने से पहले ही नाम वापस लिए जाने पर खत्म हुए थे।

एक उदाहरण शैलजा आचार्य का है, जिन्हें गिरिजा प्रसाद कोइराला के प्रधानमंत्री रहते भारत में राजदूत के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी। पारिवारिक संबंध को लेकर उनके नामांकन की आलोचना हुई और संसदीय सुनवाई प्रक्रिया में सवाल उठने की आशंका के बीच सरकार ने उनका नाम वापस ले लिया।

दूसरा उदाहरण रामकृष्ण भट्टराई का है, जिन्हें नेपाल के कैलेंडर के वर्ष 2081 में श्रीलंका में राजदूत बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र पर सवाल उठे और उन्होंने खुद अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली।

सुनार और खरेल को भी नाम वापस लेने का मौका दिया गया था। दोनों ने अपने नामांकन समिति के सामने बनाए रखने का फैसला किया। इसके बाद सदस्यों ने दोनों नामों पर अलग-अलग मतदान किया और सर्वसम्मति से उन्हें खारिज कर दिया। समिति के इन फैसलों के चलते उनकी मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया रुक गई।

सऊदी अरब और मलेशिया के पद क्यों अहम हैं

विदेश में रोजगार तलाशने वाले नेपाली कामगारों के लिए सऊदी अरब और मलेशिया प्रमुख गंतव्य हैं। बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक इन दोनों देशों में काम करते हैं। इसलिए वहां के दूतावासों की नागरिकों के हितों की रक्षा, श्रम संबंधी समस्याओं को सुलझाने में मदद और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में अहम भूमिका होती है।

इसलिए खरेल के कथित भर्ती संबंध मलेशिया में प्रस्तावित नियुक्ति के लिए सीधे तौर पर प्रासंगिक थे। विदेश में नौकरियों की व्यवस्था करने वाले कारोबार उन्हीं कामगारों से जुड़े हैं जिनके हितों का प्रतिनिधित्व दूतावास को करना होता है। सुनवाई में जांच की गई कि क्या इन कारोबारों से उनके संबंध इस जिम्मेदारी के साथ टकराव पैदा कर सकते हैं।

सुनार की सुनवाई का मुख्य केंद्र उनका निजी आचरण और नैतिक चरित्र था। सदस्यों ने इन सवालों को यह तय करने का हिस्सा माना कि सऊदी अरब में नेपाल का प्रतिनिधित्व किसे करना चाहिए। उन्होंने अपना आकलन सिर्फ योग्यताओं और सुनवाई में दी गई प्रस्तुति तक सीमित नहीं रखा।

अब सरकार को तय करना होगा कि दोनों खारिज पदों के लिए आगे कैसे बढ़ा जाए। नए उम्मीदवारों या नए नामांकन के लिए कोई समयसीमा घोषित नहीं की गई। इस बीच जापान में नियुक्ति की प्रक्रिया मांगे गए दस्तावेजों और समिति के आगे के फैसले पर निर्भर रही।

इस समूह में मंत्रिमंडल की एक ही सिफारिश से तीन तरह के नतीजे सामने आए: 10 उम्मीदवारों को मंजूरी, दो को अस्वीकृति और एक की जांच जारी। खारिज उम्मीदवारों के लिए समिति के सर्वसम्मत मतों ने नियुक्ति का उनका मौजूदा रास्ता बंद कर दिया। थापा के लिए तत्काल काम दस्तावेजों से जुड़े बाकी सवाल सुलझाना था।

मुख्य बातें

  • संसदीय सुनवाई समिति ने सऊदी अरब के लिए गिरि बहादुर सुनार और मलेशिया के लिए चुडा मणि खरेल का नामांकन सर्वसम्मति से खारिज किया।
  • सुनार से आचरण, एक महिला को कथित धमकी, वित्तीय मामलों और कथित निर्वासन को लेकर सवाल किए गए। उन्होंने आरोपों से इनकार किया।
  • खरेल से पैसों, भर्ती कारोबारों से संबंधों और योग्यताओं को लेकर सवाल किए गए। उन्होंने आरोपों से इनकार किया।
  • जापान के लिए ज्ञान कुमार थापा का नामांकन स्थायी निवास और मांगी गई अन्य जानकारी की पुष्टि के इंतजार में लंबित रहा।
  • समिति ने 13 में से 10 उम्मीदवारों को मंजूरी दी, जिनमें भारत, चीन और अमेरिका के लिए प्रस्तावित उम्मीदवार शामिल थे।
  • थापा पर फैसला दशैं के बाद होने की उम्मीद थी। बैठक की कोई निश्चित तारीख या नए उम्मीदवारों की समयसीमा घोषित नहीं की गई।
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