प्रवर्तन का दायरा बढ़ने के बीच 617 कुत्तों को इच्छामृत्यु दी गई
हांगकांग के कृषि, मत्स्य पालन और संरक्षण विभाग (AFCD) ने पांच वर्षों में 2,220 बेसहारा कुत्तों को पकड़ा, जिनमें से 617 को इच्छामृत्यु दी गई। यह पकड़े गए कुत्तों का लगभग 28 प्रतिशत, यानी करीब हर चार में से एक है। सरकार कुत्तों को छोड़ने और उनके नियंत्रण से जुड़े कानूनों की समीक्षा तथा सख्त प्रवर्तन की तैयारी कर रही है।
विषय-सूची
- प्रवर्तन का दायरा बढ़ने के बीच 617 कुत्तों को इच्छामृत्यु दी गई
- चार महीने का अभियान कहां केंद्रित होगा
- घातक हमलों के बाद बदलाव की मांग
- जानवरों को छोड़ने के मामलों में मुकदमा चलाना मुश्किल क्यों
- प्रस्तावित कानूनी समीक्षा में क्या शामिल है
- चार दिन की अवधि तलाश के लिए है, इच्छामृत्यु की समय सीमा नहीं
- केंद्रों में देखभाल और गोद लेने की प्रक्रिया
- बचावकर्ताओं ने स्वभाव के आकलन पर सवाल उठाए
- सरकार के 2015 के रुख से बदलाव
- मुख्य बिंदु
घातक कुत्ता हमलों के बाद तेज हुई बहस में इन आंकड़ों ने पशु कल्याण को जन सुरक्षा के साथ केंद्र में ला दिया है। 8 अक्टूबर 2026 को घोषित एक विशेष अभियान चार महीने तक चलेगा। इसका लक्ष्य वे स्थान हैं जहां कुत्तों ने लोगों पर हमला किया है या जहां आवारा कुत्ते जमा होते हैं।
पर्यावरण और पारिस्थितिकी सचिव त्से चिन-वान ने कहा है कि सरकार 2026 के अंत तक प्रस्तावित कानूनी बदलावों पर विधान परिषद से परामर्श करना चाहती है और 2027 के दौरान संशोधन पूरे करने का लक्ष्य रखती है। समीक्षा में जानवरों को छोड़ने और कुत्तों पर ठीक से नियंत्रण न रखने के लिए अधिक कड़ी सजा देने की संभावना शामिल है।
पांच वर्षों में पकड़े गए कुत्तों की कुल संख्या का सालाना औसत 444 है। इस कुल में ठीक-ठीक कौन-से कैलेंडर वर्ष शामिल हैं और बाकी 1,603 कुत्तों के साथ क्या हुआ, इसका ब्यौरा नहीं दिया गया। इन आंकड़ों को समझने के लिए यह भी देखना जरूरी है कि कुत्ते सरकारी देखरेख में कैसे आते हैं: केंद्रों में सड़कों से पकड़े गए जानवर, मालिकों द्वारा सौंपे गए पालतू जानवर और जांच के सिलसिले में रखे गए कुत्ते आते हैं।
निवासियों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात एक और हमले को रोकना है। बचाव संगठनों के लिए यह सुनिश्चित करना कि डरे हुए या मुश्किल व्यवहार वाले कुत्तों को घर मिलने का उचित मौका मिले। सरकार की योजनाएं इन दोनों चिंताओं को ऐसी व्यवस्था के जरिए जोड़ती हैं जो जिम्मेदार देखभालकर्ताओं की पहचान, जानवरों के आकलन और गोद लेने के लिए जगह उपलब्ध कराने पर निर्भर है।
चार महीने का अभियान कहां केंद्रित होगा
सरकार की 8 अक्टूबर की घोषणा के मुताबिक, AFCD उन जगहों को प्राथमिकता देगा जहां राहगीरों पर हमले हुए हैं या आवारा कुत्तों के झुंड जमा हुए हैं। जरूरत पड़ने पर पुलिस विशेष प्रवर्तन अभियानों में शामिल होगी।
AFCD का कहना है कि हांगकांग के घनी आबादी वाले माहौल में बेसहारा कुत्ते निवासियों और अन्य जानवरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विभाग रेबीज का टीका न लगे कुत्तों को भी जन स्वास्थ्य और पशु स्वास्थ्य के लिए खतरा मानता है। रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने से फैल सकती है।
कुत्ते को पकड़ने के बाद कर्मचारी उसकी माइक्रोचिप और वैध लाइसेंस की जांच करेंगे, पंजीकरण संबंधी जानकारी से उसके देखभालकर्ता से संपर्क करेंगे और लापता जानवरों के रिकॉर्ड देखेंगे। पर्याप्त सबूत होने पर देखभालकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है।
युएन लॉन्ग में पोक वाई साउथ रोड के पास हाल ही में पांच दिन तक चले संयुक्त अभियान में आठ बेसहारा कुत्ते पकड़े गए। तीन के पास माइक्रोचिप थी, लेकिन उनके लाइसेंस की अवधि समाप्त हो चुकी थी। अभियान के दौरान AFCD के एक कर्मचारी के हाथ पर कुत्ते ने काट लिया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी हालत स्थिर बताई गई।
AFCD ने 5 अक्टूबर को क्वाई चुंग में वो यी हॉप रोड के पास बिना माइक्रोचिप वाला एक कुत्ता भी पकड़ा। यह लक्षित अभियान उस नियमित तरीके से अधिक व्यापक प्रवर्तन का संकेत देता है, जिसका जिक्र न्यू टेरिटरीज नॉर्थ एनिमल मैनेजमेंट सेंटर की पशु चिकित्सा अधिकारी चान चिंग-मान ने पहले किया था। उन्होंने कहा था कि कर्मचारी लोगों की शिकायतों पर आवारा कुत्तों को पकड़ते हैं।
घातक हमलों के बाद बदलाव की मांग
युएन लॉन्ग में घर साइकिल से लौटते समय तीन आवारा कुत्तों के कथित हमले के बाद 27 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई। एक अन्य घातक घटना ता क्वु लिंग के लाइसेंस प्राप्त पशु आश्रय में 33 वर्षीय महिला के साथ हुई।
अन्य घटनाओं में एक बड़े कुत्ते, जिसके स्पेनिश मास्टिफ होने की खबर थी, ने युएन लॉन्ग में दो छोटे पालतू कुत्तों को मार डाला। त्से ने कहा कि AFCD और पुलिस लोगों तथा जानवरों पर हाल के हमलों के कारणों की जांच कर रहे हैं और उन्होंने प्रवर्तन तथा नियंत्रण के कदम उठाए हैं।
केंद्रों के कामकाज के हालिया ब्यौरे में बताए गए तीन वर्षों के दौरान AFCD को हर साल लोगों को कुत्तों के काटने की लगभग 800 से 900 शिकायतें मिलीं। काटने की घटनाओं से जुड़े कुत्तों को निगरानी के लिए रखा जा सकता है। तस्करी के मामलों से जुड़े जानवरों और मालिकों द्वारा सौंपे गए कुत्तों को भी केंद्रों में रखा जाता है।
प्रवर्तन और कानून बनाने के कार्यक्रम की प्रमुख तारीखें:
- 5 अक्टूबर 2026: AFCD ने क्वाई चुंग में वो यी हॉप रोड के पास बिना माइक्रोचिप वाला एक कुत्ता पकड़ा।
- 8 अक्टूबर 2026: विभाग ने चार महीने तक चलने वाला विशेष अभियान शुरू किया।
- 2026 के अंत तक: सरकार प्रस्तावित संशोधनों पर विधान परिषद से परामर्श करने की योजना बना रही है।
- 2027 के दौरान: सरकार का लक्ष्य कानूनी बदलाव पूरे करना है।
जानवरों को छोड़ने के मामलों में मुकदमा चलाना मुश्किल क्यों
रेबीज अध्यादेश की धारा 22 के तहत, उचित कारण के बिना किसी जानवर को छोड़ना उसके देखभालकर्ता के लिए अपराध है। इसके लिए अधिकतम 10,000 हांगकांग डॉलर का जुर्माना और छह महीने की कैद हो सकती है। AFCD ने 2020 से 2025 तक इस प्रावधान के तहत कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया।
मुश्किल यह साबित करना है कि जानवर बेसहारा कैसे हुआ। देखभालकर्ता कह सकता है कि कुत्ता भाग गया या खो गया। जांचकर्ताओं को यह साबित करने लायक सबूत जुटाने होते हैं कि जानवर को छोड़ा गया था, न कि सिर्फ यह पता लगाना कि कुत्ता अपने पंजीकृत पते से दूर मिला।
विधान परिषद की खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण स्वच्छता समिति की अध्यक्ष रेबेका चान होई-यान ने कहा कि ग्रामीण इलाकों के मालिक कुत्तों के खुले घूमने की बात कह सकते हैं, जबकि दूसरे यह कह सकते हैं कि जानवर का पट्टा टूट गया था। उन्होंने निगरानी तकनीक, जन शिक्षा और प्रवर्तन को अधिक प्रभावी बनाने वाले बदलावों की मांग की।
बैरिस्टर और सांसद एलेक्स फैन होई-किट ने दलील दी कि मौजूदा कानून में अब भी मुकदमा चलाने के रास्ते हैं। उन्होंने एक ऐसे प्रावधान का हवाला दिया जिसके तहत जानवर को पकड़ने के 96 घंटे के भीतर AFCD या पुलिस को सूचना न देना अपराध है। उनके मुताबिक, इससे जानवर को छोड़ा हुआ मानने का आधार मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतें यह देख सकती हैं कि मालिक ने पालतू जानवर के लापता होने की सूचना दी थी या नहीं, बजाय इसके कि उसके भटक जाने की दलील अपने आप स्वीकार कर ली जाए।
अधिकारी अक्सर लाइसेंस संबंधी उल्लंघनों या कुत्तों पर पर्याप्त नियंत्रण न रखने के मामलों में कार्रवाई करते हैं। पाव्स गार्जियन रेस्क्यू शेल्टर के संस्थापक केंट लुक का युएन लॉन्ग अभियान के बाद अमान्य लाइसेंस और सार्वजनिक स्थान पर कुत्ते को नियंत्रित न करने के लिए धारा 20 और 23 के तहत अभियोजन हुआ। उन पर जानवर को छोड़ने का आरोप नहीं लगाया गया।
प्रस्तावित कानूनी समीक्षा में क्या शामिल है
त्से ने कहा है कि सरकार अधिक कड़ी सजा देने पर विचार करेगी, क्योंकि चिंता है कि जानवरों को छोड़ने और उन पर पर्याप्त नियंत्रण न रखने के लिए मौजूदा दंड का निवारक असर बहुत कम है। अधिकारी लड़ाकू कुत्तों और ज्ञात खतरनाक कुत्तों की परिभाषाओं में बदलाव पर भी विचार कर रहे हैं, संबंधित समूहों की राय ले रहे हैं और अन्य जगहों के नियमों की पड़ताल कर रहे हैं।
कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र के सांसद चान पोक-ची ने गंभीर उपेक्षा, जानवरों को छोड़ने या उनके साथ क्रूरता के लिए जिम्मेदार लोगों पर दोबारा कुत्ता रखने पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रतिबंध किसी खास अपराध की सजा के साथ-साथ बार-बार जानवर पालने पर भी लागू होगा।
मौजूदा नियमों के तहत पांच महीने से अधिक उम्र के कुत्तों के लिए माइक्रोचिप, रेबीज टीका और लाइसेंस अनिवार्य है। टीकाकरण और लाइसेंस का नवीनीकरण तीन साल से अधिक के अंतराल पर नहीं होना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को पट्टे या किसी अन्य प्रभावी तरीके से नियंत्रण में रखना जरूरी है।
त्से ने यह भी कहा कि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जिसके तहत कोई व्यक्ति सिर्फ किसी और की ओर से कुत्ते की माइक्रोचिप अपने नाम दर्ज कराए और देखभालकर्ता की जिम्मेदारियों से बच जाए। AFCD लाइसेंस आवेदन पत्रों की भाषा अधिक स्पष्ट करने पर विचार कर रहा है, ताकि आवेदकों को उनकी जिम्मेदारियों की याद दिलाई जा सके। लुक ने कहा है कि करीब 4,000 कुत्तों के पंजीकृत देखभालकर्ता वही हैं। इनमें ज्यादातर वे आवारा कुत्ते हैं जिन्हें उनके संगठन ने बचाया है।
चार दिन की अवधि तलाश के लिए है, इच्छामृत्यु की समय सीमा नहीं
AFCD ने उन दावों को खारिज किया है कि पकड़े गए कुत्तों को चार दिन बाद अपने आप इच्छामृत्यु दे दी जाती है। विभाग ने अपने अभियानों को लेकर जताई गई चिंताओं के जवाब में एक बयान में इस अवधि का उद्देश्य समझाया:
कानून में तय चार दिन की अवधि केवल वह वैधानिक समय सीमा है, जिसमें AFCD को पूछताछ करके देखभालकर्ताओं का पता लगाना होता है,
कर्मचारी पहले माइक्रोचिप की जानकारी, लाइसेंस रिकॉर्ड और लापता जानवरों की रिपोर्ट के जरिए देखभालकर्ता को खोजने की कोशिश करते हैं। जिन कुत्तों के देखभालकर्ता नहीं मिलते, उन्हें एनिमल मैनेजमेंट सेंटरों में निगरानी और आकलन के लिए रखा जाता है। उन्हें पशु कल्याण संगठन में भेजने में कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं। यह उनके स्वास्थ्य, स्वभाव और संगठन के पास उपलब्ध जगह पर निर्भर करता है।
सरकार के 2015 के कल्याण संबंधी जवाब में, जिसे तत्कालीन खाद्य और स्वास्थ्य सचिव डॉ. को विंग-मान ने 28 अक्टूबर को विधान परिषद को दिया था, बताया गया कि माइक्रोचिप के बिना जानवरों को कम से कम चार दिन रखा जाता है। कर्मचारियों द्वारा मालिकों का पता लगाने की कोशिश के दौरान माइक्रोचिप वाले जानवर आमतौर पर करीब 10 से 20 दिन केंद्र में रहते थे।
हाल के अनुभव में इससे ज्यादा समय तक ठहरने के मामले सामने आए हैं। कुत्तों को हिरासत में रखने की औसत अवधि 2023 में 40.7 दिन से बढ़कर 2025 में 53.7 दिन हो गई, यानी 13 दिन या लगभग 32 प्रतिशत की वृद्धि। पशु प्रबंधन अभियानों की जिम्मेदारी संभालने वाली वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी बेट्टी टैन ने बताया कि एक कुत्ता दो साल तक केंद्र में रहा था।
सितंबर 2024 में सौंपे गए स्थानीय मिश्रित नस्ल के एक कुत्ते को मई 2026 में गोद लेने वाला परिवार मिला। फरवरी 2026 में सौंपा गया एक डोबरमैन उसके मामले का ब्यौरा दिए जाने के समय तक नए घर का इंतजार कर रहा था, क्योंकि पशु कल्याण संगठनों के पास उसके आकार के कुत्ते के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी।
केंद्रों में देखभाल और गोद लेने की प्रक्रिया
हांगकांग में चार एनिमल मैनेजमेंट सेंटर हैं। शेंग शुई स्थित न्यू टेरिटरीज नॉर्थ सेंटर में 120 कुत्तों को रखने की जगह है। यहां आवारा जानवर, सौंपे गए पालतू जानवर और जांच से जुड़े जानवर रखे जाते हैं।
चान चिंग-मान ने बताया कि कर्मचारी कुत्तों को दिन में दो बार खाना देते हैं और सफाई, कृमिनाशक उपचार, बुनियादी चिकित्सा देखभाल तथा अन्य जरूरी ध्यान देते हैं। लोगों से डरने वाले कुत्तों को इंसानी संपर्क का आदी बनाने के लिए कर्मचारी भोजन का सहारा भी लेते हैं। काटने के मामलों में रेबीज की पशु चिकित्सा निगरानी आमतौर पर काटने की तारीख से सात दिन तक चलती है।
AFCD का कहना है कि अच्छी सेहत और सौम्य स्वभाव वाले कुत्तों को नसबंदी और गोद लेने के लिए सहयोगी पशु कल्याण संगठनों के पास भेजा जा सकता है। नसबंदी से प्रजनन रुकता है; गोद लेने पर कुत्ते को नया देखभालकर्ता मिलता है। केंद्र अस्थायी ठिकाने का काम करते हैं, जबकि पशु कल्याण सहयोगी कुत्ते को घर दिलाने की अगली प्रक्रिया संभालते हैं।
केंद्रों के हालिया ब्यौरे में बताए गए तीन वर्षों के दौरान हर साल लगभग 260 से लेकर 300 से अधिक कुत्तों को गोद लेने के लिए पशु कल्याण संगठनों के पास भेजा गया। गोद लेने का अनुपात करीब 40 प्रतिशत तक पहुंचा। हर साल इच्छामृत्यु दिए गए कुत्तों की संख्या 372 से 436 के बीच रही। केंद्रों के ये आंकड़े पकड़े गए बेसहारा कुत्तों की पांच साल की कुल संख्या से अधिक व्यापक हैं, क्योंकि केंद्रों में मालिकों द्वारा सौंपे गए जानवर और अन्य तरीकों से लाए गए कुत्ते भी आते हैं।
स्वस्थ जानवरों को भी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, जब उन्हें लेने वाले संगठन भरे हों। डोबरमैन का मामला दिखाता है कि कुत्ते का आकार उसे जगह मिलने पर असर डाल सकता है, जबकि मिश्रित नस्ल के कुत्ते को आखिरकार गोद लिया जाना दिखाता है कि कई महीने बाद भी उसे घर मिल सकता है।
बचावकर्ताओं ने स्वभाव के आकलन पर सवाल उठाए
लुक बेसहारा कुत्तों को पकड़ने और गैर-जिम्मेदार देखभालकर्ताओं पर जुर्माना लगाने का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्होंने स्वभाव के आकलन में पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पकड़ते समय बांधे जाने और अपरिचित जगह पर रखे जाने से कुत्ते डर सकते हैं, जिससे कर्मचारियों के आसपास उनका व्यवहार प्रभावित हो सकता है।
लुक का अनुमान है कि 100 में से केवल दो या तीन कुत्ते आकलन में सफल हो पाते हैं। उनका अनुमान आकलन के चरण से संबंधित है, जबकि AFCD द्वारा बताया गया करीब 40 प्रतिशत गोद लेने का अनुपात केंद्र के कुत्तों के कुल नतीजों को दर्शाता है। इस प्रक्रिया की पूरी तस्वीर के लिए पकड़ने से लेकर आकलन, स्थानांतरण और आखिर में नया घर मिलने तक के आंकड़ों की जरूरत होगी।
AFCD का कहना है कि निगरानी, पशु चिकित्सा देखभाल और व्यवहार सुधारने में मदद, कुत्तों को गोद लेने के लिए तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। विभाग के मुताबिक, जानवरों की सेहत और स्वभाव के साथ-साथ पशु कल्याण संगठनों की उन्हें लेने की क्षमता को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
लुक ने आवारा कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी करने और फिर छोड़ने की भी वकालत की है। इस तरीके को आम तौर पर टीएनआर कहा जाता है। इसमें नसबंदी के बाद जानवरों को समुदाय में वापस छोड़ दिया जाता है। इसके बजाय AFCD की घोषित नीति उपयुक्त कुत्तों को पशु कल्याण सहयोगियों के पास भेजने की है। विभाग का कहना है कि देखभालकर्ता न मिलने वाले कुत्तों को सुरक्षा जोखिमों के कारण समुदाय में वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
सरकार के 2015 के रुख से बदलाव
डॉ. को के 2015 के विधान परिषद जवाब में कहा गया था कि सरकार के पास जानवरों को छोड़ने की सजा बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। उसका मुख्य जोर शिक्षा, जिम्मेदार ढंग से जानवर पालने, गोद लेने और मुफ्त नसबंदी सेवाओं के लिए पशु कल्याण संगठनों के साथ सहयोग पर था।
जवाब में 2013 में जानवर छोड़ने के एक मामले में दोष सिद्ध होने और 500 हांगकांग डॉलर का जुर्माना लगाए जाने का जिक्र था, जबकि कानून में अधिकतम जुर्माना 10,000 हांगकांग डॉलर था। इसमें कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर आवारा घूमने देने के लिए दोषसिद्धि के आंकड़े भी दिए गए थे: 2010 में 365, 2011 में 325, 2012 में 355, 2013 में 296 और 2014 में 331।
अधिकारियों ने बताया था कि उस जवाब में शामिल पांच वर्षों के दौरान आवारा जानवरों से होने वाली परेशानी की शिकायतें 38 प्रतिशत घटीं, आवारा जानवरों को पकड़ने की संख्या 36 प्रतिशत कम हुई और इच्छामृत्यु दिए गए जानवरों की संख्या 40 प्रतिशत घटी। AFCD ने 2015-16 वित्त वर्ष में पशु देखभाल शिक्षा और प्रचार के लिए 50 लाख हांगकांग डॉलर आवंटित किए थे।
उसी जवाब में सभी जानवरों को केंद्रों में अधिक समय तक रखने की मांग खारिज कर दी गई थी। इसकी वजह चारों केंद्रों का पहले से काफी इस्तेमाल, आने वाले जानवरों के लिए जगह कम होना और भीड़ से बीमारी फैलने का जोखिम बताया गया था। लंबे समय तक गोद न लिए गए जानवरों को रखने के लिए जरूरी संसाधनों का हवाला देते हुए इच्छामृत्यु शून्य करने का लक्ष्य अपनाने से भी इनकार किया गया था।
2026 में प्रस्तावित परामर्श, सजा के मामले में सरकार के उस पुराने रुख से बदलाव का संकेत है। इसका व्यावहारिक असर अंतिम कानूनी प्रावधानों, सबूत जुटाने और कुत्तों को पकड़ने के बाद उनकी देखभाल की क्षमता पर निर्भर करेगा। AFCD के तरीके में शिक्षा अब भी शामिल है। अधिकारी जानवरों के केंद्रों तक पहुंचने से पहले उन्हें छोड़े जाने की घटनाएं कम करना चाहते हैं।
मुख्य बिंदु
- AFCD ने पांच वर्षों में 2,220 बेसहारा कुत्तों को पकड़ा और 617 को इच्छामृत्यु दी। यह कुल संख्या का लगभग 28 प्रतिशत है।
- 8 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ विशेष अभियान चार महीने तक उन जगहों पर केंद्रित रहेगा जहां हमले हुए हैं या आवारा कुत्ते जमा होते हैं।
- सरकार 2026 के अंत तक कानूनों में प्रस्तावित बदलावों पर परामर्श करने और 2027 में संशोधन पूरे करने का लक्ष्य रखती है।
- रेबीज अध्यादेश की धारा 22 के तहत 2020 से 2025 तक जानवरों को छोड़ने के लिए कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
- चार दिन की वैधानिक अवधि देखभालकर्ताओं का पता लगाने के लिए है। कुत्ते हफ्तों, महीनों या उससे अधिक समय तक देखरेख में रह सकते हैं।
- हिरासत में रखने की औसत अवधि 2023 में 40.7 दिन से बढ़कर 2025 में 53.7 दिन हो गई।
- उपयुक्त कुत्तों को नसबंदी और गोद लेने के लिए पशु कल्याण सहयोगियों के पास भेजा जा सकता है। AFCD का कहना है कि देखभालकर्ता न मिलने वाले कुत्तों को समुदाय में वापस नहीं छोड़ा जाएगा।






