बेहतर वृद्धि अनुमान, लेकिन घरेलू बजट पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अक्टूबर 2026 के विश्व आर्थिक परिदृश्य में अनुमान है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026-27 और 2027-28, दोनों वर्षों में 7% की दर से बढ़ेगी। अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि 7.8% रही थी। बेहतर अनुमान के साथ घरेलू बजट के लिए कम सहज तस्वीर भी है: 2026-27 में उपभोक्ता महंगाई 5% रहने का अनुमान है, जबकि IMF का मानना है कि 2026 में कच्चे तेल का औसत भाव 95.74 डॉलर प्रति बैरल रहेगा, जो 2025 से करीब 41% अधिक है।
विषय-सूची
- बेहतर वृद्धि अनुमान, लेकिन घरेलू बजट पर दबाव
- भारत के वृद्धि अनुमान में बढ़ोतरी के पीछे क्या है?
- अन्य पूर्वानुमानकर्ताओं को भी करीब 7% वृद्धि की उम्मीद
- अनुमान में तेल और जहाजरानी की अहम भूमिका
- महंगाई घरेलू सहारे को कमजोर कर सकती है
- रुपये की कमजोरी से डॉलर में तस्वीर क्यों बदलती है
- वैश्विक वृद्धि का दायरा सिमट रहा है
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता मांग को सहारा देती है, लेकिन जोखिम भी पैदा करती है
- एक और झटके को झेलने के लिए सरकारों के पास गुंजाइश कम
- मुख्य बातें
2026-27 के लिए भारत का अनुमान IMF के जुलाई के 6.4% के अनुमान से 0.6 प्रतिशत अंक अधिक है। 2027-28 के लिए उसका अनुमान 6.7% से 0.3 प्रतिशत अंक बढ़ा है। मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की गतिविधियों और निवेश ने पश्चिम एशिया के संघर्ष से पैदा हुई बाधाओं के बावजूद अर्थव्यवस्था को टिकाए रखने में मदद की है।
तारीखों का फर्क अहम है। भारत का वित्त वर्ष 2027 यानी FY27 अप्रैल 2026 से मार्च 2027 तक है, जबकि FY28 अप्रैल 2027 से मार्च 2028 तक चलेगा। IMF के वैश्विक अनुमान कैलेंडर वर्ष के आधार पर हैं। भारत की अनुमानित 7% वृद्धि के साथ दुनिया की वृद्धि 2026 में 3.1% और 2027 में 3.4% रहने का अनुमान है।
बेहतर परिदृश्य ऐसे समय आया है जब कमजोर रुपये से भारत की अर्थव्यवस्था का डॉलर में मूल्य घट रहा है। भारत अधिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन कर सकता है, लेकिन अमेरिकी डॉलर में मापे गए लक्ष्य की ओर उसकी प्रगति धीमी हो सकती है। इससे समझ आता है कि वृद्धि का अनुमान बेहतर होने के साथ अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में भारत के आकार का अनुमान कम क्यों हो सकता है।
मुख्य चुनौती यह है कि महंगी ऊर्जा, जहाजरानी में बाधाएं और महंगाई जब घरों और कारोबार से पैसा खींच रही हों, तब खर्च और निवेश को बनाए रखा जाए। IMF का अनुमान है कि 2027 के दौरान इनमें से कुछ बाहरी दबाव धीरे-धीरे कम होंगे।
भारत के वृद्धि अनुमान में बढ़ोतरी के पीछे क्या है?
भारत की अप्रैल-जून की वृद्धि को मजबूत निवेश और विनिर्माण गतिविधियों का सहारा मिला। इससे खनन और सीधे उपभोक्ताओं को लक्षित सेवाओं में कमजोरी की भरपाई हुई। इस प्रदर्शन ने पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि का अनुमान लगाने के लिए पूर्वानुमानकर्ताओं को मजबूत आधार दिया।
सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापता है। वास्तविक GDP वृद्धि में कीमतों में बढ़ोतरी का असर हटा दिया जाता है, जिससे पता चलता है कि देश वास्तव में अधिक उत्पादन कर रहा है या उसी उत्पादन के लिए अधिक कीमत वसूल रहा है।
IMF ने मजबूत घरेलू मांग और सेवाओं की ठोस गतिविधियों को तात्कालिक सहारा बताया है। घरेलू मांग का अर्थ है भारत के भीतर घरों, कारोबारों और सरकार का खर्च। बड़ा घरेलू बाजार कंपनियों को ग्राहक देता है, भले ही विदेशों में व्यापार की परिस्थितियां कठिन हों।
IMF ने भारत की जनसंख्या संबंधी रुझानों, बढ़ते घरेलू बाजार और जारी संरचनात्मक सुधारों को भी वृद्धि क्षमता का आधार बताया है। ये दीर्घकालिक कारक समझाते हैं कि हालिया तिमाही के बाद भी उसका अनुमान मजबूत क्यों बना हुआ है। परिदृश्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े निवेश को भी योगदान देने वाला कारक बताया गया है।
फिर भी, अनुमानित 7% की दर FY26 में दर्ज 7.8% वृद्धि से धीमी है। हालिया बढ़ोतरी का मतलब है कि IMF को पहले के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, लेकिन वह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में सालाना वृद्धि धीमी रहने का अनुमान भी लगा रहा है।
अन्य पूर्वानुमानकर्ताओं को भी करीब 7% वृद्धि की उम्मीद
भारतीय रिजर्व बैंक ने FY27 की वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, जो IMF के अनुमान से थोड़ा अधिक है। विश्व बैंक को भी घरेलू मांग और निर्यात की मजबूती के आधार पर 7.1% वृद्धि की उम्मीद है। उसका पिछला अनुमान 6.6% था। विश्व बैंक ने 2027-28 के लिए 7.2% वृद्धि का अनुमान लगाया है।
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने 2026-27 का अनुमान 6.3% से बढ़ाकर 7.1% किया है। S&P ग्लोबल रेटिंग्स और एशियाई विकास बैंक को 7% वृद्धि की उम्मीद है, जबकि फिच रेटिंग्स का अनुमान 6.9% है।
मूडीज रेटिंग्स ने भारत की मजबूती का हवाला देते हुए FY27 का अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% किया है, हालांकि उसने जोखिम बने रहने की चेतावनी भी दी है। इन अनुमानों को मिलाकर देखें तो वृद्धि का मौजूदा परिदृश्य 6.9% से 7.1% की संकीर्ण सीमा में है।
IMF ने लगातार जारी पूर्वानुमान दौरों में अपने अनुमानों में बदलाव किया। FY27 के लिए अप्रैल में उसका अनुमान 6.5% था, जो जुलाई में 6.4% और अक्टूबर में 7% हो गया। इस तरह अक्टूबर की बढ़ोतरी अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक और जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक है।
अनुमान में तेल और जहाजरानी की अहम भूमिका
IMF का अनुमान है कि कच्चे तेल का औसत भाव 2026 में 95.74 डॉलर और 2027 में 87.39 डॉलर प्रति बैरल रहेगा। इस गणना में ब्रेंट, दुबई फतेह और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट शामिल हैं, जो तेल के तीन व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले मानक भाव हैं। अनुमानित गिरावट करीब 9% है, जिससे 2026 की तेज बढ़ोतरी के बाद कुछ राहत मिल सकती है।
भारत कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर है। ऊंचे भाव से विदेशों में भुगतान बढ़ता है और परिवहन तथा ऊर्जा का इस्तेमाल करने वाले कारोबारों की लागत बढ़ जाती है। इसके बाद घरों को ऊंची कीमतें चुकानी पड़ सकती हैं और दूसरी खरीदारी के लिए उनके पास कम पैसा बच सकता है। इससे घरेलू मांग कमजोर होगी, जो फिलहाल वृद्धि को सहारा दे रही है।
खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा की आपूर्ति का प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य, IMF की मान्यताओं का एक अहम हिस्सा है। कोष का अनुमान है कि यह मार्च 2027 में फिर खुलेगा और अक्टूबर 2027 तक हालात मोटे तौर पर युद्ध से पहले की स्थिति में लौट आएंगे। इसमें जहाजरानी, बीमा और भुगतान व्यवस्थाओं की बहाली भी शामिल है। ये पूर्वानुमान की मान्यताएं हैं; वास्तविक बहाली का समय अभी तय नहीं है।
सितंबर में खाड़ी देशों का कच्चे तेल का निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के औसतन 88% तक पहुंचा, यानी 12% की कमी बनी रही। वैश्विक तेल भंडार से रोज करीब 27 लाख बैरल निकाले जा रहे हैं। भंडारित तेल का इस्तेमाल बाधित आपूर्ति की भरपाई करता है, लेकिन इससे किसी और रुकावट के लिए सुरक्षा घट जाती है।
सोहार एंकरेज पर MT Petro Dolphin और होर्मुज में M/T Valthera से जुड़े हमले जहाजरानी के लिए जारी खतरे को दिखाते हैं। MT Petro Dolphin पर हमले के बाद दो भारतीय नाविकों के लापता होने की खबर आई थी। इन बाधाओं से मालभाड़े और बीमा की लागत प्रभावित हो सकती है, साथ ही तेल की कीमत भी बढ़ सकती है।
अनुमान की प्रमुख तारीखें:
- अप्रैल-जून 2026: भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी, जिससे FY27 का परिदृश्य मजबूत हुआ।
- जुलाई 2026: IMF ने FY27 में भारत की वृद्धि 6.4% और FY28 में 6.7% रहने का अनुमान लगाया।
- अक्टूबर 2026: दोनों वर्षों के अनुमान बढ़कर 7% हो गए।
- मार्च 2027: IMF का अनुमान है कि होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा।
- अक्टूबर 2027: IMF का अनुमान है कि हालात मोटे तौर पर युद्ध से पहले की स्थिति में लौट आएंगे।
महंगाई घरेलू सहारे को कमजोर कर सकती है
भारत में उपभोक्ता महंगाई FY27 में 5% रहने और FY28 में घटकर 4.4% होने का अनुमान है। महंगाई बताती है कि कीमतें कितनी तेजी से बढ़ रही हैं। वेतन बढ़ने पर भी परिवार कम सामान खरीद पाएंगे, अगर भोजन, ईंधन और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें उनकी आय से तेज बढ़ती हैं।
IMF ने भारत का चालू खाते का घाटा FY27 में GDP का 1.5% रहने का अनुमान लगाया है। चालू खाते में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, साथ ही सीमा पार आय और हस्तांतरण दर्ज होते हैं। घाटे का अर्थ है कि विदेशों में भुगतान, प्राप्तियों से अधिक है और इसके लिए देश के बाहर से वित्त जुटाना पड़ता है।
महंगा तेल आयात बिल बढ़ाकर इस घाटे को बढ़ा सकता है। रुपये पर दबाव से आयातित वस्तुएं भारतीय मुद्रा में और महंगी हो सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल घरेलू कीमतों तक पहुंचने का एक और रास्ता बनता है।
सामान्य से कम मानसूनी बारिश एक और जोखिम है, क्योंकि इससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण खर्च घट सकता है। लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर कारोबार की लागत बढ़ा सकता है। इन दबावों का असर अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों पर एक साथ पड़ सकता है, खेतों और परिवहन कंपनियों से लेकर घरों के खरीदारी बजट तक।
रुपये की कमजोरी से डॉलर में तस्वीर क्यों बदलती है
भारत की वास्तविक वृद्धि और डॉलर में उसकी अर्थव्यवस्था का आकार अलग-अलग चीजें मापते हैं। वास्तविक वृद्धि में महंगाई का असर हटाकर उत्पादन में बदलाव देखा जाता है। मौजूदा डॉलर कीमतों पर GDP में घरेलू कीमतों में बदलाव और रुपये को डॉलर में बदलने के लिए इस्तेमाल की गई विनिमय दर भी शामिल होती है।
अनुमानों के मुताबिक वास्तविक वृद्धि FY26 में 7.8% और FY27 में 7% रहेगी, जबकि मौजूदा डॉलर कीमतों पर वृद्धि क्रमशः 4% और 3.9% रहने का अनुमान है। जब डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य घटता है, तो रुपये में मापा गया वही उत्पादन डॉलर में बदलने पर कम रह जाता है।
IMF के अप्रैल और अक्टूबर के अनुमानों के बीच FY27 के लिए मौजूदा डॉलर कीमतों पर भारत के अनुमानित GDP में 93 अरब डॉलर की कटौती हुई। FY28 से FY32 तक के अनुमानों में हर साल 43 अरब से 57 अरब डॉलर तक की कमी की गई।
अनुमानों में FY26 और FY27 के दौरान भारत को तीन साल तक पांचवें स्थान पर रहने के बाद ब्रिटेन से पीछे छठे स्थान पर रखा गया है। FY28 में भारत को ब्रिटेन और जापान से आगे चौथे स्थान पर और FY32 में जर्मनी से आगे तीसरे स्थान पर पहुंचते दिखाया गया है। ये अनुमानित रैंकिंग हैं और आर्थिक प्रदर्शन तथा विनिमय दरों पर निर्भर करती हैं।
इन्हीं गणनाओं के मुताबिक FY29 में भारत 5 लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े से करीब 4 अरब डॉलर पीछे रहेगा। यह लक्ष्य का लगभग 0.08% है, जिसकी गणना 4 अरब डॉलर को 5,000 अरब डॉलर से भाग देकर की गई है। यह लक्ष्य पहले FY25 के लिए रखा गया था, लेकिन महामारी की बाधाओं, GDP के आधार वर्ष में बदलाव के बाद अनुमान के संशोधन और रुपये की कमजोरी से इसकी समयसीमा आगे खिसक गई।
अनुमान FY28-FY32 के दौरान मौजूदा डॉलर कीमतों पर GDP में औसतन 10.7% वृद्धि का संकेत देते हैं, जबकि FY23-FY27 में यह 5.6% थी। इस गति तक पहुंचने के लिए FY26 और FY27 के अनुमानित स्तरों से कहीं अधिक मजबूत डॉलर वृद्धि की जरूरत होगी।
वैश्विक वृद्धि का दायरा सिमट रहा है
IMF ने 2026 में वैश्विक वृद्धि का अनुमान जुलाई के 3% से बढ़ाकर 3.1% किया, जबकि 2027 के लिए इसे 3.4% पर बरकरार रखा। 2025 में विश्व अर्थव्यवस्था 3.5% बढ़ी थी, इसलिए मामूली बढ़ोतरी के बावजूद इस साल धीमी वृद्धि का संकेत है।
चीन की वृद्धि 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रहने का अनुमान है। अमेरिका में दोनों वर्षों के दौरान 2.3% वृद्धि का अनुमान है। दक्षिण कोरिया के 2026 के अनुमान को अप्रैल के 1.9% से बढ़ाकर 3.3% किया गया है, जबकि सेमीकंडक्टर की मांग के सहारे ताइवान की वृद्धि 10.7% रहने का अनुमान है।
2026 में जर्मनी और ब्रिटेन, दोनों की वृद्धि करीब 1.3% रहने का अनुमान है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं की कुल वृद्धि 2.1% और उभरते बाजारों तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की 3.7% रहने का अनुमान है। ब्राजील के 2026 के अनुमान को घटाकर 2.2% और रूस के अनुमान को 0.9% किया गया है।
सबसे गंभीर नुकसान संघर्ष के आसपास के देशों में केंद्रित है। 2026 में बहरीन, इराक, कुवैत और कतर की अर्थव्यवस्थाओं में 10% से अधिक संकुचन का अनुमान है। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था 3.3% सिकुड़ने का अनुमान है, जबकि जुलाई में 1.7% वृद्धि का अनुमान था।
अब केवल 32 अर्थव्यवस्थाओं का वैश्विक वृद्धि में 95% योगदान है, जबकि अप्रैल में यह संख्या 54 थी। वृद्धि अब देशों के एक छोटे समूह पर अधिक निर्भर होती जा रही है, खासकर उन देशों पर जिन्हें प्रौद्योगिकी निवेश से लाभ मिल रहा है या जिनकी ऊर्जा आपूर्ति में कम बाधा है।
IMF की आर्थिक सलाहकार और अनुसंधान विभाग की निदेशक सिल्वाना तेनरेरो ने विश्व अर्थव्यवस्था पर दबाव का जिक्र करते हुए सरकारों से अपने बजट में गुंजाइश फिर से बनाने और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा मजबूत करने का आह्वान किया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत रही है, लेकिन इस मजबूती की भी सीमाएं हैं,
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मांग को सहारा देती है, लेकिन जोखिम भी पैदा करती है
कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश ने युद्ध से हुए नुकसान के एक हिस्से की भरपाई की है। सेमीकंडक्टर, डेटा केंद्रों और बिजली उत्पादन पर खर्च से ऑर्डर और नौकरियां पैदा होती हैं। उत्पादकता में व्यापक सुधार, यानी कामगार और कारोबार कितना उत्पादन कर सकते हैं, बाद में आ सकता है।
तेनरेरो ने कहा कि 2023 से 2025 के बीच AI वस्तुओं का व्यापार 29% बढ़ा, जबकि वैश्विक व्यापार में 8.3% वृद्धि हुई। AI वस्तुओं को अलग कर दें तो व्यापार में वृद्धि 4.6% रहती। ये आंकड़े दिखाते हैं कि हालिया व्यापार की गति प्रौद्योगिकी पर खर्च पर कितनी अधिक निर्भर रही है।
IMF ने चेतावनी दी है कि अपेक्षित मुनाफा और उत्पादकता लाभ निराशाजनक रहने पर निवेशक पैसा निकाल सकते हैं। उसके प्रतिकूल परिदृश्य में अमेरिकी शेयरों का मूल्य 20% गिर सकता है और 2028 तक वैश्विक GDP आधारभूत अनुमान से 1.1% कम हो सकता है। एशिया का उत्पादन उसके आधारभूत अनुमान से 1.7% कम हो सकता है।
शेयर कीमतों में गिरावट खर्च के फैसलों तक फैल सकती है। निवेश का मूल्य घटने पर घर कम खरीदारी कर सकते हैं, जबकि कंपनियां परियोजनाएं रद्द कर सकती हैं या उन्हें वित्त जुटाना अधिक महंगा पड़ सकता है। IMF की वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट AI निवेश और मूल्यांकन में संभावित उलटफेर को लेकर बेफिक्र न रहने की चेतावनी भी देती है।
IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने ब्रेटन वुड्स समिति के एक कार्यक्रम में इस निर्भरता का वर्णन किया।
अब हमारी अर्थव्यवस्था एक ही पैर पर खड़ी है, और वह है AI,
IMF ने एक बेहतर संभावना का भी जिक्र किया है: प्रौद्योगिकी में लगातार निवेश, कारोबारों का अनुकूलन और अनुकूल वित्तपोषण परिस्थितियां ऊर्जा झटके के दौरान गतिविधियों को बनाए रख सकती हैं और आखिरकार उत्पादकता बढ़ा सकती हैं। परिदृश्य कुछ हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि आज का खर्च ये लाभ दे पाता है या नहीं।
एक और झटके को झेलने के लिए सरकारों के पास गुंजाइश कम
IMF ने 2026 में वैश्विक महंगाई 4.7% और 2027 में 4.1% रहने का अनुमान लगाया है। उसके मॉडल के मुताबिक 2027 में महंगाई 5% से ऊपर जाने की संभावना करीब 35% है, जो अप्रैल के 30% से अधिक है।
एक अन्य प्रतिकूल परिदृश्य में, अगर 2027 की पहली तिमाही तक तेल का भाव 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो उस साल वैश्विक वृद्धि 0.5 प्रतिशत अंक घट सकती है। इससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ेगा और उसी समय घरों को ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ेगा।
सरकारी वित्त पर भी दबाव बढ़ रहा है। IMF का अनुमान है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं का सार्वजनिक ऋण 2025 में GDP के 108% से बढ़कर 2031 तक 115% हो जाएगा। उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऋण GDP के 74% से बढ़कर 84% होने की उम्मीद है।
उधारी की लागत बढ़ने का अर्थ है कि सरकारी धन का अधिक हिस्सा ब्याज भुगतान में जाएगा। राजकोषीय गुंजाइश फिर से बनाने का मतलब है सरकारी बजट में आपात स्थिति से निपटने के लिए जगह बनाना, बिना इतना कर्ज लिए जिसकी अदायगी मुश्किल हो जाए।
IMF ने सरकारों से कहा है कि भोजन और ऊर्जा की ऊंची कीमतों से जूझ रहे परिवारों को दी जाने वाली सहायता अस्थायी और लक्षित होनी चाहिए। भारत में सहायता को कमजोर परिवारों तक पहुंचाने से तत्काल दबाव कम होगा और सार्वजनिक वित्त पर बोझ भी सीमित रहेगा।
भारत का 7% वृद्धि अनुमान घरेलू खर्च, सेवाओं और निवेश के जारी रहने तथा 2027 के दौरान ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएं कम होने पर टिका है। अगले वित्त वर्ष में यह भी परखा जाएगा कि महंगाई अनुमानित 4.4% तक घटती है या नहीं, और रुपये की स्थिति मजबूत उत्पादन वृद्धि को डॉलर में तेज बढ़ोतरी में बदलने देती है या नहीं।
मुख्य बातें
- IMF ने FY27 और FY28 में भारत की वृद्धि 7% रहने का अनुमान लगाया है। जुलाई में ये अनुमान क्रमशः 6.4% और 6.7% थे।
- अप्रैल-जून में 7.8% वृद्धि, घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों ने अनुमान में बढ़ोतरी को सहारा दिया।
- RBI और विश्व बैंक ने FY27 में 7.1% वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो IMF के अनुमान से थोड़ा अधिक है।
- भारत में उपभोक्ता महंगाई FY27 में 5% और FY28 में 4.4% रहने का अनुमान है।
- IMF का अनुमान है कि तेल का औसत भाव 2026 में 95.74 डॉलर और 2027 में 87.39 डॉलर प्रति बैरल रहेगा।
- अनुमान में होर्मुज के मार्च 2027 में फिर खुलने और अक्टूबर तक हालात के मोटे तौर पर सामान्य होने की धारणा है।
- रुपये की कमजोरी से डॉलर में भारत के अनुमानित GDP में कमी आई है और आर्थिक रैंकिंग में उसकी बढ़त की रफ्तार धीमी हुई है।
- वैश्विक वृद्धि 2026 में 3.1% और 2027 में 3.4% रहने का अनुमान है। ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएं, कर्ज और AI निवेश में संभावित उलटफेर जोखिम पैदा करते हैं।






