स्क्रीनिंग पायलट से अन्दीजान में प्रशिक्षण तक
उज्बेकिस्तान एक व्यावहारिक चुनौती को ध्यान में रखते हुए कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग प्रणाली बना रहा है: उन लोगों की पहचान करना जिन्हें अधिक गहन जांच की जरूरत है और साथ ही जांच की गुणवत्ता में सुधार करना। डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट ने 10 फरवरी, 2026 को स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय कैंसर केंद्र के साथ एक पायलट कार्यक्रम की घोषणा की। ताशकंद और अन्दीजान में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण भी विशेषज्ञों को एक साथ ला रहा है, ताकि कोलोनोस्कोपी में सुधार हो, संदिग्ध वृद्धि की पहचान की जा सके और जटिल मामलों पर चर्चा हो।
विषय-सूची
- स्क्रीनिंग पायलट से अन्दीजान में प्रशिक्षण तक
- डाना-फार्बर के पायलट कार्यक्रम की शुरुआत
- प्रशिक्षण का आयोजन कौन कर रहा है?
- अलग-अलग तारीखें कैसे जुड़ती हैं
- डॉक्टर किन चीजों की पहचान करना सीख रहे हैं?
- FIT और कोलोनोस्कोपी साथ कैसे काम करते हैं
- 2027 के कैंसर कार्यक्रम से क्या बदलेगा?
- निदान और उपचार का खर्च कौन उठाएगा?
- उपकरणों में निवेश और क्षेत्रीय क्षमता
- मुख्य बातें
पायलट कार्यक्रम में फीकल इम्यूनोकेमिकल टेस्टिंग, जिसे आम तौर पर FIT कहा जाता है, शुरू की जा रही है। इसका उद्देश्य अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान करना और सीमित कोलोनोस्कोपी संसाधनों को उन तक पहुंचाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम इस बात पर केंद्रित है कि इस विस्तृत जांच के दौरान क्या होता है, जिसमें पूरी बड़ी आंत की जांच करना और ऐसे शुरुआती बदलाव पहचानना शामिल है जिनकी आगे जांच जरूरी हो सकती है।
उज्बेकिस्तान की व्यापक कैंसर नीति में एक और अहम तारीख तय है: 1 जनवरी, 2027। उस तारीख से पेट, कोलोरेक्टल, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर को कवर करने वाला राष्ट्रीय कार्यक्रम धीरे-धीरे सभी क्षेत्रों में शुरू होना है। इसके साथ ही कैंसर की तयशुदा जांच और उपचार सेवाओं के लिए राज्य बीमा कवरेज भी लागू होगा।
कोलोरेक्टल कैंसर पाचन तंत्र के अंतिम हिस्सों, यानी बड़ी आंत या मलाशय में विकसित होता है। स्क्रीनिंग से ऐसे चेतावनी संकेतों की पहचान की जाती है, जिनसे व्यक्ति को जरूरी नहीं कि तब तक कोई तकलीफ महसूस हो। उज्बेकिस्तान की पहलें इस प्रक्रिया के तीन हिस्सों को जोड़ती हैं: जांच के लिए लोगों का चयन, असामान्यताओं की पहचान के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण और निदान व उपचार तक पहुंच की व्यवस्था।
अन्दीजान में अभी पेशेवर प्रशिक्षण और क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों की शाखाओं में सुधार पर काम हो रहा है। फरवरी का पायलट, अक्टूबर का प्रशिक्षण कार्यक्रम और 2027 में शुरू होने वाले व्यापक सुधार अलग-अलग तारीखों और दायरों से जुड़े हैं। ये मिलकर बताते हैं कि उज्बेकिस्तान शुरुआती पहचान को विशेषज्ञ सेवा से आगे बढ़ाकर अधिक व्यवस्थित प्रणाली में कैसे बदलना चाहता है।
डाना-फार्बर के पायलट कार्यक्रम की शुरुआत
डाना-फार्बर के सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ ने अपनी 10 फरवरी की घोषणा में इस पहल को मध्य एशिया का पहला कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम बताया। कई चिकित्सा विशेषज्ञताओं के सदस्यों वाली एक टीम FIT स्क्रीनिंग शुरू करने, कोलोनोस्कोपी का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने और कार्यक्रम चलाने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं बनाने में मदद करने उज्बेकिस्तान गई।
FIT में मल के नमूने की जांच कर खून की बेहद कम मात्रा का पता लगाया जाता है, जो आंखों से दिखाई नहीं देती। खून आने के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए जिस नतीजे में आगे जांच की जरूरत हो, उसके बाद विस्तृत आकलन किया जाता है। कोलोनोस्कोपी में चिकित्सक कैमरे लगे एक लचीले उपकरण से आंत के भीतर की जांच करते हैं।
डाना-फार्बर के अनुसार, उज्बेकिस्तान को मजबूत सरकारी समर्थन और कैंसर देखभाल के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में उसकी भूमिका के चलते चुना गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नेताओं ने शुरुआती पायलट के बाद भी इस पहल को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई है। स्थानीय साझेदार और दौरे पर आई टीम प्रक्रियाओं को बेहतर बनाएंगे, आंकड़े जुटाएंगे और पायलट चरण के बाद कार्यक्रम के विस्तार पर विचार करेंगे।
हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट में कैंसर रोकथाम के विंसेंट एल. ग्रेगरी जूनियर प्रोफेसर टिमोथी आर. रेबेक इस पहल के प्रमुखों में से एक हैं। उन्होंने इस साझेदारी का उद्देश्य इन शब्दों में बताया:
यह काम ऐसे कार्यक्रम बनाने के लिए देशों के साथ साझेदारी के बारे में है, जो लंबे समय तक चलें और जिनका वास्तविक असर हो।
प्रशिक्षण का आयोजन कौन कर रहा है?
उज्बेकिस्तान एसोसिएशन ऑफ ऑन्कोलॉजिस्ट्स, रिपब्लिकन स्पेशलाइज्ड साइंटिफिक एंड प्रैक्टिकल मेडिकल सेंटर ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड रेडियोलॉजी और गुस्ताव रूसी इंटरनेशनल उज्बेकिस्तान मेडिकल सेंटर इस अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। राष्ट्रीय कैंसर केंद्र की प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा में डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट और ब्रिघम एंड विमेन्स हॉस्पिटल को साझेदार संस्थानों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
अमेरिका, ब्रिटेन और उज्बेकिस्तान के विशेषज्ञ इसमें हिस्सा ले रहे हैं। केंद्र ने ऐन लियू, प्रने सinha, डेविस हार्नेट, निलुफर क़ाहोरोवा, जैकब डॉक्टरमैन और सेल्विन मारोक्विन को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ टीम के सदस्यों के रूप में नामित किया है।
इस प्रशिक्षण का दायरा कोलोनोस्कोपी करने वाले डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। इसमें एंडोस्कोपिस्ट शामिल हैं, जो कैमरे वाले उपकरणों से शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच करते हैं; कोलोप्रोक्टोलॉजिस्ट, जो बड़ी आंत और मलाशय के विशेषज्ञ हैं; कैंसर विशेषज्ञ; पाचन रोग विशेषज्ञ; सर्जन; और पैथोलॉजिस्ट, जो बीमारी के निदान में मदद के लिए ऊतक की जांच करते हैं।
प्रतिभागियों की यह विविधता बताती है कि असामान्यता मिलने के बाद कितने तरह के काम की जरूरत पड़ती है। चिकित्सक संदिग्ध वृद्धि की पहचान कर सकता है, पैथोलॉजिस्ट ऊतक के नमूने का आकलन कर सकता है और दूसरे विशेषज्ञ तय कर सकते हैं कि किस उपचार की जरूरत है। कार्यक्रम साझा सेमिनारों और जटिल नैदानिक मामलों पर चर्चा के जरिए इन पेशों को एक साथ ला रहा है।
अलग-अलग तारीखें कैसे जुड़ती हैं
कैंसर केंद्र ने ताशकंद में 5 और 6 अक्टूबर को प्रशिक्षण सत्र तय किए, जिसके बाद 8 और 9 अक्टूबर को अन्दीजान में सत्र होने थे। ताशकंद के आयोजन स्थल राष्ट्रीय कैंसर एवं रेडियोलॉजी केंद्र और गुस्ताव रूसी इंटरनेशनल उज्बेकिस्तान मेडिकल सेंटर थे।
14 अक्टूबर, 2026 की एक रिपोर्ट में दौरे पर आई टीम के काम की शुरुआत अन्दीजान से बताई गई है और इस क्षेत्र को उसका पहला पड़ाव कहा गया है, जबकि केंद्र के प्रकाशित प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले ताशकंद का उल्लेख है। इस तरह, दौरे के विवरण और तय सत्रों का क्रम अलग-अलग है।
मुख्य तारीखें:
- 10 फरवरी, 2026: डाना-फार्बर ने उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय कैंसर केंद्र के साथ स्क्रीनिंग पायलट की घोषणा की।
- 5 और 6 अक्टूबर: कैंसर केंद्र ने ताशकंद में व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र तय किए।
- 8 और 9 अक्टूबर: केंद्र ने अन्दीजान में सत्र तय किए।
- 14 अक्टूबर, 2026: एक रिपोर्ट में अन्दीजान में अंतरराष्ट्रीय टीम की प्रशिक्षण गतिविधियों का विवरण दिया गया।
- 1 जनवरी, 2027: व्यापक राष्ट्रीय कैंसर कार्यक्रम और तय बीमा कवरेज का क्षेत्रों में चरणबद्ध क्रियान्वयन शुरू होना है।
अक्टूबर के शैक्षिक कार्यक्रम नैदानिक कौशल पर केंद्रित हैं। डाना-फार्बर की फरवरी की घोषणा में जांच प्रक्रियाओं और कार्यक्रम के बुनियादी ढांचे का भी जिक्र है, जबकि जनवरी 2027 के बदलाव व्यापक राष्ट्रीय कैंसर नीति से जुड़े हैं।
डॉक्टर किन चीजों की पहचान करना सीख रहे हैं?
अन्दीजान की कार्यशालाओं में आधुनिक कोलोनोस्कोपी तकनीकों, पूरी बड़ी आंत की जांच, पॉलीप और शुरुआती नियोप्लास्टिक बदलावों की पहचान तथा संदिग्ध घावों के आकलन पर जोर दिया जा रहा है। घाव ऊतक का ऐसा हिस्सा होता है जो असामान्य दिखता है। नियोप्लास्टिक बदलाव में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होती है, जिसके चिकित्सकीय आकलन की जरूरत होती है।
पॉलीप आंत की अंदरूनी परत पर होने वाली वृद्धि होती है। कुछ समय के साथ कैंसर में बदल सकते हैं। उनकी पहचान करना उन वजहों में से एक है जिनके चलते कैंसर की रोकथाम और शुरुआती निदान के कार्यक्रम में कोलोनोस्कोपी अहम है।
कैंसर केंद्र जांच की गुणवत्ता पर खास ध्यान दे रहा है। पूरी बड़ी आंत को देखना और संदिग्ध हिस्सों का सावधानी से आकलन करना व्यावहारिक कौशल है, केवल आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता का मामला नहीं। कार्यशालाओं में प्रत्यक्ष प्रशिक्षण के साथ वैज्ञानिक सेमिनार और मरीजों के जटिल मामलों पर चर्चा भी शामिल है।
क्षेत्रीय शाखाएं इस प्रयास का अहम हिस्सा हैं। दौरे पर आए विशेषज्ञ और राष्ट्रीय केंद्र के डॉक्टर अन्दीजान में देखभाल बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। इससे स्थानीय विशेषज्ञों को अनुभव साझा करने और मौजूदा चिकित्सा पद्धतियों को अपने रोजमर्रा के काम में लागू करने के अवसर मिल रहे हैं। डाना-फार्बर के पायलट में भी स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देना शामिल है, ताकि दौरे पर आई टीमों के लौटने के बाद विशेषज्ञता उज्बेकिस्तान में बनी रहे।
FIT और कोलोनोस्कोपी साथ कैसे काम करते हैं
डाना-फार्बर की योजना में FIT से तय किया जाता है कि सीमित कोलोनोस्कोपी क्षमता का इस्तेमाल कहां किया जाए। मल की जांच और कैमरे से की जाने वाली जांच के काम अलग हैं: पहली से उन लोगों की पहचान में मदद मिलती है जिन्हें आगे जांच की जरूरत है, जबकि दूसरी से चिकित्सक आंत के भीतर देख सकता है।
जब विशेषज्ञों का समय और जांच की सुविधाएं सीमित हों, तब यह क्रम अहम हो जाता है। सभी लोगों की सीधे कोलोनोस्कोपी करने के लिए कहीं अधिक क्षमता चाहिए होगी। पहले FIT करने से उन लोगों का चयन करने का तरीका मिलता है जिन्हें अधिक गहन जांच की जरूरत है, जबकि प्रशिक्षण कार्यक्रम उस जांच की गुणवत्ता पर ध्यान देता है।
साझेदारों ने पायलट में प्रतिभागियों की संख्या, पात्र आयु सीमा, जांच की अवधि, नतीजे या देशव्यापी विस्तार की समय-सारिणी प्रकाशित नहीं की है। आगे के घोषित कदम हैं: प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना, आंकड़े जुटाना और पायलट के बाद संभावित विस्तार की योजना बनाना।
डाना-फार्बर का कहना है कि उज्बेकिस्तान का सफल मॉडल पड़ोसी देशों में इसी तरह के कार्यक्रमों को दिशा दे सकता है। उसकी घोषणा में उप-सहारा अफ्रीका में प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती पहचान पर समानांतर काम का भी उल्लेख है। उज्बेकिस्तान के लिए तात्कालिक काम अधिक स्पष्ट है: स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में जांच, रेफरल और कुशल चिकित्सकीय परीक्षण के बीच तालमेल बनाना।
2027 के कैंसर कार्यक्रम से क्या बदलेगा?
राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कैंसर की रोकथाम, शुरुआती पहचान और उपचार में सुधार से जुड़ा एक निर्णय हस्ताक्षरित किया है। इसके तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ तैयार राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम को 1 जनवरी, 2027 से क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना है।
कार्यक्रम में पेट, कोलोरेक्टल, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर शामिल हैं। इसके लक्ष्यों में आम कैंसर के लिए लक्षित जांच के जरिए कम से कम 60% आबादी तक पहुंचना, जोखिम कारकों और शुरुआती लक्षणों के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना, निदान और उपचार में सुधार करना तथा मौतों को कम करना शामिल है।
पहचान के लक्ष्य संख्यात्मक हैं। चरण 1 और 2 में पहचाने जाने वाले कैंसर का अनुपात 30% से बढ़ाकर 40% करने का लक्ष्य है। चरण 3 और 4 में पहचाने जाने वाले मामलों का अनुपात 65% से घटाकर 55% करने का लक्ष्य है। चरणों से पता चलता है कि कैंसर कितना विकसित हुआ है या कितना फैल चुका है और इससे डॉक्टरों को उपचार की योजना बनाने में मदद मिलती है।
दोनों लक्ष्य 10 प्रतिशत अंक के बदलाव को दर्शाते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो, इन संकेतकों के तहत हर 100 निदानों में शुरुआती चरण का लक्ष्य 30 के बजाय 40 मामलों का है, जबकि बाद के चरण का लक्ष्य 65 के बजाय 55 मामलों का है। ये व्यापक कैंसर कार्यक्रम के लक्ष्य हैं, कोलोरेक्टल पायलट के प्रकाशित नतीजे नहीं।
नीति का जोर असामान्यताओं की पहचान तक सीमित नहीं है। इसकी प्राथमिकताओं में चिकित्सा देखभाल की गुणवत्ता और निदान के बाद जरूरी सेवाएं भी शामिल हैं, जिससे उपचार शुरू से ही राष्ट्रीय योजना का हिस्सा बनता है।
निदान और उपचार का खर्च कौन उठाएगा?
राज्य स्वास्थ्य बीमा कोष के तहत 1 जनवरी, 2027 से कैंसर की तयशुदा सेवाओं का खर्च सरकारी बजट से वित्तपोषित गारंटीकृत चिकित्सा देखभाल के दायरे में कवर किया जाना है। सूचीबद्ध सेवाओं में शुरुआती जांच, निदान की पुष्टि और उपचार शामिल हैं।
कवरेज में शुरुआती पहचान और रोकथाम के लिए प्रयोगशाला और उपकरणों से की जाने वाली जांच, निदान और चरण निर्धारण, सर्जरी, ट्यूमर के खिलाफ बुनियादी दवाएं, हार्मोनल उपचार, सहायक उपचार और रेडिएशन थेरेपी शामिल हैं। पुनर्वास और लगातार चिकित्सकीय फॉलो-अप भी इसके दायरे में हैं।
सूची में प्रशामक देखभाल भी शामिल है। इसका उद्देश्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के दर्द, दूसरे लक्षणों और मानसिक परेशानी को कम करना है। इसे शामिल करने से नीति का दायरा केवल स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मरीज की बीमारी के अलग-अलग चरणों की जरूरतों को भी संबोधित करता है।
राज्य स्वास्थ्य बीमा कोष के तहत गैर-संचारी रोग नियंत्रण कोष भी बनाया जाएगा। गैर-संचारी रोग वे बीमारियां हैं जो सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलतीं, जैसे कैंसर।
स्क्रीनिंग पायलट अधिक गहन जांच के लिए लोगों का चयन करता है, शैक्षिक कार्यक्रम चिकित्सकीय कौशल बढ़ाता है और बीमा में बदलाव तय सेवाओं के भुगतान से जुड़े हैं। शुरुआती जांच से लेकर उपचार और लगातार देखभाल तक, मरीज की यात्रा के अलग-अलग हिस्सों में हर पहल की भूमिका है।
उपकरणों में निवेश और क्षेत्रीय क्षमता
20 जनवरी को राष्ट्रपति की बैठक में चर्चा के अनुसार, रिपब्लिकन ऑन्कोलॉजी सेंटर के आधुनिकीकरण के लिए 10 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त राशि प्रस्तावित है। प्रस्तावित खरीद में 80 प्रकार के कुल 1,027 चिकित्सा उपकरणों के साथ एक साइक्लोट्रॉन और रेडियोसिंथेसिस प्रयोगशाला शामिल है।
साइक्लोट्रॉन चिकित्सा कार्यों के लिए रेडियोधर्मी सामग्री बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीन है। रेडियोसिंथेसिस प्रयोगशाला चिकित्सा में इस्तेमाल के लिए इन सामग्रियों वाले पदार्थ तैयार करती है। इन सुविधाओं का उद्देश्य रेडियोफार्मास्यूटिकल उत्पाद बनाना है, जिनका उपयोग विशेष निदान और उपचार में किया जा सकता है।
उपकरणों में निवेश प्रशिक्षण प्रयास के साथ-साथ किया जा रहा है, उसकी जगह नहीं ले रहा। अन्दीजान की कार्यशालाओं में इस बात पर ध्यान है कि विशेषज्ञ मरीजों की जांच कैसे करें और नतीजों का आकलन कैसे करें, जबकि आधुनिकीकरण योजना राष्ट्रीय केंद्र में उपलब्ध उपकरणों और सुविधाओं से जुड़ी है।
उज्बेकिस्तान की घोषित रणनीति में क्षेत्रीय प्रशिक्षण, पायलट स्क्रीनिंग व्यवस्था, राष्ट्रीय पहचान लक्ष्य और कैंसर देखभाल के लिए वित्तपोषण शामिल हैं। असली कसौटी यह होगी कि क्या ये आपस में जुड़ी सेवाएं किसी व्यक्ति को शुरुआती स्क्रीनिंग नतीजे से समय पर जांच और उचित देखभाल तक पहुंचा सकती हैं। पायलट का आकलन करने और उसके विस्तार पर फैसला लेने में साझेदारों की प्रस्तावित आंकड़ा-संग्रह प्रक्रिया अहम होगी।
मुख्य बातें
- डाना-फार्बर ने 10 फरवरी, 2026 को उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय कैंसर केंद्र के साथ कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग पायलट की घोषणा की।
- पायलट में FIT मल जांच से उन लोगों की पहचान की जाती है जिन्हें कोलोनोस्कोपी से अधिक गहन जांच की जरूरत है।
- ताशकंद और अन्दीजान में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण में पूरी बड़ी आंत की जांच, पॉलीप, संदिग्ध घाव और जटिल मामलों पर ध्यान दिया जाता है।
- चार तरह के कैंसर को कवर करने वाला व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम 1 जनवरी, 2027 से क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से शुरू होना है।
- राष्ट्रीय लक्ष्यों में शुरुआती चरण में पहचान को 30% से बढ़ाकर 40% करना और बाद के चरण में पहचान को 65% से घटाकर 55% करना शामिल है।
- कैंसर के निदान, उपचार और लगातार देखभाल की तयशुदा सेवाओं का खर्च 1 जनवरी, 2027 से राज्य बीमा के तहत कवर किया जाना है।






