जिजाख में पहली बार कंक्रीट डाला गया
उज्बेकिस्तान ने 4 जून, 2026 को अपने पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण औपचारिक रूप से शुरू किया। जिजाख क्षेत्र के फरिश जिले में एक छोटे रिएक्टर के लिए शुरुआती 133 घन मीटर कंक्रीट डाला गया। प्रस्तावित परिसर में 55 मेगावाट क्षमता वाले दो रिएक्टरों के साथ दो बहुत बड़े VVER-1000 रिएक्टर होंगे, जिससे इसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 2,110 मेगावाट हो जाएगी।
विषय-सूची
राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने निर्माण स्थल को सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ने वाले वीडियो लिंक के जरिए परियोजना की शुरुआत को मंजूरी दी। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित किया। रूस की सरकारी परमाणु निगम रोसाटॉम, उज्बेकिस्तान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी उज़ाटॉम के साथ मिलकर संयंत्र बना रही है।
रोसाटॉम के निर्माण शुरुआत संबंधी बयान के मुताबिक, पहली नींव RITM-200N डिजाइन वाले छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर की है। बड़े रिएक्टर भी इसी एकीकृत परियोजना का हिस्सा हैं, लेकिन पहले छोटे रिएक्टर बनाए जाएंगे।
इस परियोजना में बिजली क्षेत्र का बड़ा निवेश, एक नया परमाणु उद्योग और भारी कर्ज शामिल हैं। उज़ाटॉम के निदेशक अज़ीम अखमेदख़ादज़ायेव ने मूल अनुबंध की कीमत 9.5 अरब डॉलर बताई है। रोसाटॉम के अनुसार, पूरी तरह चालू होने पर संयंत्र से हर साल 17.2 अरब किलोवाट घंटे बिजली पैदा होने की उम्मीद है।
संयंत्र को एकीकृत क्या बनाता है?
उज्बेकिस्तान की इस परियोजना में एक ही स्थल पर अलग-अलग क्षमता के दो तरह के परमाणु रिएक्टर लगाए जा रहे हैं। हर VVER-1000 रिएक्टर से करीब 1,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है, जबकि हर RITM-200N रिएक्टर 55 मेगावाट बिजली पैदा करेगा। रोसाटॉम इस संयोजन को दुनिया का पहला एकीकृत परमाणु ऊर्जा संयंत्र बताता है।
मेगावाट से पता चलता है कि कोई जनरेटर एक निश्चित समय पर कितनी बिजली पैदा कर सकता है। किलोवाट घंटा समय के साथ पैदा या इस्तेमाल की गई बिजली मापता है। पहला आंकड़ा संयंत्र की क्षमता बताता है, जबकि वार्षिक उत्पादन का अनुमान बताता है कि एक साल में इससे कितनी बिजली मिलने की उम्मीद है।
दो बड़े रिएक्टर परियोजना की 2,110 मेगावाट क्षमता में से 2,000 मेगावाट, यानी करीब 95%, का योगदान देंगे। बाकी 110 मेगावाट छोटे रिएक्टरों से आएंगे। इसलिए निर्माण का क्रम अहम है: पहला छोटा रिएक्टर कहीं अधिक बड़ी बिजली आपूर्ति की दिशा में शुरुआती कदम है।
RITM-200N जल-शीतित रिएक्टर है और इसे रूस के परमाणु आइसब्रेकरों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक से विकसित किया गया है। इसका निर्धारित सेवा-काल 60 साल है। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, जिन्हें अक्सर SMR कहा जाता है, पारंपरिक बड़े रिएक्टरों की तुलना में प्रति इकाई कम बिजली पैदा करने के लिए बनाए जाते हैं। ग्रॉसी ने उज्बेकिस्तान की परियोजना को किसी भी SMR का पहला निर्यात ऑर्डर बताया।
परियोजना कैसे आगे बढ़ी
मई 2024 के समझौते में शुरुआत में कुल 330 मेगावाट क्षमता वाले छह RITM-200N रिएक्टर लगाने की योजना थी। बाद में योजना में छोटे और बड़े रिएक्टरों का संयोजन शामिल किया गया। इस सहयोग से जुड़े दस्तावेज सितंबर 2025 में और पूरक निर्माण समझौते पर 24 मार्च, 2026 को हस्ताक्षर हुए।
मौजूदा योजना में प्रस्तावित क्षमता 330 से बढ़कर 2,110 मेगावाट हो गई है, जो मूल आंकड़े से करीब 6.4 गुना है। परियोजना का स्वरूप भी बदला है: दो बड़े रिएक्टर अधिकांश बिजली देंगे, जबकि दो छोटे रिएक्टर भी योजना का हिस्सा बने रहेंगे।
परियोजना के मुख्य पड़ाव कई सालों में फैले हैं:
- 27 मई, 2024: रूस और उज्बेकिस्तान ने 2018 के परमाणु सहयोग समझौते का विस्तार करने वाले प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए, जिसमें छोटे मॉड्यूलर परमाणु संयंत्र को शामिल किया गया। साथ ही निर्माण अनुबंध पर भी हस्ताक्षर हुए।
- 26 सितंबर, 2025: मॉस्को में वर्ल्ड एटॉमिक वीक के दौरान रोसाटॉम और उज़ाटॉम ने सहयोग बढ़ाने वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
- अक्टूबर 2025: पहले छोटे रिएक्टर के लिए खुदाई शुरू हुई।
- 23 मार्च, 2026: उज्बेकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों के लिए स्थल के इस्तेमाल की अनुमति दी।
- 24 मार्च, 2026: पक्षों ने एकीकृत संयंत्र के लिए पूरक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- 4 जून, 2026: निर्माण लाइसेंस जारी हुआ और पहला संरचनात्मक कंक्रीट डाला गया।
55 मेगावाट क्षमता वाली पहली इकाई में 2029 के अंत तक पहली बार निरंतर परमाणु अभिक्रिया शुरू होने की योजना है। इस चरण को क्रिटिकल होना कहा जाता है। इसके बाद और परीक्षण तथा कमीशनिंग के बाद बिजली उत्पादन शुरू होगा। चारों इकाइयों को चालू करने की संशोधित समय-सारणी घोषित नहीं की गई है।
निर्माण के दो समारोह क्यों हुए
जून का समारोह काम शुरू होने के दो महीने से अधिक समय पहले हुए एक आयोजन के बाद हुआ। निर्माण स्थल पर पहले ही बड़े पैमाने पर खुदाई और शुरुआती कंक्रीट का काम हो चुका था। जून के आयोजन में रिएक्टर भवन की नींव की स्लैब का औपचारिक निर्माण शुरू हुआ।
कर्मचारियों ने 13 मीटर गहरे गड्ढे के लिए करीब 15 लाख घन मीटर मिट्टी खोदी। मार्च में नींव की शुरुआती तैयारी के लिए करीब 900 घन मीटर कंक्रीट इस्तेमाल किया गया। संरचनात्मक नींव का कंक्रीट डालने से पहले सतह को समतल किया गया और जलरोधी बनाया गया।
उज़ाटॉम की आधिकारिक शुरुआत की घोषणा के मुताबिक, जून में शुरुआती तौर पर 133 घन मीटर कंक्रीट डाला गया और कंक्रीट की कुल मात्रा 10,000 घन मीटर से अधिक होगी। रोसाटॉम ने कुल मात्रा 10,000 घन मीटर बताई है; निर्माण संबंधी जानकारी में यह मात्रा नींव के काम से जुड़ी है।
उज़ाटॉम और रोसाटॉम के मुताबिक, पहला संरचनात्मक कंक्रीट डाले जाने से IAEA मानकों के तहत इस सुविधा को निर्माणाधीन परमाणु संयंत्र का औपचारिक दर्जा मिलता है। इससे पहले हुए काम में इस पड़ाव के लिए जमीन और नींव का आधार तैयार किया गया था।
सुरक्षा लाइसेंस में क्या शामिल है
उज्बेकिस्तान की औद्योगिक, विकिरण और परमाणु सुरक्षा समिति ने 4 जून को परमाणु ऊर्जा संयंत्र निर्माण के लिए सरकारी निदेशालय को निर्माण लाइसेंस जारी किया। यह लाइसेंस RITM-200N रिएक्टर से लैस बिजली इकाई से संबंधित है।
समिति ने डिजाइन दस्तावेजों, तकनीकी फैसलों और सुरक्षा औचित्य की व्यापक समीक्षा के बाद लाइसेंस मंजूर किया। सुरक्षा औचित्य में बताया जाता है कि प्रस्तावित डिजाइन जोखिमों से कैसे निपटता है और परमाणु निर्माण तथा संचालन के नियमों का पालन कैसे करता है।
उज्बेकिस्तान के विकिरण और परमाणु सुरक्षा वैज्ञानिक एवं तकनीकी केंद्र ने राष्ट्रीय कानूनों और IAEA की सिफारिशों के तहत समीक्षा की। इसमें रूस के विशेषज्ञों समेत विदेशी विशेषज्ञों ने भाग लिया। 23 मार्च को जारी स्थल की अनुमति इससे पहले का नियामकीय कदम था।
निर्माण के दौरान समिति राज्य की निगरानी जारी रखेगी, ताकि लाइसेंस और परमाणु तथा विकिरण सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के पालन की जांच हो सके। उज्बेकिस्तान के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के विकास के साथ नियमन, सुरक्षा और कार्यबल की क्षमता मजबूत करने के लिए IAEA ने तकनीकी सहयोग की पेशकश भी की है।
यह कितना बिजली दे सकता है?
रोसाटॉम को उम्मीद है कि पूरा संयंत्र हर साल 17.2 अरब किलोवाट घंटे, यानी 17.2 टेरावाट घंटे, बिजली पैदा करेगा। रोसाटॉम के परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रथम उप महानिदेशक और एटमस्ट्रॉयएक्सपोर्ट के अध्यक्ष आंद्रेई पेत्रोव का कहना है कि इससे उज्बेकिस्तान की बिजली मांग का 14% तक पूरा हो सकता है।
पेत्रोव ने शुरुआत के समारोह में अनुमानित योगदान के बारे में कहा:
चालू होने के बाद परमाणु ऊर्जा संयंत्र देश की बिजली मांग का 14% तक पूरा कर सकेगा। इससे औद्योगिक, तकनीकी और आर्थिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
खबरों के मुताबिक, उज्बेकिस्तान के अधिकारियों ने 15% से अधिक योगदान का अनुमान भी दिया है और सालाना उत्पादन करीब 16 अरब से 17 अरब किलोवाट घंटे बताया है। मांग में हिस्सेदारी का आंकड़ा इसलिए अहम है, क्योंकि यह संयंत्र के उत्पादन और रिएक्टर चालू होने के समय देश की बिजली खपत, दोनों पर निर्भर करेगा।
उम्मीद है कि गैस से होने वाले बिजली उत्पादन के कुछ हिस्से की जगह यह संयंत्र लेगा और हर साल 3.5 अरब घन मीटर से अधिक गैस की बचत करेगा। इससे संयंत्र का महत्व दो संसाधनों से जुड़ता है: इससे पैदा होने वाली बिजली और दूसरी जरूरतों के लिए उज्बेकिस्तान के पास बचने वाला ईंधन।
उज़ाटॉम के निदेशक अखमेदख़ादज़ायेव ने निर्माण की शुरुआत को व्यापक राष्ट्रीय विकास कार्यक्रम का हिस्सा बताया:
आज हम केवल परमाणु ऊर्जा संयंत्र की नींव में पहला कंक्रीट नहीं डाल रहे हैं। हम उज्बेकिस्तान गणराज्य के उज्ज्वल और टिकाऊ भविष्य की नींव रख रहे हैं।
परियोजना का खर्च कौन उठाएगा?
अखमेदख़ादज़ायेव ने 9.5 अरब डॉलर को परियोजना की मूल कीमत और अनुबंध की अधिकतम राशि बताया है। उज्बेकिस्तान लागत का 85% से 90% हिस्सा कर्ज से जुटाना चाहता है और न्यू डेवलपमेंट बैंक तथा अन्य संभावित वित्तपोषण साझेदारों के साथ बातचीत पर विचार कर रहा है।
बताई गई मूल कीमत पर यह कर्ज लक्ष्य करीब 8.1 अरब से 8.6 अरब डॉलर बैठता है। इससे स्पष्ट है कि संयंत्र बनाने के लिए वित्तपोषण कितना अहम होगा: शुरुआती निवेश का अधिकांश हिस्सा उज्बेकिस्तान के अपने बजट से सीधे खर्च होने के बजाय कर्जदाताओं से आएगा।
उज्बेकिस्तान स्थानीय स्तर पर 30% काम कराने का भी लक्ष्य रखता है। इसका मतलब है कि काम, आपूर्ति या सेवाओं का बड़ा हिस्सा देश के भीतर से आएगा। अखमेदख़ादज़ायेव ने कहा कि मूल अनुमान में प्रस्तावित स्थानीयकरण शामिल नहीं है। इससे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं और उज्बेक कंपनियों के बीच खर्च का बंटवारा प्रभावित हो सकता है।
पुतिन ने रूस की ओर से रियायती निर्यात ऋण देने और संयंत्र के पूरे संचालन काल में सहयोग का वादा किया है। प्रस्तावित सहयोग में रिएक्टर ईंधन की आपूर्ति, सर्विसिंग, रखरखाव और इस्तेमाल हो चुकी परमाणु सामग्री का प्रबंधन शामिल है। ऋण की राशि, ब्याज दर, चुकौती की समय-सारणी और अंतिम वित्तीय व्यवस्था का खुलासा नहीं किया गया है।
रोजगार, प्रशिक्षण और प्रस्तावित विज्ञान नगर
पुतिन ने कहा कि निर्माण स्थल पर करीब 15,000 लोगों के काम करने की उम्मीद है। उन्होंने स्थापना, सामग्री आपूर्ति, परिवहन और अन्य सेवाओं को ऐसे क्षेत्र बताया जिनमें उज्बेक ठेकेदारों को काम मिल सकता है।
निर्माण से मिलने वाले ये रोजगार घरेलू परमाणु कौशल विकसित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं। उज्बेकिस्तान को ऐसे लोगों की जरूरत होगी जो दशकों तक रिएक्टर चला सकें, उपकरणों का रखरखाव कर सकें, सुरक्षा की निगरानी करें और परमाणु सामग्री का प्रबंधन करें। कार्यबल को सहयोग देने की IAEA की प्रस्तावित पहल, नियमन में मदद के साथ, इसी जरूरत को पूरा करने में सहायक होगी।
नेशनल रिसर्च न्यूक्लियर यूनिवर्सिटी MEPhI की ताशकंद शाखा के छात्र सेविन्च यार्कुलोवा और दिमित्री एस्किन ने प्रतीकात्मक शुरुआत समारोह में भाग लिया। उनकी मौजूदगी ने इस समारोह को उन प्रशिक्षण संस्थानों से जोड़ा, जिनसे भविष्य के कार्यबल को विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पेत्रोव ने संयंत्र के आसपास विज्ञान नगर बसाने का रोसाटॉम का प्रस्ताव भी बताया। इससे एक नया समुदाय विकसित होगा, जहां परमाणु और संबंधित तकनीकों पर काम होगा। यह प्रस्ताव बिजली उत्पादन से आगे बढ़कर अनुसंधान, तकनीकी रोजगार और औद्योगिक विकास की महत्वाकांक्षा दिखाता है।
ग्रॉसी ने कहा कि अन्य देशों के निवेशकों की इस परियोजना में दिलचस्पी है और उन्होंने डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा डेटा केंद्रों से जुड़े अवसरों की ओर इशारा किया। इन उद्योगों के लिए बिजली की आपूर्ति जरूरी है। परमाणु बिजली उत्पादन के लिए पानी की भरोसेमंद व्यवस्था भी चाहिए। मध्य एशिया में यह व्यावहारिक चिंता है, क्योंकि वहां जल संसाधनों पर दबाव है।
विदेशों में रोसाटॉम की अन्य परियोजनाएं
रोसाटॉम के महानिदेशक अलेक्सी लिखाचेव ने उज्बेकिस्तान की इस उपलब्धि को कजाकिस्तान, हंगरी, वियतनाम और बांग्लादेश में चल रही परियोजनाओं के साथ जोड़ा है। ये परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में हैं: कहीं स्थल का सर्वेक्षण हो रहा है, कहीं सरकारी समझौते हुए हैं और कहीं रिएक्टर चालू करने की तैयारी चल रही है।
लिखाचेव ने कहा कि कजाकिस्तान में दो VVER-1200 रिएक्टरों के लिए सितंबर में इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए और स्थल सर्वेक्षण का काम पूरा होने के करीब है। इस तरह के अनुबंध को आम तौर पर EPC अनुबंध कहा जाता है। इसमें इंजीनियरिंग डिजाइन, उपकरण खरीद और निर्माण कार्य शामिल होते हैं।
कजाकिस्तान की बलखाश झील के पास उल्केन में प्रस्तावित संयंत्र की संयुक्त क्षमता 2,400 मेगावाट होगी। कजाकिस्तान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख अल्मासादम सतकालीयेव ने सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए करीब 2 अरब डॉलर समेत परियोजना की लागत करीब 16.4 अरब डॉलर आंकी है। कजाकिस्तान के अधिकारियों ने 2027 में निर्माण और 2034 की शुरुआत में पहला रिएक्टर चालू करने का लक्ष्य रखा है।
कजाकिस्तान की परियोजना की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता उज्बेकिस्तान की 2,110 मेगावाट क्षमता से करीब 14% अधिक है। वहीं, इसकी बताई गई लागत उज्बेकिस्तान की 9.5 अरब डॉलर की मूल कीमत से करीब 73% ज्यादा है। इन अनुमानों में अलग-अलग संयंत्र योजनाएं और खर्च की मदें शामिल हैं। कजाकिस्तान ने सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए अलग से राशि रखी है।
हंगरी में लिखाचेव ने कहा कि पाक्स परमाणु परियोजना में भी पहला कंक्रीट डाला जा चुका है और काम तय समय-सारणी के मुताबिक चल रहा है। रूस और वियतनाम ने निन्ह थुआन परमाणु संयंत्र स्थल पर दो VVER-1200 रिएक्टर लगाने के लिए अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
बांग्लादेश की रूपपुर परियोजना इससे अधिक आगे बढ़ चुकी है। 9 अक्टूबर की जानकारी में लिखाचेव ने कहा कि रिएक्टर कोर में परमाणु ईंधन डाले जाने के बाद पहली इकाई से शुरुआती बिजली उत्पादन नवंबर के अंतिम तीसरे हिस्से में शुरू करने की योजना थी। इस जानकारी में साल का उल्लेख नहीं था। कोर रिएक्टर का वह हिस्सा है, जहां नियंत्रित परमाणु अभिक्रियाओं से ईंधन गर्मी पैदा करता है।
उज्बेकिस्तान का तात्कालिक काम अपना पहला छोटा रिएक्टर बनाना है। बिजली में पूरा योगदान पाने के लिए बड़े रिएक्टरों का निर्माण, सहमत वित्तपोषण, नियामकीय निगरानी जारी रहना और संयंत्र चलाने में सक्षम प्रशिक्षित कार्यबल जरूरी होगा।
मुख्य बातें
- उज्बेकिस्तान ने 4 जून, 2026 को जिजाख क्षेत्र के फरिश स्थल पर पहला संरचनात्मक कंक्रीट डाला।
- मौजूदा योजना में 55 मेगावाट क्षमता वाले दो रिएक्टरों के साथ दो VVER-1000 इकाइयां शामिल हैं। कुल क्षमता 2,110 मेगावाट होगी।
- पहले छोटे रिएक्टर को निर्माण लाइसेंस मिल चुका है। उसमें 2029 के अंत तक पहली बार निरंतर परमाणु अभिक्रिया शुरू करने की योजना है।
- रोसाटॉम ने सालाना 17.2 अरब किलोवाट घंटे बिजली उत्पादन और देश की बिजली मांग में 14% तक योगदान का अनुमान जताया है।
- परियोजना की बताई गई मूल कीमत 9.5 अरब डॉलर है। उज्बेकिस्तान लागत का 85% से 90% हिस्सा कर्ज से जुटाना चाहता है।
- रूस ने रियायती वित्तपोषण और ईंधन, रखरखाव तथा इस्तेमाल हो चुकी परमाणु सामग्री के प्रबंधन में सहयोग का वादा किया है, लेकिन ऋण की शर्तों का खुलासा नहीं हुआ है।
- उज्बेकिस्तान की सुरक्षा समिति निर्माण की निगरानी करेगी। IAEA ने नियमन, सुरक्षा और कार्यबल विकास में मदद की पेशकश की है।






