142 ओवर तक टिककर अफ़ग़ानिस्तान ने बांग्लादेश को जीत से रोका
शेख ज़ायद क्रिकेट स्टेडियम, अबू धाबी में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट बचाने के लिए सदीक़ुल्लाह अटल ने 514 मिनट बल्लेबाज़ी की और 332 गेंदों का सामना करते हुए 111 रन बनाए। जीत के लिए मिले 479 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए अफ़ग़ानिस्तान ने आठ विकेट पर 346 रन बनाए। क़ैस अहमद 49 रन बनाकर नाबाद रहे; उन्होंने आखिरी ओवर में दो छक्के लगाए।
विषय-सूची
- 142 ओवर तक टिककर अफ़ग़ानिस्तान ने बांग्लादेश को जीत से रोका
- बांग्लादेश ने 479 रन का लक्ष्य कैसे बनाया
- अटल ने मुश्किल शुरुआत को ऐतिहासिक शतक में बदला
- चोट और धैर्य भरी साझेदारियों ने पारी को थामे रखा
- आखिरी सत्र में छूटे मौकों ने बदला मैच का रुख
- क़ैस और अहमदज़ई ने बांग्लादेश का बचा समय निकाल दिया
- लिटन का रिकॉर्ड प्रदर्शन जीत के बिना खत्म हुआ
- शांतो ने अमल पर, पाइबस ने जुझारूपन पर दिया ज़ोर
- ड्रॉ के बाद क्या अनिश्चित है
- मुख्य बातें
अंतिम दिन अफ़ग़ानिस्तान ने जब तीन विकेट पर 132 रन से आगे खेलना शुरू किया, तब बांग्लादेश को सात विकेट चाहिए थे। उसने 92 ओवर में पांच विकेट लिए, लेकिन तनावपूर्ण आखिरी सत्र में कई मौके मिलने के बावजूद बाकी दो विकेट नहीं ले सका। अफ़ग़ानिस्तान ने कुल 142 ओवर तक बल्लेबाज़ी की, यानी यह संख्या केवल आखिरी दिन के ओवरों की नहीं, बल्कि उसकी पूरी दूसरी पारी की है।
अपना केवल तीसरा टेस्ट खेल रहे अटल चौथी पारी में टेस्ट शतक लगाने वाले पहले अफ़ग़ान बल्लेबाज़ बने। सात विकेट पर 281 रन के स्कोर पर उनके आउट होने के बाद बांग्लादेश के पास मैच खत्म करने के लिए करीब 23 ओवर थे। लेकिन यामीन अहमदज़ई ने 85 गेंदों पर 19 रन बनाकर मोर्चा संभाला, क़ैस 80 गेंदों तक टिके रहे और ज़िया-उर-रहमान अकबर ने सामना की गई आखिरी 12 गेंदों पर कोई रन नहीं बनाया।
नतीजा ड्रॉ रहा, सफल रन-चेज़ नहीं। अफ़ग़ानिस्तान लक्ष्य से 133 रन पीछे रह गया, लेकिन खेल खत्म होने से पहले बांग्लादेश उसे ऑल आउट नहीं कर सका। टेस्ट क्रिकेट में निर्धारित समय तक टिके रहना हार से बचाने के लिए काफी हो सकता है, भले ही जीत का लक्ष्य बहुत दूर हो।
बांग्लादेश ने 479 रन का लक्ष्य कैसे बनाया
पहली पारी में 346 रन बनाकर बांग्लादेश ने मैच पर पकड़ बनाई। तंज़ीद हसन ने 83, शादमान इस्लाम ने 67 और लिटन दास ने 53 रन बनाए। रहमत शाह के 105 और करीम जनत के 62 रन के बावजूद अफ़ग़ानिस्तान की टीम 240 रन पर सिमट गई और बांग्लादेश को 106 रन की बढ़त मिली।
इस पारी में हसन महमूद ने 55 रन देकर पांच विकेट लिए। उनकी उपलब्धि में बांग्लादेश के लिए किसी तेज़ गेंदबाज़ की पहली टेस्ट हैट्रिक भी शामिल बताई गई। इस प्रदर्शन ने अफ़ग़ानिस्तान की आखिरी पारी शुरू होने से काफी पहले ही उसे दबाव में ला दिया था।
इसके बाद बांग्लादेश ने सात विकेट पर 372 रन बनाकर पारी घोषित कर दी, ताकि अफ़ग़ानिस्तान को ऑल आउट करने के लिए गेंदबाज़ी का समय मिले। लिटन ने 102, कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने 82 और मुशफिकुर रहीम ने 81 रन बनाए। दूसरी पारी के इन रनों को 106 रन की बढ़त में जोड़ने पर कुल बढ़त 478 रन की हुई, इसलिए अफ़ग़ानिस्तान को जीत के लिए 479 रन चाहिए थे।
पारी घोषित करने के बाद बांग्लादेश के पास दस विकेट लेने के लिए करीब साढ़े चार सत्र थे। अफ़ग़ानिस्तान ने शुरुआती सात ओवरों में दो विकेट गंवा दिए, लेकिन रहमत के 124 गेंदों पर 51 रन ने पारी को संभाला। चौथे दिन का खेल खत्म होने तक अटल 35 रन पर नाबाद थे और अफ़ग़ानिस्तान ने तीन विकेट पर 132 रन बना लिए थे।
अटल ने मुश्किल शुरुआत को ऐतिहासिक शतक में बदला
इस मैच से पहले अटल ने अपने शुरुआती दो टेस्ट में कुल 62 रन बनाए थे। लिहाज़ा अबू धाबी में उनके 111 रन उनके पिछले टेस्ट कुल योग से 49 रन अधिक थे। कुल रन से भी अहम वह समय था जो उन्होंने मैदान पर बिताया और बांग्लादेश को आखिरी सत्र तक गेंदबाज़ी करने पर मजबूर किया।
उनका अर्धशतक 166 गेंदों में पूरा हुआ। 277वीं गेंद पर उन्होंने शतक पूरा किया। ज़्यादातर रिपोर्टों के मुताबिक, 97वें ओवर में हसन महमूद की गेंद को पुल कर उन्होंने चौका लगाया। एक रिपोर्ट में गेंदबाज़ मेहदी हसन मिराज़ का नाम है, लेकिन शतक, गेंदों की संख्या और उसकी अहमियत के बारे में रिपोर्टें एक जैसी हैं।
इस पारी में नौ चौके और तीन छक्के शामिल थे। इन बाउंड्री शॉट्स से उनके 111 रनों में से 54 रन आए, जिससे पता चलता है कि लंबी रक्षात्मक पारी में भी उन्होंने चुनिंदा मौकों पर हमला किया। तैजुल इस्लाम को छक्के लगाने के बावजूद वह बाकी समय गैरज़रूरी जोखिम लेने से बचते रहे।
अटल को कुछ जीवनदान भी मिले। एक रक्षात्मक शॉट लगभग गेंद को स्टंप्स पर ले गया था और बल्लेबाज़ के 70 रन पर रहने के दौरान लिटन स्टंपिंग का मौका चूक गए। स्टंपिंग तब होती है जब बल्लेबाज़ क्रीज़ से बाहर हो और रन लेने की कोशिश न कर रहा हो, तब विकेटकीपर गेंद से विकेट गिरा दे। इस मामले में गेंद को साफ़ तौर पर पकड़ न पाने से अफ़ग़ानिस्तान का अहम संघर्ष जारी रहा।
अफ़ग़ानिस्तान के मुख्य कोच रिचर्ड पाइबस ने कहा कि अटल ने मैच से पहले अपनी फॉर्म वापस पाने के लिए मेहनत की थी। उन्होंने युवा बल्लेबाज़ की तैयारी की सराहना की।
सारा श्रेय सदीक़ को जाता है, जिन्होंने वाकई अपनी स्थिति बदली। यह उनकी शानदार पारी थी। दरअसल, वह कुछ समय से लय में नहीं थे, इसलिए उन्होंने इस पारी के लिए बहुत मेहनत की।
चोट और धैर्य भरी साझेदारियों ने पारी को थामे रखा
अफ़ग़ानिस्तान की पारी में शुरुआती व्यवधान तब आया जब हसन का थ्रो हश्मतुल्लाह शाहिदी के दाएं घुटने पर लगा। शाहिदी चोट के कारण रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर गए। इससे वह बाद में लौट सके और उनके जाने को विकेट नहीं गिना गया।
इसके बाद अटल और इकराम अलीखिल ने 66 रन की साझेदारी की, जिसमें सुबह का बड़ा हिस्सा बीता। लंच से कुछ समय पहले इबादत हुसैन ने शॉर्ट गेंद पर अलीखिल को आउट किया। गेंद उनके दस्ताने से लगकर लेग साइड में गई और लिटन ने दाईं ओर डाइव लगाकर कैच पूरा किया।
अलीखिल के व्यक्तिगत स्कोर को लेकर रिपोर्टों में अंतर है: कहीं 33 तो कहीं 36 रन बताए गए हैं। साझेदारी के कुल रन और उनके आउट होने का तरीका एक जैसे बताए गए हैं। सुबह के सत्र में बांग्लादेश केवल एक विकेट ले सका और लंच तक अफ़ग़ानिस्तान ने चार विकेट पर 203 रन बना लिए थे।
इसमत आलम ने रन तो सिर्फ चार बनाए, लेकिन समय काफी खर्च कराया: उन्होंने 60 गेंदों का सामना किया। रिपोर्टों के मुताबिक, उनका पहला रन या तो 44वीं या 45वीं गेंद पर आया। उनके टिके रहने से अटल को लंच के बाद का समय निकालने में मदद मिली, जब बांग्लादेश ने सफलता की तलाश में दूसरी नई गेंद ली।
अटल का शतक पूरा होने के कुछ समय बाद मेहदी ने आलम को आउट किया। गेंद का किनारा लिटन के पैड से लगकर स्लिप में शांतो के पास गया। शाहिदी लौटे और उन्होंने आक्रामक बल्लेबाज़ी की। तैजुल की गेंदों पर एक छक्का और चौका लगाने के बाद एक और बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में वह 69 गेंदों पर 36 रन बनाकर आउट हो गए। चाय तक अफ़ग़ानिस्तान का स्कोर करीब छह विकेट पर 265 रन था और अटल 105 रन पर नाबाद थे।
आखिरी सत्र में छूटे मौकों ने बदला मैच का रुख
तैजुल ने 118.4 ओवर में अटल को आउट किया। यह 119वें ओवर की चौथी गेंद थी। गेंद का किनारा बल्लेबाज़ के पैड से लगकर शॉर्ट लेग पर खड़े तंज़ीद के पास गया। शॉर्ट लेग बल्लेबाज़ के करीब कैच लेने की पोज़िशन होती है। अटल ने फैसले को रिव्यू किया, लेकिन बल्ले और गेंद के संपर्क का पता लगाने वाली तकनीक अल्ट्राएज ने किनारे की पुष्टि कर दी।
अफ़ग़ानिस्तान के सात विकेट पर 281 रन होने पर बांग्लादेश को तीन और विकेट चाहिए थे। जीत का मौका वास्तविक था, लेकिन उसके बाद एक के बाद एक मिले जीवनदानों ने उसे जीत में बदलने नहीं दिया।
- 118.4 ओवर: रिव्यू में गेंद का किनारा लगने की पुष्टि के बाद अटल 111 रन बनाकर कैच आउट हुए।
- 120.5 ओवर: अहमदज़ई का अंदरूनी किनारा स्टंप्स से टकराया, लेकिन बेल्स नहीं गिरीं।
- 121.1 और 121.2 ओवर: बांग्लादेश को लगातार दो रन आउट के मौके मिले। पहले क़ैस बच निकले और फिर तीसरे अंपायर के रिव्यू के बाद अहमदज़ई भी सुरक्षित रहे।
- 122.4 ओवर: स्टंपिंग की कोशिश से बचने के लिए क़ैस समय रहते क्रीज़ में लौट आए।
- 126.3 ओवर: क़ैस का एक करीबी कैच सिली पॉइंट पर छूट गया।
- 130.5 ओवर: क़ैस डीप मिडविकेट पर एक और छूटे कैच से बच गए।
- 136.6 ओवर: मेहदी ने अहमदज़ई को आउट किया। अब आखिरी दो विकेट लेने के लिए पांच ओवर बाकी थे।
डीप मिडविकेट पर कैच छूटने के समय क़ैस 29 रन पर थे। ज़्यादातर रिपोर्टों में फील्डर हसन का नाम है, जबकि एक रिपोर्ट तंज़ीद का नाम बताती है। जो भी फील्डर थे, क़ैस ने इसके बाद 20 रन और जोड़े और मैच खत्म होने तक क्रीज़ पर डटे रहे।
अहमदज़ई को इससे पहले मिला जीवनदान फील्डिंग की गलती से अलग था। गेंद स्टंप्स से टकराई थी, लेकिन बेल्स अपनी जगह रहीं। इसलिए विकेट टूटा नहीं था और वह बोल्ड आउट नहीं थे।
क़ैस और अहमदज़ई ने बांग्लादेश का बचा समय निकाल दिया
क़ैस और अहमदज़ई ने आठवें विकेट के लिए 110 गेंदों में 45 रन जोड़े। यह 18 ओवर और दो गेंदों के बराबर था। अटल को आउट करने के बाद बांग्लादेश के पास जो समय बचा था, उसका बड़ा हिस्सा इस साझेदारी में निकल गया।
अहमदज़ई के 85 गेंदों पर बनाए 19 रन को उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया गया। उनका मुख्य योगदान विकेट बचाए रखना था, जबकि क़ैस ने रक्षात्मक बल्लेबाज़ी के साथ आक्रामक शॉट भी खेले। आखिरकार मेहदी की गेंद पर शॉर्ट लेग में डाइव लगाकर कैच लेते हुए मोमिनुल हक ने साझेदारी तोड़ी। तब अफ़ग़ानिस्तान का स्कोर आठ विकेट पर 326 रन था।
पांच ओवर बाकी थे और बांग्लादेश को अब भी दो विकेट चाहिए थे। ज़िया का 12 गेंदों पर नाबाद शून्य यह दिखाता है कि मैच बचाने की कोशिश में सिर्फ स्कोर से पारी का आकलन नहीं किया जा सकता। उनकी हर बचाई हुई गेंद से अफ़ग़ानिस्तान को आउट करने के लिए उपलब्ध समय कम होता गया।
पारी के आखिरी दौर में क़ैस को हैमस्ट्रिंग की समस्या के लिए उपचार मिला। एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, यह ब्रेक 139.3 ओवर पर हुआ और चार मिनट तक चला, जिससे शांतो नाराज़ हुए। उपचार की बात रिपोर्टों में एक जैसी है, लेकिन उनसे यह साबित नहीं होता कि क़ैस ने तकलीफ़ का बहाना किया था।
आखिरी ओवर में क़ैस ने तैजुल की दूसरी गेंद को लॉन्ग ऑफ़ के ऊपर से छक्के के लिए भेजा, अगली तीन गेंदों का बचाव किया और आखिरी गेंद को मिडविकेट के ऊपर से एक और छक्के के लिए उड़ा दिया। वह 80 गेंदों पर 49 रन बनाकर नाबाद रहे, यानी अपने पहले टेस्ट अर्धशतक से एक रन दूर। आखिरी शॉट ने पारी को यादगार अंदाज़ में खत्म किया, जबकि बाकी गेंदों तक टिके रहने से नतीजा सुरक्षित हुआ।
लिटन का रिकॉर्ड प्रदर्शन जीत के बिना खत्म हुआ
लिटन को प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया। उन्होंने 53 और 102 रन बनाए और विकेट के पीछे नौ खिलाड़ियों को आउट करने में हिस्सा लिया। अलीखिल को आउट करने के लिए उनके डाइव लगाकर पकड़े गए कैच के साथ यह ऐसा संयोजन बना जो पहले किसी विकेटकीपर ने टेस्ट में हासिल नहीं किया था: एक शतक, एक अर्धशतक और नौ विकेट के पीछे के आउट।
यह उपलब्धि इन तीनों के संयोजन से जुड़ी है; नौ विकेट के पीछे के आउट अपने आप में विकेटकीपिंग का रिकॉर्ड नहीं हैं। दक्षिण अफ़्रीका के डेनिस लिंडसे ने 1966 में जोहानिसबर्ग में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 69 और 182 रन बनाए थे और विकेट के पीछे आठ खिलाड़ियों को आउट करने में हिस्सा लिया था।
दोनों पारियों में लिटन के 155 रन बांग्लादेश की मज़बूत स्थिति के लिए अहम थे। हालांकि अटल की स्टंपिंग का मौका चूकना उन महंगे मौकों में से एक साबित हुआ, जो सीमित अवसरों वाले इस मैच में हाथ से निकले।
शांतो ने विकेटकीपर की बल्लेबाज़ी और स्टंप्स के पीछे उनके काम की तारीफ की, खासकर चुनौतीपूर्ण मौसम में।
इस मौसम में उन्होंने जिस तरह विकेटकीपिंग की और दोनों पारियां खेलीं, वह शानदार था। हमारी टीम के लिए यह अच्छी बात है कि कोई खिलाड़ी दो-तीन कम स्कोर के बाद वापसी कर सका।
शांतो ने अमल पर, पाइबस ने जुझारूपन पर दिया ज़ोर
अफ़ग़ानिस्तान की दूसरी पारी में इबादत ने 50 रन देकर तीन और मेहदी ने 73 रन देकर तीन विकेट लिए। शांतो ने कहा कि बल्लेबाज़ी के लिए अच्छी बनी रही पिच पर गेंदबाज़ों ने लगातार मेहनत की और वे तारीफ के हकदार हैं, हालांकि स्पिनरों को कुछ मदद मिली।
बांग्लादेश के कप्तान ने कहा कि जीत इसलिए हाथ से निकली क्योंकि उनकी टीम मौके भुना नहीं पाई, न कि इसलिए कि उसने मेहनत में कमी की।
मुझे लगता है कि हमने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया, लेकिन मौकों का फायदा नहीं उठाया। इस तरह की परिस्थितियों में शायद इन्हीं बातों से फर्क पड़ा। आज हमें दस विकेट लेने चाहिए थे। छोटी-छोटी गलतियों के कारण आखिर में मैच ड्रॉ रहा।
वहीं पाइबस ने कहा कि टीम ने डेढ़ दिन तक बल्लेबाज़ी करने का दबाव संभाला। उन्होंने यह भी माना कि आखिरी ओवर में क़ैस ने कोच की सलाह से ज्यादा जोखिम भरा तरीका चुना था।
क़ैस ने मेरी सलाह पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। मैंने उनसे कहा था कि बहुत मज़बूती से और बड़े हौसले के साथ बचाव करें।
अफ़ग़ानिस्तान के बच निकलने की कहानी में यही अंतर दिखा। अटल और अहमदज़ई ने संयम बरतते हुए गेंदें निकालीं, जबकि क़ैस रक्षा, जोखिम और किस्मत के मेल से टिके रहे। बांग्लादेश ने जीत का खतरा पैदा करने के लिए पर्याप्त मौके बनाए, लेकिन वे मौके उन दस विकेटों में नहीं बदले जिनकी उसे ज़रूरत थी।
ड्रॉ के बाद क्या अनिश्चित है
13 अक्टूबर, 2026 की तारीख़ वाली रिपोर्टों में मैच मंगलवार को खत्म हुआ बताया गया है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट सोमवार कहती है। अफ़ग़ानिस्तान के कप्तान को लेकर भी विवरण अलग-अलग हैं: कुछ रिपोर्टें शाहिदी का नाम देती हैं और कुछ कहती हैं कि रहमत ने पहली बार टीम की कप्तानी की। इन अंतरों से सर्वसम्मति से रिपोर्ट किए गए नतीजे या अटल के अहम योगदान पर फर्क नहीं पड़ता।
तैजुल के गेंदबाज़ी कार्यभार के बारे में भी अलग-अलग जानकारी है: एक रिपोर्ट में इस पारी के लिए 48 ओवर दिए गए हैं, जबकि दूसरी कहती है कि अटल का विकेट लेने से पहले वह 58.4 ओवर कर चुके थे। दूसरी पारी के एक ही स्पेल के लिए ये दोनों आंकड़े सही नहीं हो सकते। अहमदज़ई नाबाद रहे या नहीं, इस पर भी रिपोर्टों में अंतर है; हालांकि मैच के आखिरी क्रम के विस्तृत विवरण में उनके आठ विकेट पर 326 रन के स्कोर पर आउट होने और उसके बाद ज़िया के क़ैस के साथ आने की बात दर्ज है।
शांतो ने बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ के बाद वेस्टइंडीज़ सीरीज़ से पहले इस मैच को उपयोगी तैयारी बताया। उन मुकाबलों की तारीख़ें नहीं दी गई हैं। शांतो ने जो तात्कालिक सबक बताया, वह साफ़ था: बल्लेबाज़ी के लिए अच्छी बनी रहने वाली पिच पर थका हुआ गेंदबाज़ी आक्रमण तभी कामयाब हो सकता है जब फील्डर कम मिलने वाले मौकों को भुनाएं।
मुख्य बातें
- 479 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए अफ़ग़ानिस्तान ने कुल 142 ओवर, जिनमें आखिरी दिन के 92 ओवर शामिल हैं, खेलकर आठ विकेट पर 346 रन बनाए।
- अटल ने 514 मिनट में 332 गेंदों पर 111 रन बनाए। यह टेस्ट की चौथी पारी में अफ़ग़ानिस्तान का पहला शतक था।
- क़ैस ने 80 गेंदों पर नाबाद 49 रन बनाए और आखिरी ओवर में दो छक्के लगाए।
- क़ैस और अहमदज़ई की आठवें विकेट की साझेदारी 110 गेंदों तक चली और इसमें 45 रन बने।
- अफ़ग़ानिस्तान के सात विकेट पर 281 रन होने के बाद बांग्लादेश रन आउट और कैच के मौके चूक गया।
- 53 रन, 102 रन और विकेट के पीछे नौ आउट में योगदान के लिए लिटन प्लेयर ऑफ़ द मैच बने।
- इबादत ने तीन विकेट पर 50 और मेहदी ने तीन विकेट पर 73 रन दिए, लेकिन बांग्लादेश आखिरी दो विकेट नहीं ले सका।






